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                <title>Defense Sector - Sach Kahoon Hindi</title>
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                            <item>
                <title>रक्षा क्षेत्र में सहयोग का दायरा बढ़ाएंगे भारत और ऑस्ट्रेलिया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और पुख्ता करने तथा इसके दायरे को व्यापक बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की चार दिन की यात्रा पर आए आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री तथा रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ले के साथ बुधवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-and-australia-will-increase-the-scope-of-cooperation-in-the-defense-sector/article-34757"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और पुख्ता करने तथा इसके दायरे को व्यापक बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की चार दिन की यात्रा पर आए आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री तथा रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ले के साथ बुधवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता की। वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की और इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कोरोना महामारी के बावजूद ये गतिविधि बढ़ी हैं। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में सहयोग का दायरा व्यापक करने के उपायों पर भी चर्चा की।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Had excellent deliberations with Australia’s Deputy Prime Minister and Minister for Defence Mr. Richard Marles in New Delhi today. We reviewed the full range of defence &amp; strategic cooperation between both the countries and paved way for deepening it further. <a href="https://twitter.com/RichardMarlesMP?ref_src=twsrc%5Etfw">@RichardMarlesMP</a> <a href="https://t.co/SzSf0VhS6b">pic.twitter.com/SzSf0VhS6b</a></p>
<p>— Rajnath Singh (@rajnathsingh) <a href="https://twitter.com/rajnathsingh/status/1539500691265183744?ref_src=twsrc%5Etfw">June 22, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">वार्ता के दौरान दोनों मंत्रियों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक सामरिक साझेदारी के महत्वपूर्ण सतंभों रक्षा तथा सुरक्षा के संदर्भ में स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने व्यापक सामरिक साझेदारी के क्रियान्वयन के प्रति वचनबद्धता दोहराई और कहा कि यह परस्पर विश्वास, समझ , साझा हितों तथा लोकतंत्र और नियमों में बंधी व्यवस्था के साझा मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने दोनों देशों की सेनाओं के बीच अभ्यासों की बढ़ती संख्या और विविधता का स्वागत किया और भारत-ऑस्ट्रेलिया सैन्य साजो सामान आदान-प्रदान से संबंधित व्यवस्था के तहत संचालन संबंधी मेलजोल पर भी बल दिया। रक्षा मंत्रियों ने रक्षा अनुसंधान एवं सामग्री सहयोग पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त कार्य दल के प्रति वचनबद्धता दोहराई। इस कार्य दल की इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया में बैठक होनी है। यह कार्य बल दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण तंत्र के रूप में कार्य करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>दोनों देशों के बीच युवा अधिकारियों के आदान-प्रदान कार्यक्रम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">दोनों मंत्रियों ने आपूर्ति श्रंखला को मजबूत बनाने तथा अपनी अपनी सेनाओं को सामान की आपूर्ति क्षमता बढ़ाने के लिए औद्योगिक सहयोग को और अधिक बढ़ाने की संभावनाओं का पता लगाने पर भी चर्चा की. दोनों पक्षों ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा औद्योगिक आधार को बढ़ाने तथा अवसरों का पता लगाने पर भी सहमति व्यक्त की। उन्होंने दोनों देशों के बीच युवा अधिकारियों के आदान-प्रदान कार्यक्रम :जनरल रावत यंग आॅफिसर एक्सचेंज प्रोग्राम: को इसी वर्ष शुरू किए जाने का भी स्वागत किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों मंत्रियों ने सामरिक चुनौतियों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और स्वतंत्र, मुक्त तथा समावेशी , समृद्ध एवं नियम आधारित हिन्द प्रशांत क्षेत्र के साझा लक्ष्य के प्रति अपनी वचनबद्धता जाहिर की। दोनों देशों ने कहा कि वे आॅस्ट्रेलिया में आगामी अक्टूबर में होने वाले हिंद प्रशांत अभ्यास को लेकर भी आशान्वित हैं।</p>
