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                <title>orders - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आदेश पर अमल न करने को लेकर राज्यों पर जुमार्ना</title>
                                    <description><![CDATA[याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि विधि आयोग ने 1986 में अपनी 114वीं रिपोर्ट में समाज के वंचित समुदायों को न्याय दिलाने के लिए ग्राम न्यायालयों की स्थापना की सिफारिश की थी।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/fines-on-states-for-not-following-orders/article-12801"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/fine-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ग्राम न्यायालय स्थापना मामला: (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Fine)</span></span></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने गांवों के गरीब परिवारों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए ग्राम अदालतों की स्थापना संबंधी आदेश पर अमल न करने को लेकर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बुधवार को फटकार लगायी और (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Fine) </span></span>जुमार्ना भी लगाया। न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गैर सरकारी संगठन नेशनल फेडरेशन आॅफ सोसाइटीज फॉर फास्ट जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए असम, चंडीगढ़, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा, पंजाब, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल पर एक-एक लाख रुपये का जुमार्ना लगाया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">न्यायालय ने राज्यों को एक महीने में ग्राम न्यायालय के गठन संबंधी अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।</h3>
<p style="text-align:justify;">संसद ने 2008 में कानून पारित किया था, जिसमें जमीनी स्तर पर ग्राम न्यायालय बनाने का प्रावधान था, ताकि लोगों को जल्द न्याय मिल सके। याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि विधि आयोग ने 1986 में अपनी 114वीं रिपोर्ट में समाज के वंचित समुदायों को न्याय दिलाने के लिए ग्राम न्यायालयों की स्थापना की सिफारिश की थी।  याचिका में कहा गया है कि 2008 में संबंधित कानून बनाए जाने के बावजूद 11 राज्यों ने 2009-10 से 2017-18 तक केवल 320 ग्राम न्यायालय अधिसूचित किए।  इनमें 204 में ही काम चल रहा है।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2020 18:15:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Article 370 : याचिकाओं को वृहद पीठ को भेजने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे। वहां पर आपराधिक घटनाएं हुईं और आंकड़े बताते हैं कि अलगाववादियों को पाकिस्तान से ट्रेनिंग दी गई ताकि यहां बबार्दी की जा सके।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/article-370-the-decision-in-the-supreme-court-about-dispatch-of-orders-to-the-larger-bench-is-safe/article-12699"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/article-370.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">संविधान पीठ के समक्ष एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का दिया ब्योरा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद पीठ के सुपुर्द करने या ना करने के मामले में गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से दिनेश द्विवेदी, राजीव धवन एवम् संजय पारिख ने दलीलें दी, जबकि एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे</h3>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सुनवाई की शुरूआत करते हुए वेणुगोपाल ने दलील दी कि अलगाववादी वहां जनमत संग्रह का मुद्दा उठाते आए हैं क्योंकि वह जम्मू कश्मीर को अलग संप्रभु राज्य बनाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने भारत की मदद इसलिए मांगी थी क्योंकि वहां विद्रोही घुस चुके थे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वहां पर आपराधिक घटनाएं हुईं और आंकड़े बताते हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">अलगाववादियों को पाकिस्तान से ट्रेनिंग दी गई ताकि यहां बबार्दी की जा सके।</li>
<li style="text-align:justify;">एटॉर्नी जनरल ने कहा कि जनमत संग्रह कोई स्थायी समाधान नहीं था।</li>
