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                <title>National Education Policy - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>National Education Policy RSS Feed</description>
                
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                <title>National Education Policy: &amp;#8216;रूचिनुसार शैक्षणिक विकल्प चुनने का अवसर प्रदान करती है राष्ट्रीय शिक्षा नीति&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : नीति से परिवर्तन तक पर व्याख्यानमाला National Education Policy: हनुमानगढ़। टाउन स्थित राजकीय नेहरू मेमोरियल स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान उच्च शिक्षा की हनुमानगढ़ इकाई के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : नीति से परिवर्तन तक विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/national-education-policy-provides-an-opportunity-to-choose-educational-options-as-per-ones-interest/article-74082"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/national-education.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : नीति से परिवर्तन तक पर व्याख्यानमाला</h3>
<p style="text-align:justify;">National Education Policy: हनुमानगढ़। टाउन स्थित राजकीय नेहरू मेमोरियल स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान उच्च शिक्षा की हनुमानगढ़ इकाई के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : नीति से परिवर्तन तक विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. रामपाल अहरोदिया ने की। आयोजन में मुख्य वक्ता महासंघ के निजी शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक डॉ. संतोष राजपुरोहित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल प्रस्तावना, उद्देशिका एवं शिक्षा नीति को लागू करने में आ रहे अवरोधों पर चर्चा की। Hanumangarh News</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. राजपुरोहित ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 छात्र-छात्राओं को अपने रूचिनुसार शैक्षणिक विकल्प चुनने का अवसर प्रदान करती है। यह नीति छात्र-छात्राओं को कौशल पूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रवक्ता है, न कि शिक्षित बेराजगारों की भीड़ पैदा करने की। इस नीति की प्रस्तावना छात्र-छात्रा के मन पटल पर भारतीय गौरव एवं संस्कृति को आत्मसात करते हुए कौशल पूर्ण शिक्षा को कंठ करना है। महासंघ के जिला सचिव डॉ. रोहिताश वशिष्ठ ने शिक्षा नीति की पाठ्यचर्या पर चर्चा करते हुए बताया कि इस नीति में स्नातक पाठ्यक्रम चार वर्ष की परिचर्चा है। इसमें प्रथम वर्ष पश्चात प्रमाण पत्र, द्वितीय वर्ष पश्चात डिप्लोमा, तृतीय वर्ष पश्चात स्नातक उपाधि एवं चतुर्थ वर्ष में विषय में शोध को बढ़ावा दिया गया है। चतुर्थ वर्ष पश्चात विद्यार्थी इन्टीग्रेटेड उपाधि प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार स्नातकोत्तर में अंतिम वर्ष में विषय को अधिक प्रायोगिक एवं शोधपूर्ण किए जाने का प्रावधान है। डॉ. वषिष्ठ ने कहा कि छात्र-छात्रा की निपुणता किसी भी शैक्षणिक विधा में तभी हो सकती है जब वह उसकी अभिरूचि अनुसार हो। इसका प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में किया गया है। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. विनोद खुड़ीवाल ने किया। इस मौके पर बहुधा छात्र-छात्राएं एवं सकाय सदस्य मौजूद रहे। Hanumangarh News</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 14:48:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>New Education Policy-2020: देश की शिक्षा व्यवस्था में होंगे अहम बदलाव!</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगी नई शिक्षा नीति-2020 New Education Policy-2020: हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नई दिल्ली सहित देश के कई विश्वविद्यालयों ने नई शिक्षा नीति 2020 लागू कर दी है। यह शिक्षा नीति लागू होने के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में कई अहम बदलाव आने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-education-policy-2020-will-be-no-less-than-a-challenge-for-teachers/article-56353"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/new-education-policy-2020.