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                <title>Hindi Day - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>National Hindi Day: प्रदेशभर में धूमधाम से मनाया गया राष्ट्रीय हिन्दी दिवस</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्र भाषा को सही दिशा देने के लिए हम को पहले खुद अपनाना होगा: डॉ. आर्य वैश्य महाविद्यालय में हिंदी दिवस पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन | Bhiwani News भिवानी (सच कहूँ न्यूज)। National Hindi Day: संस्कृति से जुड़ाव का माध्यम हिंदी है। संस्कृति की जड़े राष्ट्र भाषा हिंदी में निवास करती है। किसी भी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/national-hindi-day-was-celebrated-with-great-enthusiasm-across-the-state/article-62208"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-09/bhiwani-news-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">राष्ट्र भाषा को सही दिशा देने के लिए हम को पहले खुद अपनाना होगा: डॉ. आर्य</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>वैश्य महाविद्यालय में हिंदी दिवस पर विस्तार व्याख्यान का आयोजन | Bhiwani News</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> National Hindi Day: संस्कृति से जुड़ाव का माध्यम हिंदी है। संस्कृति की जड़े राष्ट्र भाषा हिंदी में निवास करती है। किसी भी राष्ट्र की सफलता के लिए राष्ट्रभाषा को मजबूत बनाना होगा। यह बात स्थानीय वैश्य महाविद्यालय भिवानी के हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर वर्तमान में हिंदी की दशा एवं दिशा विषय पर आयोजित विस्तार व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए पूर्व प्राचार्य डा. बुद्धदेव आर्य ने कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्र भाषा को सही दिशा देने के लिए हम सभी को हिंदी को खुद अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें अपनी राष्ट्रभाषा के लिए संजीदा व सचेत रहना होगा तभी उसको आगे बढ़ाया जा सकता है। Bhiwani News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रभाषा के प्राण तत्व राष्ट्र पक्ष, राष्ट्रभाषा व राष्ट्रगान होती है। उन्होंने कहा कि हिंदी की जड़े गहरी होती जा रही है और हिंदी निरंतर आगे बढ़ती जा रही है जिसके लिए क्षेत्रीय भाषाओं का अहम रोल है। विस्तार व्याख्यान का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया गया। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल तंवर ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं मातृभाषा की विश्व की कोई भी भाषा बराबरी नहीं कर सकता। हिन्दी के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। इस अवसर पर महाविद्यालय के स्वपोषित विभाग की निदेशक डॉ प्रोमिला सुहाग, प्राध्यापकगण डा. कामना कौशिक, डॉ. वंदना वत्स, डा. रीना, डॉ. श्रुति रानी, डॉ. राजकुमार सहित महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहें। Bhiwani News</p>
<h3 style="text-align:justify;">हिंदी भाषा सामजिक एवं राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाती है: बुवानीवाला</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी।</strong> हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका केवल साहित्यिक या सांस्कृतिक संदर्भ में ही नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक और राष्ट्रीय एकता को भी सुदृढ़ करती है। यह बात शनिवार को स्थानीय आदर्श महिला महाविद्यालय के महासचिव अशोक बुवानीवाला ने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में, हिंदी एक ऐसा साझा माध्यम है जो विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच समझ और संवाद का पुल तैयार करता है। Bhiwani News</p>
