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                <title>Knowledge Cell - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जानें क्या है IMDb</title>
                                    <description><![CDATA[IMDb ऐप भी है जिसे आप अपने फोन पर डाउनलोड करके इस्तेमाल कर सकते हैं। इस वेबसाइट में आपको नेशनल और इंटरनेशनल सिनेमा की हर तरह की फिल्मों, टीवी शोज, सेलिब्रिटीज, अवॉर्ड और इवेंट्स के साथ वेब सीरीज का पूरा-लेखा जोखा मिल जाएगा।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/know-what-is-imdb/article-21194"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/imdb.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अगर सोशल मीडिया यूज करते हैं और फिल्मों के शौकीन हैं तो आपको पता होगा कि IMDb एक पब्लिक डोमेन वेबसाइट है, जिसमें आप अपना अकाउंट बना सकते हैं। IMDb ऐप भी है जिसे आप अपने फोन पर डाउनलोड करके इस्तेमाल कर सकते हैं। इस वेबसाइट में आपको नेशनल और इंटरनेशनल सिनेमा की हर तरह की फिल्मों, टीवी शोज, सेलिब्रिटीज, अवॉर्ड और इवेंट्स के साथ वेब सीरीज का पूरा-लेखा जोखा मिल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा आपकी पसंद और ट्रेंड के हिसाब से ये साइट आपको मूवी या वेब शो के सजेशन्स भी देती है। माने ये वेबसाइट आपको बताती है कि आप कौन सी फिल्म देख सकते हैं, कौन सी फिल्म आने वाली है। हर फिल्म के आगे, फिल्म की रिलीज डेट, उसका टोटल समय और फिल्म का जॉनर लिखा होता है। साथ ही उसी के बगल में एक स्टार का सिंबल होता है। जिसमें फिल्म की रेटिंग लिखी होती है। इसमें 1 से 10 के बीच रेटिंग होती है। इसी रेटिंग को देखकर ही लोग ये तय करते हैं कि कोई फिल्म अच्छी है या खराब।</p>
<p style="text-align:justify;">1-10 के बीच जिनकी रेटिंग 7 या उससे ज्यादा हो, लोग मान लेते हैं कि फिल्म अच्छी होगी। वहीं रेटिंग 4 या उससे कम हो तो उस फिल्म को वाहियात फिल्मों में गिना जाता है। (वैसे ये आंकड़ा कहीं तय नहीं किया गया है। ये बस एक जनरल नंबर्स हैं। आपका पैमाना कुछ और भी हो सकता है।) मगर इस आईएमडीबी पर रेटिंग देखते समय कुछ चीजें ध्यान में रखनी जरूरी हैं। हो सकता है इसे पढ़ने के बाद रेटिंग देखने का आपका नजरिया बदल जाए।</p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Jan 2021 10:30:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>म्यूचुअल फंड</title>
                                    <description><![CDATA[आसान शब्दों में कहें तो म्यूचुअल फंड का अर्थ होता है सामूहिक निवेश। शाब्दिक अर्थों की बात करें तो इसे पारस्परिक निधि कहा जा सकता है। विभिन्न निवेशकों से एकत्र धनराशि से शेयर व प्रतिभूतियों में निवेश करके लाभ अर्जित करने वाले फंड को म्यूचुअल फंड कहते हैं। इसमें निवेश से अधिकतम लाभ अर्जित करने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/mutual-fund/article-21108"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/mutual-fund.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आसान शब्दों में कहें तो म्यूचुअल फंड का अर्थ होता है सामूहिक निवेश। शाब्दिक अर्थों की बात करें तो इसे पारस्परिक निधि कहा जा सकता है। विभिन्न निवेशकों से एकत्र धनराशि से शेयर व प्रतिभूतियों में निवेश करके लाभ अर्जित करने वाले फंड को म्यूचुअल फंड कहते हैं। इसमें निवेश से अधिकतम लाभ अर्जित करने के लिए फण्ड मैनेजर धन का प्रबंधन करते हैं। उपरोक्त प्रकार से अर्जित हर लाभ एवं हानि सभी निवेशकों में समान रूप से वितरित की जाती है। भारत में म्यूचुअल फंड की सभी कंपनियों का पंजीकरण सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया) के अंतर्गत होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सेबी ये सुनिश्चित करती है कि भारत में पंजीकृत हर कम्पनी अपने निवेशकों के हितों के साथ कोई भी खिलवाड़ न करे। म्यूचुअल फंड में बड़ी रकम ही निवेश करना जरूरी नहीं होता। आप म्यूचुअल फंड में मात्र 500 रुपए से निवेश शुरू कर सकते हैं और बाद में इस निवेश को बढ़ाया जा सकता है। आपकी निवेश राशि का कुशल प्रबंधन फण्ड मैनेजर द्वारा किया जाता है। ये पूरी जानकारी एकत्र करने के बाद लाभ दे रहे शेयर एवं अन्य प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: एक नया निवेशक भी सरलता से निवेश कर सकता है। म्यूचुअल फंड के द्वारा हम विविध प्रकृति के माध्यमों में निवेश कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर समझें तो सीधे इक्विटी स्टॉक में निवेश करके सिर्फ कुछ कंपनियों में निवेश किया जा सकता है। दूसरी तरफ म्युचुअल फंड में निवेश किया गया पैसा सैकडों स्टॉक में निवेश किया जाता है। अत: ये कहना गलत न होगा कि म्यूचुअल फंड हमे निवेश की विविधता प्रदान करते हैं। म्यूचुअल फंड में निवेश करना बेहद आसान है। निवेशक आॅनलाइन या आॅफलाइन दोनों माध्यमों से निवेश कर सकते हैं।</p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Jan 2021 10:15:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रजनन के बाद अपने पंख गिरा देता है मोर</title>