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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 15:41:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए देशभक्ति के जज्बे से काम करे निजी क्षेत्र : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज सभी हितधारकों और विशेष रूप से निजी क्षेत्र का आह्वान किया कि वे देश भक्ति का जज्बा दिखाते हुए भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपना अधिक से अधिक योगदान दें। मोदी ने आम बजट में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/private-sector-should-work-with-the-spirit-of-patriotism-for-self-reliance-in-the-defense-sector/article-31102"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/modi-1-e16456914208532.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज सभी हितधारकों और विशेष रूप से निजी क्षेत्र का आह्वान किया कि वे देश भक्ति का जज्बा दिखाते हुए भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपना अधिक से अधिक योगदान दें। मोदी ने आम बजट में देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की योजनाओं पर चर्चा के लिए शुक्रवार को आयोजित वेबीनार को संबोधित करते हुए इस क्षेत्र से जुड़े सभी हित धारकों का आह्वान किया कि वे मुनाफे और अन्य बातों को छोड़कर देश भक्ति तथा देश सेवा के जज्बे के साथ देश को ताकतवर बनाने की दिशा में काम करें। निजी क्षेत्र का विशेष रूप से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि देश को आपसे उम्मीदें हैं और निजी कंपनियों को देश सेवा के लिए मिले इस मौके को खोना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि अब यह सोचने का समय समय नहीं है कि कितना मुनाफा होगा और कब होगा अभी हमें केवल देश को ताकतवर बनाने के बारे में सोचना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन इसलिए किया गया है कि सरकार सभी हित धारकों से प्रैक्टिकल समाधान सुनना चाहती है। उन्होंने कहा कि बजट के क्रियान्वयन में अभी एक महीने का समय है और इस दौरान सभी को मिलकर चर्चा तथा योजना बनानी चाहिए जिससे कि बजट के प्रावधानों को एक अप्रैल से ही जमीन पर उतारा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र भी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की बराबरी करें तथा देश सेवा में बढ़-चढ़कर योगदान दे । इसके लिए बजट में अनुसंधान एवं विकास के लिए 25 प्रतिशत राशि का आवंटन किया गया है साथ ही एक विशेष उपक्रम की स्थापना की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष और ड्रोन सेक्टर को भी निजी क्षेत्र के लिए खोला जा रहा है। साथ ही देश में बनाए जा रहे दो रक्षा गलियारों से भी निजी क्षेत्र को अपना योगदान देने में मदद मिलेगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 12:19:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मजबूती के लिए आगे आये निजी क्षेत्र: राजनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के निर्माण में अपना योगदान दें नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रौद्योगिकी आधारित विकास पर जोर देते हुए निजी क्षेत्र से सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में आगे आकर योगदान देने का आह्वान किया है। सिंह ने वीरवार को डिफेंस इंडिया स्टार्ट अप चैलेंज 0.5 की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/private-sector-should-come-forward-for-self-reliance-and-strength-in-defense-sector-rajnath/article-26169"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/home-minister-rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के निर्माण में अपना योगदान दें</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रौद्योगिकी आधारित विकास पर जोर देते हुए निजी क्षेत्र से सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में आगे आकर योगदान देने का आह्वान किया है। सिंह ने वीरवार को डिफेंस इंडिया स्टार्ट अप चैलेंज 0.5 की वीडियो कांफ्रेन्स से शुरूआत करते हुए कहा कि दुनिया के विकसित देशों ने प्रौद्योगिकी के आधार पर ही विकास किया है इसलिए प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक विकास बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘जब-जब प्रौद्योगिकी की बात होती है, मेरे मन में अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे उन्नत देश आते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुझे बतलाया गया है कि ये उन्नत देश अपनी प्रौद्योगिकी के दम पर आगे बढेÞ हैं। इन राष्ट्रों का विकास प्रौद्योगिकी आधारित आर्थिक विकास के आधार पर हुआ है। मैं सरकार की ओर से सभी संभव सहयोग का आश्वासन देते हुए, निजी क्षेत्र का आह्वान करता हूँ कि आप लोग आगे आएं, और एक सशक्त और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के निर्माण में अपना योगदान दें।</p>
