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                <title>Shah Satnam Singh Ji - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Shah Satnam Singh Ji RSS Feed</description>
                
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                <title>चोर को दी अनोखे तरीके से चोरी की आदत छोड़ने की शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[Shri Jalalana Sahib: गुरगद्दी पर बिराजमान होने से पहले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज श्री जलालआणा साहिब में अपने खेतों की संभाल व निगरानी खुद करते थे। एक बार आपजी के खेत में चनों की फसल की चोरी होने लगी। परम पिता जी ने निगरानी शुरू की व एक दिन किसी व्यक्ति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-thief-was-taught-a-unique-way-to-give-up-the-habit-of-stealing/article-59849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/shah-satnam-singh-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shri Jalalana Sahib: गुरगद्दी पर बिराजमान होने से पहले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज श्री जलालआणा साहिब में अपने खेतों की संभाल व निगरानी खुद करते थे। एक बार आपजी के खेत में चनों की फसल की चोरी होने लगी। परम पिता जी ने निगरानी शुरू की व एक दिन किसी व्यक्ति को चोरी चोरी फसल चुराते देख लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">चोर ने चनों की भरौटी बांध ली लेकिन मुफ्त के माल के लालच में उस चोर ने अधिक फसल काट दी कि वह भरौटी उससे उठाई ही नहीं गई। परम पिता जी धीरे धीरे उसके पास पहुंच गए। चोर आप जी को देखकर घबरा गया। आप जी ने उसे हौंसला दिया और न डरने के लिए कहा। परम पिता जी ने उसे फरमाया कि इस भरौटी की दो भरौटियां बना लो और हम एक-एक कर उठा लेते हैं। Shri Jalalana Sahib</p>
<p style="text-align:justify;">चोर चाहता था कि यह दोनों भरौटियां आप जी ने (परम पिता जी) के घर ले जाई जाएं। परम पिता जी फरमाया, ‘‘नहीं यह आपके हिस्से की हैं और आपके घर पर ही लेकर चलेंगे’’। परम पिता जी अपने पवित्र कर कमलों के साथ उस भरौटी को उसके घर छोड़कर आए। जब परम पिता जी उस व्यक्ति के घर से वापिस आने लगे तो उसने आप जी से माफी मांगी व आगे से कभी भी चोरी नहीं करने का वायदा किया। पूजनीय परम पिता जी महानता वर्णन से परे है, जिनकी दयालता के कारण न सिर्फ चोर को माफ किया बल्कि उसे चोरी की बुरी आदत छोड़ने के भी काबिल बनाया।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:–  </strong><a title="Hair Fall In Monsoon: झड़ते बालों की समस्या से पाना है छुटकारा, तो रोजाना करें इन खाद्य पदार्थो का सेवन" href="http://10.0.0.122:1245/if-you-want-to-get-rid-of-the-problem-of-hair-fall-then-consume-these-foods-daily/">Hair Fall In Monsoon: झड़ते बालों की समस्या से पाना है छुटकारा, तो रोजाना करें इन खाद्य पदार्थो का सेवन</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jul 2024 17:03:53 +0530</pubDate>
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                <title>‘‘बेटा, चिंता न करो, मालिक के नाम का सुमिरन करो। मालिक तुम्हें तंदरूस्त पुत्र देगा।’’</title>
                                    <description><![CDATA[मैं अत्यंत दु:खी थी क्योंकि मेरे तीन बच्चे एक के बाद एक पैदा होते ही मर गए थे और मायके में मेरे माता-पिता जीवित नहीं थे। मैंने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से नाम-शब्द लिया हुआ था। दुनिया वाले अक्सर मुझे ताने देते थे कि तुम डेरा सच्चा सौदा दरबार में जाती हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/miracle-happened-with-jarnail-kaur-by-shah-satnam-singh-ji/article-35989"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/shah-satnam-singh-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मैं अत्यंत दु:खी थी क्योंकि मेरे तीन बच्चे एक के बाद एक