<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/armenia/tag-18096" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Armenia - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/18096/rss</link>
                <description>Armenia RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अर्मेनिया और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[येरेवान l अर्मेनिया के विदेश मंत्री जोहराब नटसाकनयन और अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव के बीच स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में चल रही बैठक समाप्त हो गयी है। अर्मेनिया के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता अन्ना नाघडालयन ने शनिवार को यह जानकारी दी। बैठक के बारे में अब तक विस्तृत जानकारी नहीं दी गयी है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/foreign-ministers-of-armenia-and-azerbaijan-met/article-19611"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/foreign-ministers-of-armenia-and-azerbaijan-met.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>येरेवान</strong> l अर्मेनिया के विदेश मंत्री जोहराब नटसाकनयन और अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव के बीच स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में चल रही बैठक समाप्त हो गयी है। अर्मेनिया के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता अन्ना नाघडालयन ने शनिवार को यह जानकारी दी। बैठक के बारे में अब तक विस्तृत जानकारी नहीं दी गयी है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर विदेश मंत्रियों के बीच हुई इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले दोनों ही मंत्रियों ने मिंस्क समूह के नेताओं के साथ भी बैठक की थी।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दरअसल, अर्मेनिया और अजरबैजान की सेना के बीच 27 सितंबर से ही नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में एक इलाके पर कब्जे को लेकर हिंसक संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में अब तक दोनों ओर से कई लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध विराम लागू करने को लेकर सहमति भी बनी है, लेकिन संघर्ष दोबारा शुरू हो जाता है। अजरबैजान ने आंशिक रूप से देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया है। अजरबैजान ने अपने हवाई अड्डों को सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बंद कर दिया है। केवल तुर्की को इससे छूट दी गयी है। तुर्की ने खुले तौर पर अजरबैजान को समर्थन देने की घोषणा की है। गौरतलब है कि अर्मेनिया और अजरबैजान दोनों ही देश पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा थे। लेकिन सोवियत संघ के टूटने के बाद दोनों देश स्वतंत्र हो गए। अलग होने के बाद दोनों देशों के बीच नागोर्नो-काराबख इलाके को लेकर विवाद हो गया। दोनों देश इस पर अपना अधिकार जताते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इस 4400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अजरबैजान का घोषित किया जा चुका है, लेकिन यहां आर्मेनियाई मूल के लोगों की जनसंख्या अधिक है। इसके कारण दोनों देशों के बीच 1991 से ही संघर्ष चल रहा है।</h6>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/foreign-ministers-of-armenia-and-azerbaijan-met/article-19611</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/foreign-ministers-of-armenia-and-azerbaijan-met/article-19611</guid>
                <pubDate>Sat, 31 Oct 2020 10:46:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-10/foreign-ministers-of-armenia-and-azerbaijan-met.gif"                         length="104040"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शांति स्थापना के आधे-अधूरे प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले एक माह से युद्ध की आग में झुलस रहे आमेर्निया और अजरबैजान के बीच शांति समझौते के प्रयास बार-बार असफल हो रहे हैं। पिछले एक पखवाड़े में दोनों देशों के बीच दो बार युद्ध विराम का समझौता हुआ, लेकिन दोनों ही बार आमेर्निया और अजरबैजान युद्ध विराम की दिशा में आगे बढ़ते उससे पहले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/article/half-hearted-efforts-to-establish-peace/article-19582"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/half-hearted-efforts-to-establish-peace.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:center;"><strong>पिछले एक माह से युद्ध की आग में झुलस रहे आमेर्निया और अजरबैजान के बीच शांति समझौते के प्रयास बार-बार असफल हो रहे हैं। पिछले एक पखवाड़े में दोनों देशों के बीच दो बार युद्ध विराम का समझौता हुआ, लेकिन दोनों ही बार आमेर्निया और अजरबैजान युद्ध विराम की दिशा में आगे बढ़ते उससे पहले ही हिसंक संघर्ष व रक्तपात का दौर फिर शुरू हो जाता है।</strong></h6>
