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                <title>Cow - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Cow RSS Feed</description>
                
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                <title>Gomutra: 10 रुपये लीटर गोमूत्र की खरीद शुरू, पशुपालकों और महिलाओं को मिलेगा लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/cow-conservation-will-open-a-new-way-of-earning-in/article-89482"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-08/lucknow-news1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> Lucknow News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और जैविक खेती से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है। बुलंदशहर में किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोमूत्र की खरीद शुरू की गई है।  </p>
<p style="text-align:justify;">किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इस मॉडल को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की तैयारी है। इससे गोवंश पालने वाले परिवारों को दूध के साथ गोमूत्र से भी अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिल सकेगा। बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसैना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एफपीओ के जरिए शुरू हुए इस प्रयोग से आसपास के 15 गांवों को जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र एकत्र करने के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्र बनाए गए हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 500 लीटर गोमूत्र एकत्र किया जा रहा है। आगे खरीद की दर बढ़ाकर इसे 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना है। गोमूत्र के संग्रहण के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता के टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही इसकी खरीद और संग्रह की व्यवस्था की गई है। स्थानीय स्तर पर संग्रहण की व्यवस्था होने से पशुपालकों, विशेषकर महिलाओं को इससे जोड़ना आसान हुआ है। इस पूरी व्यवस्था में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। </p>
<p style="text-align:justify;">गांवों में गोमूत्र एकत्र करने में सहयोग करने वाली महिलाओं को प्रति लीटर दो रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए भी गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। डॉ. प्रवीण ने बताया कि इस पहल को केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण से भी जोड़ा गया है। करीब 300 महिलाओं के सहयोग से यह काम शुरू किया गया है और इन सभी महिलाओं को शेयरहोल्डर बनाया गया है। इससे महिलाएं केवल संग्रहण व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इस पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जुड़ी हुई हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">गोमूत्र संग्रह के एवज में मिलने वाला कमीशन महिलाओं के लिए छोटी आय का नियमित साधन बन रहा है। इसका दायरा बढ़ने पर अधिक संख्या में ग्रामीण महिलाओं को इससे जोड़ने की संभावना है। खासतौर पर गोपालन करने वाले परिवारों की महिलाओं के लिए यह घर और गांव में रहते हुए आमदनी बढ़ाने का जरिया बन सकता है। एकत्र किए गए गोमूत्र का उपयोग खेती के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर खेतों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं तैयार की जाती हैं। इन्हें बाद में समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस मॉडल का उद्देश्य खेती में रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित उत्पादों को बढ़ावा देना भी है। इससे एक तरफ गोवंश से मिलने वाले उत्पादों का उपयोग बढ़ेगा तो दूसरी तरफ प्राकृतिक और जैविक खेती को भी प्रोत्साहन मिल सकेगा। तैयार उत्पादों की बिक्री समितियों को किए जाने से इसके लिए स्थानीय स्तर पर बाजार की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों में गोपालन से होने वाली आय मुख्य रूप से दूध और दुग्ध उत्पादों पर निर्भर रहती है। </p>
<p style="text-align:justify;">इस प्रयोग के जरिए गोमूत्र को भी आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। 10 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद होने पर पशुपालकों को गोवंश से अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। आगे इसे 20 रुपये प्रति लीटर तक ले जाने की योजना सफल होती है तो पशुपालकों की आय में और वृद्धि हो सकती है। गोवंश से दूध के अतिरिक्त दूसरे उत्पादों के जरिए भी आय होने पर उनके संरक्षण को आर्थिक आधार मिल सकता है। गोमूत्र की नियमित खरीद की व्यवस्था विकसित होने से गोपालकों को पशुओं की देखभाल के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। </p>