                                    <description><![CDATA[जंगलों में मौजूद मोर विभिन्न शिकारियों और कठोर मौसम से लगातार जोखिम में हैं, जो उनके समग्र जीवनकाल को लगभग 20 साल या अधिक तक सीमित करता है। हालांकि, मोर जो चिड़ियाघर या अन्य नियंत्रित वातावरण में हैं, वे 40 साल तक जीवित रहते हैं। मोर पानी में प्रवेश नहीं कर सकते और तैर नहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/peacock-drops-its-wings-after-breeding/article-19394"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/peacock-drops-its-wings-after-breeding.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">जंगलों में मौजूद मोर विभिन्न शिकारियों और कठोर मौसम से लगातार जोखिम में हैं, जो उनके समग्र जीवनकाल को लगभग 20 साल या अधिक तक सीमित करता है। हालांकि, मोर जो चिड़ियाघर या अन्य नियंत्रित वातावरण में हैं, वे 40 साल तक जीवित रहते हैं। मोर पानी में प्रवेश नहीं कर सकते और तैर नहीं सकते। उनके पैर जमीन पर मजबूती से टिकने के लिए होते हैं और उनके पैरों की उंगलियों के बीच में फंसी हुई त्वचा की उपस्थिति नहीं होती है, जिससे अन्य जल पक्षियों को तैरने में आसानी होती है। उनके पंखों का भी पानी में कोई फायदा नहीं है। मोर की पुकार गांव के लोगों के बीच प्रचलित है या जब आप जंगल सफारी के लिए जाते हैं। अधिकांश पुकार एक शिकारी की उपस्थिति के संकेत है। लेकिन मोर केवल मनोरंजन के लिए नकली पुकार भी किया करते हैं। जब वे खतरा महसूस करते हैं या चिढ़ जाते हैं तो वे बहुत सी आवाजें करते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हालांकि मोर जंगलो में देखे जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां मोर को पालतू पक्षी माना जाता है। ये आमतौर पर ऐसे क्षेत्र हैं जहां मौसम चरम सीमा तक नहीं पहुंचता है। मोर के पंक एक निरपेक्ष सुंदरता है, और बहुत सारे लोग अपने लिए उन पंखों को रखने की मांग करते हैं। एक बार प्रजनन का मौसम समाप्त होने पर मोर अपने सभी पंखों को गिरा देते हैं। 16 किमी / घंटा की गति तक मोर चल सकते हैं और कुछ मिनटों के लिए उड़ान भरते हैं। मादा मोर एक समय में 4 से 7 अंडे दे सकती है। अंडों का रंग हल्का भूरा होता है। मोर की आवाज बेहद ऊंची होती हैं। बारिश के मौसम में, वे म्याओविंग ध्वनि करते हैं। लगभग 11 अलग-अलग ध्वनियां हैं जो एक मोर निकाल सकता है। मोर सवार्हारी होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे पौधों और जानवरों दोनों को खाते हैं। मोर ज्यादातर पौधों, कीटों और छोटे जीवों यहाँ तक की कभी कभी सांपो को भी खा जाते हैं । मोर उड़ सकते हैं लेकिन केवल सीमित दूरी के लिए। वे जमीन पर रहना पसंद करते हैं और केवल तभी उड़ते हैं जब एक शिकारी से बचने की कोशिश करते हैं या रात के माध्य में सोने के लिए पेड़ के ऊपर तक पहुंचने के लिए।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Oct 2020 21:18:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोबेल विजेता वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना</title>
                                    <description><![CDATA[पेड़ के नीचे पढ़ाई करने वाले एक छोटे से गांव के लड़के से नोबेल विजेता बनने तक हरगोविंद खुराना का सफर संघर्ष और जिजीविषा की दास्तान है। उनका नाम उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में शामिल है जिन्होंने बायोटेक्नॉलॉजी की बुनियाद रखने में अहम भूमिका निभाई थी। हरगोविंद खुराना का जन्म नौ जनवरी, 1922 को रायपुर नाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/nobel-laureate-scientist-har-gobind-khorana/article-19249"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/har-gobind-khorana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पेड़ के नीचे पढ़ाई करने वाले एक छोटे से गांव के लड़के से नोबेल विजेता बनने तक हरगोविंद खुराना का सफर संघर्ष और जिजीविषा की दास्तान है। उनका नाम उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में शामिल है जिन्होंने बायोटेक्नॉलॉजी की बुनियाद रखने में अहम भूमिका निभाई थी। हरगोविंद खुराना का जन्म नौ जनवरी, 1922 को रायपुर नाम के गांव में हुआ था जो अब पाकिस्तान के मुल्तान जिले का हिस्सा है। एक बहन और चार भाइयों में हरगोविंद सबसे छोटे थे। 