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                <title>Agricultural Ordinances - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Agricultural Ordinances RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कृषि अध्यादेशों के नाम तक पता नहीं, किसान नेता बन समर्थन में निकाली रैली</title>
                                    <description><![CDATA[अध्यादेशों को लागू करने की मांग को लेकर डीसी को सौंपा ज्ञापन भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। दिन-रात गर्मी-सर्दी की परवाह किए बिना देश का पेट भरने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले अन्नदाता पर लागू किए जा रहे तीन अध्यादेशों पर अब सियासत के साथ असली-नकली अन्नदाता की लड़ाई शुरू हो गई है। बात करें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/do-not-know-the-names-of-agricultural-ordinances-rally-took-place-in-support/article-18495"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/do-not-know-the-names-of-agricultural-ordinances-rally-took-place-in-support.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;">अध्यादेशों को लागू करने की मांग को लेकर डीसी को सौंपा ज्ञापन</h4>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)</strong>। दिन-रात गर्मी-सर्दी की परवाह किए बिना देश का पेट भरने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले अन्नदाता पर लागू किए जा रहे तीन अध्यादेशों पर अब सियासत के साथ असली-नकली अन्नदाता की लड़ाई शुरू हो गई है। बात करें भिवानी की तो यहां कुछ किसान संगठन सड़कों पर उतरे और उन्होंने पिपली वाले किसानों को विपक्षी दलों के समर्थक बताते हुए तीनों अध्यादेशों को किसान हित में बताया और इन्हें जल्द लागू करने के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री को ज्ञापन भेजा। ट्रैक्टर लेकर रैली के रूप में सड़कों पर उतरे किसान संगठन नए हैं, लेकिन इनकी मांग, मांग कम और किसानों को लेकर हो रही सियासत के साथ असली-नकली की लड़ाई ज्यादा नजर आई। तीनों अध्यादेशों को किसान हित में बताते हुए लागू करवाने की मांग को लेकर किसान नेता गुरदीप सिंह व कुलदीप ने कहा कि उनका भाजपा से कोई लेना-देना नहीं, लेकिन ये तीनों अध्यादेश किसानों के हित में हैं। हालांकि जब इनसे पूछा गया तो इन्हें अध्यादेशों के बारे में पूरी जानकारी तो दूर की बात, उनके नाम तक पता नहीं थे। इनका कहना था कि बस किसी भी प्रदेश की मंडी में फसल बेचने की आजादी और बाहरी कंपनी की मांग पर फसल की बिजाई से किसानों का हित होगा। इन्होंने कहा कि जो इन अध्यादेशों का विरोध करने पिपली पहुंचे थे, वो किसान नहीं बल्कि विपक्षी दलों के समर्थक थे। इसके अलावा जीन्द, कैथल, हिसार, पानीपत सहित अन्य जिलों में भी अध्यादेशों के पक्ष में ऐसा समर्थन देखने को मिला।</h6>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2020 21:53:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तीन अध्यादेशों से किसान और आढ़ती होंगे बर्बाद : बलराज कुंडू</title>
                                    <description><![CDATA[रोहतक (सच कहूँ/नवीन मलिक)। महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने कहा कि तीन कृषि अध्यादेशों से किसान व आढ़ती बर्बाद होंगे, साथ-साथ हर वर्ग पर प्रभावित होगा। साथ ही जमाखोरी व भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे महंगाई का बोझ हर वर्ग को झेलना पड़ेगा। वे मंगलवार को दिल्ली बाईपास स्थित सर्किट हाऊस में पत्रकारों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-and-jobber-will-be-wasted-with-three-ordinances-balraj-kundu/article-18458"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/farmers-and-jobber-will-be-wasted-with-three-ordinances-balraj-kundu.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ/नवीन मलिक)।