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                <title>Agricultural Laws - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>हंगामे के बीच तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने संबंधी विधेयक लोकसभा, राज्यसभा में पारित</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि कानूनों पर सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का संसद भवन परिसर में प्रदर्शन नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। विवादास्पद तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने की संसदीय प्रकिया सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन पूरी कर ली गई। संसद के दोनों सदनों में इन कानूनों को वापस लेने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/bill-to-withdraw-all-three-agricultural-laws-passed-in-lok-sabha-amid-uproar/article-28726"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/agricultural-laws-passed-in-lok-sabha.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>कृषि कानूनों पर सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का संसद भवन परिसर में प्रदर्शन</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> विवादास्पद तीनों कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने की संसदीय प्रकिया सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन पूरी कर ली गई। संसद के दोनों सदनों में इन कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार की ओर से प्रस्तुत कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 को हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। लोकसभा की कार्यसूची में यह प्रस्ताव पहले दर्ज था। लोकसभा में मंजूरी के बाद राज्य सभा के सदन पटल पर इसे आज ही रख दिया गया। लोकसभा में पूर्वाह्न पहले स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने विधेयक को पेश और पारित कराने के प्रस्ताव रखे। विपक्षी सदस्य इस पर बहस कराने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आसन के सामने आ गये और हंगामा करने लगे। बिरला ने कहा कि सदस्यों को बोलने का पूरा अवसर दिया गया है लेकिन इस स्थिति में (आसन के सामने हंगामा) बहस नहीं करायी जा सकती। अध्यक्ष ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित किये जाने की घोषणा की। राज्य सभा में भी यह विधेयक तोमर ने पेश किया जिसे बाद में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान हालांकि कुछ सदस्यों ने अपनी बात रखनी चाही लेकिन शोरशराबे के कारण वे ऐसा नहीं कर सके। इससे पूर्व सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि विधेयक वापस लेने में काफी देर कर दी गयी है। इस कानून के विरोध में आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों की मौत हुई है।वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी के सांसदों ने विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ सोमवार को संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। परिसर में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष एकत्रित कांग्रेसी सदस्य एक बड़ा बैनर फैलाए हुए थे जिसमें अंग्रेजी में लिखा था -हम काले कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हैं। प्रदर्शनकारियों में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राज्य सभा तथा लोक सभा के बहुत से सदस्य शामिल थे। वे सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को सरकार वापस लेने की घोषणा कर चुकी है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर इन कानूनों के निरसन के लिए विधेयक पहले दिन ही सदन में प्रस्तुत करने वाले हैं। कांग्रेस का कहना है कि जब तक किसानों के हितों की रक्षा नहीं होती, पार्टी शांत नहीं बैठेगी। इस बीच संसद के पहले दिन सुबह लोक सभा और राज्य सभा में दिवंगत पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद विपक्ष के हंगामे के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही कुछ कुछ देर के लिए स्थगित की गयी थी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">फर्नांडीस 1971 से 1976 तक कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रहे: नायडू</h4>