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">शिक्षकों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगी नई शिक्षा नीति-2020</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>New Education Policy-2020: हिसार (सच कहूँ/संदीप सिंहमार)।</strong> केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नई दिल्ली सहित देश के कई विश्वविद्यालयों ने नई शिक्षा नीति 2020 लागू कर दी है। यह शिक्षा नीति लागू होने के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में कई अहम बदलाव आने की संभावना है। हो सकता है शुरुआती दौर में विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़े, लेकिन जब वास्तविक तौर पर नई शिक्षा नीति को लागू किया जाएगा तो शिक्षा में बेहतर बदलाव देखने को मिलेंगे। शुरुआती दौर में टीचर्स ट्रेनिंग का अभाव नई शिक्षा नीति को जरूर प्रभावित कर सकता है। National Education Policy</p>
<h3 style="text-align:justify;">समग्र और बहु-विषयक शिक्षा</h3>
<p style="text-align:justify;">नई नीति शिक्षा के प्रति अधिक समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण की ओर बदलाव पर जोर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि छात्रों के पास विषयों और पाठ्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला चुनने की लचीलापन होगी,जिससे उन्हें अपनी रुचियों और प्रतिभाओं को अधिक स्वतंत्र रूप से तलाशने का मौका मिलेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कौशल विकास पर जोर | New Education Policy</h3>
<p style="text-align:justify;">यह नीति 21वीं सदी के कौशल जैसे आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, संचार और सहयोग विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित करती है। कौशल-आधारित शिक्षा की ओर इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को कार्यबल की बदलती जरूरतों के लिए अधिक अनुकूलनीय और बेहतर तैयार करना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पाठ्यचर्या और मूल्यांकन में सुधार</h3>
<p style="text-align:justify;">नई नीति पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधार का प्रस्ताव करती है। इसका मतलब यह हो सकता है कि रटकर सीखने से हटकर अधिक अनुभवात्मक और परियोजना-आधारित शिक्षण दृष्टिकोण की ओर कदम बढ़ाया जाए। मूल्यांकन प्रक्रियाएँ भी अधिक सतत और व्यापक हो सकती हैं, जो केवल शैक्षणिक प्रदर्शन के बजाय छात्र के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिक्षक प्रशिक्षण की कमी आड़े आएगी | National Education Policy</h3>
<p style="text-align:justify;">नई शिक्षा नीति में शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक कौशल और उपकरण प्रदान करके शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना है। पर नीति लागू करने से पहले शिक्षकों की ट्रेनिंग का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">प्रौद्योगिकी का एकीकरण</h3>
<p style="text-align:justify;">यह नीति सीखने के परिणामों को बढ़ाने और शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के लिए शिक्षा में प्रौद्योगिकी के एकीकरण को बढ़ावा देती है। इसका मतलब शिक्षण, सीखने और मूल्यांकन के लिए डिजिटल उपकरणों और प्लेटफार्मों को अपनाना, साथ ही पारंपरिक कक्षा निर्देश के पूरक के लिए ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग करना हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देती है। यह देश में नवाचार को बढ़ावा देने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समावेशी शिक्षा पर बल</h3>
<p style="text-align:justify;">नई शिक्षा नीति विकलांग छात्रों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों सहित विविध शिक्षार्थियों की जरूरतों को को पूरा करके समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी केंद्रित है। सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करने और उनकी समग्र भलाई सुनिश्चित करने के प्रयास नीति के प्रमुख तत्व हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">लचीला और आजीवन सीखना | National Education Policy</h3>
<p style="text-align:justify;">नीति में अधिक लचीले और आजीवन सीखने के दृष्टिकोण की कल्पना की गई है। जिससे विद्यार्थियों को अपने जीवन और करियर के विभिन्न चरणों में शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति मिलती है। इसमें पूर्व शिक्षा की मान्यता, कौशल और ज्ञान के लिए क्रेडिट की स्थापना और वयस्क शिक्षा और व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना शामिल है।</p>
