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                <title>COIN NOTE UPI: इंडिया में पहला सिक्का कब चला और कब छपा पहला नोट? जानिये ₹10,000 के नोट से UPI तक का सफर</title>
                                    <description><![CDATA[Coin Note UPI: आज के डिजिटल युग में हम बगैर नकद के किसी भी चीज़ की खरीदारी कर सकते हैं — चाहे चाय हो, सब्ज़ी हो या फिर महंगी से महंगी शॉपिंग। बस मोबाइल उठाइए, क्यूआर कोड स्कैन करिए और भुगतान हो गया। ये सब संभव हुआ UPI की वजह से। लेकिन क्या आपने कभी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/when-was-the-first-coin-used-in-india-and-when-was-the-first-note-printed/article-74074"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/coin-note-upi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Coin Note UPI: आज के डिजिटल युग में हम बगैर नकद के किसी भी चीज़ की खरीदारी कर सकते हैं — चाहे चाय हो, सब्ज़ी हो या फिर महंगी से महंगी शॉपिंग। बस मोबाइल उठाइए, क्यूआर कोड स्कैन करिए और भुगतान हो गया। ये सब संभव हुआ UPI की वजह से।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पैसे को हम इतना आसान समझते हैं, उसका इतिहास क्या है? भारत में पहला सिक्का कब बना, पहला नोट कब छपा, आरबीआई कब बना? अगर नहीं पता, तो चलिए हम बताते हैं — फ्लाइंग मनी से लेकर डिजिटल करेंसी तक का सफर।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारतीय मुद्रा: हजारों साल पुराना इतिहास | COIN NOTE UPI</h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय मुद्रा यानी इंडियन करेंसी का इतिहास बेहद पुराना और समृद्ध है। समय के साथ मुद्रा का रूप और लेन-देन का तरीका लगातार बदला। जहां कभी धातु के सिक्के चला करते थे, वहीं आज डिजिटल ट्रांजैक्शन आम हो चुका है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">UPI: डिजिटल लेन-देन की क्रांति</h3>
<p style="text-align:justify;">साल 2016 के अगस्त महीने में, भारत ने डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम रखा। RBI और इंडियन बैंक एसोसिएशन की निगरानी में, नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI (Unified Payments Interface) की शुरुआत की।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पायलट प्रोजेक्ट और विस्तार</h3>
<p style="text-align:justify;">तब के आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के कार्यकाल में, इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर और बेंगलुरु में शुरू किया गया। इसके बाद पूरे देश में इसका विस्तार हुआ।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कोरोना के बाद तेजी से बढ़ा इस्तेमाल</h3>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में UPI का प्रयोग सीमित था, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान लोगों ने नकद लेन-देन से दूरी बना ली और UPI की ओर रुख किया। आज यह दुनिया का सबसे तेज़ और सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत में पहला सिक्का कब चला?</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत में पहले सिक्के का जिक्र महाजनपद काल (600 ईसा पूर्व – 300 ईसा पूर्व) में मिलता है। इन्हें पंचमार्क्ड कॉइन्स कहा जाता था और ये तांबे, चांदी और सोने से बने होते थे। इन पर विभिन्न प्रतीक चिह्न बने होते थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ईस्ट इंडिया कंपनी के सिक्के</h3>
<p style="text-align:justify;">आधुनिक भारतीय सिक्कों की शुरुआत 19 अगस्त 1757 को हुई जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोलकाता में एक रुपये का सिक्का ढाला। यह सिक्का प्लासी की लड़ाई जीतने के बाद कंपनी को मिला अधिकार प्राप्त कर ढाला गया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्वतंत्र भारत के सिक्के</h3>