1943 में उन्होंने लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और 1945 में यहीं से पोस्टग्रेजुएशन। 1948 में उन्होंने पीएचडी पूरी की। इसके बाद उन्हें भारत सरकार ने स्कॉलरशिप दी और वे आगे की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन स्थित लिवरपूल यूनिवर्सिटी चले गए। 1952 में नौकरी की एक पेशकश उन्हें कनाडा की यूनिवर्सिटी आॅफ ब्रिटिश कोलंबिया ले गई।</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं हरगोविंद खुराना ने जीव विज्ञान में वह काम शुरू किया जिसके लिए बाद में उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। यहां वे 1959 तक रहे औऱ बताया जाता है कि उन्हें अपना काम करने के लिए पूरी आजादी मिली। 1960 में हरगोविंद खुराना अमेरिका आ गए। यहां वे विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के साथ जुड़े। 1966 में उन्हें अमेरिकी नागरिकता मिल गई। इसके दो ही साल बाद रॉबर्ट डब्ल्यू हॉली और मार्शल डब्ल्यू नीरेनबर्ग के साथ उन्हें संयुक्त रूप से चिकित्सा का नोबेल दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें जेनेटिक कोड और प्रोटीन संश्लेषण में इसकी भूमिका की व्याख्या के लिए दिया गया। डॉ. हरगोविंद खुराना की एक और अहम खोज थी पहले कृत्रिम जीन का निर्माण। यह उपलब्धि उन्होंने 1972 में हासिल की।</p>
<p style="text-align:justify;">चार साल बाद ही उन्होंने ऐलान किया कि उन्होंने इस कृत्रिम जीन को एक कोशिका के भीतर रखने में कामयाबी हासिल की है। इस तरह देखें तो हरगोविंद खुराना की बायोटेक्नॉलॉजी की बुनियाद रखने में भी अहम भूमिका रही। नोबेल पुरस्कार के बाद अमेरिका ने उन्हें नेशनल एकेडमी आॅफ साइंस की सदस्यता प्रदान की। यह सम्मान केवल विशिष्ट अमेरिकी वैज्ञानिकों को ही दिया जाता है। डॉ खुराना ने अमेरिका में अध्ययन, अध्यापन और शोध कार्य जारी रखा। देश-विदेश के तमान छात्रों ने उनके सानिध्य में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। नौ नवंबर 2011 को इस महान वैज्ञानिक ने अमेरिका के मैसाचूसेट्स में आखिरी सांस ली।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 16 Oct 2020 09:55:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इस देश में नहीं कोई जंगल, लोग खूब पीते हैं कोका कोला</title>
                                    <description><![CDATA[आइसलैंड को 17 जून 1944 को डेनमार्क से स्वतंत्रता हांसिल हुई थी। आइसलैंड की राजधानी रेक्जाविक है जो इस देश का सबसे बड़ा शहर भी है। सबसे पहले आइसलैंड में रहेने वाले लोग भिक्षु थे जो आयरलैंड से सन 800 में यहाँ पर आए थे। आइसलैंड यूरोप का ब्रिटेन के बाद दूसरा और विश्व का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/no-forest-in-this-country-people-drink-coca-cola-a-lot/article-19206"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/no-forest-in-this-country-people-drink-coca-cola-a-lot.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">आइसलैंड को 17 जून 1944 को डेनमार्क से स्वतंत्रता हांसिल हुई थी। आइसलैंड की राजधानी रेक्जाविक है जो इस देश का सबसे बड़ा शहर भी है। सबसे पहले आइसलैंड में रहेने वाले लोग भिक्षु थे जो आयरलैंड से सन 800 में यहाँ पर आए थे। आइसलैंड यूरोप का ब्रिटेन के बाद दूसरा और विश्व का 18वां बड़ा द्वीप है। आज भी यहां पर रहने वाले कुछ लोगों का मानना है की यहां पर एल्फ यानि की बौने लोग रहते हैं जिनके पास कई तरह की जादुई शक्तियों मौजूद हैं। