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                <title>kids' Corner - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>kids' Corner RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नानाजी का उपहार</title>
                                    <description><![CDATA[Grandfather’s Gift; सुबह की गाड़ी से जौनी के नानाजी आने वाले थे। जौनी अपने पापा के साथ नानाजी को लेने स्टेशन गया। गाड़ी ठीक समय पर आ पहुंची। जौनी और उस के पापा, नानाजी को ढूंढने लगे। तभी जौनी को दूर फर्स्ट क्लास के डिब्बे के दरवाजे पर नानाजी खड़े दिखाई दिए। नानाजी, नानाजी, चिल्लाता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/grandfathers-gift/article-87082"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/grandfather-gift.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Grandfather’s Gift; सुबह की गाड़ी से जौनी के नानाजी आने वाले थे। जौनी अपने पापा के साथ नानाजी को लेने स्टेशन गया। गाड़ी ठीक समय पर आ पहुंची। जौनी और उस के पापा, नानाजी को ढूंढने लगे। तभी जौनी को दूर फर्स्ट क्लास के डिब्बे के दरवाजे पर नानाजी खड़े दिखाई दिए। नानाजी, नानाजी, चिल्लाता हुआ जौनी डिब्बे के पास दौड़ा दौड़ा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">नानाजी उसे देख कर हंसते हुए डिब्बे से उतरे। उस ने उत्सुकता से नानाजी के हाथों की तरफ देखा। उन के बाएं हाथ में एक बैग था और दाहिने हाथ में एक छड़ी। इस से पहले जब वह 4 बार आए थे, तब उन के दाहिने हाथ में उस के लिए उपहारों का पैकेट था।</p>
<p style="text-align:justify;">शायद नानाजी उपहार गाड़ी में भूल आए हैं, यह सोच कर उस ने पूछा, झ्नानाजी, आप का और सामान कहां है?<br />
और सामान? मेरे पास तो सिर्फ यही सामान है, बैग और छड़ी, नानाजी ने हंस कर कहा।<br />
जौनी का मुंह उतर गया। तब तक उस के पापा भी वहां आ पहुंचे। तीनों टैक्सी में सवार हो गए। सारे रास्ते जौनी अपने को धीरज बंधाता रहा, ‘शायद नानाजी उपहार बैग में रखकर लाए होंगे और घर पहुंचते ही दे देंगे। उस के नानाजी खाली हाथ आएं, यह कैसे हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन नानाजी तो घर आने के बाद भी चुप रहे। जौनी रह रह कर नानाजी के इस अनोखे बरताव पर सोचता रहा, झ्आज तक नानाजी उस के लिए कुछ न कुछ उपहार लाते रहे। फिर इस बार क्या हुआ? वह नानाजी के पास जा कर बोला, ‘अब मैं अच्छा बच्चा बन गया हूं। आप को यहां से गए 5 महीने हो गए हैं न। मैं सिरदर्द का बहाना कर के घर में कभी नहीं बैठा हूं। रोज स्कूल जाता हूं।</p>
<p style="text-align:justify;">‘शाबाश’ नानाजी ने हंस कर कहा।<br />
‘फिर आप मुझ से गुस्सा क्यों हैं?’<br />
‘यह तो ‘उलटा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली बात हुई। गुस्सा तो मुझ से तुम हो और पूछ रहे हो कि मैं क्यों गुस्सा हूं? सुबह टैक्सी में तुम चुप क्यों थे?’<br />
जौनी की समझ में न आया कि अब क्या कहे। वह सोचने लगा, ‘अगर नानाजी उस से गुस्सा नहीं हैं तो उपहार जरूर लाए होंगे। क्यों न उन से पूछ लिया जाए।<br />
उस ने धीरे से उन के पास जाकर कहा, ‘नानाजी’<br />
‘कहो कहो, क्या बात है?</p>
<p style="text-align:justify;">तभी मम्मी कमरे में आ गई। जौनी को चुप होना पड़ा क्योंकि उन्होंने कह रखा था कि किसी से उपहार मांगना बुरी बात है। नानाजी के आने की खुशी में मम्मी ने खीर बनाई थी। खाना खा कर जौनी नानाजी के कमरे में आ गया। वह उन के आने से पहले ही बैग खोल कर देखना चाहता था कि उस के लिए खिलौने बैग में हैं या नहीं।<br />
वह बैग को उठा कर देखने ही लगा था कि नानाजी कमरे में आ गए और बोले, ‘अच्छा, तो नन्हे पहलवान की ताकत की परीक्षा हो रही है। उठाओ उठाओ, जरा हम भी देखें, तुम बैग कितना ऊपर उठा सकते हों?</p>
<p style="text-align:justify;">जौनी ने बैग को सिर की ऊंचाई तक उठा कर कहा, ‘यह देखो नानाजी, हलका लग रहा है। क्या यह खाली है?”<br />
नानाजी हंसे, ‘हां, एक धोती और एक कुर्त्ता ही तो है इस में।’ जौनी रोआंसा हो गया।<br />
शाम को नानाजी उसे पार्क ले गए। वहां उस के बहुत से दोस्त भी आए हुए थे। मैची उसे देखते ही दौड़ी आई। दोनों एक झूले पर बैठ गए। मैची जौनी के नानाजी को पहचानती थी और यह भी जानती थी कि वह इस बार जौनी के लिए बंदूक और हवाई जहाज लाने वाले हैं। उस ने पूछा, ‘क्यों जौनी, कैसी है तुम्हारी बंदूक?<br />
‘बंदूक वंदूक कुछ नहीं लाए, नानाजी’ जौनी ने कहा ‘शायद भूल गए हैं।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘तुम ने पूछा नहीं कि क्यों नहीं लाए? नहीं, किसी से उपहार मांगना ठीक है क्या?<br />
नानाजी एक पेड़ की ओट से सारी बातें सुन रहे थे। कुछ देर बाद जौनी और उस के नानाजी घर आ गए।<br />
जौनी सोने चला गया। उस की समझ में नहीं आ रहा था कि नानाजी एकदम भुलक्कड़ कैसे हो गए।<br />
सुबह जौनी उठा तो बहुत उदास था। नानाजी आंगन में बैठे थे। वह उन्हें ‘बायबाय’ कर के स्कूल जाने ही वाला था कि नानाजी ने पुकार कर कहा, ‘जौनी, अलमारी में एक बड़ा पैकेट रखा है। जाओ, उसे ले आओ।<br />
जौनी दौड़ा-दौड़ा अलमारी से पैकेट निकाल लाया। वह बहुत खुश हो रहा था लेकिन उसे संदेह भी हो रहा था कि शायद पैकेट में कुछ और ही न हो।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नानाजी ने कहा, ‘पैकेट खोलो।</h3>
<p style="text-align:justify;">जौनी ने जब पैकेट खोला तो उस की खुशी का ठिकाना न रहा। पैकेट में पीले और लाल रंग का छोटा सा हवाई जहाज और एक बंदूक थी। यह कैसे हो सकता था, ‘नानाजी ठठा कर हंस पड़े, ‘मैं तो मेरी परीक्षा ले रहा था।<br />
‘कौन सी परीक्षा? ‘तेरे सब्र और शिष्टाचार की। मैं देखना चाहता था कि उपहार न देने पर तुम गंवार बच्चों की तरह फटे मुंह उपहार तो नहीं मांगते। ‘तो क्या मैं परीक्षा में पास हूं।’<br />
‘हां, इस के लिए मैं तुम्हें एक और उपहार दूंगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘लेकिन नानाजी, क्या आप को मालूम है कि आप की इस परीक्षा के कारण मैंने कल का दिन कितनी बेचैनी से काटा?’<br />
‘हां, मालूम है। मैं तेरी हरेक हरकत गौर से देख रहा था।<br />
फिर नानाजी ने हवाई जहाज में चाबी भरी। हवाई जहाज ऊपर हवा में उड़ कर वापस जमीन पर उतर आया।<br />
‘यह रहा डबल उपहार, झ्नानाजी ने कहा। जौनी ने खुशी से ताली बजा दी।<br />
नरेंद्र देवांगन बह की गाड़ी से जौनी के नानाजी आने वाले थे। जौनी अपने पापा के साथ नानाजी को लेने स्टेशन गया। गाड़ी ठीक समय पर आ पहुंची। जौनी और उस के पापा, नानाजी को ढूंढने लगे। तभी जौनी को दूर फर्स्ट क्लास के डिब्बे के दरवाजे पर नानाजी खड़े दिखाई दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">नानाजी, नानाजी, चिल्लाता हुआ जौनी डिब्बे के पास दौड़ा दौड़ा गया।<br />
नानाजी उसे देख कर हंसते हुए डिब्बे से उतरे। उस ने उत्सुकता से नानाजी के हाथों की तरफ देखा। उन के बाएं हाथ में एक बैग था और दाहिने हाथ में एक छड़ी। इस से पहले जब वह 4 बार आए थे, तब उन के दाहिने हाथ में उस के लिए उपहारों का पैकेट था।</p>
<p style="text-align:justify;">शायद नानाजी उपहार गाड़ी में भूल आए हैं, यह सोच कर उस ने पूछा, झ्नानाजी, आप का और सामान कहां है?<br />
और सामान? मेरे पास तो सिर्फ यही सामान है, बैग और छड़ी, नानाजी ने हंस कर कहा।<br />
