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                <title>Bihar Election - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Bihar BJP In-charge: भाजपा ने की बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रभारियों की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए बिहार सहित तीन राज्यों में चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। बिहार में पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव प्रभारी का दायित्व सौंपा है। Bihar Assembly Elections भाजपा महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार, ये […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bjp-announces-election-in-charges-for-bihar-west-bengal-and-tamil-nadu/article-76179"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/bjp-bihar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने आगामी चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए बिहार सहित तीन राज्यों में चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। बिहार में पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव प्रभारी का दायित्व सौंपा है। Bihar Assembly Elections</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार, ये नियुक्तियाँ तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। बिहार में धर्मेंद्र प्रधान के साथ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल तथा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सह-प्रभारी के रूप में कार्य करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है, जबकि पूर्व त्रिपुरा मुख्यमंत्री एवं सांसद बिप्लव कुमार देव सह-प्रभारी होंगे। तमिलनाडु के लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजयंत पांडा को प्रभारी बनाया गया है तथा केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिहार विधानसभा चुनाव इस वर्ष अक्टूबर-नवंबर में आयोजित होने की संभावना है, यद्यपि चुनाव आयोग ने अभी तक तिथियों की घोषणा नहीं की है। वर्तमान में 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए के पास बहुमत है, जिसमें भाजपा के 80, जदयू के 45, हम (सेक्युलर) के 4 विधायक और दो निर्दलीय सदस्यों का समर्थन शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से भाजपा ने बिहार और अन्य राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने तथा चुनावी रणनीति को धार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। Bihar Assembly Elections</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 15:28:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जातिगत जनगणना पर गरमाई सियासत, पीएम से मिले नीतीश-तेजस्वी सहित कई नेता</title>
                                    <description><![CDATA[पटना। बिहार में जाति आधारित जनगणना की मांग पर सियासी हलकों में सियासत गर्मा गई है। सोमवार को इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव समेत कुल 11 नेताओं का प्रतिनिधिमंडल दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मिलने पहुंचा। अलग-अलग दलों के ये नेता, प्रधानमंत्री से मिलकर उनके सामने जाति आधारित जनगणना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/politics-heats-up-on-caste-census-many-leaders-including-nitish-tejashwi-met-pm/article-26244"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/nitish-meets-pm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना।</strong> बिहार में जाति आधारित जनगणना की मांग पर सियासी हलकों में सियासत गर्मा गई है। सोमवार को इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव समेत कुल 11 नेताओं का प्रतिनिधिमंडल दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से मिलने पहुंचा। अलग-अलग दलों के ये नेता, प्रधानमंत्री से मिलकर उनके सामने जाति आधारित जनगणना को लेकर अपना पक्ष रखा। यह मुलाकात साउथ ब्लॉक के प्रधानमंत्री के दफ़्तर में हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव, जेडीयू के विजय कुमार चौधरी, भाजपा के जनक राम, कांग्रेस के अजीत शर्मा, भाकपा माले के महबूब आलम, एआईएमआईएम अख्‍तरुल ईमान, हम के जीतन राम मांझी, वीआईपी के मुकेश सहनी, भाकपा के सूर्यकांत पासवान और माकपा के अजय कुमार शामिल हैं। नीतीश कुमार का कहना है कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और हम लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं। अगर यह हो जाता है, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इसके अलावा, यह सिर्फ बिहार के लिए नहीं होगा, पूरे देश में लोगों को इससे फायदा होगा। इसे कम से कम एक बार किया जाना चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">1931 में हुई थी जाति आधारित जनगणना</h4>