<p style="text-align:justify;">गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि बुलंदशहर में शुरू हुए इस मॉडल को गो संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और जैविक/प्राकृतिक खेती को एक साथ जोड़ने वाले प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। इसमें गांव से गोमूत्र का संग्रह होता है, महिलाओं को इससे आय मिलती है और एकत्र गोमूत्र से खेती के लिए उत्पाद तैयार कर उन्हें समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। यह पूरी तरह से केमिकल मुक्त है और फसलों की वृद्धि में सहायक होता है। </p>
<p style="text-align:justify;">पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों के आधार पर इसे प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में विस्तार देने की योजना है। इससे गांवों में गोमूत्र संग्रह केंद्रों का नेटवर्क विकसित होगा, जिससे पशुपालकों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत तैयार होने के साथ गो संरक्षण को भी आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-08/lucknow-news1.jpg" alt="Lucknow News" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:21:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Kisan News: गाय-भैंस के सफल प्रसव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां</title>
                                    <description><![CDATA[Kisan News: गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं का सफल प्रजनन और प्रसव एक सुचारु डेयरी प्रबंधन की रीढ़ है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि डेयरी फार्म पर प्रजनन से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित ढंग से संकलित किया जाए, तो गाभिन पशु की अनुमानित प्रसव तिथि का निर्धारण सरल हो जाता है। इससे न केवल समय पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/take-precautions-for-successful-delivery-of-cow-and-buffalo/article-74167"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/kisan-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Kisan News: गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं का सफल प्रजनन और प्रसव एक सुचारु डेयरी प्रबंधन की रीढ़ है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि डेयरी फार्म पर प्रजनन से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित ढंग से संकलित किया जाए, तो गाभिन पशु की अनुमानित प्रसव तिथि का निर्धारण सरल हो जाता है। इससे न केवल समय पर देखभाल संभव होती है, बल्कि प्रसव के दौरान किसी आपात स्थिति से भी बचा जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गर्भकाल की अवधि और देखभाल की शुरूआत | Kisan News</h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. सुजॉय खन्ना, विशेषज्ञ विस्तार शिक्षा निदेशालय, लुवास, हिसार बताते हैं कि गाय का गर्भकाल औसतन 270 से 290 दिन होता है, जबकि भैंस का गर्भकाल लगभग 308 से 330 दिनों के बीच होता है। जैसे ही प्रसव की संभावित तिथि करीब आए, यानी लगभग 10 से 15 दिन पूर्व, गर्भवती पशु को अन्य पशुओं से अलग करके साफ, सुरक्षित और हवादार बाड़े में रखा जाना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">गर्भनाल न निकले तो अपनाएं ये कारगर मिश्रण</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रसव के 8 से 12 घंटे बीतने के बाद भी यदि गर्भनाल स्वत: बाहर नहीं आती, तो पशु को ‘अरगट’ नामक आयुर्वेदिक औषधि का मिश्रण पिलाना उपयोगी सिद्ध हो सकता है। यदि 12 घंटे बाद भी गर्भनाल नहीं निकले, तो पशु चिकित्सक की मदद से उसे हाथ से निकाला जाना चाहिए। Kisan News</p>
<p style="text-align:justify;">प्रसव के बाद बाहर निकले गर्भीय झिल्लियों को खेत में फेंकने की बजाय मिट्टी में दबा देना चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। स्वस्थ गाय या भैंस सामान्यत: स्वाभाविक रूप से प्रसव कर लेती है। लेकिन यदि प्रसव की शुरूआत के चार घंटे बाद भी बच्चा बाहर नहीं आता, तो यह भ्रूण की स्थिति में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। ऐसे में देर किए बिना तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रसवोत्तर स्वच्छता है अनिवार्य</h3>
<p style="text-align:justify;">प्रसव के बाद मादा पशु के बाह्य जननांग, पूंछ और उसके आस-पास के अंगों को गुनगुने पानी से धोएं। इस पानी में नीम की पत्तियों का उबाला हुआ अर्क मिलाएं, जो संक्रमण से बचाव करता है। विशेष ध्यान रखें कि पशु गलती से अपनी गर्भनाल न खा जाए, क्योंकि इससे उसके शरीर में अत्यधिक प्रोटीन पहुंच सकता है, जिससे दूध उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन | Kisan News</h3>