जौनी का मुंह उतर गया। तब तक उस के पापा भी वहां आ पहुंचे। तीनों टैक्सी में सवार हो गए। सारे रास्ते जौनी अपने को धीरज बंधाता रहा, ‘शायद नानाजी उपहार बैग में रखकर लाए होंगे और घर पहुंचते ही दे देंगे। उस के नानाजी खाली हाथ आएं, यह कैसे हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन नानाजी तो घर आने के बाद भी चुप रहे। जौनी रह रह कर नानाजी के इस अनोखे बरताव पर सोचता रहा, झ्आज तक नानाजी उस के लिए कुछ न कुछ उपहार लाते रहे। फिर इस बार क्या हुआ?<br />
वह नानाजी के पास जा कर बोला, ‘अब मैं अच्छा बच्चा बन गया हूं। आप को यहां से गए 5 महीने हो गए हैं न। मैं सिरदर्द का बहाना कर के घर में कभी नहीं बैठा हूं। रोज स्कूल जाता हूं।<br />
‘शाबाश’ नानाजी ने हंस कर कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">‘फिर आप मुझ से गुस्सा क्यों हैं?’<br />
‘यह तो ‘उलटा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली बात हुई। गुस्सा तो मुझ से तुम हो और पूछ रहे हो कि मैं क्यों गुस्सा हूं? सुबह टैक्सी में तुम चुप क्यों थे?’<br />
जौनी की समझ में न आया कि अब क्या कहे। वह सोचने लगा, ‘अगर नानाजी उस से गुस्सा नहीं हैं तो उपहार जरूर लाए होंगे। क्यों न उन से पूछ लिया जाए।<br />
उस ने धीरे से उन के पास जाकर कहा, ‘नानाजी’<br />
‘कहो कहो, क्या बात है?<br />
तभी मम्मी कमरे में आ गई। जौनी को चुप होना पड़ा क्योंकि उन्होंने कह रखा था कि किसी से उपहार मांगना बुरी बात है।<br />
नानाजी के आने की खुशी में मम्मी ने खीर बनाई थी। खाना खा कर जौनी नानाजी के कमरे में आ गया। वह उन के आने से पहले ही बैग खोल कर देखना चाहता था कि उस के लिए खिलौने बैग में हैं या नहीं।<br />
वह बैग को उठा कर देखने ही लगा था कि नानाजी कमरे में आ गए और बोले, ‘अच्छा, तो नन्हे पहलवान की ताकत की परीक्षा हो रही है। उठाओ उठाओ, जरा हम भी देखें, तुम बैग कितना ऊपर उठा सकते हों?<br />
जौनी ने बैग को सिर की ऊंचाई तक उठा कर कहा, ‘यह देखो नानाजी, हलका लग रहा है। क्या यह खाली है?”<br />
नानाजी हंसे, ‘हां, एक धोती और एक कुर्त्ता ही तो है इस में।’<br />
जौनी रोआंसा हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शाम को नानाजी उसे पार्क ले गए। वहां उस के बहुत से दोस्त भी आए हुए थे। मैची उसे देखते ही दौड़ी आई। दोनों एक झूले पर बैठ गए। मैची जौनी के नानाजी को पहचानती थी और यह भी जानती थी कि वह इस बार जौनी के लिए बंदूक और हवाई जहाज लाने वाले हैं।<br />
उस ने पूछा, ‘क्यों जौनी, कैसी है तुम्हारी बंदूक?<br />
‘बंदूक वंदूक कुछ नहीं लाए, नानाजी’ जौनी ने कहा ‘शायद भूल गए हैं।’<br />
‘तुम ने पूछा नहीं कि क्यों नहीं लाए?<br />
नहीं, किसी से उपहार मांगना ठीक है क्या?<br />
नानाजी एक पेड़ की ओट से सारी बातें सुन रहे थे। कुछ देर बाद जौनी और उस के नानाजी घर आ गए।<br />
जौनी सोने चला गया। उस की समझ में नहीं आ रहा था कि नानाजी एकदम भुलक्कड़ कैसे हो गए।<br />
सुबह जौनी उठा तो बहुत उदास था। नानाजी आंगन में बैठे थे। वह उन्हें ‘बायबाय’ कर के स्कूल जाने ही वाला था कि नानाजी ने पुकार कर कहा, ‘जौनी, अलमारी में एक बड़ा पैकेट रखा है। जाओ, उसे ले आओ।<br />
जौनी दौड़ा-दौड़ा अलमारी से पैकेट निकाल लाया। वह बहुत खुश हो रहा था लेकिन उसे संदेह भी हो रहा था कि शायद पैकेट में कुछ और ही न हो।<br />
नानाजी ने कहा, ‘पैकेट खोलो।<br />
जौनी ने जब पैकेट खोला तो उस की खुशी का ठिकाना न रहा। पैकेट में पीले और लाल रंग का छोटा सा हवाई जहाज और एक बंदूक थी।</p>
<p style="text-align:justify;">यह कैसे हो सकता था, ‘नानाजी ठठा कर हंस पड़े, ‘मैं तो मेरी परीक्षा ले रहा था।<br />
‘कौन सी परीक्षा?<br />
‘तेरे सब्र और शिष्टाचार की। मैं देखना चाहता था कि उपहार न देने पर तुम गंवार बच्चों की तरह फटे मुंह उपहार तो नहीं मांगते।<br />
‘तो क्या मैं परीक्षा में पास हूं।’<br />
‘हां, इस के लिए मैं तुम्हें एक और उपहार दूंगा।’<br />
‘लेकिन नानाजी, क्या आप को मालूम है कि आप की इस परीक्षा के कारण मैंने कल का दिन कितनी बेचैनी से काटा?’<br />
‘हां, मालूम है। मैं तेरी हरेक हरकत गौर से देख रहा था।<br />
फिर नानाजी ने हवाई जहाज में चाबी भरी। हवाई जहाज ऊपर हवा में उड़ कर वापस जमीन पर उतर आया।<br />
‘यह रहा डबल उपहार, झ्नानाजी ने कहा। जौनी ने खुशी से ताली बजा दी।<br />
<strong>-नरेंद्र देवांगन</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/grandfathers-gift/article-87082</link>
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 15:01:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपने बच्चों को शर्मीलेपन से रखें दूर</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों का कितना शर्मीलापन ज्यादा माना जाता है? Children’s Corner: बच्चे का ज्यादा या कम शर्माना जैसा कुछ नहीं हैं। अगर आपका बच्चा शर्मीला है और यह बात आपको या बच्चे को परेशान नहीं कर रही है तो कोई बड़ी बात नहीं है। जो बच्चे शर्मीले होते हैं, वे बेहतर श्रोता बनते हैं और स्कूल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/keep-your-kids-away-from-shyness/article-87115"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/keep-children-away-from-shy.jpg" alt=""></a><br /><h3>बच्चों का कितना शर्मीलापन ज्यादा माना जाता है?</h3>
<p style="text-align:justify;">Children’s Corner: बच्चे का ज्यादा या कम शर्माना जैसा कुछ नहीं हैं। अगर आपका बच्चा शर्मीला है और यह बात आपको या बच्चे को परेशान नहीं कर रही है तो कोई बड़ी बात नहीं है। जो बच्चे शर्मीले होते हैं, वे बेहतर श्रोता बनते हैं और स्कूल में उनका व्यवहार ऐसा खराब नहीं होता है, जिसकी वजह से उन्हें डांट पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर शर्मीला होने की वजह से बच्चा खुश नहीं रहता है, तो यह बहुत ज्यादा हो जाता है, ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर बच्चा नियमित रूप से स्कूल जाने से मना करता है, बर्थडे पार्टी में जाने से इंकार कर देता है, ग्रुप एक्टिविटी या दूसरे इवेंट में जाने से बचता है तो आपको उसमें ऐसे व्यवहार के नोटिस होने पर किसी प्रोफेशनल से बात करनी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों के शर्मीले होने के कारण</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>पर्सनालिटी:</strong> एक बच्चा जो भावनात्मक रूप से सेंसिटिव होता है, उसके बड़े होने पर शर्मीले स्वभाव की संभावना ज्यादा होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जेनेटिक:</strong> बच्चे का शर्मीला होने का एक कारण जेनेटिक भी हो सकता है, जो उसकी पर्सनालिटी को प्रभावित कर सकता है।<br />
<strong>सोशल इंटरेक्शन में कमी:</strong> यदि बच्चों को उनके शुरूआती सालों में सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया जाता है, तो वे अपने अंदर जरूरी सामाजिक व्यवहार विकसित नहीं कर पाते हैं और लोगों से बात करने में संकोच महसूस करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>असफलता का डर:</strong> बच्चों को जब उनकी क्षमता से ज्यादा परफॉर्म करने के लिए जोर दिया जाता है, तो उनके अंदर फेल हो जाने का डर बैठ जाता है, जिसे यह माना जाता है कि बच्चा शर्मा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आलोचना:</strong> जब माता-पिता, भाई-बहन या करीबी दोस्त किसी बच्चे की उसके शुरूआती सालों में बात-बात पर आलोचना करते हैं, धमकाते हैं या चिढ़ाते हैं, तो इससे वे शर्मीले स्वभाव के बनते जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>परिवार:</strong> कभी-कभी पेरेंट्स का बहुत ज्यादा प्रोटेक्ट करना भी उन्हें शर्मीला बना सकता है, जिससे उनके अंदर नए परिवेश में जाने से डर पैदा होने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आपके व्यवहार से सीखना:</strong> जो माता-पिता शर्मीले होते हैं, अक्सर वो अपने बच्चों में भी ये सब डालते हैं। पेरेंट्स बच्चे के पहले रोल मॉडल होते हैं और बच्चे उनके व्यवहार को फॉलो करते हैं, इसलिए वे आपको जैसा व्यवहार करते हुए देखते हैं वो भी वैसा व्यवहार अपनाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चे का शर्मीलापन कब बनता है समस्या? | Children’s Corner</h3>