<p style="text-align:justify;">पिछली जाति-आधारित जनगणना 1931 में हुई और जारी की गई थी। जबकि 1941 में, डेटा एकत्र किया गया था, लेकिन सार्वजनिक नहीं किया गया। 2011 में, सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना की गई थी, लेकिन विसंगतियों के आधार पर एकत्र किए गए इस डेटा को भी सार्वजनिक नहीं किया गया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">चुनावी लाभ की फिराक में हर दल</h4>
<p style="text-align:justify;">अगले साल सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए जाति आधारित जनगणना कराना सरकार के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है। इसको लेकर कई राजनीतिक दल एक साथ आए हैं। जद-यू, अपना दल और रिपब्लिकन पार्टी आॅफ इंडिया-अठावले जैसे भाजपा सहयोगियों ने जाति आधारित जनगणना कराने की मांग उठा रहे हैं। कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और समाजवादी पार्टी जैसे कई विपक्षी दल भी इसके पक्ष में हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Aug 2021 11:57:03 +0530</pubDate>
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                <title>बिहार चुनाव: नीतिश का घटा कद</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार चुनाव के नतीजे आ-जा रहे हैं। एनडीए तीसरी बार सरकार बनाती दिख रही है। पर इस बार नीतीश कुमार का कद कमजोर हो रहा है। भाजपा को राज्य में 2015 से भी ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, जिसे 2015 में 53 सीटें मिली थी। नतीजों के अनुसार इस बार भाजपा 70 से 80 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/bihar-election-nitishs-weak-stature/article-19821"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/bihar-election-nitishs-weak-stature.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">बिहार चुनाव के नतीजे आ-जा रहे हैं। एनडीए तीसरी बार सरकार बनाती दिख रही है। पर इस बार नीतीश कुमार का कद कमजोर हो रहा है। भाजपा को राज्य में 2015 से भी ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, जिसे 2015 में 53 सीटें मिली थी। नतीजों के अनुसार इस बार भाजपा 70 से 80 सीटों के बीच रह गई है। इस बार स्पष्ट देखा जा रहा है कि जदयू को करीब 20 से 25 सीटों का नुकसान हुआ, वहीं दो बातें भरोसे से कही जा सकती हैं, कि तेजस्वी यादव एक सितारे के तौर पर उभरे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वे बिहार की राजनीति के नए स्टार हैं और भविष्य में उन पर सबकी नजर होगी। वह सिर्फ बिहार के ही नहीं विपक्ष की राजनीति के भी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी होंगे। उन्होंने जिस तरह कम साधनों और लगभग अकेले चुनाव का एजेंडा तय किया और भाजपा और जदयू की साझा ताकत का मुकाबला किया वह काबिले तारीफ है। इस बार बिहार में भाजपा और जदयू की भूमिका और रुतबा दोनों बदलेगा। जदयू अब तक बिहार में भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में होती थी। सीट बंटवारे में भी यह दिखता रहा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">नीतीश कहते रहे हैं कि हम बिहार की राजनीति करेंगे, भाजपा केंद्र की राजनीति करे। बड़े और छोटे भाई की भूमिका में बदलाव एक-दो साल में नहीं, बल्कि 20 साल में हुआ है। कुछ चुनावों में भाजपा को जदयू से ज्यादा सीटें भी मिलीं। इसके बावजूद जदयू और नीतीश ने भाजपा को छोटा भाई ही माना। 20 साल में 4 बार भाजपा के समर्थन से ही नीतीश मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। 2005 में 13वीं विधानसभा के चुनावों में एनडीए को 92 सीटें मिलीं थी। भाजपा को 37 और जेडीयू को 55 सीटें मिलीं। किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो राष्ट्रपति शासन लगा। छह महीने बाद ही राज्य में फिर चुनाव हुए। एनडीए को 143 सीटें मिलीं। जदयू के 88 और भाजपा के 55 विधायक जीतकर आए। नीतीश मुख्यमंत्री बने।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू के बीच 50-50 फार्मूला अप्लाई हुआ। इसके बावजूद जदयू 122 सीटों पर और भाजपा 121 सीटों पर लड़ी। हालांकि 2004 आम चुनाव में जदयू और भाजपा के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला 70-30 का था। जेडीयू ने 26 और भाजपा ने 14 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें से जेडीयू को 6 और भाजपा को महज 2 सीटों पर जीत मिली थी। 