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                <title>Home family - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>गर्मी में रखें छोटे बच्चों का ख्याल</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी के साथ ही चुभने वाली हीट, घमौरियां, रैशेज तथा अन्य कई प्रकार की समस्याएं जुड़ी होती हैं। इस मौसम में माँएं अक्सर अपने छोटे बच्चों को लेकर इस बात के लिए चिंतित रहती हैं कि उनकी देखभाल कैसे की जाए। यूं भी बच्चों के लिए गर्मी को सहन करना थोड़ा असुविधाजनक होता है। बच्चे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/take-care-of-young-children-in-summer/article-34037"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/care-of-children-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गर्मी के साथ ही चुभने वाली हीट, घमौरियां, रैशेज तथा अन्य कई प्रकार की समस्याएं जुड़ी होती हैं। इस मौसम में माँएं अक्सर अपने छोटे बच्चों को लेकर इस बात के लिए चिंतित रहती हैं कि उनकी देखभाल कैसे की जाए। यूं भी बच्चों के लिए गर्मी को सहन करना थोड़ा असुविधाजनक होता है। बच्चे इस मौसम में आराम महसूस कर सकें यह प्रयास तो किया ही जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सही कपड़े पहनाएं</h4>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों के लिए सूती कपड़े सबसे अच्छे होते हैं, जबकि अन्य फैब्रिक से बने कपड़ों के कारण बच्चों को घमौरियां और हीट रैशेज आने की संभावना होती है। जब आप उसे बाहर ले जा रही हों तो पूरी बांह वाले कपड़े ही पहनाएं। उसे गर्मियों में पहनाई जाने वाली समर हैट पहनाएं, जिसकी रिम चौड़ी हो।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नियमित अंतराल पर डाइपर बदलें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यूं तो हर 3 घंटे बाद बच्चे का डाइपर बदल देना चाहिए। गर्मियों के दौरान अधिक ध्यान रखें क्योंकि नमी और पसीने के कारण बैक्टीरिया उत्पन्न हो सकते हैं, जिस कारण डाइपर रैशेज हो सकते हैं। इस बात का भी ध्यान रखें कि डाइपर बदलते समय या मल साफ करते समय पहले उस भाग को धोएं और सुखा कर ही डाइपर पहनाएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बच्चे को हाइड्रेटेड रखें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों के दौरान बच्चों में डिहाइड्रेशन की समस्या होना बेहद आम है। यदि आप स्तनपान करवा रही हैं और उसकी मांग के अनुसार उसे दूध पिला रही हैं तो आप अपने बच्चे को उचित तरीके से हाइड्रेट कर रही हैं। यदि आपने बच्चे का दूध छुड़ाया हुआ है तो ध्यान रखें कि गर्मियों के दौरान उसकी भूख बहुत कम हो जाती है। उसे अन्य तरल पदार्थ जैसे फलों का रस, छाछ या मिल्क शेक आदि पिलाएं। खिचड़ी की अपेक्षा ठंडे पेय बच्चों को अधिक आराम पहुंचाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>तेल से मालिश न करें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों के दौरान त्वचा पर तेल लगाने से फायदे की जगह नुक्सान ही होता है। यदि इसे अच्छी तरह नहीं धोया गया तो त्वचा में जोड़ों के स्थान पर यह रह जाता है जिस कारण हीट रैशेज, खुजली एवं फोड़े आदि की समस्याएं हो सकती हैं। विशेषकर नैप्पी वाले भाग में, गर्दन के पीछे, पीठ और कंधों पर तेल रह जाता है। ध्यान रहे कि इन भागों को अच्छी तरह धोएं। इसके अलावा बच्चे के पूरे शरीर पर पाऊडर न लगाएं, क्योंकि पसीना आने पर पाऊडर उस स्थान पर जम जाता है, जिस कारण त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नियमित तौर पर नहलाएं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों में बच्चे को रोज अच्छे से नहलाएं। शाम के समय उसे ठंडा स्पंज बाथ दें और बाद में क्रीम से मसाज करें ताकि वह अच्छे से सो सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सुबह के समय बाहर न ले जाएं</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चे को धूप से बचाने के लिए सुबह 10 से शाम 5 बजे तक बच्चे को बाहर न ले जाएं। सूर्यास्त के बाद उसे थोड़े समय के लिए बाहर ले जाएं। यदि आपके बच्चे की उम्र 2 वर्ष से अधिक है तो गर्मियों में उसे वॉटर स्पोर्ट्स के लिए प्रोत्साहित करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कमरे का तापमान स्थिर रखें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यदि आप ए.सी. इस्तेमाल कर रही हैं तो कमरे का तापमान 24 डिग्री पर स्थिर रखें। तापमान में परिवर्तन होने से बच्चे को सर्दी, खांसी की समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि नहाने के बाद बच्चा सीधे ए.सी. के सामने न बैठे।</p>
<p style="text-align:justify;">गर्मियों के दौरान त्वचा पर तेल लगाने से फायदे की जगह नुक्सान ही होता है। यदि इसे अच्छी तरह नहीं धोया गया तो त्वचा में जोड़ों के स्थान पर यह रह जाता है जिस कारण हीट रैशेज, खुजली एवं फोड़े आदि की समस्याएं हो सकती हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 14:15:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मियों में पहनें सूती वस्त्र</title>
                                    <description><![CDATA[वस्त्रों का सही चुनाव व्यक्तित्व में निखार पैदा करता है। वस्त्रों का चुनाव करते समय न केवल उम्र व फैशन बल्कि मौसम की ओर ध्यान देना भी अति आवश्यक है। मौसम के अनुसार वस्त्र पहनने से आरामदायक तो होते ही हैं, साथ ही व्यक्तित्व में भी निखार पैदा करते हैं। सर्दियों में तो वस्त्रों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/wear-cotton-in-summer/article-32732"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/cotton-clothes.