पैदा होते ही मर गए थे और मायके में मेरे माता-पिता जीवित नहीं थे। मैंने पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज से नाम-शब्द लिया हुआ था। दुनिया वाले अक्सर मुझे ताने देते थे कि तुम डेरा सच्चा सौदा दरबार में जाती हो तो गुरू जी तुुम्हें संतान क्यों नहीं देते? ये ताने सुनकर मैं अपनी किस्मत को कोसती रहती थी परंतु सतगुरू के प्रति मेरी श्रद्धा अटूट थी। घर-परिवार वाले मुझे पाखण्डियों के पास जाने को मजबूर करते लेकिन पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज की दया-मेहर से मैं उनके पास नहीं गई। एक दिन अत्यंत दुखी मन से पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज को पत्र के माध्यम से अपना सारा दु:ख सुनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ दिन बाद पूजनीय परम पिताजी ने मुझे अपने पास बुला लिया और पावन वचन फरमाए, ‘‘बेटा, चिंता न करो, मालिक के नाम का सुमिरन करो। मालिक तुम्हें तंदुरूस्त पुत्र देगा।’’ इसके बाद पूजनीय परम पिता जी ने मुझे अपने पवित्र कर कमलों से प्रसाद दिया और मैं खुशी-खुशी अपने घर आ गई। प्यारे सतगुरू के वचनानुसार मैंने सुमिरन किया और अब मेरे तीन पुत्र हैं और बिल्कुल तंदुरूस्त हैं। मेरे घर में खुशियों के चिराग जलाकर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने हमें सबकुछ दिया। हम प्यारे सतगुरू जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हुए कहते हैं कि सतगुरू सबकी सुनता है।<br />
<strong>-श्रीमती जरनैल कौर, कोटकपूरा(पंजाब)</strong></p>
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                <pubDate>Wed, 27 Jul 2022 20:31:12 +0530</pubDate>
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                <title>अपने शिष्यों की हरदम करते संभाल पूज्य परम पिता जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ डेस्क)। एक बार गांव हुसनर जिला मुक्तसर साहिब में सत्संग का कार्यक्रम था और प्यारे मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने प्रेमी गुरांदित्ता सिंह के घर पर अपने पावन चरण रखने थे क्योंकि परिवार जनों ने पूजनीय शहनशाह जी की पावन हजूरी में प्रार्थना करके पहले ही मंजूरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/shah-satnam-singh-ji-taking-care-of-his-disciples/article-32487"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/shah-satnam-singh-ji-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ डेस्क)।</strong> एक बार गांव हुसनर जिला मुक्तसर साहिब में सत्संग का कार्यक्रम था और प्यारे मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने प्रेमी गुरांदित्ता सिंह के घर पर अपने पावन चरण रखने थे क्योंकि परिवार जनों ने पूजनीय शहनशाह जी की पावन हजूरी में प्रार्थना करके पहले ही मंजूरी ले रखी थी। सत्संग के निश्चित दिन से एक दिन पहले प्रेमी का छोटा लड़का जलौर सिंह शाम के वक्त बच्चों के साथ खेल रहा था। जलौर सिंह अचानक ही तख्तपोश के ऊपर से नीचे गिर गया। नीचे एक खूंटा था जो जलौर सिंह के सिर में लग गया। सिर में से खून निकलने लगा। काफी गहरा जख्म हो गया। जिसमें से खून ही खून निकल रहा था। सारे परिवार ने कुल मालिक दयालु सच्चे सतगुरू जी के चरणों में विनती की, नारे लगाए तो खून रूक गया। डॉक्टर से पट्टी करवा ली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी रात गुरांदित्ता सिंह जी की पूरी तरह स्वस्थ भैंस जो कि बयाने वाली थी, खड़ी-खड़ी एकदम से नीचे गिर गई और उसी समय दम तोड़ गई। सारा परिवार हैरान और परेशान था कि यह क्या हो गया? सत्संग की खुशी की जगह परिवार को गम व परेशानी ने आ घेरा। एक ही दिन में दो दुर्घटनाएं हो गई, जो परिवार के लिए चिंता का कारण बन गई। अगले दिन प्रात: ही भैंस को उठवा दिया गया और घर की पूरी सफाई करवा दी गई। पूजनीय परम पिता जी प्रात: 9:00 बजे प्रेमी जी के घर पधारे। सारा परिवार तथा गांव की साध-संगत ने पूजनीय परम पिता जी का लाख-लाख धन्यवाद किया। गुरांदित्ता सिंह व गांव के कुछ प्रेमियों ने बहन चंद कौर (गुरांदित्ता सिंह की पत्नी) को कहा कि पूजनीय परम पिता जी के पास कोई अर्ज न करे और न ही लड़के की चोट और न ही भैंस के मरने के बारे में बात करे।</p>