<p style="text-align:justify;">नायडू ने कहा कि फर्नांडीस का निधन अस्सी वर्ष की उम्र में 13 सितंबर को हो गया था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कर्नाटक के उडपी में हुई थी तथा वह कृषिविद् सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण क्षेत्र में आवासीय सुविधा की उपलब्धता से जुड़े हुए थे। कर्नाटक सरकार ने उन्हें उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत भी किया था। संगीत में उनकी रूचि थी और वह कुचिपुडी नृत्य भी जानते थे। फर्नांडीस 1971 से 1976 तक कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रहे। वह आठवीं, नौवीं और ग्यारहवीं लोकसभा के सदस्य भी रहे। वह सड़क परिवहन कई अन्य विभागों के केन्द्रीय मंत्री भी थे। उन्होंने 1998 से 2004, 2004 से 2010 तथा वर्तमान में राज्यसभा में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने कहा कि देश ने एक बहुमुुंखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति, प्रतिभावान व्यक्तित्व और विशेष सांसद को खो दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नायडू ने कहा कि पूर्व सदस्य श्री शणप्पा का इस वर्ष 82 वर्ष की आयु में 29 मई को निधन हो गया था। वर्ष 1938 कर्नाटक में उनका जन्म हुआ था और मैसूर विश्वविद्यालय में उनकी उच्च शिक्षा हुई थी।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 12:45:20 +0530</pubDate>
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                <title>कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में अकाली दल का हल्ला बोल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्‍ली। नए कृषि कानूनों को पास हुए एक साल पूरे हो गए। राजधानी की सीमाओं पर तो किसान डटे ही हैं, आज ‘काला दिवस’ भी मनाया जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल की अगुवाई में संसद तक एक मार्च भी प्रस्‍तावित है। हालांकि दिल्‍ली पुलिस ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग करके रास्‍ते बंद कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/akali-dal-attack-in-delhi-against-agricultural-laws/article-26914"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/akali-dal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्‍ली। </strong>नए कृषि कानूनों को पास हुए एक साल पूरे हो गए। राजधानी की सीमाओं पर तो किसान डटे ही हैं, आज ‘काला दिवस’ भी मनाया जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल की अगुवाई में संसद तक एक मार्च भी प्रस्‍तावित है। हालांकि दिल्‍ली पुलिस ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग करके रास्‍ते बंद कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि कोविड को देखते हुए मार्च की इजाजत नहीं है। नई दिल्‍ली में धारा 144 लगा दी गई है। वहीं दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी किसानों के विरोध को देखते हुए झड़ौदा कलां बॉर्डर को बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया है। ट्रैफिक पुलिस ने ट्वीट कर लोगों से इस मार्ग के प्रयोग से बचने की सलाह दी है। वहीं, अकाली दल के इस विरोध प्रदर्शन से पहले झंडेवालान-पंचकुइयां मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है और रोड पर भारी जाम लग गया है।</p>
<h4 style="text-align:center;"><strong>केंद्र में भाजपा के पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कृषि कानूनों के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली में विशाल प्रदर्शन किया।</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब से संसद भवन तक विरोध मार्च निकालने के लिए एकत्रित हुए, भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण विरोध मार्च गुरुद्वारा साहिब से आगे न जा सका। इस दौरान पुलिस ने सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर सहित करीब 15 अकाली नेताओं को हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया। शिअद के एक पदाधिकारी के मुताबिक नेताओं ने ‘गिरफ्तारी’ दी। प्रदर्शन के मद्देनजर पुलिस की ओर से एहतियात के तौर पर दिल्ली की सीमाओं को सील किया गया और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए निषेधाज्ञा लागू की गई। उल्लेखनीय है कि शिअद ने घोषणा की थी कि वह संसद द्वारा पारित किए जा गए नये कृषि कानूनों के एक वर्ष पूरा होने के मौके पर आज ‘ब्लैक फ्राइडे’ मनाएगा।</p>
<p><iframe title="कृषि कानून को पास हुए एक साल हुआ | Delhi में विरोध प्रदर्शन, Border सील" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/F-4GzqgqnJA?feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Sep 2021 12:21:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कृषि कानूनों को लेकर असली लड़ाई दिल्ली की है: टिकैत</title>