<h6 style="text-align:justify;">रूस के प्रयत्नों के चलते दोनों देश दो बार समझौते की टेबल तक आए, लेकिन समझौते के परिणाम सामने आते उससे पहले ही दोनों पक्ष एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाते हुए जंग के मैदान में आ डटे। सवाल यह है कि दोनों देशोें के बीच शांति स्थापना के प्रयास सफल क्यों नहीं हो पा रहे हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि रूस के प्रयासों में निष्पक्षता की कमी हो। कहा तो यह भी जा रहा है कि रूस जान-बूझकर समझौते में ऐसे पेच रख छोड़ता है, जिसके चलते समझौते की उम्र ज्यादा लंबी नहीं हो पाती है। अगर वास्तव में ऐसा है, तो आमेर्निया और अजरबैजान क्षणिक समझौते के लिए क्योंकर राजी हो जाते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र सहित बडे़ देशों की रहस्मयी चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले एक महीने से दोनों देश एक दूसरे के नागरिक इलाकों को निशाना बना रहे हैं, और दुनियाभर में मानवाधिकारों को लेकर हाय तौबा मचाने वाला अमेरिका मूकदर्शक बना हुआ है। कमोबेश यही स्थिति यूएन की है। यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं है कि आमेर्निया और अजरबैजान के बीच शांति स्थापना का सारा दारोमदार अकेले रूस पर ही डाल दिया गया है । रूस के अलावा तुर्की, ईरान, फ्रांस, इजरायल और यूरोपियन यूनियन जिनके हित भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं, शांति स्थापना के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे है। कहीं ऐसा तो नहीं कि क्षेत्रीय शक्तियों के हित दोनों देशों के बीच स्थायी शांति में बाधा उपस्थित कर रहे हो। ईरान और तुर्की की सीमा से लगने वाले आर्मेनिया और अजरब़ैजान पिछले एक माह से हिसंक संघर्ष की लपटों में झुलस रहे है। दोनों देश पहाड़ी क्षेत्र नागोर्नो-काराबाख को लेकर आमने-सामने हैं। अजरब़ैजान इस पर अपना दावा कर रहा हैं, जबकि 1994 में युद्ध विराम के बाद से यह इलाका आर्मीनिया के कब्जे में है। रणनीतिक दृष्टि से अहम 4400 वर्ग किमी वाले इस इलाके को लेकर साल 2016 में भी दोनों के बीच हिंसक संघर्ष हो चुका है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">साल 1920 में जब सोवियत संघ अस्तित्व में आया तो अजरबैजान और आमेर्निया भी उसमें शामिल हो गए। दरअसल, अजरबैजान और आमेर्निया के बीच दुश्मनी के बीज उस वक्त ही पड़ गए थे जब 95 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले आर्मीनियाई इलाके को सोवियत अधिकारियों ने अजरबैजान को सौंप दिया था। इसके बाद 1924 में सोवियत संघ ने अजरबैजान के भीतर नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को स्वायत क्षेत्र के रूप में मान्यता प्रदान कर दी। दूसरी ओर नागोर्नो-काराबाख के लोग दशकों से इस क्षेत्र को आमेर्निया में मिलाये जाने की मांग कर रहे हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद असल विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब नागोर्नो-काराबाख की विधानसभा ने दिसंबर 1991 में अजरबैजान गणराज्य से अलग एक स्वतंत्र राज्य के निर्माण पर जनमत संग्रह करवाया । जनमत संग्रह में अधिकाश लोगों ने आजादी के पक्ष में मतदान किया। जनमत संग्रह के बाद यहां अलगाववादी आंदोलन शुरू हो गया जिसे अजरब़ैजान ने बल पूर्वक दबाने की कोशिश की।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">लेकिन आमेर्निया के समर्थन के चलते आंदोलन जातीय संघर्ष में बदल गया । मई 1994 में रूस की मध्यस्थता में दोनों पक्षों ने युद्धविराम की घोषणा की। युद्धविराम से पहले नागोर्नो-काराबाख पर आर्मीनियाई सेना का कब्जा हो गया। युद्ध विराम के दौरान हुए समझौते के बाद नागोर्नो-काराबाख अजरब़ैजान का हिस्सा तो जरूर बन गया लेकिन अलगावादियों के नियंत्रण से मुक्त नहीं हो पाया। समझौते के तहत आमेर्निया और अजरब़ैजान की सीमा को निर्धारित करने के लिए नागोर्नो-काराबाख लाइन ऑफ़ कॉन्टैक्ट बन गया। कहने को तो उस वक्त आमेर्निया और अजरब़ैजान युद्ध विराम के लिए राजी हो गए थे । लेकिन दोनों देशों को समझौते के लिए राजी करने वाला रूस शुरू से ही आमेर्निया का समर्थन कर रहा था। संघर्ष के दौरान भी उसने आमेर्निया को हथियार तथा सैन्य मदद दी थी। इस लिए रूस की मध्यस्थता में होने वाले इस समझौते को संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हालत आज भी वही है। कहने को तो रूस के आमेर्निया और अजरबैजान दोनों के साथ बेहतर रिश्ते है। लेकिन जब अजरबैजान और आमेर्निया का सवाल आता है तो रूस हमेशा आमेर्निया के साथ खड़े नजर आता हैं। आमेर्निया में रूस का एक सैन्य ठिकाना भी है, और दोनों देश सैन्य गठबंधन कलेक्टिव सिक्योरिटी टीटी आॅगेर्नाइजेशन के सदस्य हैं। संधि के प्रावधानों के चलते दोनों देश संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दूसरी ओर तुर्की अजरबैजान का समर्थन कर रहा है। अजरबैजान में तुर्क लोगों की आबादी ज्यादा है। वह लगातार अजरबैजान को अपना दोस्त बताते हुए आमेर्निया के खिलाफ जहर उगल रहा है। साल 1991 जब अजरबैजान सोवियत यूनीयन से अलग होकर एक स्वतंत्र देश के रूप में अस्तित्व में आया तो तुर्की ने सबसे पहले उसे मान्यता दी। कुल मिलाकर तुर्की और अजरब़ैजान के रिश्ते दो देश, एक राष्ट्र की तरह है। आमेर्निया के साथ तुर्की के कोई अधिकारिक संबंध नहीं हैं। 