<p style="text-align:justify;">जब पेरेंट्स यह देखते हैं कि उनका बच्चा शर्मीला है, तो वे यह जानना चाहते हैं कि उसका व्यवहार नॉर्मल है या नहीं। नए लोगों से मिलने या किसी नई परिस्थिति का सामना करने पर बच्चे का अपने मां या पिता से चिपकना नॉर्मल हो सकता है। अगर यह एक टेम्परेरी फेज नहीं लग रहा तो यह एक समस्या बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्यादातर बच्चे इससे बाहर निकल जाते हैं, क्योंकि उनकी उम्र के बच्चों के साथ उनका घुलना-मिलना बढ़ने लगता है। जब आप अपने बच्चे को अन्य बच्चों से घिरे हुए अकेले खेलते हुए देखती हैं तो यह आपको चिंतित कर सकता है। टीचर से बात करके चेक करें कि क्या वह अपनी उम्र के स्कूल के बच्चों या आपके पड़ोस के बच्चों से बात करने में शर्माता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शर्मीलेपन के कारण बच्चों में देखे जाने वाले कॉम्प्लिकेशन | Children’s Corner</h3>
<p style="text-align:justify;">1.आपका बच्चा एक्टिविटीज जैसे स्पोर्ट्स, डांस, म्यूजिक या ड्रामा जैसी मजेदार बातों में भाग लेने से मना कर सकता है।<br />
2.इससे उसे सोशल स्किल का अभ्यास करने और एक व्यक्ति के रूप में विकसित होने के अवसर कम मिल सकते हैं।<br />
3.आत्मसम्मान कम होना और एकांत में रहना या उनका महत्व कम है ऐसी भावना आ सकती है।<br />
4.जज किए जाने के डर से पूरी क्षमता नहीं दिखाते हैं।<br />
5.बहुत ज्यादा एंग्जायटी होना।<br />
6.कांपना, शरमाना और हकलाना ऐसे फिजिकल प्रभाव भी बच्चे को और शर्मिंदा कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शर्मीले बच्चों की मदद करने के लिए टिप्स</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>1. इस मुद्दे पर चर्चा करें:</strong> बच्चों में तब भी शर्मीलापन नोटिस किया जाता है जब वे अपने पेरेंट्स को एक-दूसरे से बहस करते हुए देखते हैं। जहाँ तक हो सके उन्हें ऐसी स्थिति से दूर रखें। अगर आपका बच्चा किसी ट्रॉमा शिकार हुआ है तो आप प्रोफेशनल सलाह लें। उसके टीचर से बात करें और स्कूल में उसके व्यवहार के बारे में पूछें क्योंकि इससे आपको उसकी पर्सनालिटी के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है। शर्मीलेपन को दूर करने के लिए उन स्ट्रेटेजीज को शेयर करें जो आपने इतने सालों में सीखा है। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2. बात करने के लिए प्रोत्साहित करें:</strong> आप अपने बच्चे को उसकी उम्र के बच्चों के साथ बातचीत करने और खुलकर बात करने के लिए कह सकते हैं। आप वीकेंड पर एक प्ले सेशन भी आयोजित कर सकती हैं, जिसमें पड़ोसियों और स्कूल के बच्चों के साथ-साथ आपका बच्चा अपने कजिन के साथ खेले और बातचीत करे, ताकि उसका व्यवहार नियंत्रित रखा जा सके। बच्चे को खुलकर उसकी भावनाएं प्रकट करने के लिए कहें, उससे बातचीत करें और यह उसकी शर्म को कम करने का एक अच्छा तरीका होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>3. सहानुभूति दिखाना:</strong> शर्मीले बच्चों के साथ सहानुभूति न रखना ही उनके लिए बेहतर होगा, वरना बच्चे को इस तरह के व्यवहार को जारी रखने का बढ़ावा मिल सकता है, जिससे वह और ज्यादा शर्मीला हो सकता है। बच्चे के इस व्यवहार को यह न कहें कि वो जो भी है, जैसे भी है, ठीक है और उसे अपने ऐसे होने पर खराब नहीं महसूस होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>4. प्रेरित और प्रोत्साहित करें:</strong> ज्यादातर माता-पिता यह नहीं जानते कि वे अपने बच्चे में शर्मीलेपन को दूर करने के लिए उसकी कैसे मदद करें, लेकिन आपको यह बता दें कि इसके लिए किसी विशेष स्किल की आवश्यकता नहीं होती है। दूसरों के बारे में बिना चिंता किए बच्चे को अपनी पसंद की चीजें करके अपनी पहचान खुद बनाने के लिए प्रोत्साहित करें। उसकी स्ट्रेंथ और स्किल पर काम और उसे अपनी एक पर्सनालिटी डेवलप करने में मदद करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>5. टैगिंग से बचें:</strong> जब आप किसी सोशल गैदरिंग में हों, तो अपने बच्चे को दूसरों से मिलवाते समय उसे एक शर्मीले बच्चे के रूप में लेबल न करें, क्योंकि इससे उसका आत्मविश्वास टूट सकता है। उसे बताएं कि वो किसी पार्टी, इवेंट या किसी पर्टिकुलर सिचुएशन को कैसे हैंडल करता है। जब भी आप उसे ऐसे नोटिस करती हैं, तो पॉजिटिव व्यवहार के साथ उसे प्रोत्साहित करें, क्योंकि इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह हर बार ग्रुप या बड़े इवेंट पर अपना व्यवहार अच्छा रखने की कोशिश करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समय और प्रयास के साथ, आप अपने बच्चे का शर्मीलापन दूर कर सकते है और उसे सिखा सकते हैं कि लोगों के साथ घुलना-मिलना एक मजेदार अनुभव हो सकता है। बच्चे के स्वभाव से भले ही शर्मीलापन पूरी तरह से न मिटाया जा सके लेकिन पेरेंट्स बच्चे को इमोशनल सपोर्ट और आत्मविश्वास देने में भूमिका जरूर निभा सकते हैं।</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 16:05:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Parrot Story: जैसा संग वैसा रंग</title>
                                    <description><![CDATA[Parrot Story: एक बाजार में एक तोता बेचने वाला आया। उसके पास दो पिजरें थे। दोनों में एक-एक तोता था। उसने एक तोते का मूल्य रखा था पाँच सौ रुपये और एक का रखा था पाँच आने। वह कहता था कि कोई पहले पाँच आने वाले को लेना चाहे तो ले जाए, लेकिन कोई पहले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/parrot-story/article-87034"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/parrot-story.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">Parrot Story: एक बाजार में एक तोता बेचने वाला आया। उसके पास दो पिजरें थे। दोनों में एक-एक तोता था। उसने एक तोते का मूल्य रखा था पाँच सौ रुपये और एक का रखा था पाँच आने। वह कहता था कि कोई पहले पाँच आने वाले को लेना चाहे तो ले जाए, लेकिन कोई पहले पाँच सौ रुपये वाले को लेना चाहेगा तो उसे दूसरा भी लेना पड़ेगा।<br />
वहां के राजा बाजार में आए। तोते वाले की पुकार सुनकर उन्होंने हाथी रोक कर पूछा, ‘‘इन दोनों के मूल्यों में इतना अंतर क्यों है?’’</h6>
<h6 style="text-align:justify;">तोते वाले ने कहा, ‘‘यह तो आप इनको ले जाएं तो आने आप पता लग जाएगा।’’<br />
राजा ने तोते ले लिए। जब रात में वे सोने लगे तो उन्होंने कहा कि पाँच सौ रुपये वाले तोते का पिंजरा मेरे पास टांग दिया जाए। जैसे ही प्रात: चार बजे, तोता बोलने लगा,‘‘राम-राम, सीता राम!’’ तोते ने सुन्दर भजन गाए। सुन्दर श्लोक पढ़े। राजा बहुत प्रसन्न हुआ।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दूसरे दिन उन्होंने दूसरे तोते का पिंजरा अपने पास रखवाया। जैसे ही सवेरा हुआ, उस तोते ने गंदी-गंदी गालियां बकनी शुरू कर दी। राजा को बड़ा क्रोध आया। उन्होंने नौकर से कहा, ‘‘इस दुष्ट को मार डालो।’’<br />
