<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/farmers-issue/tag-18012" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Farmers Issue - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/18012/rss</link>
                <description>Farmers Issue RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आंदोलन खत्म होने से किसानों की समस्याएं खत्म नहीं हुई</title>
                                    <description><![CDATA[देर आए, दुरुस्त आए। 378 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद किसान संगठनों ने राजधानी दिल्ली की सीमाएं खाली कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरु पर्व के मौके पर तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान करने के बाद से आंदोलन की समाप्त की चचार्एं शुरू हो गई थी, लेकिन किसान संगठन अपनी कई […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/the-problems-of-the-farmers-did-not-end-with-the-end-of-the-farmers-protest/article-29082"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/farmer.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देर आए, दुरुस्त आए। 378 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद किसान संगठनों ने राजधानी दिल्ली की सीमाएं खाली कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरु पर्व के मौके पर तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान करने के बाद से आंदोलन की समाप्त की चचार्एं शुरू हो गई थी, लेकिन किसान संगठन अपनी कई अन्य मांगों पर अड़े हुए थे। पिछले कई दिनों से सरकार और किसान नेताओं की लंबी बातचीत के बाद इन पर सहमति बन पाई। किसानों की सबसे बड़ी मांग फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार कमेटी बनाएगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि लिए जाएंगे। अभी जिन फसलों पर एमएसपी मिल रही है, वह जारी रहेगी। एमएसपी पर जितनी खरीद होती है, उसे भी कम नहीं किया जाएगा। इस आंदोलन के खत्म होने के बावजूद कुछ सवाल हैं जो आने वाले दिनों में राजनीति और सामान्य किसानों को मथते रहेंगे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि क्या किसानों को इससे सचमुच फायदा होने जा रहा है?</p>
<p style="text-align:justify;">2015 में शांता कुमार समिति मान चुकी थी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सिर्फ छह प्रतिशत किसान ही अपनी उपज बेच पाते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि बदले माहौल में अगर कोई कानून बनेगा भी तो क्या उसका सचमुच फायदा समूचे किसान आंदोलन को मिलेगा। करीब दो दर्जन फसलों के लिए सरकार एमएसपी घोषित करती है, पर सभी की खरीदारी वह नहीं करती और न सारे देश में खरीदारी होती है। देश में इतने किस्म के कृषि-उत्पाद हैं और अलग-अलग इलाकों की इतनी विविधता है कि पूरे देश के लिए फॉर्मूले बनाने में ही दिक्कतें पेश आएंगी। समय के साथ किसानों की वरीयताएं बदलेंगी, बल्कि बदल चुकी हैं। गेहूं और धान जरूरत से ज्यादा है और तिलहन और दलहन जरूरत से कम। पंजाब में धान की खेती पर अतिशय जोर देने से जमीन के नीचे पानी का स्तर कम होता जा रहा है और पराली जैसी समस्याएं भी खड़ी हो रही हैं। आईआईएम, अहमदाबाद के प्रोफेसर सुखपाल सिंह मानते हैं कि प्राइवेट सेक्टर को एमएसपी के साथ बांधना संभव नहीं ।</p>
<p style="text-align:justify;">एमएसपी की गारंटी सरकार दे सकती है, निजी क्षेत्र नहीं। आम किसानों के बीच सहमति बनाए बगैर तीन कृषि कानून लाने का नतीजा यह हुआ कि कृषि क्षेत्र में सुधार की कोशिश नाकाम हो गई, लेकिन इस नाकामी से कृषि में सुधार की जरूरत कम नहीं हुई है। इससे आंखें मूंदना किसी के लिए भी हितकर नहीं होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि बदले हालात में सभी पक्ष खुले दिमाग से बातचीत की प्रक्रिया जारी रखते हुए आपसी सहमति की ठोस जमीन तैयार करेंगे और फिर कृषि क्षेत्र में सुधार का वही एजेंडा आगे बढ़ाया जाएगा। निश्चित तौर पर इन सवालों के जवाब में भी भावी किसान आंदोलन, उसकी सफलता और किसानों के हितों का मसला जुड़ा हुआ है। फिलहाल इस आंदोलन का खत्म होना शांति व्यवस्था की तरफ उठने वाला एक कदम भी होने जा रहा है। इसलिए किसान संगठनों की नई घोषणा और सरकार की लचीली नीति का स्वागत ही होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विचार</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/the-problems-of-the-farmers-did-not-end-with-the-end-of-the-farmers-protest/article-29082</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/the-problems-of-the-farmers-did-not-end-with-the-end-of-the-farmers-protest/article-29082</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Dec 2021 09:53:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2021-12/farmer.gif"                         length="305930"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिवाली के बाद होगा किसानों का मसला हल</title>
