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                <title>Education Policy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Education Policy RSS Feed</description>
                
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                <title>पूरे विश्व में एक जैसी हो शिक्षा नीति</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान है। शिक्षा ही वह सेतु है, जो व्यक्ति-चेतना और समूह चेतना को वैश्विक, राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से अनुप्राणित करती है। भारत के सामने जो समस्याएं सिर उठाए खड़ी हैं, उनमें मूल्यहीन शिक्षानीति एक बड़ा कारण रही है। शिक्षा ही जब मूल्यहीन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/education-policy-should-be-uniform-all-over-the-world/article-27433"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/online-education-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान है। शिक्षा ही वह सेतु है, जो व्यक्ति-चेतना और समूह चेतना को वैश्विक, राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से अनुप्राणित करती है। भारत के सामने जो समस्याएं सिर उठाए खड़ी हैं, उनमें मूल्यहीन शिक्षानीति एक बड़ा कारण रही है। शिक्षा ही जब मूल्यहीन हो जाए, तो देश एवं दुनिया में मूल्यों की संस्कृति कैसे फलेगी? वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य जीवन को उन्नत बनाना नहीं, अपितु आर्थिक स्तर को ऊंचा उठाना हो गया है। यदि भारत के भविष्य को बदलना है तो भावी पीढ़ी पर ध्यान देना ही होगा, उन्हें अपनी संस्कृति एवं मूल्यों से जोड़ना होगा। महात्मा गांधी के अनुसार सर्वांगीण विकास का तात्पर्य है- आत्मा, मस्तिष्क, वाणी और कर्म-इन सबके विकास में संतुलन बना रहे। बाल एवं युवा छात्रों में ढेरों क्षमताएं तथा ऊर्जा होती हैं। इसे सही दिशा की ओर मोड़ने की आवश्यकता है ताकि उनकी क्षमताओं का दुरूपयोग न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: आज बालक के सामाजिक, राष्ट्रीय एवं आध्यात्मिक गुणों को बाल्यावस्था से ही विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है जितना उसको पुस्तकीय ज्ञान देना। भारत के मिसाइल मैन, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा है कि अगर कोई देश भ्रष्टाचार मुक्त है और सुंदर दिमाग का राष्ट्र बन गया है, तो मुझे दृढ़ता से लगता है कि उसके लिये तीन प्रमुख सामाजिक सदस्य हैं वे पिता, माता और शिक्षक हैं। डॉ. कलाम की यह शानदार उक्ति प्रत्येक व्यक्ति के दिमाग में आज भी गूंज रही हैं। मानव ने ज्ञान-विज्ञान में आश्चर्यजनक प्रगति की है। परन्तु अपने और औरों के जीवन के प्रति सम्मान में कमी आई है। शान्ति, अहिंसा और मानवाधिकारों की बातें संसार में बहुत हो रही हैं, किन्तु सम्यक्-आचरण का अभाव अखरता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव डा. कोफी अन्नान ने कहा था कि मानव इतिहास में बीसवीं सदी सबसे खूनी तथा हिंसक सदी रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीसवीं सदी में विश्व में दो विश्व महायुद्धों, हिरोशिमा तथा नागाशाकी पर दो परमाणु बमों का हमला तथा अनेक युद्धों की विनाश लीला के ताण्डवों को देखा है, जिसके लिए सबसे अधिक दोषी हमारी शिक्षा है। इक्कीसवीं सदी की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बालक को सारे विश्व से प्रेम करने के विश्वव्यापी दृष्टिकोण को विकसित करें। ग्लोबल विलेज के युग में सारे विश्व की एक जैसी शिक्षा प्रणाली होनी चाहिए। अब भारत की नयी शिक्षा नीति में शिक्षक का चरित्र एवं साख दुनिया के लिये प्रेरक एवं अनुकरणीय बनकर प्रस्तुत होगा, जिसमें भारतीय संस्कारों एवं संस्कृति का समावेश दिखाई देगा। अत: विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर विश्व के सभी शिक्षकों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे संसार के प्रत्येक बच्चे को संतुलित एवं उद्देश्यपूर्ण शिक्षा प्रदान करके विश्व में आध्यात्मिक, अहिंसक व शांतिपूर्ण सभ्यता की स्थापना करेंगे।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Oct 2021 09:46:51 +0530</pubDate>