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">वस्त्रों का सही चुनाव व्यक्तित्व में निखार पैदा करता है। वस्त्रों का चुनाव करते समय न केवल उम्र व फैशन बल्कि मौसम की ओर ध्यान देना भी अति आवश्यक है। मौसम के अनुसार वस्त्र पहनने से आरामदायक तो होते ही हैं, साथ ही व्यक्तित्व में भी निखार पैदा करते हैं। सर्दियों में तो वस्त्रों का चुनाव करना मुश्किल नहीं होता परन्तु गर्मियां अपने साथ कड़कती धूप लेकर आती हैं। गर्मी की गर्माहट में अगर थोड़ा-सा सोच कर कपड़े पहने जाएं तो ये न केवल अच्छे लगेंगे बल्कि आपको गर्मी के दिन भी ठंडक व ताजगी प्रदान करेंगे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">गर्मी में हमें हल्के, शीतलता प्रदान करने वाले वस्त्र पहनने चाहिएं। ये सभी विशेषताएं होती हैं सूती कपड़े में। सूती कपड़े गर्माहट खत्म कर शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं। गर्मियों में नायलोन, सिल्क आदि वस्त्रों को बिल्कुल नहीं पहनना चाहिए क्योंकि ये पसीने को सोखते नहीं हैं। साथ ही ये हवा को शरीर तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न करते हैं। इन्हें गर्मियों में पहनने से गर्मी अनुभव होती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ये वस्त्र धोने में तो आसान होते हैं साथ ही जल्दी सूखने वाले होते हैं परन्तु गर्मियों में ये अनुकूल नहीं होते। पिछले कुछ सालों से तो सूती वस्त्रों के प्रति यह धारणा भी बदल गई है कि ये आकर्षणहीन होते हैं। भारतीय सूती वस्त्रों की मांग विदेशों में भी कुछ कम नहीं परन्तु हमारे देश में सूती वस्त्र बहुत ही कम कीमतों में उपलब्ध हैं। सूती वस्त्र न केवल सस्ते बल्कि टिकाऊ भी होते हैं। सिंथेटिक वस्त्रों की तुलना में इनकी कीमतें काफी कम हैं। साड़ी, सूट, टी-शर्ट आदि सभी वस्त्रों को बनाने में सूती कपड़े का प्रयोग बढ़ता ही जा रहा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">त्वचा को इंफेक्शन से बचाने के लिए सूती कपड़े का प्रयोग उत्तम है। अगर आपको त्वचा संबंधी कोई रोग हो तो डॉक्टर आपको सूती वस्त्र पहनने की ही सलाह देते हैं क्योंकि त्वचा के स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छे सूती वस्त्र हैं। सूती वस्त्र त्वचा को सूखेपन व सनटैन से बचाकर रखते हैं। गर्मियों में वस्त्रों का चुनाव करते समय रंगों के चुनाव को भी गंभीरता से लेना चाहिए। गर्मियों में हल्के रंगों का चुनाव करें जो उष्णता समाप्त कर शीतलता प्रदान करें। पेस्टल शेड्स हल्का हरा, हल्का नीला, गुलाबी, सफेद रंग पहनें। लाल, हरा, नीला, संतरी आदि गाढ़े रंग बिल्कुल न पहनें। विशेष अवसरों जैसे शादी या पार्टी के अवसर पर अगर आप सूती वस्त्र पहनना पसंद नहीं करते तो जार्जेट, चंदेरी, शिफान भी पहन सकते हैं परन्तु रेशमी वस्त्रों का प्रयोग बिल्कुल न करें।</h6>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 15:30:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मी में यूं करें त्वचा की देखभाल</title>
                                    <description><![CDATA[1. गर्मी के दिनों में त्वचा तैलीय हो जाती है और इसमें बैक्टीरिया भी आसानी से पनपते हैं, जो मुहांसों का कारण बनते हैं। इससे बचने के लिए समय-समय पर ठंडे पानी से चेहरा धोएं या फिर गुलाबजल से चेहरा साफ करें। 2. धूप में निकलने से बचें और अगर निकलना ही पड़े तो चेहरे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/take-care-of-in-like-this-in-summer/article-32633"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/summer-skin-care.jpg" alt=""></a><br /><p>1. गर्मी के दिनों में त्वचा तैलीय हो जाती है और इसमें बैक्टीरिया भी आसानी से पनपते हैं, जो मुहांसों का कारण बनते हैं। इससे बचने के लिए समय-समय पर ठंडे पानी से चेहरा धोएं या फिर गुलाबजल से चेहरा साफ करें।</p>
<p>2. धूप में निकलने से बचें और अगर निकलना ही पड़े तो चेहरे के साथ ही हाथों और अन्य जगह की त्वचा पर पर सनस्क्रीन क्रीम लगाएं और घर लौटने के बाद त्वचा पर बर्फ रगड़ना न भूलें।</p>
<p>3. इस मौसम में ज्यादा तेल व मसालेदार भोजन से बचें। इससे आपकी त्वचा में तैलीयता बढ़ेगी और चेहरे पर पिंपल्स और मुहांसे होने की संभावना बढ़ जाएगी। इनकी जगह आप ताजे फल, सब्जियां और जूस का सेवन करें।</p>
<p>4. गर्मी में आने वाले ताजे फलों का प्रयोग त्वचा पर लगाने, मसाज करने या फिर फेस पैक के रूप में कर सकते हैं। ये आपकी त्वचा को ताजगी भी देंगे और त्वचा बेदाग, निखरी भी नजर आएगी।</p>
<p>5. गर्मी के दिनों में चेहरा धोने के बाद तौलिए से पोंछने के बजाय यूंही सूखने दें या फिर हाथों से थपथपाएं। इससे त्वचा में जरूरी नमी बनी रहेगी और त्वचा रिफ्रेश दिखेगी।</p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Apr 2022 15:02:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओट्स और दलिया स्टोर करने के अपनाएं ये आसान टिप्स</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश के मौसम में बेसन, चावल की तरह ओट्स और दलिया में भी चींटी या कीड़े लग जाते हैं। हालांकि, अगर इन दोनों ही चीजों को स्टोर करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाए तो इन्हें लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ गजब के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/follow-these-easy-tips-to-store-oats-and-porridge/article-32488"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/oats-and-oatmeal-store.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बारिश के मौसम में बेसन, चावल की तरह ओट्स और दलिया में भी चींटी या कीड़े लग जाते हैं। हालांकि, अगर इन दोनों ही चीजों को स्टोर करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाए तो इन्हें लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ गजब के टिप्स।