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                <title>Agriculture Bill - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अकाली दल का कृषि भवन के निकट प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली l शिरोमणि अकाली दल ने कृषि सुधार से संबंधित कानूनों के विरोध में गुरुवार को यहां कृषि भवन के निकट प्रदर्शन किया । अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने कपास और मक्का को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और काला कानून को वापस लेने की मांग की। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/akali-dal-protest-near-krishi-bhavan/article-19239"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/akali-dal-protest-near-krishi-bhavan.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली</strong> l शिरोमणि अकाली दल ने कृषि सुधार से संबंधित कानूनों के विरोध में गुरुवार को यहां कृषि भवन के निकट प्रदर्शन किया । अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने कपास और मक्का को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और काला कानून को वापस लेने की मांग की। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया और युवा अकाली दल के बंटी रुमाना ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया । इन नेताओं ने कहा कि सरकार को किसानों के फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की गारंटी सुनिश्चित करनी चाहिए और किसानों के हितों के विरुद्ध लाये गये कानूनों को वापस लेना चाहिये। पुलिस ने बाद में अकाली नेताओं को हिरासत में ले लिया। उल्लेखनीय है कि शिरोमणि अकाली दल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल था और इसकी नेता हरसिमरत कौर बादल मोदी सरकार में मंत्री थी। कृषि सुधारों से संबंधित कानूनों पर मतभेद के कारण अकाली दल गठबंधन से अलग हो गया था और श्रीमती बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था ।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Oct 2020 13:44:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नए कृषि कानून खुशहाली की गारंटी</title>
                                    <description><![CDATA[देश का यह दुर्भाग्य है, किसानों के खेत पर सियासत की खेती करने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस अपनी बंजर सियासी जमीन से धरतीपुत्रों के हितों पर खंजर चला रही है, जबकि मोदी सरकार के काश्तकारों की आमदनी दोगुना करने के संकल्प ने बिचौलियों की परेशानी चौगुनी कर दी है। ऐसे ही बिचौलियों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/new-agricultural-laws-guarantee-prosperity/article-19024"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/new-agricultural-laws-guarantee-prosperity.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">देश का यह दुर्भाग्य है, किसानों के खेत पर सियासत की खेती करने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस अपनी बंजर सियासी जमीन से धरतीपुत्रों के हितों पर खंजर चला रही है, जबकि मोदी सरकार के काश्तकारों की आमदनी दोगुना करने के संकल्प ने बिचौलियों की परेशानी चौगुनी कर दी है। ऐसे ही बिचौलियों के साम्राज्य को बचाने की कांग्रेस सियासत कर रही है। कृषि प्रधान भारत, कृषक प्रधान हिंदुस्तान के रास्ते पर चल पड़ा है, जहाँ किसानों के अन्न का भरपूर दाम, अन्नदाता का भरपूर सम्मान है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से लाए गए कृषि सुधार बिल देश के करोड़ों किसानों की आँखों में खुशी, जिंदगी में खुशहाली की गारंटी हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ये कृषि सुधार बिल दशकों से बिचौलियों के चंगुल में फंसे किसानों को आजादी दिलाने में मील का पत्थर साबित होंगे। मोदी सरकार का किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम हैं। कांग्रेस और उसके साथी अन्नदाताओं के आर्थिक सशक्तिकरण की राह में रोड़ा खड़ा कर रहे हैं। बिचौलियों का समर्थन करने का पाप कर रहे हैं, जिसके लिए देश के करोड़ों मेहनती किसान कांग्रेस और उसके साथियों को कभी माफ नहीं करेंगे। कांग्रेस एन्ड कंपनी किसानों को भ्रमित करने की अपनी साजिश में कभी कामयाब नहीं होगी। मोदी सरकार का एकमात्र संकल्प धरतीपुत्रों की समृद्धि है। इन बिलों से न तो एमएसपी और न ही मंडियां खत्म होंगी। कृषि बिल सही मायनों में क्रांतिकारी पहल हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक के पारित हो जाने से अब किसानों को अपने फसल के भंडारण और बिक्री की आजादी मिलेगी और दलालों के चंगुल से उन्हें मुक्ति मिलेगी। अब धरतीपुत्र खरीददारों से सीधे जुड़ सकेंगे, जिससे किसानों को उनके उत्पाद की भरपूर कीमत मिल सकेगी। किसानों की पहुँच अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, कृषि उपकरण एवं उन्नत खाद-बीज तक होगी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">किसानों को तीन दिन में भुगतान की गारंटी मिलेगी। किसान अपनी फसल का सौदा सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि दूसरे राज्य के लाइसेंसी व्यापारियों के साथ भी कर सकते हैं। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा होगी और किसानों को अपनी मेहनत के अच्छे दाम मिलेंगे। देश भर में किसानों को उपज बेचने के लिए “वन नेशन वन मार्किट” की अवधारणा को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के गांव, गरीब, किसान के हितों को समर्पित हैं, और श्री मोदी की सरकार में किसानों के किसी भी हक को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। मोदी सरकार में केवल “प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि” के तहत ही अब तक किसानों को 92,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">कांग्रेस और दूसरे विरोधी दल भ्रम फैला रहे हैं , कृषि सुधार विधेयकों के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य अर्थात एमएसपी की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी है, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बार-बार कह चुके हैं कि देशभर में एमएसपी की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, कई फसलों की एमएसपी भी बढ़ा दी गई है। गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 50/- बढ़ाकर 1975/-, जौ का 75/- बढ़ाकर 1600/-, चने का 225/- बढ़ाकर 5100/-, मसूर का 300/- बढ़ाकर 5100/-, सरसों का 225/- बढ़ाकर 4650/-, कुसुम का 112/- बढ़ाकर 5327/- प्रति क्विंटल कर दिया गया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मोदी सरकार किसानों के सशक्तिकरण को प्रतिबद्ध है। 2009-10 में यूपीए के समय कृषि बजट 12 हजार करोड़ था, जिसे बढ़ाकर मोदी सरकार ने एक लाख 34 हजार करोड़ रुपये किया। 22 करोड़ से ज्यादा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं; पीएम फसल बीमा का लाभ 8 करोड़ किसानों को दिया गया है; मोदी सरकार द्वारा 10,000 नये फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन पर 6,850 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। आत्मनिर्भर पैकेज के तहत कृषि क्षेत्र के लिए 1 लाख करोड़ की घोषणा की गई। किसानों के लोन के लिए पहले के 8 लाख करोड़ के बदले अब 15 लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री किसान मान-धन के तहत किसानों को 60 वर्ष की आयु होने पर न्यूनतम 3000 रुपये प्रति माह पेंशन का प्रावधान किया गया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">एमएसपी के भुगतान की बात करें तो मोदी सरकार ने 6 साल में 7 लाख करोड़ रुपए किसानों को भुगतान किया है, जो यूपीए सरकार से दोगुना है। कांग्रेस एन्ड कंपनी का कहना है कि अनुबंधित कृषि समझौते में किसानों का पक्ष कमजोर होगा और वे कीमतों का निर्धारण नहीं कर पाएंगे जबकि सच यह है कि किसान को अनुबंध में पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी कि वह अपनी इच्छा के अनुरूप दाम तय कर उपज बेच सकेगा। यदि किसान अनुबंध से संतुष्ट नहीं होंगे तो किसी भी समय अनुबंध खत्म कर सकते हैं। हकीकत यह है, कृषि सुधार विधेयक किसानों के हितों की सौ प्रतिशत गारंटी हैं, लेकिन कांग्रेस अब संविदा की सियासत कर रही है, जबकि केंद्र सरकार 2022 तक धरतीपुत्रों की आमदनी दोगुना करने के संकल्प को अमलीजामा पहनाने के लिए रात-दिन काम कर रही है।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Oct 2020 21:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए कानूनों का विरोध: ट्रैक्टर में आग लगाने वाले 5 कांग्रेस कार्यकर्ता हिरासत में</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा ने कहा-ट्रैक्टर जलाकर कृषि कानूनों का विरोध जताना कांग्रेस का नाटक, कांग्रेस हुई बेनकाब पांचों आरोपी पंजाब के रहने वाले हैं नए कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह भी बोले- दायर करेंगे याचिका नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि से संबंधित नए कानूनों का विरोध हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/opposition-to-new-laws-5-congress-workers-detained-by-tractor-fire/article-18792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/protest-against-agricultural-acts1.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;"><em><strong>भाजपा ने कहा-ट्रैक्टर जलाकर कृषि कानूनों का विरोध जताना कांग्रेस का नाटक, कांग्रेस हुई बेनकाब</strong></em></li>
