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                <title>Agriculture Ordinance - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Agriculture Ordinance RSS Feed</description>
                
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                <title>जिस दिन एमएसपी पर आँच आई, उसी दिन छोड़ दूंगा पद : दुष्यंत चौटाला</title>
                                    <description><![CDATA[धान, बाजरे और मक्का की फसल का दाना-दाना खरीदेगी सरकार बोले-खरीफ की फसल का भुगतान एक सप्ताह के अंदर होगा सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि केन्द्र सरकार के कृषि संबंधित नए अध्यादेशों में कहीं भी फसलों के एमएसपी को समाप्त करने की बात नहीं कही गई है। किसानों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/the-day-the-msp-hits-i-will-leave-the-post-on-the-same-day-dushyant-chautala/article-18596"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/the-day-the-msp-hits-i-will-leave-the-post-on-the-same-day-dushyant-chautala.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">धान, बाजरे और मक्का की फसल का दाना-दाना खरीदेगी सरकार</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>बोले-खरीफ की फसल का भुगतान एक सप्ताह के अंदर होगा</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़</strong>। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि केन्द्र सरकार के कृषि संबंधित नए अध्यादेशों में कहीं भी फसलों के एमएसपी को समाप्त करने की बात नहीं कही गई है। किसानों की फसल अनाज मंडियों में बिना किसी रूकावट के निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ही खरीदी जाएंगी और ज्यादा कीमत का अवसर मिलने पर किसान चाहेंगे तो ओपन मार्केट में भी बेच सकेंगे। जिस दिन अन्नदाताओं को उनकी फसल का एमएसपी देने की व्यवस्था पर कोई आंच आएगी, उसी दिन मैं अपना पद छोड़ दूंगा। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चैटाला ने रविवार को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर पत्रकारों के सवालों के जबाव में ये बातें कही।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">भूपेन्द्र हुड्डा कर रहे किसानों को गुमराह</h4>
<h6 style="text-align:justify;">पत्रकारों से बातचीत में डिप्टी सीएम ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने राजनीतिक स्वार्थ की खातिर भोले-भाले किसानों को गुमराह करने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि नए अध्यादेशों का विरोध करने वाले भूपेंद्र हुड्डा ने मुख्यमंत्री रहते हुए न केवल ओपन मार्किट की वकालत की थी बल्कि केन्द्र की तात्कालिक मनमोहन सिंह सरकार द्वारा गठित समिति के चेयरमैन के तौर पर इन सिफारिशों पर दस्तखत भी किए थे। उन्होंने हुड्डा से सवाल किया कि वे किसानों को बताएं कि उनके इस दोगली नीति को अपनाने के पीछे क्या मजबूरी है और कांग्रेस प्रदेश के किसानों को क्यूं गुमराह कर रही है।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">अध्यादेशों से खुलेगा खुशहाली का रास्ता</h4>
<h6 style="text-align:justify;">दुष्यंत चौटाला ने कहा कि यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में भी कांग्रेस पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग की वकालत की गई थी, लेकिन राजनीति से विवश कांग्रेसी आज व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं जबकि यह किसानों के लिए खुशहाली के नए रास्ते खोलने वाला कदम है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार अगले माह से खरीफ फसलों का एक-एक दाना तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। उन्होंने किसानों की शंकाओं को दूर करते हुए कहा कि बाजरा, धान के अलावा पहली बार मक्के की फसल की भी सरकार एमएसपी पर खरीद करेगी। सरकार द्वारा की गई खरीफ की फसल खरीद का भुगतान एक सप्ताह के भीतर-भीतर किसानों के खाते में कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेरे लिए किसान के हित सर्वोपरि है। किसानों को लेकर उनकी नीयत में न कभी कोई खोट आया और आगे कभी आएगा।</h6>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Sep 2020 21:06:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रीय कृषि मंत्री से मिलने गए किसान नेताओं में हाथापाई</title>
                                    <description><![CDATA[गुरनाम सिंह चढूनी बोले-जब अध्यादेश वापिस नहीं लेना तो बुलाया क्यों? नई दिल्ली/चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)। केन्द्र सरकार द्वारा कानून बनाने के लिए संसद में पेश किए गए तीन अध्यादेश पर हरियाणा के किसान संगठनों से जुड़े नेता गए तो केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से बात करने थे, लेकिन वे खुद ही आपस में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/scramble-among-farmer-leaders-who-went-to-meet-union-agriculture-minister/article-18461"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/scramble-among-farmer-leaders-who-went-to-meet-union-agriculture-minister.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">गुरनाम सिंह चढूनी बोले-जब अध्यादेश वापिस नहीं लेना तो बुलाया क्यों?