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                <title>Mahinda Rajapaksa - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Mahinda Rajapaksa RSS Feed</description>
                
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                <title>राजपक्षे परिवार संभाल नहीं पाया अर्थव्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के त्यागपत्र देने तथा हिंसक घटनाओं के साथ श्रीलंका का वर्तमान संकट और गहरा हो गया है। राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे, जो प्रधानमंत्री के छोटे भाई भी हैं, ने हिंसक घटनाओं में कई लोगों के मारे जाने के बाद सेना को विशेषाधिकार दे दिया है। इस कदम को लेकर भी सवाल उठ रहे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/mahinda-rajapaksa-family-could-not-handle-the-economy/article-33282"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/pm-mahinda-rajapaksa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के त्यागपत्र देने तथा हिंसक घटनाओं के साथ श्रीलंका का वर्तमान संकट और गहरा हो गया है। राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे, जो प्रधानमंत्री के छोटे भाई भी हैं, ने हिंसक घटनाओं में कई लोगों के मारे जाने के बाद सेना को विशेषाधिकार दे दिया है। इस कदम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जैसा कि सर्वविदित है, इस संकट की पृष्ठभूमि यह है कि सरकार के विभिन्न निर्णयों, जैसे- आॅर्गेनिक खेती को अनिवार्य करना, करों में बड़ी छूट देना आदि, से देश की अर्थव्यवस्था और राजस्व को बड़ा झटका लगा। कोरोना महामारी ने पर्यटन को तबाह कर दिया, जो श्रीलंका की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है तथा विदेशी मुद्रा के आय का सबसे बड़ा स्रोत भी। राजपक्षे सरकार में इस परिवार से ही आठ सदस्य थे और बजट का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा इसी परिवार के नियंत्रण में था। इसके बावजूद यह परिवार गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सार्थक व प्रभावी हस्तक्षेप करने में असफल रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल के शुरू में ही संकट के बेहद गंभीर होने के स्पष्ट संकेत आ चुके थे। तब यह कहा जा रहा था कि सरकार कुछ ठोस कदम उठायेगी और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से भी बातचीत की संभावना जतायी जा रही थी, पर कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई। राजपक्षे परिवार की कार्यशैली में भी सुधार नहीं हुआ। जब पिछले महीने श्रीलंका विदेशी कर्जों की किस्त चुकाने में असमर्थ रहा, तब देश के भीतर और बाहर साफ संदेश गया कि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। देश के भीतर बढ़ते असंतोष को कम करने के लिए महिंदा राजपक्षे ने सरकार में कुछ फेर-बदल किया, पर इससे न तो स्थिति में कोई सुधार आया और न ही लोगों का रोष कम हुआ। यह भी उल्लेखनीय है कि सरकार के दो शीर्षस्थ पदों पर राजपक्षे बंधु ही काबिज रहे। इसलिए लोगों की सारी नाराजगी इस परिवार से है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्तीय सहायता के लिए अभी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से जो बातचीत चल रही है, उस संबंध में आ रही खबरों से संकेत मिलता है कि श्रीलंका के सामने कड़ी शर्तें रखी जा रही हैं, जिनमें अर्थव्यवस्था में बड़े सुधार भी शामिल हैं। राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव से भी स्थिति बिगड़ रही है। एक उम्मीद यह की जा सकती है कि कोरोना काल से दुनिया के उबरने के साथ-साथ श्रीलंका में पर्यटकों का आना शुरू हो। इससे अर्थव्यवस्था को थोड़ा सहारा मिल सकता है और लोगों की आमदनी का एक जरिया मिलेगा। श्रीलंका में जो विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, उनकी बड़ी मांग यह है कि दोनों भाई अपना पद छोड़ दें। यदि वहां कोई नयी राजनीतिक पहल होती है, तो वह राजपक्षे परिवार के सत्ता में रहते संभव नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने तो त्यागपत्र दे दिया है, पर उनके भाई अभी भी देश के राष्ट्रपति हैं। पहले इन्हीं भाइयों के प्रयासों से श्रीलंकाई संविधान में संशोधन कर राष्ट्रपति को बहुत अधिक अधिकार दिया जा चुका है। श्रीलंका के गृहयुद्ध में तमिल समुदाय के भयानक दमन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शिकायतें हैं। यह मसला देश की आंतरिक शांति व स्थिरता के लिए भी एक प्रश्नचिह्न है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 09:48:30 +0530</pubDate>
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                <title>जल रहा श्रीलंका, महिंदा राजपक्षे के घर में लगाई आग, 5 की मौत, 12 मंत्रियों के घर फूंके</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो (एजेंसी)। श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के मद्देनजर आक्रोशित सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों महिंदा राजपक्षे के पुश्तैनी मकान को आग के हवाले कर दिया। घटना के वायरल वीडियो फुटेज में पूरे घर को आग की लपटों से घिरा हुआ दिखाया गया है और इसमें लोगों को सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भी देखा जा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/anti-government-protest-in-sri-lanka-due-to-economic-crisis/article-33187"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/mahinda-rajapaksa-house-burnt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलंबो (एजेंसी)।