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है यह अब तक साबित नहीं हो पाया है। जून और जुलाई दो ऐसे महीने है जहां आइसलैंड के आसमान में सूर्य 2 महीने तक लगातार अस्त नहीं होता है यानि की 2 महीने रात ही नहीं होती। वहां के लोगों का कहना है की इन दो महीनों में गोल्फ खेलने का अपना अलग ही मजा है। आइसलैंड में लगभग हर चार साल में एक बार ज्वालामुखी जरुर फटता है। यहां पर दुनिया में सबसे ज्यदा कोका कोला पी जाती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आइसलैंड में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या ज्यादा है। आइसलैंड की राष्ट्रीय खेल हैंडबॉल है। यह दुनिया के खुश लोगों के देशों में शामिल है। इस देश में स्विट्जरलैंड और डेनमार्क का नंबर भी आता है। यहां के लोग सिर्फ कुत्ते, बिल्लियां ही नहीं पालते है बल्कि सांप-अजगर, कछुआ और छिपकलियां भी पालते हैं। फ्रांस के बाद आइसलैंड ऐसा देश है जहां पर मच्छर नहीं पाए जाते। स्कायर प्रोडक्ट यहां पर बहुत ही खाई जाती है। यह एक तरह की डेयरी प्रोडेक्ट है जो आइसलैंड में बेहद ही फेमस है। यह दिखने में दही जैसा है लेकिन मक्खन से बनता है। इस प्रोडक्ट में बहुत ही अधिक मात्रा में प्रोटीन होता है और फैट बिल्कुल भी नहीं होता। यह सिर्फ आइसलैंड में ही मिलता है। आइसलैंड एक ऐसा देश है जहां पर एक भी जंगल मौजूद नहीं है। आइसलैंड एक ऐसा देश है जिसके पास किसी भी तरह की सेना नहीं है।</h6>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 13 Oct 2020 21:57:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भारत का एक ऐसा राज्य जहां माँ से चलती है वंशावली</title>
                                    <description><![CDATA[मेघालय पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य है जिसका शाब्दिक अर्थ है बादलों का घर। 2016 के अनुसार यहां की जनसंख्या 32,11,474 है एवं विस्तार 220 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में है, जिसका लम्बाई से चौड़ाई अनुपात लगभग 3:1 का है। राज्य का दक्षिणी छोर मयमनसिंह एवं सिलहट बांग्लादेशी विभागों से लगता है, पश्चिमी ओर रंगपुर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/a-state-of-india-where-the-lineage-runs-from-mother/article-18878"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/a-state-of-india-where-the-lineage-runs-from-mother.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">मेघालय पूर्वोत्तर भारत का एक राज्य है जिसका शाब्दिक अर्थ है बादलों का घर। 2016 के अनुसार यहां की जनसंख्या 32,11,474 है एवं विस्तार 220 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में है, जिसका लम्बाई से चौड़ाई अनुपात लगभग 3:1 का है। राज्य का दक्षिणी छोर मयमनसिंह एवं सिलहट बांग्लादेशी विभागों से लगता है, पश्चिमी ओर रंगपुर बांग्लादेशी भाग तथा उत्तर एवं पूर्वी ओर भारतीय राज्य असम से घिरा हुआ है। राज्य की राजधानी शिलांग है। भारत में ब्रिटिश राज के समय तत्कालीन ब्रिटिश शाही अधिकारियों द्वारा इसे “पूर्व का स्काटलैण्ड” संज्ञा दी गयी थी। मेघालय पहले असम राज्य का ही भाग था, 21 जनवरी 1972 को असम के खासी, गारो एवं जैन्तिया पर्वतीय जिलों को काटकर नया राज्य मेघालय अस्तित्व में लाया गया। यहां की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। इसके अलावा अन्य मुख्यत: बोली जाने वाली भाषाओं में खासी, गारो, प्नार, बियाट, हजोंग एवं बांग्ला आती हैं। इनके अलावा यहां हिन्दी भी कुछ-कुछ बोली समझी जाती है, जिसके बोलने वाले मुख्यत: शिलांग में मिलते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भारत के अन्य राज्यों से अलग यहां मातृवंशीय प्रणाली चलती है, जिसमें वंशावली मां (महिला) के नाम से चलती है और सबसे छोटी बेटी अपने माता-पिता की देखभाल करती है तथा उसे ही उनकी सारी सम्पत्ति मिलती है। यह राज्य भारत का आर्द्रतम क्षेत्र है, जहां वार्षित औसत वर्षा 12,000 मिमी. (470 इंच) दर्ज हुई है। राज्य का 70% से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है। राज्य में मेघालय उपोष्णकटिबंधीय वन पर्यावरण क्षेत्रों का विस्तार है, यहां के पर्वतीय वन उत्तर से दक्षिण के अन्य निचले क्षेत्रों के उष्णकटिबन्धीय वनों से पृथक हैं। ये वन स्तनधारी पशुओं, पक्षियों तथा वृक्षों की जैवविविधता के मामलों में विशेष उल्लेखनीय हैं। मेघालय में मुख्य रूप से कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था (अग्रेरियन) है, जिसमें वाणिज्यिक वन उद्योग का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहां की मुख्य फसल में आलू, चावल, मक्का, अनान्नास, केला, पपीता एवं दालचीनी, हल्दी आदि बहुत से मसाले, आदि हैं। सेवा क्षेत्र में मुख्यत: अचल सम्पत्ति एवं बीमा कम्पनियां हैं।</h6>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Oct 2020 21:16:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बिल गेट्स का आलीशान घर ‘शानाडू’</title>