1993 में जब आमेर्निया और अजरबैजान के बीच सीमा विवाद बढ़ा तो अजरबैजान का समर्थन करते हुए तुर्की ने आमेर्निया के साथ सटी अपनी सीमा बंद कर दी थी। ताजा विवाद में तुर्की एक बार फिर अपना वही पुराना मित्र धर्म निभा रहा है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">आमेर्निया और अजरबैजान के बीच चल रहे क्षेत्रिय संघर्ष के कारण न केवल नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास प्रभावित हुआ है, बल्कि इस संघर्ष में तुर्की, रूस और ईरान के कूदने की संभावना ने चिंता बढ़ा दी है। चिंता की एक बड़ी वजह इस इलाके से गुजरने वाली गैस और कच्चे तेल की पाइप लाइन हैं , जो दक्षिण काकेशस के पास से होते हुए तुर्की, यूरोप और अन्य देशों तक पहुंचती है। संघर्ष अगर बड़ी लड़ाई में बदलता है, तो इस क्षेत्र से तेल और गैस निर्यात के बाधित होने की संभावना बढ़ जायगी। अजरबैजान प्रतिदिन लगभग 800,000 बैरल तेल का उत्पादन करता है। इस पाइप लाइन के कारण ही तेल के मामले में यूरोपीय संघ की रूस पर निर्भरता कम हुई है। पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यूएन और महाशक्तियों की चुप्पी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">करीब एक माह से जारी इस हिसंक संघर्ष में जन और धन का भारी नुक्सान हो रहा है। दोनों देश एक दूसरे के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाये जाने का दावा कर रहे हैं। यूएन इस महीने अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे कर चुका है। इसके बावजूद संस्था की ओर से दोनों देशों के बीच शांति स्थापना के प्रयास उस स्तर पर नहीं किए जा रहे हैं, जो किए जाने थे। अगर समय रहते दुनिया के बड़े देशों के साथ यूएन आगे नहीं आता है, तो काकशियस राष्ट्रों के बीच ऐतिहासिक मतभेदों के कारण जो संघर्ष शुरू हुआ है, उसे किसी वैश्विक यु़द्ध के स्तर तक पहुंचते देर नहीं लगेगी।</h6>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/article/half-hearted-efforts-to-establish-peace/article-19582</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/article/half-hearted-efforts-to-establish-peace/article-19582</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Oct 2020 21:27:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-10/half-hearted-efforts-to-establish-peace.gif"                         length="79870"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अर्मेनिया के मिसाइल हमले में 21 नागरिकों की मौत : अजरबैजान</title>
                                    <description><![CDATA[बाकू। अजरबैजान ने बुधवार को आरोप लगाते हुए कहा कि बर्दा जिले में अर्मेनिया के मिसाइल हमले में कम से कम उनके 21 नागरिकों की मौत हो गई और अन्य 70 घायल हो गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार देश के अभियोजक जनरल के कार्यालय ने कहा कि यह मिसाइल हमला एक घनी आबादी वाले क्षेत्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>बाकू।</strong> अजरबैजान ने बुधवार को आरोप लगाते हुए कहा कि बर्दा जिले में अर्मेनिया के मिसाइल हमले में कम से कम उनके 21 नागरिकों की मौत हो गई और अन्य 70 घायल हो गए। स्थानीय मीडिया के अनुसार देश के अभियोजक जनरल के कार्यालय ने कहा कि यह मिसाइल हमला एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में हुआ जहां व्यापार सुविधाएं स्थित हैं। अर्मेनियाई रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता शुशन स्टेपियन ने हालांकि इस आरोप से इनकार किया कि उनके देश ने बर्दा पर हमला किया था। अर्मेनियाई के समाचार आउटलेट अर्मेनप्रेस ने बताया कि अज़रबैजान की सेना ने बुधवार को नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र के स्टीफनकैर्ट शहर और शुशी शहर पर बमबारी की जिसमे कई नागरिक हताहत हुए।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियों ने मंगलवार को अजरबैजान और अर्मेनिया के प्रमुख नेताओं से नागोर्नो-करबाख क्षेत्र को लेकर संघर्ष विराम का पालन करने की अपील भी की थी जिसका हालांकि कोई असर नजर नहीं आ रहा हैं। अमेरिका की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच सोमवार को मानवीय आधार पर संघर्ष विराम को लेकर समझौता हुआ था जिसके कुछ देर बाद ही इस समझौते के उल्लंघन की रिपोर्ट्स भी आई थी।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/armenia-missile-attack-kills-21-civilians-azerbaijan/article-19567</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/armenia-missile-attack-kills-21-civilians-azerbaijan/article-19567</guid>