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ओट्स को स्टोर करने के टिप्स :</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ओट्स को खुले पैकेट में रखने की जगह किसी एयर टाइट डिब्बे में रखें। लेकिन ऐसा करने से पहले बचे हुए ओट्स को 5 से 7 मिनट तक मीडियम फ्लेम पर ड्राई रोस्ट कर लें। इसके बाद इसे ठंडा होने के लिए रख दें। ओट्स के ठंडा होने पर इसे एयर टाइट कंटेनर में बंद करके स्टोर कर दें। ध्यान रखें कि डिब्बे जरा सा भी गीला नहीं होना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>करी पत्ता का इस्तेमाल</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अगर आपके ओट्स या दलिये में नमी आने के कारण उसमें चींटी या अन्य कीड़े लग रहे हैं तो ऐसी स्थिति में ओट्स-दलिये के डिब्बे में 3 से 4 करी पत्ते डाल दें। पत्ते सूख जाएं तो नए ताजे पत्तों का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से कीड़े या चींटी नहीं लगेंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>दलिया को स्टोर करने का तरीका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">दलिया को स्टोर करने के लिए एक सिंपल तरीका आजमाएं। इसके लिए एक कढ़ाई में घी डालें। जैसे ही घी पिछल जाए उसमें दलिया मिक्स कर दें। करीबन 10 मिनट तक इसे रोस्ट करने के बाद दलिये में हल्दी मिक्स करें। इसे आधे घंटे तक आपको मीडियम फ्लेम पर रोस्ट करना है, इसके साथ ही इसे बीच-बीच में चलाते रहें। ध्यान रखें कि गैस का फ्लेम लो हो। दलिया रोस्ट होने के बाद इसे नॉर्मल टेम्प्रेचर पर ठंडा कर लें। इसके बाद इसे एयरटाइट कंटेनर में बंद करके स्टोर करें।</p>
<p style="text-align:right;"><em>-आशा मेहता</em></p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/follow-these-easy-tips-to-store-oats-and-porridge/article-32488</link>
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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 15:52:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपने बच्चों को दें हैल्दी फूड</title>
                                    <description><![CDATA[हर माँ की एक ही शिकायत होती है कि उनका बच्चा कुछ खाता ही नहीं है या फिर ऐसी ही चीजें खाना पसंद करता है, जो टेस्टी तो होती हैं लेकिन हेल्दी नहीं। इस लेख में कुछ ऐसे ही फूड्स के बारे में बताया गया है जो बच्चे की सेहत में चार-चांद लगा सकते हैं। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/give-healthy-food-to-your-kids/article-31651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/kids-healthy-food.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हर माँ की एक ही शिकायत होती है कि उनका बच्चा कुछ खाता ही नहीं है या फिर ऐसी ही चीजें खाना पसंद करता है, जो टेस्टी तो होती हैं लेकिन हेल्दी नहीं। इस लेख में कुछ ऐसे ही फूड्स के बारे में बताया गया है जो बच्चे की सेहत में चार-चांद लगा सकते हैं। आइए जानते हैं कि बच्चे के आहार में क्या शामिल करें, जो उसे हैल्दी बनाए रखे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>हाई एनर्जी फूड</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को हाई कैलोरी फूड न देकर हाई एनर्जी फूड देना चाहिए। हाई कैलोरी फूड शरीर में फैट की मात्रा को बढ़ा देता है, जिससे बच्चे को नुकसान पहुंचता है और उसकी आदतें भी खराब होती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>गाय का दूध</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जब तक आपका शिशु स्तनपान कर रहा है तो एक वर्ष तक शिशु के लिए इससे अच्छा और कोई भोजन नहीं है। उसके बाद दिन में 3 बार गाय का दूध दिया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>केला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चे को केला खाने के लिए दें, क्योंकि केले में बहुत से तत्व जैसे फाइबर, पोटेशियम विटामिन ‘सी’ और विटामिन ‘बी’ 6 प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसके अलावा बच्चे को केले की प्यूरी मफिन, पैन-केक रूप में दिया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आड़ू</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">आड़ू पौष्टिक गुणों से भरपूर है क्योंकि इसमें बहुत से फाइबर और तत्व होते हैं जैसे कि फाइबर, विटामिन ‘ए’, और विशेषकर विटामिन ‘सी’ होता है। यदि बच्चा आड़ू नहीं खाना चाहता तो उसको उसका रस भी निकाल कर दे सकते हैं या उसकी स्मूदी या फिर मिल्क शेक भी दे सकते हैं। जो बच्चों को बहुत टेस्टी लगता है और बच्चे इसका खुशी-खुशी सेवन करते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>नाशपाती</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को, नाशपाती गुणों से भरपूर, ठोस पोषक भोजन के रूप में दिया जाता है और यह स्वाद में भी बहुत टेस्टी होती है, इसलिए बच्चे इसे बिना ना नुकुर के खा लेते हैं। इसमें फाइबर, आयरन, विटामिन बी 6 और विटामिन ‘सी’ अधिकतम मात्रा में होते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>मटर</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">मटर भी बच्चों के लिए भोजन के रूप में एक उपयोगी और अच्छा स्रोत माना जाता है, क्योंकि इसमें बहुत से तत्व जैसे-फाइबर, विटामिन ‘सी’, मैग्नीशियम, फास्फोरस, विटामिन ‘ए’ और ‘बी’ साथ में नियासिन आदि पाए जाते हैं, जो कि बच्चों के शारीरिक विकास में बहुत सहायक हैं। मटर को किसी भी रूप में बच्चों को खिलाएं फिर चाहे वह खिचड़ी हो, मटर का सूप चाहे वह मटर की प्यूरी ही क्यों ना हो।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>शकरकंद</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">शकरकंद कम फैट वाला और फाइबर, मैग्नीशियम, विटामिन बी6, विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘सी’ आदि पोषक तत्वों से भरपूर होता है। छोटे बच्चों के लिए शकरकंद प्रथम आहार के रूप में सबसे बढ़िया आहार है। छह महीने के बाद इसे बड़ी आसानी से बच्चों को दिया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>घी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय खाने में देसी घी का विशेष महत्व है चाहे वह किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति हो। जच्चा और बच्चा के लिए तो खासतौर पर देसी घी को बहुत उपयोगी माना गया है। जब बच्चा 8 महीने का हो जाए तब उसके भोजन में थोड़ा सा घी दिया जा सकता है, लेकिन मात्रा कम ही रखनी चाहिए ताकि बच्चे को आराम से हजम हो सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>नट्स</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के लिए नट्स यानि कि मेवा भी बहुत उपयोगी रहते हैं। शुरू-शुरू में बादाम, पिस्ता, काजू, अंजीर जैसे नट्स को पीसकर उसका पाउडर बनाकर बच्चों के दूध या खाने की चीजों में मिलाया जा सकता है। बाद में जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो इन नट्स के लड्डू या बर्फी बनाकर भी बच्चों को खिलाया जा सकता है, लेकिन अत्याधिक मात्रा बच्चों के लिए नुकसानदायक है, इसलिए हफ्ते में कम से कम सिर्फ दो बार देना सही है। कुछ बच्चों में इन नट्स से एलर्जी की समस्या भी होती है। अत: उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही दे।