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                <title>एक दूसरे के पूरक हैं विचार और साहित्य</title>
                                    <description><![CDATA[विचार और साहित्य एक-दूसरे के पूरक होते हैं। विचार आत्मा है और साहित्य शरीर।विचार अपंग होता है तो साहित्य अंधा। विचार बीज है तो साहित्य हवा, पानी, खाद, दवा। यदि साहित्य और विचार को एक-दूसरे का सहारा न मिले तो अलग-अलग रहकर दोनों अपना महत्व खो देते हैं। दोनों के गुण भी बिल्कुल अलग-अलग होते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ideas-and-literature-are-complementary-to-each-other/article-3450"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/thoughts.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विचार और साहित्य एक-दूसरे के पूरक होते हैं। विचार आत्मा है और साहित्य शरीर।विचार अपंग होता है तो साहित्य अंधा। विचार बीज है तो साहित्य हवा, पानी, खाद, दवा। यदि साहित्य और विचार को एक-दूसरे का सहारा न मिले तो अलग-अलग रहकर दोनों अपना महत्व खो देते हैं। दोनों के गुण भी बिल्कुल अलग-अलग होते हैं और प्रभाव भी।</p>
<p style="text-align:justify;">विचार मक्खन रूपी तत्व होता है तो साहित्य मठा। विचार मस्तिष्क को प्रभावित करता है तो साहित्य हृदय को। विचार तर्क प्रधान होता है तो साहित्य कला प्रधान। विचारों का प्रभाव बहुत देर से शुरू होता है और देर तक रहता है तो साहित्य का प्रभाव तत्काल होता है और अल्पकालिक होता है। साहित्य विचारों की कब्र होता है। साहित्य विचारों को कब्र में पहुंचाकर लंबे समय तक के लिए सुरक्षित रखता है दूसरी ओर साहित्य विचारों को देश काल परिस्थिति के आधार पर होने वाले नये-नये संशोधनों से भी दूर कर देता है। विचार व्यक्ति के ज्ञान का विस्तार करता है तो साहित्य भावना का। दोनों का प्रभाव समाज पर अलग-अलग होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विचारक चाहे जितना गंभीर निष्कर्ष निकाल ले किंतु जब तक उसे साहित्य का सहारा नहीं मिलता तब तक वह आगे नहीं बढ़ पाता। या तो वह वहीं पड़ा-पड़ा सड़ जाता है या साहित्य से संयोग की प्रतीक्षा करता रहता है। इसी तरह साहित्य को जब तक विचार न मिले तब तक वह निष्प्राण निष्प्रभावी प्रदर्शन मात्र करता रहता है। साहित्यकार और विचारक भी अलग ही होते हैं। न कोई विचारक साहित्य से शून्य होता है न कोई साहित्यकार विचार से। किंतु साहित्यकार और विचारक में कोई एक गुण प्रधान होता है और दूसरा आंशिक। प्रधान गुण ही उसे विचारक या साहित्यकार होने की पहचान दिलाता है। विचारक को अधिकतम सम्मान तथा न्यूनतम सुविधाएं मिलती हैं जबकि साहित्यकार को सामान्य सम्मान तथा सामान्य सुविधाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">विचारक आमतौर पर व्यावसायिक मार्ग में नहीं जा पाता जबकि साहित्यकार आमतौर पर व्यावसायिक दिशा में बढ़ता है। राम मनोहर लोहिया, मधुलिमये, दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहरी वाजपेयी आदि को भी हम आंशिक रूप से इस लाइन में जोड़ सकते हैं। यद्यपि इनमें मौलिक विचार के साथ-साथ कुछ साहित्यिक क्षमता भी थी। अन्य भी अनेक लोग विचारक के रूप में रहे किंतु उन्हें साहित्यकारों कलाकारों का सहारा नहीं मिलने से वे अप्रकाशित ही रहे। धीरे-धीरे स्थिति यह आई कि मौलिक चिंतन का अभाव हुआ और साहित्यकारों कलाकारों की बाढ़ आनी शुरू हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">साहित्यकार कलाकार कथाकार नाटककार ही स्वयं को विचारक घोषित करने लगे और समाज भी उन्हें विचारक मानने की भूल करने लगा। इन सबमें मौलिक चिंतन करने और निष्कर्ष निकालने की तो क्षमता थी नहीं और कला के माध्यम से विचार समाज तक पहुंचाना