<p style="text-align:justify;">गर्भवती पशुओं की समय पर देखभाल, प्रसव के दौरान सतर्कता और प्रसवोत्तर स्वच्छता न केवल पशु को स्वस्थ बनाए रखती है, बल्कि डेयरी फार्म की समग्र उत्पादकता और लाभ में भी वृद्धि करती है। जागरूकता और विशेषज्ञ सलाह के साथ की गई पशु सेवा, हर पशुपालक के लिए वरदान साबित हो सकती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="जागरूकता और सतर्कता की मिसाल: जाखल पुलिस ने लावारिस मवेशियों को सुरक्षित पहुँचाया उनके मालिकों तक" href="http://10.0.0.122:1245/jakhal-police-safely-delivered-the-abandoned-cattle-to-their-owners/">जागरूकता और सतर्कता की मिसाल: जाखल पुलिस ने लावारिस मवेशियों को सुरक्षित पहुँचाया उनके मालिकों तक</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Aug 2025 15:48:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हरियाणा की गाय ने तोड़ा एशिया रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[करनाल (ब्यूरो)। Karnal News: दूध-दही के लिए मशहूर हरियाणा की एक गाय ने दूध उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। करनाल जिले के किसान की हॉल्स्टीन फ्रिसियन नस्ल की गाय ‘सोनी’ ने 24 घंटे में 87 किलो 740 ग्राम दूध देकर एशिया में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय का रिकॉर्ड तोड़ दिया। बता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryanas-cow-broke-asian-record/article-68473"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-03/cow-buffalo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>करनाल (ब्यूरो)।</strong> Karnal News: दूध-दही के लिए मशहूर हरियाणा की एक गाय ने दूध उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। करनाल जिले के किसान की हॉल्स्टीन फ्रिसियन नस्ल की गाय ‘सोनी’ ने 24 घंटे में 87 किलो 740 ग्राम दूध देकर एशिया में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय का रिकॉर्ड तोड़ दिया। बता दें कि किसान सुनील मेहला की गाय ने ये उपलब्धि राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में 26 से 28 फरवरी तक आयोजित डेयरी मेले में प्राप्त की। वहीं दूसरे नंबर पर भी इसी किसान की गाय रही, जिसने 70 किलो 548 ग्राम दूध दिया। Karnal News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Cyber Fraud: वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर 68 लाख रुपए ठगने के मामले में महिला सहित तीन लोग दिल्ली से काबू" href="http://10.0.0.122:1245/three-people-including-a-woman-arrested-for-duping-people-of-rs-sixty-eight-lakh-in-the-name-of-working-from-home/">Cyber Fraud: वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर 68 लाख रुपए ठगने के मामले में महिला सहित तीन लोग दिल्ली से काबू</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryanas-cow-broke-asian-record/article-68473</link>
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                <pubDate>Sun, 16 Mar 2025 18:12:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मेरी पहली रोटी गाय को’ का शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[नोहर (सच कहूँ न्यूज)। मां ब्रह्माणी परिवार की ओर से शुरू किए गए सेवा प्रकल्प मेरी पहली रोटी (First Bread) गाय को का आज विधिवत शुभारंभ किया गया। प्रकल्प के तहत यहां के नेहरू बाल वाटिका प्राथमिक विद्यालय में बॉक्स की स्थापना की गई, जिसमें बच्चों द्वारा अपने लंच बॉक्स में लाई गई गाय की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/launch-of-meri-pehli-roti-cow/article-50765"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/nohar-news.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नोहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> मां ब्रह्माणी परिवार की ओर से शुरू किए गए सेवा प्रकल्प मेरी पहली रोटी (First Bread) गाय को का आज विधिवत शुभारंभ किया गया। प्रकल्प के तहत यहां के नेहरू बाल वाटिका प्राथमिक विद्यालय में बॉक्स की स्थापना की गई, जिसमें बच्चों द्वारा अपने लंच बॉक्स में लाई गई गाय की रोटी डाली जाएगी। Nohar News</p>
<p style="text-align:justify;">मां ब्रह्माणी की सेविका प्रियंका भाकर, मां ब्रह्माणी मंदिर पल्लू के पुजारी गोवर्धन सिंह भाटी, मनीष गोल्याण, विनोद कंदोई आदि की मौजूदगी में इस अभियान का आगाज किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने बोलते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से हमारे बच्चों में संस्कारों की नींव डालेगी। उन्होंने कहा कि हम अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार पहली रोटी गाय को देते हैं। इससे बच्चों में गाय के प्रति दया और परोपकार की भावना पैदा होगी। Nohar News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि मां ब्रह्माणी परिवार नोहर का यह प्रकल्प सराहनीय है, इससे औरों को भी प्रेरणा मिलेगी। विद्यालय प्रधानाचार्य वर्तिका शर्मा ने सभी का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में मनीष तलवाडिया, सोनू कंदोई, मुकेश हिसारिया, प्रशांत तलवाड़िया, मुकेश साहेवाल, रजत अग्रवाल, पुष्पा बालासरिया, विकास साहेवाल, हर्ष गोल्याण, सीताराम छिंपा, गौतम गोल्याण, विश्प हिंदू परिषद के प्रखंड अध्यक्ष दिलीप सोनी, एडवोकेट मदन शर्मा, रोहताश सैनी, संतोष कंकर आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन किशन चाचाण ने किया। Nohar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पचास साल बाद 11 अगस्त को चंद्रमा के लिए उड़ान भरेगा रूस का यान" href="http://10.0.0.122:1245/fifty-years-later-on-august-eleven-russia-vehicle-will-fly-to-the-moon/">पचास साल बाद 11 अगस्त को चंद्रमा के लिए उड़ान भरेगा रूस का यान</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2023 14:24:28 +0530</pubDate>