                                    <description><![CDATA[राजनाथ सिंह ने की किसान नेता से फोन पर बात (Farmers Issue) सुरजीत ज्यानी ने निभाई अहम भूमिका, दिल्ली केंद्रीय मंत्रियों के साथ खुद की मीटिंग सच कहूँ/अश्वनी चावला। चंडीगढ़। केंद्र सरकार दिवाली के बाद किसानों के साथ बातचीत करते हुए (Farmers Issue) सभी मामलों का हल निकालने को तैयार है। इसलिए खुद रक्षा मंत्री राजनाथ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-issue-of-farmers-will-be-resolved-after-diwali/article-19790"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/the-issue-of-farmers-will-be-resolved-after-diwali.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">राजनाथ सिंह ने की किसान नेता से फोन पर बात (Farmers Issue)</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>सुरजीत ज्यानी ने निभाई अहम भूमिका, दिल्ली केंद्रीय मंत्रियों के साथ खुद की मीटिंग</h4>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अश्वनी चावला। चंडीगढ़।</strong> केंद्र सरकार दिवाली के बाद किसानों के साथ बातचीत करते हुए (Farmers Issue) सभी मामलों का हल निकालने को तैयार है। इसलिए खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेता के साथ 20 मिनट से अधिक समय तक फोन पर बातचीत करते हुए इस संबंध में भरोसा दिया है। दिवाली के बाद दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ की कोठी में ही किसानों के साथ मीटिंग होगी, जिसमें कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद रहेंगे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इसलिए अब लग रहा है कि पंजाब में पिछले डेढ़ महीने से चल रहा किसानों का आंदोलन जल्द ही बातचीत के साथ हल हो सकता है। दिल्ली में किसान नेताओं की मीटिंग पंजाब के पूर्व मंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने करवाई है। सुरजीत कुमार ज्याणी दिल्ली में किसानों के मामलों का हल निकालने के लिए गए हुए थे और उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ ही कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ मीटिंग की है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत करने के बाद सुरजीत कुमार ज्याणी ने बताया कि उनकी अच्छे तरीके से केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत हुई है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने किसान नेता बलबीर राजेवाल ने काफी देर तक फोन पर बातचीत करते हुए मामले का हल निकालने के लिए वायदा तक कर दिया है। रक्षा मंत्री की ओर से खुद किसान नेता को कहा गया है कि वह मीटिंग के लिए दिल्ली में दीवाली के बाद आएं और मीटिंग में हर मुद्दे पर चर्चा करें। बलबीर सिंह राजेवाल की मांग पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मीटिंग के लिए न्योता लिखित रूप में देने की बात भी स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही राजनाथ सिंह ने भरोसा दिया है कि जल्द ही पंजाब में रेल फिर पटड़ियों पर दौड़ती नजर आएंगी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">सुरजीत कुमार ज्याणी ने बताया कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की ओर से मीटिंग में उनको जानकारी दी कि वह कभी भी किसानों से मीटिंग के लिए पीछे ही नहीं हटे हैं और अब भी वह मीटिंग के लिए तैयार हैं। ज्याणी ने बताया कि दीवाली के बाद किसान संगठनों के नेताओं के साथ बैठक में पंजाब के भाजपा नेता भी मौजूद रहेंगे, जिससे बातचीत को सिरे लगाया जाये।</h6>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-issue-of-farmers-will-be-resolved-after-diwali/article-19790</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/the-issue-of-farmers-will-be-resolved-after-diwali/article-19790</guid>
                <pubDate>Sun, 08 Nov 2020 20:09:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-11/the-issue-of-farmers-will-be-resolved-after-diwali.gif"                         length="141121"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों के मुद्दे पर हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दिया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेता एवं केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने किसानों के मुुद्दे को लेकर इस्तीफा दे दिया है। श्रीमती कौर ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेज दिया है। उन्होंने ट्वीट करके अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह किसान विरोधी अध्यादेशों का […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/harsimrat-kaur-badal-resigns-on-farmers-issue/article-18525"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/harsimrat-kaur-badal-resigns-on-farmers-issue.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेता एवं केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने किसानों के मुुद्दे को लेकर इस्तीफा दे दिया है। श्रीमती कौर ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेज दिया है। उन्होंने ट्वीट करके अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह किसान विरोधी अध्यादेशों का विरोध करते हुए केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप के खड़ी हैं।</h6>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/harsimrat-kaur-badal-resigns-on-farmers-issue/article-18525</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/harsimrat-kaur-badal-resigns-on-farmers-issue/article-18525</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Sep 2020 21:19:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-09/harsimrat-kaur-badal-resigns-on-farmers-issue.gif"                         length="126310"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        