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                <title>New Education Policy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>नई शिक्षा नीति: शिक्षा विभाग ने बदला ग्रीष्मकालीन छुट्टियों का मॉडयूल</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीष्मकालीन छुट्टियों की मौलिक शिक्षा विभाग कर रहा है प्रतिदिन समीक्षा सरसा (सच कहूँ न्यूज)। शिक्षा मौलिक विभाग की ओर से इस बार विद्यार्थियों को बड़ा ही दिलचस्प और रूचिकर होमवर्क (Home Work) दिया गया है। जिसे करने में विद्यार्थी खूब रूचि दिखा रहे हैं। इस बार विद्यार्थी पहाड़ों को रटने की बजाय अभिभावकों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/education-department-changed-the-module-of-summer-vacation/article-48942"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/new-education-policy.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ग्रीष्मकालीन छुट्टियों की मौलिक शिक्षा विभाग कर रहा है प्रतिदिन समीक्षा</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शिक्षा मौलिक विभाग की ओर से इस बार विद्यार्थियों को बड़ा ही दिलचस्प और रूचिकर होमवर्क (Home Work) दिया गया है। जिसे करने में विद्यार्थी खूब रूचि दिखा रहे हैं। इस बार विद्यार्थी पहाड़ों को रटने की बजाय अभिभावकों के नंबर याद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विद्यार्थी इस बार अपने घर की रसोई में जाकर ये जानने का प्रयास कर रहे है उनकी नाना-नानी और दादा-दादी की शादी में कौन से पकवान बने थे। अब की बार शिक्षा विभाग ने कुछ पॉइंट्स तैयार किए हैं। इसके तहत होमवर्क में निबंध, सुलेख, पहाड़े, गिनती दिखने लिखने-रटने के बजाय एक्सपीरियंस लर्निंग पर जोर दिया है। यह काम विद्यार्थी अपने घर वालों की मदद से कर रहे हैं। (School Holiday)</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय ग्रीष्मकालीन छुट्टियां चल रही है। जिसमें विद्यार्थी किताबों, पुस्तकों का रट्टा मारने व नोट बुकों को काला करने का काम नहीं कर रहे हैं। बल्कि इस बार विद्यार्थी प्रैक्टिकल वर्क पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। विद्यार्थी घर में बड़ों की मदद से अपने किसी 10 परिजनों के फोन नंबरों को याद करने का काम कर रहे हैं। वहीं इस दौरान अपने शहर का पिन कोड याद कर रहे हैं। ये सब इन्हें पहली बार गृह कार्य में दिया गया है। (School Holiday)</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को होमवर्क दिया गया है। शिक्षा विभाग का प्रयास है विद्यार्थियों को गर्मी की छुट्टी में रट्टा मारने वाले होमवर्क की बजाय ऐसा होमवर्क दिया जाए, जिससे विद्यार्थियों का सामान्य ज्ञान बढ़े यानी पहले बेसिक क्लियर हो।<br />
<strong>                                                                          – डॉ. कपिल देव, कोआॅर्डिनेटर, एफ एलएन सिरसा।</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">जान रहे बुजुर्गों की शादी में क्या बने थे पकवान | (School Holiday)</h3>
<p style="text-align:justify;">विद्यार्थी गर्मी की छुट्टियों में रसोई में प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न तरह के मसालों को सूंघकर और हाथ लगाकर पहचानने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थी अपने नाना-नानी तथा दादा-दादी से पूछ रहे हैं कि उनकी शादी में कौन-कौन सी मिठाई बनाई गई थी। वहीं घर के बड़े उन्हें समझा रहे हैं कि रसोई में कौन-कौन से मसाले होते हैं और उनका क्या प्रयोग होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं इसके बाद अखबार, टीवी, नहाने के साबुन, रिफ ाइंड तेल, पेय पदार्थ और घर में रखी हुई चीजों की सूची भी बनानी होगी। यह भी देखना होगा कि घर में कितने घंटे तक पंखा चलता है। कार, बाइक रोजाना कितनी चलती है, उसमें एक महीने में कितना तेल का खर्चा हुआ, इन सबका रिकॉर्ड रखना होगा। इस दौरान शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वो बीच-बीच में बच्चों के बारे में उनके परिजनों से फीडबैक लेते रहें।</p>
