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                <title>moon - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Chandrayaan 3 Update: चांद मामा सिर्फ 150 कि.मी. दूर, कहां तक पहुंचा भारत का चंद्रयान-3 ? देखिए लोकेशन</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3 Update: भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी और कल (17 अगस्त को) चन्द्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-update/article-51260"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3 Update: भारत का तीसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-3 बुधवार सुबह चौथा चरण पार कर अपनी मंजिल के और करीब पहुंच गया। चंद्रयान के लिए यह प्रक्रिया काफी अहम थी और कल (17 अगस्त को) चन्द्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल (एलएम) को प्रोपल्शन मॉड्यूल (पीएम) से अलग होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी कि चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चांद की कक्षा के एक और गोलाकार चरण को पूरा कर लिया है और अब वह चांद के और करीब वाली कक्षा में पहुंच गया है। चंद्रयान-3 अब चांद के चौथे आॅर्बिट में प्रवेश कर गया है। चंद्रयान अंतरिक्ष यान अब चंद्रमा की सतह से सिर्फ 163 किमी दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा कि अब तैयारियों का समय आ गया है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्राओं के लिए तैयार हैं। आज चंद्रयान-3 एक और कक्षा लांघ कर चांद के और करीब पहुंच गया। वहीं 17 अगस्त का दिन मिशन के लिए अहम होगा क्योंकि इस दिन चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर से अलग किया जाएगा।<br />
इसरो ने ट्वीट किया, ‘आज की सफल फायरिंग के बाद चंद्रयान-3 को 153 किमी गुणा 163 किमी की कक्षा में स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही चन्द्रयान-3 चंद्रमा से जुड़ी एक और प्रक्रिया को पूरा कर आगे बढ़ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा, ‘यह तैयारियों का समय है क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपनी अलग-अलग यात्रा के लिए तैयार हैं। पांच अगस्त को चन्द्रयान-3 के चंद्र कक्षा में प्रवेश करने के बाद इस अंतरिक्ष यान ने अब तक के चार चरणों को पार कर लिया है और चन्द्रमा के बेहद करीब पहुंच गया है। इसके बाद 23 अगस्त को चंद्रयान-3 को चांद की सतह पर उतरना है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाह होगी। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-3 आशा के अनुरूप सामान्य तरह से काम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान की यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन आॅपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 14:37:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Chandrayaan 3: चन्द्रयान 3 ने किया ऐसा काम&amp;#8230;सब हैरान!</title>
                                    <description><![CDATA[चेन्नई। Chandrayaan-3 LIVE Updates: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के एक दिन बाद रविवार रात को अंतरिक्ष यान की कक्षा को चंद्र क्षेत्र के अंदर कम कर दिया। इसरो ने एक अद्यतन ट्वीट में कहा, ”चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक एक योजनाबद्ध कक्षा कटौती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chandrayaan-3-live-updates/article-50894"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/chandrayaan-3-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई।</strong> Chandrayaan-3 LIVE Updates: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के एक दिन बाद रविवार रात को अंतरिक्ष यान की कक्षा को चंद्र क्षेत्र के अंदर कम कर दिया। इसरो ने एक अद्यतन ट्वीट में कहा, ”चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक एक योजनाबद्ध कक्षा कटौती प्रक्रिया से गुजरा।”</p>
<p style="text-align:justify;">इंजनों की रेट्रोफायरिंग ने इसे चंद्रमा की सतह के करीब 170 गुना 4313 किलोमीटर तक ला दिया। आज का युद्धाभ्यास चंद्रयान-3 की कक्षा को धीरे-धीरे बढ़ाकर चंद्र ध्रुवों पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध युद्धाभ्यासों की श्रृंखला में पहला था। चंद्र बाउंड आॅर्बिट कार्रवाई 2230 बजे से 2330 बजे के बीच की गई। Chandrayaan 3</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">The Moon, as viewed by <a href="https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan3?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Chandrayaan3</a> spacecraft during Lunar Orbit Insertion (LOI) on August 5, 2023.<a href="https://twitter.com/hashtag/ISRO?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#ISRO</a> <a href="https://t.co/xQtVyLTu0c">pic.twitter.com/xQtVyLTu0c</a></p>
