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                <title>Environmental - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Environmental RSS Feed</description>
                
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                <title>पर्यावरण संरक्षण से ही जीवन की सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले करीब तीन दशकों से ऐसा महसूस किया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण से जुड़ी हुई है। इस सन्दर्भ में ध्यान देने वाली बात है की करीब दस वैश्विक पर्यावरण संधियाँ और करीब सौ के आस-पास क्षेत्रीय और द्विपक्षीय वातार्एं एवं समझौते संपन्न किये गये हैं। मानवीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/protection-of-life-by-environmental-protection/article-30871"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/environmental-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पिछले करीब तीन दशकों से ऐसा महसूस किया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण से जुड़ी हुई है। इस सन्दर्भ में ध्यान देने वाली बात है की करीब दस वैश्विक पर्यावरण संधियाँ और करीब सौ के आस-पास क्षेत्रीय और द्विपक्षीय वातार्एं एवं समझौते संपन्न किये गये हैं। मानवीय क्रियाकलापों की वजह से पृथ्वी पर बहुत सारे प्राकृतिक संसाधनों का विनाश हुआ है। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, मरुस्थलीकरण, वायु, जल, जंगल, जमीन, ध्वनि, कृषि प्रदूषण जैसी समस्याएं जहां पर्यावरण के लिये गंभीर खतरा बनी हुई है वहीं यदि शुद्ध पानी, शुद्ध हवा, उपजाऊ भूमि, शुद्ध वातावरण एवं शुद्ध वनस्पतियाँ नहीं मिल सकेंगी तो इन सबके बिना हमारा जीवन जीना मुश्किल हो जायेगा। आज आवश्यकता है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दिया जाए, जिसमें मुख्यत: धूप, खनिज, वनस्पति, हवा, पानी, वातावरण, भूमि तथा जानवर आदि शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन संसाधनों का अंधाधुंध दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण ये संसाधन धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर हैं। इस जटिल होती समस्या की ओर चिन्तीत होना एवं कुछ सार्थक कदम उठाने के लिये पहल करना जीवन की नयी संभावनाओं को उजागर करता है। इंसान की आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती भविष्य में भी सुरक्षित बनी रहे इसके लिये भारत इसमें अग्रणी भूमिका निभा सकता है। क्योंकि भारत के पास समृद्ध विरासत एवं आध्यात्मिक ग्रंथ ऋग्वेद आदि है जो पर्यावरण का आधार रहे हैं। पिछले 200 साल में हमने पर्यावरण को जो नुकसान पहुंचाया है, उसे ठीक करना है। पौधों एवं कीट-पतंगों के लगातार कम होती किस्मों ने भी पर्यावरण के सम्मुख गंभीर संकट खड़ा किया है। पर्यावरण के सम्मुख प्लास्टिक प्रदूषण भी एक गंभीर खतरा है। सरकार ने ठान लिया है कि भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक के लिए कोई जगह नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन संबंधी अंतर-सरकारी समिति (आईपीसीसी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विश्व में 23 फीसदी कृषियोग्य भूमि का क्षरण हो चुका है, जबकि भारत में यह हाल 30 फीसदी भूमि का हुआ है। इस आपदा से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन को रोकना ही काफी नहीं है। इसके लिए खेती में बदलाव करने होंगे, शाकाहार को बढ़ावा देना होगा और जमीन का इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा। आधुनिकीकरण के इस दौर में जब इन संसाधनों का अंधाधुन्ध दोहन हो रहा है तो ये तत्व भी खतरे में पड़ गए हैं एवं भूमि की उत्पादकता कम होती जा रही है, पानी की कमी हो रही है। ऊपजाऊ भूमि भी रेगिस्तान में तब्दील हो रही है। जब तक व्यक्ति अपने अस्तित्व की तरह दूसरे के अस्तित्व को अपनी सहमति नहीं देगा, तब तक वह उसके प्रति संवेदनशील नहीं बन पाएगा। प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशीलता जागना जरूरी है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 09:42:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>यह स्वतंत्रता दिवस पर्यावरण के नाम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण शब्द का अर्थ होता है चीजो को गन्दा करना। वर्तमान में हम खतरनाक रूप से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से घिरे हुए हैं और यह समस्या भविष्य में हमारे लिये जानलेवा भी हो सकती है। इस भयंकर सामाजिक समस्या का मुख्य कारण हैं औद्योगीकरण वनों की कटाई और शहरीकरण प्राकृतिक संसाधन को गन्दा करने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/this-independence-day-environmental-name/article-5290"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/environmental.