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                <title>नयी शिक्षा नीति से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा: शिक्षाविद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। जाने माने शिक्षाविदों ने कहा है कि नयी शिक्षा नीति के लागू होने से देश में न केवल उच्च शिक्षा का की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा। प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो कोलकाता द्वारा आयोजित एक वेबिनार में शिक्षाविदों ने यह राय व्यक्त की। वेबिनार में एनसीईआरटी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-education-policy-will-create-self-reliant-india-academician/article-17779"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/many-expectations-from-the-new-education-policy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> जाने माने शिक्षाविदों ने कहा है कि नयी शिक्षा नीति के लागू होने से देश में न केवल उच्च शिक्षा का की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा। प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो कोलकाता द्वारा आयोजित एक वेबिनार में शिक्षाविदों ने यह राय व्यक्त की। वेबिनार में एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जगमोहन सिंह राजपूत भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक तथा पेट्रोलियम एंड एनर्जी विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के डीन केजी सुरेश के अलावा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसरों समेत कई शिक्षाविदों ने वेबिनार में भाग लेते हुए यह विचार व्यक्त किये। पद्मश्री से सम्मानित राजपूत में कहा कि नयी शिक्षा नीति न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों और स्कूल तथा कॉलेज के पूरी शिक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता भी सुधरेगी और सब का समग्र विकास होगा। इसके साथ ही शोध एवं अनुसंधान कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और देश की आर्थिक प्रगति भी होगी। सुरेश ने कहा कि नयी शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और संस्कृति को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है जिससे शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव होने की उम्मीद है। एनआईटी दुगार्पुर के कंप्यूटर विभाग के अध्य्क्ष प्रोफेसर डॉक्टर तेन्द्रपाल ने कहा की नयी शिक्षा नीति में छात्रों को व्यवसायिक प्रशिक्षण में मदद मिलेगी और विभिन्न अनुशासन में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एनआईटी के ही मानविकी विभाग के सहायक प्रोफेसर कृष्णा राय ने कहा कि नयी शिक्षा नीति से आत्मनिर्भर भारत बनाने और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ बनाने की परिकल्पना को मदद मिलेगी और देश में शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मिर्जा अस्मर बेग ने कहा कि नयी शिक्षा नीति से छात्र मल्टी पुल एंट्री और एग्जिट के जरिए आई आई टी आई एम के समक्ष अध्ययन कर सकेंगे। वेबिनार को पीआईबी रांची के अतिरिक्त महानिदेशक अरिमर्दन सिंह ने भी सम्बोधित किया। वेबिनार का संचालन सीआईडी कोलकाता के उपनिदेशक सम्राट बंधोपाध्याय ने किया।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Aug 2020 15:59:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा नीति 2020: पांचवीं तक मातृभाषा में पढ़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। 34 वर्ष पुरानी नीति में काफी बड़े बदलाव किए गए हैं। परिवर्तन प्राकृति का नियम है और बदलते समय के अनुसार परिवर्तन होने जरूरी भी हैं। किसी भी नीति की सार्थकता उसकी उपयोगिता के साथ जुड़ी होती है। जो नीति समय की आवश्यकताओं को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/education-policy-2020-study-in-mother-tongue-till-fifth/article-17212"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/politics-should-not-become-an-arena-of-education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। 