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                <title>6 पैर व 3 सींगों वाली दुर्लभ गाय, देखने को उमड़ी भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[सागर। 6 पैर व 3 सींगों वाली दुर्लभ गाय (Cow) आजकल मध्य प्रदेश के सागर जिले में कौतूहल का विषय बनी हुई है। जिस स्थान पर गाय या अन्य जानवरों की पूंछ होती है उसके बगल वाले हिस्से से इस गाय के कुछ शरीर के साथ दो पैर निकले हुए हैं। गाय के मालिक ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cow-crowd-gathered-to-see/article-48514"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/cow.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सागर।</strong> 6 पैर व 3 सींगों वाली दुर्लभ गाय (Cow) आजकल मध्य प्रदेश के सागर जिले में कौतूहल का विषय बनी हुई है। जिस स्थान पर गाय या अन्य जानवरों की पूंछ होती है उसके बगल वाले हिस्से से इस गाय के कुछ शरीर के साथ दो पैर निकले हुए हैं। गाय के मालिक ने गाय के पूरे स्थान पर हल्दी, कुमकुम, चंदन से टीका लगाया हुआ है। Cow</p>
<p style="text-align:justify;">छह पैरों वाली गाय (Cow) के बारे में जो भी सुन रहा है, वो इसे चमत्कार मान देखने के लिए आता है। गाय मालिक ने इसके लिए बाकायदा रथ की तरह एक वाहन तैयार कराया हुआ है। इस खास वाहन में गाय के खड़े होने और बैठने की व्यवस्था की गई है। इस रथ में गाय को बिठा कर यह परिवार गांव की गलियों से गुजरता है तो हर घर से लोग अनोखी गाय को देखने के लिए बाहर निकल आते हैं। गाय मालिक ने रथ के ऊपर एक माइक सिस्टम लगा रखा है जिसमें बोल कर वो गाय की विशेषताओं के बारे में बताता है। छह पैर और तीन सींग वाली गाय को देख कर लोग खूब दान-दक्षिणा कर रहे हैं। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार ग्रामीण नकदी, आटा, चारा, गेहूं, फल-फूल का दान दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ये सब एक भावना की बात होती है कि लोगों के मन में गाय (Cow) को लेकर इतनी श्रद्धा है, जिसे देखकर वो दान-दक्षिणा दे रहे हैं। वैसे भी गाय को हमारे धर्म-शास्त्रों में माँ का दर्जा दिया गया है। इसलिए गाय की सेवा करनी तो बनती है, इसके लिए उसके लिए हरा चारा दे दें या आटा, गुड जो भी वो खाती है वो दे देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">गौमाता को लेकर घूम रहे साईनाथ इंगोले ने बताया कि यह गाय दर्शनीय है। लोग इनके दर्शन कर दान-दक्षिणा देते हैं। उनके पास पिछले पांच वर्ष से यह गाय है। साल में एक बार इसको लेकर वो निकलते हैं। अभी तक चारों धाम की यात्रा कर चुके हैं। इसके अलावा, वो हरिद्वार, काशी, असम जैसे तीर्थ स्थल पर घूम चुके हैं। वर्तमान में वो अनूठी गाय को लेकर मध्य प्रदेश के सागर जिले के गांव-गांव में घूमा रहे हैं। दिन भर रथ यात्रा करते हैं और शाम को किसी मंदिर में रैन बसेरा कर लेते हैं। Cow</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2023 12:04:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाई के साथ चॉकलेट लेने निकली 4 साल की मासूम को गाय ने उठाकर पटका, सींगों से बुरी तरह घसीटा</title>
                                    <description><![CDATA[अनूपगढ़। भाई के साथ चॉकलेट लेने निकली 4 साल की मासूम बच्ची पर गाय ने अचानक हमला कर दिया और उसे जमीन पर पटक दिया। लोग लाठियां लेकर बच्ची को बचाने दौड़े, लेकिन गाय काफी देर तक बच्ची को सींगों से घसीटती रही, रौंदती रही और कुचलती रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अनूपगढ़ में बीकानेर रोड […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/cow-thrashed-4-year-old-innocent-who-went-out-to-buy-chocolates-with-her-brother/article-46282"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/anupgarh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अनूपगढ़।</strong> भाई के साथ चॉकलेट लेने निकली 4 साल की मासूम बच्ची पर गाय ने अचानक हमला कर दिया और उसे जमीन पर पटक दिया। लोग लाठियां लेकर बच्ची को बचाने दौड़े, लेकिन गाय काफी देर तक बच्ची को सींगों से घसीटती रही, रौंदती रही और कुचलती रही।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अनूपगढ़ में बीकानेर रोड के पास पायल स्टूडियों के सामने गली में रविवार दोपहर 2 बजे सान्वी (चार वर्ष) पुत्री सुमेश चुघ अपने सात वर्षीय भाई नमन के साथ चॉकलेट लेने दुकान पर गई थी। जैसे ही दोनों भाई-बहन दुकान से बाहर निकले तो दो गोवंश खड़े थे। इनमें से एक ने बच्ची पर अचानक हमला कर दिया। बच्चों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन गाय ने बच्ची को टक्कर मारकर गिरा दिया और पैरों और सींग से उसे कुचलने लगी। इतना ही नहीं बच्ची को कुछ दूरी तक घसीटती हुई ले गई। तुरंत लोगों ने लाठियां लेकर बच्ची को बचाया। लोगों ने बताया कि गनीमत रही कि बच्ची बच गई। अगर पलभर की देरी होती तो बच्ची की जान चली जाती।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बचाने आए लोगों पर भी किया हमला</h3>
