<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/children-s-corner/tag-17786" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Children's Corner - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/17786/rss</link>
                <description>Children's Corner RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>उमर शेख की ईमानदारी</title>
                                    <description><![CDATA[Honesty Story: बाबर का पिता समरकंद का शासक उमर शेख नेक दिल, अत्यंत ईमानदार व न्यायप्रिय था। एक बार चीनी यात्रियों का एक जत्था पूर्व से पश्चिम की यात्रा पर था। लेकिन उसमें से अनेक लोग बर्फीले तूफान में फंसकर खत्म हो गए। और उनका धन व सामान उमर शेख के राज्य की सीमा में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/omar-sheikhs-honesty/article-87036"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-02/sea.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Honesty Story: बाबर का पिता समरकंद का शासक उमर शेख नेक दिल, अत्यंत ईमानदार व न्यायप्रिय था। एक बार चीनी यात्रियों का एक जत्था पूर्व से पश्चिम की यात्रा पर था। लेकिन उसमें से अनेक लोग बर्फीले तूफान में फंसकर खत्म हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">और उनका धन व सामान उमर शेख के राज्य की सीमा में ही रह गया। उमर शेख ने उस स्थान पर कुछ सैनिकों को पहरे के लिए तैनात कर दिया। यदि चाहता तो उस सामान को जब्त कर सकता था या गरीबों में बांट सकता था। लेकिन उसने चीन में इसकी सूचना भिजवाई और एक वर्ष बाद उस जत्थेवालों के परिजन जब वह सामान लेने आए, तब तक उसने चौकसी पर सैनिकों को बैठाए रखा। उसने इस बात का ख्याल रखा कि यह दूसरों का सामान है, उनके लिए इनका बहुत महत्व हो सकता है और इसे उनके लोगों को वापस मिलना ही चाहिए। आम लोग अमूमन ऐसा कहां सोचते हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/omar-sheikhs-honesty/article-87036</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/omar-sheikhs-honesty/article-87036</guid>
                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 17:01:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-02/sea.jpg"                         length="23720"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपने बच्चों को शर्मीलेपन से रखें दूर</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों का कितना शर्मीलापन ज्यादा माना जाता है? Children’s Corner: बच्चे का ज्यादा या कम शर्माना जैसा कुछ नहीं हैं। अगर आपका बच्चा शर्मीला है और यह बात आपको या बच्चे को परेशान नहीं कर रही है तो कोई बड़ी बात नहीं है। जो बच्चे शर्मीले होते हैं, वे बेहतर श्रोता बनते हैं और स्कूल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/keep-your-kids-away-from-shyness/article-87115"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-01/keep-children-away-from-shy.jpg" alt=""></a><br /><h3>बच्चों का कितना शर्मीलापन ज्यादा माना जाता है?</h3>
<p style="text-align:justify;">Children’s Corner: बच्चे का ज्यादा या कम शर्माना जैसा कुछ नहीं हैं। अगर आपका बच्चा शर्मीला है और यह बात आपको या बच्चे को परेशान नहीं कर रही है तो कोई बड़ी बात नहीं है। जो बच्चे शर्मीले होते हैं, वे बेहतर श्रोता बनते हैं और स्कूल में उनका व्यवहार ऐसा खराब नहीं होता है, जिसकी वजह से उन्हें डांट पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर शर्मीला होने की वजह से बच्चा खुश नहीं रहता है, तो यह बहुत ज्यादा हो जाता है, ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर बच्चा नियमित रूप से स्कूल जाने से मना करता है, बर्थडे पार्टी में जाने से इंकार कर देता है, ग्रुप एक्टिविटी या दूसरे इवेंट में जाने से बचता है तो आपको उसमें ऐसे व्यवहार के नोटिस होने पर किसी प्रोफेशनल से बात करनी चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों के शर्मीले होने के कारण</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>पर्सनालिटी:</strong> एक बच्चा जो भावनात्मक रूप से सेंसिटिव होता है, उसके बड़े होने पर शर्मीले स्वभाव की संभावना ज्यादा होती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जेनेटिक:</strong> बच्चे का शर्मीला होने का एक कारण जेनेटिक भी हो सकता है, जो उसकी पर्सनालिटी को प्रभावित कर सकता है।<br />
<strong>सोशल इंटरेक्शन में कमी:</strong> यदि बच्चों को उनके शुरूआती सालों में सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया जाता है, तो वे अपने अंदर जरूरी सामाजिक व्यवहार विकसित नहीं कर पाते हैं और लोगों से बात करने में संकोच महसूस करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>असफलता का डर:</strong> बच्चों को जब उनकी क्षमता से ज्यादा परफॉर्म करने के लिए जोर दिया जाता है, तो उनके अंदर फेल हो जाने का डर बैठ जाता है, जिसे यह माना जाता है कि बच्चा शर्मा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आलोचना:</strong> जब माता-पिता, भाई-बहन या करीबी दोस्त किसी बच्चे की उसके शुरूआती सालों में बात-बात पर आलोचना करते हैं, धमकाते हैं या चिढ़ाते हैं, तो इससे वे शर्मीले स्वभाव के बनते जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>परिवार:</strong> कभी-कभी पेरेंट्स का बहुत ज्यादा प्रोटेक्ट करना भी उन्हें शर्मीला बना सकता है, जिससे उनके अंदर नए परिवेश में जाने से डर पैदा होने लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आपके व्यवहार से सीखना:</strong> जो माता-पिता शर्मीले होते हैं, अक्सर वो अपने बच्चों में भी ये सब डालते हैं। पेरेंट्स बच्चे के पहले रोल मॉडल होते हैं और बच्चे उनके व्यवहार को फॉलो करते हैं, इसलिए वे आपको जैसा व्यवहार करते हुए देखते हैं वो भी वैसा व्यवहार अपनाते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चे का शर्मीलापन कब बनता है समस्या? | Children’s Corner</h3>