                                    <description><![CDATA[बिल गेट्स मात्र 13 साल के थे जब उन्होंने टिक टैक टो के नाम से पहला कंप्युटर प्रोग्राम बनाया था। बेशक बिल ने बीच में अपनी स्टडीज छोड़ दी थीं, पर वो एक ब्रिलियंट स्टूडेंट थे। यही वजह है कि वो अपना सब्जेक्ट छोड़कर दूसरे विषयों की क्लास अटेंड करते थे और उसके बावजूद अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/bill-gatess-luxurious-house-shanadu/article-18755"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/bill-gatess-luxurious-house-shanadu.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">बिल गेट्स मात्र 13 साल के थे जब उन्होंने टिक टैक टो के नाम से पहला कंप्युटर प्रोग्राम बनाया था। बेशक बिल ने बीच में अपनी स्टडीज छोड़ दी थीं, पर वो एक ब्रिलियंट स्टूडेंट थे। यही वजह है कि वो अपना सब्जेक्ट छोड़कर दूसरे विषयों की क्लास अटेंड करते थे और उसके बावजूद अपने सब्जेक्ट में हमेशा ए ग्रेड लाते थे। जब वे हॉवर्ड कॉलेज में थे तो उन्होंने करीब तीस साल पुरानी ‘पैनकेक सॉर्टिंग’ प्राब्लम का सॉल्यूशन ढूंढा था पर जब उनके प्रोफेसर ने उन्हें ये जानकारी दी कि उनकी इस उपलब्धि को एक अकादमिक पेपर में छापा जाएगा तो उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ा क्योंकि तब तक वे माइक्रोसॉफ्ट की शुरूआत के लिए कॉलेज छोड़ चुके थे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बिल गेट्स ने अपने टीचर के सामने दावा किया था कि वे 30 साल की उम्र तक करोड़पति बन जाएंगे, और महज 31 साल में उन्होंने अरबपति बनकर दिखा दिया था। बिल गेट्स काम को लेकर कितने गंभीर थे इसका पता इस बात से ही चल जाता है कि उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारियों की गाड़ी का नंबर रट लिये थे जिससे उन्हें ये पता चल जाता था कि कौन सा कर्मचारी कितने बजे ऑफिस में आ-जा रहा है। साथ ही उन्होंने अपने ऑफिस के कंप्यूटरों से माइक्रोसॉफ्ट में उपलब्ध इकलौते गेम मिनिस्वीपर को हटवा दिया था जिससे लोग अपने काम पर ध्यान दे सकें। बिल गेट्स की सादगी का एक और उदाहरण से पता चलता है। उनका नियम था कि माइक्रोसॉफ्ट का हर कर्मचारी ऑफिशियल दौरों पर इकॉनिमी क्लास से ट्रैवल करेगा। इस नियम का पालन करने वालों में वे खुद भी शामिल थे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वाशिंगटन झील के पास मौजूद बिल गेट्स के घर का नाम शानाडू है। बिल गेट्स के घर में स्विमिंग पूल, 7 बेडरूम, 24 बाथरूम, 6 किचन, 2,500 स्क्वायर फीट में जिम और 2,300 स्क्वायर फीट का रिसेप्शन हॉल है। गेट्स के घर की खासियत यह है कि किसी भी वक्त परिवार के सदस्य या अन्यों लोगों के कदमों के दबाव पड़ने से पता लग जाता हैं कि घर में कौन मौजूद है। घर की लाइट्स अपने आप ही जलने और बुझने लगती हैं। घर में लगे स्पीकरों में चलने वाला म्यूजिक घर में मौजूद व्यक्ति को एक कमरे से दूसरे कमरे तक पीछा करता है। घर को देखने आने वाले लोगों को घर में अंदर प्रवेश करने से पहले एक माइक्रोचिप दी जाती है. यह चिप पूरे घर में सिग्नल भेजती है।</h6>
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                <pubDate>Sat, 26 Sep 2020 21:08:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>रविवार को इसीलिए होती है छुट्टी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में तो आये दिन किसी न किसी कारण छुट्टियाँ आती ही रहती हैं। जी हां, रविवार की छुट्टी का इंतजार तो सबको रहता है। आज हम आपको इस छुट्टी का इतिहास बताने वाले हैं की क्यों होती है रविवार को छुट्टी। हिन्दू कैलेंडर या हिन्दू पंचांग के अनुसार सप्ताह की शुरूआत रविवार से ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/this-is-why-holiday-is-on-sunday/article-17764"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/india-is-my-country1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत में तो आये दिन किसी न किसी कारण छुट्टियाँ आती ही रहती हैं। जी हां, रविवार की छुट्टी का इंतजार तो सबको रहता है। आज हम आपको इस छुट्टी का इतिहास बताने वाले हैं की क्यों होती है रविवार को छुट्टी। हिन्दू कैलेंडर या हिन्दू पंचांग के अनुसार सप्ताह की शुरूआत रविवार से ही होती है। यह दिन सूर्य देवता का दिन होता है। हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान् सहित सभी देवी-देवताओं की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि सप्ताह के पहले दिन ऐसा