पहला तोता पास ही था। उसने नम्रता से प्रार्थना की, ‘‘राजन्! इसे मारो मत! ये मेरा सगा भाई है। हम दोनों एक साथ जाल में पड़े थे। मुझे एक संत ने ले लिया। उनके यहां मैं भजन सीख गया। इसे म्लेच्छ ने ले लिया। वहां इसने गाली सीख ली। इसका कोई दोष नहीं है, यह तो बुरे संग का नतीजा है।’’ राजा ने पहले तोते के आग्रह पर दूसरे तोते को मारने की बजाय उड़ा दिया। Parrot Story</h6>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 16:35:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों के लिए खतरनाक है बड़े व डरावने दिखने वाले खिलौने</title>
                                    <description><![CDATA[जितने बार पजल गलत होता है, उतने बार टॉकिंग पज्लर से काफी लाउड आवाज निकलती है, इसके चलते बच्चे भी काफी लाउड बात करने लगते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/big-and-scary-looking-toys-are-dangerous-for-children/article-87071"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/scary-toys.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">घरों में आम तौर पर हर एक बच्चें को टाइम पास के लिए उसके मां-बाप खिलौने लाकर दे देते है। आमतौर पर बच्चें इन खिलौनों से कुछ खुश होते है और अपना अधिकतर समय इनसे खेलने में व्यतीत करते है। <strong>(Scary Toys)</strong> लेकिन क्या आप जानते है ये बच्चे के साथी कहलाने वाले ये खिलौने बच्चे के साथ होने के साथ-साथ उनके दुश्मन भी साबित हो सकते है। इसलिए हम आपको आज बताने जा रहे है कि कौन से ऐसे खिलौने है जो बच्चों के लिए हानिकारक साबित भी हो सकते है जिनसे आप अपने बच्चों को दूर रखें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>1. टॉकिंग बेबी वॉकर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">टॉकिंग बेबी वॉकर, यह आकार में काफी बड़े होते हैं। कुछ बेबी वॉकर तो बच्चों से भी बड़े होते हैं। इस पर बैठ कर बच्चे यहां से वहां चल सकते हैं। दरअसल इसमें एक स्पीकर लगा होता है जो तरह-तरह की आवाज निकालता है। दरअसल अचानक निकलने वाली यह आवाज बच्चों को डरा देती है। टॉकिंग बेबी वॉकर, यह आकार में काफी बड़े होते हैं। कुछ बेबी वॉकर तो बच्चों से भी बड़े होते हैं। इस पर बैठकर बच्चे यहां से वहां चल सकते हैं। दरअसल इसमें एक स्पीकर लगा होता है जो तरह-तरह की आवाज निकालता है। दरअसल अचानक निकलने वाली यह आवाज बच्चों को डरा देती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>2. स्लाइम</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यह प्लास्टिक के क्रिस्टल और रबर से बना हुआ एक ऐसा खिलौना होता है, जो अलग-अलग आकार बदलता है। इससे भी बच्चे काफी डर जाते हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों को स्लाइम कभी नहीं देना चाहिए। यह प्लास्टिक के क्रिस्टल और रबर से बना हुआ एक ऐसा खिलौना होता है, जो अलग-अलग आकार बदलता है। इससे भी बच्चे काफी डर जाते हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों को स्लाइम कभी नहीं देना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>3. आंट फार्म</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आंट फार्म एक ऐसा खिलौना है जो बच्चों को डिप्रेस कर सकता है। दरअसल यह शीशे से बना एक बॉक्स होता है, जिसके अंदर मिट्टी और शुगर क्रिस्टल डालकर चीटियों को रख दिया जाता है। छोटे बच्चों को चीटियां काफी भयानक लगती हैं, इसलिए बच्चों को ऐसे खिलौने देने से बचना चाहिए।<br />
आंट फार्म एक ऐसा खिलौना है जो बच्चों को डिप्रेस कर सकता है। दरअसल यह शीशे से बना एक बॉक्स होता है, जिसके अंदर मिट्टी और शुगर क्रिस्टल डालकर चीटियों को रख दिया जाता है। छोटे बच्चों को चीटियां काफी भयानक लगती हैं, इसलिए बच्चों को ऐसे खिलौने देने से बचना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>4. टॉकिंग पज्लर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह एक ऐसा खिलौना होता है, जिसमें बच्चे पजल सॉल्व करते हैं। पजल काफी मुश्किल होता है जो बच्चे कई बार गलत करते हैं। जितने बार पजल गलत होता है, उतने बार टॉकिंग पज्लर से काफी लाउड आवाज निकलती है। इसके चलते बच्चे भी काफी लाउड बात करने लगते हैं। यह एक ऐसा खिलौना होता है, जिसमें बच्चे पजल सॉल्व करते हैं। पजल काफी मुश्किल होता है जो बच्चे कई बार गलत करते हैं। जितने बार पजल गलत होता है, उतने बार टॉकिंग पज्लर से काफी लाउड आवाज निकलती है। इसके चलते बच्चे भी काफी लाउड बात करने लगते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>5. प्ले-डोह</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्ले-डोह खिलौनों का एक सेट होता है, इसमें सैंड यानी मिट्टी जैसा एक मैटेरियल होता है, जिसे किसी भी<br />
आकार में ढाला जा सकता है। इसमें बच्चों के सामने एक टास्क होता है कि कुछ बनाकर उसे सेफ रखना। टास्क आसानी से पूरा नहीं होता जिससे बच्चे काफी डी-मोटिवेट हो जाते हैं।<br />
प्ले-डोह खिलौनों का एक सेट होता है, इसमें सैंड यानी मिट्टी जैसा एक मैटेरियल होता है, जिसे किसी भी आकार में ढाला जा सकता है। इसमें बच्चों के सामने एक टास्क होता है कि कुछ बनाकर उसे सेफ रखना। टास्क आसानी से पूरा नहीं होता जिससे बच्चे काफी डी-मोटिवेट हो जाते हैं।</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/big-and-scary-looking-toys-are-dangerous-for-children/article-87071</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 15:58:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Yawning Punishment: उबासी की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[Yawning Punishment: एक दिन तेनालीराम को रानी तिरुमाला ने संदेश भिजवाया कि वह बड़ी मुश्किल में हैं और उनसे मिलना चाहती हैं। रानी का संदेश पाकर तेनालीराम तुरंत रानी से मिलने पहुंच गए। तेनालीराम ने कहा, रानी जी! आपने इस सेवक को कैसे याद किया? इस पर रानी तिरुमाला ने कहा, तेनालीराम! हम एक बड़ी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/boiling-punishment/article-87091"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/boiling-punishment.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Yawning Punishment: एक दिन तेनालीराम को रानी तिरुमाला ने संदेश भिजवाया कि वह बड़ी मुश्किल में हैं और उनसे मिलना चाहती हैं। रानी का संदेश पाकर तेनालीराम तुरंत रानी से मिलने पहुंच गए। तेनालीराम ने कहा, रानी जी! आपने इस सेवक को कैसे याद किया? इस पर रानी तिरुमाला ने कहा, तेनालीराम! हम एक बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तेनालीराम ने कहा, ‘आप किसी भी तरह की चिंता बिल्कुल न करें और मुझे बताएं कि आखिर बात क्या है?’ तेनालीराम की बातें सुनकर रानी की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा, ‘दरअसल महाराज हमसे बहुत नाराज हैं।’ तेनालीराम ने कहा, ‘लेकिन क्यों? आखिर ऐसा क्या हुआ?’ रानी ने बताया, ‘एक दिन महाराज हमें एक नाटक पढ़कर सुना रहे थे और तभी अचानक हमें उबासी आ गई, बस इसी बात से नाराज होकर महाराज चले गए।’</p>
<p style="text-align:justify;">रानी ने तेनालीराम से कहा, ‘तब से कई दिन बीत गए हैं, लेकिन महाराज मेरे पास नहीं आए हैं। मैंने गलती न होते हुए भी महाराज से माफी भी मांग ली थी, लेकिन महाराज पर इसका कोई असर नहीं हुआ। अब तुम्हीं मेरी इस समस्या का समाधान बता सकते हो तेनालीराम।’</p>
