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                <title>Albert Einstein - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>वह लेखक जिसकी कल्पनाएं सच साबित हुई</title>
                                    <description><![CDATA[अल्बर्ट आइंस्टीन कहा करते थे, कि कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है ज्ञान सीमित होता है जबकि कल्पना पूरी दुनिया को गले लगाती है, विकास को उत्तेजित करती है और विकास को जन्म देती है। एच जी वेल्स ऐसे ही एक महान व्यक्ति थे, जिनकी लिखी कुछ कल्पनाएं सत्य घटनाएं बनी। हरबर्ट जॉर्ज वेल (एच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/albert-einstein-is-a-great-writer/article-22737"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/albert-einstein.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अल्बर्ट आइंस्टीन कहा करते थे, कि कल्पना ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है ज्ञान सीमित होता है जबकि कल्पना पूरी दुनिया को गले लगाती है, विकास को उत्तेजित करती है और विकास को जन्म देती है। एच जी वेल्स ऐसे ही एक महान व्यक्ति थे, जिनकी लिखी कुछ कल्पनाएं सत्य घटनाएं बनी। हरबर्ट जॉर्ज वेल (एच जी वेल्स) एक महान साइंस फिक्सन कहानियों के लेखक थे। वेल्स का जन्म 21 दिसंबर 1866 को इंग्लैंड में हुआ।वे एक सामान्य मध्यम परिवार से थे। ज्यादातर समय पिता के छोटे से दुकान में रहकर बिताते थे।सामान्य स्कूली स्कॉलरशिप पाकर अन्य विषयों के साथ फिजिक्स, केमेस्ट्री,बायोलॉजी और एस्ट्रोनॉमी में शिक्षा प्राप्त की।वेल्स अंग्रेजी लेखन की कई विधाओं में पारंगत थे, जिनमें कई उपन्यास, लघु कथाएँ, और सामाजिक कमेंटरी, इतिहास, व्यंग्य, जीवनी और आत्मकथा शामिल हैं। इसके आलावा उन्होनें मनोरंजन, युद्ध, और खेलों पर भी पुस्तक लिख चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आधुनिक युग मे उन्हें अपने विज्ञान कथा उपन्यासों के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है और अक्सर इन्हें, जूल्स वर्ने और प्रकाशक ह्यूगो गर्नबैक के साथ विज्ञान कथा का पिता कहा जाता है। वेल्स एक अग्रगामी, यहां तक ​​कि भविष्य के सामाजिक आलोचक के रूप में सबसे प्रमुख थे, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रगतिशील दृष्टि के विकास के लिए अपनी साहित्यिक प्रतिभा को समर्पित किया। वे एक भविष्यवादी भी थे, कई यूटोपियन कार्यों को लिखा और विमान, टैंक, अंतरिक्ष यात्रा, परमाणु हथियार, उपग्रह टेलीविजन के आगमन और वर्ल्ड वाइड वेब जैसी चीज के आगमन की भविष्यवाणी एच. जी. वेल्स ने ही की थी। उनके विज्ञान कथाओं में समय यात्रा, परग्रहियों द्वारा पृथ्वी पर आक्रमण, अदृश्यता और जैविक इंजीनियरिंग की कल्पना शामिल थी। वेल्स के इतने दूरदर्शी सोच के लिए ही ब्रायन एल्डिस ने ‘शेक्सपियर आॅफ साइंस फिक्शन’ के रूप में संदर्भित किया। वेल्स ने एक असाधारण धारणा के साथ सामान्य विस्तार को स्थापित करते हुए अपने कामों का प्रतिपादन किया, जिसे ‘वेल्स का नियम’ कहा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी सबसे उल्लेखनीय विज्ञान कथाओं में द टाइम मशीन (1895), द आइलैंड आॅफ डॉक्टर मोर्यू (1896), द इनविजिबल मैन (1897), द वार आॅफ द वर्ल्ड्स (1898) और सैन्य विज्ञान कथा द वॉर इन द एयर (1907) शामिल हैं।कॉलेज के दौरान वेल्स ने ‘द क्रोनिक अगोर्नोट्स’ नामक समय यात्रा के बारे में एक छोटी कहानी प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने भविष्य की साहित्यिक सफलता को दशार्या।’द टाइम मशीन’ नामक कहानी के प्रकाशन से रातों-रात दुनिया भर में विख्यात हो गए। यह पुस्तक एक अंग्रेजी वैज्ञानिक के बारे में थी जो एक समय यात्रा मशीन विकसित करता है और समय यात्रा करने में सफलता हासिल कर लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह अविश्वसनीय था कि वेल्स ‘द टाइम मशीन’ जैसी कोई किताब लिखने में सक्षम होंगे क्योंकि 1890 के दशक में फिजिक्स केवल न्यूटन के अनुसार ही चलता था, और सापेक्षता के नियम के बारे में कोई नहीं जानता था। वास्तव में 10 साल बाद वेल्स के समय यात्रा के काल्पनिक कहानी के सिद्धांत को अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने स्पेशल सापेक्षता सिद्धांत में सच साबित कर कर दिया। ऐसी उनके कई कहानियां सच में तब्दील हुई। वेल्स अपने साहित्य मे नोबेल पुरस्कार के लिए चार बार नामांकित किए गए। शुरूआत मे वेल्स जीव विज्ञान में विशेष रूप से प्रशिक्षण थे, इसलिए नैतिक मामलों पर उनकी सोच एक विशेष और मौलिक रूप से डार्विनियन के संदर्भ में थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वे शुरूआती समय से ही एक मुखर समाजवादी भी थे, लेकिन शांतिवादी विचारों के प्रति सहानुभूति भी रखते थे।