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                <title>Security Council - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>सुरक्षा परिष्द की अध्यक्षता भारत को मिलना, पाकिस्तान के लिए टेंशन?</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। जैसा कि आपको पता है कि भारत सुरक्षा परिष्द की अध्यक्षता की बागडोर कल से संभाल ली है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ट्वीट के माध्यम से कहा कि ‘भारत अन्य सदस्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा हमेशा संयम का स्वर, संवाद का पक्षधर और अंतरराष्ट्रीय कानून […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-to-get-the-chairmanship-of-security-council-tension-for-pakistan/article-25678"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/security-council.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
<strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong> जैसा कि आपको पता है कि भारत सुरक्षा परिष्द की अध्यक्षता की बागडोर कल से संभाल ली है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ट्वीट के माध्यम से कहा कि ‘भारत अन्य सदस्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा हमेशा संयम का स्वर, संवाद का पक्षधर और अंतरराष्ट्रीय कानून का हिमायती रहेगा। वहीं भारत की बागडोर से पाकिस्तान के लिए टेंशन शुरू हो गई है। यूएनएससी के पाँच स्थायी सदस्यों में से चीन हमेशा से उसके साथ रहा है। लेकिन अगस्त महीने में सुरक्षा परिषद की किसी भी बैठक में अध्यक्ष होने के नाते भारत की भी अहम भूमिका होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तानी अखबार डॉन ने लिखा है कि भारत के पास अध्यक्षता होने का मतलब है कि पाकिस्तान कश्मीर पर सुरक्षा परिषद में बैठक बुलाने में सक्षम नहीं होगा। भारत को यूएनएससी की अध्यक्षता मिलने पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया भी दी है। आपको बता दें कि भारत अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दो साल के लिए अस्थायी सदस्य है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाँच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस। स्थायी सदस्यों को वीटो पावर मिला हुआ है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रूस ने भारत को दी बधाई</h4>
<p style="text-align:justify;">भारत ने अगस्त माह के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाली। फ्रांस और रूस ने इस मौके पर भारत को बधाई दी है। भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनएल लेनिन ने कहा, ‘हर्ष की बात है कि भारत आज फ्रांस के स्थान पर यूएनएससी की अध्यक्षता ग्रहण कर रहा है। हम भारत के साथ समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और आतंकवाद का मुकाबला करने जैसे रणनीतिक मुद्दों पर काम करने तथा कई मौजूदा संकटों का सामना करने के लिए एक नियम-आधारित, बहुपक्षीय प्रणाली को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">भारत से यूएनएससी अध्यक्ष के तौर पर निष्पक्ष रूप से काम की उम्मीद : पाक</h4>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के विदेश विभाग ने उम्मीद जताई है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अध्यक्ष के तौर पर अपने महीने भर के कार्यकाल के दौरान निष्पक्ष रूप से काम करेगा। विदेश विभाग के प्रवक्ता जाहिद हफीज चौधरी ने शनिवार को अंग्रेजी दैनिक डॉन के एक सवाल का जवाब में कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि भारत सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता के संचालन को नियंत्रित करने वाले प्रासंगिक नियमों और मानदंडों का पालन करेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पूरे अगस्त महीने तक शक्तिशाली 15-राष्ट्रों की निकाय की करेगा भारत अध्यक्षता</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि वर्तमान में दो साल के कार्यकाल के लिए यूएनएससी का अस्थायी सदस्य भारत रविवार से पूरे अगस्त महीने तक शक्तिशाली 15-राष्ट्रों की निकाय की अध्यक्षता करेगा। उल्लेखनीय है कि यूएनएससी की अध्यक्षता सदस्य राज्यों के नामों के अंग्रेजी वणार्नुक्रम के अनुसार मासिक आधार पर होती है। एक जनवरी 2021 को यूएनएससी में प्रवेश करने वाले भारत को 31 दिसंबर, 2022 को समाप्त होने वाले अपने कार्यकाल के दौरान दो बार अध्यक्ष पद मिलेगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Aug 2021 11:02:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुरक्षा परिषद म्यांमार में बिगड़ती स्थिति को लेकर चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र (एजेंसी)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्यांमार में बिगड़ती स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए देश के सेना से अधिक संयम बरतने और बातचीत को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। संयुक्त राष्ट्र में वियतनाम के राजदूत डांग दीन क्वे ने गुरूवार को यहां जारी एक बयान में कहा, ‘सुरक्षा परिषद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/security-council-worried-about-worsening-situation-in-myanmar/article-22598"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/security-council.