2019 के आम चुनाव में भी भाजपा का रिकॉर्ड जदयू से बेहतर रहा था। इसी वर्ष लोकसभा चुनाव में भाजपा और जदयू ने 17-17 सीटों पर और लोजपा ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा। भाजपा ने अपने कोटे की सभी 17 सीटों पर जीत हासिल की। जदयू को 17 में से 16 सीटों पर जीत मिली। वहीं, लोजपा ने भी अपने कोटे की सभी 6 सीटें जीत ली थीं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भाजपा ने बिहार में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर एक मुकाम तो हासिल कर ही लिया है और अब यहां से उसके लिए बिहार को जीतना एक आसान लक्ष्य लग रहा है। इस चुनाव में भाजपा नेतृत्व ने लोजपा के माध्यम से जो खेल खेला वह खतरनाक तो था, लेकिन उसने जदयू और नीतीश का ‘कद’ तय कर दिया, जहां से उनके लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी लेना भी आसान न होगा और सरकार चलाना भी। भाजपा के लिए कई लाभ साफ दिख रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद इस पहले विधानसभा चुनाव में वह आगे बढ़ी है।</h6>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Nov 2020 21:36:03 +0530</pubDate>
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                <title>बिहार : तीसरे चरण में करीब 60 प्रतिशत पड़े वोट</title>
                                    <description><![CDATA[पटना l बिहार में कोरोना संक्रमण से बचाव के तमाम उपाय और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सात नवंबर को तीसरे चरण में विधानसभा की 78 सीट के लिए संपन्न मतदान में कुल 59.94 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मतदाधिकार का प्रयोग किया। राज्य निर्वाचन कार्यालय ने सोमवार को तीसरे चरण के मतदान के अंतिम आंकड़े जारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bihar-nearly-60-percent-of-the-votes-cast-in-the-third-phase/article-19801"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/bihar-nearly-60-percent-of-the-votes-cast-in-the-third-phase.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना</strong> l बिहार में कोरोना संक्रमण से बचाव के तमाम उपाय और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सात नवंबर को तीसरे चरण में विधानसभा की 78 सीट के लिए संपन्न मतदान में कुल 59.94 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मतदाधिकार का प्रयोग किया। राज्य निर्वाचन कार्यालय ने सोमवार को तीसरे चरण के मतदान के अंतिम आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इस चरण में पंद्रह जिले की 78 विधानसभा सीट के लिए कुल 59.94 प्रतिशत मतदान हुआ है। इससे पूर्व वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में इन्ही 78 सीट के लिए 60.51 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार अंतिम चरण के मतदान में महिलाओं का उत्साह पुरुष मतदाताओं से ज्यादा दिखा। महिलाओं का मतदान प्रतिशत जहां 65.54 प्रतिशत रहा वहीं पुरुषों का 54.86 और थर्ड जेंडर का 2.69 रहा है। कटिहार जिले के कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 67.07 प्रतिशत जबकि मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में सबसे कम 51.88 प्रतिशत मतदान हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकि नगर में 58.56 प्रतिशत, रामनगर (सुरक्षित) में 64.36, नरकटियागंज में 61.71, बगहा में 59.35, लौरिया में 61.38, सिकटा में 61.80, पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल में 63.83, सुगौली में 59.23, नरकटिया में 63.40, मोतिहारी में 59.48, चिरैया में 56.41, ढाका में 64.27, सीतामढ़ी जिले के रीगा में 57.32, बथनाहा (सु) में 55.50, परिहार में 54.34, सुरसंड में 53.79 और बाजपट्टी में 55.72 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Nov 2020 12:37:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिहार एग्जिट पोल: राजद नीत महागठबंधन की बन सकती है सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली l बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए शुक्रवार को हुए 78 सीटों पर तीसरे और अंतिम चरण के मतदान के बाद विभिन्न निजी चैनलों की ओर से प्रसारित एग्जिट पोल में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार बनने के संकेत मिले हैं। वहीं सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/bihar-exit-poll-rjd-led-grand-alliance-may-form-government/article-19776"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/bihar-exit-poll-rjd-led-grand-alliance-may-form-government.