<p>— LVM3-M4/CHANDRAYAAN-3 MISSION (@chandrayaan_3) <a href="https://twitter.com/chandrayaan_3/status/1688215948531015681?ref_src=twsrc%5Etfw">August 6, 2023</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">इसरो ने कहा, ”जैसे-जैसे मिशन आगे बढ़ रहा है, चंद्रयान-3 की कक्षा को धीरे-धीरे कम करने और इसे चंद्र ध्रुवों पर स्थापित करने के लिए कई युक्तियों की योजना बनाई गई है।”Chandrayaan 3 Mission</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ युक्तियों के बाद, प्रणोदन मॉड्यूल कक्षा में रहते हुए लैंडर से अलग हो जाएगा। इसके बाद, 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सॉफ्ट लैंडिंग की सुविधा के लिए जटिल ब्रेकिंग युद्धाभ्यास की एक श्रृंखला को अंजाम दिया जाएगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-3 की सेहत सामान्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और जेपीएल डीप स्पेस एंटीना के सहयोग से ”पूरे मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यान के स्वास्थ्य की लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन आॅपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/security-forces-foil-infiltration-attempt-in-poonch-two-terrorists-killed/">Jammu and Kashmir: सुरक्षाबलों ने पुंछ में घुसपैठ के प्रयास को किया विफल, दो आतंकवादी ढ़ेर</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>साहित्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 11:00:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Chandrayan-3: जानिये भारत के सबसे बड़े अंतरिक्ष मिशन के पीछे की पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[Chandrayaan 3: इसरो ने इस देश के अंदर एक ऐसे मिशन को लॉन्च कर दिया है जो भारत को सुपरपावर बना लेगा। इसमें बड़ी बात ये है कि यह तकनीक केवल भारत के पास ही है। बता दें कि इसरो के इस चंद्रयान ने पूरी दुनिया में धमाल मचा रखा है। इसरो इसी के साथ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/know-the-full-story-behind-indias-biggest-space-mission/article-50591"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/chandrayaan-3-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandrayaan 3: इसरो ने इस देश के अंदर एक ऐसे मिशन को लॉन्च कर दिया है जो भारत को सुपरपावर बना लेगा। इसमें बड़ी बात ये है कि यह तकनीक केवल भारत के पास ही है। बता दें कि इसरो के इस चंद्रयान ने पूरी दुनिया में धमाल मचा रखा है। इसरो इसी के साथ सूर्यान गग्यान जैसे कई मिशन लॉन्च करने वाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि यह वो मिशन है जो सबके सामने है लेकिन इसी दौरान भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने कुछ ऐसी तकनीक डिवेलप कर डाली है, जो भारत के पास ही है। बता दें कि यह वो तकनीकी है जो समय आने पर या जरूरत पड़ने पर किसी महाविनाश हथियार का भी रुप ले सकतीं हैं जो एक ही झटके में युद्ध का पूरा का पूरा नक्शा बदल सकती है। जरुरत पड़ने पर ये रॉकेट लॉन्चर बन सकती है स्पेस में इंसानों को भेज देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जानते ही हैं भारत में इसरो ने 14 जुलाई को chandrayaan-3 मिशन लॉन्च कर दिया था। और 14 जुलाई दोपहर 2: 35 पर रॉकेट LVM3-M4 का इंजन स्टार्ट हुआ और चंद्रयान को हमारा रॉकेट बादलों को चीरते हुए chandrayaan-3 को लेकर चांद की तरफ गया। और जैसे ही रॉकेट chandrayaan-3 को लेकर बढ़ रहा था तो उस समय हर एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि chandrayaan-3 मिशन के 23 अगस्त की शाम 5:00 बजे चंद्रमा चंद्रमा की सतह पर उतरने की संभावना जताई जा रही है। बता दे की लेंडर की सफल लैंडिंग होने के बाद भारत एक नया इतिहास रचेगा।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/pslv-c56-successfully-launched-seven-satellites-of-singapore/">इसरो की नई उड़ान, एक साथ 7 सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“इसरो की नई उड़ान, एक साथ 7 सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/pslv-c56-successfully-launched-seven-satellites-of-singapore/embed/#?secret=WHtN8pnAZa%23?secret=uSLWM3UFWl" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