</strong> महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने कहा कि तीन कृषि अध्यादेशों से किसान व आढ़ती बर्बाद होंगे, साथ-साथ हर वर्ग पर प्रभावित होगा। साथ ही जमाखोरी व भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे महंगाई का बोझ हर वर्ग को झेलना पड़ेगा। वे मंगलवार को दिल्ली बाईपास स्थित सर्किट हाऊस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। जून माह में जब देश व प्रदेश की जनता कोरोना महामारी का प्रकोप झेल रही थी तभी केन्द्रीय नेतृत्व को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कृषि संबंधित तीन अध्यादेश को लागू करने में अपनी सहमति प्रकट की। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष द्वारा इस अध्यादेश को लेकर किसानों की राय लेने के लिए तीन सांसदों की गठित की गई कमेटी सिर्फ ड्रामा है और लोगों की आंखों में सरकार धूल झोंकने का काम कर रही है। विधायक ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कृषि संबंधित तीन अध्यादेश को लागू करने में जनता के हितों के लिए क्या सुझाव दिए हैं और मुख्यमंत्री को अपने सुझाव सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने सभी किसान संगठनों से एकजुट होकर सरकार को उखाड़ फैकने का आह्वान किया।</h6>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2020 20:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसान आंदोलन के समर्थन में उतरे भूपेन्द्र हुड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[उठाया सवाल- सरकार कोरोना काल में सरकार क्यों लाई किसान विरोधी अध्यादेश? सी2 फार्मूला के तहत एमएसपी और सदन में चर्चा के बिना लागू करना गलत सच कहूँ/ अश्वनी चावला चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 3 नए कृषि अध्यादेश के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bhupendra-hooda-came-out-in-support-of-farmer-movement-against-agricultural-ordinances/article-18281"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/bhupendra-hooda-came-out-in-support-of-farmer-movement-against-agricultural-ordinances.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>उठाया सवाल- सरकार कोरोना काल में सरकार क्यों लाई किसान विरोधी अध्यादेश?</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>सी2 फार्मूला के तहत एमएसपी और सदन में चर्चा के बिना लागू करना गलत</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/ अश्वनी चावला चंडीगढ़</strong>। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 3 नए कृषि अध्यादेश के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है। हुड्डा का स्पष्ट कहना है कि ये आंदोलन सिर्फ किसान का ही नहीं, इसमें मजदूर, आढ़ती और छोटे व्यापारी भी शामिल हैं। सभी का मानना है कि बिना एमएसपी के ये अध्यादेश किसान हित में नहीं हैं। अगर सरकार इन्हें लागू करना चाहती है तो सबसे पहले इसमें एमएसपी पर खरीद का प्रावधान शामिल करना चाहिए। या उसके लिए अलग से चौथा बिल लाना चाहिए। बिल में स्पष्ट प्रावधान हो कि अगर कोई एजेंसी एमएसपी से नीचे किसान की फसल खरीदती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी को अपना वादा पूरा करते हुए किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के सी2 फार्मूला के तहत एमएसपी देनी चाहिए। जब तक किसान की पूरी लागत को ध्यान में रखते हुए एमएसपी तय नहीं होती, तब तक किसानों की आय नहीं बढ़ सकती।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कांग्रेस सरकार के दौरान अलग-अलग फसलों के एमएसपी में रिकॉर्ड 2 से 3 गुना की बढ़ोत्तरी हुई थी। गन्ना, गेहूं, धान आदि के रेट में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी करते हुए किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कदम उठाए गए थे। लेकिन इस सरकार ने एमएसपी देने की बजाय किसान के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। हुड्डा ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को कोरोना या किसान की इतनी ही चिंता है तो इन 3 अध्यादेशों को लागू करने के लिए कोरोना काल को ही क्यों चुना गया? क्यों नहीं स्थिति के सामान्य होने का इंतजार किया गया? क्यों नहीं इन बिलों को लागू करने से पहले संसद और विधानसभा में चर्चा करवाई गई? किसान को उसकी फसल का भाव देने के बजाय सरकार धान, चावल, सरसों और बाजरा खरीद जैसे घोटालों को अंजाम देने में लगी थी। आज भी मंडियों में 1509 और परमल धान पिट रही है। हमारी सरकार के दौरान 1509 धान 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकती थी, लेकिन आज उसकी बिकवाली सिर्फ 1800 से 2100 रुपये के बीच हो रही है। परमल के लिए तो किसान को एमएसपी भी नहीं मिल पा रही है और मजबूरी में उसे अपना पीला सोना 1100 से 1200 रुपये में बेचना पड़ रहा है। धान ही नहीं बाजरा किसानों के साथ भी ऐसा ही अन्याय हो रहा है। 