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रदूषण शब्द का अर्थ होता है चीजो को गन्दा करना। वर्तमान में हम खतरनाक रूप से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से घिरे हुए हैं और यह समस्या भविष्य में हमारे लिये जानलेवा भी हो सकती है। इस भयंकर सामाजिक समस्या का मुख्य कारण हैं औद्योगीकरण वनों की कटाई और शहरीकरण प्राकृतिक संसाधन को गन्दा करने वाले उत्पाद जो की सामान्य जीवन की दैनिक जरूरतों के रूप में इस्तेमाल की जाती है। आज से सौ साल पहले की बात करें तो पृथ्वी पूरी तरह हरी भरी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बिना प्रदूषण के पृथ्वी स्वर्ग सी प्रतीत होती थी। मानव की जरूरत के सारे कामों की वस्तु हमें प्रकृतिक से मिल जाती थी। फिर अधिक लालच व अपने जरूरतों को पूरा करने के लिए मानव ने वृक्षों को दोहन करना शुरू कर दिया। विज्ञान की प्रगति इतनी ज्यादा बढ़ गई कि ये एक अभिशाप के रूप में सामने आ गया। जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ वृक्षों का विनाश तेजी से बढ़ता चला गया। लोग भूलते चले गए कि पेड़ हमारी जिंदगी है वे अपने लालच व आवश्यकता को पूर्ति करने के लिए वृक्षों की अंधाधुंध कटाई करते चले आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके कारण आज जंगलों का अस्तित्व खतरे में है और यह बात भी पक्की है कि जंगल के अस्तित्व खतरे में है तो मानव जीवन भी खतरे में ही है। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया में हर साल एक करोड़ हेक्टेयर इलाके में वन काटे जाते हैं। जिनमें अकेले भारत में 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल कट रहे हैं। वनों की अनियंत्रित कटाई के परिणामस्वरूप पृथ्वी का सामान्य रहने वाला वातावरण प्रदूषित हो गया है। ऐसा ही चलता रहा तो वे दिन दूर नहीं जब ओजोन परत पूरी तरह नष्ट हो जाएगा और पृथ्वी का नामों निशान मिट जाएगा और हमारे आने वाले पीढ़ी के लिए पृथ्वी नर्क सामान हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिनों प्रदूषण से बचने के लिए सरकार भी गंभीर दिख रही है। लेकिन हालत ज्यादा खराब होने के कारण पर्यावरण में फैल रहे इस जहर को रोकना एक चुनौती बन गई है। शहरों में हालत और ज्यादा नाजुक हंै। अगर हमें इन प्रदुषण से बचना है तो वृक्ष रोपण को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। यही एक मात्र साधन है जिसके जरिये इन्हें रोका जा सकता है। बीते दिन उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा इस बार के स्वतंत्रता दिवस पर वृक्ष रोपण का कार्यक्रम पर जोर दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने कहा कि सरकार इस वर्ष विशेष वृक्षारोपण अभियान के तहत 9.16 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विशेष वृक्षारोपण अभियान के तहत एक दिन में पांच करोड़ से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर ये अभियान ज्यादा जोर पकड़ेगा। जहां एक और हम स्वतंत्र होने की खुशी में झूमेंगे। वहीं दूसरी और प्रदूषण से स्वतंत्र होनी की बड़ी शुरूआत वृक्षारोपण रोपण से करेंगे। इस अभियान को एक ही प्रदेश में सीमित ना रखकर सभी राज्यों में लाना होगा। इस बार का स्वतंत्रता दिवस पर्यावरण के नाम कर देना ही पर्यावरण और पृथ्वी के लिए उचित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण आज इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि देश के राजधानी दिल्ली में सांस लेना भारी पड़ रहा है।बढ़ती विकास की रफ्तार में हम इतने मगन हो गए हैं कि पर्यावरण और अपने सेहत के प्रति उदासीन दिखते हैं। कुछ ही दिन पहले भारत प्रदूषण फैलाने वालों की सूचि में अव्वल आया था। बढ़ते उद्योगों और परिवहन के कारण शहर की हरियाली पूरी तरह तबाह हो चुकी है।लोग खुली और स्वक्ष हवा लेने के लिए तरस गए हैं। हवाओं में फैली इस जहर के कारण कई रोगों का जन्म होता है। जिनसे कई लोग जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। जिनका प्रतिकूल प्रभाव सभी उम्र के लोगों पर पड़ता है।लेकिन बच्चे सबसे ज्यादा प्राभवित होते हैं। आजकल सांसों का बढ़ता रोग प्रदूषण के कारण ही जोर पकड़ा हुआ है।<br />