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र (एजेंसी)।</strong> संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने म्यांमार में बिगड़ती स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए देश के सेना से अधिक संयम बरतने और बातचीत को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। संयुक्त राष्ट्र में वियतनाम के राजदूत डांग दीन क्वे ने गुरूवार को यहां जारी एक बयान में कहा, ‘सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने म्यांमार में तेजी से खराब हो रहे हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा इस्तेमाल तथा महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों नागरिकों की मौत की कड़ी निंदा की।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने सेना से अत्यंत संयम बरतने के अपने आग्रह को दोहराया है। उन्होंने दोहराया कि मानव अधिकारों का पूरी तरह सम्मान करने तथा म्यांमार के लोगों की इच्छा, हितों के अनुसार बातचीत और सुलह करने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी पक्षों से हिंसा से परहेज करने का आग्रह किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सेना की सख़्ती</h4>
<p style="text-align:justify;">म्यांमार में सेना विरोध को सख़्ती से कुचल रही है। इस बीच म्यांमार में संयुक्त राष्ट्र के दूत का कहना है कि यहां ‘और खून बहने’ का खतरा है। इस बीच सीमांत इलाके में सेना और नस्लीय अल्पसंख्यक समूह के बीच संघर्ष तेज हो गया है। म्यांमार में आशांति की शुरूआत करीब दो महीने पहले हुई थी। तब सेना ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए तख़्तापलट कर दिया था। चुनाव में आंग सान सू ची की पार्टी एनएलडी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Apr 2021 10:25:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अर्मेनिया-अजरबैजान संघर्ष को लेकर होगी सुरक्षा परिषद की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी संघर्ष पर चर्चा करने के लिए सोमवार को बंद दरवाजों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक होगी। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी मिशन के प्रेस सचिव फेडोर स्ट्रीझिझोविस्की ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। स्ट्रीझिझोविस्की ने कहा, “ नागोर्नो-काराबख क्षेत्र […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/security-council-meeting-to-be-held-on-armenia-azerbaijan-conflict/article-19283"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/security-council.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी संघर्ष पर चर्चा करने के लिए सोमवार को बंद दरवाजों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक होगी। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी मिशन के प्रेस सचिव फेडोर स्ट्रीझिझोविस्की ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। स्ट्रीझिझोविस्की ने कहा, “ नागोर्नो-काराबख क्षेत्र पर चर्चा करने के लिए सोमवार को तीन बजे बंद दरवाजों के बीच सुरक्षा परिषद की एक बैठक होगी।” यूरोप में सुरक्षा एवं सहयोग संगठन मिंस्क समूह की ओर से इस बैठक की मांग की गयी थी। दरअसल, अर्मेनिया और अजरबैजान की सेना के बीच 27 सितंबर से ही नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में एक इलाके पर कब्जे को लेकर हिंसक संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में अब तक दोनों ओर से कई लोगों की मौत हो चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस की मध्यस्थता के बाद 10 अक्टूबर को दोनों ही देश युद्ध विराम लागू करने पर सहमत हो गए थे, लेकिन हिंसा दोबारा शुरू हो गयी है। गौरतलब है कि अर्मेनिया और अजरबैजान दोनों ही देश पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा थे। लेकिन सोवियत संघ के टूटने के बाद दोनों देश स्वतंत्र हो गए।अलग होने के बाद दोनों देशों के बीच नागोर्नो-काराबख इलाके को लेकर विवाद हो गया। दोनों देश इस पर अपना अधिकार जताते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इस 4400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अजरबैजान का घोषित किया जा चुका है, लेकिन यहां आर्मेनियाई मूल के लोगों की जनसंख्या अधिक है। इसके कारण दोनों देशों के बीच 1991 से ही संघर्ष चल रहा है। वर्ष 1994 में रूस की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच संघर्ष-विराम हो चुका था, लेकिन तभी से दोनों देशों के बीच छिटपुट लड़ाई चलती आ रही है।</p>