<p style="text-align:justify;">जब बहन चंद कौर ने कुल मालिक पूजनीय परम पिता जी के आगे ‘‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’’ का नारा लगाया तो अर्न्तयामी दातार जी ने फरमाया, ‘‘बेटा! बन्दे दे सिर वट्टे कालू नूं पशु दा सिर दित्ता चंगा कि बन्दे दा सिर दित्ता चंगा।’’ यह वचन सुनते ही सारे परिवार का मन शांत हो गया। सारे परिवार ने पूजनीय परम पिता जी का लाख-लाख शुक्राना किया। सारी साध-संगत खुशी में नारे लगा रही थी। इस प्रकार पूर्ण सतगुरू अपनी दया मेहर से जीवों के कर्म को सूली से सूल कर देते हैं, जिस तरह कि उपरोक्त करिश्में में हुआ है। सच्चे सतगुरू जी के उपकार का बदला तो जीव दे ही नहीं सकता।</p>
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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 15:18:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>परम पिता जी की साक्षात रहमत-प्रेमी का गुम हुआ लड़का खुद घर वापिस लौटा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी प्रीतम दास बस्ती अलीपुर, अमृतसर रोड, मोगा से वाली दो जहान पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपार दया-मेहर के बारे में इस प्रकार लिखता है:- सन् 1977 की बात है। एक दिन मेरा दस वर्षीय लड़का अशोक कुमार घर से नाराज होकर कहीं चला गया। मैंने दिन-रात एक करके अपने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/missing-boy-of-dera-devotee-himself-returned-home/article-30148"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/shah-satnam-singh-ji-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रेमी प्रीतम दास बस्ती अलीपुर, अमृतसर रोड, मोगा से वाली दो जहान पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपार दया-मेहर के बारे में इस प्रकार लिखता है:-</strong></p>
<p style="text-align:justify;">सन् 1977 की बात है। एक दिन मेरा दस वर्षीय लड़का अशोक कुमार घर से नाराज होकर कहीं चला गया। मैंने दिन-रात एक करके अपने पुत्र की सब जगह तलाश की। अपनी सभी रिश्तेदारियों में पता करने के बाद मैंने उसे पहाड़ों में स्थित चिंतपूर्णी जैसे कई मंदिरों तथा लुधियाना जैसे कई बड़े-बड़े शहरों में भी तलाश किया परंतु कहीं से भी मुझे अपने पुत्र का पता न चला। इस प्रकार मैं दो दिनों के बाद निराश होकर घर लौट आया।</p>
<p style="text-align:justify;">मेरा सारा परिवार पहले देवी-देवताओं, भूत-प्रेतों, पूछताछ और चौकियां आदि भरने में विश्वास रखता था। मेरे अधिकतर रिश्तेदार व स्नेही निगुरे थे। इस बात को लेकर मुझे उन लोगों के बहुत ताने सुनने पड़े कि उसने अपने इष्ट को छोड़ दिया है इसीलिए उस पर यह भीड़ बनी है। मुझे अपने मुर्शिद पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज पर पूर्ण विश्वास था परंतु उन लोगों के लगातार तानों से परेशान होकर न चाहते हुए भी मुझे अगले दिन उनके साथ जाना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">उसी दिन शाम को मैं अपने रिश्तेदारों के साथ अमृतसर एक गुरूघर में लंगर छक रहा था तो अचानक मुझे अपने सतगुरू पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की बहुत याद आई। अगले ही पल वाली दो जहान मेहरबान दातार जी प्रत्यक्ष उज्जवल नूरी स्वरूप में आकर मेरे सामने खड़े हो गए। दूध जैसे सफेद पहरावे में सतगुरू पूजनीय परम पिता जी ने मुझे आशीर्वाद देते हुए फरमाया, ‘‘बेटा! घबराण दी कोई गल्ल नहीं। इक्क-अध्धे दिन दा ही कम्म है।’’ इस प्रकार सच्चे पातशाह जी मुझे अपना भरपूर आशीर्वाद देते हुए एकदम अलोप हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुझे इस बात का विश्वास हो गया कि मेरा लड़का जहां भी है पूरी तरह से सुरक्षित है। अगले ही दिन मैं अपने एक साथी प्रेमी मुलखराज को साथ लेकर अपने सतगुरू जी के दर्शनों के लिए डेरा सच्चा सौदा सरसा आ गया। उस समय सुबह की मजलिस लगी हुई थी। मेहरबान दातार जी शाही स्टेज पर बिराजमान थे। शब्द-वाणी निरंतर चल रही थी तथा पूजनीय बेपरवाह जी अपनी पावन दृष्टि व वचनों से साध-संगत को निहाल कर रहे थे। मैंने आगे बढ़कर सच्चे पातशाह जी के पवित्र चरण-कमलों में अपने लड़के के बारे में प्रार्थना की। इस पर वाली दो जहान, सर्व-सामर्थ पूजनीय परम पिता जी ने वचन फरमाया, ‘‘भाई! जे किसे प्रेमी दा कष्ट चार-पंज साल दा होवे अते उसदा निबेड़ा तिन्न-चार दिनां विच्च ही हो जावे तां उसनूं घबराउणा नहीं चाहिदा। भाई! तुसीं आपणे घर जाओ। कम्म अज ही निबड़ जावेगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">स्पष्ट है कि मुझे अपने उसी लड़के की तलाश में चार-पांच साल तक कष्ट उठाना था परंतु महान् परोपकारी दातार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने मेरे उस लम्बे कष्ट व गम को अपनी दया-मेहर से केवल तीन-चार दिनों में ही खत्म कर दिया। उसी दिन शाम को (यानि चौथे दिन) ही मेरा लड़का अशोक कुमार घर पहुंच गया। लड़के ने बताया कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज खुद उसे घर छोड़कर गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>इस प्रकार दो जहानों के वाली सतगुरू पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने मुझे अपनी रहमत द्वारा उस चिंता से मुक्त किया। लड़के को अपनी आंखों के सामने देखकर मेरे सारे परिवार तथा रिश्तेदार-संबंधियों ने कुल मालिक पूजनीय परम पिता जी का बहुत-बहुत धन्यवाद किया।</em></p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                <pubDate>Thu, 20 Jan 2022 15:28:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सतगुरू जी के प्यार की मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[सतगरू हमेशा ही अपने शिष्य के पास रहता है जिस तरह कूंज अपने बच्चों को छोड़कर आसमान में उड़कर दूर चली जाती है, परंतु अपना ध्यान अपने बच्चों में ही रखती है व अपने अंतर ह्रदय के साथ उनकी संभाल करती है, या जिस तरह कछुआ अपने अंडे खुश्की में देकर खुद पानी में रहता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h3 style="text-align:center;">सतगरू हमेशा ही अपने शिष्य के पास रहता है</h3>
<p style="text-align:justify;">जिस तरह कूंज अपने बच्चों को छोड़कर आसमान में उड़कर दूर चली जाती है, परंतु अपना ध्यान अपने बच्चों में ही रखती है व अपने अंतर ह्रदय के साथ उनकी संभाल करती है, या जिस तरह कछुआ अपने अंडे खुश्की में देकर खुद पानी में रहता है, परंतु अपने अंडों का ध्यान अपनी अंतर तव्वजो के साथ रखते हुए पकाता रहता है व जिस तरह बछड़े वाली गाय बाहर चारा खाने चली जाती है परंतु अपना ध्यान पीछे अपने बच्चे में रखती है। इसी तरह सतगुरू अपने शिष्य को अपनी नजर में रखकर उसकी पालना करता है व उसे अपने अंतर ह्रदय के साथ संभालता रहता है।</p>
<h3 style="text-align:center;">जिसकी चीज थी उसी के पास चली गई</h3>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय मस्ताना जी ने इस डेरे में अक्तूबर सन् 1957 में सत्संग मंजूर कर दिया। उस समय तक डेरा मुकम्मल हो चुका था। बेपरवाह जी ने डेरे का नाम ‘मौजपुर धाम’ रख दिया। उस सत्संग पर बहुत बड़ी संख्या में साध-संगत आई। पूजनीय शहनशाह जी ने सत्संग में कोट, कंबल, गर्म कपड़े व जर्सियां आदि बहुत सामान सेवादारों में बांटा। उस समय पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज(गुरूगद्दी से पहले)भी सत्संग में आए हुए थे। एक कविराज की ओर से भजन बोलने पर शहनशाह मस्ताना जी ने उसे अपना कोट उतार कर बख्श दिया था। परंतु वह कविराज खुश न हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;"> बाद में उसने साध-संगत में कह दिया, ‘‘बाबा जी ने मैनूू रूपये तो दिए नहीं।’’ उसने कोट की बिल्कुल भी कद्र नहीं की। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने कविराज की सारी बातें सुन ली। पूजनीय परम पिता जी ने किसी श्रद्धालु द्वारा यह कोट 13 रूपये में खरीद लिया व कहा, ‘‘अगर 100 रूपये भी मांगता तो भी हम दे देते, यह अनमोल है।’’ जब इस बात का पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज को पता चला तो वह बहुत खुश हुए व फरमाया,‘‘जिस की चीज थी उसके पास चली गई।’’</p>