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>दलिया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">दलिया में फाइबर और कम चिकनाई होती है। जब बच्चों को दलिया देना हो तो इसके लिए, सोया दलिया, खीर, पैनकेक, बादाम आदि के साथ मिलाकर दिया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>हैल्दी रागी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">रागी एक हेल्दी फूड है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन बी 1, बी 2 और बी 6 अच्छी मात्रा में होते हैं। इसका दलिया, केक, डोसा, इडली, लड्डू, खीरा, रोटी या कुकीज के रूप में बच्चों को दिया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आलू</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के लिए सबसे पहला आहार आलू ही माना जाता है। शुरू में बच्चों को थोड़ी मात्रा में आलू दिया जा सकता है जिससे उन्हें पेट में गैस की शिकायत न हो। आलू में खनिज, विटामिन के अलावा कैरोटेनोयड्स और प्राकृतिक फिनोयल जैसे रसायन भी होते हैं। आलू में सबसे अधिक काबोर्हाइड्रेट होता है। आलू को खिचड़ी, सूप या प्यूरी के रूप में दिया जा सकता है।</p>
<h5 style="text-align:right;"><em><strong>-मोनिका अग्रवाल</strong></em></h5>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 15:02:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8230;अपनाएं ये टिप्स, आपके बच्चे बनेंगे आदर्श नागरिक</title>
                                    <description><![CDATA[अक्सर देखने में आता है कि छोटे बच्चे अपने जन्मदाता यानि माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं, जैसे आदतें, बोल-चाल, तौर तरीके आदि। बच्चों के समक्ष उनके माता-पिता उदाहरण होते हैं और मुश्किल पड़ने पर बच्चे उनके द्वारा बताए गए मार्गदर्शन का प्रयोग भी करते हैं। इस तरह छोटी आयु से ही बच्चों को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/your-children-will-become-ideal-citizens/article-31650"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/ideal-citizens.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अक्सर देखने में आता है कि छोटे बच्चे अपने जन्मदाता यानि माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं, जैसे आदतें, बोल-चाल, तौर तरीके आदि। बच्चों के समक्ष उनके माता-पिता उदाहरण होते हैं और मुश्किल पड़ने पर बच्चे उनके द्वारा बताए गए मार्गदर्शन का प्रयोग भी करते हैं। इस तरह छोटी आयु से ही बच्चों को इसकी आदत पड़ जाती है। जैसे-जैसे बच्चे उम्र के अगले पड़ाव की ओर बढ़ते हैं, वे माता-पिता के व्यवहार और कार्यों का अनुसरण करने लग जाते हैं। ऐसे ही माता-पिता की बुद्धिमता और आदतें भी बच्चों में आ जाती है। इसलिए बच्चों को अच्छी और बुरी आदतों के बीच का अन्तर समझाना बेहद जरूरी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>1. बच्चों को फास्ट फूड की बजाय स्वास्थ्यवर्धक घर का भोजन खाने की आदत डालें। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>2. बच्चों को हमेशा बैठने के लिए न कहें बल्कि उन्हें मेहनत के कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें और हो सके तो उनका मार्गदर्शन भी करें। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>3. परिवार के सभी सदस्य प्रेमभाव से एक साथ भोजन करें। इससे बच्चों के दिल में अपनेपन की भावना बढ़ेगी और उनके अंदर सौहार्द भाव बढ़ेगा। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>4. बच्चों को स्वच्छता रखने और अपनी चीजें व्यवस्थित ढंग से रखने के लिए प्रेरित करें और प्रेम से समझाकर इसकी आदत डालें। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>5. जैसे ही आपके बच्चे जिम्मेदार बन जाएं तो उन्हें पैसे देकर घरेलू वस्तुएं खरीदने के लिए भेजें और मेहनत से कमाए गए पैसे का मूल्य भी समझाएं, ताकि वे फिजूलखर्ची से बचे रहें।</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>6. बच्चों के अंदर इन्सानियत का भाव भरें यानि उन्हें अपनी चीजें दूसरों से शेयर करना सिखाएं। ताकि वे जरूरतमंदों की मदद करने को प्रेरित हों। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>7. विनम्रता का भाव हर जगह प्रशंसा पाता है, इसलिए बच्चों के सामने हमेशा विनम्रता का भाव प्रकट करें और उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>8. बच्चों में प्रकृति के प्रति सजगता का भाव भरें यानि जानवरों, पक्षियों के बारे में उन्हें विस्तार से जानकारी दें और समझाएं कि ये भी हमारी तरह इस प्रकृति का हिस्सा हैं, इनसे हमेशा प्रेम करें। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>9. बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना सिखाएं और नियमित व्यायाम और योगाभ्यास के लिए प्रेरित करें। </strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>10. बच्चों को बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श और सम्मान व प्रेम का भाव रखना सिखाएं, ताकि वे आदर्श नागरिक बनें।</strong></h5>