<p style="text-align:justify;">जब पेरेंट्स यह देखते हैं कि उनका बच्चा शर्मीला है, तो वे यह जानना चाहते हैं कि उसका व्यवहार नॉर्मल है या नहीं। नए लोगों से मिलने या किसी नई परिस्थिति का सामना करने पर बच्चे का अपने मां या पिता से चिपकना नॉर्मल हो सकता है। अगर यह एक टेम्परेरी फेज नहीं लग रहा तो यह एक समस्या बन सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्यादातर बच्चे इससे बाहर निकल जाते हैं, क्योंकि उनकी उम्र के बच्चों के साथ उनका घुलना-मिलना बढ़ने लगता है। जब आप अपने बच्चे को अन्य बच्चों से घिरे हुए अकेले खेलते हुए देखती हैं तो यह आपको चिंतित कर सकता है। टीचर से बात करके चेक करें कि क्या वह अपनी उम्र के स्कूल के बच्चों या आपके पड़ोस के बच्चों से बात करने में शर्माता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शर्मीलेपन के कारण बच्चों में देखे जाने वाले कॉम्प्लिकेशन | Children’s Corner</h3>
<p style="text-align:justify;">1.आपका बच्चा एक्टिविटीज जैसे स्पोर्ट्स, डांस, म्यूजिक या ड्रामा जैसी मजेदार बातों में भाग लेने से मना कर सकता है।<br />
2.इससे उसे सोशल स्किल का अभ्यास करने और एक व्यक्ति के रूप में विकसित होने के अवसर कम मिल सकते हैं।<br />
3.आत्मसम्मान कम होना और एकांत में रहना या उनका महत्व कम है ऐसी भावना आ सकती है।<br />
4.जज किए जाने के डर से पूरी क्षमता नहीं दिखाते हैं।<br />
5.बहुत ज्यादा एंग्जायटी होना।<br />
6.कांपना, शरमाना और हकलाना ऐसे फिजिकल प्रभाव भी बच्चे को और शर्मिंदा कर सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शर्मीले बच्चों की मदद करने के लिए टिप्स</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>1. इस मुद्दे पर चर्चा करें:</strong> बच्चों में तब भी शर्मीलापन नोटिस किया जाता है जब वे अपने पेरेंट्स को एक-दूसरे से बहस करते हुए देखते हैं। जहाँ तक हो सके उन्हें ऐसी स्थिति से दूर रखें। अगर आपका बच्चा किसी ट्रॉमा शिकार हुआ है तो आप प्रोफेशनल सलाह लें। उसके टीचर से बात करें और स्कूल में उसके व्यवहार के बारे में पूछें क्योंकि इससे आपको उसकी पर्सनालिटी के बारे में काफी कुछ पता चल सकता है। शर्मीलेपन को दूर करने के लिए उन स्ट्रेटेजीज को शेयर करें जो आपने इतने सालों में सीखा है। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>2. बात करने के लिए प्रोत्साहित करें:</strong> आप अपने बच्चे को उसकी उम्र के बच्चों के साथ बातचीत करने और खुलकर बात करने के लिए कह सकते हैं। आप वीकेंड पर एक प्ले सेशन भी आयोजित कर सकती हैं, जिसमें पड़ोसियों और स्कूल के बच्चों के साथ-साथ आपका बच्चा अपने कजिन के साथ खेले और बातचीत करे, ताकि उसका व्यवहार नियंत्रित रखा जा सके। बच्चे को खुलकर उसकी भावनाएं प्रकट करने के लिए कहें, उससे बातचीत करें और यह उसकी शर्म को कम करने का एक अच्छा तरीका होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>3. सहानुभूति दिखाना:</strong> शर्मीले बच्चों के साथ सहानुभूति न रखना ही उनके लिए बेहतर होगा, वरना बच्चे को इस तरह के व्यवहार को जारी रखने का बढ़ावा मिल सकता है, जिससे वह और ज्यादा शर्मीला हो सकता है। बच्चे के इस व्यवहार को यह न कहें कि वो जो भी है, जैसे भी है, ठीक है और उसे अपने ऐसे होने पर खराब नहीं महसूस होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>4. प्रेरित और प्रोत्साहित करें:</strong> ज्यादातर माता-पिता यह नहीं जानते कि वे अपने बच्चे में शर्मीलेपन को दूर करने के लिए उसकी कैसे मदद करें, लेकिन आपको यह बता दें कि इसके लिए किसी विशेष स्किल की आवश्यकता नहीं होती है। दूसरों के बारे में बिना चिंता किए बच्चे को अपनी पसंद की चीजें करके अपनी पहचान खुद बनाने के लिए प्रोत्साहित करें। उसकी स्ट्रेंथ और स्किल पर काम और उसे अपनी एक पर्सनालिटी डेवलप करने में मदद करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>5. टैगिंग से बचें:</strong> जब आप किसी सोशल गैदरिंग में हों, तो अपने बच्चे को दूसरों से मिलवाते समय उसे एक शर्मीले बच्चे के रूप में लेबल न करें, क्योंकि इससे उसका आत्मविश्वास टूट सकता है। उसे बताएं कि वो किसी पार्टी, इवेंट या किसी पर्टिकुलर सिचुएशन को कैसे हैंडल करता है। जब भी आप उसे ऐसे नोटिस करती हैं, तो पॉजिटिव व्यवहार के साथ उसे प्रोत्साहित करें, क्योंकि इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वह हर बार ग्रुप या बड़े इवेंट पर अपना व्यवहार अच्छा रखने की कोशिश करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समय और प्रयास के साथ, आप अपने बच्चे का शर्मीलापन दूर कर सकते है और उसे सिखा सकते हैं कि लोगों के साथ घुलना-मिलना एक मजेदार अनुभव हो सकता है। बच्चे के स्वभाव से भले ही शर्मीलापन पूरी तरह से न मिटाया जा सके लेकिन पेरेंट्स बच्चे को इमोशनल सपोर्ट और आत्मविश्वास देने में भूमिका जरूर निभा सकते हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/keep-your-kids-away-from-shyness/article-87115</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/keep-your-kids-away-from-shyness/article-87115</guid>
                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 16:05:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-01/keep-children-away-from-shy.jpg"                         length="22852"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Mental Health Tips: माता-पिता की इन बातों से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है असर</title>