<li style="text-align:justify;">संविधान पीठ के समक्ष एक-एक कर ऐतिहासिक घटनाक्रम का ब्योरा दिया।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही कश्मीर का भारत में विलय और जम्मू कश्मीर संविधान सभा के गठन के बारे में विस्तार से बताया।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2020 16:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूनिटेक को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका: 3 परिसम्पत्तियों की नीलामी के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक की आगरा, वाराणसी और श्रीपेरम्बदुर की तीन परिसम्पत्तियों की नीलामी के वीरवार को आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘हम यूनिटेक की तीन परिसम्पत्तियों की नीलामी के आदेश देते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/auction-orders-for-assets/article-4680"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/suprem.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक की आगरा, वाराणसी और श्रीपेरम्बदुर की तीन परिसम्पत्तियों की नीलामी के वीरवार को आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘हम यूनिटेक की तीन परिसम्पत्तियों की नीलामी के आदेश देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ये परिसम्पत्तियां आगरा, वाराणसी और श्रीपेरम्बदुर की हैं। इन सम्पत्तियों को नीलाम करके यूनिटेक के फ्लैट खरीदारों को उनका पैसा लौटाया जाएगा। सुनवाई के दौरान यूनिटेक के प्रोमोटर संजय चंद्रा की ओर से पेश पूर्व सॉलिसिटर जनरल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने दलील दी कि उनके मुवक्कि लंबे समय से जेल में बंद हैं। वह अपनी सभी परियोजनाएं पूरी करना चाहते हैं। कुमार ने दलील दी कि अभी तक 120 फ्लैट संबंधित खरीदारों को सौंपे जा चुके हैं। उनके मुवक्किल अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना चाहते हैं।</p>
<h1 style="text-align:center;">जानें क्या है पूरा मामला?</h1>
<p style="text-align:justify;">यूनिटेक बिल्डर ने गुडगांव के विस्टा और नोएडा के बरगंडी प्रोजेक्ट में हजारों लोगों से पैसे ले लिये लेकिन घर बनाकर नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में यूनिटेक ने हाथ खड़े कर दिए कि पैसे नहीं हैं इसलिए न तो घर दे पाएंगे, न पैसे लौटा पाएंगे।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jul 2018 15:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरकॉम सम्पत्ति बिक्री मामला : यथास्थिति बनाये रखने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस कम्यु्निकेशन (आरकॉम) की सम्पत्ति मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो से बेचे जाने के मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आज आदेश दिया। बैंकों के परिसंघ की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने, हालांकि फिलहाल आरकॉम की संपत्ति बेचने पर बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस कम्यु्निकेशन (आरकॉम) की सम्पत्ति मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो से बेचे जाने के मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आज आदेश दिया। बैंकों के परिसंघ की याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने, हालांकि फिलहाल आरकॉम की संपत्ति बेचने पर बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक हटाने से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति ए के गोयल, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने कहा कि उसके अंतिम निर्णय के बाद ही बिक्री के संबंध में कोई निर्णय लिया जा सकता है। न्यायालय इस मामले की सुनवाई पांच अप्रैल को करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय स्टेट बैंक ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस फैसले को कल शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें स्वीडन की कंपनी एरिक्सन को आरकॉम की सम्पत्तियों पर दावा जताने की अनुमति दी थी। गत वर्ष 28 दिसंबर को कर्ज के बोझ तले डूबी आरकॉम ने घोषणा की थी कि वह अपना वायरलेस स्पे क्ट्रकम, आवर, फाइबर और मीडिया कंवर्जेंस नोड (एमसीएन) एसेट्स रिलायंस जियो को बेच रही है। आरकॉम इसके जरिये अपना कर्ज 39,000 करोड़ रुपये कम करना चाहती थी। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गत आठ मार्च को बिना पूर्व अनुमति के आरकॉम की सम्पत्ति की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय का यह आदेश एरिक्सन की याचिका पर सुनवाई करते हुए आया था। एरिक्सन का आरकॉम पर 1,012 करोड़ रुपये बकाया है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Mar 2018 06:31:54 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शौचालय नहीं बनाया तो वापिस करनी होगी राशि</title>
                                    <description><![CDATA[उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने एफआईआर दर्ज करवाने के दिए निर्देश डीसी ने बैठक के दौरान 30 जून तक शहरों को ओडीएफ घोषित करने के दिए आदेश टीम व युवाओं से किया आमजन को जागरूक करने का आह्वान फतेहाबाद (विजय बजाज)। उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने कहा कि जिन लोगों ने अपने घरों में शौचालय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/orders-to-declare-cities-as-odf/article-1745"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/toilet.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने एफआईआर दर्ज करवाने के दिए निर्देश</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>डीसी ने बैठक के दौरान 30 जून तक शहरों को ओडीएफ घोषित करने के दिए आदेश</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>टीम व युवाओं से किया आमजन को जागरूक करने का आह्वान</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>फतेहाबाद (विजय बजाज)।</strong> उपायुक्त डॉ. जेके आभीर ने कहा कि जिन लोगों ने अपने घरों में शौचालय बनाने के लिए सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त की है और अभी तक शौचालयों का निर्माण नहीं किया है, ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाए और उनसे दी गई वित्तीय सहायता राशि की वसूली भी करे।</p>
