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                <title>Medical Students - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>&amp;#8221;हर साल 25-26 मेडिकल छात्र ले लेते हैं अपनी जान&amp;#8221; एक मनोचिकित्सक के चौंकाने वाले आंकड़ें!</title>
                                    <description><![CDATA[37,000 मेडिकल छात्र, मानसिक रूप से बीमार! नई दिल्ली (एजेंसी)। 37,000 से अधिक मेडिकल छात्रों ने सरकार के मेडिकल शिक्षा प्राधिकरण को बताया है कि वे संभावित रूप से जोखिम भरी मानसिक स्वास्थ्य बीमारियों से पीड़ित हैं, जिससे शरीर को विनियमित ड्यूटी घंटों में करने में परेशानी हो रही है। Medical Students Suicide नई दिल्ली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/every-year-25-26-medical-students-take-their-own-lives/article-57416"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/doctor.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">37,000 मेडिकल छात्र, मानसिक रूप से बीमार!</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> 37,000 से अधिक मेडिकल छात्रों ने सरकार के मेडिकल शिक्षा प्राधिकरण को बताया है कि वे संभावित रूप से जोखिम भरी मानसिक स्वास्थ्य बीमारियों से पीड़ित हैं, जिससे शरीर को विनियमित ड्यूटी घंटों में करने में परेशानी हो रही है। Medical Students Suicide</p>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences, Delhi) के एक मनोचिकित्सक ने चौंकाने वाले आंकड़ों को ‘‘हिमशैल का सिरा’’ बताया। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने यह पता लगाने के बाद एक ऑनलाइन सर्वेक्षण शुरू किया था कि पिछले पांच वर्षों में 130 मेडिकल छात्रों ने अपनी जान ले ली है। सर्वेक्षण में, मेडिकल छात्रों और संकाय ने उन मानसिक स्वास्थ्य बीमारियों के बारे में विवरण प्रस्तुत किया जिनसे वे पीड़ित थे, उनमें मुख्य रूप से गंभीर चिंता और काम के दबाव से लेकर अत्यधिक तनाव तक आदि शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मानसिक बीमारी से पीड़ित छात्रों की संख्या से चिंतित एनएमसी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने और सिफारिशों का मसौदा तैयार करने के लिए 15 सदस्यीय समिति गठित की। ऑनलाइन सर्वेक्षण में जबरदस्त प्रतिक्रिया के बाद एनएमसी द्वारा दिए गए सुझावों में आत्महत्या को रोकने और कमजोर छात्रों की पहचान करने के लिए गेट-कीपर कार्यक्रम, पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों के लिए ड्यूटी के घंटों को विनियमित करना, बेहतर छात्र सुविधाएं, मित्रवत कार्य वातावरण और चौबीस घंटे पेशेवर शामिल हैं। परामर्श सेवाएँ। Medical Students Suicide</p>
<p style="text-align:justify;">ये सिफारिशें इस महीने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंपी जाएंगी, जिन्हें देश भर के मेडिकल कॉलेजों में लागू किया जाएगा। National Medical Commission</p>
<h3 style="text-align:justify;">‘‘कुछ सार्वभौमिक सिफारिशें जो चर्चा में हैं शामिल</h3>
<p style="text-align:justify;">नए छात्रों को उनकी भूमिका और कर्तव्यों को समझने के लिए मेडिकल कॉलेजों में समायोजन समर्थन और अभिविन्यास</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज में घरेलू बीमारी से निपटने के तरीके</p>
<p style="text-align:justify;">जागरूकता अभियान, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस, विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस और नशीली दवाओं की रोकथाम दिवस का जश्न</p>
<p style="text-align:justify;">रैगिंग विरोधी उपायों को मजबूत किया जाएगा</p>
<p style="text-align:justify;">मेडिकल पीजी छात्रों के लिए सप्ताह में 80 घंटे से अधिक ड्यूटी का नियम नहीं है, जिसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पालन किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि वर्तमान में, पीजी छात्र बिना किसी ब्रेक के सप्ताह में 100 घंटे तक काम कर रहे हैं। ‘‘</p>
<h3 style="text-align:justify;">चिंताएं | Medical Students Suicide</h3>
<p style="text-align:justify;">‘‘इसके अलावा, शिक्षकों की चिंताओं को दूर करने के लिए योजनाओं पर भी चर्चा चल रही है। इसके लिए ‘परामर्शदाता-परामर्श कार्यक्रम’ को सुदृढ़ बनाना, आत्महत्या को रोकने और कमजोर छात्रों की पहचान करने के लिए एक नई पहल, ‘गेट-कीपर्स कार्यक्रम’ शुरू होगी और सरकार के टेली-मानस पोर्टल के माध्यम से छात्रों को परामर्श देने के लिए विशेष 24X7 पेशेवर परामर्श सेवाएं शुरू होंगी।” अधिकारी ने कहा कि इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मेडिकल छात्रों के लिए कार्य वातावरण छात्र-अनुकूल है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर ऑनलाइन सर्वेक्षण को चार भागों में विभाजित किया गया था जिसमें स्नातक, स्नातकोत्तर और संकाय ने भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दूसरे अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा ‘‘हमें मेडिकल छात्रों और संकाय से 37,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो स्वयं यह दर्शाते हैं कि डॉक्टर मानसिक तनाव से पीड़ित हैं। अधिकांश छात्रों को छात्रावासों में और रैगिंग के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसे हम सुव्यवस्थित कर रहे हैं। प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए हमारी शिक्षा प्रणाली