<p> </p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 15:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों के दोस्त और मददगार बनें अभिभावक</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों को टीनएज में व्यवहार संबंधी कई समस्याएं आती हैं। पेरेंटस भी उस व्यवहार से एक हद के बाद परेशान हो जाते हैं। टीनएज में हार्मोंस संबंधी बदलाव बच्चों को चिड़चिड़ा बना देते हैं। बच्चे स्वयं को बड़ा महसूस करते हैं। उन्हें लगता है माता-पिता को जो वे कह रहे हैं, वह सभी ठीक ठीक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/be-friends-with-children/article-31361"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/children-parents-relationship.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बच्चों को टीनएज में व्यवहार संबंधी कई समस्याएं आती हैं। पेरेंटस भी उस व्यवहार से एक हद के बाद परेशान हो जाते हैं। टीनएज में हार्मोंस संबंधी बदलाव बच्चों को चिड़चिड़ा बना देते हैं। बच्चे स्वयं को बड़ा महसूस करते हैं। उन्हें लगता है माता-पिता को जो वे कह रहे हैं, वह सभी ठीक ठीक है। अब हम बड़े हैं। माँ-बाप को हमारी बात माननी चाहिए जबकि वे अभी भी अपरिपक्व होते हैं। न तो वे इतने छोटे होते हैं कि हम उनकी बात को पूरी तरह टाल सकें या बातों में फुसला सकें, न ही इतने बड़े होते हैं कि हम उनकी हर बात मानें। ऐसे में शुरूआत होती है आपस में टकराव की। अगर पेरेंटस कुछ बातों पर ध्यान दें तो टीनएज बच्चों के साथ मधुर रखने में मदद मिल सकती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वयं को ढालें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों की पसंद का ध्यान रखें। उनके खाने की पसंद का ध्यान रखें, खेलने व पहनने की पसंद का ध्यान रखें। अपनी सोच कि क्या बनना है, बच्चों को यह गेम खेलना चाहिए या इस प्रकार की ड्रेस पहननी चाहिए, उन पर न थोपें। बस उन्हें यह बताएं कि यह ठीक है या नहीं। फैसला उन पर छोड़ दें। उनकी पसंद को समझें और घर का वातावरण उसी के मुताबिक ढालने की कोशिश करें ताकि घर में शांत वातावरण बना रहे।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>थोड़ी छूट दें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को भी स्पेस चाहिए, इसलिए उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए थोड़ा समय और छूट दें ताकि वे समाज में जगह बना सें। इसका अर्थ यह भी नहीं कि उन्हें इतनी आजादी दे दें कि वे अपनी मर्जी के मालिक बन जाएं और बुरा भला न पहचानें। आजादी दें पर अपनी आंखें और कान खुले रखें। जहां गलती करें, प्यार से उन्हें समझाएं ताकि उन्हें अहसास हो कि माता पिता ठीक कह रहे हैं। अपनी मर्जी थोपे नहीं बल्कि उसकी भलाई बुराई से वाकिफ कराएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>फैसले लेने का हक भी दें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चे जब बड़े होने लगते हैं तो वे उम्मीद करते हैं कि पेरेंटस उनके द्वारा लिए फैसलों की कद्र करें और उनकी भावनाओं को समझें। छोटे छोटे फैसले उन्हें लेने दें, जिनसे उनका हौसला बुझेगा और जीवन में कुछ कर पाने की उम्मीद भी बेहतर होगी।<br />
इनसे माता-पिता और बच्चों में मधुर संबंध भी बनेंगे। उनकी हर छोटी चीज पर हम अगर फैसला लेते हैं तो उनकी पर्सनेलिटी में निखार नहीं आ पाएगा, न ही वे इंडिपेंडेंट बन पाएंगे। आत्म विश्वास बढ़ने से उनका व्यक्तित्व निखरेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों को प्यार और इज्जत दें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्यार और इज्जत दो ऐसे हथियार हैं, जिनसे आप किसी भी रिश्ते में मजबूती ला सकते हैं। अगर हम ये हथियार बच्चों के साथ प्रयोग में लाएं तो बच्चे भी बदले में हमें वही देंगे जो हम उन्हें देते हैं। बच्चों को बात बात पर गुस्सा न करें, न ही उन्हें बहुत उपदेश दें। बच्चों से जिस व्यवहार की उपेक्षा आप करते हैं वैसा व्यवहार आप उनके साथ करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>भरोसा करें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अगर हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे तो विश्वास करें कि वे कुछ गलत नहीं करेंगे। बच्चों को कुछ आजादी दें कि वे लाइफ में आगे बढ़ें पर सही रास्ते अपना कर। माता-पिता का साथ हमेशा उनके साथ है, इसका भरोसा उन्हें दिलाएं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>सहायता करें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई बार बच्चे स्थिति को पूरी तरह समझ नहीं पाते और गलती कर बैठते हैं। ऐसे में माता-पिता को धीरज बरतते हुए उनकी मदद करनी चाहिए। उन्हें डांटे-फटकारें नहीं, सही रास्ता दिखाएं। रास्ता इस तरह से दिखाएं कि उन्हें सही गलत की पहचान हो सके और आपके सही मार्गदर्शन पर वे गर्व महसूस कर सकें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>माता-पिता आपस में न लड़ें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के सामने माता-पिता को लड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि आपसी लड़ाई से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कभी कभी बच्चे इसका लाभ उठाते हैं। अगर आप दोनों बहस किए बिना, लड़े बिना गृहस्थी की गाड़ी का बढ़ाते हैं तो वह समझ जाएंगे कि हम इन्हें ब्लैकमेल नहीं कर सकते, न ही बुद्धू बना सकते हैं। जब आप अकेले हों तो आपसी गिले शिकवे तभी डिस्कस करें और हल ढूंढने का प्रयास करें। रिश्तेदारों की कमियां भी बच्चों के सामने डिस्कस न करें।</p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 10:45:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य व सौंदर्य बढ़ाता है संतरा</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य वर्धक फल संतरे की यूं तो कई किस्में होती हैं, किन्तु ढीले छिलके और सख्त छिलके की दो प्रमुख किस्मों के संतरे बाजार में अधिक पाए जाते हैं। भारत में संतरे की व्यापक पैदावार नागपुर में होती है। संतरे के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है, चुस्ती फुर्ती बढ़ती है, त्वचा में निखार आता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/orange-increases-health-and-beauty/article-31360"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/orange.