<p style="text-align:justify;">1950 में भारत ने आज़ादी के बाद अपना पहला सिक्का ढाला। इससे पहले तक ब्रिटिश भारत के सिक्के ही प्रचलन में थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पहला कागज का नोट कब छपा?</h3>
<p style="text-align:justify;">15 अगस्त, 1949 को भारत सरकार ने पहला भारतीय नोट जारी किया। इस नोट पर ‘भारत सरकार’ लिखा था और अशोक स्तंभ का चित्र था। यह 1 रुपये का नोट था और इस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">RBI द्वारा जारी किए गए नोट | COIN NOTE UPI</h3>
<p style="text-align:justify;">26 जनवरी 1950 को भारत के गणराज्य बनने के बाद RBI ने Republic Series नामक नोटों की सीरीज़ जारी की। इसमें 2, 5, 10 और 100 रुपये के नोट शामिल थे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बड़े मूल्य के नोटों की शुरुआत</h3>
<p style="text-align:justify;">1954 में 1000 रुपये का नोट<br />
1975 में 50 रुपये का नोट<br />
2000 में 500 रुपये का नोट<br />
2016 में 2000 रुपये का नोट जारी हुआ (अब बंद)</p>
<h3 style="text-align:justify;">आज़ादी से पहले ब्रिटिश नोट</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत में पहला सरकारी नोट 1861 में Paper Currency Act के तहत ब्रिटिश सरकार ने जारी किया था। यह 10 रुपये का नोट था जिस पर रानी विक्टोरिया की तस्वीर थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारत में किन-किन बैंकों ने नोट छापे?</h3>
<p style="text-align:justify;">बैंक ऑफ हिंदोस्तान<br />
भारत में कागज़ी मुद्रा सबसे पहले 1770 में बैंक ऑफ हिंदोस्तान ने जारी की थी।<br />
अन्य बैंक<br />
1773 में जनरल बैंक ऑफ बंगाल एंड बिहार<br />
बैंक ऑफ कलकत्ता<br />
बैंक ऑफ बॉम्बे<br />
बैंक ऑफ मद्रास<br />
1861 के बाद इन बैंकों से नोट छापने का अधिकार छीन लिया गया और सिर्फ प्रेसीडेंसी बैंक को यह कार्य करने की अनुमति मिली।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना</h3>
<p style="text-align:justify;">RBI की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत की गई थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हेड ऑफिस की स्थिति</h3>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में हेड ऑफिस कोलकाता में था, जिसे बाद में मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रीयकरण</h3>
<p style="text-align:justify;">RBI शुरू में एक प्राइवेट बैंक था जिसे 1 जनवरी 1949 को भारत सरकार ने राष्ट्रीयकृत कर लिया।<br />
क्या भारत में कभी ₹10,000 का नोट चला?<br />
पहली बार 1938 में जारी हुआ<br />
RBI ने 1938 में पहली बार ₹10,000 का नोट जारी किया। इसे जनवरी 1946 में बंद कर दिया गया।<br />
दोबारा 1954 में लौटा<br />
1954 में यह नोट फिर से प्रचलन में आया लेकिन 1978 में इसे स्थायी रूप से बंद कर दिया गया।<br />
RBI अधिकतम कितने रुपये का नोट जारी कर सकता है?<br />
भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 24 के अनुसार, RBI 2 रुपये से ₹10,000 तक के नोट जारी कर सकता है।<br />
₹10,000 से अधिक का नोट तभी जारी हो सकता है जब केंद्र सरकार विशेष निर्देश दे और केंद्रीय बोर्ड सिफारिश करे।<br />
दुनिया में मुद्रा की शुरुआत कब हुई?<br />
मुद्रा का आविष्कार किसी एक व्यक्ति ने नहीं किया, यह एक धीरे-धीरे विकसित हुई अवधारणा है। दुनिया का पहला सिक्का करीब 600 ईसा पूर्व में लिडिया (मौजूदा तुर्की) के राजा एलियट्स के शासन में ढाला गया था।<br />
ये सिक्के इलेक्ट्रम (सोना और चांदी का मिश्रण) से बनाए गए थे।<br />
भारत में भी इसी दौर में पंच-चिह्नित सिक्के चलन में आए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कागज की मुद्रा (पेपर मनी)</h3>