                                    <description><![CDATA[Children’s Mental Health Tips: हर पेरेंट्स को अपने बच्चे बहुत ही प्यारे होते हैं, और हर माता-पिता अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं। हर पेरेंट्स यही चाहते हैं कि उनका लड़का या लड़की बड़े होकर एक सफर और जिम्मेदार इंसान बने। दरअसल यही वजह है कि वह अपने बच्चों को बचपन से ही तमीज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/these-things-of-parents-affect-the-mental-health-of-children/article-74982"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/childrens-corner.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Children’s Mental Health Tips: हर पेरेंट्स को अपने बच्चे बहुत ही प्यारे होते हैं, और हर माता-पिता अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं। हर पेरेंट्स यही चाहते हैं कि उनका लड़का या लड़की बड़े होकर एक सफर और जिम्मेदार इंसान बने। दरअसल यही वजह है कि वह अपने बच्चों को बचपन से ही तमीज और अनुशासन में रखने की कोशिश करते हैं और उन्हें अनुशासन में रहना सिखाते हैं। Children’s Corner</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन कई बार बच्चों को अनुशासन में रखने के चक्कर में पेरेंट्स काफी ज्यादा स्ट्रिक्ट हो जाते हैं। जब बच्चे आपकी आज्ञा का पालन नहीं करते हैं तो आप डांटने लगते हैं और चिल्लाने लगते हैं। लेकिन आपको बता दें कि बच्चों पर चिल्लाना भी उतना ही नुकसानदायक होता है जितना कि उन पर हाथ उठाना। जब पेरेंट्स काम पर से घर लौटते हैं और देखते हैं कि उनका बच्चा किसी से बदतमीजी से बात कर रहा है और घर में सामान फैला रखा है, तो अच्छे खासे शांत पेरेंट्स भी गुस्से में हो जाते हैं और बच्चों पर चिल्लाना शुरू कर देते हैं। वहीं अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आप सावधान हो जाएं क्योंकि ऐसा करना आपके बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है और आपका बच्चा मानसिक रूप से बीमार हो सकता है। हां यह ध्यान रहे कि ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि एक स्टडी में ऐसा खुलासा हुआ है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों पर सख्ती बरतने पर मेंटल हेल्थ पर पड़ता है असर | Children’s Corner</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल माता-पिता द्वारा बढ़ते जाने वाली सख्ती बच्चों की मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यूनिवर्सिटी आॅफ कैंब्रिज और डबलिन द्वारा हाल ही में की गई एक रिसर्च में इस बात का खुलासा हुआ है, कि पैरंट्स अगर अपने बच्चों से ज्यादा सख़्ती से बात करते हैं, तो उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। बता दें कि इस शोध में 7500 से भी ज्यादा बच्चों को शामिल किया गया था। बच्चों के सामने सख़्ती से पेश आना मेंटल डिसआॅर्डर का कारण बन सकता है। इस शोध में शोधकर्ताओं ने बच्चों के समूह में यह देखा है कि इनमें से 10 फीसदी बच्चों में मेंटल हेल्थ खराब होने का खतरा अधिक था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन बच्चों में पेरेंट्स द्वारा बरती जा रही सख्ती का सामना करने की आदत ज्यादा थी। हालांकि शोध में यह भी साबित हुआ है कि बच्चों की मेंटल हेल्थ बिगड़ने के पीछे पेरेंट्स की सख्ती ही नहीं बल्कि फिजिकल हेल्थ जेंडर या फिर सामाजिक स्थिति भी जिम्मेदार हो सकती है। दरअसल छोटे बच्चों की तुलना में 9 साल से ऊपर के बच्चों में पेरेंट्स द्वारा लगाए जाने वाले अनुशासन का मेंटल हेल्थ पर ज्यादा असर पड़ सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग के साइड इफेक्ट</h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के साथ जरूरत से ज्यादा दबाव डालने पर उनके विकास पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों में आत्मविश्वास की कमी हो सकती है, वह अपने हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहने लगते हैं। Children’s Corner</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे बच्चे नई चीजें ट्राई नहीं कर पाते हैं, उन्हें हर वक्त इस बात का डर लगा रहता है कि अगर उनसे कुछ गलत हो गया तो उन्हें इसके लिए डांट पड़ेगी या फिर उन्हें पनिशमेंट दी जाएगी। अधिकतर बच्चे आत्मविश्वास की कमी होने के कारण नए-नए एक्सपेरिमेंट करने से हिचकिचाते हैं। स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग की वजह से बच्चें अपने दिल की बात खोलकर नहीं जता पाते हैं। जिस वजह से अंदर ही अंदर घुटन महसूस करते हैं और कई बार वे डिप्रेशन तक के शिकार हो जाते हैं।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana News: हरियाणा में नये जिले बनने पर ब्रेक, सैनी सरकार ने लगाई रोक… जानें कारण" href="http://10.0.0.122:1245/saini-government-imposed-a-ban-on-the-creation-of-new-districts-in-haryana-know-the-reason/">Haryana News: हरियाणा में नये जिले बनने पर ब्रेक, सैनी सरकार ने लगाई रोक… जानें कारण</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/these-things-of-parents-affect-the-mental-health-of-children/article-74982</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/these-things-of-parents-affect-the-mental-health-of-children/article-74982</guid>
                <pubDate>Sat, 23 Aug 2025 14:38:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-08/childrens-corner.jpg"                         length="71196"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Children&amp;#8217;s Story: लालच बुरी बला है</title>