</h3>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली/चंडीगढ़ (सच कहूँ ब्यूरो)</strong>। केन्द्र सरकार द्वारा कानून बनाने के लिए संसद में पेश किए गए तीन अध्यादेश पर हरियाणा के किसान संगठनों से जुड़े नेता गए तो केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से बात करने थे, लेकिन वे खुद ही आपस में भिड़ गए। वाकया दिल्ली में स्थित हरियाणा भवन का है। वहां किसान नेताओं का एक गुट भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी के साथ भिड़ गया। इस दौरान चढूनी और दूसरे ग्रुप के लोगों ने एक दूसरे को काफी बुरा भला कहा। एक वक्त पर हाथापाई तक की नौबत आ गई थी, लेकिन कुछ लोगों ने बीच-बचाव करके मामला शांत करवाया। दरअसल, हरियाणा के भिवानी से सांसद धर्मबीर सिंह के न्यौते पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य किसान संगठनों का एक दल केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलने के लिए दिल्ली गया था। उनसे मिलने से पहले गुरनाम सिंह चढूनी सांसद धर्मबीर के आवास पर प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ व अन्य भाजपा नेताओं से मिले। यहां चढूनी ने मांग रखी कि सरकार को इस अध्यादेश को वापस लेना चाहिए। इस पर उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश वापस नहीं होगा। सरकार इस पर कानून बनाएगी। इस पर चढूनी ने कहा कि जब सरकार ने तय कर लिया है कि अध्यादेश वापस नहीं होगा तो हमारे साथ बात करने का क्या फायदा। इसके बाद गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य कई किसान संगठनों ने बातचीत से इनकार कर दिया।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">केन्द्रीय कृषि मंत्री से मिले धनखड़ और तीन सांसद</h4>
<h6 style="text-align:justify;">हरियाणा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ और सांसद धर्मबीर सिंह, नायब सैनी व बृजेंद्र सिंह की अगुवाई में कुछ किसान संगठन केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिले। उन्होंने अपनी-अपनी बात रखी।</h6>
<h4 style="text-align:justify;">हरियाणा भवन में हुई कहासुनी</h4>
<h6 style="text-align:justify;">इसके बाद दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में गुरनाम सिंह चढूनी के साथ कुछ किसान संगठनों के नेताओं ने बहस शुरू कर दी। चढूनी को काफी भला-बुरा कहा गया। इस पर चढूनी ने भी बहसबाजी की। कुछ संगठनों ने चढूनी पर कांग्रेस से मिले होने का आरोप लगाया। आखिर में कुछ लोगों ने बीच-बचाव किया और मामला शांत करवाया। हरियाणा भवन के सुरक्षाकर्मियों ने समझाया। इसके बाद भी वे बहसबाजी करते रहे।</h6>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2020 20:58:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कृषि अध्यादेश: पंजाब में किसानों ने राजमार्गों को किया जाम</title>
                                    <description><![CDATA[जालंधर (सच कहूँ न्यूज)। भारत किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से शुरू किए गए तीन कृषि अध्यादेशों के खिलाफ दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग पर स्थित फगवाड़ा, ब्यास और हरिके के प्रमुख पुलों पर यातायात अवरुद्ध कर दिया। किसानों ने अमृतसर-दिल्ली राजमार्ग पर ब्यास पुल, माझा और मालवा क्षेत्रों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/agriculture-ordinance-farmers-jammed-highways-in-punjab/article-18456"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/agriculture-ordinance-farmers-jammed-highways-in-punjab.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>जालंधर (सच कहूँ न्यूज)</strong>। भारत किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से शुरू किए गए तीन कृषि अध्यादेशों के खिलाफ दिल्ली-अमृतसर राजमार्ग पर स्थित फगवाड़ा, ब्यास और हरिके के प्रमुख पुलों पर यातायात अवरुद्ध कर दिया। किसानों ने अमृतसर-दिल्ली राजमार्ग पर ब्यास पुल, माझा और मालवा क्षेत्रों को जोड़ने वाले हरिके पुल और होशियारपुर में श्री हरगोविंदपुर पुल की घेराबंदी कर यातायात रोक दिया है। अमृतसर और तरन तारन जिलों की पुलिस ने हालांकि सुबह ही यातायात रोक दिया था, लेकिन सैकड़ों यात्री कई घंटों तक फंसे रहे।किसान नेता ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को किसान विरोधी होने के साथ-साथ जनविरोधी तीनों कृषि अध्यादेशों को तुरंत रद्द करना चाहिए। इसी तरह, बिजली संशोधन विधेयक को भी संसद में पारित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा विरोध केवल केंद्र सरकार को जगाने के लिए नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के लिए भी है, जिन्हें तीन अध्यादेशों का कड़ा विरोध करना चाहिए। कृषक समुदायों के 200 से अधिक सांसद हैं। उन्हें किसानों की चिंताओं का भी समर्थन करना चाहिए। यदि इन अध्यादेशों को निरस्त नहीं किया जाता है, तो हम किसी भी सांसद या नेता को गांवों में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देंगे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">किसानों ने कि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहिए। पंजाब सरकार को भी अध्यादेशों को रद्द करने के लिए केंद्र पर दबाव डालना चाहिए। लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और अगर केंद्र सरकार अपने फैसले को वापस नहीं लेती है तो स्थिति और खराब हो जाएगी। किसान मूल्य उत्पादन और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौते, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश पर किसानों के उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 के रोल बैक की मांग कर रहे हैं। अध्यादेशों में निजी व्यापारियों को कृषि में शामिल करने और उपज की बाधा मुक्त बिक्री को बढ़ावा देने की मांग की गई है, लेकिन किसानों का तर्क है कि यह कॉपोर्रेट प्रभुत्व के बारे में है।</h6>
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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2020 17:25:03 +0530</pubDate>
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