इनकी मजबूरी थी। अत: वास्तविक विचार और विचारकों के अभाव में इन सबने राजनेताओं के ही विचारों और निष्कर्षों को अपनी कला के माध्यम से समाज तक पहुंचाना शुरू कर दिया। विचार तो पूरी तरह स्वतंत्र होता है। न तो विचार कभी प्रतिबद्ध हो सकता है न होता है। प्रतिबद्धता की बीमारी वामपंथ से शुरू हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">साहित्य मीडिया, कला, राजनीति, समाज सेवा आदि की प्रतिबद्धता व्यावसायिक होने के साथ-साथ विकृत भी हुई किंतु विचारक और विचार इस बीमारी से अछूते रहे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सरकारों से तो खतरा हमेशा ही रहा है किंतु अब तो संगठित गुण्डों से भी उसे खतरा बढ़ता जा रहा है। मैंने पश्चिम के देशों में तो सुना था कि किसी ने लीक से हटकर कुछ कह दिया तो उसे फांसी दे दी गई अथवा आज भी इस्लामिक देशों में तो यह व्यवस्था है जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है किंतु भारत में तो ऐसी स्थिति पिछले कुछ वर्षों से ही दिख रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-लेखक बजरंग</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2017 04:24:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>युवक ने कमरे में सो रहे दोस्त को गोली से उड़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[रोड़ी में दोस्ती का खून ओढां(सच कहूँ न्यूज)। सरसा के गांव रोड़ी में एक दोस्त द्वारा अपने ही दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी मुताबिक वीरवार सुबह करीब पौने 7 बजे गुरलाल उर्फ सोना अपने कमरे में सो रहा था। उसके पिता नरेन्द्र सिंह ने जब पशुओं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/murder-of-friend-from-shoot/article-3035"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/police-investigation.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">रोड़ी में दोस्ती का खून</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां(सच कहूँ न्यूज)।</strong> सरसा के गांव रोड़ी में एक दोस्त द्वारा अपने ही दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी मुताबिक वीरवार सुबह करीब पौने 7 बजे गुरलाल उर्फ सोना अपने कमरे में सो रहा था। उसके पिता नरेन्द्र सिंह ने जब पशुओं को चारा डालते समय गोली चलने की आवाज सुनकर कमरे में जाकर देखा तो 25 वर्षीय गुरलाल सिंह चारपाई पर पड़ा था और उसके सिर व छाती से खून बह रहा था। नरेन्द्र सिंह ने जब शोर मचाया तो उसने देखा कि इसी गांव का धर्मेन्द्र सिंह गुरलाल की मोटरसाईकिल लेकर भाग रहा था। घटना की सूचना पाकर थाना प्रभारी शिव नारायण शर्मा मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।</p>
<h2 style="text-align:justify;">3 माह पहले हुई थी अनबन</h2>
<p style="text-align:justify;">सामने आया है कि आरोपी धर्मेन्द्र व मृतक गुरलाल सिंह दोनों की आपसी मित्रता थी। धर्मेन्द्र सिंह मूल रूप से पंजाब से है लेकिन वह पिछले कई वर्षांे से रोड़ी में ही रह रहा था। बताया जा रहा है कि उक्त दोनों के बीच करीब 3 माह पूर्व किसी बात को लेकर अनबन हो गई थी, जिसके चलते धर्मेन्द्र ने गुरलाल सिंह को जान से मारने की धमकी दी थी। दोनों के बीच कुछ दिन पूर्व ही हुई सुलह के बाद धर्मेन्द्र का गुरलाल के साथ पुन: बोलचाल व आना-जाना भी शुरू हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मृतक के पिता के अनुसार गुरलाल सिंह घर के पीछे के भाग में बने कमरे में अक्सर अकेला ही रहता था और उसके पास अक्सर लोग आते-जाते रहते थे। जिस पर उसने कभी भी ये ध्यान नहीं दिया कि गुरलाल के पास कौन आता-जाता है। आरोपी ने इस घटना को अंजाम वीरवार अलसुबह दिया, जिससे ये