<li style="text-align:justify;"><em><strong>पांचों आरोपी पंजाब के रहने वाले हैं</strong></em></li>
<li style="text-align:justify;"><em><strong>नए कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस सांसद</strong></em></li>
<li style="text-align:justify;"><em><strong>अमरिंदर सिंह भी बोले- दायर करेंगे याचिका</strong></em></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि से संबंधित नए कानूनों का विरोध हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश में जारी है। प्रदर्शनकारियों ने इंडिया गेट के पास इकट्ठा होकर टैÑक्टर में आग लगा दी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 5 लोगों को हिरासत में ले लिया है। नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त ईश सिंघल ने बताया कि सुबह करीब सात बजकर 15 मिनट पर 15 से 20 लोग इंडिया गेट के पास इकट्ठा होकर कृषि से संबंधित अधिनियमों के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक ट्रैक्टर में आग लगा दी। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को हिरासत में लिया है जिसकी पहचान मनजोत सिंह, रमनदीप सिंह, राहुल, साहिब और सुनत के रूप में हुई है। सभी पंजाब के रहने वाले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने खुद को युवा कांग्रेस का कार्यकर्ता होने का दावा किया है। उधर केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सोमवार को युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा इंडिया गेट के पास एक ट्रैक्टर को आग लगा देने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश को शर्मसार किया है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर को इंडिया गेट के पास लाकर जलाना कांग्रेस का नाटक है जिससे कांग्रेस बेनकाब हो गई है। वहीं केरल के कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने नए कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">राजस्थान: सीएम गहलोत ने कृषि कानूनों के विरोध में राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन</h4>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संसद में पारित कृषि कानूनों के विरोध में राज्यपाल कलराज मिश्र को प्रदेश कांग्रेस की तरफ से रविवार को ज्ञापन सौंपा। गहलोत के साथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा भी थे। दोनों दोपहर में राजभवन पहुंचकर कृषि विधेयकों के विरोध में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम का ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश: किसान बिल के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन</h4>
<p style="text-align:justify;">संसद में हाल ही में पारित कृषि कानून के विरोध में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किया। लल्लू की अगुवाई में कांग्रेसियों ने परिवर्तन चौक पहुंच कर सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस कार्यकर्ता कृषि बिल को किसानों के लिये हानिकारक बता रहे थे। उनका आरोप था कि पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिये सरकार ने किसानो का गला घोंटा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रविवार को राष्ट्रपति ने कृषि बिलों को दी मंजूरी</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में किसानों और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कृषि सुधारों से संबंधित विधेयकों को रविवार को मंजूरी दे दी थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने क्या कहा….</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने जय जवान जय किसान के नारे लगाने के अलावा कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व के समर्थन में भी नारेबाजी की। युवा कांग्रेस की ओर से कहा गया है ”जिस देश को आजाद कराने के लिए भगत सिंह, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे लोगों ने आजीवन संघर्ष किया,उस आजादी को भाजपा सरकार उद्योगपतियों के हाथों में बेच रही है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/opposition-to-new-laws-5-congress-workers-detained-by-tractor-fire/article-18792</link>