</strong> श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के मद्देनजर आक्रोशित सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों महिंदा राजपक्षे के पुश्तैनी मकान को आग के हवाले कर दिया। घटना के वायरल वीडियो फुटेज में पूरे घर को आग की लपटों से घिरा हुआ दिखाया गया है और इसमें लोगों को सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भी देखा जा सकता है। देश में मौजूदा सरकार के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच प्रधानमंत्री के पद से महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद यह घटना सामने आई है। वहीं इस हिंसा में 5 लोगों की मौत हो गई है और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए है। इस हिंसा में एक सांसद की भी मौत हो गई है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>श्रीलंका में हालात बेकाबू</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका के हंबनटोटा में महिंदा राजपक्षे के पैतृक घर में प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी। इस घटना के वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ मंत्रियों के घरों में भी तोड़फोड़ और आगजनी की गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">इससे पहले श्रीलंका में भड़की हिंसा के बाद प्रधानमंत्री राजपक्षे ने अपना इस्तीफा दे दिया। इस हिंसा में श्रीलंका के एक सांसद समेत पांच लोगों की मौत हो गई और करीब 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका में आर्थिक हालात बिगड़ने को लेकर पिछले कई हफ्तों से विरोध प्रदर्शन चल रहे थे, लेकिन जब सरकार के पास आयात के लिए भी फंड खत्म हो गया तो लोग सड़कों पर उतर आए और हिंसा फैलने लगी। लोगों का गुस्सा पीएम राजपक्षे और उनके समर्थक नेताओं पर उतर रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका के तमाम शहरों में पूरी तरह से कर्फ्यू लगा दिया गया है। पुलिस हिंसा को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस और बल का प्रयोग कर रही है। लेकिन फिलहाल हालात काबू से बाहर नजर आ रहे हैं और प्रदर्शन करने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है।</li>
<li style="text-align:justify;">श्रीलंका के घटनाक्रम पर भारत करीब से नजर बनाए हुए है। इस बीच कोलंबो में भारतीय उच्चयोग ने संकट की स्थिति में भारतीयों की मदद के लिए आपात मोबाइल नंबर +94-773727832 जारी किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">पुलिस ने बताया है कि, आक्रोशित भीड़ ने पूर्व मंत्री जॉनसन फर्नांडो के कुरुनेगाला और कोलंबों स्थित कार्यालयों पर हमला किया है। उनके बार में भी आग लगाये जाने की खबर है। पूर्व मंत्री नीमल लांजा के आवास पर भी हमला किया गया है जबकि महापौर समन लाल फर्नांडो के आवास में आग लगा दी गई।</li>
</ul>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 11:41:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>श्रीलंका में महिन्द्रा राजपक्षे नीत एसएलपीपी की आम चुनाव में जबरदस्त जीत</title>
                                    <description><![CDATA[राजपक्षे रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं कोलंबो (एजेंसी)। श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिन्द्रा राजपक्षे की अगुवाई वाली श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) ने संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की है। देश में 225 सीटों के लिए हुए चुनाव में एसएलपीपी ने 145 सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/mahinda-rajapaksa-led-slpp-landslide-victory-in-sri-lanka/article-17408"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/mahinda-rajapaksa.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">राजपक्षे रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कोलंबो (एजेंसी)।</strong> श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिन्द्रा राजपक्षे की अगुवाई वाली श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) ने संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की है। देश में 225 सीटों के लिए हुए चुनाव में एसएलपीपी ने 145 सीटें जीतकर दो तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है। चुनाव आयोग की ओर से चुनाव परिणाम के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साजित प्रेमदासा नीत समागि जना बालावेगाया (एसजेबी) को 54 सीटें मिली है जबकि एक तमिल राजनीतिक पार्टी इटाक के हिस्से में 10 सीटें आयी है। चुनाव परिणामों में दिलचस्प यह भी रहा कि पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी(यूएनपी) को एक भी सीट नहीं मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूएनपी देश की सबसे पुरानी राजनीतिक दलों में से एक है। एसएलपीपी के खाते में 59.09 प्रतिशत वोट पड़े हैं जबकि एसजेबी को प्राप्त वोटों का प्रतिशत 23.90 रहा। राजपक्षे रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं जबकि नए मंत्रिमंडल का विस्तार आने वाले सप्ताह में किया जाएगा। देश के संविधान के तहत मंत्रिमंडल में 30 मंत्रियों को शामिल किया जा सकेगा। राजपक्षे ने ट्वीट कर मतदाताओं को धन्यवाद दिया है तथा राष्ट्रपति गोटाबया राजपक्षे और स्वयं उन पर विश्वास जताने के लिए आभार व्यक्त किया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2020 15:20:26 +0530</pubDate>
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