<p style="text-align:justify;">हमें छात्राओं को हिंदी की महत्ता समझानी चाहिए और उन्हें इसके प्रति प्यार और सम्मान सिखाना चाहिए। प्राचार्या डा. अलका मित्तल ने कहा कि हिन्दी आत्मीयता की भाषा हैं। आज भारत के अलावा 200 अन्य विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषा पढ़ाई जाती है, जो हमारे लिए अत्यन्त गौरव का विषय हैं। महाविद्यालय में हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी दिवस के अवसर पर स्लोगन लेखन एवं कविता पाठ प्रतियोगिता करवाई गई, जिसमें लगभग 50 छात्राओं ने हिन्दी भाषा को सम्मान देते हुए अपनी प्रस्तुति दी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सीबीएलयू में मनाया हिन्दी दिवस | Bhiwani News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी।</strong> स्थानीय चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर हिंदी विभाग द्वारा कुलपति प्रो. दीप्ति धमार्नी के कुशल नेतृत्व एवं कुलसचिव डा. ऋतु सिंह के मार्गदर्शन और विभागाध्यक्ष डा. लखा सिंह के संयोजन में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में सुप्रसिद्ध कवियों में डा. रमाकांत, राधा कृष्ण चंदेल, ज्ञानेंद्र तेवतिया, विकास यशकीर्ति, वीएम बेचैन, रीतिक, नवीन कुमार, प्रवीण, विकास कायत, सचिन, देवेंद्र कुमार ने शिरकत की। हिंदी विभागाध्यक्ष डा. लखा सिंह ने सभी कवियों और अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा है। मंच संचालन डा. दीपक कुमारी ने किया। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की पहचान उसकी राष्ट्र भाषा से होती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बीएमयू में हिंदी दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">हिन्दी भाषा की हमारी एकता और अखंडता को बनाए रखने में अहम भूमिका: प्रो. वर्मा</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक।</strong> Rohtak News: बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. एचएल वर्मा ने कहा कि हिंदी न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि यह हमें हमारे इतिहास, परंपराओं और मूल्यों से भी जोड़ती है। हिंदी की सरलता और व्यापकता ने इसे पूरे भारत में एक ऐसी भाषा बना दिया है जिसे आसानी से समझा और बोला जा सकता है। यह हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि हिंदी बोलते समय हम कई बार अंग्रेजी शब्दों का उपयोग करते हैं, जिससे हिंदी के पारंपरिक शब्दों का प्रयोग कम हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमें हिंदी शब्दावली को समृद्ध बनाए रखने के लिए सचेत रहना होगा, ताकि हमारी भाषा अपनी पहचान और सुंदरता को बनाए रख सके। इस अवसर पर महात्मा गांधी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र की प्रो. प्रीति सागर ने कहा कि आज हमारे लिए गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि आज हिन्दी अपने प्रचार-प्रसार के कारण पूरे विश्व में पहचानी जाती है। उन्होंने कहा कि आजादी के आन्दोलन में भी हिन्दी भाषा का भरपूर योगदान रहा है। इस अवसर पर प्रो. राजेन्द्र सिंह और आशा खत्री की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। Rohtak News</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="राष्ट्रीय लोक अदालत में 13,275 वाद निस्तारित" href="http://10.0.0.122:1245/judge-anil-kumar-inaugurated-the-national-lok-adalat-by-lighting-the-lamp/">राष्ट्रीय लोक अदालत में 13,275 वाद निस्तारित</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Sep 2024 18:41:28 +0530</pubDate>
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                <title>मातृ भाषा हिंदी हमारी प्रथम भाषा है, हर किसी को इस पर गर्व करना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[धमतान साहिब (सचकहूँ/कुलदीप नैन)। लाला जय भगवान मैमोरियल कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वीरवार को हिन्दी दिवस (Hindi Day) मनाया गया। विद्यालय में इस अवसर पर सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सुलेख प्रतियोगिता में तीसरी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी लेखनी की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/hindi-day-celebrated-in-lala-jai-bhagwan-memorial-girls-senior-secondary-school/article-52372"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/dhamtan-sahib-news-1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>धमतान साहिब (सचकहूँ/कुलदीप नैन)।