<p style="text-align:justify;">घटना के दौरान आसपास के दुकानदार यह सब देखकर लाठियां लेकर बाहर आए लेकिन गाय ने उन पर भी धावा बोल दिया। लोगों ने किसी तरह लाठियों से गाय को भगाया और बच्ची की जान बचाई। इतना ही बस नहीं हुआ। जब लोग बच्ची को उठाकर दुकान के अंदर भागे तो गाय ने दुकान के अंदर भी घुसने का प्रयास किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">घायल बच्ची अस्पताल में भर्ती</h3>
<p style="text-align:justify;">घटना के तुरंत बाद बच्ची को अनूपगढ़ के राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया तथा परिजनों को भी इसकी सूचना दी गई।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जा सकती थी बच्ची की जान</h3>
<p style="text-align:justify;">सान्वी के पिता सुमेश चुघ ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्ची की हालत देखकर उनका दिल दहल गया। बेटी की जिंदगी बच गई तो मेरे भी जान में जान आई। घटनास्थल के पास स्थित चार्ली बूट हाउस के मालिक शेखर ने घटना के बारे में बताया- अगर पलभर की भी देरी हो जाती तो बच्ची की जान जा सकती थी। मगर भगवान का शुक्र है कि मेरे साथ कुछ अन्य दुकानदारों ने हिम्मत दिखाई और बच्ची को गाय से छुड़ाया।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Apr 2023 18:51:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8230;किस बड़ी घटना का है इंतजार?</title>
                                    <description><![CDATA[गांव बारना में आए दिन जोहड़ में गिर कर प्राण त्याग रही गऊ माता गांव की धरोहर जोहड़ हो रहे पंचायतों की उपेक्षा का शिकार अनेकों बेजुबानों की हो चुकी इस जोहड़ में फंसने से मौत ग्रामीणों ने की जोहड़ की सफाई करने की मांग कुरुक्षेत्र(सच कहूँ, देवीलाल बारना)। गांव बारना का जोहड़ बेजुबान पशुओंं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cows-and-other-animals-are-facing-problem-in-barna-village/article-40830"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/cow.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>गांव बारना में आए दिन जोहड़ में गिर कर प्राण त्याग रही गऊ माता</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>गांव की धरोहर जोहड़ हो रहे पंचायतों की उपेक्षा का शिकार </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अनेकों बेजुबानों की हो चुकी इस जोहड़ में फंसने से मौत </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>ग्रामीणों ने की जोहड़ की सफाई करने की मांग</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>कुरुक्षेत्र(सच कहूँ, देवीलाल बारना)।</strong> गांव बारना का जोहड़ बेजुबान पशुओंं के लिए मौत के कुंए के समान बन गया है। इस जोहड़ में उगे पान पत्ते में फंसने से अनेकों गऊएं व अन्य पशुओं की मौत चुकी है। आए दिन कोई न कोई गऊ या अन्य जानवर इसमें फंसा दिखाई पड़ता है। हालांकि अनेकों बार ग्रामीणों द्वारा इस जोहड़ में फंसी गऊओं को अपनी जान पर खेलकर बचाया भी है लेकिन ग्रामीण जोहड़ की इस स्थिति से बहुत परेशान हैं। ऐसा ही शनिवार सुबह भी देखने को मिला जब एक गऊ को जोहड़ में फंसा हुआ देखा गया। गऊ को जोहड़ में फंसा देख दर्जनभर ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस गऊ को जोहड़ से बाहर निकाला। जोहड़ में गिरने से हो रही गऊओं की मौत से ग्रामीणों में काफी रोष देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण सुखविंद्र सिंह, प्रवीण कश्यप, रामचंद्र, सुरेंद्र सैन, सुलतान सिंह, फूलकुमार, राहुल शर्मा, रामकुमार, रामजवाया, पाला राम, प्रिंस, बीरा राम सहित अन्य ग्रामीणों ने गाए को बाहर निकाला व गुड खिलाया व दवाई दी। ग्रामीण सुलतान ने कहा कि यह जोहड़ तकरीबन 20 फूट गहरा है। कश्यप बस्ती इस जोहड़ से बिल्कुल सटी हुई है। ऐसे में कोई बड़ा हादस होने का डर बना रहता है। वहीं जोहड़ की सफाई न होने से जहरीले जानवर भी जोहड़ से निकलकर घरों में घुसते रहते हैं। ग्रामीण रामचंद्र सहारण ने कहा कि सालों से इस जोहड़ की यही स्थिति है लेकिन प्रशासन व पंचायत ने इस ओर कभी ध्यान नही दिया। उन्होने कहा कि अनेकों बार ग्रामीणों द्वारा इस जोहड़ में फंसी गऊओं को अपनी जान पर खेलकर निकाला गया है। लेकिन पंचायत द्वारा कभी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि मौत के कुंए बने इस जोहड़ की सफाई करवाई जाए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>जोहड़ होते हैं गांव की धरोहर : सुरेंद्र सैन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जोहड़ को गांव में पूजनीय माना जाता है और ये गांव की धरोहर हैं लेकिन पंचायत की लापरवाही के चलते इस ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। इसलिए सरकार को इस ओर कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। बारना गांव में तीन जोहड़ है और सभी जोहड़ों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। कोई जोहड़ ऐसा नही है जहां पर पशुपालक अपने पशुओं को पानी पिला सकें व नहला सकें।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cows-and-other-animals-are-facing-problem-in-barna-village/article-40830</link>