उनके बाद के कार्य तेजी से राजनीतिक बन गए, और उन्होंने बहुत कम विज्ञान कथाएँ लिखीं, जबकि उन्होंने कभी-कभी आधिकारिक दस्तावेजों पर संकेत देते हुए भी कहा कि उनका पेशा पत्रकार का था। उन्होंने 1934 में चैरिटी द डायबेटिक एसोसिएशन (जिसे आज मधुमेह के रूप में जाना जाता है) की सह-स्थापना की थी।79 वर्ष की आयु में 13 अगस्त 1946 को अज्ञात कारणों से वेल्स की मृत्यु हो गई, रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि लंदन में एक दोस्त के फ्लैट में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।। 16 अगस्त 1946 को गोल्डर्स ग्रीन में वेल्स के शरीर का अंतिम संस्कार किया गया; बाद में उनकी राख अंग्रेजी चैनल ओल्ड हैरी रॉक्स में बिखेर दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">                                                                                                             <strong>-नरपत दान चारण</strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 07 Apr 2021 17:03:45 +0530</pubDate>
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                <title>जब ड्राईवर ने दिया आइंस्टीन की जगह भाषण&amp;#8230;</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/when-the-driver-gave-a-speech-in-place-of-albert-einstein/article-18500"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/albert-einstein.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अल्बर्ट आइंस्टीन, दुनिया का शायद ही ऐसा कोई पढ़ा-लिखा शख्स होगा जो इस नाम को ना जानता हो। उनमें एक खास बात ये थी कि वो जिस काम को करते थे, पूरी लगन से करते थे। और काम को अंजाम तक पहुंचाकर ही सांस लेते थे। यही कारण बना की अल्बर्ट आइंस्टीन दुनिया के महान वैज्ञानिक बने। विज्ञान के क्षेत्र में इन्होंने अपना बहुत बड़ा योगदान दिया है। एक दिन अल्बर्ट आइंस्टीन किसी यूनिवर्सटी में लेक्चर देने जा रहे थे। तभी उनके ड्राइवर ने कहा, सर आप जो भी लेक्चर देते हैं, वो तो इतना आसान होता है कि सुनकर कोई भी दे सकता है। उस दिन आइंस्टीन एक ऐसी यूनिवर्सिटी में जा रहे थे, जहां सब उनका नाम तो जानते थे लेकिन उन्होंने कभी आइंस्टीन को देखा नहीं था। इसलिए उन्होंने ड्राइवर से कहा- अगर तुम्हें ये सब आसान लगता है तो इस बार मैं कार चलाता हूँ और तुम लेक्चर दो।</p>
<p style="text-align:justify;">ड्राइवर को बात अच्छी लगी। दोनों ने अपने कपड़े बदले और यूनिवर्सिटी पहुंचे। यूनिवर्सिटी पहुंचकर दोनों कार से बाहर निकले और ड्राइवर ने जाकर लेक्चर देना शुरू किया। उसने बिना पढ़े सारा लेक्चर दे दिया। वहां मौजूद बड़े-बड़े प्रोफेसरों को भी इस बात की भनक न लगी की लेक्चर देने वाले आइंस्टीन नहीं कोई और है। लेक्चर खत्म होने के बाद एक प्रोफेसर ने आकर आइंस्टीन बने ड्राइवर से एक सवाल किया तो उसने जवाब दिया, इतने आसान सवाल का जवाब तो मेरा ड्राइवर ही दे देगा। फिर सबके सवालों के जवाब ड्राइवर बने हुए आइंस्टीन ने दिए। जब सवालों का सिलसिला खत्म हुआ और वापसी का समय आया। तब आइंस्टीन ने बताया की लेक्चर देने वाला उनका ड्राइवर था। ये सच्चाई सुन सबके सिर चकरा गए।</p>
<p style="text-align:justify;">जो चीजें बड़े-बड़े साइंटिस्ट समझ नहीं पाते वह एक ड्राइवर ने इतनी आसानी से सबको समझा दिया। इस तरह हम देख सकते हैं की कैसे एक साधारण ड्राइवर की सोच एक महान वैज्ञानिक के संपर्क में रहने से कितनी महान हो गयी। जिस चीज को करने के लिए लोगों को सारी उम्र लग जाती है। आइंस्टीन के प्रभाव के कारण उसके ड्राइवर ने वो चीज बड़ी आसानी से कर ली। वहीं आइंस्टीन जो की साधारण लोगों में ही रहते थे, अपने गुणों के बल पर अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। यही गुण हमें भी ग्रहण करने चाहिए। अगर हम अपने विचारों को महान बनाना चाहते हैं तो हमें महान लोगों की संगत में रहने की कोशिश करनी चाहिए।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 17 Sep 2020 09:51:04 +0530</pubDate>
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