<p><a title="Amarnath Yatra 2024: अमरनाथ यात्रा को लेकर आई जरूरी अपडेट!" href="http://10.0.0.122:1245/important-update-regarding-amarnath-yatra/">Amarnath Yatra 2024: अमरनाथ यात्रा को लेकर आई जरूरी अपडेट!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Apr 2024 18:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>National Education Policy: बेहतर प्रशिक्षण से मिलेगा नई शिक्षा नीति का लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[National Education Policy: शिक्षा ज्ञान रूपी ऐसा हथियार है, जिसके बल पर कोई भी देश उन्नति की ओर अग्रसर होता है। पर जिस प्रकार किसी भी हथियार को चलाने के लिए विशेष ट्रेनिंग की जरूरत होती है,उसी प्रकार नई शिक्षा नीति को देशभर में लागू करने के लिए बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था करने की सख्त […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-education-policy-will-benefit-from-better-training/article-50628"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/national-eduication-policy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">National Education Policy: शिक्षा ज्ञान रूपी ऐसा हथियार है, जिसके बल पर कोई भी देश उन्नति की ओर अग्रसर होता है। पर जिस प्रकार किसी भी हथियार को चलाने के लिए विशेष ट्रेनिंग की जरूरत होती है,उसी प्रकार नई शिक्षा नीति को देशभर में लागू करने के लिए बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था करने की सख्त जरूरत है। पुराने ढर्रे पर चल रही प्रशिक्षण व्यवस्था नई शिक्षा नीति लागू करने में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। आज भारत देश चाहे नई शिक्षा नीति बनने के 3 वर्ष पूरे कर रहा हो, इस उपलक्षय में दिल्ली में प्रगति मैदान में अखिल भारतीय शिक्षा सम्मेलन भी चल रहा है। इस शिक्षा सम्मेलन का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया, यह अच्छी बात है।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में यह पल देशभर के लिए किसी बड़ी खुशी से कम नहीं है। लेकिन नई शिक्षा नीति में जिस कौशल विकास की बात कही गई है, उसे लागू करना देशभर के शिक्षण संस्थानों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह चुनौती सिर्फ और सिर्फ ट्रेनिंग की वजह से है, क्योंकि हमारे देश में नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार कर इसे लागू करने के लिए राज्यों को दे दिया गया है। पर इसे लागू करने वाले शिक्षकों को नई शिक्षा नीति की ट्रेनिंग कैसे दी जाएगी, इसकी व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है? दूसरी तरफ पहले से ही देश के सभी जिलों में जिला स्तर पर चल रहे प्रशिक्षण संस्थानों में वही पुराने शिक्षक वही पुराना ढर्रा है। इसमें अभी तक कोई बदलाव न कर पाना चिंता का विषय है। यदि वर्तमान स्थिति की बात करें तो नई शिक्षा नीति के तहत प्रशिक्षण की व्यवस्था अभी तक देशभर के कुछ ही शिक्षण संस्थान व विश्वविद्यालय कर पाए हैं। सिर्फ इतना बदलाव देखने को मिला है। National Education Policy</p>
<p style="text-align:justify;">डिप्लोमा इन एजुकेशन व बैचलर इन एजुकेशन के स्थान पर नई शिक्षा नीति के कोर्स लागू किए जा रहे हैं। लेकिन 90 फीसदी शिक्षण संस्थानों में अभी भी डिप्लोमा इन एजुकेशन, बैचलर इन एजुकेशन व मास्टर इन एजुकेशन उन्हीं पुराने तौर-तरीकों से चलती आ रही है, जो वर्षों पुराने हैं। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षण संस्थानों में जहां से देश भर के भावी शिक्षक प्रशिक्षण लेते हैं, उनके शिक्षकों को पहले प्रशिक्षण देने की सख्त जरूरत है। जब तक उन्हें नई शिक्षा नीति के बारे में विवरणात्मक रूप से नहीं पता होगा तब तक वे भावी शिक्षकों को उचित ट्रेनिंग नहीं दे सकेंगे। देश की राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में राष्ट्रीय स्तरीय आखिल भारतीय शिक्षा सम्मेलन चल रहा है। उससे इस सम्मेलन में आने वाले शिक्षकों व विद्यार्थियों को फायदा तो मिलेगा। लेकिन जब तक प्रशिक्षण के लिए बनाए गए सभी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को शिक्षा नीति के अनुरूप प्रशिक्षित नहीं किया जाएगा तब तक नई शिक्षा नीति के फायदों की उम्मीद नहीं की जा सकती। National Education Policy</p>