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                <pubDate>Sun, 11 Dec 2022 13:28:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गौ सेवकों ने दलदल में फंसी गाय को निकाला बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[निसिंग(रिंकू गोंदर)। गांव हथलाना के पास करनाल कैथल रोड़ पर पुल के नीचे बनी दलदल में दो दिनों से फंसी गाय को गौसेवकों ने निकाला। समाजसेवी गौ सेवक लब्बू जांगड़ा ने बताया कि जानकारी मिलने पर अपनी टीम के साथ पहुंच दो से तीन दिनों से फंसी गाय को निकाला गया। जांगड़ा ने बताया कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cow-servants-pulled-out-the-cow-trapped-in-the-swamp/article-37608"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/cow-rescue.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>निसिंग(रिंकू गोंदर)।</strong> गांव हथलाना के पास करनाल कैथल रोड़ पर पुल के नीचे बनी दलदल में दो दिनों से फंसी गाय को गौसेवकों ने निकाला। समाजसेवी गौ सेवक लब्बू जांगड़ा ने बताया कि जानकारी मिलने पर अपनी टीम के साथ पहुंच दो से तीन दिनों से फंसी गाय को निकाला गया। जांगड़ा ने बताया कि सडकों पर घूम रहे आवारा पशु अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी पीने के लिए पुल के नीचे इस दलदल में फंस गई थी। जांगड़ा ने बताया कि गाय पूरी तरह से दलदल में फंसी हुई थी। गौ सेवकों ने गाय को दलदल से सुरक्षित बाहर निकाला और उस बेजुबान का दलाज करवा उसे गौशाला में छोड़ा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जांगड़ा ने कहा कि आज के इस युग में लोग इतने स्वार्थी हो चुके हंै कि जब तक गाय दूध दे रही है तब तक वह उसका पालन पोषण करते हैं और जब गाय दूध देना बंद कर देती है तो उसे सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि इन बेसहारा पशुओं का सडकों पर बहुत ही बुरा हाल हो रहा है और दिन प्रति दिन हादसों का कारण भी सडकों पर छोड़े गए बेसहारा पशु बन रहे हैं। उन्होंने पशुपालक किसानों से अनुरोध किया कि इन गौवंशों को सडकों पर न छोड़ गौशाला में छोड़ा जाए जिससे सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों व इन आवरा पशुओं की जान बचाई जा सके। इस मौके पर भूदेव शर्मा, शुभम, गुरमीत गोंदर, अनिल शर्मा सिरसी, मनप्रीत, रोबिन सहित अन्य मौजूद रहे।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/haryana-govt-will-take-action-for-the-destitute-cows/"><strong>यह भी पढ़ें – सड़कों पर घूमने वाली गऊओं के लिए बनेगा ‘गोवन’</strong></a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Sep 2022 09:40:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सड़कों पर घूमने वाली गऊओं के लिए बनेगा ‘गोवन’</title>
                                    <description><![CDATA[झज्जर के मातनहेल में जमीन देखने पहुंचे गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष गर्ग गोशालाओं की सहायता के लिए पिछले एक साल में दिए गए है 45 करोड़ झज्जर(सच कहूँ/संजय भाटिया)। शहरों में सड़कों पर घूमने वाली आवारा गऊओं के लिए हरियाणा सरकार ने अब गोवन बनाने का निर्णय लिया है। ताकि सड़कों पर घूमने वाली […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/haryana-govt-will-take-action-for-the-destitute-cows/article-37606"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/cow.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>झज्जर के मातनहेल में जमीन देखने पहुंचे गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष गर्ग</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>गोशालाओं की सहायता के लिए पिछले एक साल में दिए गए है 45 करोड़</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>झज्जर(सच कहूँ/संजय भाटिया)।