</strong> लाला जय भगवान मैमोरियल कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वीरवार को हिन्दी दिवस (Hindi Day) मनाया गया। विद्यालय में इस अवसर पर सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सुलेख प्रतियोगिता में तीसरी कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी लेखनी की प्रस्तुति देते हुए अपनी लोकप्रियता दिखाई। Dhamtan Sahib News</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती कमलेश देवी जी ने प्रार्थना में हिन्दी भाषा के महत्व पर अपने विचार वयक्त करते हुए कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा है और हर किसी को इस पर गर्व करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि हिन्दी भारत की प्रथम भाषा और विश्व की तीसरी भाषा मानी जाती है। हिंदी को विशेष दर्जा दिलवाने में राजेन्द्र सिंह, हजारी प्रसाद द्विवेदी, काका दिलाने मे गिलीशरण गुप्त व गोविन्द दास का अहम योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि सुलेख प्रतियोगिता से बच्चों की लिखाई सुन्दर और बनावटी बनती है और उसमें शुद्धता आती हैं। और विद्‌यार्थिय में प्रतियोगिता में भाग लेने की इच्छा विकसित होती है। Dhamtan Sahib News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="ग्रेपलिंग व नैटबाल में प्रताप स्कूल के खिलाड़ियों ने जीते 6 स्वर्ण" href="http://10.0.0.122:1245/players-of-pratap-school-won-6-gold-in-grappling-and-netball/">ग्रेपलिंग व नैटबाल में प्रताप स्कूल के खिलाड़ियों ने जीते 6 स्वर्ण</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Sep 2023 17:24:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>सेंट जेवियर्स स्कूल में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[मीरापुर (सच कहूं/कोमल प्रजापति)। सेंट जेवियर्स वर्ल्ड स्कूल में हिंदी दिवस (Hindi Day) पर एक कार्यक्रम का आयोजन बहुत ही भव्य स्तर पर किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षको व छात्र छात्राओं ने अपने विचार व्यक्त किये। हिंदी दिवस पर सेंट जेवियर्स वर्ल्ड स्कूल में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/program-organized-on-hindi-day-in-st-xaviers-school/article-52352"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-09/miranpur-news-4.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मीरापुर (सच कहूं/कोमल प्रजापति)।</strong> सेंट जेवियर्स वर्ल्ड स्कूल में हिंदी दिवस (Hindi Day) पर एक कार्यक्रम का आयोजन बहुत ही भव्य स्तर पर किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षको व छात्र छात्राओं ने अपने विचार व्यक्त किये। हिंदी दिवस पर सेंट जेवियर्स वर्ल्ड स्कूल में मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य सजी वर्गिस ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि हिंदी भारत की आत्मा है, हिंदी एक भाषा ही नहीं अपितु एक संस्कार है, शिक्षा है। कार्यक्रम में बच्चों ने कविताएं, कहानियां, चुटकुले आदि सुनाये तथा हिंदी में अंताक्षरी का भी आयोजन किया गया। Miranpur News</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष राजपाल आर्य ने कहा कि हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व है। हिंदी भाषा के माध्यम से हमारे अंदर वीरता, साहस और धैर्य के गुण विद्यमान होते हैं। हिंदी अध्यापिका पारुल पटेल ने कहा कि हिंदी दिवस को लेकर प्रातः काल से ही सभी अध्यापकों व बच्चों के अंदर उत्साह व उमंग देखने को मिला। विद्यालय निदेशक महोदय साल्विक जैन ने भी संपूर्ण विद्यालय परिवार को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं प्रदान की। कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों में आलिया हुसैन, हरकीरत, निधि सिरोहा, महक, युवराज नंदिनी तथा गुरलीन कौर विशेष भूमिका में रहे। मंच का संचालन वंशिका धीमान ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में निशा, सीमा और जोगिंद्र नागर का विशेष सहयोग रहा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="आवारा सांड ने वृद्ध महिला को किया घायल" href="http://10.0.0.122:1245/stray-bull-injured-old-woman/">आवारा सांड ने वृद्ध महिला को किया घायल</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Sep 2023 20:53:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मूल कार्यों में हिंदी का उपयोग करने का संकल्प लें देशवासी: शाह</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देशवासियों से मूल कार्यों में अपनी मातृभाषा के साथ-साथ हिंदी का प्रयोग करने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। शाह ने हिंदी दिवस के मौके पर मंगलवार को देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए एक ट्वीट संदेश में कहा, “हिंदी दिवस के अवसर पर मैं सभी देशवासियों से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/countrymen-should-take-a-pledge-to-use-hindi-in-original-works-shah/article-26806"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/hindidiwas.