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली</strong> l बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए शुक्रवार को हुए 78 सीटों पर तीसरे और अंतिम चरण के मतदान के बाद विभिन्न निजी चैनलों की ओर से प्रसारित एग्जिट पोल में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाली महागठबंधन सरकार बनने के संकेत मिले हैं। वहीं सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के हाथों राज्य की सत्ता फिसलती नजर आ रही है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे कोविड-19 महामारी के बीच 10 नवंबर को घोषित किये जाएंगे। किसी भी गठबंधन को बहुमत हासिल करने के लिए 122 सीटोंं की जरुरत है। ‘टाइम्स नाउ-सी वोटर’ एग्जिट पोल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ राजग सरकार को 116 सीटें दी हैं। राजद के नेतृत्व वाली महागबंधन को 120 सीटें मिलने का अनुमान है। ‘जन की बात’ एग्जिट पोल में राजग को 91 से 117 के बीच सीटें मिलने का दावा किया गया है तो राजद को 118 से 138 के बीच सीट प्राप्त होने की संभावना बताई गई है जबकि कांग्रेस और लोक जनशक्ति पार्टी को पांच से आठ और अन्य को तीन से छह सीटें मिल सकती हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इंडिया टीवी के मुताबिक सत्तारूढ राजग को 112 सीटें मिल सकती हैं जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 70 सीटें और जनता दल (यूनाइटेड) को 42 मिलने का अनुमान है जबकि 110 सीटें महागठबंधन के खाते में जाती दिख रही है। जिसमें कांग्रेस को 25 और राजद के खाते में 85 सीटें मिलने का अनुमान है। टीवी 9 भारतवर्ष के एग्जिट पोल की माने तो राजग को 115 सीटें और महागबंधन के खाते में 120 सीटें आ सकती हैं। इसके अलावा लोक जनशिक्त चार सीटें जीत सकती है जबकि अन्य के खाते में चार सीटें आ सकती हैं। राज्य में शुक्रवार को तीसरे चरण में 78 सीटों पर मतदान समाप्त हुआ। इस बार तीन चरण में मतदान कराया गया।</h6>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Nov 2020 10:52:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>बिहार: तीसरे चरण का मतदान जारी, 34.82 प्रतिशत हुआ मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[पटना। बिहार में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी विधानसभा के तीसरे और अंतिम चरण के चुनाव में दोपहर एक बजे तक 34.82 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया वहीं वाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र के उप चुनाव के लिए 35.82 प्रतिशत वोट पड़े हैं। राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, अंतिम चरण के लिए 15 जिले के 78 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/7-69-percent-votes-cast-in-the-first-two-hours-in-the-third-phase/article-19762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/7.69-percent-votes-cast-in-the-first-two-hours-in-the-third-phase.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना</strong>। बिहार में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जारी विधानसभा के तीसरे और अंतिम चरण के चुनाव में दोपहर एक बजे तक 34.82 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया वहीं वाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र के उप चुनाव के लिए 35.82 प्रतिशत वोट पड़े हैं।</p>
<p>राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, अंतिम चरण के लिए 15 जिले के 78 विधानसभा क्षेत्र में दोपहर एक बजे तक 34.82 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस दौरान मुजफ्फरपुर जिले में मतदान की रफ्तार बढ़ी और यहां सबसे अधिक 40.15 प्रतिशत वोटिंग हुई जबकि दरभंगा में मतदाताओं का उत्साह लगातार ठंढा है और यहां सबसे कम 26.58 प्रतिशत ही मतदान हुआ है।</p>
<p>पश्चिम चंपारण जिले में 35.81 प्रतिशत, पूर्वी चंपारण में 34.62, सीतामढ़ी में 31.51, मधुबनी में 34.59, सुपौल में 35.73, अररिया में 32.79, किशनगंज में 34.45, पूर्णिया में 37.23, कटिहार में 35.34, मधेपुरा में 33.93, सहरसा में 37.58, दरभंगा में 26.58, मुजफ्फरपुर में 40.15, वैशाली में 37.99 और समस्तीपुर में 34.16 प्रतिशत वोटिंग हुई है।</p>
<p>इस बीच पूर्व सांसद एवं सहरसा से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार लवली आनंद ने मतदान केंद्र संख्या 209 जाकर वोट डाला। मतदान करने के बाद उन्होंने कहा, “शासन और प्रशासन मिलकर मतदान को बाधित कर रहे हैं। जहां सात बजे से मतदान होना था वहां नौ बजे शुरू किया गया। मतदाताओं को परेशान किया जा रहा है। हम चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करेंगे।” वहीं, दरभंगा के सिरनिया गांव में लोगों ने विधानसभा चुनाव में मतदान के लिए एक अस्थायी पुल का निर्माण किया है ताकि अधिक से अधिक लोग मतदान करने जा सकें।</p>
<p>वहीं, पूर्णिया जिले के धमदाहा विधानसभा क्षेत्र में मतदान केंद्र पर कतार में लगे मतदाताओं को शारीरिक दूरी बनाने के लिए कहने पर असामाजिक तत्व केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों से मारपीट करने लगे, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जवानों को हवा में गोली चलानी पड़ी। इस घटना में कोई हताहत नहींं हुआ है । पुलिस ने चार असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार किया है ।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Nov 2020 11:10:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार चुनाव: चाणक्य बनकर कौन उभरेगा?</title>