</strong> शहरों में सड़कों पर घूमने वाली आवारा गऊओं के लिए हरियाणा सरकार ने अब गोवन बनाने का निर्णय लिया है। ताकि सड़कों पर घूमने वाली गौ को प्राकृतिक माहौल मिल सके। यह बात गौशाला आयोग के अध्यक्ष श्रवण गर्ग ने झज्जर में मीडिया के रूबरू होकर कही। श्रवण गर्ग ने बताया कि वह समय नजदीक है जब आने वाले समय में शहर की सड़कों पर कोई भी गोवंश घूमता हुआ दिखाई नहीं देगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वह स्वयं झज्जर के कस्बा मातनहेल में गोवन के लिए जमीन देखने के लिए आए है। इस बारे में उन्होंने गोशालाओं के संचालकों और जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी मीटिंग कर फीड़बैक लिया है। उन्होंने कहा कि गाय हमारी माता है और हमारा भी फर्ज और कर्तव्य है कि हम अपनी मां के लिए कुछ करे। इसके लिए सरकार एक तरह से युद्धस्तर पर ही काम कर रही है। उम्मीद यहीं है कि भविष्य में झज्जर जिले के अंदर एक भी गाय सड़क पर नहीं दिखाई देगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गोबर और गोमुत्र से बनने वाले उत्पाद पर रिसर्च जारी</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गौशाला आयोग के अध्यक्ष श्रवण गर्ग ने कहा कि सरकार गाय की नस्ल सुधार और गोबर और गोमुत्र से बनने वाले उत्पाद पर रिसर्च कर रही है। कई स्थानों पर तो सरकार ने गाय के गोबर से बनने वाली खाद, गमले, पेंट और धूप अगरबत्ती के उत्पाद सयंत्र लगाए भी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पहली सरकार ऐसी है जिसने गोशालाओंके खाते में सीधे पैसे डाले हैं। पिछले एक साल में तीन किस्तों में गोशालाओं को 45 करोड़ रूपए जारी किए जा चुके हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Sep 2022 08:46:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गोवंश के पैर बांध सड़क पर फेंका</title>
                                    <description><![CDATA[नंदीशाला उप प्रधान ने जताई चिंता ऐलनाबाद (सच कहूँ न्यूज)। बुधवार सुबह एक गौवंश (Cow) के पैर बांधकर सड़क पर फेंकने का मामला सामने आया है। जिस पर शिव नंदी शाला उप प्रधान रूपराम जयपाल ने चिंता जाहिर की है। शिव नंदी शाला उप प्रधान रूपराम जयपाल ने बताया कि बुधवार सुबह जब वह नंदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cows-feet-tied-and-thrown-on-the-road/article-31227"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/cows-feet-tied.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>नंदीशाला उप प्रधान ने जताई चिंता</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ऐलनाबाद (सच कहूँ न्यूज)।</strong> बुधवार सुबह एक गौवंश (Cow) के पैर बांधकर सड़क पर फेंकने का मामला सामने आया है। जिस पर शिव नंदी शाला उप प्रधान रूपराम जयपाल ने चिंता जाहिर की है। शिव नंदी शाला उप प्रधान रूपराम जयपाल ने बताया कि बुधवार सुबह जब वह नंदी शाला में आया तब दो छोटे बच्चे एक गोवंश को लेकर नंदीशाला में आए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि यह गोवंश सड़क किनारे पड़ा था जिसके पैर बंधे हुए थे जो चोट लगने के कारण घायल हो चुका है। रूपराम ने बताया कि ऐसा लगता है कि मंगलवार रात को इस बेजुबान गोवंश को किसी अज्ञात वाहन चालक के द्वारा पैर बांधकर गाड़ी से पटका गया है जिसको छोटे गो भक्तों ने नंदी शाला में पहुंचाया और इसका इलाज करवाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने नंदी शाला मैनेजमेंट कमेटी की ओर से अपील करते हुए सभी लोगों से निवेदन किया है कि इन बेजुबानों को सड़क पर इस तरह पीड़ित करके ना छोड़े। उन्होंने बताया कि गोवंश (Cow) के लिए नंदी शाला के 24 घंटे द्वार खुले हैं आप कभी भी गोवंश को नंदी शाला में छोड़ सकते हैं।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 20:47:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब हरियाणा में गाय के गोबर व मूत्र से बनेंगी खाद एवं दवाईयां</title>
                                    <description><![CDATA[गौशालाओं की बढ़ेगी आमदनी, बनेंगी आत्मनिर्भर अंबाला (सच कहूँ न्यूज)। कृषि, पशु पालन मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि जहर मुक्त एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए गाय के गोबर व मूत्र से खाद एवं दवाईयां बनाई जाएंगी जिससे गौशालाओं की आमदनी बढ़ेगी। इससे गौशालाएं आत्मर्निभर बनेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार जैविक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:center;">गौशालाओं की बढ़ेगी आमदनी, बनेंगी आत्मनिर्भर</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>अंबाला (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि, पशु पालन मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि जहर मुक्त एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए गाय के गोबर व मूत्र से खाद एवं दवाईयां बनाई जाएंगी जिससे गौशालाओं की आमदनी बढ़ेगी। इससे गौशालाएं आत्मर्निभर बनेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए सरकार द्वारा विशेष योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस घर में गाय होती है वहां पर किसी प्रकार की विपत्ति नहीं आती है। गाय में लक्षमी सहित देवताओं का वास है। गाय पूजनीय होती है। सनातन संस्कृति में गाय को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हमें गौवंश को बचाना है। उन्होंने कहा कि सरकार गौशालाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। गौशाला को विशेष सहायता दी जा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गोबर व गौमूत्र से बनी खाद