                                    <description><![CDATA[Lalach Buri Bala: ‘हे भगवान, इस वन में अकाल पड़े, सूखा पड़े और बाढ़ आए ताकि वन के जानवर तबाह और बरबाद हो जाएं,’ सुंदर वन का महाराज खैरातीलाल सियार रोज भगवान की मूर्ति के आगे हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता था। Children’s Story एक दिन जब वह यही प्रार्थना कर रहा था तो उसकी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/greed-is-bad-story/article-87077"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/greed-is-bad.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Lalach Buri Bala: ‘हे भगवान, इस वन में अकाल पड़े, सूखा पड़े और बाढ़ आए ताकि वन के जानवर तबाह और बरबाद हो जाएं,’ सुंदर वन का महाराज खैरातीलाल सियार रोज भगवान की मूर्ति के आगे हाथ जोड़कर यही प्रार्थना करता था। Children’s Story</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन जब वह यही प्रार्थना कर रहा था तो उसकी पत्नी बोली, ‘तुम क्यों जानवरों की तबाही और बरबादी के लिए रोज इस तरह प्रार्थना करते हो। कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी रोज लालच के कारण तबाह और बरबाद हो जाओ।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘मेरी पत्नी होकर तुम मेरा बुरा सोचती हो,’ सियार ने गुस्से से कहा, ‘कैसी पत्नी हो तुम। आखिर मैं किसके लिए पैसे कमाता हूं।’</p>
<p style="text-align:justify;">‘जानवरों का खून चूसचूस कर जमा करने के लिए’, सियार की पत्नी ने दो टूक उत्तर दिया, ‘गरीब, लाचार, और बेबस जानवरों को सूद पर कर्ज दे दे कर तुम सेठ तो बन गए हो, लेकिन पैसे का लालच अभी भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ रहा है।’ खैरातीलाल सियार सूद ब्याज पर पैसे देने का काम करता था। वह एक नंबर का लालची और जालिम था। एक बार जो उसके चंगुल में फंस जाता था, वह जीवनभर उसके कर्ज से मुक्त नहीं हो पाता था।</p>
<p style="text-align:justify;">गरीब और लाचार जानवरों का खून चूस चूस कर उसने खूब पैसा जमा कर लिया था। उसके पास जितना पैसा आता जा रहा था, उसकी पैसे की भूख उतनी ही बढ़ती जा रही थी। Children’s Story</p>
<p style="text-align:justify;">सियार अपने पैसे बैंक में जमा नहीं करता था। वह सोचता था कि बैंक में पैसे जमा करने से एक दिन लुटेरे उसका भी पैसा लूट कर ले जाएंगे। आए दिन बैंक लूट की खबर अखबार में पढ़कर वह ऐसा सोचता था।</p>
<p style="text-align:justify;">वह अपना पैसा बहुत हिफाजत के साथ घड़े में डालकर जमीन में गाड़ कर रखता था। पैसे रखने की जानकारी वह अपनी पत्नी को भी नहीं होने देता था। वह सोचता था कि पत्नी पैसे देख लेगी तो खाने-पीने में खर्च कर देगी।<br />
इतना पैसा होने के बावजूद वह रूखा-सूखा खा कर गुजारा करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन सियार घड़े में पैसे रखकर अपने घर में ही जमीन में गाड़ रहा था कि तभी उसकी पत्नी ने उसे देख लिया।<br />
वह उसे धिक्कारती हुई बोली, झ्तुम तो हमेशा कहते हो कि पैसे मेरे लिए कमाते हो लेकिन मुझे कभी अच्छा खाना नहीं देते। स्वयं भी रूखा सूखा खाते हो और मुझे भी खिलाते हो, रूखासूखा खा-खा कर मैं तो सूख कर कांटा हो गई हूं।’<br />
झ्अरी भाग्यवान,’ सियार ने पत्नी को प्यार से पुचकारते हुए कहा, ‘एक बार भगवान मेरी प्रार्थना सुन ले तो मैं तुम्हें सिर्फ अच्छा खाना ही नहीं दूंगा बल्कि अच्छे कपड़े और गहनों से भी लाद दूंगा।’</p>
<p style="text-align:justify;">रात का समय था। पैसे का घड़ा जमीन में गाड़कर वह सोने चला गया मगर आज उसे नींद नहीं आ रही थी। वह सोच रहा था कि अगर वह सो गया तो उसकी पत्नी कहीं पैसे का घड़ा निकाल न ले।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी पत्नी जब गहरी नींद में सो गई तो वह उठा और कुछ सोचकर पैसे का घड़ा जमीन से निकाला और उसे लेकर नदी के किनारे चल दिया। नदी के किनारे उसकी जमीन थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सुनसान रात में नदी किनारे पहुंच कर उसने अपनी जमीन में एक गड्डा खोदा और उसमें घड़ा गाड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">‘किसी को पता नहीं चलेगा कि यहां घड़ा गाड़ा हुआ है’, यह सोचकर वह निश्चिंत होकर अपने घर में जा कर सो गया।<br />
संयोग से उसी रात खूब मूसलाधार बारिश हुई। इतनी बारिश हुई कि नदी में बाढ़ आ गई। सियार ने जहां अपना घड़ा गाड़ा था, वह स्थान पानी की तेज धार से कटकर नदी में विलीन हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सियार को जब पता चला तो वह दौड़ा-दौड़ा वहां गया, वहां का दृश्य देखकर वह दहाड़ें मार-मार कर रोने लगा। उसकी दशा पागलों जैसी हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी पत्नी ने जब उससे इस तरह रोने का कारण पूछा तो उसने रोते हुए सारी बात बताई, ‘हाय, मैं तो लुट गया, बरबाद हो गया। कंगाल हो गया मैं तो’।</p>
<p style="text-align:justify;">वह दोनों हाथों से अपना सिर धुनने लगा। Children’s Story</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/greed-is-bad-story/article-87077</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/greed-is-bad-story/article-87077</guid>
                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 16:30:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-04/greed-is-bad.jpg"                         length="15036"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Waste Material: ऐसे बनाये वेस्ट मटीरियल से काम की चीजें</title>