एक और जहाँ गावों में हरियाली भरी बाग बगीचों में लोगों का रहना बैठना होता है। जहां के बच्चे खुली और स्वच्छ पर्यावरण में अपना जीवन बिताते हैं। वहीं शहर के लोग प्रदूषण की मार झेल रहे होते हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण उन्हें एक संकीर्ण जगहों में रहना पड़ता है। जहां वृक्षों की भारी कमी होती है और उद्योगों की संख्या ज्यादा होती है। ऐसे जगहों में शारीरिक और मानसिक बीमारी होने के सारे कारण मौजूद होते हैं। फिर भी सुख सुविधा के लिए लोग शहर की और भागना पसन्द करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विकसित करने हेतु आज कल शहरीकरण पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सारे सुख सुविधाओं को पाने के लिए लोग पृथ्वी को भूल जाते हैं। उन्हें याद ही नही रहता कि हम एक प्रकृति दायरे में रहते हैं। जिनका स्वास्थ्य बिगड़ने पर विज्ञान से उपचार संभव बिल्कुल नहीं हैं। उसका स्वास्थ्य बिगड़ने पर प्रकृति पर ही निर्भरता दिखाना पड़ेगा। इन दिनों स्वास्थ्य तो पूरी बिगड़ ही चुकी है। जिसका उपचार लोगों का सोच परिवर्तन और वृक्षारोपण बेहद जरूरी हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">वाहनों की परिवहन के कारण शहरों का प्रदूषण गांवों के तुलना में बहुत अधिक है। बढ़ते उद्योग के धुवों के कारण पूरा पर्यावरण प्रदूषण से ग्रसित है। मानव को विकास क्रिया ने पृथ्वी के कोई हिस्सा को नही छोड़ा। आज पृथ्वी के भूमि,वायु,जल पूरी तरह प्रदूषण के चपेट में है। यहां तक मानव से कोशों दुर आकाश को भी नही छोड़ा गया। कई उपग्रह के नष्ट हो जाने के कारण आज आकाश में प्रदूषण फैला रहा है। आज हमारा फर्ज बनता है कि हम पेड़ पौधे लगाएं और पर्यावरण को शुद्ध बनाएं।</p>
<p><strong> नीलेश मेहरा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Aug 2018 20:35:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत का सबसे ऊंचा मंदिर बना तो पर्यावरण खतरा, एनजीटी का नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर निर्माण को रोकने की मांग । Environmental Danger नई दिल्‍ली (एजेंसी)। एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। इसके लिए धार्मिक सोसाइटी और केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्‍लूए) को नोटिस जारी किया गया है।याचिका में आरोप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/indias-highest-temple-built-environmental-danger-ngt-notice/article-4812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/environmental-danger.jpg" alt=""></a><br /><h2>मंदिर निर्माण को रोकने की मांग <strong>।</strong> Environmental Danger</h2>
<p><strong>नई दिल्‍ली (एजेंसी)।</strong> एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। इसके लिए धार्मिक सोसाइटी और केंद्रीय ग्राउंड वाटर अथॉरिटी (सीजीडब्‍लूए) को नोटिस जारी किया गया है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस्‍कॉन द्वारा बनाए जाने वाले वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के निर्माण से यमुना के आसपास का पर्यावरण प्रभावित <strong>(  Environmental Danger )</strong> होगा और क्षेत्र का भूजल स्‍तर पर भी असर पड़ेगा।</p>
<p>एनजीटी के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने इंटरनेशनल सोसाइटी फार कंससनेस (इस्‍कॉन) और सीजीडब्‍लूए से 31 जुलाई से पहले जवाब मांगा है।</p>
<h2>इस्‍कॉन बेंगलुरु द्वारा  मथुरा में किया जाएगा निर्माण <strong>।</strong> Environmental Danger</h2>