                                    <description><![CDATA[जिस सर पर ताज होता है वह अकेलापन महसूस करता है, इस बात को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बेहतर कौन समझ सकता है जो बिहार के चाणक्य और सुशासन बाबू की अपनी पदवी को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। वह भी ऐसे राज्य में जहां पर राजनीति लोगों की रग-रग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/bihar-election-who-will-emerge-as-chanakya/article-19750"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/bihar-election-who-will-emerge-as-chanakya.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">जिस सर पर ताज होता है वह अकेलापन महसूस करता है, इस बात को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बेहतर कौन समझ सकता है जो बिहार के चाणक्य और सुशासन बाबू की अपनी पदवी को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। वह भी ऐसे राज्य में जहां पर राजनीति लोगों की रग-रग में बसी हुई है और राजनेता अवसरवाद, अपने लाभ तथा जातीय आधार पर फलफूल रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">राज्य की राजनीति और चुनावों में जाति की मुख्य भूमिका है। कल तक लग रहा था कि 69 वर्षीय नीतीश कुमार चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन जाएंगे किंतु आज उन्हें अपनी स्थिति को बचाने के लिए मेहनत करनी पड़ रही है हालांकि भाग्य उनके साथ है। वे केवल प्रशासन विरोधी लहर से ही परेशान नहीं हैं किंतु आज उनके मित्र और दुश्मन दोनों उनके विरुद्ध हैं। नि:संदेह उनकी सहयोगी भाजपा कह रही है कि जनता दल (यू) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री पद के लिए राजग के उम्मीदवार हैं किंतु तीन बातों से लगता है कि इस मैत्री में दरार पड़ सकती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पहला, मोदी ने आज तक नीतीश के साथ कोई भी संयुक्त रैली संबोधित नहीं की है। दूसरा, मोदी के पोस्टरों पर कहीं भी नीतीश की तस्वीर नहीं है और प्रधानमंत्री ने न तो लोजपा के चिराग पासवान से दूरी बनायी है न ही उनके साथ सुलह की है। जबकि चिराग पासवान कह रहे हैं कि मोदी उनके दिल में बसे हैं हालांकि उन्होंने नीतीश के विरुद्ध अपनी पार्टी का उम्मीदवार खड़ा किया है। शायद इसी वजह से सुसभ्य छवि वाले नीतीश कुमार चुनावी रैलियों में अपना धैर्य खोने लगे हैं और उन्हे आशंकाएं हो रही हैं कि क्या भाजपा अपने वायदे को पूरा करेगी या यदि (जद) यू पर्याप्त संख्या में सीटें नहीं जीत पायी तो क्या उनका साथ छोड़ देगी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">नीतीश कुमार द्वारा लालू और तेजस्वी के विरुद्ध व्यक्तिगत प्रहार उनके स्वभाव के विपरीत है। आपको ध्यान में होगा कि वर्ष 2013 मे जद (यू) ने राजग से अपना 17 वर्षीय गठबंधन तोड़ दिया था जब मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था। इससे पूर्व नीतीश ने भाजपा के लिए एक रात्रि भोज का आयोजन रद्द कर दिया था क्योंकि भाजपा के पोस्टर में तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी द्वारा कोशी में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के लिए धन राशि देने का उल्लेख किया गया था। दोनों दलों के बीच 2017 में फिर से गठबंधन बना जब नीतीश राजद-कांग्रेस के महागठबंधन से अलग हो गए और फिर उन्होंने भाजपा के साथ सरकार बनायी। नीतीश कुमार पिछले 15 वषों से मुख्यमंत्री हैं और इस समय लगता है वे परेशानी में हैं और आम मतदाता से उनका संपर्क टूट गया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वस्तुत: उन्हें बिहार में बदलाव और सफलता लाने का श्रेय दिया जाता रहा है किंतु इस बार उन्हें एक बुजुर्ग आदमी के रूप में पेश किया जा रहा है जो नई पीढ़ी के नेताओं को स्थान नहीं दे रहे हैं । इस बात को लोग भूल गए हैं कि जदयू ने बिहार में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बहाल किया, महिलाओं और महादलितों को अधिकार संपन्न बनाया, सड़कों और पुलों का निर्माण किया, बिजली, पानी उपलब्ध कराया, बालिकाओं को साइकिल उपलब्ध करायी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">लोगों में आम धारणा है कि विकास की गति में बिहार पिछड़ गया है किंतु नीतीश के लिए अभी आशाओं के द्वार बंद नहीं हुए हैं। लालू के युवराज के माध्यम से जंगलराज की वापसी की आशंकाएं लोगों को सता रही हैं। तेजस्वी यादव के रूप में लोग लालू शासन की वापसी की संभावनाओं से घबरा रहे हैं साथ ही नीतीश का कोई विकल्प नहीं है इसलिए नीतीश की आलोचनाओं का आम जनता पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ रहा है। परिवर्तन के लिए लोगों को विश्वास और आश्वासन चाहिए और नीतीश विश्वास और आश्वासन की प्रतिमूति हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">विड़ंबना देखिए कि जो वर्ग नीतीश का समर्थन कर रहे हैं वे मुख्यतया उच्च जातियों के हैं जिनकी निष्ठा मोदी के साथ है। भाजपा की पार्टी मशीनरी चुस्त-दुरूस्त है और उसे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संगठन की शक्ति प्राप्त है और उसके हौसले बुलंद हैं इसके दो कारण हैं। नीतीश की लोकप्रियता कम हो रही है। चुनावी पंड़ितों के अनुसार नीतीश की लोकप्रियता 35 से 40 प्रतिशत के बीच है जो भगवा ब्रिगेड को सामने लाने का उचित अवसर है। जिससे वह उसके बिना भी भविष्य में काम चला सकती है। दूसरा, पिछले 15 वर्षों में राज्य की राजनीति में मंडल राजनीति हावी रही।