<p style="text-align:justify;">तेनालीराम ने रानी से कहा, ‘आप बिल्कुल भी चिंता न करें महारानी! आपकी समस्या दूर करने की मैं पूरी कोशिश करूंगा।’ महारानी को समझा-बुझाकर तेनालीराम दरबार जा पहुंचे। महाराज कृष्णदेव राय राज्य में चावल की खेती को लेकर मंत्रियों के साथ चर्चा कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराज मंत्रियों से कह रहे थे, ‘हमारे लिए राज्य में चावल की उपज बढ़ाना आवश्यक है। हमने बहुत प्रयास किए। हमारी कोशिशों से स्थिति में सुधार तो हुआ है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।’ तभी अचानक तेनालीराम ने चावल के बीजों में से एक-एक बीज उठाकर कहा, ‘महाराज अगर इस किस्म का बीज बोया जाए, तो इस साल उपज कई गुना बढ़ सकती है।’</p>
<p style="text-align:justify;">महाराज ने पूछा, ‘क्या ये बीज इसी खाद के जरिए उपजाया जा सकता है?’ इस पर तेनालीराम ने कहा, ‘हां महाराज! इस बीज को बोने के लिए और कुछ करने की जरूरत नहीं है, परन्तु..!’ महाराज ने पूछा, ‘परन्तु क्या तेनालीराम? ‘तेनालीराम ने जवाब दिया, ‘शर्त यह है कि इस बीज को बोने, सींचने और काटने वाला व्यक्ति ऐसा होना चाहिए, जिसे जीवन में कभी उबासी न आई हो और न ही कभी उसे उबासी आए।’</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात सुनकर महाराज ने भड़कते हुए कहा, तेनालीराम! तुम्हारे जैसा मूर्ख व्यक्ति मैंने आज तक नहीं देखा।’ महाराज ने बिगड़ते हुए कहा, ‘क्या संसार में ऐसा कोई होगा जिसे कभी उबासी न आई हो। तेनालीराम ने कहा, ओह! मुझे माफ करें महाराज! मुझे नहीं पता था कि उबासी सबको आती है। मैं ही नहीं, महारानी जी भी यही समझती हैं कि उबासी आना बहुत बड़ा अपराध है, मैं अभी जाकर महारानी जी को भी यह बात बताता हूं।’</p>
<p style="text-align:justify;">तेनालीराम की बात सुनकर पूरी बात महाराज की समझ में आ गई। वे समझ गए कि तेनालीराम ने यह बात उन्हें सही रास्ता दिखाने के लिए कही थी। उन्होंने कहा, ‘मैं खुद जाकर यह बात महारानी को बता दूंगा।’ इसके बाद महाराज तुरंत महल जाकर रानी से मिले और उनके साथ सभी शिकायतों को दूर कर दिया।</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/boiling-punishment/article-87091</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 14:46:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जिसका काम उसी को साजे &amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[Story of Washerman: एक धोबी था। उसके पास एक गधा और एक कुत्ता था। धोबी सुबह-सुबह गधे पर कपड़े लादकर और कुत्ते को साथ ले घाट पर पहुंच जाता। घाट पर धोबी कपड़े धो-धोकर सुखाता और कुत्ता उनकी रखवाली करता जबकि गधा सारा दिन पेड़ की छांव में खड़ा घास चरता रहता। दिन ढलने पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/story-of-donkey-dog-and-the-washerman/article-87018"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-11/story.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Story of Washerman: एक धोबी था। उसके पास एक गधा और एक कुत्ता था। धोबी सुबह-सुबह गधे पर कपड़े लादकर और कुत्ते को साथ ले घाट पर पहुंच जाता। घाट पर धोबी कपड़े धो-धोकर सुखाता और कुत्ता उनकी रखवाली करता जबकि गधा सारा दिन पेड़ की छांव में खड़ा घास चरता रहता। दिन ढलने पर धोबी वापस आ जाता। एक रात धोबी के घर चोर घुस आया। आहट पाकर कुत्ते ने उसकी तरफ देखा, फिर मुंह फेरकर सो गया। ये दोनों घर के आंगन में थे। गधा खूंटे से बंधा था, कुत्ता एक चारपाई के नीचे सो रहा था। चोर के आने पर भी गधे ने कुत्ते को मुंह फेरकर सोते देखा तो उसे उसकी इस हरकत पर बड़ा क्रोध आया।</p>
<p style="text-align:justify;">वह बोला-‘अरे ओ नमक हराम! देखता नहीं मालिक के घर में चोर घुस आए हैं। भौंकता क्यों नहीं।’ ‘अरे काहे का मालिक! और तूने मुझे नमकहराम क्यों कहा? वो अगर मुझे खिलाता है, तो मैं भी सारा दिन घाट पर कपड़े की रखवाली करता हूं। जो कुत्ते दिन में सोते हैं, वही रात में रखवाली करते हैं। अगर मालिक को मुझसे रात में रखवाली करवानी होती तो मुझे दिन में आराम करने का मौका देता। क्या इतनी सी बात वह नहीं जानता।’ ‘कुछ भी है, जब तूने चोर को देख लिया है तो तुझे भौंकना चाहिए।’ ‘मैं भौंकूं या न भौंकूं, यह मेरा काम है। तू क्यों परेशान हो रहा है। तू आराम से खड़ा रह।’ ‘तू कुत्तों के नाम पर कलंक है। अपने मालिक का घर लुटवाना चाहता है, मगर मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।’ गधे ने कहा, फिर जोर-जोर से ढेंचू-ढेंचू करने लगा। कुत्ता आराम से सो रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्दर मालिक बड़ी ही प्यारी नींद ले रहा था। जैसे ही उसने ढेंचू-ढेंचू की आवाज सुनी, उसकी नींद में खलल पड़ गया। उसे बहुत गुस्सा आया। वह उठा, कोने में रखा डंडा उठाया और बाहर आकर गधे पर पिल पड़ा। गधा अपनी बात करने की कोशिश करने लगा। मगर मालिक कहां सुनने के मूड में था। उसकी अच्छी खासी मरम्मत करके वह फिर से सोने चला गया। गधा बेचारा कोने में गिरकर आंसू बहाने लगा। तभी कुत्ता उठकर उसके करीब आया और बोला-‘कुछ अक्ल आई गधे भाई। बुजुर्गों ने कहा है, जिसका काम उसी को साजे दूजा करे तो डंडा बाजे।’ Story of Washerman</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 16:36:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>कहानी: होमवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[Homework: डब्बू कभी भी अपना होमवर्क पूरा करके स्कूल नहीं जाता था। होमवर्क पूरा न करने के कारण स्कूल में उसे रोज डांट सुननी पड़ती थी और मार भी खानी पड़ती थी लेकिन वह अपनी आदत नहीं सुधारता था। मां जब उसे समझाती तो वह कहता, ‘दूसरे बच्चे भी तो होमवर्क पूरा करके नहीं लाते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/story-homework/article-87065"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-10/homework.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">Homework: डब्बू कभी भी अपना होमवर्क पूरा करके स्कूल नहीं जाता था। होमवर्क पूरा न करने के कारण स्कूल में उसे रोज डांट सुननी पड़ती थी और मार भी खानी पड़ती थी लेकिन वह अपनी आदत नहीं सुधारता था। मां जब उसे समझाती तो वह कहता, ‘दूसरे बच्चे भी तो होमवर्क पूरा करके नहीं लाते तो मैं ही क्यों ले जाऊं?’</h6>
<h6 style="text-align:justify;">एक बार की बात है, डब्बू को स्कूल में होमवर्क दे कर क्लास टीचर गोलू सियार ने सख्त हिदायत देते हुए कहा, ‘अगर तुम कल होमवर्क पूरा करके नहीं लाये तो तुम्हें दिनभर मुर्गा बनाकर धूप में छोड़ दूंगा।’ डब्बू को मुर्गा बनने से बहुत डर लगता था, उसने ठान लिया कि चाहे कुछ हो जाए। कल वह होमवर्क पूरा करके जरूर जाएगा। घर आकर उसने हल्का नाश्ता किया और तुरंत होमवर्क करने बैठ गया। आज वह खेलने नहीं गया। उसे होमवर्क करते देख मां को बहुत हैरानी हुई और खुशी भी। मां को एक जरूरी काम से उसे बाजार भेजना था, लेकिन उन्होंने पढ़ने से नहीं उठाया, अच्छा ही है कि वह अपना होमवर्क पूरा कर रहा है माँ ने सोचा, ‘मैं खुद जाकर बाजार से सामान ले आती हूं।’यह सोचकर मां ने डब्बू से कहा, ‘मैं सामान लाने जा रही हूं,घर का भी ध्यान रखना।’</h6>
<h6 style="text-align:justify;">डब्बू होमवर्क करने में मग्न था। तभी वहां उसके दोस्त भोलू भालू, छोटू हाथी, चंपू चूहा आए। डब्बू को होमवर्क करते देख तीनों एक साथ बोले, ‘तुम यहां बैठकर होमवर्क पूरा कर रहे हो और वहां हम मैदान में बैठकर तुम्हारा कब से इंतजार कर रहे थे। आज खेलने नहीं चलोगे क्या?’ ‘नहीं यार, मुझे अपना होमवर्क पूरा करना है,’ डब्बू ने जवाब दिया, ‘तुम लोग जाओ।’</h6>