                                    <description><![CDATA[अपने अंदर के कलाकार को जगाएं और वेस्ट सामग्रियों का उपयोग करके इन क्राफ्ट आइडियाज को आजमाएं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/this-is-how-to-make-things-with-west-material/article-87045"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/west-material.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Waste Material: बच्चों को व्यस्त रखना और उनका मन लगाए रखना कोई आसान काम नहीं है। आधुनिक गैजेट्स और टीवी ने इस काम को आसान जरूर कर दिया है, लेकिन इनका उपयोग एक सीमित अंतराल के लिए ही सही है। इसलिए चलिए इसके लिए कुछ पुराने तरीके अपनाते हैं और बच्चों को आर्ट और क्राफ्ट के माध्यम से व्यस्त रखने के 1-2 तरीके सीखते हैं। बेकार सामग्रियों से क्राफ्टिंग करना बच्चों के साथ थोड़ा समय बिताने और कुछ नया सिखाने का सबसे बेहतरीन तरीका है। घर की सजावट के सामानों से लेकर छोटी-छोटी चीजें जिन्हें वे ज्वेलरी के तौर पर पहन सकते हैं या फिर प्यारे-प्यारे लौने, न जाने कितनी सारी चीजें हैं जिन्हें घर में पड़ी हुई बेकार चीजों से बनाया जा सकता है। इसलिए अपने अंदर के कलाकार को जगाएं और वेस्ट सामग्रियों का उपयोग करके इन क्राफ्ट आइडियाज को आजमाएं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों के लिए सुपर क्रिएटिव वेस्ट मटीरियल क्राफ्ट आइडियाज</h3>
<p style="text-align:justify;">बेकार पड़ी चीजों से क्राफ्ट करना किफायती तो है ही, साथ ही यह बच्चों के अंदर के कलाकार को जगाते हुए चीजों को दोबारा इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित भी करता है! यहाँ पर बच्चों के लिए कुछ आसान, मजेदार और सुंदर क्राफ्ट आइडियाज दिए गए हैं, जिन्हें बेकार सामग्रियों से बनाया जा सकता है!</p>
<h3 style="text-align:justify;">दूध के डब्बे से बना बर्ड हाऊस | Waste Material</h3>
<p style="text-align:justify;">इस एक्टिविटी के लिए आप दूध के एक पुराने डिब्बे का प्रयोग कर सकते हैं, जो कि न केवल मस्ती भरा और व्यस्त रखने वाला है, बल्कि इससे आकर्षित होकर पक्षी जब आपके बालकनी में आएंगे तब आपके बच्चों को बहुत खुशी मिलेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दूध या जूस का डिब्बा</h4>
<ul style="text-align:justify;">
<li> सफेद स्प्रे पेंट</li>
<li> सफेद ग्लू जैसे कि फेविकोल</li>
<li> हॉट ग्लू गन</li>
<li> प्लास्टिक का एक चम्मच</li>
<li> रंगीन टिशु पेपर</li>
<li> कटर या चाकू</li>
<li> स्पंज ब्रश</li>
<li> छत बनाने के लायक बड़ा और किताब का सॉफ्ट कवर</li>
<li>ऊन</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">बनाने का तरीका</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li> दूध या जूस के डिब्बे को स्प्रे पेंट करें और सूखने के लिए छोड़ दें।</li>
<li> सफेद ग्लू को पानी में मिलाकर पतला करें और डिब्बे के ऊपर और बुक कवर पर इसकी पतली परत लगाएं।</li>
<li> ग्लू के सूखने से पहले रंगीन टिशू या कागज को डिब्बे पर अनियमित रूप से लगाएं, जिससे उसे एक कलरफुल लुक मिले। आप एक के ऊपर दूसरे टिशु पेपर को भी लगा सकते हैं।</li>
<li> डिब्बे के ऊपर कटर की सहायता से एक छेद बनाएं और डिब्बे की साइड में दरवाजा बनाने के लिए एक छेद बनाए। दरवाजे के ठीक नीचे एक छोटा ‘एक्स’ आकार काटें और उसमें एक प्लास्टिक का चम्मच डालें। इसी चम्मच पर चिड़िया के लिए दाने रखे जाएंगे। अब हॉट ग्लू गन की सहायता से ऊपर छत लगाएं। छत पर दो छोटे कट लगाएं जिनके बीच लगभग 2 इंच की दूरी हो। इस कट में से ऊन को डालकर निकालें और इसी के द्वारा इस प्यारे से बर्ड हाउस को लटकाएं। Waste Material</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">पॉप्सिकल स्टिक से बने बुकमार्क</h3>
<p style="text-align:justify;">इन डीआईवाई बुकमार्क द्वारा छुट्टियों में पढ़ने को मजेदार बनाएं। ये दोस्तों के लिए अच्छे गिफ्ट भी हो सकते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li> पॉप्सिकल स्टिक्स</li>
<li> कपड़े की कतरनें</li>
<li> ग्लू</li>
<li> रिबन</li>
<li> फेल्ट पेन</li>
<li> गूगली आईज</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">बनाने का तरीका</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>धुले और सूखे हुए पॉप्सिकल स्टिक से शुरू करेंगे।</li>
<li>ग्लू की सहायता से बच्चों को कपड़े की कतरनों को आइसक्रीम स्टिक में लपेटने और चिपकाने के लिए दें। इसमें</li>
<li>चेहरा बनाने के लिए थोड़ी जगह छोड़े जो कि ऊपर की तरफ लगभग एक चौथाई होना चाहिए।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">रिबन का प्रयोग ग्लू की सहायता से बेल्ट या बालों के एसेसरीज बनाने में किया जा सकता है। अंत में स्टिक के दोनों तरफ गूगली आईज को चिपकाएं और मुंह बनाएं। आपका प्यारा सा बुकमार्क तैयार है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चमचमाती सीडी की फिश</h3>
<p style="text-align:justify;">इन आकर्षक मछलियों से अपने बच्चे को उसका अपना अक्वेरियम बनाने में सहायता करें।<br />
आवश्यक सामग्री</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li> एक सीडी</li>
<li> ग्लिटर</li>
<li> सफेद ग्लू</li>
<li> पीला कार्ड पेपर</li>
<li> स्कॉच टेप</li>
<li> कैंची</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"> गुगली आइज बनाने का तरीका | Waste Material</h3>
<p style="text-align:justify;">केवल बीच के हिस्से को खाली छोड़ते हुए पूरी सीडी पर ग्लू लगाएं।<br />
सीडी पर अच्छी तरह से ग्लिटर को छिड़क कर और सूखने के लिए छोड़ दें।<br />
येलो कार्ड पेपर से मुंह, पंखुड़ियां और पूंछ काटें और इन्हें टेप की सहायता से सूख चुके सीडी के खाली वाले स्थान पर चिपकाएं। फिश के चेहरे के एक तरफ गूगली आईज को चिपकाएं। आपका मजेदार फिश तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Snake: सांपों के लिए हैं ये लक्ष्मण रेखा, घर पर छिड़क दें ये बीज, घुसने से डरेगा सांप" href="http://10.0.0.122:1245/lakshman-rekha-for-snakes/">Snake: सांपों के लिए हैं ये लक्ष्मण रेखा, घर पर छिड़क दें ये बीज, घुसने से डरेगा सांप</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/this-is-how-to-make-things-with-west-material/article-87045</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/this-is-how-to-make-things-with-west-material/article-87045</guid>