34 वर्ष पुरानी नीति में काफी बड़े बदलाव किए गए हैं। परिवर्तन प्राकृति का नियम है और बदलते समय के अनुसार परिवर्तन होने जरूरी भी हैं। किसी भी नीति की सार्थकता उसकी उपयोगिता के साथ जुड़ी होती है। जो नीति समय की आवश्यकताओं को पूरी नहीं करती उसमें बदलाव जरूरी है। जहां तक शिक्षा नीति में नए बदलाव करने का संबंध है इसमें पांचवी तक की शिक्षा मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में देने का प्रस्ताव है, माृत भाषा का मामला बेहद पेचीदा है। भले ही सरकार ने मातृ भाषा की महत्वता को स्वीकार किया है लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का एक हिस्सा मातृ भाषा को ग्रैजुएट स्तर तक माध्यम बनाने का समर्थन करता है। कई राज्यों में ग्रैजुएट स्तर तक राज्य की क्षेत्रीय भाषा को माध्यम बनाया गया है। दूसरी तरफ इस तथ्य पर भी विचार करना होगा कि पांचवीं के बाद किसी अन्य भाषा को माध्याम बनाना कितना उपयुक्त रहेगा?</p>
<p style="text-align:justify;">पांचवीं के बाद कौन सी भाषा माध्यम बनेगी इसकी जानकारी भी अभी सामने आनी है। देश के बंटवारे के समय से ही भाषा के मामले को लेकर विवाद चलता आया है। भाषा के मामले को भाषा वैज्ञानिक नजरिए से निपटाने की आवश्यकता है। भाषा के मामले में अवैज्ञानिक धारणाओं से बचना होगा। नई शिक्षा नीति में सरकार ने पेपरों के मूल्यांकन के दायरे को बढ़ाया है। विद्यार्थियों और उसके साथियों को भी शामिल किया है। यह भी देखना होगा कि इस तरह की प्रक्रिया कितनी लम्बी होती है। सरकार ने शिक्षा को रोजगार प्रमुख बनाने पर बल दिया है जो समय की आवश्यकता है। छठी कक्षा से वोकेशनल शिक्षा शुरू की जाएगी। मौजूदा समय में वोकेशनल शिक्षा के लिए आई.टी.आई. में दसवीं के बाद दाखिला लेना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह शिक्षा को पेशेवर बनाना जरूरी है, ताकि दसवीं के बाद स्कूल छोड़ने पर विद्यार्थी कोई न कोई कौशल प्राप्त कर रोटी कमाने के योग्य बन सके। उच्च शिक्षा के मामले में एमफिल की डिग्री खत्म करना भी सही निर्णय है। एमए और पीएचडी के बीच अध्ययन के लिए किसी अलग डिग्री का कोई आधार नहीं रह जाता। जहां तक विज्ञान और कला वर्ग में अंतर खत्म करना है यह विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए विषय चयन की आजादी देता है। शिक्षा नीति में बड़े परिवर्तन किए गए, लेकिन इसे लागू करने के लिए इसकी व्यवहारिकता को समझना जरूरी है। कम से कम भाषा के मामले में क्षेत्रीय भाषाओं का मामला महत्वपूर्ण है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2020 09:44:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नयी शिक्षा नीति को मिली मंत्रिमंडल की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बहुप्रतीक्षित नयी शिक्षा नीति को बुधवार को आखिरकार मंजूरी दे दी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में इस नीति को मंजूरी दी गई । बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक भी मौजूद थे। गौरतलब है कि जब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cabinet-approval-for-new-education-policy/article-17174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/online-education-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बहुप्रतीक्षित नयी शिक्षा नीति को बुधवार को आखिरकार मंजूरी दे दी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में इस नीति को मंजूरी दी गई । बैठक में मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक भी मौजूद थे। गौरतलब है कि जब स्मृति ईरानी पिछली सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनी थीं, तब से नई शिक्षा नीति बनाने की कवायद शुरू हुई और इस तरह करीब छह साल बाद इस शिक्षा नीति को अंतिम रूप दिया गया और अंतत: मोदी मंत्रिमंडल ने इस पर मुहर लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में नई शिक्षा नीति बनाई थी। देश में इस बीच शिक्षा के क्षेत्र में आए परिवर्तन को देखते हुए सरकार ने नई शिक्षा नीति का निर्माण किया ताकि बदली हुई परिस्थितियों में, विशेषकर प्रौद्योगिकी में आए बदलाव के मद्देनजर डिजिटल शिक्षा और नवाचार को इसमें शामिल किया जा सके।</p>
<p> </p>
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                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2020 15:30:06 +0530</pubDate>
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