<h4 style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं</h4>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने कहा कि यह चैलेंज ऐसे समय शुरू किया जा रहा है जब देश स्वाधीनता की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। इससे हम एक तरह से रक्षा क्षेत्र में स्वाधीनता की ओर एक और कदम आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में सुरक्षा परिदृश्य के तेजी से बदलने के मद्देनजर राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं और जटिल भी होती जा रही है। साथ ही विश्व की भू- राजनीतिक परिस्थितियों में भी लगातार परिवर्तन आ रहे हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Aug 2021 16:12:17 +0530</pubDate>
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                <title>रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का नया नारा बुलंद किया है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने 101 वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है। अब भारत घरेलू रक्षा उद्योग को चार लाख करोड़ का आर्डर देगा। नि:संदेह भारत के लिए यह बेहद्द आवश्यक है। भले ही यह कठिन कार्य है लेकिन यदि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/self-reliant-in-defense-sector/article-17488"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/security-russia-said-india-will-get-s-400-air-defense-missile-system-in-18-19-months.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का नया नारा बुलंद किया है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने 101 वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है। अब भारत घरेलू रक्षा उद्योग को चार लाख करोड़ का आर्डर देगा। नि:संदेह भारत के लिए यह बेहद्द आवश्यक है। भले ही यह कठिन कार्य है लेकिन यदि देश के आत्माभिमान और आवश्यकताओं को देखा जाए तब यह काम करना जरूरी है और यह नामुमकिन भी नहीं है। आम भारतीय ही जब यह सुनता है कि फ्रांस से 36 राफेल खरीदने के लिए 59000 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं तो यह सवाल उठता है कि आखिर इतनी पूंजी बाहर भेजने की बजाय देश में ही यह सामान क्यों तैयार नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि यही काम देश की सरकारी और निजी कंपनियों को मिले तब यहां रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जहां तक रक्षा संबंधी खरीद का सवाल है भारत दुनिया का तीसरा देश है जो रक्षा साजो-सामान पर सबसे अधिक खर्च करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2019 में भारत ने रक्षा क्षेत्र पर 71 बिलियन डालर खर्च किया है। हमारे से आगे केवल अमेरिका और चीन ही हैं। यदि हम खुद ही अपनी आवश्यकता के हथियार बना लें तब बचा हुआ पैसा विकास कार्यों पर खर्च किया जा सकता है। इन परिस्थितियों में भारत को रक्षा उत्पाद भी उसी तरह बनाने होंगे जैसे कृषि प्रधान देश के रूप में कृषि यंत्रों की पूर्ति ज्यादा से ज्यादा देश में ही हो रही है। जहां तक तकनीक का संबंध है भारत विकसित देशों के नजदीक पहुंच गया है। विशेष रूप से अंतरिक्ष मामले में भारत दुनिया के सर्वोच्च देशों की शुमार है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो के वेज्ञानियों ने चन्द्रयान और मंगल मिशन फतेह कर लिया है। हम कर्मशियल सैटेलाइट भी भेज चुके हैं। अब तक 40 देशों के 200 से अधिक सैटेलाइट भारत ने भेजे हैं। भारत को बाहर के देशों के सैटेलाइट भेजने के लिए विदेशी मुद्रा भी प्राप्त हो रही है। इसी तरह मंगल मिशन बेहद सस्ते में भारत ने ही भेजा है। भारत के केवल 450 करोड़ इस मिशन पर खर्च हुए जबकि अमेरिका का खर्च कई गुणा था। अंतरिक्ष मामले में भी हम अमेरिका, चीन और रूस के नजदीक पहुंच गए हैं। नि:संदेह एक बार यह रास्ता कठिन नजर आता है लेकिन यदि डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को पूरी सुविधाएं और एक मिशन से काम करने दिया जाए तब कुछ भी असंभव नहीं। किसी समय गेहूँ की कटाई के लिए इटली और जर्मनी से कंबाईनें मंगवाई गई थी, लेकिन पंजाब के साधारण मिस्त्रियों ने ही उन कंबाईनों से अधिक क्षमता व कम खर्च वाली मशीनों बना दी। उसके बाद कभी भी भारत को विदेशों से कंबाईनें मंगवाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2020 09:40:14 +0530</pubDate>
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