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                <title>Garbage Scam - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आरटीआई से निकाला पानीपत का ‘कूड़ा घोटाला’</title>
                                    <description><![CDATA[ नगर पालिका समालखा ने 1 मार्च 2018 से 30 जून 2020 तक की अवधि में 20,690 टन कूड़ा उठाने के बदले 2,11,26,141 रुपए का भुगतान जेबीएम कंपनी को किया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/panipats-garbage-scam-removed-from-rti/article-18097"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/garbage-scam.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>बिना टेंडर की शर्तों को पूरा किए नगर निगम ने कंपनी को पास किए करोड़ों के बिल</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने लगाए आरोप</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत(सच कहूँ न्यूज)।</strong> जिला पानीपत में सामाजिक कार्यकर्ता ने सूचना अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर कूड़ा प्रबंधन परियोजना में घोटाले का पदार्फाश किया है, जिसके तहत नगर निगम ने बिना टेंडर की शर्तों का पालन किये पिछले अढ़ाई साल में निजी कंपनी के करोड़ों रुपयों के बिल पास किये हैं। पीपी कपूर ने बताया कि प्रदेश सरकार ने जेबीएम कंपनी को अढ़ाई वर्ष पहले यह ठेका दिया था। टेंडर करार की शर्तों के अनुसार भुगतान प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की तरफ से सफाई कार्य के निरीक्षण और बिलों की वेरिफिकेशन के बाद किया जाना चाहिए था लेकिन पीएमयू का गठन ही नहीं किया गया और कंपनी इस दौरान जो भी बिल पकड़ाती रही, निगम भुगतान करता गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ये हुआ है आरटीआई में खुलासा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बताया कि जेबीएम कंपनी को ढ़ाई वर्ष पूर्व खट्टर सरकार द्वारा सफाई कार्य करने के लिए ठेका दिया गया था। फरवरी 2018 से जुलाई 2020 तक की अवधि में नगर निगम पानीपत ने जेबीएम कंपनी को कुल 3,64,673 टन कूड़ा उठाने के बदले कुल 36,46,72,864 रुपए का भुगतान किया है। वहीं नगर पालिका समालखा ने 1 मार्च 2018 से 30 जून 2020 तक की अवधि में 20,690 टन कूड़ा उठाने के बदले 2,11,26,141 रुपए का भुगतान जेबीएम कंपनी को किया। ये भुगतान टैंडर एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) द्वारा सफाई कार्य के निरीक्षण व बिलों की वेरिफिकेशन के पश्चात किए जाने थे। लेकिन सफाई ठेका कार्य शुरू हुए ढ़ाई वर्ष बीत गए लेकिन पीएमयू गठित नहीं की गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फरीदाबाद में गठित पीएमयू ने लगाया था डेढ़ करोड़ रुपये जुर्माना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कपूर ने बताया कि हरियाणा के ही फरीदाबाद जिले के नगर निगम के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट गठित की गई है। उसने सफाई कार्य करने वाली कंपनी के काम में कमी नजर आई तो 1.50 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया। वहीं पानीपत नगर निगम ने एक रुपए का भी जुर्माना जेबीएम कंपनी को नहीं लगाया। यहां पीएमयू गठित ही नहीं किया गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ठेका रद्द करने के प्रस्ताव की फाइल निदेशालय से लापता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">करोड़ों रुपये हर माह सफाई कार्य पर खर्च करने के बावजूद भी बदहाल सफाई व्यवस्था के कारण नगर निगम पार्षदों ने 4 जुलाई 2019 की हाउस मीटिंग में जेबीएम कंपनी की सेवाएं रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया था। नगर निगम कमिश्नर ने 29 जुलाई 2019 के अपने पत्र द्वारा यह प्रस्ताव महानिदेशक शहरी स्थानीय निकाय को भेज कर कंपनी के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की थी। कपूर द्वारा निदेशालय में 28 सितम्बर 2019 को इस बारे आरटीआई लगाई थी। इसके जवाब में शहरी निकाय निदेशालय के कार्यकारी अभियंता ने अपने 19 अगस्त 2020 के पत्र द्वारा निदेशालय के डीटीपी को बताया कि जेबीएम कंपनी के विरूद्ध कमिश्नर नगर निगम द्वारा भेजे प्रस्ताव व पत्र ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे।</p>
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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2020 20:08:32 +0530</pubDate>
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