                                    <description><![CDATA[टोहाना में तीसरे दिन किसानों का धरना समाप्त प्रशासन ने ली राहत की सांस, किसानों ने खाली किया सदर थाना सच कहूँ/सुरेन्द्र गिल,टोहाना। पूरे प्रदेश में चर्चित हुआ टोहाना मामले में चल रहा धरना तीसरे दिन समाप्त हो गया। फतेहाबाद जिले के टोहाना में यह धरना सदर थाने में 3 दिन से चल रहा था। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/delhis-real-fight-over-agricultural-laws-tikait/article-24255"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/tikait.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>टोहाना में तीसरे दिन किसानों का धरना समाप्त</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>प्रशासन ने ली राहत की सांस, किसानों ने खाली किया सदर थाना</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/सुरेन्द्र गिल,टोहाना।</strong> पूरे प्रदेश में चर्चित हुआ टोहाना मामले में चल रहा धरना तीसरे दिन समाप्त हो गया। फतेहाबाद जिले के टोहाना में यह धरना सदर थाने में 3 दिन से चल रहा था। सोमवार शाम को राकेश टिकैत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जो टोहाना मामले में हमारी मांगे थी वो सब पूरी हो गई है और अब टोहाना का धरना समाप्त कर रहे हैं। वही किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हमारी असली लड़ाई कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली में है और यहां हरियाणा सरकार तो बेवजह उनसे उलझ रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं टिकैत ने सभी किसानों का धन्यवाद भी किया। इस अवसर पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य सभी किसान नेता समेत भारी संख्या में किसान मौजूद थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टोहाना में विधायक के निवास का घेराव करने जा रहे किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया था जिसमें विकास सिंसर व रवि आजाद को जेल भेज दिया व इसके अलावा विधायक बबली मामले में गांव फतेहपुरी के किसान मक्खन सिंह को भी मामला दर्ज कर जेल भेज दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं तीनों किसानों की रिहाई वह इनके ऊपर दर्ज मामले रद्द करने की मांग को लेकर टोहाना क्षेत्र में पूरे प्रदेश से किसान टोहाना के सदर थाने में धरने पर बैठे हुए थे। वही आज सोमवार को तीसरे दिन भी सुबह से लेकर शाम तक किसान नेताओं में प्रशासन के बीच पूरा दिन बैठक चलती रही। जिसके बाद शाम को मामला सुलझ गया। इसी के चलते सोमवार शाम को सभी किसानों ने सदर थाने को खाली कर दिया व वापस अपने घरों को लौट गए। वहीं इस मामले को लेकर प्रशासन व पुलिस ने भी राहत की सांस ली।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jun 2021 20:56:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों ने भाजपा-जजपा विधायकों व सांसदों के आवासों का किया घेराव</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई, ऐक्शन मोड में रही पुलिस जनप्रतिनिधियों के घरों के बाहर दिया पहरा सच कहूँ/संदीप सिंहमार, हिसार। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के एक वर्ष पूरा होने पर संयुक्त मजदूर-किसान मोर्चा ने जिले के सभी जेजेपी और बीजेपी सांसदों और विधायकों के आवासों के सामने तीनों कृषि काले कानूनों की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-siege-the-residences-of-bjp-jjp-mlas-and-mps/article-24198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/agricultural-laws.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई, ऐक्शन मोड में रही पुलिस</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4>जनप्रतिनिधियों के घरों के बाहर दिया पहरा</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संदीप सिंहमार, हिसार।</strong> केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के एक वर्ष पूरा होने पर संयुक्त मजदूर-किसान मोर्चा ने जिले के सभी जेजेपी और बीजेपी सांसदों और विधायकों के आवासों के सामने तीनों कृषि काले कानूनों की प्रतियां जलाकर रोष प्रकट किया। इससे पहले विभिन्न किसान संगठनों से जुड़े किसान मैयड़, बाडो पट्टी, चौधरीवास व लांधड़ी टोल प्लाजाओं पर एकत्रित हुए यहां से अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हिसार, हांसीव नारनौंद की ओर चल पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भाजपा-जजपा विधायकों व सांसद के आवासों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। बाडोपट्टी टोल से सैंकड़ों लोग बीजेपी विधायक कमल गुप्ता के हाउस से होते हुए जेजेपी विधायक जोगीराम सिहाग के हाउस के सामने पहुंचे और कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई। मैय्यड़ टोल से किसान व मजदूर बीजेपी विधायक विनोद भ्याणा के हांसी स्थित आवास पर पहुंचे व प्रतियां जलाई। नारनोंद हल्के से जेजेपी विधायक रामकुमार गौतम के हाउस के सामने सतरोल खाप के नेतृत्व में तीनों काले कानूनों की प्रतियां जलाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">चौधरीवास और लाधंड़ी टोल के नेतृत्व में बीजेपी विधायक और डिप्टी स्पीकर रणवीर सिंह गंगवा के हाउस के सामने तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई और उसके जेजेपी विधायक अनूप धानक के हाउस के सामने तीनों कृषिकानूनों की प्रतियां जलाई गई। सभी किसान नेताओं ने डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के हाउस के सामने जनसभा की और तीनों काले कानूनों की प्रतियां जलाई गई और उसके बाद लांधड़ी टोल वालों के नेतृत्व में राज्यसभा सांसद सुभाष चन्द्रा के हाउस के सामने तीनों काले कानूनों की प्रतियां जलाई गई।