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य वर्धक फल संतरे की यूं तो कई किस्में होती हैं, किन्तु ढीले छिलके और सख्त छिलके की दो प्रमुख किस्मों के संतरे बाजार में अधिक पाए जाते हैं। भारत में संतरे की व्यापक पैदावार नागपुर में होती है। संतरे के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है, चुस्ती फुर्ती बढ़ती है, त्वचा में निखार आता है तथा सौंदर्य में वृद्वि होती है। यह जहां विटामिन सी से भरपूर होता है, वहीं इसमें विटामिन बी, विटामिन ए, फोलिक अम्ल, कैल्शियम, लोहा, प्रोटीन, काबोर्हाइडेऊट तथा गंधक आदि भी प्रचुर मात्र में पाए जाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>यहां प्रस्तुत हैं संतरे के उपयोग:-</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">संतरे के मौसम में इसका नियमित सेवन करते रहने से मोटापा कम होता है और बिना डाइटिंग किए ही संतरे की मदद से आप अपना वजन कम करके हल्की और खिली-निखरी रह सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">संतरा आपकी त्वचा में निखार लाता है तथा चेहरे की कांति को बढ़ाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">संतरे का नियमित सेवन करने से बवासीर की बीमारी में लाभ होता है। रक्तस्राव को रोकने की इसमें अद्भूत क्षमता है।</li>
<li style="text-align:justify;">दिल के मरीज को संतरे का रस शहद में मिलाकर देने से आश्चर्यजनक लाभ मिलता है।</li>
<li style="text-align:justify;">संतरे का एक गिलास रस तन-मन को शीतलता प्रदान करके थकान एवं तनाव दूर करता है।</li>
<li style="text-align:justify;">अपच, कै, और मिचली की शिकायत होने पर संतरा खाने से बार-बार प्यास लगनी बंद हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">पेशाब रूक जाने या इसमें जलन होने पर संतरे का सेवन करने से लाभ मिलता है।</li>
<li style="text-align:justify;">संतरे की तरह इसका छिलका भी गुणकारी होता है। इसके छिलके से तेल निकाला जाता है। शरीर पर इस तेल की मालिश करने से मच्छर आदि नहीं काटते।</li>
<li style="text-align:justify;">संतरे के छिलके को चेहरे पर रगड़ने से सौंदर्य में वृद्धि होती है। त्वचा में निखार आता है, कील-मुहांसे और झाइयां खत्म होती हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">संतरे के छिलके को पानी में उबालकर, चीनी मिलाकर पीने से भूख खुलकर लगती है तथा अपच में आश्चर्यजनक लाभ मिलता है।</li>
<li style="text-align:justify;">संतरे के ताजे फूल को पीसकर उसका रस सिर पर लगाने से बालों की चमक एवं कालापन बढ़ता है तथा बाल जल्दी बढ़ते हैं।</li>
</ul>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/health/orange-increases-health-and-beauty/article-31360</link>
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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 10:43:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीवन से ऊब हटाता है नृत्य</title>
                                    <description><![CDATA[इसमें कोई शक नहीं कि डांस जीवन से ऊब मिटाकर उसे सरस बनाता है, सौंदर्य बोध बढ़ाता है और विभिन्न कलाओं में रूचि जगाता है। लय और ताल ही तो जीवन है। धरती के कण कण में सुर ताल लय का समावेश है। सूर्योदय से पूर्व नींद से जागते ही सुमधुर संगीत की धुन आपको […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/dance-removes-boredom-from-life/article-31212"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/dance.jpg" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">इसमें कोई शक नहीं कि डांस जीवन से ऊब मिटाकर उसे सरस बनाता है, सौंदर्य बोध बढ़ाता है और विभिन्न कलाओं में रूचि जगाता है। लय और ताल ही तो जीवन है। धरती के कण कण में सुर ताल लय का समावेश है। सूर्योदय से पूर्व नींद से जागते ही सुमधुर संगीत की धुन आपको बिस्तर छोड़ थिरकने व बॉडी मूवमेंट देने को बाध्य कर देती है। जड़ता दूर होती है। शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। सुरों की लय और नृत्य की झंकार मिल कर मन प्रफुल्लित कर देते हैं। ऐसे में मारक नेगेटिव थॉट्स कभी नहीं आएंगे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मनोवैज्ञानिक इस बात की पुष्टि करते हैं और मानते हैं कि डांस स्टेऊस बूस्टर का काम करता है। टेंशन दूर कर मन को बोझिलता से मुक्ति दिलाता है। जिन बच्चों में बिहेवियर प्रॉब्लम होती हैं और जो हाइपर होते हैं, आॅटिस्टिक या मेंटली चैलेंज्ड होते हैं, उन्हें म्यूजिक थेरेपी से काफी फायदा होता है। उनमें एकाग्रता बढ़ती है। वे चीजों पर फोकस करना सीखते हैं जो धीरे-धीरे दिमाग के लिए सही दिशा निर्धारण करने में सहायक होता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वर्तमान जीवन शैली का सबसे विपरीत असर बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों का मन कोमल और गीली मिट्टी सा होता है, जिसे बड़े अपनी इच्छानुसार ढाल सकते हैं लेकिन बड़े भी क्या करें। उन पर भी जमाने के साथ कदमताल मिलाने का प्रेशर है। जब बच्चे कोर्स की किताबों में सर खपा-खपा कर परेशान हो जाते हैं तो उन्हें ब्रेक चाहिए।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ऐसे में डांस एक अच्छा स्ट्रेस रिलीवर है। न बाहर जाने की जहमत, न पैसों का खर्च, बस अच्छा सा म्यूजिक लगा कर थिरक उठे कदम। यह बदलाव ऊर्जा के साथ बच्चों को आत्मविश्वास भी देगा। बच्चे चाहें तो मम्मी भी उन्हें जॉइन कर सकती हैं। यह क्रिएटिव चैनल बच्चों को खुराफाती होने से भी बचाएगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">नये जमाने का अभिशाप हैं कुछ ऐसी बीमारियां जिनका कारण अधिकतर अत्यंत सुख सुविधा पूर्ण जीवन को माना जाता है। धनाढ्य श्रेणी में इतने ऐशपरस्त और आलसी लोग मिलेंगे, जो किसी भी काम के लिए हाथ तक हिलाना नहीं जानते। उनका बस चले तो वे रिमोट कंट्रोल के बटन भी न दबाकर मात्र पलक झपकाकर ही अपना मकसद पूरा करें।</h6>
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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 12:53:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सर्दियों में कैसे करें ऊनी कपड़ों की धुलाई</title>