                <pubDate>Sun, 06 Apr 2025 16:55:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-04/west-material.jpg"                         length="11781"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गधे के पेट में खाना</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार की बात है कि रामू अपने हाथ से पेट को बजा रहा था। यह देख कर माँ ने उससे कहा, ‘‘बेटा, ऐसे पेट नहीं बजाते। ऐसा करने से हम जो खाना खाते हैं, वो गधों के पेट में चला जाता है।’’ कुछ दिनों के बाद रामू का परिवार किसी के यहां से खाना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/food-in-donkeys-belly/article-87061"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/donkey-and-boy.gif" alt=""></a><br /><p>एक बार की बात है कि रामू अपने हाथ से पेट को बजा रहा था। यह देख कर माँ ने उससे कहा, ‘‘बेटा, ऐसे पेट नहीं बजाते। ऐसा करने से हम जो खाना खाते हैं, वो गधों के पेट में चला जाता है।’’<br />
कुछ दिनों के बाद रामू का परिवार किसी के यहां से खाना खाकर आया तो उसके पापा ने कहा, ‘‘आज तो मैंने इतना खाना खा लिया कि बस अब न तो उठा जाता है और न ही बैठा जाता है।’’<br />
इतने में तपाक से रामू बोला, ‘‘पापा, आप अपना पेट बजाइए, ताकि थोड़ा खाना गधे के पेट में चला जाए।’’</p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<div class="td-g-rec td-g-rec-id-content_bottom tdi_2_b4b td_block_template_1"></div>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/food-in-donkeys-belly/article-87061</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/food-in-donkeys-belly/article-87061</guid>
                <pubDate>Fri, 02 Aug 2024 17:24:38 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-08/donkey-and-boy.gif"                         length="129036"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाल कविता : नये युग का बालक</title>
                                    <description><![CDATA[घिसे-पिटे परियों के किस्से नहीं सुनूँगा, खुली आँख से झूठे सपने नहीं बुनूँगा। मुझे पता चंदा की धरती पथरीली है, इसलिए धब्बों की छाया भी नीली है। चरखा कात रही है नानी मत बतलाओ, पढ़े-लिखे बच्चों को ऐसे मत झुठलाओ। इन्द्रधनुष के रंग इन्द्र ने नहीं बनाएं, पृथ्वी का है बोझ न कोई बैल उठाए। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/new-age-child/article-87043"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/new-age-child.gif" alt=""></a><br /><p>घिसे-पिटे परियों के किस्से नहीं सुनूँगा,<br />
खुली आँख से झूठे सपने नहीं बुनूँगा।</p>
<p>मुझे पता चंदा की धरती पथरीली है,<br />
इसलिए धब्बों की छाया भी नीली है।</p>
<p>चरखा कात रही है नानी मत बतलाओ,<br />
पढ़े-लिखे बच्चों को ऐसे मत झुठलाओ।</p>
<p>इन्द्रधनुष के रंग इन्द्र ने नहीं बनाएं,<br />
पृथ्वी का है बोझ न कोई बैल उठाए।</p>
<p>मुझे पता है बादल कब जल बरसाते हैं,<br />
मुझे पता है कैसे पर्वत हिल जाते हैं।</p>
<p>मुझे सुनाओं बातें जग की सीधी-सच्ची,<br />
नहीं रही है अक्ल हमारी इतनी कच्ची।</p>
<p><strong>-माधव कौशिक</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/new-age-child/article-87043</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/new-age-child/article-87043</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jul 2024 16:04:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-07/new-age-child.gif"                         length="395618"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोने का खेत : अकबर और बीरबल की कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[अकबर के महल में कई कीमती सजावट की वस्तुएं थीं, लेकिन एक गुलदस्ते से अकबर को खास लगाव था। इस गुलदस्ते को अकबर हमेशा अपनी पलंग के पास रखवाते थे। एक दिन अचानक महाराज अकबर का कमरा साफ करते हुए उनके सेवक से वह गुलदस्ता टूट गया। सेवक ने घबराकर उस गुलदस्ते को जोड़ने की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/the-field-of-gold-the-story-of-akbar-and-birbal/article-31652"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/akbar-and-birbal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अकबर के महल में कई कीमती सजावट की वस्तुएं थीं, लेकिन एक गुलदस्ते से अकबर को खास लगाव था। इस गुलदस्ते को अकबर हमेशा अपनी पलंग के पास रखवाते थे। एक दिन अचानक महाराज अकबर का कमरा साफ करते हुए उनके सेवक से वह गुलदस्ता टूट गया। सेवक ने घबराकर उस गुलदस्ते को जोड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। हार कर उसने टूटा गुलदस्ता कूड़ेदान में फेंक दिया और दुआ करने लगा कि राजा को इस बारे में कुछ पता न चले।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद महराज अकबर जब महल लौटे, तो उन्होंने देखा कि उनका प्रिय गुलदस्ता अपनी जगह पर नहीं है। राजा ने सेवक से उस गुलदस्ते के बारे में पूछा, तो सेवक डर के मारे कांपने लगा। सेवक को जल्दी में कोई अच्छा बहाना नहीं सूझा, तो उसने कहा कि महाराज उस गुलदस्ते को मैं अपने घर ले गया हूं, ताकि अच्छे से साफ कर सकूं। यह सुनते ही अकबर बोले, मुझे तुरंत वो गुलदस्ता लाकर दो।</p>