में सुधार किया गया है, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए कोई कार्य विनियमन नहीं है। पीजी छात्रों के लिए, हमने राज्यों को राज्य सरकार की सीट छोड़ने की बांड नीति में ढील देने का निर्देश दिया है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">‘‘हर अस्पताल में मनोरोग विभाग होता है, लेकिन कलंक के कारण छात्र रिपोर्ट नहीं करते हैं। यदि कोई छात्र तनाव में है तो वह सबसे पहले किसे सूचित करेगा, चाहे साथियों को या फिर फैकल्टी को। रैगिंग विरोधी और यौन उत्पीड़न विरोधी उपायों को मजबूत करना होगा। पिछले दिनों यूजी और पीजी दोनों कक्षाओं में समान रूप से 130 मेडिकल छात्रों ने आत्महत्या की है। अधिकारी ने कहा, ‘‘इसका मतलब है- हर साल 25-26 छात्र अपनी जान ले लेते हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">समिति सर्वेक्षण परिणामों का विश्लेषण करके नियम तैयार कर रही है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स),नई दिल्ली में मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. नंद कुमार ने कहा, ‘‘यह तो बस हिमशैल का टिप है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से पीड़ित डॉक्टरों की संख्या बहुत अधिक हो सकती है। डेटा स्वयं कहता है कि लगभग 70% डॉक्टर बर्नआउट महसूस करते हैं। उन्हें कार्यस्थल पर जाने में रुचि की कमी, आनंद की कमी, प्रेरणा की कमी और चिकित्सा समुदाय के बीच संचार की कमी महसूस होती है और स्वीकार्यता बहुत खराब है।”  Medical Students Suicide</p>
<p><a title="Strong Solar Storm Hits Earth: रात में अचानक ‘लावे की तरह लाल’ हुआ लद्दाख! जानें वजह!" href="http://10.0.0.122:1245/strong-solar-storm-hits-earth/">Strong Solar Storm Hits Earth: रात में अचानक ‘लावे की तरह लाल’ हुआ लद्दाख! जानें वजह!</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 May 2024 17:42:26 +0530</pubDate>
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                <title>यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रों के संबंध में उचित निर्णय लेगी सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सरकार ने गुरूवार को कहा कि यूक्रेन से मेडिकल (Medical Students) की पढ़ाई छोड़कर स्वदेश लौट रहे छात्रों के संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव लव अग्रवाल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यूक्रेन से स्वदेश लौट रहे भारतीयों को कोविड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/government-will-take-appropriate-decision-regarding-medical-students-returned-from-ukraine/article-31257"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/lav-agarwal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सरकार ने गुरूवार को कहा कि यूक्रेन से मेडिकल (Medical Students) की पढ़ाई छोड़कर स्वदेश लौट रहे छात्रों के संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव लव अग्रवाल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यूक्रेन से स्वदेश लौट रहे भारतीयों को कोविड मानकों में छूट दी गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन लोगों के लिये अलग से दिशा निर्देश जारी किये गये है। उन्होंने कहा कि सभी लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। अग्रवाल ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई छोड़ कर स्वदेश लौट रहे भारतीय छात्रों के संबंध में उचित समय पर उचित कार्रवाई की जाएगी। संबंधित संस्थाएं इस दिन इस दिशा में निर्णय करेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अग्रवाल से युद्ध ग्रस्त यूक्रेन से भारत लौटे मेडिकल छात्रों की अधूरी पढ़ाई पूरी करने और उनके भविष्य के संबंध में प्रश्न पूछे गए थे। गौरतलब है कि युद्ध ग्रस्त यूक्रेन से हजारों भारतीय मेडिकल छात्र (Medical Students) स्वदेश लौट रहे हैं। इनको अपनी मेडिकल पढ़ाई बीच में ही छोड़कर भारत लौटना पड़ रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्रेन-रूस युद्ध के हिन्द प्रशांत में असर का जायजा लेगा क्वाड</h4>
<p style="text-align:justify;">यूक्रेन पर रूस के सैन्य हमले के कारण उत्पन्न हालात का जायजा लेने के लिए आज अमेरिका, भारत, जापान एवं ऑस्ट्रेलिया के गठजोड़ क्वाड के शीर्ष नेताओं की वर्चुअल बैठक होगी जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाग लेंगे। बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति जोसेफ आर बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ मोदी वाशिंगटन में सितंबर 2021 में हुई बैठक के बाद संवाद को आगे बढ़ाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वे हिन्द प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण गतिविधियों का आकलन करते हुए विचार-विमर्श करेंगे। क्वाड नेता इस गठजोड़ के समकालीन एवं सकारात्मक एजेंडा के अनुरूप घोषित नेताओं की पहल के क्रियान्वयन के प्रयासों की समीक्षा की जाएगी। चारों नेता यूक्रेन पर रूस के हमले के हिन्द प्रशांत क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को लेकर की विचार मंत्रणा करेंगे और इस क्षेत्र में किसी भी अप्रिय स्थिति बनने पर क्वाड की प्रतिक्रिया के बारे में भी बात होने की संभावना है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 19:27:19 +0530</pubDate>
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