<p> </p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/international/security-council-meeting-to-be-held-on-armenia-azerbaijan-conflict/article-19283</link>
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                <pubDate>Sat, 17 Oct 2020 11:12:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करें अर्मेनिया और अजरबैजान : सुरक्षा परिषद</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी हिंसक संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों देशों से तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करने और बातचीत शुरू करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में नाइजर के राजदूत अबदोउ अबारी ने मंगलवार को एक वक्तव्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-implement-ceasefire-with-immediate-effect-security-council/article-18834"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/security-council1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी हिंसक संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों देशों से तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करने और बातचीत शुरू करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में नाइजर के राजदूत अबदोउ अबारी ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर यह जानकारी दी। इससे पहले नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शुरू हुए हिंसक संघर्ष पर चर्चा करने के लिए सुरक्षा परिषद की बंद दरवाजों के भीतर एक बैठक हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">वक्तव्य के मुताबिक सुरक्षा परिषद के सदस्याें ने नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में ‘लाइन ऑफ कंटेक्ट’ पर दोनों देशों की ओर से बड़े पैमाने पर की गयी सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के अर्मेनिया और अजरबैजान से नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करने और बिना किसी देरी के बातचीत शुरू करने की अपील का एक स्वर में समर्थन किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा परिषद ने इस हिंसक संघर्ष में लोगों के मारे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इसके अलावा सुरक्षा परिषद ने दोनों पक्षों से ओएससीई मिंस्क समूह के साथ सहयोग करने और जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है। दरअसल, अर्मेनिया और अजरबैजान की सेना के बीच रविवार से ही नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में एक इलाके पर कब्जे को लेकर हिंसक संघर्ष शुरू हो गया है। अर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अजरबैजान की सेना के साथ हुए संघर्ष में उसके 16 सैनिक मारे गए हैं जबकि 100 से अधिक घायल हुए हैं।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 30 Sep 2020 09:49:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अर्मेनिया और अजरबैजान पर सुरक्षा परिषद में होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। जर्मनी समेत कई अन्य यूरोपीय देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी हिंसक संघर्ष के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार यूरोपीय देशों ने सुरक्षा परिषद में मंगलवार को एक बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा करने का अनुरोध […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-will-be-discussed-in-the-security-council/article-18812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/when-will-india-get-permanent-membership-in-the-security-council1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> जर्मनी समेत कई अन्य यूरोपीय देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी हिंसक संघर्ष के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार यूरोपीय देशों ने सुरक्षा परिषद में मंगलवार को एक बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा करने का अनुरोध किया है। जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों की ओर से सुरक्षा परिषद को इस संबंध में आधिकारिक रूप से अनुरोध भेज दिया गया है। इससे पहले अर्मेनिया और अजरबैजान की सेना के बीच रविवार को नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में एक इलाके पर कब्जे को लेकर हिंसक संघर्ष शुरू हो गया। अर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अजरबैजान की सेना के साथ हुए संघर्ष में उसके 