का प्रयोग करें किसान</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गोमूत्र से बनी खाद का प्रयोग करें किसान जेपी दलाल ने कहा कि डीएपी यूरिया जैसी रासायनिक खादों से खेती जहरयुक्त होती जा रही है। इससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी पैदा हो रही हैं। इसलिए किसानों को जहर मुक्त खेती की ओर ध्यान देना चाहिए और गोबर व गौमूत्र से बनी खाद व कीटनाशक का खेत में प्रयोग करना चाहिए ताकि हमारा खाना जहर मुक्त हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार किसान, गरीब व आमजन के हित योजनाएं लागू कर रही है। पारदर्शिता के साथ लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। सरकार अंत्योदय की भावना से पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति को लाभ पहुंचा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>गांव में किसान सहायकों का होगा चयन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा सरकार के द्वारा हर खेत स्वस्थ खेत स्कीम चलाई जा रही है जिसके तहत हर खेत की मिट्टी की जांच की जाएगी। इस कार्य को पूर्ण करने हेतू गांव में किसान सहायकों का चयन किया जाएगा। इस दिशा में कृषि तथा किसान कल्याण विभाग ने इस स्कीम पर कार्य शुरू कर दिया है। कृषि विभाग, अम्बाला के उप निदेशक डॉ. गिरिश नागपाल ने बताया कि किसानों को मृदा स्वास्थय के आधार पर ही किसानों को उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। एक किसान सहायक के द्वारा 200 सैम्पल लिए जाएंगे। जमीन में लगातार रसायनिक खादों का प्रयोग और सघन फसल चक्र के कारण पौषक तत्वों की कमी होती जा रही है। मिट्टी की जांच करके खादों व तत्वों का उपयोग करके हम हमारी जमीन को उपजाऊ बना सकते हैं और यह सब मिट्टी की जांच पर निर्भर है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 12:12:06 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जानें, गाय को गले लगाने से कैसे खत्म होता है तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में मानसिक शांति के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कोरोना वारस से देश और विदेश में हाल बेहाल है। संक्रमण को रोकने के लिए सरकार लॉकडाउन लगा रही है। लोग घरों में कैद से हो गए हैं। कोरोना संकट के बीच ब्लैक फंगस जैसी अनेक बीमारियों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/how-does-hugging-cow-eliminate-stress/article-23858"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/cow-hugging.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">अमेरिका में मानसिक शांति के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कोरोना वारस से देश और विदेश में हाल बेहाल है। संक्रमण को रोकने के लिए सरकार लॉकडाउन लगा रही है। लोग घरों में कैद से हो गए हैं। कोरोना संकट के बीच ब्लैक फंगस जैसी अनेक बीमारियों ने चिंता का विषय बन गया है। इस बीच एक ऐसी खबर निकल कर आ रही है जिससे आप जी बहुत आश्चर्यचकित होंगे। अमेरिका में मानसिक शांति के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्या को खत्म करने के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है।</p>
<p>https://twitter.com/thenewsoncnbc/status/1395404573091770371</p>
<h4 style="text-align:justify;">तनाव होता है कम</h4>
<p style="text-align:justify;">डॉक्टरों के अनुसार, गाय को गले लगाने का एहसास घर पर एक बच्चे या पालतू जानवर को पालने के समान है। गले लगाने से हार्मोन आॅक्सीटोसिन, सेरोटोनिन और डोपामाइन को ट्रिगर करता है, जिससे कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को कम करता है। ये तनाव के स्तर, चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अमेरिका में गाय को गले लगाने के लिए लोग दे रहें है पैसे</h4>
<p style="text-align:justify;">कोरोना संकट में अमेरिका में गाय को गले लगाने के लिए पैसे दे रहे हैं। कांग्रेस नेता मिलिंद देवरा द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए सीएनबीसी के एक वीडियो में कहा गया है कि अमेरिका में लोग गाय को गले लगाने के लिए एक घंटे के लिए 200 डॉलर तक का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में तो गायों को तीन हजार सालों से पूजा जा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इम्यूनिटी को रेगुलेट करता है ‘गाय से मिलना’</h4>
<p style="text-align:justify;">गाय का स्वभाव शांत, कोमल और धैर्यवान होता हैं और गले लगाने वालों को जानवर उसके गर्म शरीर के तापमान, धीमी गति से दिल की धड़कन और बड़े आकार से फायदा होता है। यह सब शरीर के मेटोबोलिज्म, इम्यूनिटी और तनाव प्रतिक्रिया को रेगुलेट करने में मदद करता है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/how-does-hugging-cow-eliminate-stress/article-23858</link>
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                <pubDate>Mon, 24 May 2021 13:47:29 +0530</pubDate>
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