<p style="text-align:justify;">कागज़ी मुद्रा की शुरुआत चीन में 7वीं से 10वीं शताब्दी के दौरान हुई।<br />
तब इसे ‘फ्लाइंग मनी’ कहा जाता था।<br />
सही अर्थों में नोट का चलन सांग वंश (960–1279 ई.) के दौरान शुरू हुआ।<br />
मंगोल सम्राट कुबलई खान ने 13वीं सदी में इस मुद्रा को और लोकप्रिय बनाया।<br />
1661 में स्वीडन की एक बैंक ने सबसे पहला आधुनिक कागज का नोट जारी किया।<br />
जब मुद्रा नहीं थी, तब व्यापार कैसे होता था?</p>
<h3 style="text-align:justify;">वस्तु विनिमय प्रणाली</h3>
<p style="text-align:justify;">मुद्रा के आविष्कार से पहले दुनिया भर की रियासतों और सभ्यताओं में वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रयोग होता था।<br />
अनाज के बदले पशु<br />
मसालों के बदले वस्त्र<br />
सेवा के बदले भोजन, कपड़े या आवास<br />
व्यापार एक सीधे आदान-प्रदान के माध्यम से किया जाता था, जिसे हम आज Barter System के नाम से जानते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">उड़ती हुई मुद्रा से UPI तक</h3>
<p style="text-align:justify;">भारत में मुद्रा का इतिहास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक विकास की कहानी भी है।<br />
पंच-चिह्नित सिक्कों से लेकर डिजिटल करेंसी तक, भारतीय मुद्रा का सफर हजारों सालों की प्रगति और नवाचार का प्रमाण है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज जब हम बस एक क्लिक में UPI से भुगतान करते हैं, तो यह तकनीक की शक्ति और हमारे आर्थिक ढांचे की मजबूत नींव का प्रतीक है। वहीं भविष्य में यह सफर और भी रोमांचक होगा, डिजिटल रूपयों और ग्लोबल पेमेंट सिस्टम की ओर। COIN NOTE UPI</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Haryana: हरियाणा की महिलाएं फैमिली आईडी में समय रहते ये काम करवा लो, बाद में मत बोलना उसके 2100 रुपये आ गए मेरे क्यों नहीं आए" href="http://10.0.0.122:1245/ikkis-sau-rupaye-wali-news/">Haryana: हरियाणा की महिलाएं फैमिली आईडी में समय रहते ये काम करवा लो, बाद में मत बोलना उसके 2100 रुपये आ गए मेरे क्यों नहीं आए</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 12:20:53 +0530</pubDate>
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                <title>RBI News: आखिर आरबीआई की क्या मजबूरी थी जो रातों-रात बंद करना पड़ा ये सिक्का?</title>
                                    <description><![CDATA[RBI News: जब किसी भी वस्तु विशेष का किसी गलत कार्य के लिए प्रयोग होने लगे तो उस पर कार्रवाई करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचता। इसी के परिणामस्वरूप आरबीआई को पुराना ₹5 का सिक्का बंद करना पड़ा। बता दें कि पुराना ₹5 का सिक्का मोटा और टिकाऊ था, जिसे पर्याप्त मात्रा में विशेष […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/after-all-what-was-the-compulsion-of-rbi-that-this-coin-had-to-be-closed-overnight/article-51726"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/rbi-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">RBI News: जब किसी भी वस्तु विशेष का किसी गलत कार्य के लिए प्रयोग होने लगे तो उस पर कार्रवाई करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचता। इसी के परिणामस्वरूप आरबीआई को पुराना ₹5 का सिक्का बंद करना पड़ा। बता दें कि पुराना ₹5 का सिक्का मोटा और टिकाऊ था, जिसे पर्याप्त मात्रा में विशेष धातु से तैयार किया गया था। दुर्भाग्यवश, उसी धातु का ब्लेड जैसी अवैध वस्तु बनाने के लिए किया जा रहा था। धातु के इस अवैध उपयोग ने आरबीआई की चिंताएँ बढ़ा दीं और भारतीय रिजर्व बैंक को यह कठोर कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अवैध व्यापार और सिक्कों का परिवर्तन | RBI News</h4>