16 सैनिक मारे गए हैं जबकि 100 से अधिक घायल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशनयिन ने ट्वीट कर जानकारी दी कि अजरबैजान ने अर्तसख पर मिसाइल से हमला किया है जिससे रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा है। पशनयिन के मुताबिक अर्मेनिया ने जवाबी कारवाई करते हुए अजरबैजान के दो हेलीकॉप्टर, तीन यूएवी और दो टैंकों को मार गिराया है। इसके बाद अर्मेनियाई प्रधानमंत्री ने देश में मार्शल-लॉ लागू कर दिया है। अजरबैजान ने आंशिक रूप से देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया है। अजरबैजान ने अपने हवाई अड्डों को सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बंद कर दिया है। केवल तुर्की को इससे छूट दी गयी है। तुर्की ने खुले तौर पर अजरबैजान को समर्थन देने की घोषणा की है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Sep 2020 11:00:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का किया समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने कहा है कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का समर्थन करता है। पार्ले ने फ्रांस से खरीदे गये 36 रफाल लड़ाकू विमानों में से पहली खेप के पांच विमानों को वायु सेना में विधिवत तौर पर शामिल किये […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/france-supports-indias-claim-for-permanent-membership-in-the-security-council/article-18326"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/security-council.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने कहा है कि उनका देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का समर्थन करता है। पार्ले ने फ्रांस से खरीदे गये 36 रफाल लड़ाकू विमानों में से पहली खेप के पांच विमानों को वायु सेना में विधिवत तौर पर शामिल किये जाने के लिए गुरुवार को आयोजित समारोह में हिस्सा लेने के दौरान कहा, “ फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का समर्थन करता है।” पार्ले ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के प्रति फ्रांस के समर्थन और उसमें शामिल होने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, “ पनडुब्बियों समेत अन्य रक्षा उपकरणों के निर्माण के दृष्टिकोण से मेक इन इंडिया कार्यक्रम फ्रांस की रक्षा कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">फ्रांस की कई कंपनियां अब भारत में अपने कार्यालय बनाकर रक्षा उपकरणों के डिजाइन यहां तैयार कर रही हैं। मुझे आशा है कि उन कंपनियों को यहां पूरा सहयोग और समर्थन मिलेगा।” फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने कहा , “ आज का दिन हमारे देशों के लिए एक उपलब्धि है। हम मिलकर भारत- फ्रांस रक्षा संबंधों का एक नया अध्याय लिख रहे हैं। रफाल एक शक्तिशाली विमान है जो वायु सेना को नयी ताकत देगा। रफाल का उपयोग माली में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने में भी किया गया था।” उन्होंने आश्वासन दिया कि फ्रांस जल्द ही भारत को समझौते के तहत शेष 31 रफाल लड़ाकू विमान सौंपेगा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2020 10:35:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुरक्षा परिषद ने ईरान पर अधिक कड़े प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी मांग खारिज की</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को कहा कि वह ईरान के खिलाफ अधिक कड़े (स्नैपबैक) प्रतिबंध लगाने के अमेरिका के आह्वान पर आगे कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है। इंडोनेशिया में संयुक्त राष्ट्र के राजदूत डियान त्रियांसयाह जानी ने पश्चिम एशिया पर एक परिषद की बैठक के दौरान रूस और चीन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/security-council-rejects-us-demand-for-more-stringent-sanctions-on-iran/article-17845"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/when-will-india-get-permanent-membership-in-the-security-council.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को कहा कि वह ईरान के खिलाफ अधिक कड़े (स्नैपबैक) प्रतिबंध लगाने के अमेरिका के आह्वान पर आगे कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है। इंडोनेशिया में संयुक्त राष्ट्र के राजदूत डियान त्रियांसयाह जानी ने पश्चिम एशिया पर एक परिषद की बैठक के दौरान रूस और चीन के एक सवाल का जवाब देते हुए यह टिप्पणी की। इंडोनेशिया अगस्त में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। जानी ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत केली क्राफ्ट के प्रति नाराजगी व्यक्त की जिन्होंने उन पर ‘आतंकवादियों’ का समर्थन करने का आरोप लगाया है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2020 11:06:28 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुरक्षा परिषद् में भारत को स्थायी सदस्यता कब!