<p>यह भी पढ़ें:– <a title="Canada News: कनाडा ने ऐसा क्या किया जिसकी सब जगह हो रही चर्चा" href="http://10.0.0.122:1245/what-did-canada-do-that-is-being-discussed-everywhere/">Canada News: कनाडा ने ऐसा क्या किया जिसकी सब जगह हो रही चर्चा</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jun 2023 15:31:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रार्थना सभा में अब बच्चे पीटी नहीं, करेंगे योग क्रियाएं</title>
                                    <description><![CDATA[23-24 मई को जिलास्तर पर शारीरिक शिक्षकों को मिलेगा दो दिवसीय विशेष योग प्रशिक्षण सरसा (सच कहूँ न्यूज)। नई शिक्षा नीति के तहत राजकीय विद्यालयों में इसी सत्र से विद्यार्थियों को योग शिक्षा देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसलिए अब इन विद्यालयों में विभाग पीटी के बजाय योग पर ध्यान दे रही है। इससे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/new-education-policy-now-children-will-do-yoga-activities-in-the-prayer-meeting/article-33366"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/yoga.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>23-24 मई को जिलास्तर पर शारीरिक शिक्षकों को मिलेगा दो दिवसीय विशेष योग प्रशिक्षण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> नई शिक्षा नीति के तहत राजकीय विद्यालयों में इसी सत्र से विद्यार्थियों को योग शिक्षा देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसलिए अब इन विद्यालयों में विभाग पीटी के बजाय योग पर ध्यान दे रही है। इससे न केवल विद्यार्थी स्कूलों में योगाभ्यास करेंगे। बल्कि अनिवार्य विषय के रूप में भी पढ़ेंगे और दिनचर्या में योग को शामिल करते हुए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के अंतर्गत अब राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद गुरुग्राम द्वारा प्रत्येक जिले में कार्यरत 100 डीपीई, पीटीआई व अन्य सामान्य शिक्षकों को दो दिवसीय विशेष ट्रेनिंग कराई जाएगी। ट्रेनिंग कार्यक्रम में शारीरिक शिक्षकों को योग का विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसके पश्चात वे विद्यार्थियों को योग क्रियाओं का प्रशिक्षण देंगे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद गुरुग्राम ने सभी जिलों के समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयकों को पत्र जारी कर 14 मई तक पहले चरण में शामिल होने वाले डीपीई, पीटीआई व सामान्य शिक्षकों की सूची मांगी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>रोजाना प्रार्थना सभा में 30 मिनट होगा योग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">दरअसल एससीईआरटी गुरुग्राम से पाठ्यक्रम तैयार कराने के बाद विभाग की ओर से योग को कक्षा दसवीं के पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय के रूप में भी शामिल कर दिया गया है। इसके अनुसार रोजाना प्रार्थना सभा में 30 मिनट तक विद्यार्थी योग का अभ्यास करेंगे। साथ ही प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार को योग प्रशिक्षण दिवस के रूप में भी मनाया जाएगा ताकि प्रत्येक विद्यार्थी स्वस्थ रहे। हालांकि सात मई को योग प्रशिक्षण दिवस की शुरुआत होनी थी, लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ स्कूलों को छोड़कर अन्य स्कूलों में योग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो पाया। अब जून माह के प्रथम शनिवार को स्कूलों में योग प्रशिक्षण दिवस मनाया जाएगा। लेकिन अगर स्कूलों में अगले महीने ग्रीष्मकालीन अवकाश हो जाते है तो योग प्रशिक्षण दिवस की शुरुआत जुलाई में होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>92 शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सरसा जिला से इस ट्रेनिंग कार्यक्रम के पहले चरण में 92 शिक्षक भाग लेंगे। जिसमें रानियां खंड के 39, डबवाली खंड के 52 व ऐलनाबाद खंड का एक शिक्षक शामिल होगा। उपरोक्त शिक्षकों को 2020-21 में भी प्रशिक्षण दिया गया था। ट्रेनिंग कार्यक्रम जिलास्तर पर 23 व 24 मई को आयोजित होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>योग भारत की प्राचीन जीवन पद्धति</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">योग शिक्षकों के अनुसार, योग भारत की प्राचीन जीवन पद्धति है। योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखा जा सकता है। शरीर, मन एवं मस्तिष्क के स्वस्थ रहने से व्यक्ति स्वयं को अपने आप स्वस्थ महसूस करता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रदेश की भावी पीढ़ी के शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखने के लिए नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में योग को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया है।</p>