<p style="text-align:justify;">उपायुक्त ने जिला की चारों नगर परिषद् और पालिकाओं को 30 जून तक खुले में शौचमुक्त करने के आदेश दिए है। उन्होंने नगर परिषद् के अधिकारियों से कहा है कि वे ओडीएफ घोषित होने के बाद 15 जुलाई तक जरूरी दस्तावेज एमआईएस पर अपलोड भी करें। इस कार्य में कौताही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उपायुक्त डॉ. जेके आभीर लघु सचिवालय के बैठक कक्ष में नगर परिषद् अधिकारियों, कर्मचारियों, ओडीएफ टीम सदस्यों और सक्षम युवाओं की संयुक्त बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में नगर परिषद के ईओ प्रदीप हुड्डा, महिला बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी आशा सेतिया, डिप्टी सीएमओ डॉ. हनुमान सिंह, डीईईओ संगीता बिश्नोई, रोहताश मील मौजूद रहे।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नगर पालिका के सभी वार्डों में सर्वे के निर्देश</h2>
<p style="text-align:justify;">उपायुक्त ने कहा कि ओडीएफ टीम सक्षम युवाओं को साथ लेकर टोहाना, फतेहाबाद नगर परिषद् और रतिया व भूना नगर पालिका के सभी वार्डों में सर्वे कर खुले में शौच करने वाले व्यक्तियों को चिन्ह्ति करेंगे। उन्होंने कहा कि हमें लोगों को शौचालयों के उपयोग करने बारे समझाना है। उन्हें इसके लिए जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि लोगों की मानसिकता में बदलाव लाकर हम उन्हें शौचालय के प्रयोग के लिए प्रेरित कर सकते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">स्कूलों में बच्चों को किया जाएगा जागरूक</h2>
<p style="text-align:justify;">डॉ. आभीर ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्कूलों में बच्चों को शौचालयों के प्रयोग बारे जागरूक करें और उन्हें ओडीएफ के बारे में भी पूर्ण जानकारी दें। इसके अलावा उन्हें अभिभावकों व दूसरे लोगों को भी शौचालय उपयोग करने बारे जागरूक करने के लिए प्रेरित करे। ताकि वे बीमारियों से बच सकें।</p>
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</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2017 02:06:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोर्ट के आदेशों के बावजूद नहीं छूटे ट्रक</title>
                                    <description><![CDATA[सेल्स टैक्स विभाग ने थाने में दिया प्रार्थना पत्र हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। कर चोरी कर सामान लाए जाने के संदेह में सेल्स टैक्स विभाग की ओर से जब्त किए गए दो ट्रकों से सामान चोरी कर ले जाने के प्रकरण में नया पेच आ गया है। सेल्स टैक्स विभाग की ओर से सामान सहित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/truck-are-not-left-despite-court-orders/article-1191"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/h08.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सेल्स टैक्स विभाग ने थाने में दिया प्रार्थना पत्र</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कर चोरी कर सामान लाए जाने के संदेह में सेल्स टैक्स विभाग की ओर से जब्त किए गए दो ट्रकों से सामान चोरी कर ले जाने के प्रकरण में नया पेच आ गया है। सेल्स टैक्स विभाग की ओर से सामान सहित जब्त दोनों ट्रक टाऊन थाने में खड़े हैं। ट्रक छोड़ने के लिए न्यायालय ने आदेश जारी कर दिए हैं। उधर, सेल्स टैक्स विभाग ने इन ट्रकों को न छोड़ने तथा सुरक्षा के लिए टाऊन थाने में प्रार्थना पत्र दिया है। सेल्स टैक्स विभाग के अनुसार अभी तक जुमार्ना वसूलना शेष है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए ट्रक टाऊन पुलिस की सुरक्षा में रखवाए गए हैं। जानकारी के अनुसार सेल्स टैक्स विभाग की टीम ने संगरिया में दिल्ली से श्रीगंगानगर जा रहे दो ट्रकों में कर चोरी कर सामान लाए जाने के संदेह में जब्त किया था। जब्त दोनों ट्रक टाऊन में राजा कोठी स्थित सेल्स टैक्स कार्यालय में खड़े कर दिए। विभागीय अधिकारियों की ओर से भौतिक सत्यापन कर पेनल्टी वसूल की जानी थी। लेकिन गत 19 मई की रात किसी समय आरोपी आए और दोनों ट्रकों को ले गए। इसके बाद ट्रक में लदे सामान को उतारकर खाली ट्रक छोड़ गए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह विभागीय अधिकारियों को इसका पता चला तो एसीटीओ भीमसिंह पुत्र चन्द्रभान जांगिड़ ने टाऊन थाने में मामला दर्ज करवाया। इसके बाद पुलिस ने दोनों ट्रक ड्राइवरों सहित सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने चुराया गया सामान भी बरामद कर लिया था, जो इस समय थाने में पड़ा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या बोले थाना प्रभारी</h3>
