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                <title>enthusiasm - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>नप कैथल के चेयरमैनी का जिन्न फिर निकला बाहर&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[चेयरमैन बनाने की लेकर भाजपा, कांग्रेस व पार्षदों में सरगर्मियां तेज, बैठकों का दौर शुरू सच कहूँ/प्रदीप दलाल। कैथल। कैथल की नगर परिषद् की कुर्सी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल चुका है। पिछले लगभग 1 साल से कैथल शहर की छोटी सरकार न होने का खामियाजा विकास कार्य न होने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/increasing-enthusiasm-in-bjp-congress-and-councilors-for-making-chairman/article-3719"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/09_06_2015-cm_chair.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">चेयरमैन बनाने की लेकर भाजपा, कांग्रेस व पार्षदों में सरगर्मियां तेज, बैठकों का दौर शुरू</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/प्रदीप दलाल। </strong>कैथल। कैथल की नगर परिषद् की कुर्सी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल चुका है। पिछले लगभग 1 साल से कैथल शहर की छोटी सरकार न होने का खामियाजा विकास कार्य न होने के चलते लगातार भुगतना पड़ रहा है,वहीं प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद भी कांग्रेस समर्थित पार्षद कार्यकारी चेयरमैन होना भी भाजपा सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ हैं। ऐसा नहीं है कि भाजपा के मंत्रियों, विधायकों व पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर चेयरमैनी जल्द ही भाजपा के हवाले होने का दावा न किया हो, लेकिन सभी दावे हवाहवाई साबित हुए है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसको लेकर भाजपा समर्थित पार्षदों में भी बैचेनी बढ़ने लगी थी, जिसको लेकर कुछेक पार्षदों ने प्रशासन का दरवाजा कई बार खटखटाया, लेकिन चेयरमैनी चुनाव की तिथि के नाम पर प्रशासन द्वारा भी सिर्फ कोरे आश्वासन देकर पार्षदों को टरकाने के अलावा कुछ नहीं किया गया है। जिस पर कुछ पार्षदों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर अदालत द्वारा मामले में दखल देने पर अब एक बार फिर जिला प्रशासन द्वारा छोटी सरकार के चुनाव के लिए 29 मई का समय निर्धारित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसको लेकर लंबे समय से चल रही रस्साकस्सी तेज होती नजर आ रही है। शहर की सरकार भाजपा व कांग्रेस के बीच नाक की लड़ाई बन चुकी है। गत वर्ष अगस्त माह में भाजपा समर्थित शहर की सरकार को कांग्रेस विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला समर्थित पार्षदों ने गिरा दिया था। तब मुकाबला भाजपा वर्सिज सुरजेवाला हो गया था। चुनाव की तारीख आने के साथ ही पार्षदों की बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक अनार सौ बीमार</h3>
<p style="text-align:justify;">चेयरमैनी की चाह के कारण ही अब तक एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी भाजपा चेयरमैनी पर काबिज नहीं हो पाई है, जिसका प्रमुख कारण भाजपा समर्थित हर पार्षद चेयरमैनी कुर्सी का दावेदार होना है। आपसी रजामंदी न होने के कारण ही भाजपा की बैठकों व तमाम प्रयासों के बाद भी भाजपा चेयरमैनी पर सिर्फ तोल ठोंकने के अलावा कुछ खास नहीं कर पाई है। अब देखना यह होगा कि 29 मई को भाजपा चेयरमैनी पाने में कामयाब होती है या फिर चेयरमैनी का सपना देख रहे पार्षदों की उम्मीदों पर फिर पानी फिरता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इन 21 पार्षदों ने दिया अविश्वास प्रस्ताव</h3>
<p style="text-align:justify;">अगस्त माह में उपायुक्त के समक्ष निवर्तमान चेयरमैन यशपाल प्रजापति के खिलाफ उपायुक्त के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने वालों में वार्ड नंबर 1 से किरन, वार्ड नंबर 2 से विनोद कुमार, वार्ड नंबर 3 से महिंद्रों देवी, वार्ड 4 से निशा रानी, वार्ड 5 से संजय कुमार, वार्ड 6 से कुलदीप कुमार, वार्ड 8 से राकेश सरदाना, वार्ड 9 से बबीता मित्तल, वार्ड 10 से पूजा अग्रवाल, वार्ड 11 से हरजिंद्र सिंह, वार्ड 12 से शशी किरन, वार्ड 15 से सुनीता रानी, वार्ड 16 से सीमा कश्यप, वार्ड 17 से वेदप्रकाश, वार्ड 18 से रेखा सिंगला, वार्ड 21 से नरेश मित्तल, वार्ड 24 से महेंद्र थरेजा, वार्ड 25 से पवन थरेजा, वार्ड 26 से संतोष देवी, वार्ड 28 से मोहन लाल शर्मा, वार्ड 29 वीरेंद्र कुमार थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक मत से गिरी थी कैथल की छोटी सरकार</h3>