<h6 style="text-align:justify;">‘तुम होमवर्क क्यों कर रहे हो?’ चंपू बोला।<br />
‘अगर होमवर्क पूरा नहीं करूंगा तो टीचर मुझे मुर्गा बना देंगे।’<br />
‘कैसे बना देंगे,’-छोटू हाथी ने अकड़ते हुए कहा, ‘अगर उन्होंने तुम्हें मुर्गा बनाने की कोशिश की तो हम लोग उसका विरोध करेंगे।’<br />
‘हां, विरोध करेंगे, भोलू और चंपू ने भी समर्थन किया।<br />
दोस्तों की बातों में आ कर उसका मन डोल गया। उसने कुछ सोचते हुए कहा, ‘ठीक है, तुम लोग जाओ। मैं पीछे से आता हूं। मां बाजार गई है मां के आते ही मैं वहां आ जाऊंगा।’<br />
तीनों चले गए। डब्बू ने होमवर्क करना छोड़ दिया। कुछ ही देर में उसकी मां बाजार से लौट आई, ‘मां, मैं खेलने जा रहा हूं।’ उसने कहा।<br />
‘लगता है तुमने अपना होमवर्क पूरा कर लिया।’ मां खुश हो कर बोली।<br />
‘अभी पूरा नहीं किया। खेलकर आने के बाद पूरा कर लूंगा।’ उसने कहा।<br />
‘बेटा, काम अधूरा छोड़ना अच्छी बात नहीं है, मां ने उसे समझाने की कोशिश की, ‘अपना होमवर्क पूरा करके खेलने जाओ।’</h6>
<h3 style="text-align:justify;">लेकिन मां की बात अनुसनी करके वह खेलने चल दिया | Homework</h3>
<h6 style="text-align:justify;">होमवर्क पूरा करके न जाने के कारण अगले दिन टीचर उस पर बहुत नाराज हुए। उन्होंने गुस्से में आ कर उसे मुर्गा बना दिया। डब्बू के दोस्त उसकी कोई मदद नहीं कर सके जबकि उन्होंने कल कहा था कि अगर टीचर ने तुम्हें मुर्गा बनाने की कोशिश की तो हम विरोध करेंगे। उसे अपने दोस्तों पर बहुत गुस्सा आया। एक घंटे तक मुर्गा बनाने के बाद टीचर ने उसे माफ कर दिया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उन्होंने पूछा, ‘तुमने अपना होमवर्क पूरा क्यों नहीं किया था। क्या किसी जरूरी काम में उलझ गए थे?’ तब डब्बू ने उन्हें दोस्तों के बारे में बताया। टीचर ने कहा, ‘दूसरे की सिखाई गलत सीख दीवार बन कर रास्ता रोकती है। तुम्हें दूसरे के प्रति नहीं, स्वयं के प्रति उत्तरदायी होना सीखना चाहिए। इससे तुम्हारे कर्मठ जीवन की नींव खड़ी होगी। याद रखो, इसी से तुम जीवन में सफलता पा सकोगे।</h6>
<p style="text-align:right;"><strong><em>-हेमंत यादव</em></strong></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Oct 2025 15:18:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Fish and Frog Story: दो मछलियां और एक मेंढक</title>
                                    <description><![CDATA[Fish and Frog Story: एक बार की बात है, एक तालाब में दो मछलियां और एक मेंढक साथ रहा करते थे। एक मछली का नाम शतबुद्धि और दूसरी का नाम सहस्त्रबुद्धि था। वहीं, मेंढक का नाम एकबुद्धि था। मछलियों को अपनी बुद्धि पर बड़ा घमंड था, लेकिन मेंढ़क अपनी बुद्धि पर कभी घमंड नहीं करता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/two-fish-and-a-frog/article-87092"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/a-fish.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Fish and Frog Story: एक बार की बात है, एक तालाब में दो मछलियां और एक मेंढक साथ रहा करते थे। एक मछली का नाम शतबुद्धि और दूसरी का नाम सहस्त्रबुद्धि था। वहीं, मेंढक का नाम एकबुद्धि था। मछलियों को अपनी बुद्धि पर बड़ा घमंड था, लेकिन मेंढ़क अपनी बुद्धि पर कभी घमंड नहीं करता था। फिर भी तीनों आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे। तीनों इकट्ठे तालाब में एकसाथ घूमा करते थे और हमेशा साथ रहते थे। Fish and Frog Story</p>
<p style="text-align:justify;">जब भी कोई समस्या आती, तो तीनों साथ मिलकर उससे निपटते थे। एक दिन नदी के किनारे से मछुआरे जा रहे थे। उन्होंने देखा कि तालाब मछलियों से भरा हुआ है। मछुआरों ने कहा ‘हम कल सुबह यहां आएंगे और बहुत सारी मछलियां पकड़कर ले जाएंगे।’ मेंढक ने मछुआरों की सारी बातें सुन ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वह तालाब में मौजूद सभी की जान बचाने के लिए अपने दोस्तों के पास गया। उसने शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि को मछुआरों की सारी बात बताई। एकबुद्धि मेंढक ने कहा ‘उन्हें अपनी जान बचाने के लिए कुछ करना चाहिए।’ दोनों मछलियां कहने लगीं-‘हम मछुआरों के डर से अपने पूर्वजों की जगह छोड़कर नहीं जा सकते हैं।’ दोनों ने फिर कहा-‘हमें डरने की जरूरत नहीं है, हमारे पास इतनी बुद्धि है कि हम अपना बचाव कर सकती हैं।’ वहीं, एकबुद्धि मेंढक ने कहा -‘मुझे पास में मौजूद एक तालाब के बारे में पता है, जो इसी तालाब से जुड़ा है।’ उसने तालाब के अन्य जीवों को भी साथ चलने को कहा, लेकिन कोई भी एकबुद्धि मेंढक के साथ जाने को तैयार नहीं था, क्योंकि सभी को शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि पर भरोसा था कि वो उन सबकी जान बचा लेंगी। Fish and Frog Story</p>
<p style="text-align:justify;">मेंढक ने कहा-‘तुम सब मेरे साथ चलो। मछुआरे सुबह तक आ जाएंगे।’ इस पर सहस्त्रबुद्धि ने कहा -‘उसे तालाब में छिपने की एक जगह पता है।’ शतबुद्धि ने भी कहा-‘उसे भी तालाब में छिपने की जगह मालूम है।’ इस पर मेंढक ने कहा ‘मछुआरों के पास बड़ा जाल है। तुम उनसे नहीं बच सकते हो’, लेकिन मछलियों को अपनी बुद्धि पर बहुत गुमान था। उन्होंने मेंढक की एक न सुनी, लेकिन मेंढक उसी रात अपनी पत्नी के साथ दूसरे तालाब में चला गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि ने एकबुद्धि का मजाक उड़ाया। अब अगली सुबह मछुआरे अपना जाल लेकर वहां आ पहुंचे। उन्होंने तालाब में जाल डाला। तालाब के सभी जीव अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे, लेकिन मछुआरों के पास बड़ा जाल था, जिस कारण कोई भी बचकर नहीं जा सका। जाल में बहुत सारी मछलियां पकड़ी गईं। शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि ने भी बहुत बचने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी मछुआरों ने पकड़ ही लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उन्हें तालाब से बाहर लाया गया, तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि का आकार सबसे बड़ा था, इसलिए, मछुआरों ने उन्हें अलग रखा था। उन्होंने बाकी मछलियों को एक टोकरी में डाला, जबकि शतबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि को कंधे पर उठाकर चल दिए। जब वह दूसरे तालाब के सामने पहुंचे, तो एकबुद्धि मेंढक की नजर इन दोनों पर पड़ी। उसे अपने मित्रों की यह हालत देख बड़ा दुख हुआ। उसने अपनी पत्नी से कहा कि काश इन दोनों ने मेरी बात मान ली होती, तो आज ये जिंदा होती। Fish and Frog Story</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>कहानी से सीख: कभी भी अपनी बुद्धि पर घमंड नहीं करना चाहिए। एक दिन यही घमंड जानलेवा साबित हो सकता है।</em></strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/two-fish-and-a-frog/article-87092</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 15:50:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Math Easy: गणित को असान बनाने के आसान तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[Math Easy: हमारे देश में आमतौर पर ऐसे विद्यार्थी हर एक स्कूल में मिल जाते है जो मैथ नाम के सब्जेक्ट से अक्सर डरते है, इसलिए हम आज इस आर्टिक्ल में आपके गणित नाम का भूत भगाने की कोशिश करेंगे, उम्मीद है कि इसको पढ़ने के बाद आपको गणित भी दूसरे सब्जेक्ट की तरह आसान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/easy-ways-to-make-math-easy/article-87087"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/math.jpg" alt=""></a><br /><p class="ai-optimize-6 ai-optimize-introduction" style="text-align:justify;">Math Easy: हमारे देश में आमतौर पर ऐसे विद्यार्थी हर एक स्कूल में मिल जाते है जो मैथ नाम के सब्जेक्ट से अक्सर डरते है, इसलिए हम आज इस आर्टिक्ल में आपके गणित नाम का भूत भगाने की कोशिश करेंगे, उम्मीद है कि इसको पढ़ने के बाद आपको गणित भी दूसरे सब्जेक्ट की तरह आसान लगेगा। इसलिए इस हमारे द्वारा दी जा रही नसीहतों पर जरूर आजमाएं।</p>