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देशवासियों से मूल कार्यों में अपनी मातृभाषा के साथ-साथ हिंदी का प्रयोग करने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। शाह ने हिंदी दिवस के मौके पर मंगलवार को देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए एक ट्वीट संदेश में कहा, “हिंदी दिवस के अवसर पर मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूँ कि मूल कार्यों में अपनी मातृभाषा के साथ राजभाषा हिंदी का उत्तरोत्तर प्रयोग करने का संकल्प लें। मातृभाषा व राजभाषा के समन्वय में ही भारत की प्रगति समाहित है। आप सभी को ‘हिंदी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं।” उल्लेखनीय है कि संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था और इसके बाद से हर वर्ष इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">हिंदी दिवस के अवसर पर मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूँ कि मूल कार्यों में अपनी मातृभाषा के साथ राजभाषा हिंदी का उत्तरोत्तर प्रयोग करने का संकल्प लें।</p>
<p>मातृभाषा व राजभाषा के समन्वय में ही भारत की प्रगति समाहित है।</p>
<p>आप सभी को ‘हिंदी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं।</p>
<p>— Amit Shah (@AmitShah) <a href="https://twitter.com/AmitShah/status/1437600795646562311?ref_src=twsrc%5Etfw">September 14, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Sep 2021 10:09:20 +0530</pubDate>
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                <title>सामाजिक, सांस्कृतिक विकास में देश की भाषा का योगदान : निशंक</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सोमवार को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा किसी भी देश के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में उस देश की भाषा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। निशंक ने शुभकामना संदेश में कहा, “ किसी भी देश के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में उस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/contribution-of-countrys-language-in-social-cultural-development-nishank/article-18420"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/ramesh-pokhriyal1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सोमवार को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा किसी भी देश के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में उस देश की भाषा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। निशंक ने शुभकामना संदेश में कहा, “ किसी भी देश के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में उस देश की भाषा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह संपूर्ण राष्ट्र की एकता और अखंडता की महत्वपूर्ण कड़ी होती है। हिंदी दिवस पर आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हिंदी भाषा अनेकता में एकता को स्थापित करने की सूत्रधार है।” देश में पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2020 12:40:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हिंदी दिवस, हिंदी के कोहिनूर- बाबा कामिल बुल्के</title>
                                    <description><![CDATA[फादर कामिल बुल्के का जन्म 1 सितम्बर, 1909 को बेल्जियम के पश्चिमी फ्लैंडर्स स्टेट के रम्सकपैले नामक गाँव में हुआ। उनके पास सिविल इंजीनियरिंग में बी.एस.सी डिग्री थी, जो उन्होंने लोवैन विश्वविद्यालय से प्राप्त की। 1934 में उन्होंने भारत का संक्षिप्त दौरा किया और कुछ समय दार्जीलिंग में रुके। उन्होंने गुमला अब झारखंड में पांच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-day-kohinoor-of-hindi-baba-kamil-bulcke/article-18412"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/hindi-day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