<p style="text-align:justify;">‘₹5 के मोटे सिक्के अवैध रूप से बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में तस्करी होने लगे। वहां इन सिक्कों को पिघलाकर इनमें से धातु निकाली जाती थी, जो ब्लेड बनाने में उपयोग की जाती थी। पता लगा कि , ₹5 के सिक्के से 6 ब्लेड बन सकते हैं, प्रत्येक ब्लेड की कीमत ₹2 होती। आरबीआई को इस अवैध गतिविधि के बारे में पता चला और सिक्कों की इस अवैध गतिविधि को रोकने के लिए आरबीआई को तत्काल कदम उठाने पड़े। “5 के मोटे सिक्के को बंद करने का आरबीआई का फैसला इसकी धातु से जुड़ी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने से प्रेरित था।’</p>
<p style="text-align:justify;">इस अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाने के लिए, आरबीआई ने ₹5 के मोटे सिक्के का उत्पादन अचानक बंद करने का फैसला किया। साथ ही उन्होंने एक नया डिजाइन भी पेश कर दिया, जिसमें एक पतली प्रोफाइल और एक अलग धातु संरचना शामिल की। पतले सिक्कों में उन सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है, जिनका उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए आसानी से नहीं किया जा सकता और जिससे मुद्रा को खंडित करना भी लगभग नामुमकिन होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">5 रुपये के मोटे सिक्के बाजार में आने से बाजार में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ। जोकि अभी भी प्रचलन में पाया जा सकता है, आरबीआई के इसके उत्पादन को रोकने के फैसले से इसकी उपलब्धता में गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप, पतला संस्करण इसके स्थान पर प्रयुक्त होने लगा और जो प्रचलन में 5 रुपये के सिक्के का प्राथमिक रूप बन गया है। जालसाजी और अवैध गतिविधियों पर काबू पाने के लिए आरबीआई नियमित रूप से मुद्रा को संशोधित करता रहता है। इनमें डिजाइन, सुरक्षा सुविधाएं और यहां तक कि सिक्कों और नोटों की संरचना में परिवर्तन भी शामिल है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 12:07:37 +0530</pubDate>
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                <title>New 75 Rupee Coin: नए संसद भवन के उद्घाटन को ‘खास’ बनाने के लिए हो रही है 4 धातुओं से लैस ये खास चीज उजागर</title>
                                    <description><![CDATA[नए संसद भवन के खास उद्घाटन पर ‘खास’ लॉन्चिंग | new parliament building नई दिल्ली। बता दें कि 28 मई दिन रविवार को नए (New 75 Rupee Coin) संसद भवन का उद्घाटन होने जा रहा है। इस मौके को खास और यादगार बनाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है, वित्त मंत्रालय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/new-75-rupee-coin/article-48078"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/new-75-rupee-coin.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">नए संसद भवन के खास उद्घाटन पर ‘खास’ लॉन्चिंग | new parliament building</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> बता दें कि 28 मई दिन रविवार को नए (New 75 Rupee Coin) संसद भवन का उद्घाटन होने जा रहा है। इस मौके को खास और यादगार बनाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लिया है, वित्त मंत्रालय ने गुरुवार (25 मई) को एलान किया कि नए संसद भवन के उद्घाटन को यादगार बनाने के लिए 75 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, सिक्के पर नए संसद भवन की तस्वीर और उसका नाम लिखा होगा। नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। आइए जानते हैं 75 रुपये के नए सिक्के की रूपरेखा…</p>