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">जद (यू) के दबाव में भाजपा ने लोजपा के उम्मीदवारों से दूरी बनायी है जो भाजपा के उम्मीदवारों को समर्थन दे रही है और जद (यू) के उम्मीदवारों के विरुद्ध अपने उम्मीदवार खड़े कर रही है। भाजपा ने सार्वजनिक रूप से चिराग की आलोचना की है हालांकि पार्टी के कार्यकर्ता लोजपा उम्मीदवरों का समर्थन कर रहे हैं और इस तरह मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">क्या यह चुनाव बिहार के चाणक्य का अंत होगा? क्या अंतत: बिहार में भगवा कमल खिलेगा क्या युवा तेजस्वी और चिराग अपने पिता लालू और पासवान की तरह बड़े नेता के रूप में उभरेंगे? दोनों पुराने मित्र हैं और अब दोनों ही नीतीश का विरोध कर रहे हैं और दूसरी ओर भाजपा नीतीश के पसीने छुड़ा रही है। इस सबका मूल कारण राज्य की जातीय राजनीति है। जिसके चलते 1980 के दशक की मंडल राजनीति और सामाजिक इंजीनियरिंग के लोगों को आगे बढाया जा रहा है। नीतीश की राजनीति अत्यंत पिछड़े वर्गों अर्थात गैर-यादव, अन्य पिछड़े वर्गों और महादलितों पर आधारित है जबकि तेजस्वी यादव मुस्लिम वोट बैंक और चिराग पासवान वोट बैंक पर निर्भर कर रहे हैं। भाजपा अपने उच्च जातीय वोट बैंक पर निर्भर है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वस्तुत: बिहार चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव का संकेत दे सकता है। देश की आधे से अधिक जनसंख्या 18 से 35 आयु वर्ग में है और इस आयु वर्ग की आकांक्षाएं नाटकीय रूप से बदल गयी हैं। केवल वायदों से अब काम चलने वाला नहीं है और राजनीति में अब लोग ओबामा की तरह हां, हम कर सकते हैं, वायदों की मांग कर रहे हैं। तथापि चुनावी संघर्ष की राह गुलाबी रहने वाली नही है। आज के 247 डिजिटल दुनिया में एक नई राजनीति के उभरने की संभावना बनती है। बिहार के चुनावों ने एक नई चिंगारी को सुलगाया है जहां पर नई संभावनाओं ने जन्म लिया है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भाजपा ने मंडल वातावरण में वैधता प्राप्त करने के लिए नीतीश का उपयोग किया किंतु अब मोदी और शाह को यह महसूस हो रहा है कि हिंदुत्व ब्रिगेड के लिए उनकी उपयोगिता समाप्त हो गयी है। इसीलिए भाजपा लोक जनशक्ति पार्टी का उपयोग कर रही है और उसके प्रमुख चिराग का उपयोग जद (यू) के उम्मीदवारों को निशाना बनाने के लिए कर रही है और भाजपा को उम्मीद है कि ऐसा कर वह जनता दल (यू) से अधिक सीटें प्राप्त कर लेगी। राजद के 31 वर्षीय दसवीं कक्षा फेल क्रिकेट से नेता बने तेजस्वी महागठबंधन के नेता हैं। इस महागठबंन में कांग्रेस, भाकपा, माकपा और कुछ छोटी पार्टियां शामिल हैं और वे चुनाव पूर्व समस्याओं का सामना कर सामने आ रहे हैं और नीतीश को कड़ी टक्कर दे रहे हैं हालांकि उनके विरोधी कह रहे है कि तेजस्वी में राजनीति कुशलता की कमी है। किंतु उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे बहस का एजेंड़ा निर्धारित कर रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">राजद के उत्तराधिकारी महत्वाकांक्षी हैं और अब वे अपन पिता और नीतीश से कुछ राजनीतिक चालें भी सीख गए हैं। सत्ता में आने के अवसर को भांपते हुए वह अपने विरोधी को निष्क्रिय करते हुए जनता से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं और स्थानीय भाषा में लोगों से वातार्लाप कर रहे हैं कि यह चुनाव कमाई, पढाई और दवाई के मुद्दों पर लड़ा जा रहा है। तेजस्वी ने 10 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का वायदा कर युवा मतदाताओं को आकर्षित किया है और उनकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही है जो उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">तथापि उनके समक्ष अनेक चुनौतियां हैं। उनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती जंगलराज का कलंक है जो राजद के साथ जुड़ा हुआ है। बिहार में प्रवासी श्रमिकों के संकट के दौरान उनकी अनुपस्थिति पार्टी के लिए परेशानी का सबब है इसलिए वे रोजगार की तलाश करने वाले लोगों के रूप में एक नए साामजिक आधार की तलाश कर रहे हैं साथ ही लालू के मुस्लिम-यादव सामाजिक आधार को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">रामविलास पासवन के निधन से उनेक 37 वर्षीय बॉलीवुड फिल्मस्टार पुत्र अ‍ैर अब लोजपा के अध्यक्ष के रूप में चिराग पासवान ने नीतीश के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। किंतु उनके यह कदम उनके लिए हानिकर साबित हो सकता है। नीतीश कुमार दलित वोट बैंक पर निर्भर हैं जिनकी जनसंख्या राज्य में 17 प्रतिशत से अधिक है और यह राज्य की राजनीति में गेमचेंजर की भूमिका निभा सकता है। चिराग जद (यू) के मतदाताओं में सेंध लगाकर यह प्रयास कर रहे हैं कि भाजपा को ज्यादा सीटें मिले।