<hr />
<p style="text-align:justify;">‘‘23 व 24 मई को होने वाले शारीरिक शिक्षकों के योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला से भाग लेने वाले 92 शिक्षकों की सूची विभाग को भेज दी गई है। शारीरिक शिक्षक योग का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करके स्कूली बच्चों को योग क्रियाओं के बारे में जानकारी देंगे।<br />
<strong>– गोपाल कृष्ण शुक्ला, सहायक जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा अभियान सरसा।</strong></p>
<hr />
<p style="text-align:justify;">‘‘नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में शिक्षा सत्र 2022-23 में विद्यार्थियों को योग शिक्षा देने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग इसकी तैयारियों में जुटा है। इसी के तहत एससीईआरटी गुरुग्राम द्वारा प्रत्येक जिले में 100 शारीरिक शिक्षकों को दो दिवसीय योग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम 23 व 24 मई को जिलास्तर पर आयोजित होगा।<br />
<strong>– बूटाराम, जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा अभियान सरसा।</strong></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 11:04:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए युग की शुरूआत है नई शिक्षा नीति : प्रधान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने कहा है कि नयी शिक्षा नीति शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरूआत है। प्रधान ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था 2020 को सार्वभौमिक, समग्र और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में सरकार द्वारा अनेकों दूरगामी प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/new-education-policy-is-the-beginning-of-a-new-era/article-27052"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/dharmendra-pradhan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने कहा है कि नयी शिक्षा नीति शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरूआत है। प्रधान ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था 2020 को सार्वभौमिक, समग्र और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में सरकार द्वारा अनेकों दूरगामी प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2014 से हर हफ्ते एक नए विश्वविद्यालय और हर दिन एक महाविद्यालय की स्थापना देश मे आत्मनिर्भर शिक्षा व्यवस्था की एक मिसाल है। सरकार ने स्कूलों में कम्प्यूटर, स्वच्छता, बिजली और पानी जैसी आधारभूत जरूरतों को सुनिश्चित किया है।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Sep 2021 12:48:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई शिक्षा नीति कश्मीर के युवाओं का भविष्य निर्माण करेगी: डॉ निशंक</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री का लक्ष्य-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा में जोड़ना नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद उन्हें पूरा विश्वास है कि अब यहां का युवा हथियार या पत्थर नहीं बल्कि लैबोरेट्री में टूल उठाएगा और अपने भविष्य का निर्माण करेगा, वह स्किल और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/new-education-policy-will-create-future-for-kashmirs-youth-dr-nishank/article-18608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/nation-will-be-at-the-pinnacle-of-progress-with-hackathon-nishank.