                <pubDate>Thu, 29 Oct 2020 10:33:44 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अर्मेनिया-अजरबैजान संघर्ष को लेकर होगी सुरक्षा परिषद की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी संघर्ष पर चर्चा करने के लिए सोमवार को बंद दरवाजों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक होगी। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी मिशन के प्रेस सचिव फेडोर स्ट्रीझिझोविस्की ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। स्ट्रीझिझोविस्की ने कहा, “ नागोर्नो-काराबख क्षेत्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/security-council-meeting-to-be-held-on-armenia-azerbaijan-conflict/article-19283"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/security-council.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी संघर्ष पर चर्चा करने के लिए सोमवार को बंद दरवाजों के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक होगी। संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी मिशन के प्रेस सचिव फेडोर स्ट्रीझिझोविस्की ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। स्ट्रीझिझोविस्की ने कहा, “ नागोर्नो-काराबख क्षेत्र पर चर्चा करने के लिए सोमवार को तीन बजे बंद दरवाजों के बीच सुरक्षा परिषद की एक बैठक होगी।” यूरोप में सुरक्षा एवं सहयोग संगठन मिंस्क समूह की ओर से इस बैठक की मांग की गयी थी। दरअसल, अर्मेनिया और अजरबैजान की सेना के बीच 27 सितंबर से ही नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में एक इलाके पर कब्जे को लेकर हिंसक संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में अब तक दोनों ओर से कई लोगों की मौत हो चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">रूस की मध्यस्थता के बाद 10 अक्टूबर को दोनों ही देश युद्ध विराम लागू करने पर सहमत हो गए थे, लेकिन हिंसा दोबारा शुरू हो गयी है। गौरतलब है कि अर्मेनिया और अजरबैजान दोनों ही देश पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा थे। लेकिन सोवियत संघ के टूटने के बाद दोनों देश स्वतंत्र हो गए।अलग होने के बाद दोनों देशों के बीच नागोर्नो-काराबख इलाके को लेकर विवाद हो गया। दोनों देश इस पर अपना अधिकार जताते हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत इस 4400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अजरबैजान का घोषित किया जा चुका है, लेकिन यहां आर्मेनियाई मूल के लोगों की जनसंख्या अधिक है। इसके कारण दोनों देशों के बीच 1991 से ही संघर्ष चल रहा है। वर्ष 1994 में रूस की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच संघर्ष-विराम हो चुका था, लेकिन तभी से दोनों देशों के बीच छिटपुट लड़ाई चलती आ रही है।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/security-council-meeting-to-be-held-on-armenia-azerbaijan-conflict/article-19283</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/security-council-meeting-to-be-held-on-armenia-azerbaijan-conflict/article-19283</guid>
                <pubDate>Sat, 17 Oct 2020 11:12:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-10/security-council.jpg"                         length="50900"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करें अर्मेनिया और अजरबैजान : सुरक्षा परिषद</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी हिंसक संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों देशों से तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करने और बातचीत शुरू करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में नाइजर के राजदूत अबदोउ अबारी ने मंगलवार को एक वक्तव्य […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-implement-ceasefire-with-immediate-effect-security-council/article-18834"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/security-council1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी हिंसक संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों देशों से तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करने और बातचीत शुरू करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में नाइजर के राजदूत अबदोउ अबारी ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर यह जानकारी दी। इससे पहले नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शुरू हुए हिंसक संघर्ष पर चर्चा करने के लिए सुरक्षा परिषद की बंद दरवाजों के