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">वस्तुत: इन मुद्दों को नीतीश पहले ही तीन चुनावों में भुना चुके हैं। राज्य में अनुसूचित और पिछड़ी जातियों के मतदाताओं की संख्या 20 प्रतिशत से कम है और अब वे नीतीश सरकार से असंतुष्ट हैं। राज्य में बदलाव की मांग की जा रही है और लोग यह मानने लगे हैं कि नीतीश कुमार सुशासन देने में असमर्थ रहे हैं विशेषकर इस पृष्ठभूमि में कि प्रवासी श्रमिकों के संकट के कारण आर्थिक संकट बढ़ा है और कोरोना महामारी से निपटने में नीतीश सरकार विफल रही है। युवा पीढ़ी की महत्वाकांक्षाओं के निराकरण के बारे में सुशासन बाबू का रवैया ढुलमुल रहा है और रोजगार जैसे मुख्य मुद्दों पर उनकी सरकार की भूमिका प्रभावी नहीं रही है।</h6>
<p> </p>
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                <pubDate>Fri, 06 Nov 2020 21:06:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बिहार में पसंद की सरकार चुनने के लिए वोट ज़रूर दें : राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली l कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के मतदान में भी बिहार के मतदाताओं से पसंद की नयी सरकार चुनने के लिए अनिवार्य रूप से मतदान करने का आग्रह किया है। गांधी ने मंगलवार सुबह ट्वीट किया, “आज बिहार के कुछ ज़िलों में वोटिंग का दूसरा चरण है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/vote-to-choose-the-government-of-choice-in-bihar-rahul/article-19679"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/vote-to-choose-the-government-of-choice-in-bihar-rahul.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली</strong> l कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के मतदान में भी बिहार के मतदाताओं से पसंद की नयी सरकार चुनने के लिए अनिवार्य रूप से मतदान करने का आग्रह किया है। गांधी ने मंगलवार सुबह ट्वीट किया, “आज बिहार के कुछ ज़िलों में वोटिंग का दूसरा चरण है। वोट ज़रूर दें ताकि आपकी पसंद की नई सरकार बने।” उन्होंने बिहार में चुनाव प्रचार के अपने कार्यक्रम की भी जानकारी दी और लिखा, “आज आप सबसे मिलने बिहार के कोढ़ा और किशनगंज आ रहा हूँ। बढ़ती बेरोज़गारी, किसानों पर आपदा, कमज़ोर अर्थव्यवस्था जैसे कई मुद्दों पर बात होगी।”</h6>
<h6 style="text-align:justify;">गौरतलब है कि बिहार में दूसरे चरण में 17 जिलों की 94 सीटो पर आज मतदान होना है। पहले चरण में 28 अक्टूबर को 16 जिलो की 71 सीटो पर मतदान हुआ था और अंतिम चरण में सात नवंबर को बाकी 78 सीटों के लिए वोट पड़ेंगे तथा 10 नवंबर को वोटों की गिनती होगी।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Nov 2020 11:27:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संप्रग ने सत्ता से बेदखल होने का गुस्सा नीतीश पर निकाला, बिहार का विकास रोका : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[सासाराम (रोहतास) l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) एवं कांग्रेस का नाम लिए बगैर उन पर जम कर हमला बोला और कहा कि बिहार की जनता ने जब उन्हें पंद्रह वर्ष बाद सत्ता से बेदखल किया तो केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में शामिल इन दलों ने अपना गुस्सा नीतीश […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/upa-draws-anger-on-nitishs-ouster-from-power-stops-development-of-bihar-modi/article-19431"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/upa-draws-anger-on-nitishs-ouster-from-power-stops-development-of-bihar-modi.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>सासाराम (रोहतास)</strong> l प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) एवं कांग्रेस का नाम लिए बगैर उन पर जम कर हमला बोला और कहा कि बिहार की जनता ने जब उन्हें पंद्रह वर्ष बाद सत्ता से बेदखल किया तो केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में शामिल इन दलों ने अपना गुस्सा नीतीश सरकार पर निकाला और इस प्रदेश के विकास की राह में रोड़े अटकाए।