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jun 2021 21:14:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>87वां दिन : कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अब गर्मी को लेकर किसानों ने कसी कमर धरना स्थलों पर सबमर्सिबल पंप और कूलर-पंखों का किया जा रहा प्रबंध गाँव स्तर पर किए जा रहे फसल कटाई के इंतजाम बहादुरगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून की मांग को लेकर देश के अन्नदाता पिछले 87 दिनों से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/87th-day-to-cancel-the-agricultural-laws-and-demanded-legislation-on-msp/article-21882"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/87th-day-to-cancel-the-agricultural-laws-and-demanded-legislation-on-msp.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>अब गर्मी को लेकर किसानों ने कसी कमर</strong></h3>
<ul>
<li>
<h4>धरना स्थलों पर सबमर्सिबल पंप और कूलर-पंखों का किया जा रहा प्रबंध</h4>
</li>
<li>
<h4>गाँव स्तर पर किए जा रहे फसल कटाई के इंतजाम</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बहादुरगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> तीन कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून की मांग को लेकर देश के अन्नदाता पिछले 87 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। ठिठुरा देने वाली ठंड को हराकर अब किसान भीषण गर्मी के आगमन के मद्देनजर प्रबंधों में जुट गए हैं। बेशक सरकार को लग रहा है कि किसान आंदोलन मंद पड़ चुका है, लेकिन इसके बावजूद किसान अपनी मांगें माने जाने से कम पर मानने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। टिकरी बॉर्डर पर गर्मी के सीजन के आगमन को देखते हुए किसानों ने धरनास्थलों के आसपास सबमर्सिबल पम्पसैट लगवाने के साथ-साथ नए टैंट, पंखे, टीवी, और फ्रिज की व्यवस्था शुरू कर दी है। वहीं पीने के पानी के लिए आरओ सिस्टम भी लगवाए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान राजबीर, कुलबीर, रामेहर, गुरजंट, सुखदेव, कृष्ण और बाली आदि का कहना है कि संयुक्त मोर्चा के हर फैसले को सिरे चढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि देश का किसान हर परिस्थिति के लिये तैयार है। किसानों ने आगामी फसल की कटाई के लिए भी गांव के स्तर पर इंतजाम शुरू कर दिया है। किसानों ने कहा कि बातचीत सरकार ने बन्द की है, इसलिए सरकार ही शुरू करे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर देती है और न्यूनतम समर्थन मूल्य वाला कानून नहीं बनाती हम घरों को वापिस नहीं लौटेंगे।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/87th-day-to-cancel-the-agricultural-laws-and-demanded-legislation-on-msp/article-21882</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Feb 2021 20:08:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संपादकीय : जिद्द कहीं देश का नुक्सान तो नहीं कर रही?</title>
                                    <description><![CDATA[नए कृषि कानूनों पर सरकार और किसान आमने-सामने हैं। सरकार का कहना है कि नए कृषि कानून देश के किसानों की समृद्धि के लिए हैं, इनमें ऐसा कुछ नहीं, जिससे किसानों को कोई हानि हो। अगर किसानों को किसी प्रकार की हानि की आशंका है तो सरकार इनमें संशोधन कर वह आशंका को भी खत्म […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/is-stubbornness-doing-damage-to-the-country/article-21610"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/is-stubbornness-doing-damage-to-the-country.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नए कृषि कानूनों पर सरकार और किसान आमने-सामने हैं। सरकार का कहना है कि नए कृषि कानून देश के किसानों की समृद्धि के लिए हैं, इनमें ऐसा कुछ नहीं, जिससे किसानों को कोई हानि हो। अगर किसानों को किसी प्रकार की हानि की आशंका है तो सरकार इनमें संशोधन कर वह आशंका को भी खत्म करने के लिए तैयार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी मुद्दे पर सरकार व किसान नेताओं के बीच 11 दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। दो महीने से किसान दिल्ली के बॉर्डर पर सड़कों पर बैठे हैं। सर्द ऋतु में सड़क पर सौ से अधिक किसान मौत के आगोश में चले गए। 26 जनवरी को लाल किला की घटना पर देश शर्मसार हुआ। सरकार किसानों को इस शर्मनाक घटना का जिम्मेदार बता रही है तो वहीं किसान इस घटना के लिए सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार और किसानों के बीच फंसे इस पेंच में जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर उम्मीद लगाए हुए थी कि शायद राज्यसभा में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में सरकार और किसानों के बीच फंसे इस पेंच को खोल दें। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सदन के माध्यम से किसानों को बातचीत का न्यौता दिया और वही बात दोहराई कि एमएसपी थी, है और रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने 4 पूर्व प्रधानमंत्रियों को कृषि सुधारों का पक्षधर बताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किसानों को उपज बेचने के लिए आजादी और कृषि बाजार दिलाने की बात की थी और हम उन्हीं की बात को आगे बढ़ा रहे हैं। फिर आज कांग्रेस अपनी बात से यू टर्न ले रही है। सदन में प्रधानमंत्री ने जहां सिखों की तारीफ की, वहीं आन्दोलनकारियों को आन्दोलनजीवी की संज्ञा देते हुए उन्हें परजीवी कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">किसान आन्दोलनकारियों के समर्थन में आए विदेशी लोगों ग्रेटा थनबर्ग व सिंगर रिहाना का नाम लिए बगैर प्रधानमंत्री ने इन्हें फॉरेन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी कहा। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में बेशक सदन को हंसाया भी खूब, लेकिन प्रधानमंत्री का भाषण आन्दोलनकारी किसानों के चेहरे पर हंसी नहीं ला पाया। प्रधानमंत्री के भाषण से स्पष्ट है कि सरकार अपनी जिद्द पर अड़ी है कि कानून को लागू होने दो, जब चाहो संशोधन करवा लो।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर किसानों की जिद्द है कि कानून वापिस नहीं तो घर वापिसी नहीं। समझौता हमेशा बीच के रास्ते से निकलता है। जिद्द के कारण इस मामले में बीच को कोई रास्ता हीं नहीं बचा, तो हल कैसे निकलेगा। सरकार व किसानों के बीच इस गतिरोध के कारण दिल्ली आने-जाने के लिए सड़क व रेल यातायात प्रभावित है, जिसका सीधा असर आम जन के जीवन पर पड़ता है। देश के आमजन के मन में यह आशंका है कि देश विरोधी ताकतें इस जिद्द का फायदा उठाने की कोशिशें कर रही है। देशहित में जिद्द का यह गतिरोध अब समाप्त होना चाहिए।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/is-stubbornness-doing-damage-to-the-country/article-21610</link>
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                <pubDate>Mon, 08 Feb 2021 22:15:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसान संगठनों की बैठक शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। किसान संगठनों की बैठक शुरू हो गई हैl इस बैठक में फैसला लिया जाएगा कि सरकार से बातचीत करनी है या नहींl अगर करनी है तो सरकार के सामने क्या प्रपोजल रखा जाएगा और नहीं करनी है तो आगे की रणनीति क्या होगीl इस बैठक से पहले किसान नेता गुरनाम सिंह चढुनी ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/government-withdraws-all-three-agricultural-laws-congress/article-20776"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/farmer-protest5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली। </strong>किसान संगठनों की बैठक शुरू हो गई हैl इस बैठक में फैसला लिया जाएगा कि सरकार से बातचीत करनी है या नहींl अगर करनी है तो सरकार के सामने क्या प्रपोजल रखा जाएगा और नहीं करनी है तो आगे की रणनीति क्या होगीl इस बैठक से पहले किसान नेता गुरनाम सिंह चढुनी ने कहा किसरकार अपने रुख पर अड़ी हुई है, हम भी अपनी मांग पर अड़े हैं। हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति को भी स्वीकार नहीं करते हैं, अगर वह बनाई जाती है। अगर सरकार बात करना चाहती है कि वे कानूनों को निरस्त क्यों नहीं करती है।</p>
<h3>तीनों कृषि कानून वापस ले सरकार : कांग्रेस</h3>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आंदोलन कर रहे किसानों की मांग पूरी कर कृषि संबंधी तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री से सत्ता का अहंकार छोड़कर किसानों की मांग पर हठधर्मिता नहीं करने का आग्रह किया और कहा कि आंदोलनकारी किसान अपने घरों को लौटे इसलिए उनकी मांग पर सकारात्मक विचार किया जाना जरूरी है। सुरजेवाला ने ट्वीट किया, “ किसान नहीं तो अन्न नहीं। किसान देश की आत्मा है, अन्नदाता है। मोदी जी, अहंकार को त्यागिए, किसानों की मांग मानकर तीनों काले कानूनों को वापस लीजिए।” उन्होंने कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की जयंती ‘किसान दिवस’ पर देश के सभी अन्नदाताओं को सादर वंदन। किसान दिवस।”