भीतर एक बैठक हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">वक्तव्य के मुताबिक सुरक्षा परिषद के सदस्याें ने नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में ‘लाइन ऑफ कंटेक्ट’ पर दोनों देशों की ओर से बड़े पैमाने पर की गयी सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के अर्मेनिया और अजरबैजान से नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम लागू करने और बिना किसी देरी के बातचीत शुरू करने की अपील का एक स्वर में समर्थन किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा परिषद ने इस हिंसक संघर्ष में लोगों के मारे जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इसके अलावा सुरक्षा परिषद ने दोनों पक्षों से ओएससीई मिंस्क समूह के साथ सहयोग करने और जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है। दरअसल, अर्मेनिया और अजरबैजान की सेना के बीच रविवार से ही नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में एक इलाके पर कब्जे को लेकर हिंसक संघर्ष शुरू हो गया है। अर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अजरबैजान की सेना के साथ हुए संघर्ष में उसके 16 सैनिक मारे गए हैं जबकि 100 से अधिक घायल हुए हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-implement-ceasefire-with-immediate-effect-security-council/article-18834</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-implement-ceasefire-with-immediate-effect-security-council/article-18834</guid>
                <pubDate>Wed, 30 Sep 2020 09:49:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-09/security-council1.jpg"                         length="59764"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अर्मेनिया और अजरबैजान पर सुरक्षा परिषद में होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र। जर्मनी समेत कई अन्य यूरोपीय देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी हिंसक संघर्ष के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार यूरोपीय देशों ने सुरक्षा परिषद में मंगलवार को एक बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा करने का अनुरोध […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-will-be-discussed-in-the-security-council/article-18812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/when-will-india-get-permanent-membership-in-the-security-council1.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> जर्मनी समेत कई अन्य यूरोपीय देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में जारी हिंसक संघर्ष के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार यूरोपीय देशों ने सुरक्षा परिषद में मंगलवार को एक बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा करने का अनुरोध किया है। जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों की ओर से सुरक्षा परिषद को इस संबंध में आधिकारिक रूप से अनुरोध भेज दिया गया है। इससे पहले अर्मेनिया और अजरबैजान की सेना के बीच रविवार को नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में एक इलाके पर कब्जे को लेकर हिंसक संघर्ष शुरू हो गया। अर्मेनिया के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि नागोर्नो-काराबख क्षेत्र में अजरबैजान की सेना के साथ हुए संघर्ष में उसके 16 सैनिक मारे गए हैं जबकि 100 से अधिक घायल हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशनयिन ने ट्वीट कर जानकारी दी कि अजरबैजान ने अर्तसख पर मिसाइल से हमला किया है जिससे रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा है। पशनयिन के मुताबिक अर्मेनिया ने जवाबी कारवाई करते हुए अजरबैजान के दो हेलीकॉप्टर, तीन यूएवी और दो टैंकों को मार गिराया है। इसके बाद अर्मेनियाई प्रधानमंत्री ने देश में मार्शल-लॉ लागू कर दिया है। अजरबैजान ने आंशिक रूप से देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया है। अजरबैजान ने अपने हवाई अड्डों को सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बंद कर दिया है। केवल तुर्की को इससे छूट दी गयी है। तुर्की ने खुले तौर पर अजरबैजान को समर्थन देने की घोषणा की है।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-will-be-discussed-in-the-security-council/article-18812</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/armenia-and-azerbaijan-will-be-discussed-in-the-security-council/article-18812</guid>
                <pubDate>Tue, 29 Sep 2020 11:00:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-09/when-will-india-get-permanent-membership-in-the-security-council1.gif"                         length="94947"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        