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">प्रधानमंत्री का लक्ष्य-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा में जोड़ना</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद उन्हें पूरा विश्वास है कि अब यहां का युवा हथियार या पत्थर नहीं बल्कि लैबोरेट्री में टूल उठाएगा और अपने भविष्य का निर्माण करेगा, वह स्किल और ज्ञानयुक्त होगा और नये भारत की तस्वीर उसकी योग्यताओं से निर्मित होगी। डॉ निशंक ने जम्मू विश्वविद्यालय में आयोजित नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां बिल्कुल भिन्न हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां तीन सभ्यता रही हैं, तीन अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियां, तीन अलग संस्कृतियां रही हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर ने बहुत सारी चुनौतियों का सामना किया है लेकिन अब एक बैनर तले विकास एवं प्रगति के मार्ग पर हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। चाहे सड़कों का विकास हो या फिर नये संस्थानों की स्थापना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य है कि जम्मू-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2020 16:07:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति नए भारत की, नई उम्मीदों की, नई आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है और यह 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत ’21वीं सदी में स्कूली शिक्षा’ सम्मेलन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-education-policy-will-give-new-direction-to-21st-century-india-modi/article-18336"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/self-reliant-india-step-in-the-right-direction-modi.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति नए भारत की, नई उम्मीदों की, नई आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है और यह 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत ’21वीं सदी में स्कूली शिक्षा’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी एक ऐसे क्षण का हिस्सा बन रहे हैं, जो हमारे देश के भविष्य निर्माण की नींव डाल रहा है, जिसमें नए युग के निर्माण के बीज पड़े हैं। नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में दुनिया का हर क्षेत्र बदल गया, हर व्यवस्था बदल गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इन तीन दशकों में हमारे जीवन का शायद ही कोई पक्ष हो जो पहले जैसा हो लेकिन वो मार्ग, जिस पर चलते हुए समाज भविष्य की तरफ बढ़ता है, हमारी शिक्षा व्यवस्था, वो अब भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी नए भारत की, नई उम्मीदों की, नई आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। इसके पीछे पिछले 4-5 वर्षों की कड़ी मेहनत है, हर क्षेत्र, हर विधा, हर भाषा के लोगों ने इस पर दिन-रात काम किया है लेकिन ये काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के इस अभियान में हमारे प्रधानाचार्य और शिक्षक पूरे उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं। कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के शिक्षकों से उनके सुझाव मांगे थे। एक सप्ताह के भीतर ही 15 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2020 15:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई शिक्षा नीति पर राज्यपालों का सम्मेलन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। करीब तीन दशक के बाद आई नई शिक्षा नीति पर राज्यपालों का सम्मेलन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खतरे के कारण कल सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे तथा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के राज्यपाल शिक्षा मंत्री, कुलपति तथा वरिष्ठ अधिकारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/conference-of-governors-on-new-education-policy-will-be-through-video-conferencing/article-18171"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/many-expectations-from-the-new-education-policy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> करीब तीन दशक के बाद आई नई शिक्षा नीति पर राज्यपालों का सम्मेलन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खतरे के कारण कल सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे तथा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के राज्यपाल शिक्षा मंत्री, कुलपति तथा वरिष्ठ अधिकारी भी भाग लेंगे। गौरतलब है कि पिछले दिनों केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति की घोषणा की थी और तब से देश में नई शिक्षा नीति पर बहस चल रही है। यह नई शिक्षा नीति 34 साल के बाद आई है जबकि इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1986 में नई शिक्षा नीति घोषित की थी। नई शिक्षा नीति को लेकर इन दिनों देश भर में वेबीनार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आभासी विचार गोष्ठियों के जरिये चर्चाएं चल रही है और देश के विभ्भिन शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविद इस पर विचार कर रहे हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/rajnath-singh-holds-bilateral-meeting-with-iranian-defense-minister-in-tehran/"><strong>यह भी पढ़े –</strong> राजनाथ ने ईरानी रक्षा मंत्री के साथ तेहरान में द्विपक्षीय बैठक की</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Sep 2020 10:36:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नयी शिक्षा नीति में है पारदर्शिता का अभाव: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। कांग्रेस ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस पर न संसद में विचार-विमर्श हुआ और ना ही इसके कार्यान्वयन में कोई पारदर्शिता बरती गई है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला, वरिष्ठ नेता एम पल्लम राजू तथा प्रो राजीव गौड़ा ने रविवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/lack-of-transparency-in-new-education-policy-congress/article-17280"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/lack-of-transparency-in-new-education-policy-congress.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। कांग्रेस ने नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस पर न संसद में विचार-विमर्श हुआ और ना ही इसके कार्यान्वयन में कोई पारदर्शिता बरती गई है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला, वरिष्ठ नेता एम पल्लम राजू तथा प्रो राजीव गौड़ा ने रविवार को यहा संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि शिक्षा नीति 2020 में मानवीय विकास, ज्ञान प्राप्ति, गंभीर चिंतन एवं जिज्ञासा की भावना को दरकिनार कर स्कूल एवं उच्च शिक्षा में बदलाव के लिए बुनियादी सोच विचार की बजाय सिर्फ शब्दों का भ्रमजाल, चमक-दमक, दिखावा एवं आडंबर को ही महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा ” नयी शिक्षा नीति लागू करने में न परामर्श, न चर्चा, न विचार विमर्श और न पारदर्शिता, अपने आप में बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा नीति 2020 की घोषणा कोरोना महामारी के संकट के बीच क्यों की गई और वह भी तब, जब सभी शैक्षणिक संस्थान बंद पड़े हैं। सिवाय भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों के पूरे शैक्षणिक समुदाय ने आगे बढ़ विरोध जताया है कि शिक्षा नीति 2020 के बारे कोई व्यापक परामर्श, वार्ता या चर्चा हुई ही नहीं।”</h6>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Aug 2020 18:36:57 +0530</pubDate>
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                <title>नये उम्मीदों से भरी नई शिक्षा नीति</title>
                                    <description><![CDATA[बरसों से चल रहे प्रयास के फलस्वरूप आखिरकार केन्द्र सरकार ने बीते 29 जुलाई को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। नई शिक्षा नीति में नये सपने और नई विशेषताएं देखी जा सकती हैं साथ ही कुल जीडीपी का 6 फीसद शिक्षा पर खर्च करने का इरादा भी झलकता है। जो पहले की तुलना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/new-education-policy-filled-with-new-expectations/article-17259"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/new-education-policy-filled-with-new-expectations.jpeg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>बरसों से चल रहे प्रयास के फलस्वरूप आखिरकार केन्द्र सरकार ने बीते 29 जुलाई को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। नई शिक्षा नीति में नये सपने और नई विशेषताएं देखी जा सकती हैं साथ ही कुल जीडीपी का 6 फीसद शिक्षा पर खर्च करने का इरादा भी झलकता है। जो पहले की तुलना में डेढ़ फीसद से अधिक है।