<p style="text-align:justify;">शायद भाजपा की नियती में ऐसा ही कुछ लिखा है, जहां हार हो वहां अंतर एक मत का ही रहता है। जहां पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार भी एक मत से गिर गई थी, वहीं अगस्त माह में भी ऐसा ही नजारा कैथल नगर परिषद चेयरमैनी को लेकर देखने को मिला जहां चेयरमैन यशपाल प्रजापति एक मत के अंतर से अपनी कुर्सी बचाने में नाकामयाब साबित रहे। चेयरमैन को अपनी कुर्सी बचाने रखने के लिए कुल 31 पार्षदों में से 11 पार्षदों की अपने समर्थन में जरूरत थी, परंतु उनके समर्थन में 10 ही नजर आए और बाकी बचे 21 ने चेयरमैन के खिलाफ अपना अविश्वास मत पारित किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अपने कार्यकाल में जनता की नि:स्वार्थ सेवा की: डॉ. थरेजा</h3>
<p style="text-align:justify;">नगर परिषद् के कार्यकारी चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने कहा कि नगर परिषद में हर अधिकारी, कर्मचारी व शहरवासी ने हमेशा शहर के विकास में उनका पूरा सहयोग व साथ दिया है, जिसके लिए सबका तह दिल से आभारी हूं। उन्होंने कहा कि जितना समय मुझे शहरवासियों की सेवा करने का मिला है, जिस पर मेरा खरा उतरा हूं। अब शहर को स्थाई चेयरमैन मिल जाऐगा तो निसंदेह शहर के विकास कार्यों में तेजी आऐगी।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 May 2018 08:21:06 +0530</pubDate>
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                <title>उप चुनावों में मतदाताओं में नहीं दिखा जोश</title>
                                    <description><![CDATA[लोक सभा हलके गुरदासपुर के लिए उप चुनावों में सिर्फ 56 फीसदी चुनाव होना काफी निराशाजनक है। आम तौर पर उप चुनावों को सताधारी पार्टी की एकतरफा जीत यकीनी माना जाता है लेकिन पिछले तर्जुबे यही कह रहे हैं कि राजनैतिक पार्टियों के साथ-साथ आम मतदाताओं में भारी उत्साह होता है। खासकर पंजाब जैसे राज्य में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/voters-do-not-see-enthusiasm-in-sub-election/article-3396"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/vote-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">लोक सभा हलके गुरदासपुर के लिए उप चुनावों में सिर्फ 56 फीसदी चुनाव होना काफी निराशाजनक है। आम तौर पर उप चुनावों को सताधारी पार्टी की एकतरफा जीत यकीनी माना जाता है लेकिन पिछले तर्जुबे यही कह रहे हैं कि राजनैतिक पार्टियों के साथ-साथ आम मतदाताओं में भारी उत्साह होता है। खासकर पंजाब जैसे राज्य में मतदाताआें की लम्बी लाईनें लगती रही है। कांग्रेस व अकाली भाजपा ने चाहे चुनाव प्रचार के लिए रैलियां व जनसभाएं जरूर की लेकिन पारंपरिक रंग कहीं भी नजर नहीं आया। मतदाताओं की निराशा को समूह राजनीति के प्रसंग मेंं जरूर समझा जा सकता है। दरअसल आम मतदाता राजनीति से निराश होने के कारण ही चुनावों में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। राज्य में सार्वजनिक मुद्दे ज्यों के त्यों हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">न तो राज्य सरकार व न ही विरोधी पार्टियां सार्वजनिक मुद्दों पर कोई स्पष्ट पहुंच बना पाई। अकाली भाजपा के लगातार दस वर्ष के शासन के बावजूद सीमावर्त्ती जिलों के लोग परेशानियों के दौर से गुजर रहे हैं। बुनियादी ढ़ाचे की तरफ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। अभी भी लोग दरिया पार करने के लिए आज भी मोटरसाईकिल नावों में ले जाने का मजबूर हैं। युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। किसानों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी की यह धारना बनी रहती है कि मतदाता मौके की सरकार चला रही पार्टी को देखेगा। अपनी जीत यकीनी मानकर भी चुनाव प्रचार की तरफ बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया जाता। वर्तमान सरकार भी कर्ज माफी जैसे बड़े ऐलान करने के असमंजस में पड़ी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कभी केन्द्र की तरफ हाथ किया जाता है तो कभी खाले खजाने की दुहाई दी जाती है। वायदे पूरे न होने के कारण आम जनता उदासीन होती जा रही है। इसी कारण ही मतदाता चुनावों को एक बोझ समझने लग जाते हैं। चाहे उप चुनाव के साथ केन्द्र या राज्य में कोई राजनैतिक बदलाव नहीं आना व न ही इससे भविष्य के किसी चुनावों की दिशा तय होनी है। फिर भी जनता की निराशा राजनैतिक में आई गिरावट को उजागर करती है। ताजा हालात यह हैं कि राजनीति में सरकार अदला-बदली महज नेताओं की अदला-बदली नहीं होनी चाहिए, ताकि पार्टियां अपने एजेंडे को लागू कर जनता में अपने आप को साबित करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Oct 2017 04:57:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>निकाय चुनावों में मिली सफलता से बढ़ा टीएमसी का हौसला</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए निकाय चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को अच्छी खासी कामयाबी मिली जिससे पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी सहित कार्यकर्ताओं को भी राहत मिली। साथ ही उनकी हौसला अफजाई भी हुई है। चुनाव से पहले टीएमसी में उहापोह की स्थिति थी। प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक भी यह मान रहे थे कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/success-in-the-elections-enhanced-tmcs-enthusiasm/article-813"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/tmc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए निकाय चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को अच्छी खासी कामयाबी मिली जिससे पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी सहित कार्यकर्ताओं को भी राहत मिली। साथ ही उनकी हौसला अफजाई भी हुई है। चुनाव से पहले टीएमसी में उहापोह की स्थिति थी। प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक भी यह मान रहे थे कि टीएमसी को झटका लग सकता है मगर तमाम अटकलों और आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच आखिरकार टीएमसी को आशातीत सफलता मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश की सात नगर निगम सीटों में से चार पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया है। बाकी की तीन सीटों पर भाजपा अलाएंस को सफलता मिली है। सबसे बड़ी बात कि राज्य के मैदानी इलाके में भी तृणमूल कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया है। दोमकल,रायगंज और पुजाली के अलावा पर्वतीय क्षेत्र मिरिक के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने काफी अंतर से जीत दर्ज की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सफलता पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि -यहां की जनता ने मां, माटी मानुष के प्रति अपनी आस्था दिखाई है। वास्तव में ये मां, माटी मानुष और आम जनता की जीत है। ममता बनर्जी ने तो ट्वीट करके इतना तक कह डाला कि-‘पर्वत मुस्कुरा रहे हैं’। बहरहाल इस जीत को लेकर ममता बनर्जी खासी उत्साहित हैं और इसके लिए वह यहां की जनता को धन्यवाद् देती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर तीन सीटों पर बीजेपी अलाएंस को मिली भारी जीत से एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में खुशी की लहर है, वहीं गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) भी बेहद उत्साहित है। दरअसल गोरखा जनमुक्ति मोर्चे के साथ भाजपा का अलायंस है। देखा जाए तो गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने दार्जिलिंग,कुर्सियांग और कलिम्पोंग निकायों में अपनी भारी जीत दर्ज करके यह जता दिया है कि इन क्षेत्रों में उनकी साख कायम है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों के मुताबिक गोरखा जनमुक्ति मोर्चे ने सात नगर निगम क्षेत्रों की 148 सीटों में से 69 सीटों पर कब्जा जमाया तथा तीन सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई। टीएमसी को 68 ,कांग्रेस व लेफ्ट को 4 एवं जन अधिकार पार्टी को को 2 सीटें मिलीं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुर्शिदाबाद जिले के दोमकल में तृणमूल कांग्रेस ने 21 में से 18 सीटों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस को दो और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को महज एक सीट मिला। उधर, रायगंज में 27 वार्डों में से टीएमसी को 14 वार्डों में जीत मिली है। वहीं, सीपीआईएम-कांग्रेस के खाते में 2 और बीजेपी के खाते मे एक वार्ड आया है। पुजाली में पार्टी को 16 में से 12 वॉर्ड और बीजेपी, सीपीआईएम को एक-एक वार्ड मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिरिक नगरपालिका में टीएमसी ने 9 में से 6 वार्डों को अपने नाम कर जीत हासिल की है। वहीं गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) को तीन वार्ड मिले हैं। आपको बता दें कि 14 मई को हुए मतदान में कुल 68 प्रतिशत मतदान हुआ था। सातों निकायों में से पुजाली में सबसे ज्यादा 79.6 प्रतिशत और दार्जिलिंग में सबसे कम 52 प्रतिशत मतदान हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस चुनाव परिणाम को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि -‘चुनाव के दौरान सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस ने जमकर धन और बल का प्रयोग किया। यह बात किसी से भी छिपी हुई नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के लोगों ने डरा धमकाकर वोट हासिल किये,जो बिलकुल गलत है।’ दिलीप घोष का कहना है कि -‘इस निकाय चुनाव में लोकतंत्र की नृशंस हत्या हुई है।’ हालांकि आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भारी शिकस्त देने की रणनीति बना रही बीजेपी को एक झटका जरूर लगा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीति के जानकार कहते हैं कि बीजेपी को अगर सफलता अर्जित करनी है तो जमीनी स्तर पर काम करना होगा। रणनीति में बदलाव लाकर जन आंदोलनों में तेजी लानी होगी। राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि बीजेपी के कार्यकर्ता कहीं-कहीं महज मोदी-लहर पर ही भरोसा करने लगे हैं जबकि जरूरत है ठोस और जमीनी आंदोलनों की। जनता के दिलों में आस्था और विश्वास स्थापित करने के किये अनवरत संघर्ष तो करना ही होगा।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 23:45:22 +0530</pubDate>
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