<p>पर्यावरण कार्यकर्ता मणिकेश चतुर्वेदी ने दुनिया के सबसे बड़े मंदिर के निर्माण को रोकने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि प्रस्‍तावित मंदिर की बाउंड्री के चारों ओर कृत्रिम तालाब होगा। इसके लिए जमीन से बड़े पैमाने का पानी का दोहन किया जाएगा। इससे यमुना नदी की अस्तित्‍व की सीमा तक पानी में कमी आ सकती है।</p>
<h2>सबसे बड़े मंदिर की क्‍या है खासियत<strong>।</strong>  Environmental Danger</h2>
<ul>
<li>मंदिर के निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा।</li>
<li> इस्‍कॉन बेंगलुरु द्वारा दुनिया के सबसे महंगे मंदिर का निर्माण मथुरा में किया जाएगा।</li>
<li> मंदिर की ऊंचाई 7 सौ फीट होगी और इसका निर्माण 5,40,000 वर्ग फीट में किया जाएगा।</li>
<li> शानदार मंदिर के लिए सशक्‍त जंगल का पुनर्निर्माण किया जाएगा।</li>
<li>यह मंदिर 26 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा।  इसमें ब्रज के 12 जंगलाेें का निर्माण होगा, जिसमें सुंदर वनस्‍पतियां, झीलें और झरने शामिल होंगे।</li>
<li>मंदिर का कुल क्षेत्रफल 62 एकड़ होगा, जिसमें 12 एकड़ पार्किंग और हेलीपैड के लिए होगा।</li>
</ul>
<h2> मंदिर की नींव होगी बुर्ज खलीफा से भी गहरी <strong>।</strong>  Environmental Danger</h2>
<p>चंद्रोदय मंदिर दो सौ मीटर से अधिक ऊंचा होगा। साढ़े पांच एकड़ के इलाक़े में बनने वाले इस मंदिर में 70 मंजिलें होंगी। अभी दुनिया की सबसे ऊंची धार्मिक इमारत मिस्र के पिरामिड हैं, जो कि 128.8 मीटर ऊंचा है। वहीं वेटिकन का सेंट पीटर बैसेलिका 128.6 मीटर ऊंचा है। रॉकेट के आकार का चंद्रोदय मंदिर भूकंप प्रतिरोधी होगा।इसके निर्माण में 45 लाख घन फीट कंक्रीट और करीब साढ़े 25 हज़ार टन लोहे का इस्तेमाल होगा।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/indias-highest-temple-built-environmental-danger-ngt-notice/article-4812</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Jul 2018 03:56:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना पड़ा भारी, हजारों अधिकारियों को भेजा जेल</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र सरकार ने पर्यावरण मानकों के उल्लंघन की घटनाओं को गंभीरता से लिया शंघाई (एजेंसी)। चीन में पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के कारण आबो हवा खराब होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सैंकड़ों अधिकारियों को जेल भेजा गया है तथा अनेक पर जुर्माना लगाया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। मंत्रालय की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/massive-environmental-damage-in-china/article-4770"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/cinaa.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार ने पर्यावरण मानकों के उल्लंघन की घटनाओं को गंभीरता से लिया</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>शंघाई (एजेंसी)। </strong>चीन में पर्यावरण मानकों के उल्लंघन के कारण आबो हवा खराब होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सैंकड़ों अधिकारियों को जेल भेजा गया है तथा अनेक पर जुर्माना लगाया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। मंत्रालय की तरफ से जारी एक वक्तव्य में साेमवार देर रात बताया गया कि दस प्रांतों में कुल 4305 अधिकारियों को इन मानकों के उल्लंघन का जिम्मेदार मानते हुए जेल की सजा सुनाई गई है और अनेक पर जुर्माना लगाया गया है।</p>
<h2>पदूषण मानकों का उचित तरीके से पालन नहीं किया गया</h2>
<p style="text-align:justify;">मई माह के अंत में केन्द्र सरकार के अधीन निरीक्षकों ने पर्यावरण मानकों के उल्लंघन की घटनाओं को गंभीरता से लिया था और यह पाया कि पदूषण मानकों का उचित तरीके से पालन नहीं किया गया जिसकी वजह से अनेक समस्याएं देखने को मिल रही है। निरीक्षकाें का कहना है कि स्थानीय स्तर और राज्य सरकारों के अधीन कार्यरत कर्मचारियों ने अपने काम को जिम्मेदारी से नहीं लिया है जिसकी वजह से यह देखने को मिला है।</p>
<h2>510 मिलियन युआन का  लगाया जुर्माना</h2>