<p style="text-align:justify;">लैंडर की सफल लैंडिंग होने के बाद भारत दुनिया का पहला ऐसा देश होगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करेगा। वहीं अगर सफल लैंडिंग हो जाती है तो ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। क्योंकि अब तक ये उपलब्धि सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के पास है। इसके साथ ही लैंडर की सफल लैंडिंग होने के बाद भारत दुनिया का पहला ऐसा देश होगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करेगा। वहीं अब सवाल ये उठता है कि चंद्रयान चंद्रमा तक अपना रास्ता कैसे खोजेगा। तो चलिए बताते हैं कि चंद्रमा तक अपना रास्ता कैसे खोजेगा चंद्रयान।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल चंद्रयान-3 इस समय 40 हजार 400 किमी प्रतिघंटा की गति से धरती के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है। दरअसल अब 1 अगस्त 2023 की मध्य रात्रि 12 से साढ़े बारह बजे के बीच इसे लूनर ट्रांसफर ट्रैजेक्टरी में डाला जाएगा। यानी चंद्रयान-3 लंबी यात्रा पर निकलेगा। बता दें कि करीब पांच दिन की यात्रा के बाद यानी 5 अगस्त को यह चंद्रमा की पहली बाहरी कक्षा में जाएगा। यानी यह लूनर ब्राउंड नेविगेशन शुरू होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि chandrayaan-3 में किसी तरह का जीपीएस सिस्टम नहीं लगा है। असल में अंतरिक्ष में कोई जीपीएस सिस्टम काम नहीं करता। तो फिर सैटेलाइट्स और स्पेसक्राफ्ट कैसे अपना रास्ता जानते हैं। ऐसे में उन्हें कैसे पता होगा कि किस रास्ते पर किस दिशा में जाना है। वहां तो कोई सड़क भी नहीं बनी है। ऐसे में स्पेसक्राफ्टस में लगे स्टार सेंसर्स मदद करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल chandrayaan-3 धरती के चारों तरफ पांचवें ऑर्बिट में चक्कर लगा रहा है। इसके बाद फिर ये लंबी यात्रा पर निकलेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि chandrayaan-3 में कई सारे कैमरे लगाए गए हैं,यानी स्टार सेंसर्स लगे हैं। जिनके माध्यम से वह अंतरिक्ष में दिशा पता करता है। इसके लिए वह धुव्र तारा और सूरज की मदद लेता है। बता दें कि चंद्रयान रात में ध्रुव तारा और दिन में सूरज से रास्ते और दिशा का ज्ञान लेता है। असल में ध्रुव तारा जिसे पोल स्टार भी कहते हैं, वो उत्तर की दिशा की ओर इशारा करता है। यानी आप उसकी तरफ जा रहे हैं तो आप उत्तर दिशा में जा रहे हैं। इसी तरह विपरीत तो दक्षिण, और इसी तरह पूर्व और पश्चिम का पता चलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप केवल chandrian 3 के बारे में जानकर ही खुश हो रहे हैं तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हैं। क्योंकि इसरो ने साइलेंटली एक ऐसा स्पेस मिशन लॉन्च कर दिया है जो भारत को सुपरपावर बना देगा। दरअसल इसरो के साइलेंटली प्रोजेक्ट TSTO ने चीन और अमेरिका की नींद उड़ा दी है। कहा जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को लॉन्च करने के बाद इसरो को अब कोई रॉकेट लांच नहीं करना पड़ेगा। इसरो का ये प्रोजेक्ट जरूरत पड़ने पर विनाशकारी हथियार का रूप भी ले सकता है। इसरो के इस लॉन्च से अमेरिका भी हक्का बक्का रह गया है। बता दें कि ये एक ऐसा प्रोजेक्ट है जो भारत के दुश्मनों के लिए काल साबित तो होगा ही साथ ही साथ यह अंतरिक्ष के खर्चे को भी कम करेगा।</p>
<blockquote class="wp-embedded-content"><p><a href="http://10.0.0.122:1245/these-things-will-melt-bad-cholesterol-from-the-veins-and-separate-it-from-the-blood/">नसों से Bad cholesterol को पिघलाकर खून से अलग कर देंगी ये चीजें</a></p></blockquote>
<p><iframe class="wp-embedded-content" title="“नसों से Bad cholesterol को पिघलाकर खून से अलग कर देंगी ये चीजें” — Sach kahoon - Best Online Hindi News" src="http://10.0.0.122:1245/these-things-will-melt-bad-cholesterol-from-the-veins-and-separate-it-from-the-blood/embed/#?secret=L4XcdtHV0v%23?secret=moBdT3THRk" width="500" height="282" frameborder="0"></iframe></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/know-the-full-story-behind-indias-biggest-space-mission/article-50591</link>