करने से सारा सप्ताह मन शांत रहता है, सभी कार्य सफल होते हैं और किसी भी प्रकार की बाधा या परेशानी उत्पन्न नहीं होती। किसी भी व्यक्ति को अपनी ये परम्पराएँ निभाने में कोई परेशानी न हो। इसलिए पुरातन काल से ही रविवार को अवकाश मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हिन्दू पंचांग के विपरीत अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार रविवार सप्ताह का अंतिम दिन माना जाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि अंग्रेजों में यह मान्यता है की इस धरती का सृजन कार्य ईश्वर ने छ: दिनों में किया था। ऐसा माना जाता है कि छ: दिनों के बाद सातवें दिन ईश्वर ने विश्राम किया था। इस कारण रविवार को सप्ताह का अंतिम दिन मानकर इस दिन सभी को आराम करने के लिए अवकाश दिया जाता है। इसी कारण अंग्रेजी देशों में इसे वीकेंड का नाम भी दिया जाता है। भारत पर अंग्रेजों का शासन था और उनके जुल्म दिन-ब-दिन बढ़ रहे थे। इस समय सबसे ज्यादा दयनीय हालत थी तो मजदूरों की।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन्हें लगातार सात दिनों तक काम करना पड़ता था। इतना ही नहीं उन्हें खाने के लिए अर्धावकाश भी नहीं दिया जाता था। बात 1857ई. से 26 साल बाद की है जब मजदूरों के नेता श्री मेघाजी लोखंडे ने मजदूरों के हक में अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने सप्ताह में एक दिन छुट्टी के लिए अपना संघर्ष शुरू किया। छुट्टी के लिए उन्होंने यह तर्क दिया कि हर हिन्दुस्तानी सप्ताह के 4 दिन अपने मालिक के लिए व अपने परिवार के लिए काम करता है। उसे सप्ताह में एक दिन अपने देश व समाज की सेवा के लिए भी दिया जाना चाहिए। इससे वह अपने देश और समाज के प्रति अपने कर्त्तव्य निभा सके।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2020 10:13:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया की सबसे बड़ी बिल्ली है ‘ओमार’</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व में कुछ ऐसी बिल्लियां है जो 32 फीट ऊँची इमारत से नीचे कंक्रीट पर गिर कर भी बच चुकी है। बिल्लियों के समूह को क्लैडर कहा जाता है। इनमें 20 से अधिक मांसपेशियां होती हैं जो उनके कानों को नियंत्रित करती हैं। वे अपने जीवन का 70% समय सोने में बिताती है। बिल्लियां मिठास […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/omar-is-the-worlds-biggest-cat/article-17658"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/omar-is-the-worlds-biggest-cat.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">विश्व में कुछ ऐसी बिल्लियां है जो 32 फीट ऊँची इमारत से नीचे कंक्रीट पर गिर कर भी बच चुकी है। बिल्लियों के समूह को क्लैडर कहा जाता है। इनमें 20 से अधिक मांसपेशियां होती हैं जो उनके कानों को नियंत्रित करती हैं। वे अपने जीवन का 70% समय सोने में बिताती है। बिल्लियां मिठास का स्वाद नहीं ले सकती हैं। एक बिल्ली का मालिक एक तिहाई तक स्ट्रोक और दिल के दौरे के जोखिम को कम कर सकता है। दुनिया की सबसे बड़ी बिल्ली की लंबाई 48.5 इंच मापी गई। अक्सर हमने बिल्लियों का साइज 25 से 26 सेंटिमीटर का देखा है। इस बिल्ली का नाम ओमार है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ओमार का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया की सबसे बड़ी पालतू बिल्ली के रूप में दर्ज किया जा सकता है। मेलबर्न की रहने वाली ओमार की मालकिन स्टीफी ने कहा कि आजकल ओमार इंस्ताग्राम पर बहुत छाई हुई है। लोग ओमार के इतने बड़े आकार को देखकर काफी अचंभित हैं। दुनिया की सबसे अमीर बिल्ली की कीमत 13 मिलियन डॉलर है, क्योंकि उसके मालिक का निधन हो गया और उसने अपनी जायदाद उस बिल्ली के नाम कर दिया। आपकी बिल्ली आपकी आवाज को पहचानती है, लेकिन देखभाल करने के लिए शांत रहने का नाटक करती है। बिल्लियां 100 से अधिक विभिन्न ध्वनियां निकलती हैं जब कि कुत्ते लगभग 10 निकलते हैं। एक बिल्ली का मस्तिष्क 90% मनुष्य के समान होता है। बिल्लियों के पास आईपैड की तुलना में 1,000 गुना अधिक डेटा स्टोरेज है। एक बिल्ली अपनी लंबाई से छह गुना कूद सकती है। एक घर की बिल्ली रफ्तार में उसैन बोल्ट से भी तेज होती है। अंतरिक्ष में पहली बिल्ली फ्रांसीसी थी। उसे फेलिकेट्टे नाम दिया गया, या एस्ट्रोकैट। वह यात्रा पूरी करने में सफल रही।</h6>
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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2020 20:42:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मीडिया का सबसे बड़ा एडिटर</title>