<p style="text-align:justify;">अब सेवक के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। सेवक ने महराज अकबर को सच बता दिया कि वो गुलदस्ता टूट चुका है। यह सुनकर राजा आग बबूला हो गए। क्रोध में राजा ने उस सेवक को फांसी की सजा सुना दी। राजा ने कहा, झूठ मैं बर्दाश्त नहीं करता हूं। जब गुलदस्ता टूट ही गया था, तो झूठ बोलने की क्या जरूरत थी ।</p>
<p style="text-align:justify;">अगले दिन इस घटना के बारे में जब सभा में जिक्र हुआ तो बीरबल ने इस बात का विरोध किया। बीरबल बोले कि झूठ हर व्यक्ति कभी-न-कभी बोलता ही है। किसी के झूठ बोलने से अगर कुछ बुरा या गलत नहीं होता, तो झूठ बोलना गलत नहीं है। बीरबल के मुंह से ऐसे शब्द सुनकर अकबर उसी समय बीरबल पर भड़क गए। उन्होंने सभा में लोगों से पूछा कि कोई ऐसा है यहां जिसने झूठ बोला हो। सबने राजा को कहा कि नहीं वो झूठ नहीं बोलते। यह बात सुनते ही राजा ने बीरबल को राज्य से निकाल दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">राज दरबार से निकलने के बाद बीरबल ने ठान ली कि वो इस बात को साबित करके रहेंगे कि हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी-न-कभी झूठ बोलता है। बीरबल के दिमाग में एक तरकीब आई, जिसके बाद बीरबल सीधे सुनार के पास गए। उन्होंने जौहरी से सोने की गेहूं जैसी दिखने वाली बाली बनवाई और उसे लेकर महाराज अकबर की सभा में पहुंच गए।<br />
अकबर ने जैसे ही बीरबल को सभा में देखा, तो पूछा कि अब तुम यहां क्यों आए हो। बीरबल बोले, जहांपनाह आज ऐसा चमत्कार होगा, जो किसी ने कभी नहीं देखा होगा। बस आपको मेरी पूरी बात सुननी होगी। राजा अकबर और सभी सभापतियों की जिज्ञासा बढ़ गई और राजा ने बीरबल को अपनी बात कहने की अनुमति दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">बीरबल बोले, आज मुझे रास्ते में एक सिद्ध पुरुष के दर्शन हुए। उन्होंने मुझे यह सोने से बनी गेहूं की बाली दी है और कहा कि इसे जिस भी खेत में लगाओगे, वहां सोने की फसल उगेगी। अब इसे लगाने के लिए मुझे आपके राज्य में थोड़ी-सी जमीन चाहिए। राजा ने कहा, यह तो बहुत अच्छी बात है, चलो हम तुम्हें जमीन दिला देते हैं। अब बीरबल कहने लगे कि मैं चाहता हूं कि पूरा राज दरबार यह चमत्कार देखे। बीरबल की बात मानते हुए पूरा राज दरबार खेत की ओर चल पड़ा।<br />
खेत में पहुंचकर बीरबल ने कहा कि इस सोने से बनी गेहूं की बाली से फसल तभी उगेगी, जब इसे ऐसा व्यक्ति लगाए, जिसने जीवन में कभी झूठ न बोला हो। बीरबल की बात सुनकर सभी राजदरबारी खामोश हो गए और कोई भी गेहूं की बाली लगाने के लिए तैयार नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">राजा अकबर बोले कि क्या राजदरबार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसने अपने जीवन में कभी झूठ न बोला हो? सभी खामोश थे। बीरबल बोले, जहांपनाह अब आप ही इस बाली को खेत में रोप दीजिए। बीरबल की बात सुनकर महाराज का सिर झुक गया। उन्होंने कहा, बचपन में मैंने भी कई झूठ बोले हैं, तो मैं इसे कैसे लगा सकता हूं। इतना कहते ही बादशाह अकबर को यह बात समझ आ गई कि बीरबल सही कह रहे थे कि इस दुनिया में कभी-न-कभी सभी झूठ बोलते हैं। इस बात का एहसास होते ही अकबर उस सेवक की फांसी की सजा को रोक देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>कहानी से सीख :</strong></em> बिना सोचे समझे किसी को बड़ा दण्ड नहीं देना चाहिए। हर काम को सोच-विचार कर ही किया जाना चाहिए। साथ ही एक छोटे से झूठ की वजह से किसी व्यक्ति का आंकलन भी नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियां ऐसी होती है कि लोग झूठ बोल देते हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">linked in</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/the-field-of-gold-the-story-of-akbar-and-birbal/article-31652</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/the-field-of-gold-the-story-of-akbar-and-birbal/article-31652</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 15:24:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-03/akbar-and-birbal.jpg"                         length="49506"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[मैं बचपन को बुला रही थी बोल उठी बिटिया मेरी, नंदन-वन सी फल उठी वह छोटी-सी कुटिया मेरी। ‘माँ ओ’ कहकर बुला रही थी मिट्टी खाकर आई थी, कुछ मुँह में, कुछ लिए हाथ में मुझे खिलाने लाई थी। मैंने पूछा-यह क्या लाई? बोल उठी वह-‘माँ काओ’, फूल-फूल मैं उठी खुशी से मैंने कहा-‘तुम्हीं खाओ।’ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/childhood/article-29344"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/betiya.jpg" alt=""></a><br /><p>मैं बचपन को बुला रही थी<br />
बोल उठी बिटिया मेरी,<br />
नंदन-वन सी फल उठी वह<br />
छोटी-सी कुटिया मेरी।<br />
‘माँ ओ’ कहकर बुला रही थी<br />
मिट्टी खाकर आई थी,<br />
कुछ मुँह में, कुछ लिए हाथ में<br />
मुझे खिलाने लाई थी।<br />
मैंने पूछा-यह क्या लाई?<br />
बोल उठी वह-‘माँ काओ’,<br />
फूल-फूल मैं उठी खुशी से<br />
मैंने कहा-‘तुम्हीं खाओ।’<br />
<strong>-सुभद्राकुमारी चौहान</strong></p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/childhood/article-29344</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/childhood/article-29344</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 12:36:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2021-12/betiya.jpg"                         length="13076"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>JOKS : चीनी घुल गई</title>
