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                <title>Sarvepalli Radhakrishnan - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Vice President Election: राधाकृष्णन ने उप राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया, पीएम मोदी भी साथ में&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। Vice President Election: उप राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस एतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री उप राष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के प्रस्तावक बने। इस अवसर पर उनके साथ मोदी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/radhakrishnan-filed-nomination-papers-for-vice-presidential-election/article-74872"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-08/new-delhi-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)।</strong> Vice President Election: उप राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस एतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री उप राष्ट्रपति उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के प्रस्तावक बने। इस अवसर पर उनके साथ मोदी के अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और राजग सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेता तथा जनता दल यूनाइटेड से ललन सिंह और संजय झा, लोजपा (रामविलास) से चिराग पासवान, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के अलावा और भी कई केन्द्रीय मंत्री मौजूद थे। New Delhi</p>
<p style="text-align:justify;">राधाकृष्णन का नामांकन चार सेटों में दाखिल हुआ है। जिनमें से प्रत्येक पर 20 प्रस्तावकों और 20 अनुमोदकों के हस्ताक्षर हैं। पहले सेट में मुख्य प्रस्तावक के रूप में प्रधानमंत्री मोदी के हस्ताक्षर हैं, जबकि बाकी सेटों में केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ राजग नेताओं के हस्ताक्षर हैं, जो गठबंधन में व्यापक सहमति को दशार्ता है। उप राष्ट्रपति उम्मीदवार राधाकृष्णन के इस एतिहासिक मौके पर संसद भवन में नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान मंत्रियों और सांसदों सहित राजग के लगभग 160 सदस्य उपस्थित रहे। राधाकृष्णन को नामित करने का निर्णय केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास पर आयोजित राजग के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। New Delhi</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="मनीषा के हत्यारों को जल्द गिरफ़्तार करे पुलिस" href="http://10.0.0.122:1245/police-should-arrest-manishas-killers-soon/">मनीषा के हत्यारों को जल्द गिरफ़्तार करे पुलिस</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Aug 2025 16:15:44 +0530</pubDate>
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                <title>आज ही के दिन डॉ. राधाकृष्णन बने थे भारत के दूसरे राष्ट्रपति</title>
                                    <description><![CDATA[जब राधाकृष्णन मॉस्को में भारत के राजदूत थे, बहुत दिनों तक स्टालिन उनसे मुलाकात के लिए राजी नहीं हुए। अंत में जब दोनों की मुलाकात हुई तो डॉ. राधाकृष्णन ने स्टालिन से कहा, हमारे देश में एक राजा था जो बड़ा अत्याचारी और क्रूर था। उसने रक्त भरी राह से प्रगति की थी किन्तु एक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/on-this-day-dr-radhakrishnan-became-the-second-president-of-india/article-23596"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/sarvepalli-radhakrishnan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जब राधाकृष्णन मॉस्को में भारत के राजदूत थे, बहुत दिनों तक स्टालिन उनसे मुलाकात के लिए राजी नहीं हुए। अंत में जब दोनों की मुलाकात हुई तो डॉ. राधाकृष्णन ने स्टालिन से कहा, हमारे देश में एक राजा था जो बड़ा अत्याचारी और क्रूर था। उसने रक्त भरी राह से प्रगति की थी किन्तु एक युद्ध में उसके भीतर ज्ञान जाग गया और तभी से उसने धर्म, शांति और अहिंसा की राह पकड़ ली। आप भी अब उसी रास्ते पर क्यों नहीं आ जाते? उनकी बात का स्टालिन क्या जवाब देते। उनके जाने के बाद स्टालिन ने अपने दुभाषिए से कहा, ये आदमी राजनीति नहीं जानता, वह केवल मानवता का भक्त है। उप-राष्ट्रपति के तौर पर सर्वपल्ली राधाकृष्णन चीन गए थे तो माओ ने अपने निवास चुंग नान हाई के आंगन के बीचोबीच आकर उनकी अगवानी की। जैसे ही दोनों ने हाथ मिलाया राधाकृष्णन ने माओ के गाल थपथपा दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही उन्होंने जबरदस्त पंच लाइन कही, अध्यक्ष महोदय, परेशान मत होइए। मैंने यही स्टालिन और पोप के साथ भी किया है। भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह उस समय चीन में भारतीय दूतावास में अफसर थे, जो उस वक्त वहां मौजूद थे। भोज के दौरान माओ ने खाते-खाते बहुत मासूमियत से चॉपस्टिक से अपनी प्लेट से खाने का एक कौर उठा कर राधाकृष्णन की प्लेट में रख दिया। माओ को इसका अंदाजा ही नहीं था कि राधाकृष्णन पक्के शाकाहारी हैं। राधाकृष्णन ने भी माओ को यह आभास नहीं होने दिया कि उन्होंने कोई नागवार चीज की है। उस समय राधाकृष्णन की उंगली में चोट लगी हुई थी। चीन की यात्रा से पहले कंबोडिया के दौरे के दौरान उनके एडीसी की गलती की वजह से उनका हाथ कार के दरवाजे के बीच आ गया था और उनकी उंगली की हड्डी टूट गई थी। माओ ने इसे देखते ही तुरंत अपना डॉ. बुलवाया और उनकी नए सिरे से मरहम पट्टी करवाई।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 13 May 2021 14:07:11 +0530</pubDate>
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                <title>मेरा जन्मदिन मेरे लिए गौरवपूर्ण सौभाग्य है</title>
                                    <description><![CDATA[आखिर हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है और इन दिन को मनाने के पीछे क्या महत्व है। भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन (5 सितंबर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 1962 से शिक्षक दिवस के रूप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/sarvepalli-radhakrishnan-birthday-is-great-fortune/article-18154"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/sarvepalli-radhakrishnan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आखिर हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है और इन दिन को मनाने के पीछे क्या महत्व है। भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन (5 सितंबर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 1962 से शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने अपने छात्रों से जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जताई थी। देश के पहले उप-राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था, वे बचपन से ही किताबें पढ़ने के शौकीन थे और स्वामी विवेकानंद से काफी प्रभावित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">जब डॉ. एस राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने तो उनके कुछ छात्र व मित्र उनके पास पहुंचे और उनसे अनुरोध किया कि वे उन्हें अपना जन्मदिन मनाने की अनुमति दें। उन्होंने उत्तर दिया कि मेरे जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय इस 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो यह मेरे लिए गौरवपूर्ण सौभाग्य होगा। डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बचपन से ही मेधावी थे। उन्होंने अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से विश्व को दर्शन-शास्त्र से परिचित कराया। वे समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे। डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा में कट्टर विश्वास रखते थे, और जाने-माने विद्वान, राजनयिक और आदर्श शिक्षक थे। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वह एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। उनको अध्यापन के पेशे से गहरा प्यार था।</p>
<p style="text-align:justify;">डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को स्वतन्त्रता के बाद संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया था। सन 1949 में इन्हें मास्को में भारत का राजदूत चुना गया। डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 13 मई 1952 से 12 मई 1962 तक भारत के उप-राष्ट्रपति रहे। वे 13 मई 1962 से 13 मई 1967 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। वह स्वतंत्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। उनकी मृत्यु 86 वर्ष की आयु में 17 अप्रैल 1975 को हुई। शिक्षा और राजनीति में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए राधाकृष्णन को वर्ष 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया था। तब से उनकी जयंती यानी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2020 16:24:18 +0530</pubDate>
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