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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2023 13:08:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सरसा के कृष्ण रूहिल ने पत्नी के लिए चांद पर खरीदा प्लाट, सालगिरह पर यह तोहफा पाकर पत्नी बेहद खुश</title>
                                    <description><![CDATA[चौपटा (भगत सिंह)। चांद पर प्लाट खरीदना और वो भी अपनी (bought a plot on the moon) सालगिरह पर यह तोहफा, पत्नी के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है सरसा के गांव कागदाना का। दरअसल, कागदाना निवासी Krishna Kumar Ruhil ने अपनी शादी की 25वीं सालगिरह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/krishna-ruhil-of-sirsa-bought-a-plot-on-the-moon-for-his-wife/article-45600"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/krishna-kumar-ruhil.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चौपटा (भगत सिंह)।</strong> चांद पर प्लाट खरीदना और वो भी अपनी (bought a plot on the moon) सालगिरह पर यह तोहफा, पत्नी के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है सरसा के गांव कागदाना का। दरअसल, कागदाना निवासी Krishna Kumar Ruhil ने अपनी शादी की 25वीं सालगिरह पर अपनी धर्मपत्नी को खास तोहफा दिया। कृष्ण कुमार ने ‘चांद पर प्लाट’ खरीदकर अपनी पत्नी को तोहफे में दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब हैं कि अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी स्थित फर्म लूनर सोसाइटी इंटरनेशनल चांद पर जमीन बेच रही है। यह कंपनी पूरे वैध तरीके संकंपनी चांद पर जमीन खरीदने वालों को वहां की नागरिकता भी देती है। अगर आपको अपनी जमीन बेचनी भी है तो आप लूनर प्रॉपर्टी बेच सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कृष्ण कुमार सालगिरह पर पत्नी को कुछ खास गिफ्ट देना चाहते थे</h4>
<p style="text-align:justify;">कृष्ण कुमार ने मीडिया को बताया कि मैं अपनी धर्मपत्नी को कुछ विशेष तोहफा देना चाहता था। इसलिए मैंने चांद पर जमीन खरीदी। कृष्ण कुमार ने बताया कि मैंने न्यूयॉर्क शहर, यूएसए की एक फर्म लूना सोसायटी इंटरनेशनल के माध्यम से जमीन खरीदी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इतना बड़ा तोहफा पाकर कुष्ण कुमार की पत्नी खुश</h3>
<p style="text-align:justify;">शादी की सालगिरह हो और इतना बड़ा तोहफा तो पत्नी क्यों ना खुश हो। ऐसा ही देखना को मिल रहा है सरसा के गांव कांदराना का। कृष्ण कुमार की पत्नी सरिता ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह अपने पति के तोहफे से बेहद खुश हैं। उसे कभी भी उम्मीद नहीं थी कि पति उसे इतना बड़ा गिरफ्ट देंगे। मेरे पति ने मुझे चांद पर जमीन के दस्तावेज शादी की सालगिर पर दिए। आपको बता दें कि इससे पहले अभिनेता शाहरुख खान और स्वर्गीय सुशांत सिंह राजपूत ने भी चांद पर एक एकड़ जमीन खरीदी हुई है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/krishna-ruhil-of-sirsa-bought-a-plot-on-the-moon-for-his-wife/article-45600</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Apr 2023 11:06:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेटे को जन्मदिन पर दिया ‘चांद का टुकड़ा’</title>
                                    <description><![CDATA[लगभग 2 माह की प्रक्रिया के बाद मिली चांद पर जगह टोहाना(सच कहूँ/सुरेन्द्र समैण)। बच्चों के जन्मदिन पर लोग अलग-अलग तरह के गिफ्ट अपने बच्चों को देते हैं। फतेहाबाद जिले के टोहाना में एक अजीब मामला सामने आया है, जिसमें एक शख्स ने अपने बेटे के जन्मदिन पर तोहफे के रुप में चांद पर जमीन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/varun-purchased-land-on-the-moon/article-37464"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/moon-land-purchase.jpeg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>लगभग 2 माह की प्रक्रिया के बाद मिली चांद पर जगह</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>टोहाना(सच कहूँ/सुरेन्द्र समैण)।