क्यास लगाया जा रहा है कि आरोपी रात्रि में गुरलाल सिंह के पास सोया हुआ था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दो गोलियां मारी थी आरोपी ने</h2>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने शव का मुआयना कि तो पाया कि आरोपी ने गुरलाल सिंह को कनपटी व छाती में दो गोलियां मारी थी। पुलिस ने घटनास्थल से 12 बोर के अवैध कट्टे का एक खाली खोल बरामद किया है। पुलिस ने जांच में सामने आया है कि आरोपी ने गुरलाल सिंह पर उस समय गोली चलाई जब सोया हुआ था। सूचना के बाद सीन-आॅफ क्राईम से डॉ. अजमेर सिंह व सीआईए प्रभारी राजा राम, डबवाली सीआईए प्रभारी कर्मसिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से खाली फ्रूटी व सिल्वर पेपर सहित कुछ अन्य सामान बरामद किया है जिससे ये क्यास लगाया जा रहा है कि रात को घटनास्थल पर नशे का सेवन किया गया था। घटना के बाद आरोपी धर्मेन्द्र मृतक गुरलाल सिंह की बाईक लेकर फरार हो गया।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Aug 2017 09:22:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दोस्त ही निकले कातिल, काबू</title>
                                    <description><![CDATA[जाखल (सच कहूँ न्यूज)। रेलवे स्टेशन पर खून से लथपथ मिले जाखल गांव के सुशील उर्फ शीलू की हत्या के आरोप में पुलिस ने तीन युवकों को काबू किया है। काबू किए गए युवकों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन रेलवे पुलिस इस पूरे मामले को पूरा गोपणीय तरीके से रख रही है व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/police-arrested-to-accused-of-murder/article-2645"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/police-13.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जाखल (सच कहूँ न्यूज)।</strong> रेलवे स्टेशन पर खून से लथपथ मिले जाखल गांव के सुशील उर्फ शीलू की हत्या के आरोप में पुलिस ने तीन युवकों को काबू किया है। काबू किए गए युवकों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन रेलवे पुलिस इस पूरे मामले को पूरा गोपणीय तरीके से रख रही है व इसके बारे में पूरी जानकारी देने में भी हिचकिचा रही है लेकिन सूत्रों के मुताबिक युवक सुशील की हत्या करने में उसके तीन साथियों का ही हाथ था। जिसे सिविल पुलिस ने तलाश कर रेलवे पुलिस के सहयोग से काबू किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जाता है कि सुशील उर्फ शीलू घटना वाली रात को अपने दोस्त विनित शर्मा व आकाश शर्मा निवासी जाखल मंडी तथा जितेंद्र उर्फ कड़ैलिया निवासी कड़ैल पंजाब के साथ देखा गया था। जिस पर पुलिस को उन तीनों पर शक हुआ तो उनकी तलाश शुरू की लेकिन वह अपने घर पर नहीं मिले। इस पर सिविल पुलिस ने तीनों की लोकेशन जांच की तो वह पंजाब की ओर पाई। इस पर पुलिस ने तीनों युवकों को पकड़ने के लिए एक योजना बनाई। जिसके बाद तीनों को काबू कर लिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> तेजधार हथियार से हत्या की</h3>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल मामले में रेलवे पुलिस कुछ भी बताने से इंकार कर रही है लेकिन इस घटना ने रेलवे परिसर को नशेड़ियों का अड्डा करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उल्लेखनीय है कि बीते रविवार सुबह को रेलवे स्टेशन परिसर में जाखल गांव के सुशील उर्फ शीलू की खून से लथपथ लाश पड़े हुए पाया गया था। जिस पर घटना की जांच की तो पाया कि किसी ने तेजधार हथियार से उसकी हत्या की थी। घटना में रेलवे पुलिस ने अज्ञात पर हत्या का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2017 02:25:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गिल के निधन से मैने अपना दोस्त खोया: कैप्टन</title>