<h4 class="ai-optimize-7" style="text-align:center;"><strong> बहुत से स्टूडेंट्स गणित से घबराते है, लेकिन याद रखे कि गणित केवल एक एजुकेशन कोर्स है। इससे बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं।</strong></h4>
<h5 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;"><strong>1. पॉजिटिव माइंडसेट</strong><br />
पॉजिटिव सोच रखने से चिंता कम हो जाती है। इसकी वजह से हम चीजों का उजला पहलू देखते हैं और अपने भविष्य को लेकर आशावादी होकर सबसे बेहतर की उम्मीद करते हैं।</h5>
<h5 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;"><strong>2. प्रश्न पूछे</strong><br />
गणित की क्लासेज लेते समय यह जरूरी है कि हम फैकल्टी द्वारा दी जा रही सेवा का पूरा फायदा उठाएंँ क्लीयर इस्ट्रेशंस, डिमॉन्स्ट्रैशंस या कंटेंट के लिए सिम्युलेशन के लिए उनसे पूछे और जब तक समझ ना आए, तब तक इसे आगे ना बढ़े।</h5>
<h5 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;"><strong>3. प्रैक्टिस करते रहेंं</strong><br />
गणित में नियम रूल्स, प्रोसेस और प्रोसिजर होते हैं। हर दिन थोड़ी-थोड़ी प्रैक्टिस करने से प्रोसेस साफ हो जाती है। सही समय पर सही जज करने से ही बात बनती है।</h5>
<h5 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;"><strong>4. किसी ट्यूटर या स्टूडेंटकी मदद ले</strong><br />
ट्यूटर के साथ ही आप किसी ऐसे स्टूडेंट की भी मदद ले सकते हैं, जो कोर्स के कंटेंट को समझता हो।</h5>
<h5 class="ai-optimize-8" style="text-align:justify;"><strong>5. रट्टा ना मारें | Math Easy</strong><br />
प्रोसिजर को सच में समझने और मैथ्स की प्रॉब्लम्स सॉल्व करने के लिए ये जरूरी है कि आप प्रैक्टिस करें, उसका रट्टा ना मारें। एक बार कॉन्सेप्ट समझ लिया तो फिर बाकी समस्याएं भी हल हो जाती है।</h5>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/easy-ways-to-make-math-easy/article-87087</link>
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                <pubDate>Fri, 30 May 2025 15:30:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Hardworking Ramu: मेहनती रामू</title>
                                    <description><![CDATA[Hardworking Ramu: अक्सर बचपन में बच्चे मां-बाप की गोद में खेलते हैं। दोस्तों के साथ उछल-कूद मचाते हैं पर रामू को यह सब नसीब नहीं हुआ क्योंकि बचपन में ही उसके माता-पिता की एक रेल दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। उस समय वह मात्र आठ वर्ष का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/hardworking-ramu/article-87084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-05/ramu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Hardworking Ramu: अक्सर बचपन में बच्चे मां-बाप की गोद में खेलते हैं। दोस्तों के साथ उछल-कूद मचाते हैं पर रामू को यह सब नसीब नहीं हुआ क्योंकि बचपन में ही उसके माता-पिता की एक रेल दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था।</p>
<p style="text-align:justify;">उस समय वह मात्र आठ वर्ष का था। रेल में अपने माता-पिता के साथ वह भी था लेकिन संयोगवश वह बच गया। रेलवे के एक अधिकारी ने उसे आश्रय दिया। उस अधिकारी के अपने दो बच्चे थे जो रामू से काफी बड़े थे। वे दोनों रामू को बहुत प्यार करते थे। अधिकारी की पत्नी भी रामू से सहानुभूति रखती थी। रामू घर के छोटे-मोटे कामों में उनकी मदद कर देता था। Hardworking Ramu</p>
<p style="text-align:justify;">दिन बीतते गए। रामू को एक बात की हैरानी थी कि उस अंकल ने कभी उससे उसकी पढ़ाई-लिखाई के बारे में नहीं पूछा था जबकि वह पढ़ना चाहता था। जब उसके माता-पिता का देहांत हुआ तो वह अपने गांव के सरकारी स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ता था। वह शुरू से ही पढ़ने में काफी होशियार था।</p>
<p style="text-align:justify;">दीवाली का त्यौहार आया। अंकल ने अपने बच्चों के लिए नए कपड़े सिलवाए व उन्हें खूब सारे पटाखे लाकर दिए और फिर उन्हें रामू का ख्याल आया। उन्होंने रामू से पूछा, बेटा, तुम्हें दीवाली पर क्या चाहिए-पटाखे व नए कपड़े या फिर कुछ और…..।’</p>
<p style="text-align:justify;">रामू बोला, मुझे न तो पटाखे चाहिए व न ही नए कपड़े। मैं तो पढ़ना चाहता हूं।’ बात सुनकर अंकल को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसकी पढ़ाई के बारे में सोचा ही नहीं था।बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु बाहर चले गए थे।<br />
उन्होंने अगले वर्ष रामू को चौथी कक्षा में प्रवेश दिलवा दिया। अब रामू मन लगाकर पढ़ने लगा। वह पहले की तरह ही आंटी के साथ काम भी करवाता था। Hardworking Ramu</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार आंटी सख्त बीमार पड़ गईं। रामू ने उनकी खूब सेवा की। वह सुबह जल्दी उठता। रसोई के कामों में घर की नौकरानी की मदद करता। बाजार से आंटी के लिए दवा व फल लाता। यदि अंकल को समय न होता तो सब्जी व अन्य सामान भी वही खरीदकर लाता। आंटी को समय पर दवा खिलाता। वह उनका पूरा ख्याल रखता था।<br />
इस दौरान वह काफी दिन तक स्कूल नहीं जा पाया था। परीक्षाएं नजदीक आ रही थीं। अंकल को चिंता थी कि रामू फेल हो जाएगा लेकिन जब उसका परीक्षा परिणाम घोषित हुआ तो वह प्रथम श्रेणी से पास हुआ था।<br />
सब यह देखकर दंग रह गए।</p>
<p style="text-align:justify;">अंकल ने रामू से पूछा, बेटा, तुमने पढ़ाई कब की। पूरा दिन तो तुम आंटी की सेवा में ही…।’<br />
रामू बोला, अंकल, रात को जब आप सब सो जाते थे तो मैं अपने कमरे में पढ़ाई कर लेता था।’<br />
इसकी बात सुनकर अंकल व आंटी की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने उसे गले से लगा लिया।<br />
अपनी लगन व परिश्रम से वही अनाथ रामू आगे चलकर डॉक्टर बन गया।                                                                                                                                         <em><strong>-भाषणा गुप्ता</strong></em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/hardworking-ramu/article-87084</link>
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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 15:35:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Story: लालच बुरी बला है</title>