</strong> बच्चों के जन्मदिन पर लोग अलग-अलग तरह के गिफ्ट अपने बच्चों को देते हैं। फतेहाबाद जिले के टोहाना में एक अजीब मामला सामने आया है, जिसमें एक शख्स ने अपने बेटे के जन्मदिन पर तोहफे के रुप में चांद पर जमीन खरीदी है। सुनकर आपको जरूर अटपटा लगा होगा, लेकिन ये सच्चाई है। टोहाना के रहने वाले वरुण ने बताया कि उनके बेटे लव सैनी का पहला जन्मदिन था। इस दौरान उन्होंने अपने बेटे को तोहफे के रुप में कुछ अलग चीज देने की सूची। वरुण सैनी ने बताया कि काफी सोचने के बाद उसने फैसला लिया कि वह अपने बेटे के जन्मदिन पर चांद पर जमीन खरीद कर देगा। इसी के चलते उसने पूरी प्रक्रिया को फॉलो करते हुए इंटरनेशनल लुनर लैंड अथॉरिटी से संपर्क किया। लगभग 2 महीने की प्रक्रिया के बाद आखिरकार उसे चांद पर जगह मिल गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>इस तोहफे की पूरे हरियाणा में चर्चा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">वरुण सैनी ने बताया कि इसके लिए उसके पास अमेरिका से इंटरनेशनल लूनर लैंड अथॉरिटी की तरफ से लूनर प्रॉपर्टी का रजिस्टर्ड कलेम डीड भी आ गया है। इसकी कीमत ज्यादा नहीं है लेकिन प्रक्रिया बहुत ही कठिन है। लेकिन उसने इससे पूरी प्रक्रिया को पूरा करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया है। अपने बच्चे के जन्मदिन पर तोहफे के रूप में चांद पर खरीदी गई जमीन को लेकर पूरे परिवार में खुशी की लहर है। वही इस तोहफे की चर्चा पूरे हरियाणा में है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अब प्रॉपर्टी पर नजर रखने के लिए टेलीस्कोप भी खरीदेंगे</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सच कहूँ संवाददाता को जानकारी देते हुए वरुण सैनी ने कहा की उन्हें 2024 में एलन मस्क के जाने का इंतजार है जिसके बाद वह भी चांद पर जाकर अपनी जमीन को देख सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह जमीन चांद पर लेक आॅफ हैपिनेस 1872 नॉर्थ लैटिट्यूड 502 इस्ट लांगीट्यूड ट्रैक 55 पार्सल 10071 में स्थित है। अब अपनी प्रॉपर्टी पर नजर रखने के लिए वे एक टेलीस्कोप भी खरीदेंगे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Sep 2022 12:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमारे सौर मंडल में कम से कम 135 चाँद और हैं</title>
                                    <description><![CDATA[धरती से अक्सर आसमान में देखने पर एक खूबसूरत चीज नजर आती है। जिसे हम चांद कहते हैं। जी हां वही चांद जो पूर्णिमा पर पूरी तरह से नजर आता है और अमावस्या के दिन न जाने कहां गायब हो जाता है। पूरी दुनिया में इसकी खूबसूरती के जलवे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/there-are-at-least-135-moons-in-our-solar-system/article-24162"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/there-are-at-least-135-moons-in-our-solar-system.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">धरती से अक्सर आसमान में देखने पर एक खूबसूरत चीज नजर आती है। जिसे हम चांद कहते हैं। जी हां वही चांद जो पूर्णिमा पर पूरी तरह से नजर आता है और अमावस्या के दिन न जाने कहां गायब हो जाता है। पूरी दुनिया में इसकी खूबसूरती के जलवे हैं। लेकिन चाँद के बारे में अधिकतर लोगों को बहुत ही कम ना के बराबर जानकारी होती है। तो आइए जानते है चन्द्रमा या चाँद के बारे में जानकारियाँ। हमारे सौर मंडल में कम से कम 135 चाँद और हैं। लेकिन किसी पर जीवन का अस्तित्व नहीं है। सिवाय पृथ्वी के।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पृथ्वी पर भी आज अगर जीवन संभव है तो सिर्फ चाँद के कारण। कैसे? वो ऐसे की जब पृथ्वी से थिया नाम का ग्रह टकराया तो धरती 23.5 डिग्री तक झुक गयी थी। और अगर उस समय चाँद न बना होता तो ये फिर से सीधी हो जाती। चाँद के गुरुत्वाकर्षण के कारण ही धरती अब तक झुकी हुयी है। इसी झुकाव के कारण धरती पर अलग-अलग तरह के मौसम पाए जाते हैं। यदि चाँद न होता और धरती सीधी हो जाती तो दिन और रात दोनों बराबर यानी कि 12 घंटे के होते और दोनों ध्रुवों पर बर्फ ही बर्फ होने के साथ भूमध्य रेखा का क्षेत्र आग से झुलस रहा होता।  कई ग्रहों पर ऐसा होता है। जिसके 2 उदाहरण है बुद्ध और मंगल। मंगल ग्रह के 2 चाँद हैं। लेकिन उनकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति इतनी कम है कि जिससे मंगल ग्रह को कोई फर्क नहीं पड़ता। इस वजह से वहां कोई भी मौसम नहीं पाया जाता। बुद्ध ग्रह का कोई चाँद नहीं है इस वजह से वहां ­भी कोई मौसम नहीं पाया जाता।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इतना ही नहीं जब धरती अस्तित्व में आई तो उस वक़्त 6 घंटे के दिन रात होते थे। ये चाँद ही था जिसने अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति से धरती की गति को धीमा किया जिसकी वजह से आज हम 12 घंटे के दिन और रात देखते हैं। ये भी धरती पर जीवन की उत्पत्ति का एक कारण था। इस तरह हम ये तो कह ही सकते हैं की अगर चाँद न होता तो ये चाँद से मुखड़े भी धरती पर ना होते। चाँद, धरती और थिया ग्रह की आपसी टक्कर से निकला हुआ 81 मिलियन बिलियन कचड़ा है। जो चट्टानों और धूल का मिश्रण है। जब चाँद अस्तित्व में आया था तो उस समय पृथ्वी और चाँद की दूरी लगभग 22000 कि.