<em><strong>फादर कामिल बुल्के का जन्म 1 सितम्बर, 1909 को बेल्जियम के पश्चिमी फ्लैंडर्स स्टेट के रम्सकपैले नामक गाँव में हुआ। उनके पास सिविल इंजीनियरिंग में बी.एस.सी डिग्री थी, जो उन्होंने लोवैन विश्वविद्यालय से प्राप्त की। 1934 में उन्होंने भारत का संक्षिप्त दौरा किया और कुछ समय दार्जीलिंग में रुके। उन्होंने गुमला अब झारखंड में पांच वर्षों तक गणित का अध्यापन किया। यहीं पर उनके मन में हिंदी भाषा सीखने की ललक पैदा हो गई, जिसके लिए वह बाद में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने लिखा है- मैं जब 1935 में भारत आया तो अचंभित और दु:खी हुआ। मैंने महसूस किया कि यहां पढ़े-लिखे लोग भी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूक नहीं हैं।</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">बेल्जियम में जन्मे फादर कामिल बुल्के की जीवनभर कर्मभूमि हिंदुस्तान की माटी रही। हिंदी के पुजारी बुल्के मृत्युपर्यंत हिंदी, तुलसीदास और वाल्मीकि के अनन्य भक्त रहे। ‘कामिल’ शब्द के दो अर्थ हैं। एक- वेदी-सेवक जबकि दूसरा अर्थ है- एक पुष्प का नाम। फादर कामिल बुल्के ने दोनों ही अर्थों को जीवन में चरितार्थ किया। वह जेसुइट संघ में दीक्षित संन्यासी के रूप में ‘वेदी-संन्यासी’ थे और एक व्यक्ति के रुप में महकते हुए पुष्प। फादर बुल्के का हिंदी प्रेम जगजाहिर रहा। वह गर्व से कहते थे, संस्कृत राजमाता है, हिंदी बहु रानी है और अंग्रेजी नौकरानी है, लेकिन नौकरानी के बिना भी काम नहीं चलता है। वह बहुभाषा विद थे। बाबा बुल्के अपनी मातृभाषा ‘फ्लेमिश’ के अतिरिक्त अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, लैटिन, ग्रीक, संस्कृत और हिंदी पर भी संपूर्ण अधिकार रखते थे। हिंदुस्तान की माटी विशेषकर रांची उनके रोम-रोम में बसा था।1951 में भारत सरकार ने फादर बुल्के को बड़े ही आदर के साथ भारत की नागरिकता प्रदान की। बाबा बुल्के भारत के नागरिक बनने के बाद स्वयं को ‘बिहारी’ कहलवाना पसंद करते। कामिल बुल्के की हिंदी सेवाओं के लिए 1974 में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से नवाजा।</p>
<p style="text-align:justify;">फादर हिंदी के इतने सबल पक्षधर थे कि सामान्य बातचीत में भी अँग्रेजी शब्द का प्रयोग उन्हें पसंद नहीं था। उन्हें इस बात का दु:ख था कि हिंदी वाले अपनी हिंदी का सम्मान नहीं करते हैं। बाबा का विचार था- दुनिया भर में शायद ही कोई ऐसी विकसित साहित्य भाषा हो जो हिंदी की सरलता की बराबरी कर सके। उन्हें इस बात का दर्द था कि हिंदी भाषी और हिंदी संस्थाएं हिंदी को खा गए। जब भी कोई उनसे अंग्रेजी में बोलता था, वे पूछ लेते थे- क्या तुम हिंदी नहीं जानते? फादर कामिल बुल्के के छात्र रहे श्री गजेंद्र नारायण सिंह बताते हैं, मैं संत जेवियर्स कॉलेज में दाखिल हुआ तो एक दिन समय निकालकर फादर बुल्के से मिलने गया। उनके कमरे के बंद दरवाजे पर दस्तक लगाते हुए मैंने कहा- ‘मे आई कम इन फादर।’ मेरे इतना कहते ही दरवाजा खुला और एक अत्यंत ही शांत, सौम्य, साधु पुरुष गर्दन पर भागलपुरी सिल्क की चादर लपेटे हुए खड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने धीरे से गम्भीर स्वर में कहा- अभी दरवाजे पर दस्तक लगाते हुए आपने किस भाषा का व्यवहार किया? क्या आपकी अपनी कोई बोली या भाषा नहीं है? आप स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक हैं, फिर भी विदेशी आंग्ल भाषा का व्यवहार हिंदी के एक प्राध्यापक के पास क्यों कर रहे हैं? आपकी मातृभाषा क्या है? प्रश्नों की झड़ी लगा दी उन्होंने। मैं अवाक खड़ा रहा। उन्होंने मुझसे पूछा कि- ‘आपकी मातृभाषा क्या है?’ मैथली बताए जाने पर तो उन्होंने मुझसे निर्विकार भाव से कहा- आइंदा जब आप मेरे पास आएं तो मैथली या हिंदी में ही बात करेंगे, अंग्रेजी में कदापि नहीं। बुल्के आजीवन हिंदी की सेवा में लगे रहे। हिंदी-अँग्रेजी शब्दकोष के निर्माण के लिए वे सतत प्रयत्नशील रहे। वर्ष 1968 में अंग्रेजी हिंदी कोश प्रकाशित हुआ जो आज भी सबसे प्रामाणिक शब्दकोष माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने इसमें 40 हजार शब्द जोड़े और इसे आजीवन अद्यतन भी करते रहे। कामिल बुल्के का अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश और बाइबिल का हिंदी अनुवाद ‘नया विधान’, हिंदी के महत्व और उसकी सामर्थ्य को सिद्ध करने के ही उपक्रम हैं। उनके ‘अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश’ ने अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी के प्रयोग की राह को सुगम बनाया है।