</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/government-withdraws-all-three-agricultural-laws-congress/article-20776</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Dec 2020 15:25:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि कानूनों पर बोले पीएम, गंगा जल जैसी पवित्र नीयत से हो रहा है काम</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (PM said on Agricultural Laws) नये कृषि कानून को लेकर किसानों के बीच उत्पन्न आशंकाओं के लिए कांग्रेस की ओर इशारा करते उसे जिम्मेवार ठहराया तथा अपने छह वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों को ऐतिहासिक करार देते हुए सोमवार को यहां कहा कि गंगा जल जैसी पवित्र नीयत से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pm-said-on-agricultural-laws-work-is-being-done-with-holy-intentions-like-ganga-water/article-20240"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/pm-said-on-agricultural-laws-work-is-being-done-with-holy-intentions-like-ganga-water.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाराणसी (एजेंसी)</strong>। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (PM said on Agricultural Laws) नये कृषि कानून को लेकर किसानों के बीच उत्पन्न आशंकाओं के लिए कांग्रेस की ओर इशारा करते उसे जिम्मेवार ठहराया तथा अपने छह वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों को ऐतिहासिक करार देते हुए सोमवार को यहां कहा कि गंगा जल जैसी पवित्र नीयत से काम किया जा रहा है, जिसके बेहतर परिणाम आने शुरू हो गये हैं और किसी को भी भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है।</p>
<h4>पीएम ने राष्ट्रीय राज मार्ग परियोजना के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मिजार्मुराद के खजुरी में 2,447 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राज मार्ग परियोजना के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों के साथ दशकों से धोखा एवं छलावा किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-19 के हंडिया (प्रयागराज)-राजातालाब (वाराणसी) खंड की छह लेन वाली चौड़ीकरण परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया। इससे वाहनों का आवागमन आसान हो गया है और आने-जाने में अब एक घंटे कम लगने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम ने कहा कि वर्षों तक केंद्र की सत्ता में रही कांग्रेस का नाम लिये बिना कहा कि पिछली सरकारों के दौरान किसानों को तरह-तरह के धोखे दिये जा रहे थे। कभी फसलों के न्यूनतम मूल्य दिलाने के नाम पर तो कभी सिंचाई परियोजनाओं के नाम पर और कभी किसानों के बकाया रिण माफ करने के लिए। इन सब का लाभ कभी भी किसानों को नहीं मिल पाता था। इसलिए उनकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि किसानों के साथ बार-बार छल करने वाले लोग नये कृषि कानूनों के खिलाफ आजकल भ्रमण फैला रहे हैं, जिनके लिए अनेक राजनीतिक दलों की ओर से वर्षों से मांग की जाती रही है। नये कानून से किसानों को लाभ मिलने शुरू हो गये हैं। आने वाले समय में देश के सभी छोटे-बड़े किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा लेकिन जो लोग किसानों के साथ छल करते रहें, वे चौबीसों घंटे भ्रमण फैलाने का काम कर रहे हैं। जिससे सावधान रहने की जरूरत है। मोदी ने कहा कि जिन किसानों को नये कृषि कानूनों को लेकर कोई आशंका है, उसे सरकार लगातार दूर कर रही है तथा इस प्रकार के प्रयास आगे जारी रहेंगे।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 30 Nov 2020 18:01:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि कानूनों पर फिर से विचार करे केंद्र सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कृषि संबंधी तीनों कानूनों पर असहमति व्यक्त करते हुए रविवार को कहा कि केंद्र सरकार को इन पर फिर से विचार करना चाहिए। मायावती ने यहां जारी एक संदेश में कहा कि इन कानूनों को लेकर पूरे देश के किसान आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/central-government-should-revisit-agricultural-laws/article-20211"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/mayawati.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कृषि संबंधी तीनों कानूनों पर असहमति व्यक्त करते हुए रविवार को कहा कि केंद्र सरकार को इन पर फिर से विचार करना चाहिए। मायावती ने यहां जारी एक संदेश में कहा कि इन कानूनों को लेकर पूरे देश के किसान आक्रोशित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को स्थिति समझनी चाहिए और इनकी इन कानूनों की समीक्षा करनी चाहिए। बसपा नेता ने कहा, “केन्द्र सरकार द्वारा कृषि से सम्बन्धित हाल में लागू किए गए तीन कानूनों को लेकर अपनी असहमति जताते हुए पूरे देश में किसान काफी आक्रोशित और आन्दोलित भी हैं। इसके मद्देनजर, किसानों की आम सहमति के बिना बनाए गए, इन कानूनों पर केन्द्र सरकार अगर पुनर्विचार कर ले तो बेहतर है।”</p>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा , राजस्थान , पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के किसान संगठन पिछले कई दिनों से दिल्ली में इन कानूनों का विरोध प्रदर्शन करते हुए डटे हुए हैं तथा इन्हें वापस लेने की की मांग कर रहे हैं। देश के कई हिस्सों में भी किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Nov 2020 10:13:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नये कृषि कानून किसान हितैषी- शिवराज</title>
