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                <title>Leech - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अजब-गजब : बूझो तो जानें! ऐसा जीव जिसके पास 32 दिमाग, 300 दांत, 10 आंखें&amp;#8230; हर कोई हैरान!!</title>
                                    <description><![CDATA[आज तक सवालों के जवाब तो आपने बहुत दिए होंगे लेकिन जो सवाल हम आपके लिए लेकर आए हैं, वो काफी अजीब है, लेकिन काफी मजेदार भी है। (Leech) आपने शायद पहले भी इस तरह के कई सवाल पढ़े होंगे, लेकिन दिया गया यह सवाल कभी नहीं पढ़ा होगा। इसका जवाब आप देकर दिखाएं कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/children-corner/after-all-which-creature-has-thirty-two-brains/article-48563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/leech.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज तक सवालों के जवाब तो आपने बहुत दिए होंगे लेकिन जो सवाल हम आपके लिए लेकर आए हैं, वो काफी अजीब है, लेकिन काफी मजेदार भी है। (Leech) आपने शायद पहले भी इस तरह के कई सवाल पढ़े होंगे, लेकिन दिया गया यह सवाल कभी नहीं पढ़ा होगा। इसका जवाब आप देकर दिखाएं कि आखिर वो कौन सा जीव है, जिसके पास 32 दिमाग, 300 दांत और 10 आंखें होती हैं? यह सिर्फ आपका ज्ञान बढ़ाने के लिए है। आपको इस सवाल का जवाब देने के लिए मात्र 10 सेकेंड का समय दिया जाता है। अगर आप इस सवाल का जवाब नहीं भी दे पाते हैं, तो कोई बात नहीं, टेंशन नहीं लेनी। हमने इस सवाल का जवाब भी नीचे दिया हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर – दरअसल, दुनिया में लीच ही वो एकमात्र ऐसा जीव है, जिसके पास 32 दिमाग, 300 दांत और 10 आंखें होती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लीच Leech (जोंक) की आंतरिक संरचना को 32 विभिन्न खंडों में वितरित किया गया है, जिनमें से हर एक का अपना एक दिमाग होता है। इसके अलावा लीच एक प्रकार का कीड़ा होता है। यहभी बता दें कि एक लीच के 32 अलग दिमाग नहीं होते हैं, बल्कि एक ही दिमाग होता है, जो जोंक की तरह ही 32 अलग-अलग खंडों में बंटा हुआ होता है और हर एक खंड का अपना ही एक तंत्रिका गैंग्लिया होता है, जिस कारण एक पार्ट दूसरे पार्ट से जुड़ा होता है। इसके अलावा एक लीच का बाहरी और आंतरिक विभाजन एक-दूसरे से मेल नहीं खाता है, लेकिन उसमें शारीरिक रूप से एक नाड़ी ग्रन्थि दूसरे को नियंत्रित करती है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सीहोर में 300 फीट गहरे बोरवेल मे गिरी सृष्टि की सलामती की दुआ को एक साथ उठे ‘लाखों हाथ’" href="http://10.0.0.122:1245/girl-child-fell-in-three-hundred-feet-deep-borewell-in-sehore-army-called/">सीहोर में 300 फीट गहरे बोरवेल मे गिरी सृष्टि की सलामती की दुआ को एक साथ उठे ‘लाखों हाथ’</a></p>
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                                                            <category>बच्चों का कोना</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jun 2023 15:43:08 +0530</pubDate>
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                <title>जोंक से उपचार की विधि ‘जलौकावचारण’</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/method-of-treatment-with-leech/article-18067"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/leech.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आपने अकसर देखा होगा कि नमक को खुले में रखने से कुछ दिन के बाद वो चिपचिपा हो जाता है और इसी हाल में रहने पर पूरी तरह से पिघल जाता हैं। ये ऐसा इसलिए होता है कि नमक हवा से नमी (हवा में घुली पानी की भाप) सोख लेता हैं। जब तक नमक में नमी की मात्रा कम रहती है तब तक वो चिपचिपा बनकर रहता है। मगर जैसे नमी की मात्रा बढ़ती है तो पूरी तरह से पिघल जाता है। जब हम जोंक पर नमक छिड़कते हैं तो नमक तुरंत उसके शरीर से पानी सोंखना शुरू कर देता है। उसके शरीर में पानी कम हो जाने के कारण वो छटपटाता है और आखिर मर जाता है। खून चूसने के लिए कुख्यात माने जाने वाले जीव जोंक का इस्तेमाल असाध्य बीमारियों के इलाज में किया जा रहा है। जोंक के खून चूसने की स्वाभाविक खूबी के साथ सामंजस्य बैठाते हुए चिकित्सीय जगत में इसका उपयोग स्वच्छ रक्त के बजाय दूषित रक्त को निकालने में किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जोंक से उपचार की विधि को आयुर्वेद में जलौकावचारण विधि की संज्ञा दी जाती है। चिकित्सा विज्ञान में इस विधि को लीच थैरेपी भी कहा जाता है। लीच थैरेपी से डायबिटिक फुट, गैंगरिन, सोरायसिस, नासूर समेत कई बीमारियों का सफलता से इलाज हो रहा है। डीप वेन थ्रंबायोसिस जिसमें पैर कटवाने की नौबत आ जाती है, में यह विधि कारगर है।  जोंकों को प्रभावित अंगों के ऊपर छोड़ दिया जाता है। जोंक अपने मुंह से ऐसे एंजाइम का स्राव करते हैं जो व्यक्ति को यह अहसास ही नहीं होने देते कि शरीर से खून चूसा जा रहा है। कृमि प्रजाति के इस जीव की सबसे बड़ी खासियत इसके स्लाइवा में मिलने वाला हिरुडिन नामक एंजाइम है, जो रक्त में थक्का नहीं बनने देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके स्राव से स्वच्छ रक्त का प्रवाह तेजी से होता है। जोंक दूषित रक्त को ही चूसती है। एक बार में जोंक शरीर से 5 मिलीलीटर खून चूस लेती है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक प्रभावित अंग से दूषित रक्त को पूरी तरह चूस नहीं लिया जाता। दूषित रक्त की समाप्ति से स्वच्छ रक्त प्रवाह होता है जिससे जख्म जल्दी भरते हैं। डायबिटिक मरीजों के लिए शल्य क्रिया काफी खतरनाक मानी जाती है। इसकी वजह जख्मों को भरने में सामान्य के मुकाबले अत्यधिक समय लगता है। इस बीच कई बीमारियों के खतरे की आशंका बन जाती है। लीच थैरेपी इन सब मुसीबतों से निजात दिलाती है। इंफेक्शन न हो, इसके लिए एक जोंक का एक ही मरीज के लिए प्रयोग किया जाता है। दूषित रक्त चूसने के बाद इनको उल्टी कराई जाती है, ताकि ये अपने मुंह से दूषित रक्त निकाल दें।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2020 10:10:19 +0530</pubDate>
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