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">गौरतलब है कि ठीक इसके पहले 1986 में शिक्षा नीति लागू की गयी थी जिसमें 1992 में संशोधन किया गया था और तब से यही व्यवस्था अनवरत है। 34 साल बाद देश में एक नये प्रारूप की शिक्षा अमल में लाये जाने का बिगुल बज गया है। जिसका मसौदा पूर्व इसरो प्रमुख कस्तूरी रंजन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने तैयार किया था। नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई परिवर्तन किये गये हैं। साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। गौरतलब है कि एचआरडी मंत्रालय 1985 में गठित हुआ था। नई शिक्षा नीति कई नये आयामों से युक्त है जिसकी विशद् चर्चा लाजमी है। भाषा के स्तर पर इसमें उदारता और पाठ्यक्रम की दृश्टि से इसमें कहीं अधिक लोचशीलता भरी हुई है। इसका स्वरूप 10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 कर दिया गया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">चरणबद्ध प्रक्रिया में देखें तो अब भारत में शिक्षा की प्रारम्भिकी फाउंडेशन स्टेज से शुरू होगी जिसमें पहले तीन साल बच्चे आंगनबाड़ी में प्री स्कूलिंग करेंगे तत्पश्चात अगले दो वर्श अर्थात कक्षा एक और दो के लिए स्कूल जायेंगे जो नये पाठ्यक्रम के अंतर्गत होगा। जाहिर है इसका स्वभाव क्रियाकलाप आधारित शिक्षण से युक्त होगा। इसमें विद्यार्थी 3 से 8 साल की आयु के होंगे। यह पढ़ाई का पहला पांच साल का चरण है। दूसरा चरण तीन वर्षीय प्रेपेटरी स्टेज का है जिसमें कक्षा तीन से पांच और 11 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों के बच्चों के लिए होगा। जबकि मिडिल स्टेज की पढ़ाई कक्षा छ: से आठ और उम्र 11 से 14 है। इसके बाद सेकेण्डरी स्टेज कक्षा नौ से बारहवीं तक का और विषय चुनने की यहां आजादी है। इसमें खास यह है कि 5वीं कक्षा तक मात्र भाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई का माध्यम रखने की बात है। विदेशी भाषा की पढ़ाई सेकेण्डरी लेवेल पर कही गयी है जिसे कक्षा आठ या उससे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। साफ है कि नई शिक्षा नीति में भाषा थोपने की स्थिति नहीं दिखती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उच्च शिक्षा स्तर पर भी कई बदलाव किये गये हैं। डिग्री कार्यक्रम में कई संदर्भ निहित है। मसलन जो छात्र शोध में जाना चाहता है उसे चार साल का स्नातक और एक साल का परास्नातक करना होगा जबकि जो नौकरी में जाना चाहता है उनके लिए यही कार्यक्रम तीन वर्ष का होगा। रिसर्च अर्थात् पीएचडी में सीधे प्रवेश यहां एमफिल की जरूरत खत्म कर दी गयी है। हालांकि वर्तमान में भी पीएचडी से पहले एमफिल की कोई अनिवार्यता नहीं थी। देखा जाय तो उच्च शिक्षा भी लोचशीलता से युक्त है और पढ़ाई छूटने और फिर जोड़ने के अलावा भी कई सुविधायें देखी जा सकती हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भी दरवाजे खुलते दिखाई दे रहे हैं। बदलाव जमीन पर जल्द उतर पायेगा कहना मुश्किल है मगर भारत में शीर्ष 200 विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए द्वार खुलने से यहां की उच्च शिक्षा का स्तर भी बढ़ने की सम्भावना है साथ ही प्रतिभा पलायन को भी ब्रेक लग सकता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वैसे यहां एक खास बात यह भी है कि यूपीए सरकार के समय विदेशी शिक्षण संस्थाओं पर लाये गये रेगुलेशन ऑफ़ एन्ट्री एण्ड ऑपरेशन बिल 2010 को लेकर बीजेपी विरोध में थी। लेकिन अब इसके लिए दरवाजा खोलने की सरकार बात कर रही है। हालांकि इसे सही करार दिया जाना चाहिए क्योंकि हर साल साढ़े सात लाख से अधिक भारतीय 6 अरब डॉलर खर्च करके विदेश में पढ़ते हैं। इस दृश्टि से इस पर न केवल विराम लगेगा बल्कि आर्थिक मुनाफा भी देश को हो सकता है। सवाल यह भी है कि भारत के शैक्षणिक वातावरण को देख कर क्या विदेशी विश्वविद्यालय यहां काम करने का रूख