                                    <description><![CDATA[बड़वानी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नये कृषि कानून किसानों के हित में हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने बड़वानी जिले के राजपुर अनुविभाग के ऊंची में कल आयोजित जनजातीय गौरव सम्मान सम्मेलन को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से चर्चा में कहा कि नये कृषि कानून किसानों के हित में है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-agricultural-laws-farmer-friendly-shivraj/article-20189"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/mamta-apprises-the-railway-ministry-for-the-return-of-bengal-workers-trapped-in-indore-shivraj.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बड़वानी।</strong> मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नये कृषि कानून किसानों के हित में हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने बड़वानी जिले के राजपुर अनुविभाग के ऊंची में कल आयोजित जनजातीय गौरव सम्मान सम्मेलन को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से चर्चा में कहा कि नये कृषि कानून किसानों के हित में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी ने यह अभूतपूर्व कार्य किया है। इसमें किसानों को विकल्प दिया गया है कि वह मंडी में अपनी उपज बेचे या मंडी के बाहर। उन्होंने सवाल किया कि इसमें भला किस को आपत्ति हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किया जा रहा आंदोलन पूरे देश का आंदोलन नहीं है और यह बहुत ही सीमित क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा संचालित है। कुछ लोग किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दरअसल विरोध को हवा देने वाले सस्ती राजनीति कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि किसानों के हित के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लेकर सरकार ने अनेकों कदम उठाए हैं। उन्होंने सब्जी उत्पादकों की तकलीफों के मद्देनजर कहा कि इसे न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत लेने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Nov 2020 10:26:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कृषि कानूनों का विरोध : ट्रैक्टर-ट्रालियों में 4 महीने का राशन लेकर 26 को दिल्ली कूच करेंगे किसान</title>
                                    <description><![CDATA[रामलीला मैदान में दिया जाएगा अनिश्चितकालीन धरना ( Agricultural Laws) सच कहूँ/नवीन मलिक रोहतक। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए ( Agricultural Laws) कृषि कानूनों का लगातार विरोध कर रहे किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मूड बना लिया हैं। भारतीय किसान यूनियन अंबावता के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष अनिल नांदल ने सरकार को चेतावनी देते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/opposition-to-agricultural-laws-farmers-will-travel-to-delhi-on-26th-of-4-months-ration-in-tractor-trolleys/article-20035"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/opposition-to-agricultural-laws-farmers-will-travel-to-delhi-on-26th-of-4-months-ration-in-tractor-trolleys.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">रामलीला मैदान में दिया जाएगा अनिश्चितकालीन धरना ( Agricultural Laws)</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/नवीन मलिक रोहतक</strong>। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए ( Agricultural Laws) कृषि कानूनों का लगातार विरोध कर रहे किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मूड बना लिया हैं। भारतीय किसान यूनियन अंबावता के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष अनिल नांदल ने सरकार को चेतावनी देते हुए बताया कि तीन कृषि बिलों के विरोध में 26 नवंबर को दिल्ली मार्च के तहत रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें देशभर के किसान भारी संख्या में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि अब किसान, मजदूर, कर्मचारी व व्यापारी सरकार को सबक सिखाने के लिए तैयार है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ आगे की रणनीति तय करने के लिए गत दिनों किसान भवन में हुई बैठक में किसान संगठनों ने हर हाल में दिल्ली कूच करने का फैसला लिया है। साथ ही किसानों से अपील भी की गई है कि ट्रैक्टर-ट्रालियों में चार माह का राशन साथ लेकर निकलें। वहीं देश की राजधानी से जुड़ने वाले प्रमुख मार्गों कुंडली बार्डर, जयपुर-दिल्ली हाईवे, आगरा-दिल्ली हाईवे, रोहतक-हिसार-दिल्ली हाईवे तथा बरेली-दिल्ली हाईवे के जरिये दिल्ली पहुंचा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें राजधानी में नहीं घुसने दिया जाता है तो दिल्ली जाने वाली सड़कों को जाम कर दिया जाएगा।</p>