                                    <description><![CDATA[एक दिन मैंने अपने आठ साल के बेटे से नींबू का शरबत बना लाने को कहा। वही नींबू का शरबत तो बना लाया, लेकिन उसमें चीनी डालना भूल गया। मैंने उससे पूछा कि चीनी नहीं डाली। तभी उसने अपनी भूल छुपाने के लिए तपाक से जवाब दिया, ‘‘पापा! चीनी डाली तो थी, घुल गई होगी।’’ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/joks/article-27154"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/joks.gif" alt=""></a><br /><p>एक दिन मैंने अपने आठ साल के बेटे से नींबू का शरबत बना लाने को कहा। वही नींबू का शरबत तो बना लाया, लेकिन उसमें चीनी डालना भूल गया। मैंने उससे पूछा कि चीनी नहीं डाली। तभी उसने अपनी भूल छुपाने के लिए तपाक से जवाब दिया, ‘‘पापा! चीनी डाली तो थी, घुल गई होगी।’’</p>
<p>एक बुजुर्ग- ‘बेटा कैसे हो?’<br />
बच्चा-जी, बिल्कुल ठीक हूँ…<br />
बुजुर्ग-‘पढ़ाई कैसी चल रही है?’<br />
बच्चा-‘जी, बिल्कुल आपकी ज़िंदगी की तरह…’<br />
बुजुर्ग-‘मतलब?’<br />
बच्चा-‘भगवान भरोसे!!!’</p>
<p>एक बच्चे ने पूछा, ‘‘पापा! मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है।’’<br />
पापा बोले, ‘‘बेटा, अच्छा मुझे बताओ क्या समझ नहीं आ रहा है?’’<br />
बेटा, ‘‘पहला, जिसने घड़ी बनाई, उसने टाइम कैसे मिलाया?’’<br />
पिता, ‘‘और।’’<br />
बेटा, ‘‘दूसरा, पहली बार दही जमाया तो जामण कहां से आया?’’<br />
पिता लाजवाब</p>
<p>टीचर ने बच्चों को क्रिकेट मैच पर निबंध लिखने के लिए कहा।<br />
सभी छात्र अपनी-अपनी कॉपी लेकर निबंध लिखने में जुट गए।<br />
मगर रूलदू चुपचाप बैठा था।<br />
टीचर ने उसकी कॉपी देखा तो उस पर सिर्फ एक ही लाइन लिखी थी, ‘‘बारिश की वजह से मैच स्थगित कर दिया गया है।’’</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
<div class="td-g-rec td-g-rec-id-content_bottom tdi_2_8a8 td_block_template_1"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/joks/article-27154</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/joks/article-27154</guid>
                <pubDate>Fri, 24 Sep 2021 16:08:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2021-09/joks.gif"                         length="90056"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कविता : एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ</title>
                                    <description><![CDATA[एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ, रटवाती थी हमको बुआ। टू वन जा टू, टूटू जा फोर, लगता यारों कितना बोर। क से कबूतर, ख से खरगोश, पढ़कर हुआ गुड्डू बेहोश। ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट, मोटू नहीं सन्नी बोलो फैट। उतरी हिन्दी की पगड़ी, पहनी हमने अंग्रेजी तगड़ी। डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’ अन्य अपडेट हासिल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/poem/article-27059"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/poem.gif" alt=""></a><br /><p>एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ,<br />
रटवाती थी हमको बुआ।</p>
<p>टू वन जा टू, टूटू जा फोर,<br />
लगता यारों कितना बोर।</p>
<p>क से कबूतर, ख से खरगोश,<br />
पढ़कर हुआ गुड्डू बेहोश।</p>
<p>ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट,<br />
मोटू नहीं सन्नी बोलो फैट।</p>
<p>उतरी हिन्दी की पगड़ी,<br />
पहनी हमने अंग्रेजी तगड़ी।</p>
<p>डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’</p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<div class="td-g-rec td-g-rec-id-content_bottom tdi_2_1a6 td_block_template_1"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/poem/article-27059</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/poem/article-27059</guid>
                <pubDate>Tue, 21 Sep 2021 15:49:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2021-09/poem.gif"                         length="122599"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान : Poem</title>
                                    <description><![CDATA[करके मेहनत कड़ी किसान, देता सबको रोटी दान। गरमी-सरदी से कब डरता, खेतों में रखवाली करता। आँधी, वर्षा या तूफ़ान, निडर जुटा है सीना तान। मेहनत करना हमें सिखाए, सच्चाई की राह दिखाए। रहता उजले-उजले मन का, सच्चा सेवक यही वतन का। नरेन्द्र अत्री ‘संतोषी’ जीन्द   अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter, Instagram, LinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/farmer-2/article-26662"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/farmer.gif" alt=""></a><br /><h5>करके मेहनत कड़ी किसान,<br />
देता सबको रोटी दान।</h5>
<h5>गरमी-सरदी से कब डरता,<br />
खेतों में रखवाली करता।</h5>
<h5>आँधी, वर्षा या तूफ़ान,<br />
निडर जुटा है सीना तान।</h5>
<h5>मेहनत करना हमें सिखाए,<br />
सच्चाई की राह दिखाए।</h5>
<h5>रहता उजले-उजले मन का,<br />
सच्चा सेवक यही वतन का।</h5>
<h5><strong>नरेन्द्र अत्री ‘संतोषी’ जीन्द</strong></h5>
<p> </p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
<div class="td-g-rec td-g-rec-id-content_bottom tdi_2_efe td_block_template_1"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/children-corner/farmer-2/article-26662</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/children-corner/farmer-2/article-26662</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Sep 2021 16:31:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2021-09/farmer.gif"                         length="305930"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        