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">मोदी ने शुक्रवार को रोहतास जिले के सासाराम से बिहार के 25 विधानसभा क्षेत्र के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) उम्मीदवारों के पक्ष में आयोजित अपनी पहली चुनावी रैली में संबोधन की शुरुआत भोजपुरी भाषा में की और कहा, “बिहार के स्वाभिमानी और मेहनती भाई-बहन, अन्नदाता मेहनतकश किसान आप सभे के परनाम। हम ई गौरवशाली धरती के हम नमन कर तानी। मां मुंडेश्वरी माता के ई पावन भूमि पर रउआ सब के अभिनंदन कर तानी।” उन्होंने राजद और कांग्रेस पर इशारो-इशारों में निशाना साधा और कहा कि इन लोगों ने अपने पंद्रह वर्ष के कार्यकाल में बिहार को लूटा और उसका मान मर्दन किया। यहां जनता ने उन्हें विश्वास के साथ सत्ता सौंपी थी लेकिन उन्होंने सत्ता को अपनी तिजारी भरने का माध्यम बना लिया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि जब बिहार के लोगों ने पंद्रह साल बाद उन्हें सत्ता से बेदखल किया और नीतीश कुमार की अगुवाई में राजग की सरकार बनाई तो ये लोग बौखला गए। उन्हें काफी गुस्सा आया और उनके मन में जहर भर गया। इसके बाद दस साल तक इन लोगों ने केंद्र में संप्रग सरकार में रहते हुए बिहार के लोगों के प्रति अपना गुस्सा बिहार पर निकाला। संप्रग सरकार के माध्यम से इन लोगों ने बिहार के विकास की राह में न केवल रोड़े अटकाए बल्कि पूरी विकास प्रक्रिया को ही बाधित कर दिया।</h6>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Oct 2020 14:33:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>बिहार चुनावी सभाओं में आमजन के मुद्दे गायब</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार विधान सभा चुनावों की घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियां नए गठबंधन व पुराने गठबंधन के ईद-गिर्द घूम रही हैं। मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व में महागठबंधन और सत्तापक्ष जनता दल (यू) भाजपा के बीच है, लेकिन बिहार के चुनावों को देखकर लगता ही नहीं कि यहां जनता का कोई मुद्दा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/issues-of-common-people-missing-in-bihar-election-meetings/article-18831"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/issues-of-common-people-missing-in-bihar-election-meetings-2.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">बिहार विधान सभा चुनावों की घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियां नए गठबंधन व पुराने गठबंधन के ईद-गिर्द घूम रही हैं। मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व में महागठबंधन और सत्तापक्ष जनता दल (यू) भाजपा के बीच है, लेकिन बिहार के चुनावों को देखकर लगता ही नहीं कि यहां जनता का कोई मुद्दा भी है। महांगठबंधन अपने पुराने सहयोगी दलों की नब्ज टटोलकर गठबंधन को बरकरार रखने का प्रयास कर रहा है। राष्ट्रीय लोक जनता पार्टी (आरएलएसपी) ने सीटों के बंटवारे को लेकर असंतुष्टि व्यक्त कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन कर लिया है। उधर भाजपा लोक जन शक्ति पार्टी को अपना सहयोगी बनाने का प्रयास कर रही है। लोक जन शक्ति ने 27 सीटों की मांग रखी है। अब सीटों के बंटवारे का मामला इस हद तक पहुंच गया है कि विधान सभा चुनावों के साथ ही राज्य सभा की सीटों की भी शर्तें व मांग रखी जा रही है। भले ही राजनीतिक दल गठबंधन का आधार सिद्धांतों को बता रहे हैं लेकिन वास्तव में राजनीति महज सीटों का समझौता बनकर रह गई है। शायद बिहार में सीटों का बंटवारा ही बड़ी समस्या है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">चिंताजनक बात यह है कि विगत वर्ष ‘चमकी बुखार’ ने पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया था, इस बुखार से 100 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी। अब फिर नए मामले आने की चर्चा हो रही है। विडंबना की बात यह है कि प्रदेश में बड़े स्तर पर डॉक्टरों के पद खाली पड़ें हैं, बुखार से बच्चों की मौतें होना, बाढ़ से बेहाल, लॉकडाउन के बाद बेरोजगारी व अन्य मूलभूत सुविधाओं का टोटा होने जैसी समस्याएं चुनावी सभाओं से गायब हैं। राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज पटना के मरीजों के वार्ड बाढ़ में तालाब बन रहे थे, ऐसी परिस्थितियों में भी राजनीतिक पार्टियों का मुद्दों पर चुप रहना नेताओं की जवाबदेही व उनके वादों पर टिके रहने पर सवाल उठाता है। चुनावी घोषणा पत्र महज एक परंपरा बन गई है। एक भी पार्टी ने अभी तक यह घोषणा नहीं की कि घोषणा-पत्र कब पेश किया जाएगा। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब चुनाव का दिन नजदीक आते ही धड़ाधड़ वायदों से भरे घोषणा-पत्र जारी कर खानापूर्ति की जाएगी। चुनाव का तात्पर्य जीत प्राप्त करना और सत्ता की कुर्सियों पर बैठना नहीं होता, बल्कि जन समस्याओं के प्रति अपनी विचारधारा, दृष्टिकोण पेश कर जनता से किए गए वादों को निभाना होता है।</h6>
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                <pubDate>Tue, 29 Sep 2020 21:24:26 +0530</pubDate>
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