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                <title>Chanakya - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Chanakya: चाणक्य</title>
                                    <description><![CDATA[इन घटनाओं ने बदल दिया था जीवन चाणक्य अपने महान विचारों और महान नीतियों से वे काफी लोकप्रिय हो गए थे उनकी ख्याति सातवें आसमान पर थी, लेकिन इस दौरान ऐसी दो घटनाएं घटी की आचार्य चाणक्य का पूरा जीवन ही बदल गया। पहली घटना : भारत पर सिकंदर का आक्रमण और तात्कालिक छोटे राज्यों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/chanakya/article-18643"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/chanakya.jpg" alt=""></a><br /><h2><strong>इन घटनाओं ने बदल दिया था जीवन</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">चाणक्य अपने महान विचारों और महान नीतियों से वे काफी लोकप्रिय हो गए थे उनकी ख्याति सातवें आसमान पर थी, लेकिन इस दौरान ऐसी दो घटनाएं घटी की आचार्य चाणक्य का पूरा जीवन ही बदल गया।<br />
<strong>पहली घटना</strong> : भारत पर सिकंदर का आक्रमण और तात्कालिक छोटे राज्यों की हार।<br />
<strong>दूसरी घटना :</strong>मगध के शासक द्वारा कौटिल्य का किया गया अपमान।<br />
इन घटनाओं की वजह से कौटिल्य ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा करने का संकल्प लिया और उन्होंने शिक्षक बनकर बच्चों के पढ़ाने के बजाय देश के शासकों को शिक्षित करने और उचित नीतियों को सिखाने का फैसला लिया और वे अपने दृढ़ संकल्प के साथ घर से निकल पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि जब भारत पर सिकन्दर ने आक्रमण किया था उस समय चाणक्य तक्षशिला में प्रिंसिपल थे। ये उस समय की बात है जब तक्षशिला और गान्धार के सम्राट आम्भि ने सिकन्दर से समझौता कर लिया था। चाणक्य ने भारत की संस्कृति को बचाने के लिए सभी राजाओं से आग्रह किया लेकिन उस समय सिकन्दर से लड़ने कोई नहीं आया। जिसके बाद पुरु ने सिकन्दर से युद्ध किया लेकिन वे हार गए। उस समय मगध अच्छा खासा शक्तिशाली राज्य था और उसके पड़ोसी राज्यों की इस राज्य पर ही नजर थी। जिसको देखते हुए देशहित की रक्षा के लिए विष्णुगुप्त, मग्ध के तत्कालीन सम्राट धनानन्द से सिकंदर के प्रभाव को रोकने के लिए सहायता मांगने गए।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन भोग-विलास एवं शक्ति के घमंड में चूर धनानंद ने चाणक्य के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। और उनसे कहा कि ‘पंडित हो तो अपनी चोटी का ही ध्यान रखो; युद्ध करना राजा का काम है तुम पंडित हो सिर्फ पंडिताई करो।’ तभी चाणक्य ने नंद साम्राज्य का विनाश करने की प्रतिज्ञा ली।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चंद्रगुप्त को बनाया था सम्राट</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">चाणक्य ने तब चंद्रगुप्त को शिक्षा और दीक्षा देने के साथ ही भील, आदिवासी और वनवासियों को मिलाकर एक सेना तैयार की और धनानंद के साम्राज्य को उखाड़ फेंककर चंद्रगुप्त को मगध का सम्राट बनाया। बाद में चंद्रगुप्त के साथ ही उसके पुत्र बिंदुसार और पौत्र सम्राट अशोक को भी चाणक्य ने महामंत्री पद पर रहकर मार्गदर्शन दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नाम चाणक्य</strong><br />
<strong>जन्म 350 ईसा पूर्व (अनुमानित)</strong><br />
<strong>मृत्यु की तिथि 275 ईसा पूर्व, पाटलिपुत्र, (आधुनिक पटना में) भारत</strong><br />
<strong>शैक्षिक योग्यता समाजशास्त्र, राजनीति, अर्थशास्त्र, दर्शन, आदि का अध्ययन।</strong><br />
<strong>वैवाहिक स्थिति विवाहित</strong><br />
<strong>पिता ऋषि चणक </strong><br />
<strong>माता चनेश्वरी (जैन ग्रंथों के अनुसार)</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Sep 2020 15:49:14 +0530</pubDate>
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