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                <title>Lathi Charge on Teachers - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अध्यापकों पर ‘लाठीचार्ज’ का गवाह बना वाईपीएस चौक</title>
                                    <description><![CDATA[ये कैसा शिक्षक दिवस: देश का भविष्य तैयार करने वाले अध्यापक खुद हो रहे बेइज्जत, सड़कों पर पिट रहे पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर तूर)। प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री अमरिन्द्र सिंह की रिहायश के नजदीक वाईपीएस चौक अध्यापकों पर लाठीचार्ज और अत्याचार करने का गवाह बन गया है। कैप्टन सरकार के कार्यकाल में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/yps-chowk-becomes-witness-to-lathi-charge-on-teachers/article-18129"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/lathi-charge-on-teachers.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>ये कैसा शिक्षक दिवस: देश का भविष्य तैयार करने वाले अध्यापक खुद हो रहे बेइज्जत, सड़कों पर पिट रहे</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर तूर)</strong>। प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री अमरिन्द्र सिंह की रिहायश के नजदीक वाईपीएस चौक अध्यापकों पर लाठीचार्ज और अत्याचार करने का गवाह बन गया है। कैप्टन सरकार के कार्यकाल में विद्यार्थियों का भविष्य बनाने वाले अध्यापक व अध्यापिकाओ की पगड़ियों व दुपट्टों को पैरों में फेंककर बेइज्जत किया गया। पानी की बौछारों व अंधाधुंध लाठियां भांजी गई, जिसमें कई अध्यापक घायल भी हो गए थे। पुलिस ने अध्यापकों के साथ बेरहमी से खींचा-घसीटा, जिसे याद कर आज भी कई अध्यापक शर्मसार महसूस करते हैं। इधर बेरोजगार अध्यापकों का कहना है कि अध्यापक दिवस तो बस नाम का ही रह गया है। जब घर-घर नौकरी के वायदे कर कुर्सियां मलने वाले ही मुकर जाएं, फिर पंजाब का भविष्य की उम्मीद का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>महिला अध्यापकों को बुरी तरह घसीटा गया</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि अकाली-भाजपा के 10 वर्षीय कार्यकाल के बाद जब नए सुपने दिखाकर कांगे्रस के कैप्टन अमरिन्द्र सिंह ने वर्ष 2017 में कार्यकाल संभाला था, तब उसके बाद प्रत्येक वर्ग में एक नई ऊर्जा का संचार था। इसके बाद सरकार ने वर्ष 2019 में एसएसए व रमसा अध्यापकों के वेतन में कटौती कर 15 हजार के करीब कर दिया, जिसके बाद इन अध्यापकों में रोष फैल गया। अध्यापक संघर्ष कमेटी द्वारा इस पर आंदोलन चलाया गया व 10 फरवरी 2019 को अध्यापकों ने मोती महल की तरफ कूच किया।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस दौरान वाईपीएस चौक के नजदीक दोपहर के समय पुलिस ने अध्यापकों पर अंधाधुंध लाठीचार्ज किया।</li>
<li style="text-align:justify;">पानी की बौछारों से अध्यापकों को जमकर घसीटा गया व उनकी पगड़ियां-दुपट्टों को उतारा गया।</li>
<li style="text-align:justify;">इस लाठीचार्ज में तीन दर्जन के करीब अध्यापक घायल हुए व कईयों पर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया।</li>
<li style="text-align:justify;">संसद व विधानसभा में भी विपक्ष ने जोर-शोर से मुद्दा उठाया।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह ईटीटी टैट पास अध्यापक यूनियन के सदस्य जब 8 मार्च 2020 को मोती महल की तरफ प्रदर्शन करने के लिए जा रहे थे तब वाईपीएस चौक में उन पर भी जमकर लाठियां चलाई गई, जिसमें 15 के करीब बेरोजगार अध्यापक घायल हुए। महिला दिवस के अवसर पर भी महिला अध्यापकों को पुलिस ने पीट-पीटकर खदेड़ा। इसी दिन ही दो बेरोजगार अध्यापिकाओं ने नहर में छलांग लगा दी थी। इधर संगरूर में शिक्षा मंत्री के आवास के नजदीक बीएड टैट पास व ईटीटी टैट पास यूनियन द्वारा 24 नवंबर 2019 को संयुक्त एक्शन दौरान बेरोजगार अध्यापकों पर लाठीचार्ज किया गया। इस लाठीचार्ज दौरान कई अध्यापक घायल हुए।</p>
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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2020 20:24:43 +0530</pubDate>
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