<p style="text-align:justify;">नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद लागू करने की प्रक्रिया देशभर के राज्यों में इसी प्रकार चलती रहेगी। पर इस नई शिक्षा नीति को मूर्त रूप देने के लिए देश के शिक्षा मंत्रालय व राज्यों के शिक्षा मंत्रालयों को प्रशिक्षण व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। नई शिक्षा नीति के अनुरूप एक ट्रेनिंग सेल का गठन कर आॅनलाइन या आॅफलाइन मोड में शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट भविष्य की शिक्षा के लिए बहुत अच्छा तैयार किया गया है। यदि इस शिक्षा नीति के नियमों के तहत पढ़ाई करवाई जाए तो वास्तव में भारत देश की तस्वीर बदल सकती है। क्योंकि यही एक ऐसी शिक्षा नीति है,जिसमें विद्यार्थियों को अपने बलबूते पर अपनी मर्जी के अनुसार विषय चुनने की इजाजत दी गई है। पर इस बात का भी ख्याल रखना होगा जो विद्यार्थी भविष्य में शिक्षक बनना चाहते हैं,उनके विषय संयोजन पर भी ध्यान देना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विषय संयोजन के बिना शिक्षक बनने की चाह अधूरी रह सकती है। नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग द्वारा करवाए गए एक सर्वे के अनुसार देशभर में 60 फीसदी भावी शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने स्नातक स्तरीय डिग्री हासिल करने के बाद डिप्लोमा इन एजुकेशन या बैचलर इन एजुकेशन तो उत्तीर्ण कर ली है, पर उनके पास जानकारी ना होने की वजह से सब्जेक्ट संयोजन नहीं है। यही सब्जेक्ट संयोजन शिक्षक बनने के लिए सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उदाहरण के तौर पर यदि किसी को सामाजिक विज्ञान का अध्यापक बनना है तो उसके पास इतिहास व भूगोल में से कोई एक विषय होना अनिवार्य है। इसके अलावा इतिहास,भूगोल, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान व लोक प्रशासन में से दूसरा विषय चुनना होता है। यदि किसी भी शिक्षक के पास इन विषयों का संयोजन नहीं है तो वह जब तक शिक्षक नहीं बन सकता जब तक वह अपने सब्जेक्ट का संयोजन पूरा नहीं करता। अब यहां बात आती है सब्जेक्ट संयोजन कैसे बने? ऐसे विद्यार्थी जिनके पास सब्जेक्ट कंबीनेशन नहीं होता उन्हें दोबारा फिर एडिशनल तौर पर स्नातक स्तरीय पढ़ाई करनी पड़ती है। इसके बाद जाकर वे शिक्षक पद के लिए योग्य माने जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा हम नहीं बल्कि हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था कह रही है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने पूरे देश के लिए ऐसे नियम बनाए हैं। इसी नियम को वर्तमान में केंद्र सरकार लागू भी कर चुकी है। स्वायत्त संस्थाएं केंद्रीय विद्यालय संगठन व नवोदय विद्यालय संगठन जैसे स्कूलों में भी शिक्षकों की भर्ती इसी एजुकेशन सिनेरियो के अनुसार हो रही है। यही एक सबसे बड़ी बात है जो भी भावी शिक्षक को बनना चाहता है,उसे बारहवीं/इंटर स्तर पर ही संयोजन के सब्जेक्ट दिए जाने चाहिए ताकि भविष्य में उसे किसी भी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े। शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली में शिक्षा सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर बल दिया की शिक्षा से ही देश का भाग्य बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी यह बात 100 फीसदी सही है। पर बात घूम कर वहीं आती है। प्रशिक्षण… जब तक देश भर के शिक्षण महाविद्यालयों में नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रशिक्षित शिक्षक नहीं होंगे, तब तक नई शिक्षा नीति को लागू करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। भारत देश के पहले विधि मंत्री बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने भी यह बात कही थी कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जिसे जो पिएगा वही दहाड़ेगा। पर यह शेरनी का दूध मिले कैसे? पहली बात तो प्रशिक्षण नहीं है। दूसरी बात वर्तमान में शिक्षा प्रतिवर्ष महंगी होती जा रही है। महंगी शिक्षा गरीब तबके के लोगों व मध्यम स्तर के लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। जब तक आमजन की पहुंच में शिक्षा नहीं होगी, तब तक शिक्षा को पाना बड़ा ही मुश्किल कार्य है। National Education Policy</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. संदीप सिंहमार, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Punjab &amp; Haryana Weather Today: पंजाब हरियाणा में फिर बारिश का अलर्ट, 2 अगस्त से होगी भारी बारिश" href="http://10.0.0.122:1245/punjab-haryana-weather-today/">Punjab &amp; Haryana Weather Today: पंजाब हरियाणा में फिर बारिश का अलर्ट, 2 अगस्त से होगी भारी बारि…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/new-education-policy-will-benefit-from-better-training/article-50628</link>