</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता को लेकर भारत बरसों से प्रयासरत् रहा है। अमेरिका, रूस समेत दुनिया के तमाम देश स्थायी सदस्यता को लेकर भारत पक्षधर भी हैं मगर यह अभी मुमकिन नहीं हो पाया है। फिलहाल भारत 8वीं बार इसी परिषद् में अस्थायी सदस्य के लिए फिर चुन लिया गया जो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/when-will-india-get-permanent-membership-in-the-security-council/article-17009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/when-will-india-get-permanent-membership-in-the-security-council.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता को लेकर भारत बरसों से प्रयासरत् रहा है। अमेरिका, रूस समेत दुनिया के तमाम देश स्थायी सदस्यता को लेकर भारत पक्षधर भी हैं मगर यह अभी मुमकिन नहीं हो पाया है। फिलहाल भारत 8वीं बार इसी परिषद् में अस्थायी सदस्य के लिए फिर चुन लिया गया जो साल 2021- 2022 के </strong><strong>लिए है।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">पड़ताल बताती है कि इसके पहले सात बार अस्थायी सदस्य के रूप में सिलसिलेवार तरीके से 1950-51, 1967-68, और 1972-73 से लेकर 1977-78 समेत 1984-1985, 1991-1992 व 2011-2012 में भी सुरक्षा परिषद् में अस्थायी सदस्य रहा है। जहां तक सवाल स्थायी सदस्यता का है इस पर मामला खटाई में बना हुआ है। विदित हो कि आगामी नवम्बर में अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव होना है। जाहिर है रिपब्लिकन के डोनाल्ड ट्रम्प व अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति एक बार फिर मैदान में हैं। हाऊडी मोदी के चलते भारतीय अमेरिकियों के वोट के मामले में ट्रम्प पिछले साल कोशिश कर चुके हैं। इतना ही नहीं मुख्य विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी के राष्ट्रपति पद के सम्भावित उम्मीदवार बिडेन भी कुछ ऐसा इरादा जता रहे हैं जिससे कि भारत का रूख अपनी ओर आकर्षित करके सियासी फायदा उठाना चाहते हैं। वैसे भारतीय मूल के अमेरिकी रिपब्लिकन के बजाय डेमोक्रेट की ओर अधिक झुकाव रखते हैं। फिलहाल भारत में अमेरिकी राजदूत रह चुके रिचर्ड वर्मा के हवाले से यह पता चला है कि यदि बिडेन राष्ट्रपति बनते हैं तो संयुक्त राष्ट्र जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं को नया रूप देने में मदद करेंगे ताकि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिल सके। गौरतलब है कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस समेत चीन इसके पांच स्थायी सदस्य हैं ओर केवल चीन ही ऐसा देश है जो सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी सदस्य बनाने का विरोध करता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के मामले में भारत दुनिया भर से समर्थन रखता है सिवाय एक चीन के। ऐसे में परिवर्तन का समय अब आ चुका है। आखिर परिवर्तन की आवश्यकता क्यों है यह भी समझना ठीक रहेगा। असल में सुरक्षा परिषद की स्थापना 1945 की भू-राजनीतिक और द्वितीय विश्वयुद्ध से उपजी स्थिति को देखकर की गई थी। 75 वर्षों में पृष्ठभूमि अब अलग हो चुकी है। देखा जाए तो शीतयुद्ध की समाप्ति के साथ ही इसमें बड़े सुधार की गुंजाइश थी जो नहीं किया गया। 5 स्थायी सदस्यों में यूरोप का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा है जबकि आबादी के लिहाज से बामुश्किल वह 5 फीसद स्थान घेरता है। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका का कोई सदस्य इसमें स्थायी नहीं है जबकि संयुक्त राष्ट्र का 50 प्रतिशत कार्य इन्हीं से सम्बन्धित है। ढांचे में सुधार इसलिए भी होना चाहिए क्योंकि इसमें अमेरिकी वर्चस्व भी दिखता है। भारत की सदस्यता के मामले में दावेदारी बहुत मजबूत दिखाई देती है। जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा देश, हालांकि कोरोना के चलते इन दिनों अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी है बावजूद इसके प्रगतिशील अर्थव्यवस्था और जीडीपी की दृष्टि से भी प्रमुखता लिए हुए देश है। ऐसे में दावेदारी कहीं अधिक मजबूत है। इतना ही नहीं भारत को विश्व व्यापार संगठन, ब्रिक्स और जी-20 जैसे आर्थिक संगठनों में प्रभावशाली माना जाता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भारत की विदेश नीति तुलनात्मक प्रखर हुई है और विश्व शान्ति को बढ़ावा देने वाली है साथ ही संयुक्त राष्ट्र की सेना में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देश के नाते भी दावेदारी सर्वाधिक प्रबल है। हालांकि भारत के अलावा कई और देश की स्थायी सदस्यता के लिए नपे-तुले अंदाज में दावेदारी रखने में पीछे नहीं है। जी-4 समूह के चार सदस्य भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान जो एक-दूसरे के लिए स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं ये सभी इसके हकदार समझे जाते हैं। एल-69 समूह जिसमें भारत, एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई 42 विकासशील देशों के एक समूह की अगुवाई कर रहा है। इस समूह ने भी सुरक्षा परिषद् में सुधार की मांग की है। अफ्रीकी समूह में 54 देश हैं जो सुधारों की वकालत करते हैं। इनकी मांग यह है कि अफ्रीका के कम-से-कम दो राश्ट्रों को वीटो की शक्ति के साथ स्थायी सदस्यता दी जाये। उक्त से यह लगता है कि भारत को स्थायी सदस्यता न मिल पाने के पीछे मेहनत में कोई कमी नहीं है बल्कि चुनौतियां कहीं अधिक बढ़ी हैं। बावजूद इसके यदि भारत को इसमें शीघ्रता के साथ स्थायी सदस्यता मिलती है तो चीन जैसे देशों के वीटो के दुरूपयोग पर न केवल अंकुश लगेगा बल्कि व्याप्त असंतुलन को भी पाटा जा सकेगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">सवाल यह है कि भारत को स्थायी सदस्यता की आवश्यकता क्यों है और यह मिल क्यों नहीं रही है और इसके मार्ग में क्या बाधाएं हैं। माना जाता है कि जिस स्थायी सदस्यता को लेकर भारत इतना एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है वही सदस्यता 1950 के दौर में बड़ी आसानी से सुलभ थी। आवश्यकता की दृष्टि से देखें तो भारत का इसका सदस्य इसलिए होना चाहिए क्योंकि सुरक्षा परिषद प्रमुख निर्णय लेने वाली संस्था है। प्रतिबंध लगाने या अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के फैसले को लागू करने के लिए इस परिषद के समर्थन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में भारत की चीन और पाकिस्तान से निरंतर दुश्मनी के चलते इसका स्थायी सदस्य होना चाहिए। चीन द्वारा पाकिस्तान के आतंकवादियों पर बार-बार वीटो करना इस बात को पुख्ता करता है। साथ ही कुलभूषण जाधव का मामला भी इसका उदाहरण हो सकता है। स्थायी सीट मिलने से भारत को वैश्विक पटल पर अधिक मजबूती से अपनी बात कहने का ताकत मिलेगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">स्थायी सदस्यता से वीटो पावर मिलेगा जो चीन की काट होगी। इसके अलावा बाह्य सुरक्षा खतरों और भारत के खिलाफ सुनियोजित आतंकवाद जैसी गतिविधियों को रोकने में मदद भी मिलेगी। भारत को स्थायी सदस्यता न मिलने के पीछे सुरक्षा परिषद की बनावट और मूलत: चीन का रोड़ा समेत वैश्विक स्थितियां हैं। वैसे चीन न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) के मामले में भी भारत के लिए रूकावट बनता रहा है। गौरतलब है सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। अस्थायी सदस्य देशों को चुनने का उद्देश्य सुरक्षा परिषद में क्षेत्रीय संतुलन कायम करना होता है। जबकि स्थायी सदस्य शक्ति संतुलन के प्रतीत हैं और इनके पास वीटो की ताकत है। इसी ताकत के चलते चीन दशकों से भारत के खिलाफ वीटो का दुरूपयोग कर रहा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव प्रति चार वर्ष में होता रहता है जबकि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का मामला दशकों पुराना है। यदि अमेरिका जैसे देशों को यह चिंता है तो सुरक्षा परिषद में में बड़े सुधार को सामने लाकर भारत को उसमें जगह देना चाहिए। अभी हाल ही में रूसी विदेश मंत्री ने भी यह कहा है कि स्थायी सदस्यता के लिए भारत मजबूत नॉमिनी है। वैसे देखा जाय तो दुनिया के कई देश किसी भी महाद्वीप के हों भारत के साथ खड़े हैं मगर नतीजे वहीं के वहीं हैं। डोनाल्ड ट्रम्प कई मामलों में भारत के साथ सकारात्मक हैं और डेमोक्रेट के राष्ट्रपति के सम्भावित उम्मीदवार बिडेन भी स्थायी सदस्यता के मामले में भारत के चहेते दिखते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यह अच्छी बात है कि अमेरिका के दो मूल राजनीतिक दल से भारत का सम्बंध और संवाद बेहतर है मगर उक्त आकर्षण कहीं चुनावी न हो। ऐसे में भारत को कूटनीतिक तरीके से ही समाधान की ओर जाना चाहिए। राष्ट्रपति कोई भी बने रणनीतिक समाधान पर भारत की दृष्टि होनी चाहिए। जाहिर है अमेरिका में चुनाव उसका आन्तरिक मामला है। ध्यानतव्य हो कि 2016 में डोनाल्ड ट्रम्प चुनावी प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की अक्सर तारीफ करते थे और नतीजे उनके पक्ष में आये। कहीं ऐसा तो नहीं कि डेमोक्रेट के बिडेन सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्य के रूप में लाने का इरादा चुनावी फायदे में बदलने का हो। फिलहाल इरादा कुछ भी हो भारत को परिणाम से मतलब रखना चाहिए जो बाद में ही पता चलेगा पर सबके बावजूद यह सवाल उठता रहेगा कि आखिर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्यता कब मिलेगी।</h6>
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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2020 21:39:50 +0530</pubDate>
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