बुल्के ने बाइबिल का हिंदी अनुवाद भी किया। मॉरिस मेटरलिंक के प्रसिद्ध नाटक ‘द ब्लू बर्ड’ का नील पंछी नाम से बुल्के ने अनुवाद किया। छोटी-बड़ी कुल मिलाकर उन्होंने करीब 29 किताबें लिखीं। हिंदी के इस पंडित का देहावसान गैंग्रीन के कारण 17 अगस्त, 1982 को दिल्ली में हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">फादर कामिल बुल्के का दूसरा जग-विख्यात पहलू है कि वे हिंदी के विद्वान, रामकथा के मर्मज्ञ और विदेश में जन्मे भारतीय थे। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ‘रामकथा उत्पत्ति और विकास’ पर 1950 में पी.एच.डी. की। इस शोध में संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, हिंदी , बंगला, तमिल आदि समस्त प्राचीन और आधुनिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध राम विषयक विपुल साहित्य का ही नहीं, वरन् तिब्बती, बर्मी, सिंघल, इंडोनेशियाई, मलय, थाई आदि एशियाई भाषाओं के समस्त राम साहित्य की सामग्री का भी अत्यंत वैज्ञानिक रीति से उपयोग हुआ है। तुलसीदास उन्हें उतने ही प्रिय थे, जितने अपनी मातृभाषा फ्लेमिश के महाकवि गजैले या अंग्रेजी के महाकवि शेक्यपियर। वे प्राय: कहा करते थे- ‘हिंदी में सब कुछ कहा जा सकता है।’ इस बात की पुष्टि करने के लिए उन्होंने सबसे पहले दर्शन, धर्मशास्त्र आदि विषयों की परिभाषिक शब्दावली का एक लघुकोश ‘ए टैक्नीकल इंगलिश हिंदी ग्लौसरी’ के नाम से प्रकाशित किया। इसके बाद ‘अंग्रेजी-हिंदी कोश’ 1967 में तैयार किया।</p>
<p style="text-align:justify;">फादर कामिल बुल्के ने पंडित बदरीदत्त शास्त्री से हिंदी और संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की और 1940 में ‘विशारद’ की परीक्षा ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन’, प्रयाग से उत्तीर्ण की। उन्होंने 1942-1944 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से संस्कृत में मास्टर्स डिग्री हासिल की। कामिल बुल्के ने 1945-1949 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में शोध किया, उनका शोध विषय था- ‘रामकथा का विकास’। 1949 में ही वह ‘सेंट जेवियर्स कॉलेज’, राँची में हिंदी और संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष नियुक्त किए गए। कामिल बुल्के सन 1950 में ‘बिहार राष्ट्रभाषा परिषद’ की कार्यकारिणी के सदस्य चुने गए। वह सन 1972 से 1977 तक भारत सरकार की ‘केन्द्रीय हिंदी समिति’ के सदस्य रहे। कामिल बुल्के लंबे समय तक रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में संस्कृत तथा हिंदी के विभागाध्यक्ष रहे, लेकिन बाद में बहरेपन के कारण कॉलेज में पढ़ाने से अधिक उनकी रुचि गहन अध्ययन और स्वाध्याय में होती चली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">बुल्के का अपने समय के हिंदी भाषा के सभी चोटी के विद्वानों से संपर्क था। डॉ. धर्मवीर भारती, डॉ. जगदीश गुप्त, डॉ. रामस्वरूप, डॉ. रघुवंश, महादेवी वर्मा आदि से उनका विचार-विमर्श और संवाद होता रहता था। डॉ. धीरेन्द्र वर्मा को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हुए वे अपनी आत्मकथा ‘एक ईसाई की आस्था, हिंदी-प्रेम और तुलसी-भक्ति 2’ में लिखते हैं- 1945 में डॉ. धीरेन्द्र वर्मा की प्रेरणा से मैंने एम.ए. के बाद इलाहाबाद से डॉ. माता प्रसाद के निरीक्षण में शोध कार्य किया। इलाहाबाद के प्रवास को वे अपने जीवन का ‘द्वितीय बसंत’ कहते थे। महादेवी वर्मा को वे ‘दीदी’ और इलाहाबाद के लोगों को वे ‘मायके वाले’ कहते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">बुल्के के प्रस्तुत शोध की विशेषता थी कि यह मूलत: हिंदी में प्रस्तुत पहला शोध प्रबंध है। फादर बुल्के जिस समय इलाहाबाद में शोध कर रहे थे, उस समय सभी विषयों में शोध प्रबंध केवल अंग्रेजी भाषा में ही प्रस्तुत किए जाते थे। फादर बुल्के ने आग्रह किया कि उन्हें हिंदी में शोध प्रबंध प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए। इसके लिए अंतत: शोध संबंधी नियमावली में परिवर्तन किया गया। पदमभूषण विजेता एवं मधुशाला के रचियता श्री हरिवंशराय बच्चन बाबा कामिल बुल्के का बेहद सम्मान करते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">                                                                                                           <strong>-श्याम सुंदर भाटिया</strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 14 Sep 2020 10:06:54 +0530</pubDate>
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