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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2023 12:00:57 +0530</pubDate>
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                <title>अब सरकारी स्कूलों में भी महकेगी बालवाटिका</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: मुफ्त में मिलेंगी किताबें, वर्दी और बैग जिले के 286 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नौनिहालों को मिलेगा प्रवेश सरसा (सच कहूँ न्यूज)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (Rashtriya Shiksha Niti) को अमलीजामा पहनाने की शिक्षा विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। एनईपी तहत प्रदेशभर के स्कूलों में बाल वाटिका शुरू की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-kindergarten-will-also-smell-in-government-schools/article-46323"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-04/rashtriya-shiksha-niti.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: मुफ्त में मिलेंगी किताबें, वर्दी और बैग</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिले के 286 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नौनिहालों को मिलेगा प्रवेश</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (Rashtriya Shiksha Niti) को अमलीजामा पहनाने की शिक्षा विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। एनईपी तहत प्रदेशभर के स्कूलों में बाल वाटिका शुरू की जा रही हैं। जिसमें खेल आधारित शिक्षा होंगी। ये बाल वाटिका प्राइमरी स्कूलों में शुरू होगी और यहां पर निजी विद्यालयों या प्ले स्कूलों की तर्ज पर नर्सरी कक्षा यानि पहली कक्षा से पहले की कक्षा शुरू होगी। इसके लिए जिले के 286 प्राइमरी स्कूलों का चयन किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्यूं बाल वाटिका शुरू करने की पड़ी जरूरत</h3>
<p style="text-align:justify;">दरअसल पहले सरकारी स्कूलों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। बच्चों को पहली कक्षा में ही दाखिला मिलता था। इसके लिए बच्चे की उम्र साढ़े पांच साल होना अनिवार्य है। मगर स्कूलों में बच्चों के साथ छोटे बच्चे भी काफी संख्या में आते हैं। ऐसे बच्चे अपनी उम्र कम होने के कारण सरकारी स्कूलों में दाखिले से वंचित रह जाते थे। इसी वजह से वह बच्चे बाद में निजी स्कूलों में दाखिला ले लेते थे। यह देखते हुए शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है, ताकि कोई भी बच्चा दाखिले से वंचित नहीं रहे। इसके लिए यह बाल वाटिका ऐसी व्यवस्था की है, ताकि पहली कक्षा से पहले प्री नर्सरी बनाए जाए। इसमें कम उम्र के बच्चों को दाखिला मिल सकें और उनकी पढ़ाई निरंतर जारी रहे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चार स्टेजों में मिलेगी शिक्षा</h3>
<p style="text-align:justify;">सर्वप्रथम फाउंडेशन स्टेज होगी, जिसमें 3 से 8 साल के बच्चों को लिया गया है। इनमें दो साल तक आंगनबाड़ी और एक साल बालवाटिका तथा दो साल पहली कक्षा व दूसरी कक्षा को लिया गया है। यानी कुल पांच साल फाउंडेशन स्टेज में शामिल किए गए है। इस स्टेज का मुख्य मकसद बच्चों के भाषा कौशल और शिक्षण के विकास पर ध्यान देना होगा। दूसरी स्टेज प्रीपेटरी स्टेज होगी। जिसमें 8 साल से लेकर 11 साल तक के बच्चों को शामिल किया है। इसमें कक्षा 3 से लेकर 5 तक के बच्चे सम्मिलित होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षकों का उद्देश्य प्रीपेडरी स्टेज में बच्चों के अंदर भाषा और संख्यात्मक कौशल विकसित करना है तथा इस दौरान विद्यार्थियों को उनकी क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जाएगा। (Rashtriya Shiksha Niti) तीसरी स्टेज है मिडिल स्टेज, जिसमें कक्षा 6 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चे आएंगे। कक्षा 6 से बच्चों को कोडिंग की शिक्षा दी जाएगी और उन्हें व्यवसाय परीक्षण के साथ-साथ इंटर्नशिप का भी मौका दिया जाएगा। अंतिम व चौथी सेकेंडरी स्टेज होगी। जिसमें कक्षा 9 से लेकर कक्षा 12 तक के