                                    <description><![CDATA[पत्रकारिता की दुनिया में जोसेफ पुलित्जर का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है। इनका जन्म 10 अप्रैल 1847 को हंगरी में हुआ था। जब वह हंगरी से अमेरिका 1864 में आए तो उनके पास न तो पैसे थे, न जान-पहचान और सबसे बड़ी बात उन्हें अंग्रेजी बोलनी तक नहीं आती थी। उन्हें एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-biggest-media-editor/article-17619"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/biggest-media-editor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पत्रकारिता की दुनिया में जोसेफ पुलित्जर का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है। इनका जन्म 10 अप्रैल 1847 को हंगरी में हुआ था। जब वह हंगरी से अमेरिका 1864 में आए तो उनके पास न तो पैसे थे, न जान-पहचान और सबसे बड़ी बात उन्हें अंग्रेजी बोलनी तक नहीं आती थी। उन्हें एक समय वेटर तक की नौकरी करनी पड़ी थी। एक दिन लाइब्रेरी में उन्होने दो शतरंज के खिलाडियों को कुछ चालें समझाई, जिससे ये खिलाडी काफी प्रभावित हुए। उन्होने पुलित्जर से काफी चर्चा की। ये दोनों जर्मनी के मशहूर अखबार के संपादक थे। उन्होने पुलित्जर को अपने यहां नौकरी दी और इस प्रकार वह पत्रकार बन गए।</p>
<p style="text-align:justify;">25 वर्ष की उम्र में वह प्रकाशक भी बन गए। सुबह से रात तक काम करने वाले पुलित्जर ने खोजी पत्रकारिता पर जोर दिया। जल्द ही वह और उनका अखबार मशहूर हो गए। उन्होने आर्थिक संकट में फंसे न्यूयार्क वर्ल्ड को खरीद उसकी भी कायापलट दी। पर खराब स्वास्थ्य के कारण 43 वर्ष की उम्र के बाद वे कभी अखबार के कार्यालय में नहीं गए। इसी दौरान उन्हे आवाज से एलर्जी हो गई और दो दशक तक अपनी नौका में एक साउन्ड प्रूफ कमरे में ही रहे। इसे लोग टावर आॅफ साइलेन्स के नाम से पुकारते थे। इसी समय के दौरान व्यावसायिक स्पर्धा में उन्हें कई अखबारों का सामना भी करना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">1878 में उन्होंने सेंट लुइस पोस्ट डिस्पैच और उसके पांच साल बाद न्यूयॉर्क वर्ल्ड अखबार की शुरूआत की। ये दोनों अखबार बेहतरीन पत्रकारिता के उदाहरण माने गए थे। 29 अक्टूबर 1911 में इनकी मृत्यु हो गई। पुलित्जर अमेरिका के धनी लोगों में से एक थे। उन्होंने अपने कमाई में से एक मिलियन डॉलर कोलंबिया यूनिवर्सिटी को जर्नलिज्म स्कूल के लिए दे दिया था। 1917 से यूनिवर्सिटी ने पुलित्जर पुरस्कार देने शुरू किए।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2020 09:06:06 +0530</pubDate>
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                <title>सादगी की मिसाल थे ‘फोर्ड’ के संस्थापक</title>
                                    <description><![CDATA[कुछ साल पहले फोर्ड ने निश्चय किया कि वह अपनी मशहूर वी-8 मोटर बनाएंगे। वह कार के लिए वी-8 इंजिन बनाना चाहते थे एक ऐसी कार जिसका खर्च आम लोग भी उठा सकें। इसके लिए उन्होने एक ऐसा र्इंजन बनाने का निश्चय किया जिसमे आठ सिलिंडरो को एक ही जगह डालने का निश्चय किया गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/the-example-of-simplicity-was-the-founder-of-ford/article-17520"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/founder-of-ford.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कुछ साल पहले फोर्ड ने निश्चय किया कि वह अपनी मशहूर वी-8 मोटर बनाएंगे। वह कार के लिए वी-8 इंजिन बनाना चाहते थे एक ऐसी कार जिसका खर्च आम लोग भी उठा सकें। इसके लिए उन्होने एक ऐसा र्इंजन बनाने का निश्चय किया जिसमे आठ सिलिंडरो को एक ही जगह डालने का निश्चय किया गया और अपने इंजीनियरो को इस इंजिन का डिजाइन बनाने के लिए कहा।