                                    <description><![CDATA[मेरी नजरों में मसीहा थे केपीएस गिल: डीजीपी पूर्व डीजीपी को अंतिम अरदास में अमरेन्द्र सिंह ने दी श्रद्धांजलि अमन-शांति के लिए दिए योगदान को याद किया चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेशवासियों को अमन-शांति व तरक्की के लिए कार्य करने का आह्वान करते हुए पूर्व डीजीपी केपीएस गिल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/captain-lost-their-friend-kps-gill/article-840"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/kps-gill.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">मेरी नजरों में मसीहा थे केपीएस गिल: डीजीपी</h1>
<ul>
<li><strong>पूर्व डीजीपी को अंतिम अरदास में अमरेन्द्र सिंह ने दी श्रद्धांजलि</strong></li>
<li><strong>अमन-शांति के लिए दिए योगदान को याद किया</strong></li>
</ul>
<p><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेशवासियों को अमन-शांति व तरक्की के लिए कार्य करने का आह्वान करते हुए पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के गुणों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खुशहाल और शांतमई पंजाब की स्थापना ही इस महान व्यक्ति को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। एक कुशल अधिकारी के तौर पर गिल के योगदान को याद करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व डीजीपी के निधन से उन्होंने निजी तौर पर अपना एक दोस्त खो दिया है।</p>
<h3>शांति बहाल करने में अहम योगदान</h3>
<p>गिल जोकि 82 वर्ष की आयु में 26 मई को चल बसे, की अंतिम अरदास के अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिछुड़ी आत्मा और उन लोगों के लिये प्रार्थना की जिन्होंने पंजाब की शांति के लिये अपनी जानें कुर्बान कर दी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि देश ने एक महान व्यक्तित्व को खो दिया है जिन्होंने पंजाब और देश में अमन शांति कायम करने के लिये अपना योगदान डाला जिस स्वरूप आंतकवाद वातावरण में तरक्की एवं विकास हो सका है।</p>
<h3>आतंकवाद से डलकर लड़े गिल</h3>
<p>पंजाब में आंतकवाद से लड़ाई में गिल के योगदान को स्मरण करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उस काले दौर के दौरान 35000 से अधिक लोग मारे गये थे और जिन लोगों ने वह काला दौर नही झेला, वह गिल के योगदान को कभी भी समझ नहीं सकते। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि जब गिल ने पंजाब पुलिस का चार्ज संभाला था तो उस समय पंजाब पुलिस का मनोबल काफी कमजोर था जो आंतकवादियों के खौफ के कारण सूर्य छिपने के बाद पुलिस थानों के गेट बंद कर लेती थी। उन्होंने कहा कि पंजाब को उस समय मजबूत नेतृत्व की जरूरत थी जिस पर गिल खरे उतरे।</p>
<h3>डीजीपी ने दी श्रद्धांजलि</h3>
<p>डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने कहा कि आंतकवाद के दिनों के दौरान जिस प्रकार गिल ने पुलिस फोर्स का नेतृत्व किया। इसने उनको मेरी नजरों में मसीहा बना दिया। उन्होंने श्री गिल से पहले मुलाकात को याद करते हुये कहा कि वह स्वयं उस समय ए एस पी थे जबकि श्री गिल आई जी थे। श्री अरोड़ा ने कहा कि जिस मजबूती से गिल पंजाब पुलिस से जुड़े हुए थे वह कभी भी पूरी तरह सेवानिवृत नहीं हुए। डीजीपी ने कहा कि मैं उनकी सेवा निवृति के बाद भी उनके साथ आम तौर पर सलाहमशवरा करता रहता था। श्री अरोड़ा ने कहा कि पंजाब में अमन-शांति और सुख शांति को कायम करके श्री गिल की उम्मीदों को सदा जीवित रखना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jun 2017 07:56:48 +0530</pubDate>
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