<p style="text-align:justify;">”कोर्ट ने ट्रक छोड़ने के आदेश दिए हैं। लेकिन सेल्स टैक्स विभाग ने प्रार्थना पत्र देकर ट्रक न छोड़े जाने को कहा है। ट्रक छोड़ने का मामला सेल्स टैक्स विभाग का है। थाने में सुरक्षार्थ ट्रक खड़े किए गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>मोहम्मद अनवर, थाना प्रभारी, टाउन</em></p>
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                <pubDate>Tue, 13 Jun 2017 09:04:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को विभाग की कार्यप्रणाली संबंधी जारी किए आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा से जुड़ा है देश का भविष्य, कोताही बर्दास्त नहीं होगी सीईओ, डीईओ को बैठक में बेहतर परिणाम देने की चुनौती कबूल करने के लिए कहा विभाग से संबंधित डाटा समय के साथ-साथ अपडेट रखने के लिए कहा मोहाली (सच कहूँ न्यूज)। शिक्षा मंत्री अरूणा चौधरी ने विभाग के समस्त अधिकारियों को सख्ती बरतते हुए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/education-minister-issues-orders-to-officer-about-functioning-of-the-department/article-839"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/education-ministor.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">शिक्षा से जुड़ा है देश का भविष्य, कोताही बर्दास्त नहीं होगी</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीईओ, डीईओ को बैठक में बेहतर परिणाम देने की चुनौती कबूल करने के लिए कहा </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>विभाग से संबंधित डाटा समय के साथ-साथ अपडेट रखने के लिए कहा </strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>मोहाली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> शिक्षा मंत्री अरूणा चौधरी ने विभाग के समस्त अधिकारियों को सख्ती बरतते हुए निर्देश जारी किए कि शिक्षा विभाग राष्ट्र के भविष्य बच्चों से जुड़ा हुआ है और इसीलिए इससे जुड़े अधिकारियों को अपनी जिम्मेवारी एवं जवाबदेही तय करनी होगी और ढीली एवं सुस्त कारगुजारी सहन नहीं की जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बैठक में दिए आदेश</h3>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली में तेजी लाकर कामकाज में देरी समाप्त करने, भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी सेवाएं देने एवं परिणामजनक कार्य करते हुए बेहतर कारगुजारी दिखाने के आदेश दिए। उन्होंने यह निर्देश पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड मोहाली परिसर में विभाग के मुख्यालय स्थित समस्त अधिकारियों व क्षेत्र में तैनात समस्त मंडल एवं जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यालय के अधिकारी तथा जिला शिक्षा अधिकारी शिक्षा विभाग का मुख्य केंद्र हैं और उनको बेहतर कार्य दिखाने की चुनौती कबूल करते हुये प्रशासनिक कारगुजारी दिखाने के साथ स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने के लिये पहलकदमियां करनी पड़ेंगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उच्च अधिकारियों की भी मानें</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि नीतिगत फैसलों संबंधी विभाग का कोई भी अधिकारी चाहे वह मुख्यालय या क्षेत्र में तैनात हो, कोई भी पत्र जारी करने से पूर्व उच्च अधिकारियों की स्वीकृति अवश्य लें। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े होने के कारण शिक्षा विभाग का हर कामकाज बहुत संवेदनशील है और इसको करते हुए कोई भी लापरवाही ना की जाये। उन्होंने कहा कि विभाग से संबंधित फील्ड में से किसी भी प्रकार का डाटा एकत्र करने के लिये कभी भी स्कूलों को एकदम निर्देश जारी कर अनावश्यक दबाव ना डाला जाये।</p>
<h3 style="text-align:justify;">परिणामों पर जताई चिंता</h3>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा मंत्री ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा हाल ही में घोषित परिणामों में ग्रेस अंक ना देने के फैसले को बड़ा मानते हुएकहा कि गुणात्मक शिक्षा के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये यह बढिया रूझान हैं जिसके साथ विद्यार्थी को अपनी वास्तविक काबलियत का पता लगेगा। इसके साथ ही कोई भी विद्यार्थी अपनी काबलियत अनुसार अपने भविष्य का सही फैसला ले सक ने में सक्षम हो सकेगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अदालती आदेशों की उल्लंघना नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">अतिरिक्त मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. जी वजरालिंगम ने बोलते हुए कहा कि किसी भी अध्यापक, कर्मचारी या सेवा निवृत कर्मचारी से संबंधित कोई भी कार्य हो, वह अपने स्तर पर पूरा कर लिया जाए और उनको किसी भी कार्य के लिए मुख्यालय ना आना पड़े। उन्होंने अदालती मामलों को गंभीरतापूर्वक लेते हुये कहा कि यदि किसी भी अधिकारी की लापरवाही के कारण अदालती आदेशों की उल्लंघना होती है तो संबंधित अधिकारी विरूद्ध कठोर कार्रवाई होगी।</p>
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</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2017 07:38:23 +0530</pubDate>
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