मी. थी जबकि आज ये लगभग 400000 कि.मी. दूर है। लगभग हर 24 घंटे में चाँद की सतह पर 5 टन धूमकेतु के टुकड़े टकराते हैं।</h6>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jun 2021 16:07:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय ध्वज के चंद्रमा पर पहुंचने की बारहवीं वर्षगांठ</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद। देश में शनिवार को दीवाली मनाये जाने के साथ-साथ चंद्रमा पर भारतीय ध्वज के पहुंचने के बारहवीं वर्षगांठ भी खुशियां के साथ मनाई जा रही है। प्लैनेटरी सोसायटी ऑफ इंडिया के निदेशक एन रघुनंदन कुमार ने कहा कि वर्ष 2008 में 14 नवंबर को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तरफ से विकसित मून […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/twelfth-anniversary-of-the-indian-flag-reaching-on-the-moon/article-19884"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/indian-flag-on-moon.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हैदराबाद।</strong> देश में शनिवार को दीवाली मनाये जाने के साथ-साथ चंद्रमा पर भारतीय ध्वज के पहुंचने के बारहवीं वर्षगांठ भी खुशियां के साथ मनाई जा रही है। प्लैनेटरी सोसायटी ऑफ इंडिया के निदेशक एन रघुनंदन कुमार ने कहा कि वर्ष 2008 में 14 नवंबर को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की तरफ से विकसित मून इंम्पैक्ट प्रोब (एमआईपी) चंद्रमा के सतह पर उतरा था। एमआईपी में भारतीय ध्वज भी लगा था और दोनों एक साथ चंद्रमा पर उतरे थे। यह सब इसरो के चंद्रयान-1 मिशन के तहत हुआ था। एमआईपी 2008 में 14 नवंबर को 20:06 बजे चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले चंद्रयान-1 से अलग होकर चंद्रमा की सतह पर उतरा था।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमार ने कहा कि इस सफलता के साथ ही भारत चंद्रमा पर अपना ध्वज पहुंचाने वाला विश्व का पांचवा देश बन गया था। यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने कहा कि इसके एक वर्ष बाद 2009 में अमेरिका के नासा ने अपने मून मिनरॉलजी मैपर की मदद से चंद्रमा पर जल की मौजूदगी की पुष्टि की थी। इसरो ने भी एमआईपी के जरिये जुटाये गये आंकड़े प्रस्तुत कर चंद्रमा पर जल के मौजूद होने की पुष्टि की थी। कुमार ने कहा कि वर्ष 2008 के बाद से प्रत्येक वर्ष प्लैनेटरी सोसायटी ऑफ इंडिया भारत की इस महान उपलब्धि का उत्सव मनाता है और लोगों को भी ऐसा करने के लिए कहता है। दुर्भाग्यवश बहुत से लोग इस सच्चाई को नहीं जानते कि 14 नवंबर को भारत का राष्ट्रीय ध्वज चंद्रमा पर पहुंचा था। लाेग 14 नवंबर को केवल ‘बाल दिवस’ के रूप में जानते और मनाते हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Nov 2020 11:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासा का चंद्रमा पर पानी होने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पहली बार चांद की सतह पर प्रत्यक्ष पानी का साक्ष्य खोजने का दावा किया है। चांद पर पानी की यह खोज नासा की स्ट्रेटोस्फियर ऑब्जर्वेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी (सोफिया) ने की है। नासा आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत 2024 तक चांद की सतह पर मानव को भेजने की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/nasa-claims-to-have-water-on-the-moon/article-19731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/nasa-claims-to-have-water-on-the-moon.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने पहली बार चांद की सतह पर प्रत्यक्ष पानी का साक्ष्य खोजने का दावा किया है। चांद पर पानी की यह खोज नासा की स्ट्रेटोस्फियर ऑब्जर्वेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी (सोफिया) ने की है। नासा आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत 2024 तक चांद की सतह पर मानव को भेजने की तैयारी में है। भारत भी 2022 में गगनयान के माध्यम से चंद्रमा पर मानव उतारने की तैयरी में है। इस अभियान के अंतर्गत नासा ने दावा किया है कि उसे चंद्रमा पर पर्याप्त रूप से पानी मिला है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यह पृथ्वी से दिखने वाले