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                                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Dec 2020 14:59:41 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>परम पिता जी ने डेरा श्रद्धालु की दिली इच्छा की पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[एक बार राजस्थान में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज आराम करने वाले घर में पधारे हुए थे। बाहर बैठे सेवादारों के पास करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग अपनी 14-15 साल की पोती के साथ दूध लेकर आ गया। पूछने पर पता चला कि उस बुजुर्ग ने पूज्य हजूर बाबा सावण सिंह जी महाराज जी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">एक बार राजस्थान में सत्संग था। पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज आराम करने वाले घर में पधारे हुए थे। बाहर बैठे सेवादारों के पास करीब 80 वर्षीय बुजुर्ग अपनी 14-15 साल की पोती के साथ दूध लेकर आ गया। पूछने पर पता चला कि उस बुजुर्ग ने पूज्य हजूर बाबा सावण सिंह जी महाराज जी से नाम शब्द लिया हुआ था व उसकी पोती ने पूज्य परम पिता शाह सतनाम जी महाराज जी से नाम दान लिया हुुआ थ। वह बुजुर्ग कहने लगा कि हमें पूज्य परम पिता जी से मिलना है। सेवादार कहने की कि परम पिता जी अभी बाहर घूमने जाएंगे व जब वापिस आएं तो आप पिता जी से मिल लेना। बुजुर्ग कहने लगा,‘‘नहीं जी! हमें तो अभी मिलना है’’ बातों-बातों में उन्होंने बताया, ‘‘एक बार पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज ने मुझे कहा था कि आपको फिर कभी मिलेंगे। फिर मैं शराब पीने लग गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">अब मुझे मेरी पोती लेकर आई है। मैंने पूजनीय परम पिता से माफी भी लेनी है।’’वह मिन्नतें करने लगा कि मुझे परम पिता जी से तुरंत मिला दो। मैं पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज जी के लिए घर से हलवा बनाकर लाया हूं। इतने में पूजनीय परम पिता जी ने एक सेवादार को अंदर बुलाया व पूछने लगा, ‘‘क्या बात है?’’ उस सेवादार ने सारी बात पूजनीय परम पिता जी बताई। परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘उनको अंदर भेज दो।’’ वह अंदर चले गए व बैठते ही उस बुजुर्ग ने अपना सिर पूजनीय परम पिजा जी के चरणों में रख दिया। जब पास खड़े सेवादार ने उसे थोड़ा पीछे करना चाहा तो पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया,‘‘कोई बात नहीं भाई! इसे अपनी कसर निकाल लेने दो।’’ फिर वह बुजुर्ग पूरे वैराग्य में आ गया व रो-रोक कर उसके मन का बोझ पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज जी के दर्शन करने से हलका हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी उसे अपनी रहमत से निहाल करते फरमाया,‘‘हां भाई! ठीक है, खुश है अब।’’ उसने कहा, ‘‘हां पिता जी!’’ मैं तो काफी समय से शराब पीता रहा हूं, मुझे माफ कर दो जी। ‘‘परम पिता जी ने फरमाया, कोई बात नहीं बेटा, माफ है, माफी के लिए ही तुझे यहां बुलाया है।’’ फिर परम पिता जी उस बर्तन की तरफ इशारा कर फरमाने लगे, ‘‘यह क्या है भाई लगता है हलवा है।’’ फिर पूजनीय परम जी ने उसकी बेहद श्रद्धा व मालिक प्रति उसके विश्वास को और मजबूत करने के लिए वह हलवा खुद भी ग्रहण किया व सेवादारों को भी खिलाया। इस तरह पूजनीय परम पिता ने पूजनीय बाबा सावण सिंह महाराज जी के वचनों को पूरा किया।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/inspiration/shah-satnam-ji-fulfilled-the-heartfelt-wishes-of-the-dera-devotee/article-18210</link>
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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2020 11:29:41 +0530</pubDate>
                
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