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                <pubDate>Mon, 28 Sep 2020 16:25:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिचौलियों के लिये नुकसानदायक है कृषि बिल</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी सरकार ने कृषि के क्षेत्र में बड़े बदलाव और किसानों के हितों के मद्देनजर तीन बिल संसद के मानूसन सत्र में पास कराये हैं। इन कृषि बिलों को लेकर विपक्ष सरकार से खासा नाराज है। संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष इन बिलों का विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि ये […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/agricultural-bill-is-harmful-for-middlemen/article-18731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/agricultural-bill-is-harmful-for-middlemen.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>मोदी सरकार ने कृषि के क्षेत्र में बड़े बदलाव और किसानों के हितों के मद्देनजर तीन बिल संसद के मानूसन सत्र में पास कराये हैं। इन कृषि बिलों को लेकर विपक्ष सरकार से खासा नाराज है। संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष इन बिलों का विरोध कर रहा है।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">विपक्ष का आरोप है कि ये बिल किसान विरोधी हैं। ये बिल किसानों की गुलामी का दस्तावेज हैं। इन बिलों के कानून बनने के बाद किसान प्राईवेट कंपनियों के हाथों की कठपुतलियां बनकर रह जाएंगे। किसान मालिक से गुलाम की हैसियत में आ जाएंगे। विपक्ष के लंबे चौड़े दावों के उलट पंजाब, हरियाणा के अलावा देश के किसी अन्य राज्य में किसान आंदोलित नहीं दिख रहे हैं। हां वो अलग बात है कि विपक्ष किसानों को घेरकर, उन्हें नये कानूनों का डर दिखाकर सड़कों पर उतारने की कोशिशों में लगा हुआ है। कृषि बिलों पर अपना विरोध जताते हुये बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी-अकाली दल के कोटे की केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने त्यागपत्र तक दे दिया। वो अलग बात है कि अकाली दल का विरोध सियासी अधिक है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इस बिल में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रावधान है जहां किसानों और व्यापारियों को मंडी से बाहर फसल बेचने की आजादी होगी। प्रावधानों में राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही गई है। मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टेशन पर खर्च कम करने की बात कही गई हैं। इस विधेयक में कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है। ये बिल कृषि उत्पादों की बिक्री, फार्म सेवाओं, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जुड़ने के लिए सशक्त करता है। अनुबंधित किसानों को गुणवत्ता वाले बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करना, तकनीकी सहायता और फसल स्वास्थ्य की निगरानी, ऋण की सुविधा और फसल बीमा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुकसान किसानों को होगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">असल में देखा जाए तो नये कृषि कानूनों के माध्यम से मोदी सरकार ने किसानों के लिये आजादी के दरवाजें खोले हैं। ये दरवाजें पिछले 70 वर्षों से बंद थे। किसानों का एक बड़ा तबका इन कृषि सुधारों की मांग पिछले काफी लंबे समय से कर रहा था। मोदी सरकार ने किसानों की परेशानियों की मद्देनजर उन्हें उनका पूरा हक दिलाने की नीयत से कृषि के क्षेत्र में व्यापक सुधार करने की दिशा में ये बड़ा कदम उठाया है। अगर देखा जाए तो ये सुधार किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाएंगे। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार फसलों की सरकारी खरीद पर आढ़तियों को औसतन 2.5 फीसदी कमीशन मिलती है और राज्य सरकार को भी खरीद एजेंसी से छह फीसदी कमीशन मिलती रही है। भय है कि कमीशन का यह कारोबार न खत्म हो जाए!