<p style="text-align:justify;">इन अधिकारियों पर कुल 510 मिलियन युआन का जुर्माना लगाया है और कुछ काे जेल की सजा सुनाई गई है। पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक निरीक्षकाें ने मानकों के उल्लंघन के 28,076 मामलों का पता लगाया और 464 अधिकारियाें के खिलाफ प्रशासनिक अथवा आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jul 2018 03:21:17 +0530</pubDate>
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                <title>पर्यावरण मुद्दों पर अमेरिका का दोहरा आचरण</title>
                                    <description><![CDATA[पेरिस समझौते से बाहर आकर अमेरिका ने अपनी पारंपरिक आार्थिक पूंजीवादी सम्राज्यवाद की नीतियों का ही प्रमाण है। सन 2015 में हुए पैरिस समझौते पर 72 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस समझौते से खुशी जताई थी। विकासशील देशों को इस समझौते पर संतुष्टि हुई थी, क्योंकि इससे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">पेरिस समझौते से बाहर आकर अमेरिका ने अपनी पारंपरिक आार्थिक पूंजीवादी सम्राज्यवाद की नीतियों का ही प्रमाण है। सन 2015 में हुए पैरिस समझौते पर 72 देशों ने हस्ताक्षर किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस समझौते से खुशी जताई थी। विकासशील देशों को इस समझौते पर संतुष्टि हुई थी, क्योंकि इससे पहले विकसित देशों द्वारा ग्रीन हाऊस गैसों के उत्सर्जन के लिए विकासशील देशों को ही जिम्मेवार ठहराया जाता था। दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर फैसले को लाभ-हानि की नजर से देखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वह विश्व के बड़े बिजनेसमैन हैं, जिनका अरबों डॉलर का रीयल एस्टेट का कारोबार है। ट्रंप ने राष्ट्रपति रीगन, जार्ज बुश व जार्ज डब्ल्यू बुश की परंपरा को दोहराया, जब अमेरिका का प्रशासन लंबे समय से जलवायु परिवर्तन का कारण विकासशील देशों को बताता आ रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">बराक ओबामा ने इस नीति को बदलते हुए सद्भावना व लोकतंत्र मूल्यों की नीति अपनाई व विकसित देशों को अपनी जिम्मेवारी निभाने के लिए तैयार किया, उनके उलट अब ट्रंप विकासशील देशों को आंखें दिखाने लगे हैं, खासकर भारत व चीन को निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल अमेरिका के इस फैसले के पीछे उसकी कूटनीति भी काम कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप ने समझौता छोड़ने का फैसला उस समय किया, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस के दौरे पर थे। रूस व भारत के बीच रक्षा साजो-सामान के लिए अहम समझौता हुआ है। पेरिस समझौते के नाम पर अमेरिका भारत की रूस से दोस्ती को निशाना बना रहा है। अमेरिका का दावा है कि भारत व चीन ग्रीन हाऊस गैसों में कटौती के लिए कुछ खास नहीं कर रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि जलवायु परिवर्तन को एतिहासिक नजरिए से देखें तो 2015 के पेरिस समझौते के आधार पर भारत की जिम्मेवारी तय करना तथ्यहीन व तर्कहीन मामला है। पिछली एक सदी से विकसित देश ही प्रदूषण के लिए जिम्मेवार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विकासशील देशों में औद्योगिक विकास पिछड़ा हुआ है। अब जब विकासशील देशों को उद्योगों की जरूरत है तब विकसित देश प्रदूषण की दुहाई दे रहे हैं। प्रदूषण की इस दुहाई से विकासशील देशों को उत्पादन करने से रोक कर विकसित देश अपने माल की बिक्री के लिए मंडी बनाना चाहते हैं। अमेरिका की पर्यावरण पर दोहरी नीतियां कई विकसित देशों को भी पसंद नहीं आ रही।</p>
<p style="text-align:justify;">फ्रांस व कई अन्य यूरोपीय देशों ने अमेरिका के उक्त फैसले की अलोचना की है। जलवायु परिवर्तन बहुत बड़ी समस्या है, जिसे विश्व कल्याण की दृष्टि से समझने की आवश्यकता है, अत: विकासशील देशों पर प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण सरंक्षण का उतना ही दवाब डाला जाए, जितनी कि वह भूमिका निभा सकते हैं।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/americas-double-conduct-on-environmental-issues/article-814</link>
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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2017 23:52:07 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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