ये डिजाइन पेपर पर बनाया गया। लेकिन इंजीनियरों का मानना था की यह असंभव है। फोर्ड ने उनसे कहा किसी भी तरह इसे बनाया जाए। लेकिन उन्होंने कहा की ये असंभव है। फोर्ड ने उन्हे आदेश दिया की आगे बढ़ो और तब तक लगे रहो जब तक तुम सफल ना हो जाओ चाहे कितना भी समय लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">महान उद्योगपति हेनरी फोर्ड के बारे में एक किस्सा अकसर सुनाया जाता है। फोर्ड एक अरबपति थे, फिर भी वे अपने आॅफिस और फैक्ट्री में बिलकुल साधारण कपड़ों में आ जाते थे। यह देखकर उनके सभी कर्मचारी बहुत अचरज करते और आपस में बातें करते की बॉस के पास इतना पैसा है फिर भी वे इतने सिंपल कपड़ों में आॅफिस आ जाते हैं। एक दिन उनकी सेक्रेटरी ने हिम्मत कर उनसे कह दिया सर आपके पास इतना पैसा है की आप सारी दुनिया से, एक से बढ़कर एक कपड़े मंगवा सकतें है, फिर भी आप इतने सादा कपड़ों में आॅफिस आ जातें हैं? हेनरी फोर्ड मुस्कुरा दिए और कहा यहाँ सब जानतें हैं की मैं हेनरी फोर्ड हूँ! मैं महंगे कपडेÞ पहनकर, सबको यह दिखाने की चिंता क्यों करूँ की मैं हेनरी फोर्ड हूँ। निवेशकों की पूंजी से हेनरी फोर्ड ने आॅटोमोबाइल कंपनी की स्थापना की फिर इस कंपनी को छोड़कर ये रेसर कार बनाने लगे। उस कार को कई रेस में सफलता मिली इससे उनका बहुत नाम हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रसिद्धि से उन्होंने फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना की। पहले साल फोर्ड मोटर ने 1,708 कारों का निर्माण किया और इससे उन्हें बहुत मुनाफा हुआ अगले साल उन्होंने उत्पादन बढ़ा कर 5000 कारों का निर्माण किया। 1908 में पांच साल बाद इस कंपनी ने मॉडल ळ कार लॉन्च की, जिसने मोटर कार उद्योग में क्रांति कर दी। पहले ही साल 10,000 कारें बिक गई। इससे उन्हें इतना मुनाफा हुआ की उन्होंने फ्रांस और में इंग्लैंड में और मैन्यूफैक्चरिंग संयंत्र स्थापित किए। सन् 1908 को आज ही के दिन हेनरी फोर्ड ने फोर्ड कंपनी का पहला मॉडल लांच किया था।</p>
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<p><a href="http://10.0.0.122:1245/trifla/">यह भी पढ़ें- कब्ज, बदहजमी का रामबाण इलाज है त्रिफला छाछ</a></p>
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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2020 11:25:17 +0530</pubDate>
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                <title>यूरी गैगरिन: छोटी उम्र में बड़े काम</title>
                                    <description><![CDATA[27 साल के पायलट ने अंतरिक्ष में कदम रख कर इतिहास रच दिया था। आइए जानते हैं आसमां छूने वाले पहले शख्स के बारे में। रूसी-सोवियत पायलट और कॉस्मोनॉट यूरी गैगरिन का जन्म 9 मार्च 1934 में हुआ था। 12 अप्रैल, 1961 को यूरी गैगरिन ने ‘वोस्ताक-1’ में बैठ कर पृथ्वी का आॅरबिट यात्रा पूरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/yuri-gagarin-done-great-things-at-a-young-age/article-17382"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/yuri-gagarin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">27 साल के पायलट ने अंतरिक्ष में कदम रख कर इतिहास रच दिया था। आइए जानते हैं आसमां छूने वाले पहले शख्स के बारे में। रूसी-सोवियत पायलट और कॉस्मोनॉट यूरी गैगरिन का जन्म 9 मार्च 1934 में हुआ था। 12 अप्रैल, 1961 को यूरी गैगरिन ने ‘वोस्ताक-1’ में बैठ कर पृथ्वी का आॅरबिट यात्रा पूरी की थी, इसलिए हर साल 12 अप्रैल को इंटनेशनल डे आॅफ ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मनाया जाता है। आउटर स्पेस में पहुंचने वाले वो दुनिया के पहले इंसान थे। जब यूरी 6 साल के थे तब दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उनके घर पर एक नाजी अधिकारी ने कब्जा कर लिया था, इसलिए उनका परिवार दो साल तक झोपड़ी में रहा। 16 साल की उम्र में उन्होंने फाउंड्रीमैन के रूप में ट्रेनिंग की, बाद में उन्होंने ट्रैक्टर के बारे में पढ़ाई की।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल के समय में यूरी गैगरिन का सबसे पसंदीदा विषय मैथ्स था। यूरी ने पृथ्वी की कक्षा में 108 मिनट तक चक्कर लगाया, उन्होंने 203 मील की ऊंचाई पर 27000 किलोमीटर प्रतिघंटे की तेज गति का सामना किया। आपको एक मजेदार बात बताएं कि यूरी गैगरिन को उनकी कम ऊंचाई के कारण ही इस अभियान के लिए चुना गया था। उनकी ऊंचाई मात्र पांच फुट दो इंच थी। 1955 में सारातोव शहर में उन्होंने कास्टिंग टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा लिया। साथ ही, वहां के फ्लाइंग क्लब में भर्ती हो कर विमान चलाना भी सीखने लगे। मिग-15 ट्रेनिंग जेट हादसे का शिकार हो गया, जिसमें यूरी गैगरिन की मौत हो गई। आज ही के दिन यूरी के ऐतिहासिक उपक्रम के चार महीने बाद सोवियत संघ ने अपने दूसरे अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में उतारा।</p>
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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2020 16:02:48 +0530</pubDate>
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