                                    <description><![CDATA[ऊनी वस्त्रों का इस्तेमाल सुबह उठने से लेकर रात को सोते समय तक सर्दियों में प्राय: किया जाता है। फलस्वरूप वे गंदे भी अधिक होते हैं। ऊनी वस्त्रों को घरेलू आम तरीकों से धोया भी नहीं जा सकता, क्योंकि इस तरह से धोने से ऊन के सिकड़ने का डर रहता है और उसके अंदर की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/how-to-wash-woolen-clothes-in-winter-2/article-30013"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/wash-woolen-clothes-in-wint.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ऊनी वस्त्रों का इस्तेमाल सुबह उठने से लेकर रात को सोते समय तक सर्दियों में प्राय: किया जाता है। फलस्वरूप वे गंदे भी अधिक होते हैं। ऊनी वस्त्रों को घरेलू आम तरीकों से धोया भी नहीं जा सकता, क्योंकि इस तरह से धोने से ऊन के सिकड़ने का डर रहता है और उसके अंदर की ठंडक मिटाने की शक्ति भी समाप्त होने लगती है।  इतना ही नहीं, उसकी सफाई अगर नियमानुकूल न की जाये तो उसके रंग बदरंग होकर पूरे परिधान को ही खराब कर देते हैं, जिससे वह पहनने योग्य ही नहीं रह पाता, अत: यह आवश्यक है कि ऊनी वस्त्रों की सफाई और उन पर प्रेस करने के तरीकों को जानकर हम अपने कीमती कपड़ों की सुरक्षा का प्रयत्न करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऊनी कपड़ों को कैसे धोयें?</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कभी महंगे स्वेटर सिकुड़ जाते हैं तो कभी लटक जाते हैं। ड्राईक्लीनिंग महंगी होती है। प्रेस करें या नहीं आदि बातों की जानकारी न होने की वजह से प्राय: कीमती स्वेटरों, शालों को भी आम कपड़ों की तरह ही धो दिया जाता है। नतीजा यह होता है कि वे महंगे वस्त्र एक सीजन भर भी ठीक से नहीं चल पाते और वे पहनने के ही लायक नहीं रह पाते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऊनी कपड़ों की धुलाई का तरीका</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कीमती ऊनी कपड़ों के साथ धुलाई व प्रेस के तरीकों का विवरण दिया होता है। कीमती ऊन के वस्त्रों को जहां तक हो, ड्राईक्लीन में ही दें या निर्देश के अनुसार घर पर भी धुलाई कर सकती हैं। एक्रिलिक के कपड़ों को आप बिना किसी झिझक के घर पर ही धो सकती हैं। इसके लिए किसी भी प्रकार के सॉफ्ट डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। डिटर्जेंट के घोल में स्वेटर को डालकर हाथों से रगड़कर साफ पानी में दो-तीन बार डालकर साफ कर लें। बिना निचोड़े हुए</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>तौलिया या सूखे कपड़े में डालकर हल्के हाथ से दबाकर पानी निकाल लें।</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इन्हें वाशिंग मशीन में डालकर कभी न धोएं। मशीन में धोने से इनकी रोंए निकल आती है। गीले स्वेटर को कभी रस्सी पर मत सुखायें। वे निचुड़ कर विकृत आकार वाले हो जाते हैं। जब पानी लगभग निकल जाये तब छांव में ही किसी चारपाई या चटाई पर डालकर सुखाएं। धूप में डालने से इनका रंग उड़ जाता है। हल्के धूप में स्वेटर को उल्टा करके सुखाया जा सकता है। हल्का गीला रहते हुए ही उस पर गीला सूती कपड़ा ऊपर से बिछा कर हल्का गर्म प्रेस कर लें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऊनी कपड़ों पर लगे दाग-धब्बों को छुड़ाना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऊनी कपड़ों पर चाय आदि गिर जाने से उन पर दाग या धब्बे पड़ जाते हैं। दाग देने वाली किसी वस्तु के गिरते ही फौरन ही उसे किसी स्टेन रिमूवर से साफ कर लें। बाजार में अच्छे स्प्रे स्टेन रिमूवर मिल जाते हैं। ध्यान रखें कि कपड़े की दूसरी ओर निशान न पड़े। तह के बीच में कोई मोटा कपड़ा रखकर ही साफ करें। स्प्रे से अक्सर मैल फैलकर एक बड़ा सा</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>धब्बा बना देता है। ऐसे में ड्राईक्लीन करवाना जरूरी हो जाता है।</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अगर स्टेन रिमूवर न हो तो दाग निकालने के लिए पूरे कपड़े को तुरंत पानी में डालकर निकाल लें और हल्का सा नींबू का रस डालकर दाग वाले जगह पर लगा कर सुखा दें। रगड़ लगने से ऊनी कपड़ों पर रोंएं उठ जाते है। रोंएं अक्सर कुहनियों और बगलों के नीचे ही आते हैं। इसके लिए अभी तक कोई फार्मूला या तकनीक नहीं बनी है। पहनते-पहनते कुछ दिनों में स्वेटरों के बार्डर और कफ ढीले हो जाते हैं। बार्डर और कफ के हिस्से को पानी में धोकर हल्का प्रेस कर लें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऊनी कपड़ों से परहेज</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सर्दी के मौसम में जहां एक ओर ऊनी कपड़े आराम दायक होते हैं, वहीं दूसरी ओर पहनने में परहेज नहीं करने पर त्वचा के लिए हानिकारक भी होते हैं। ऊनी वस्त्रों को कभी भी अकेले नहीं पहनना चाहिए। कोमल त्वचा पर ऊन की रगड़ के कारण एग्जीमा, खुजली या जख्म भी हो सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>इस्तेमाल के बाद की सुरक्षा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ऊनी वस्त्रों के मौसम की समाप्ति के बाद उन्हें सहेज कर रखने में काफी सुरक्षा की जरूरत होती है। एक्रिलिक के कपड़ों को धोकर तथा प्योर वूल के कपड़े को ड्राइक्लीन कराने के बाद ही रखना चाहिए। ड्राइक्लीन के बाद उन्हें अलग-अलग नेप्थलीन की गोलियों के साथ पैकेट में डालकर रखें। नेप्थलीन की गोलियों को कपड़े के बीच डालने से पहले उन्हें किसी</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कागज या महीन कपड़े में लपेट कर ही डालें।</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कई बार नेप्थलीन की गोलियां पिघलकर कपड़े में दाग लगा देती हैं। जहां भी आप कपड़ों को रखने जा रही हो, रखने से पहले यह जरूर देख लें कि उसमें नमी तो नहीं है क्योंकि नमी वाली जगह पर कपड़ों को रखने से वे जल्द खराब हो जाती हैं। समय-समय पर कपड़ों को निकालकर अवश्य देखते रहना चाहिए।</p>
<p style="text-align:right;"><strong><em>-(उर्वशी)</em></strong></p>
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<p style="text-align:justify;">
</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jan 2022 13:58:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जाने, केसे बनाते है पोहा आलू टिक्की</title>