<h4>अनिल नांदल का केंद्र सरकार पर तीखा हमला</h4>
<p style="text-align:justify;">अनिल नांदल ने कहा कि केंद्र सरकार कह रही है कि हम मंडियों में सुधार के लिए यह कानून लेकर आए हैं, लेकिन सच तो यह है कि कानून में कहीं भी मंडियों की समस्याओं के सुधार का जिक्र तक नहीं है। नांदल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हर बदलाव को सुधार नहीं कहा जा सकता है, यह विनाश का कारण भी बन सकते है। देश ने ऐतिहासिक सुधार के नाम पर नोटबंदी को झेला और भयावह परिणाम देखने को मिले। इस एक कदम से लाखों नौकरियां और सैकड़ों जिंदगियां खत्म हो गई । जीएसटी को भारत की आर्थिक आजादी के रूप में दिखाया गया। दो फीसदी जीडीपी बढ़ाने का दावा किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी आधी रात में आ तो गया, लेकिन कभी जीडीपी को ऊपर नहीं बढ़ा पाया, इसके विपरीत यह अर्थव्यवस्था को और नीचे लेकर चला गया। साथ ही कोविड-19 से लड़ने के नाम पर पूरे देश में महज 4 घंटे के नोटिस पर लॉकडाउन किया गया और 21 दिन की अभूतपूर्व लड़ाई बताई गई। कोरोना तो खत्म नहीं हुआ, लेकिन हजारों प्रवासी मजदूरों की जिंदगियां देश की सड़कों पर खत्म हो गई । अब इतिहास बनाने के नाम पर किसानों को चुना गया है। कृषि सुधार के नाम पर किसानों को निजी बाजार के हवाले कर रही है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाशत नहीं किया जाएगा।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Nov 2020 21:55:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>5 नवंबर को कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का चक्का जाम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने हाल ही में बने कृषि कानूनों के खिलाफ पांच नवंबर को देश व्यापी चक्का जाम करने का ऐलान किया है। एआईकेएससीसी से जुड़े और इसे समर्थन दे रहे करीब चार सौ किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने आज यहां बैठक की। बैठक में फैसला लिया गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/farmers-organizations-clamor-against-agricultural-laws-on-5-november/article-19537"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/farmers-organizations-clamor-against-agricultural-laws-on-5-november.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने हाल ही में बने कृषि कानूनों के खिलाफ पांच नवंबर को देश व्यापी चक्का जाम करने का ऐलान किया है। एआईकेएससीसी से जुड़े और इसे समर्थन दे रहे करीब चार सौ किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने आज यहां बैठक की। बैठक में फैसला लिया गया कि पांच नवंबर को चक्का जाम कार्यक्रम के बाद 26 और 27 नवंबर को ‘दिल्ली चलो, डेरा डालो, घेरा डालो’ आँदोलन के जरिए केन्द्र सरकार पर किसान कानूनों को वापस लेने का दबाव डाला जाएगा। बैठक के बाद एआईकेएससीसी के संयोजक वी. एम. सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केन्द्र सरकार जब तक कृषि कानूनों को वापस नही लेगी तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। इसे वापस ले।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">यादव ने कहा कि पांच नवंबर को कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने बिजली विधेयक के जरिए केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों की ओर से बिजली पर दी जा रही सब्सिडी को नियंत्रित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुचाने चाहत है। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार के प्रस्तावित बिजली विधेयक का मसौदा भी जनता के हितों के खिलाफ है लिहाजा सरकार कृषि कानून लेकर आई और अब बिजली विधेयक का मसौदा इसी मंशा से तैयार किया गया है। यादव ने कहा कि किसान संगठनों ने पंजाब में मालवाहक ट्रेनों के परिचालन का कभी विरोध नहीं किया लेकिन सरकार मालवाहक ट्रेनों का परिचालन बंद कर और आपूर्ती को बाधित करके किसान संगठनों को बदनाम करना चाहती है। महाराष्ट्र से पूर्व सांसद और किसान नेता राजू शेट्टी ने कहा कि पांच नवंबर को देशभर के सरकारी कार्यालयों, भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) , उसके सहयोगी दलों और कॉरपोरेट दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।</h6>
<p> </p>
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                <pubDate>Tue, 27 Oct 2020 20:39:41 +0530</pubDate>
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