दक्षिण धु्रव के एक गड्ढे में अणुओं के रूप में नजर आया है। यह पानी सूरज की किरणें पड़ने वाले क्षेत्र में मौजूद क्लेवियस क्रेटर (गड्ढे) में मिला है। इस खोज से वैज्ञानिकों को भविष्य में चांद पर इंसानी बस्ती बसाने में मदद मिल सकती है। हालांकि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के 2008 में छोड़े गए चंद्रयान.1 ने 11 साल पहले 2009 में ही चंद्रमा पर पानी होने के सबूत दे दिए हैं। ग्रहों पर पानी मिलने की संभावनाएं मंगल और बृहस्पति पर भी जताई गई हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">नासा मुख्यालय में विज्ञान मिशन के निदेशक एवं एस्ट्रोफिजिक्स विभाग के निदेशक पॉल हर्ट्ज ने कहा है कि सोफिया ने चंद्रमा के दक्षिणी गोलार्ध स्थित धरती से दिखाई देने वाले सबसे बड़े गड्ढों में से एक क्लेवियस क्रेटर में पानी के अणुओं (एच.2.ओ) का पता लगाया है। पूर्व के परीक्षणों के दौरान चंद्रमा की सतह पर हाइड्रोजन के तत्व की मौजूदगी का पता चला था। लेकिन हाइड्रोजन व पानी के निर्माण के लिए जरूरी तत्व हाइड्रॉक्सिल की गुत्थी नहीं सुलझी थी। इस गुत्थी के सुलझने के बाद चांद पर पानी उपलब्ध होने की पुष्टि हो गई है। यह पानी पहले के अनुमानों से 20 प्रतिशत अधिक है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हालांकि अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में मौजूद पानी की तुलना में सौ गुना कम है। 22 अक्टूबर 2008 को भेजे गए भारतीय मिशन चंद्रयान.1 ने भी चांद पर पानी होने के सबूत दिए हैं। यह पानी चंद्रयान में मौजूद उपकरण मून इंपैक्ट प्रोब ने तलाशा था। इस ऑर्बिटर के जरिए नबंवर 2008 में चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर गिराया गया था। सितंबर 2009 में इसरो ने बताया कि चांद की सतह पर पानी चट्टान और धूलकणों में भांप के रूप में उपलब्ध है। ये चट्टानें दस लाख वर्ष से भी ज्यादा पुरानी बताई जा रही हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">चंद्रमा पर मून इंपैक्ट प्रोब भेजने का सुझाव वैज्ञानिक एवं राष्ट्रति रहे डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने दिया था। उनका कहना था कि जब चंद्रयान ऑर्बिटर चांद के इतने करीब जा ही रहा है तो इसके साथ एक इंपैक्टर भी भेज दिया जाए। यह हमारी खोज से नए आयाम जोड़ेगा। इसी इंपैक्टर ने चांद पर पानी तलाशा। एक अन्य उपकरण रोवर के साथ ‘प्रज्ञान’ भी चंद्रयान.2 के साथ चांद पर उतारा गया है। हालांकि चंद्रयान.2 मिशन असफल रहाए इसलिए इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भारत के चंद्रयान.1 और अमेरिकी नासा के लुनर रीकॉनाइसेंस ऑर्बिटर ने चंद्रमा पर चैतरफा पानी उपलब्ध होने के संकेत दिए हैं। गोयाए चंद्रमा की सतह पर पानी किसी एक भू-भाग में नहीं, बल्कि हर तरफ फैला हुआ है। इससे पहले की जानकारियों से सिर्फ यह ज्ञात हो रहा था कि चंद्रमा के धु्रवीय अक्षांश पर अधिक मात्रा में पानी है। इसके अतिरिक्त चंद्रमा पर दिनों के अनुसार भी पानी की मात्रा बढ़ती व घटती रहती है। ‘नेचर जिओ साइंस जर्नल’ में छपे लेख के मुताबिक चंद्रमा पर पानी की उत्पत्ति का ज्ञान होने के साथ ही, इसके प्रयोग के नए तरीके ढूंढे जाएंगे। इस पानी को पीने लायक बनाने के लिए नए शोध होंगे। इसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विघटित कर सांस लेने लायक वातावरण निर्मित करने की भी कोशिशें होंगी। इसी पानी को विघटित कर इसे रॉकेट के ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाएगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">चंद्रमा पर जब पानी की संभावनाएं शून्य थीं, तब रूस और अमेरिका खचीर्ले होने के कारण चंद्र-अभियानों से पीछे हट गए थे। यहां मानवयुक्त यान भेजने के बावजूद चंद्रमा के खगोलीय रहस्यों के नए खुलासे नहीं हो पाए थे। मानव बस्तियां बसाए जाने की संभावनाएं भी नहीं तलाशी जा सकीं थीं। गोया, दोनों ही देशों की होड़ बिना किसी परिणाम पर पहुंचे ठंडी पड़ती चली गई। किंतु 90 के दशक में चंद्रमा को लेकर फिर से दुनिया के सक्षम देशों की दिलचस्पी बढ़ने लगी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ऐसा तब हुआ जब चंद्रमा पर बफीर्ले पानी और भविष्य के ईंधन के रूप में हिलियम-3 की बड़ी मात्रा में उपलब्ध होने की जानकारियां मिलने लगीं। वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं कि ऊर्जा उत्पादन की फ्यूजन तकनीक के व्यावहारिक होते ही ईंधन के स्रोत के रूप में चांद की उपयोगिता बढ़ जाएगी। यह स्थिति आने वाले दो दशकों के भीतर बन सकती है। गोया, भविष्य में