2150 रुपये एमएसपी वाला बाजरा 1200 से 1300 रुपये में बिक रहा है।</h6>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 09 Sep 2020 17:52:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कृषि अध्यादेशों के विरोध में बंद रही प्रदेश की मंडियां</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों और आढ़तियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध डीसी के माध्यम से पीएम और सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन आढ़ती बोले : अध्यादेश लागू होने से केन्द्र सरकार को हर माह होगा 50 हजार करोड़ का घाटा चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)। भले सरकार और मंत्री कृषि से जुड़े अध्यादेशों को किसानों के हित में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/mandis-of-the-state-remained-closed-in-protest-against-agricultural-ordinances/article-17729"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/mandis-of-the-state-remained-closed-in-protest-against-agricultural-ordinances.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">किसानों और आढ़तियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>डीसी के माध्यम से पीएम और सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन</h5>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h5>आढ़ती बोले : अध्यादेश लागू होने से केन्द्र सरकार को हर माह होगा 50 हजार करोड़ का घाटा</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)</strong>। भले सरकार और मंत्री कृषि से जुड़े अध्यादेशों को किसानों के हित में बताते थकते ना हो, लेकिन किसान व आढ़ती शुरू से इनके विरोध में हैं। शुक्रवार को हरियाणा सहित राजस्थान, पंजाब व चंडीगढ़ में आढ़तियों ने सांकेतिक हड़ताल की, जिसमें किसान संगठनों ने भी उनका साथ दिया। आढ़ती व किसानों ने 10 सितंबर को पिपली में महापंचायत कर बड़े आंदोलन का एलान कर सरकार को चेतावनी दी है। भिवानी में आढ़ती सुभाष मित्तल ने बताया कि ये अध्यादेश किसान, आढ़ती, व्यापारी व मुनीमों को बर्बाद कर देंगे। इसके बाद खुद केन्द्र सरकार को भी प्रति माह 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि ये सांकेतिक हड़ताल है। आने वाले दिनों में जब कपास व बाजरे की फसल आएगी, तब आढ़ती व व्यापारी अपनी ताकत सरकार को दिखा देंगे। वहीं भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान राकेश आर्य ने भी तीनों अध्यादेशों को किसान विरोधी बताया और कहा कि ये अध्यादेश छोटूराम की आढ़ती व किसान की व्यवस्था को खत्म कर देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार अगर तय करे कि कोई कंपनी किसी भी फसल को एमएसपी के कम खरीदेगी तो सजा का प्रावधान होगा, तो किसान इन अध्यादेशों को मान लेंगे। रोहतक में भारतीय किसान यूनियन अंबावाता के प्रदेशाध्यक्ष अनिल नांदल उर्फ बल्लू प्रधान ने आढ़तियों का समर्थन करते हुए कहा कि आढ़ती और किसान का परस्पर व स्वस्थ तालमेल है, जिससे हरियाणा का किसान पूरी तरह संतुष्ट है। उन्होंने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के चलते आज खेती घाटे का सौदा बन गई है। सरकार किसानों को राहत देने की बजाए काले काननू लागू कर रही है, जिसके चलते किसान आत्महत्याएं करने पर मजबूर है। उन्होंने तुंरत केन्द्र सरकार से इन कृषि विरोधी अध्यादेशों को रद्द करने की मांग की।</h6>
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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2020 19:04:14 +0530</pubDate>
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