                                    <description><![CDATA[Lalach Buri Bala: ‘हे भगवान, इस वन में अकाल पड़े, सूखा पड़े और बाढ़ आए ताकि वन के जानवर तबाह और बरबाद हो जाएं,’ सुंदर वन का महाराज खैरातीलाल सियार रोज भगवान की मूर्ति के आगे हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता था। Children’s Story एक दिन जब वह यही प्रार्थना कर रहा था तो उसकी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/greed-is-bad-story/article-87077"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/greed-is-bad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Lalach Buri Bala: ‘हे भगवान, इस वन में अकाल पड़े, सूखा पड़े और बाढ़ आए ताकि वन के जानवर तबाह और बरबाद हो जाएं,’ सुंदर वन का महाराज खैरातीलाल सियार रोज भगवान की मूर्ति के आगे हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता था। Children’s Story</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन जब वह यही प्रार्थना कर रहा था तो उसकी पत्नी बोली, ‘तुम क्यों जानवरों की तबाही और बरबादी के लिए रोज इस तरह प्रार्थना करते हो। कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी रोज लालच के कारण तबाह और बरबाद हो जाओ।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘मेरी पत्नी होकर तुम मेरा बुरा सोचती हो,’ सियार ने गुस्से से कहा, ‘कैसी पत्नी हो तुम। आखिर मैं किसके लिए पैसे कमाता हूं।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘जानवरों का खून चूसचूस कर जमा करने के लिए’, सियार की पत्नी ने दो टूक उत्तर दिया, ‘गरीब, लाचार, और बेबस जानवरों को सूद पर कर्ज दे दे कर तुम सेठ तो बन गए हो, लेकिन पैसे का लालच अभी भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ रहा है।’ खैरातीलाल सियार सूद ब्याज पर पैसे देने का काम करता था। वह एक नंबर का लालची और जालिम था। एक बार जो उसके चंगुल में फंस जाता था, वह जीवनभर उसके कर्ज से मुक्त नहीं हो पाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीब और लाचार जानवरों का खून चूस चूस कर उसने खूब पैसा जमा कर लिया था। उसके पास जितना पैसा आता जा रहा था, उसकी पैसे की भूख उतनी ही बढ़ती जा रही थी। Children’s Story</p>
<p style="text-align:justify;">सियार अपने पैसे बैंक में जमा नहीं करता था। वह सोचता था कि बैंक में पैसे जमा करने से एक दिन लुटेरे उसका भी पैसा लूट कर ले जाएंगे। आए दिन बैंक लूट की खबर अखबार में पढ़कर वह ऐसा सोचता था।</p>
<p style="text-align:justify;">वह अपना पैसा बहुत हिफाजत के साथ घड़े में डालकर जमीन में गाड़ कर रखता था। पैसे रखने की जानकारी वह अपनी पत्नी को भी नहीं होने देता था। वह सोचता था कि पत्नी पैसे देख लेगी तो खाने-पीने में खर्च कर देगी।<br />
इतना पैसा होने के बावजूद वह रूखा-सूखा खा कर गुजारा करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन सियार घड़े में पैसे रखकर अपने घर में ही जमीन में गाड़ रहा था कि तभी उसकी पत्नी ने उसे देख लिया।<br />
वह उसे धिक्कारती हुई बोली, झ्तुम तो हमेशा कहते हो कि पैसे मेरे लिए कमाते हो लेकिन मुझे कभी अच्छा खाना नहीं देते। स्वयं भी रूखा सूखा खाते हो और मुझे भी खिलाते हो, रूखासूखा खा-खा कर मैं तो सूख कर कांटा हो गई हूं।’<br />
झ्अरी भाग्यवान,’ सियार ने पत्नी को प्यार से पुचकारते हुए कहा, ‘एक बार भगवान मेरी प्रार्थना सुन ले तो मैं तुम्हें सिर्फ अच्छा खाना ही नहीं दूंगा बल्कि अच्छे कपड़े और गहनों से भी लाद दूंगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">रात का समय था। पैसे का घड़ा जमीन में गाड़कर वह सोने चला गया मगर आज उसे नींद नहीं आ रही थी। वह सोच रहा था कि अगर वह सो गया तो उसकी पत्नी कहीं पैसे का घड़ा निकाल न ले।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी पत्नी जब गहरी नींद में सो गई तो वह उठा और कुछ सोचकर पैसे का घड़ा जमीन से निकाला और उसे लेकर नदी के किनारे चल दिया। नदी के किनारे उसकी जमीन थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनसान रात में नदी किनारे पहुंच कर उसने अपनी जमीन में एक गड्डा खोदा और उसमें घड़ा गाड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">‘किसी को पता नहीं चलेगा कि यहां घड़ा गाड़ा हुआ है’, यह सोचकर वह निश्चिंत होकर अपने घर में जा कर सो गया।<br />
संयोग से उसी रात खूब मूसलाधार बारिश हुई। इतनी बारिश हुई कि नदी में बाढ़ आ गई। सियार ने जहां अपना घड़ा गाड़ा था, वह स्थान पानी की तेज धार से कटकर नदी में विलीन हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सियार को जब पता चला तो वह दौड़ा-दौड़ा वहां गया, वहां का दृश्य देखकर वह दहाड़ें मार-मार कर रोने लगा। उसकी दशा पागलों जैसी हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी पत्नी ने जब उससे इस तरह रोने का कारण पूछा तो उसने रोते हुए सारी बात बताई, ‘हाय, मैं तो लुट गया, बरबाद हो गया। कंगाल हो गया मैं तो’।</p>
<p style="text-align:justify;">वह दोनों हाथों से अपना सिर धुनने लगा। Children’s Story</p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 16:30:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Best Earth Dweller: सबसे अच्छे धरतीवासी</title>
                                    <description><![CDATA[Best Earth Dweller: कुशीनगर कस्बे से कुछ दूरी पर एक वैज्ञानिक डॉ. कृष्णकांत रहते थे। उनका एक बेटा था कपिल। कपिल को पढ़ने का बहुत शौक था। वह अपने पिता से तरह-तरह के प्रश्न पूछता रहता था। उसका मन बहलाने के लिए उसके पिता ने उसे दो पालतू जानवर ला दिए थे। एक दिन कपिल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/best-earth-dweller/article-87085"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/best-earth-dweller.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Best Earth Dweller: कुशीनगर कस्बे से कुछ दूरी पर एक वैज्ञानिक डॉ. कृष्णकांत रहते थे। उनका एक बेटा था कपिल। कपिल को पढ़ने का बहुत शौक था। वह अपने पिता से तरह-तरह के प्रश्न पूछता रहता था। उसका मन बहलाने के लिए उसके पिता ने उसे दो पालतू जानवर ला दिए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन कपिल के पिता ने उसे अंतरिक्ष से संबंधित एक किताब दी। कपिल अपने पालतू कुत्ते पिक्कू और टीटू तोते को ले कर पार्क में किताब पढ़ने चला गया। वहां कुछ देर खेलने के बाद वह किताब पढ़ने लगा। फिर उसे नींद आ गई।<br />
अचानक उसे लगा कि थोड़ी दूरी पर प्रकाश फूट रहा है। वह एक पेड़ के पीछे छिप कर देखने लगा। वह एक उड़न तश्तरी थी। उसका दरवाजा खुला था। कपिल उत्सुकतावश उसमें चला गया। उसके अंदर घुसते ही दरवाजा बंद हो गया। पल भर में उड़न तश्तरी अंतरिक्ष में जा पहुंची।</p>
<p style="text-align:justify;">कपिल आंखें फाड़-फाड़ कर चमकते तारों, उपग्रहों, उल्का पिंडों को पहली बार इतने नजदीक से देख रहा था। कुछ देर बाद उड़न तश्तरी शनि ग्रह पर उतर गई। वहां अजीब-अजीब से प्राणी घूम रहे थे पर किसी ने उसकी तरफ देखा तक नहीं। उसे भूख लगी थी, पर कोई खाने तक के लिए नहीं पूछ रहा था। वहां उसे ऐसा कुछ न मिला जो उसके मन को मोह सके। वह रोने ही वाला था कि भौंकने की आवाज सुन कर हड़बड़ा गया। उसने देखा, वह तो सपनों में खो गया था। वह तुरंत घर की ओर वापस चल पड़ा। वह समझ गया था कि धरती के लोगों की तरह दूसरे ग्रह के लोगों के पास दूसरों को देने के लिए प्यार नहीं होता। वह धरती पर ही खुश था।<br />
<strong>                                                                                                                 -नरेन्द्र देवांगन</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–</strong><a title="बच्चों ने समझाई, होली खेलने की खुशी" href="http://10.0.0.122:1245/story-of-the-joy-of-playing-holi/">बच्चों ने समझाई, होली खेलने की खुशी</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 16:40:22 +0530</pubDate>
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