</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ये बिचैलिए खाद्यान्न के अलावा कृषि उपज भी खरीदते हैं और इसे थोक विक्रेताओं को ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। ये बिचैलिए अक्सर जरूरतमंद किसानों को ऊंची ब्याज दर पर कर्ज देकर मनी लैंडिंग रैकेट भी चलाना शुरू कर देते हैं। किसान अपनी जमीन गिरवी रखकर इन निजी साहूकारों (ब्याज पर कर्ज देने वाले) से कर्ज लेते हैं। पंजाब में जितने किसानों ने खुदकुशी की, उनमें से अधिकतर के लिए जिम्मेदार इन बिचैलियों की ओर से चलाया जा रहा कर्ज देने वाले रैकेट ही है। प्रदर्शनकारियों को यह डर है कि एफसीआई अब राज्य की मंडियों से खरीद नहीं कर पाएगा, जिससे एजेंटों और आढ़तियों को करीब 2.5 फीसदी के कमीशन का घाटा होगा।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">साथ ही राज्य भी अपना छह प्रतिशत कमीशन खो देगा, जो वो एजेंसी की खरीद पर लगाता आया है। पंजाब में कृषि से जुड़े 12 लाख से अधिक परिवार हैं और करीब 28 हजार पंजीकृत कमीशन एजेंट हैं। ऐसे में कृषि बिलों का विरोध करना अकाली दल की राजनीतिक मजबूरी भी है। पंजाब में कृषि विपणन मंडियों का बड़ा नेटवर्क है। किसान और मंडी के बीच एक पारिवारिक रिश्ता रहा है। हालांकि अपवाद के तौर पर किसानों के शोषण की कहानियां भी सुनी जाती रही हैं। प्रधानमंत्री ने देश के सामने संकल्प लिया था कि किसान की आमदनी दोगुनी सुनिश्चित की जाएगी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बहरहाल कृषि सुधारों के तहत एक प्रयोगात्मक व्यवस्था सामने आ रही है-एक देश, एक कृषि बाजार। आम कारोबारी की तरह किसान भी अपने खेत, गांव, तहसील, जिला और राज्य से बाहर निकल कर देशभर में अपनी फसल बेचने को स्वतंत्र हो, तो इस पर सवाल और भ्रामक प्रचार क्यों किया जा रहा है? विपक्ष और बिचैलियों द्वारा मेहनतकश भोले भाले किसानों के बीच दुष्प्रचार किया जा रहा है कि जमींदारी प्रथा लौट आएगी और अंबानी, अडाणी नए जमींदार होंगे। जमींदारी प्रथा कानूनन समाप्त हो चुकी है और नए भारत में उसकी कोई संभावना नहीं है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यदि कोई व्यापारी, कंपनी, बाजार और संगठन किसान की दहलीज या खेत तक आकर फसल के बेहतर दाम देना चाहता है, तो इसमें साजिश या शोषण की गंध क्यों आ रही है? ऐसे में अहम सवाल यह भी है कि कया देश अंबानी, अडाणी के आदेश से चलता है? यदि संसद के जरिए कोई नया कानून बना है, नई व्यवस्था तैयार की जा रही है, तो जवाबदेही सरकार की भी होगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और सरकारी खरीद की व्यवस्थाएं बरकरार रहेंगी, इस संदर्भ में हमें प्रधानमंत्री के सार्वजनिक आश्वासन पर भरोसा करना चाहिए। सरकारी खरीद एफसीआई और अन्य एजेंसियों के जरिए जारी रहेगी, तो तयशुदा दाम खंडित कैसे किए जा सकते हैं? सरकार ने अभी हाल ही में रबी की फसलों का एमएसपी का ऐलान बढ़े दामों के साथ किया गया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">देश के जीडीपी में कृषि की हिस्सेदारी 15-16 फीसदी की है। करीब 60 फीसदी आबादी की आजीविका ही कृषि है। क्या इतनी विशाल अर्थव्यवस्था और कारोबार पर अदालतें भी आंख मूंद लेंगी? किसानों की असल मांग और आवाज सुनना सरकार का धर्म है। सरकार को किसानों की एक एक शंका का निवारण करना चाहिए। प्रधानमंत्री को देश के धरतीपुत्रों को आश्वस्त करने की एक और पहल करनी पड़ेगी। इस बात की काफी प्रबल संभावना है कि इस महीने के अन्तिम रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसान भाईयों की शंकाओं का निवारण अवश्य करना चाहेंगे।</h6>
<h6 style="text-align:right;"><em>डॉ. श्रीनाथ सहाय</em></h6>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2020 21:30:22 +0530</pubDate>
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                <title>किसान बिलों के विरोध में राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने कृषि विधेयकों के विरोध में आंदोलन का तैयार किया रोडमैप (Congress) जयपुर। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा (Congress) ने कहा है कि  केन्द्र सरकार की ओर से लोकसभा एवं राज्यसभा में पारित कृषि विधेयकों के विरोध में आगामी दस अक्टूबर तक चलाए जाने वाले आंदोलन के लिए कांग्रेस एकजुट हैं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/congress-fully-united-in-rajasthan-against-farmers-bills/article-18719"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/congress-fully-united-in-rajasthan-against-farmers-bills.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>कांग्रेस ने कृषि विधेयकों के विरोध में आंदोलन का तैयार किया रोडमैप (Congress)</strong></h4>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>जयपुर</strong>। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा (Congress) ने कहा है कि  केन्द्र सरकार की ओर से लोकसभा एवं राज्यसभा में पारित कृषि विधेयकों के विरोध में आगामी दस अक्टूबर तक चलाए जाने वाले आंदोलन के लिए कांग्रेस एकजुट हैं और इसके लिए रोडमैप तैयार कर लिया गया हैं। डोटासरा ने बताया कि केन्द्र की मोदी सरकार के किसान बिलों के विरोध में प्रदेश में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट हैं और इसके विरोध में आंदोलन का रोडमैप पूरी तरह कर लिया गया है जिसके तहत उनके नेतृत्व में 26 सितंबर से दस अक्टूबर तक विरोध प्रदर्शन, राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने केन्द्र सरकार पर किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह किसानों के अरमानों के साथ खेलने पर तुली है जिसे कांग्रेस पार्टी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि 26 सितंबर को प्रदेश में सोशल मीडिया के जरिए स्पिक अप फोर फार्मस मुहिम चलाई जाएगी। इसके जरिए प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा को घेरेंगे। इसके बाद 28 सितंबर को राज्य मुख्यालय पर प्रदर्शन कर राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन देकर किसान बिलों को लेकर विरोध जताया जाएगा।</h6>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Sep 2020 13:03:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मंडियों में पिट रहे धान, मक्का, बाजरा, कपास और मूंग : हुड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- सरकार क्यों नहीं देती एमएसपी धान की जल्द खरीद और 25 क्विंटल की लिमिट खत्म करने की मांग सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एमएसपी में बढ़ोत्तरी के आंकड़े पेश कर सरकार को आईना दिखाया है। उनका कहना है कि यूपीए सरकार के मुकाबले ये बढ़ोत्तरी कहीं […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/paddy-maize-millet-cotton-and-moong-are-being-beaten-in-mandis-hooda/article-18651"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/paddy-maize-millet-cotton-and-moong-are-being-beaten-in-mandis-hooda.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>बोले- सरकार क्यों नहीं देती एमएसपी</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h5>धान की जल्द खरीद और 25 क्विंटल की लिमिट खत्म करने की मांग</h5>
</li>
</ul>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़</strong>। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एमएसपी में बढ़ोत्तरी के आंकड़े पेश कर सरकार को आईना दिखाया है। उनका कहना है कि यूपीए सरकार के मुकाबले ये बढ़ोत्तरी कहीं नहीं ठहरती। आज भी प्रदेश की मंडियों में धान, बाजरा, मक्का, मूंग और कपास एमएसपी से बहुत कम रेट पर पिट रहे हैं। क्योंकि सरकार एमएसपी पर खरीद नहीं कर रही है। हुड्डा ने कहा कि मंडी में किसान को एमएसपी देने और दाने-दाने की सरकारी खरीद करने का लेकर दावा करने वाली सरकार को आज प्रदेश की मंडियों में जाकर देखना चाहिए। प्रदेश की कई मंडियां धान से अटी पड़ी हैं। लेकिन सरकार खरीद नहीं कर रही है। 1850 रुपये एमएसपी के बावजूद किसान को धान 1000-1200 रुपये में बेचनी पड़ रही है। हुड्डा ने आरोप लगाया कि नए कानून लागू करके सरकार किसानों को जिन प्राइवेट एजेंसियों के हवाले करना चाहती है, आज वो ही एजेंसियां किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर एमएसपी से बहुत कम रेट में उनकी फसलें खरीद रही हैं। जब सरकार मंडियों को कमजोर करके इनको खुली छूट दे देगी तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये एजेंसियां किस तरह किसान का शोषण करेंगी। सरकार को बताना चाहिए कि आज प्राइवेट एजेंसियां किसानों को उचित रेट क्यों नहीं दे रही हैं? हुड्डा ने कहा कि किसान, आढ़ती और विपक्ष सरकार से लगातार मांग कर रहे थे कि धान की खरीद 15 सितंबर से होनी चाहिए। सरकार ने खुद 25 सितंबर से खरीद शुरू करने का ऐलान किया था। लेकिन अब वो 1 अक्टूबर से खरीद शुरू होने की बात कह रही है। सरकार को चाहिए वो जल्द से जल्द धान की खरीद शुरू करे और पिछली बार की तरह इस बार किसान पर 25 क्विंटल की ही खरीद की लिमिट ना थोपे। अगर सरकार किसान से महज 25 क्विंटल धान ही खरीदेगी तो किसान बाकी धान लेकर कहां जाएगा?</h6>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Sep 2020 21:53:34 +0530</pubDate>
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