उन्हीं देशों को यह ईंधन उपलब्ध हो पाएंगे। जो अभी से चंद्रमा तक के यातायात को सस्ता और उपयोगी बनाने में जुटे हैं। जापान और भारत की चंद्रमा के परिप्रेक्ष्य में प्रौद्योगिकी दक्षता सस्ती होने के साथ परस्पर पूरक भी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इसीलिए दोनों देश चंद्र मिशन से जुड़े कई पहलुओं पर साथ-साथ काम भी कर रहे हैं। दूसरी तरफ जापान ने हाल ही चंद्रमा पर 50 किमी लंबी एक ऐसी प्राकृतिक सुरंग खोजी है, जिससे भयंकर लावा फूट रहा है। चंद्रमा की सतह पर रेडिएशन से युक्त यह लावा ही अग्नि रूपी वह तत्व है, जो चंद्रमा पर मनुष्य के टिके रहने की बुनियादी शर्तों में से एक है। इन लावा सुरंगों के इर्द-गिर्द ही ऐसा परिवेश बनाया जाना संभव है, जहां मनुष्य जीवन-रक्षा के कृत्रिम उपकरणों से मुक्त रहते हुए, प्राकृतिक रूप से जीवन-यापन कर सकेगा। इस लिहाज से नासा का यह दावा करना उचित नहीं है कि चंद्रमा पर पानी की खोज उसी ने की है। इस नजरिए से भारत, जापान और रूस की भी अहम भूमिका है।</h6>
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                <pubDate>Thu, 05 Nov 2020 20:56:39 +0530</pubDate>
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                <title>चांद पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति थे ‘नील’</title>
                                    <description><![CDATA[नील आर्मस्ट्रांग का जन्म अमेरिका के ओहियो में 5 अगस्त 1930 को हुआ था। उन्होंने बचपन में एक एयर शो के दौरान ही पायलट बनने का सपना देख लिया था। महज 15 साल की उम्र में नील आर्मस्ट्रांग ने पायलट का लाइसेंस प्राप्त कर लिया था। उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बैचलर और मास्टर की डिग्री […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/neil-armstrong-was-the-first-person-to-step-on-the-moon/article-17821"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-08/neil-armstrong.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नील आर्मस्ट्रांग का जन्म अमेरिका के ओहियो में 5 अगस्त 1930 को हुआ था। उन्होंने बचपन में एक एयर शो के दौरान ही पायलट बनने का सपना देख लिया था। महज 15 साल की उम्र में नील आर्मस्ट्रांग ने पायलट का लाइसेंस प्राप्त कर लिया था। उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बैचलर और मास्टर की डिग्री भी हासिल की। कॉलेज के दिनों जब उन्हें अमेरिकी सेना में शामिल होने का अवसर मिला था जिसे उन्होंने स्वीकारते हुए कोरिया युद्ध में हिस्सा भी लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद नील आर्मस्ट्रांग एक टेस्ट पायलट बने। उनका काम नए हवाई जहाजों को चेक करना होता था। अपने जीवन में उन्होंने 200 से अधिक हवाई जहाजों का टेस्ट किया।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 1960 में नासा ने मावन को अंतरिक्ष पर जाने के लिए मिशन तैयार किया और इसके लिए उसे अनुभवी पायलट चाहिए थे। इसके लिए जिन अनुभवी पायलट का चुनाव हुआ उनमें से एक नील आर्मस्ट्रांग थे। 16 मार्च 1966 को नील आर्मस्ट्रांग पहली बार अंतरिक्ष पर गए थे। इस दौरान उनके साथ डेविड स्कॉट भी गए थे। यह दोनों जैमिनी 8 मिशन के तहत अंतरिक्ष में गए थे। साल 1969 में एक मीटिंग में यह फैसला लिया गया की नील आर्मस्ट्रांग को चांद की धरती पर उतारा जाएगा। चांद की सतह पर पहली बार उतरने का अवसर उन्हें उनके अनुभाग और शांत स्वभाव की वजह से मिला। कई सालों की मेहनत के बाद अपोलो 11 अंतरिक्ष यान ने 16 जुलाई 1969 को अपनी उड़ान भरी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस अंतरिक्ष यान में नील आर्मस्ट्रांग के साथ बज्ज एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस भी मौजूद थे। इस यान के उड़ान भरने के 5 दिन बाद यानि कि 21 जुलाई 1969 को नील आर्मस्ट्रांग का चांद की सतह पर उतरने वाले पहले व्यक्ति गौरव हासिल किया। नील आर्मस्ट्रांग दुनिया के पहले और बज्ज एल्ड्रिन दूसरे व्यक्ति थे जिन्होंने चाँद पर कदम रखा। इन दोनों ने चाँद पर 21 घंटे का समय बिताया। जिस अंतरिक्ष यान से इन्हे चाँद पर भेजा गया था उस यान का नाम ईगल था। 24 जुलाई को यह सब वापस धरती पर लौटे। आज ही के दिन (25 अगस्त 2012) को नील आर्मस्ट्रांग का निधन हुआ था।</p>
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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2020 11:31:45 +0530</pubDate>
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