बच्चे आएंगे। पहले छात्र या छात्राएं साइंस कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम लेते थे। लेकिन अब इसको समाप्त कर दिया गया है। अब छात्र या छात्राएं अपनी इच्छा से सब्जेक्ट को चुन सकते हैं जैसे कि साइंस स्ट्रीम के साथ बच्चा कॉमर्स या फि र कॉमर्स के साथ बच्चा आर्ट्स स्ट्रीम भी ले सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिले के प्राइमरी स्कूलों में बालवाटिका प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। जिसके तहत जिले के करीब 286 प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा से पूर्व छोटे बच्चों की नर्सरी या प्री नर्सरी कक्षाएं लगेगी। यह सरकार का सराहनीय प्रयास है।<br />
<strong>                                                                              – बूटाराम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरसा।</strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">किस खंड में कितने स्कूलों में बनेगी बालवाटिका</h3>
<p style="text-align:justify;">बड़ागुढां में 35, डबवाली में 51, ऐलनाबाद में 19, नाथूसरी चौपटा में 35, ओढां में 36, रानियां में 71, सरसा में 39 को मिलाकर कुल 286 बनते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">साढ़े चार घंटे होगी पढ़ाई</h3>
<p style="text-align:justify;">बाल वाटिका में 25 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा बाल वाटिका में पढ़ने वाले छात्र क्लास में अपने छोटे भाई-बहनों को भी ला सकते हैं। यहां क्लास का समय साढ़े चार घंटे होगा। इसके अलावा बच्चों के भोजन की व्यवस्था स्कूलों में ही की जाएगी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को स्टेशनरी, बैग्स, किताबें आदि मुफ्त दिए जाएंगे। एनसीईआरटी द्वारा बाल वाटिका में आने वाले बच्चों को जादुई पिटारा पर विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Apr 2023 16:03:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>देश की आकांक्षाओं से जुड़ी है राष्ट्रीय शिक्षा नीति : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति किसी सरकार की नहीं बल्कि देश की होती है और 30 साल बाद पहली बार देश की आकांक्षाओं से जुड़ी नीति बनाई गई है। मोदी ने सोमवार को नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन में कहा कि सरकार की ओर से बीते दिनों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/national-education-policy-is-linked-to-the-aspirations-of-the-country-modi/article-18214"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/appeal-to-modi-to-save-hindi-publishing-world-in-lock-down.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति किसी सरकार की नहीं बल्कि देश की होती है और 30 साल बाद पहली बार देश की आकांक्षाओं से जुड़ी नीति बनाई गई है। मोदी ने सोमवार को नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन में कहा कि सरकार की ओर से बीते दिनों ही नयी शिक्षा नीति का ऐलान किया गया है, जिसपर अभी भी मंथन जारी है। देश के लक्ष्यों को शिक्षा नीति और व्यवस्था के जरिए ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा नीति में सरकार का दखल कम होना चाहिए क्योंकि शिक्षा नीति से जितना अधिक शिक्षक अभिभावक और छात्र छात्राएं जुड़ेगी उतनी ही इसकी प्रासंगिकता बढ़ेगी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/bank-of-india-was-first-made-digital/"><strong>यह भी पढ़ें –</strong> सबसे पहले डिजिटल बना था बैंक ऑफ इंडिया</a></p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि नयी शिक्षा नीति को तैयार करने में लाखों लोगों से बात की गई, जिनमें छात्र-शिक्षक-अभिभावक सभी शामिल थे। विविधता से भरे मंथन के बाद अमृत निकला है और यही वजह है कि देशभर में इस नीति का स्वागत किया जा रहा है। देश के लोगों में यही भावना है कि वह शिक्षा नीति में यही सुधार देखना चाहते थे जो अब पूरा हुआ है। आज हर किसी को ये नीति अपनी लग रही है, जो सुझाव लोग देखना चाहते थे वो दिख रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाले इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अलावा सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री, राज्यपाल, उपराज्यपाल और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2020 12:30:36 +0530</pubDate>
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