                                    <description><![CDATA[सामग्री : 1 कप पोहा, 3 आलू, 3 हरी मिर्च, नमक स्वादानुसार, 1/4 टी स्पून हल्दी पाउडर, 1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1/2 कप मूंगफली (भूनकर कूटी हुई), तलने के लिए तेल विधि :- 1. पोहे को धोकर उसका पानी निकाल दें। अब इसमें उबले हुए आलू, हरी मिर्च, नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/know-how-to-make-poha-aloo-tikki/article-29597"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/poha-aloo-tikki.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सामग्री :</strong> 1 कप पोहा, 3 आलू, 3 हरी मिर्च, नमक स्वादानुसार, 1/4 टी स्पून हल्दी पाउडर, 1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1/2 कप मूंगफली (भूनकर कूटी हुई), तलने के लिए तेल</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>विधि :-</strong></p>
<p style="text-align:justify;">1. पोहे को धोकर उसका पानी निकाल दें। अब इसमें उबले हुए आलू, हरी मिर्च, नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, कुटी हुई मूंगफली डालकर अच्छी तरह मिला लें।<br />
एक नॉनस्टिक पैन में तेल गरम करें। इस मिश्रण के गोल-गोल टिक्कियां बना लें। गरम तेल में सुनहरा होने तक फ्राई करें। गर्मागर्म टिक्कियां चटनी के साथ सर्व करें।</p>
<p style="text-align:right;"><strong><em>-निधि शर्मा</em></strong></p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/know-how-to-make-poha-aloo-tikki/article-29597</link>
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                <pubDate>Fri, 31 Dec 2021 15:55:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूं पाएं अपने मोटापे पर काबू</title>
                                    <description><![CDATA[क्या न खाएं (Control Obesity)  परांठे, पूरी, घी चुपड़ी चपाती।  चावल रोजाना या अधिक न खाएं।  मलाई वाला दूध, दही तथा चाय-काफी अधिक न पीएं।  डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ व फल न खाएं।  फास्टफूड जैसे नूडल्स, पिज्जा, बर्गर, चाइनीज डिशेज, ब्रेड, कॉर्नसूप आदि का सेवन न करें।  जैम, जैली, मक्खन, चीनी, पुडिंग, पेस्ट्री, चॉकलेट, केक, आइसक्रीम, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/control-obesity/article-29452"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/control-obesity.jpg" alt=""></a><br /><h3><strong>क्या न खाएं (Control Obesity)</strong></h3>
<ul>
<li> परांठे, पूरी, घी चुपड़ी चपाती।</li>
<li> चावल रोजाना या अधिक न खाएं।</li>
<li> मलाई वाला दूध, दही तथा चाय-काफी अधिक न पीएं।</li>
<li> डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ व फल न खाएं।</li>
<li> फास्टफूड जैसे नूडल्स, पिज्जा, बर्गर, चाइनीज डिशेज, ब्रेड, कॉर्नसूप आदि का सेवन न करें।</li>
<li> जैम, जैली, मक्खन, चीनी, पुडिंग, पेस्ट्री, चॉकलेट, केक, आइसक्रीम, बिस्कुट, मिठाइयां, सूखे मेवे आदि कम से कम खाएं।</li>
<li> तली भुनी चीजें जैसे चिप्स, भेलपूरी, चाट, समोसा, पकौड़े, कचौड़ी आदि न खाएं।</li>
<li> कोल्ड ड्रिंक्स न पिएं।</li>
</ul>
<h4><strong>नीम का जूस </strong><strong>(Control Obesity)</strong></h4>
<p>जीवन कड़वी-मीठी यादों का मिश्रण है। और इसलिए यह नीम का रस है-जिस क्षण आप इसे पीते हैं, यह थोड़ा कड़वा होता है, लेकिन यह आश्चर्यजनक रूप से एक मीठा स्वाद छोड़ देता है। नीम का जूस नीम के पत्तों और पानी से बनाया जाता है, इसलिए इसका 100% शुद्ध होता है।</p>
<ul>
<li> पहले नीम के पत्ते चुनें और खरीदें। सुनिश्चित करें कि पत्तियां ताजी, गहरे हरे रंग की हों और कटी हुइ या धब्बे वाली नही होनी चाहिए। तने से जुड़ी हुई पत्तियां खरीदना बेहतर होती है, क्योंकि उनकी -शेल्फ लाइफ बेहतर होती है।</li>
<li> नीम का जूस बनाने के लिए पत्तियों को तने से अलग करें और लगभग १ कप नीम के पत्ते लें।</li>
<li> नीम के पत्तों को कटोरे में डालकर पानी से धो लें।</li>
<li> एक छलनी का उपयोग करके पानी को छान लें और छाने हुए पानी को निकाल दें।</li>
<li> नीम का रस बनाने के लिए नीम के पत्तों को मिक्सर जार में डालें</li>
<li> मिक्सर में पत्तियों के बराबर मात्रा में 1 कप पानी डालें।</li>
<li> मुलायम होने तक मिक्सर में पीस लें।</li>
<li> नीम के जूस को गिलास में डालें और तुरंत परोसें</li>
</ul>
<h4><strong>क्या खाएं </strong><strong>(Control Obesity)</strong></h4>
<ul>
<li> रिफाइंड आॅयल से बनी चीजें खाएं।</li>
<li> मांड निकला चावल खाएं।</li>
<li> बिना चीनी वाली चाय पिएं।</li>
<li> रेशेयुक्त ताजा फल जैसे सेब, संतरा, पपीता, आडू, अनन्नास आदि खाएं।</li>
<li> ताजी सब्जियां अधिक खाएं जैसे सलाद के रूप में गाजर, टमाटर, खीरा, ककड़ी, चुकंदर आदि। पुदीने व धनिए की चटनी खाएं। गाजर, लौकी, टमाटर, पालक, बंदगोभी आदि का सूप पिएं।</li>
<li> अंकुरित दालें जैसे मंूग, मोठ, चना आदि तथा पापड़ व बिना तेल का अचार खाएं।</li>
<li> पानी खूब पिएं।</li>
<li> ताजे फलों का जूस, नींबू पानी आदि पिएं।</li>
</ul>
<h4><strong>इन बातों का भी रखें ध्यान </strong></h4>
<ul>
<li> जितनी भूख लगे, उतना ही खाएं।</li>
<li> संतुलित व पौष्टिक भोजन लें।</li>
<li> समय पर खाना खाएं।</li>
<li> खाने वाली चीजों की एक लिस्ट बना लें कि कौन सी चीज आप को कितनी मात्र में खानी है।</li>
<li> एक वक्त यदि खाना न खा पाएं तो दूसरे वक्त अधिक खाना न खाएं।</li>
<li> खाना थोड़ा-थोड़ा एवं खूब चबाकर खाएं।</li>
<li> रात को खाना हल्का ही खाएं।</li>
<li> खाना पचाने के लिए 10-15 मिनट वज्रासन पर अवश्य बैठें। थोड़ी-बहुत सैर भी कर सकते हैं।</li>
<li> इस तरह अपनी खान पान संबंधी आदतें सुधार कर आप अपने मोटापे व वजन पर काबू पा सकते हैं।</li>
</ul>
<p style="text-align:right;"><em><strong>आकाश अग्रवाल</strong></em></p>
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                                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Dec 2021 15:50:54 +0530</pubDate>
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