करेंगे। ऐसे में तब जब नई शिक्षा नीति में अधिकतम फीस की सीमा भी तय करने की बात कही गयी है। खास यह भी है कि उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसद ग्रॉस इन्रोलमेंट रेशियो पहुंचाने का लक्ष्य है। फिलहाल 2018 के आंकड़े को देखें तो यह 26 फीसद से थोड़ा ज्यादा है। फिलहाल उच्च शिक्षा में करोड़ों नई सीट जोड़ने की बात भी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भारत की नई शिक्षा नीति कई ऐसे सवालों का भविष्य में एक बेहतर जवाब हो सकती है। वैसे दुनिया में कई देश शिक्षा की स्थिति और प्रगति को लेकर नये प्रयोग करते रहे हैं। अमेरिका में स्कूल व्यावहारिक समझ और अतिरिक्त पाठ्यचर्या गतिविधियों पर अधिक जोर देते हैं। यहां प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च विद्यालय की श्रेणी देखी जा सकती है। चीन की शिक्षा प्रणाली में भी चार चरण है। पहले बेसिक शिक्षा फिर पेशेवर शिक्षा और उसके बाद उच्च शिक्षा और अन्तत: व्यस्क शिक्षा शामिल है। खास यह है कि यहां 6 से 15 वर्ष के चीनी बच्चों के लिए शिक्षा जरूरी और मुफ्त है। यहां औसतन एक कक्षा में 35 विद्यार्थी और किसी भी तरह का कोई आरक्षण नहीं है साथ ही चीन में बच्चों का 6 साल की उम्र के बच्चों का दाखिला स्कूल में होता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">एजुकेशन इन स्विट्जरलैण्ड यह शब्द अपनेआप में एक अलग तरह की जिन्दगी है। यह प्रारम्भिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के लिए विख्यात है। यूरोप के कई देश मसलन स्विट्जरलैण्ड, नीदरलैण्ड, जर्मनी, इंग्लैण्ड, फ्रांस व इटली समेत कई देश शिक्षा के मामले में काफी ताकत बना चुके हैं। नीदरलैण्ड की शिक्षा को काफी किफायती माना जाता है। शिक्षा के साथ कई देशों में पार्ट टाइम जॉब करने की भी छूट मिलती है। इसके अलावा भी कई सुविधाएं देखी जा सकती हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">नई शिक्षा नीति अनेक सुधारों और योजनाओं को शिक्षा के क्षेत्र में योगदान अवश्य देगी। जिससे भावी पीढ़ी को लक्ष्य के अनुसार मानसिक और बौद्धिक रूप से तैयार किया जा सकेगा। वैसे स्वतंत्रता के बाद से शिक्षा को लेकर कई आयोग और समितियों का गठन हुआ। स्वतंत्रता से पहले की शिक्षा पद्धति में व्यापक परिवर्तन भी होते रहे हैं। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा यह संदर्भ उजागर करती है कि 1954 की लॉर्ड मैकॉले की इंगलिश शिक्षा का दौर आगे उस पैमाने पर नहीं रहेगा। 1964, 1966 और 1968 तथा 1975 में शिक्षा सम्बंधी आयोगों का गठन हुआ साथ ही 10+2+3 की शिक्षा पद्धति को 1986 में पूरे जोश, खरोश के साथ लागू किया गया जिसे अब 5+3+3+4 के रूप में परिवर्तित करते हुए नई शिक्षा नीति 2020 नई विशिष्टता को प्रदर्शित कर रहा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बुनियादी स्तर पर परिवर्तन के साथ उच्च शिक्षा तक के बदलाव इस नीति में समाहित हैं। इतना ही नहीं विचारों और मान्यताओं का इसमें पुर जोर समर्थन दिखता है। देखा जाय तो वर्तमान शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार कराने का जिम्मा स्मृति ईरानी ने उठाया था। पूर्व कैबिनेट सचिव सुब्रमण्यम स्वामी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी हुआ बाद में एचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर बने जिन्होंने इसे डॉ0 कस्तूरी रंगन की अध्यक्षता में समिति बनाकर उन्हें सौंप दिया जिसकी सिफारिशें काफी समय तक मंत्रालय में पड़ी रही। 2019 के मोदी सरकार की दूसरी पारी में डॉ0 रमेश पोखरियाल निशंक को एचआरडी मंत्री बनाया गया और अब नई शिक्षा नीति देश के सामने है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">गौरतलब है कि शिक्षाविद् डॉ. मुरली मनोहर जोशी के समय में भी नई शिक्षा पर प्रयास हुए थे। फिलहाल नई शिक्षा नीति नई आशा और नई किरण से भरी लगती है। बावजूद इसके शिक्षा में आसमान के तारे कब जमीन पर उतरेंगे यह सवाल कहीं गया नहीं है। बस प्रयास यह रहना चाहिए कि संरचना, प्रक्रिया और बेहतर व्यवहार के आभाव में इसका प्रकाश कमतर न रहे।</h6>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2020 22:38:05 +0530</pubDate>
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