<h4 style="text-align:justify;">कैसा होगा? New 75 Rupee Coin</h4>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, 75 रुपये का सिक्का गोल गोल होगा। सिक्के का व्यास 44 मिलीमीटर और किनारों पर 200 सेरेशन होगा। 75 रुपये का ये स्मारक सिक्का चार धातुओं को मिलाकर बनाया जाएगा, जिसमें 50 फीसदी चांदी, 40 फीसदी तांबा, 5 फीसदी निकल और 5 फीसदी जिंक का इस्तेमाल किया जाएगा। नए संसद भवन की तस्वीर के नीचे 2023 भी लिखा होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इतना ही नहीं सिक्के के सामने वाले हिस्से के बीच में अशोक स्तंभ का सिंह और सत्यमेव जयते लिखा होगा। सिक्के पर देवनागरी लिपि में भारत और अंग्रेजी में इंडिया लिखा होगा। पीछे के हिस्से में ऊपरी परिधि में देवनागरी लिपि में संसद भवन और निचली परिधि में अंग्रेजी में संसद भवन लिखा होगा। सिक्के का डिजाइन संविधान के पहली अनुसूची में दिए गए दिशा-निदेर्शों के अनुसार ही होगा।</p>
]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 10:44:24 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रिटेन में तैयार किया गया नए डिजाइन का सिक्का</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन(एजेंसी)। किंग चार्ल्स तृतीय की विशेषता वाला पहला 50पी का सिक्का (Britain Coin) क्रिसमस से पहले प्रचलन में आ जाएगा। द सन द्वारा जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, द रॉयल मिंट महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के जीवन और विरासत का जश्न मनाने के लिए एक स्मारक सिक्का संग्रह शुरू करने के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/new-design-coin-made-in-britain/article-38449"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/britain-coin.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लंदन(एजेंसी)।</strong> किंग चार्ल्स तृतीय की विशेषता वाला पहला 50पी का सिक्का (Britain Coin) क्रिसमस से पहले प्रचलन में आ जाएगा। द सन द्वारा जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, द रॉयल मिंट महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के जीवन और विरासत का जश्न मनाने के लिए एक स्मारक सिक्का संग्रह शुरू करने के लिए तैयार है। पहले सिक्के की तुलना में इस सिक्के की डिजाइन कुछ खास तरीके से तैयार की गई। जिससे दोनों में अंतर साफ नजर आ रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">द सन के अनुसार, सिक्के के पीछे की तरफ राजा के पुतले वाली ही डिजाइन है जो दो जून, 1953 को उनके स्वर्गीय महामहिम के राज्याभिषेक के उपलक्ष्य मं 1953 के ताज पर दिखाई दिया था। राजा के पुतले को मूर्तिकार मार्टिन जेनिंग्स द्वारा डिजाइन किया गया है। सिक्का महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सम्मान में रॉयल मिंट द्वारा जारी सिक्कों के एक विशेष संग्रह का हिस्सा है।</p>
<p style="text-align:justify;">50पी के सिक्के का एक स्मारक संस्करण पांच पाउंड के सिक्के के साथ बिक्री पर जाएगा। ब्रिटेन की रॉयल मिंट कंपनी ने द सन को बताया कि जब तक नए सिक्के जारी नहीं हो जाते हैं, तब तक पुराने सिक्कों को ही प्रचलन में रखा गया है। वर्तमान में ब्रिटेन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पुतले वाले लगभग 27 अरब सिक्के चल रहे हैं। रॉयल मिंट ने बताया कि वह एक जनवरी से केवल चार्ल्स तृतीय की विशेषता वाले सिक्के बनाएगा।</p>
<p><a title="देखते रह गए जेलेंस्की-बाइडेन, पुतिन ने तकड़ा गेम कर दिया!" href="http://10.0.0.122:1245/putin-includes-four-regions-of-ukraine-in-russia/">देखते रह गए जेलेंस्की-बाइडेन, पुतिन ने तकड़ा गेम कर दिया!</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Oct 2022 10:51:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>खबर जरा हटके: खुदाई में निकले सवा सौ साल पुराने ब्रिटिश कालीन 44 सिक्के</title>
                                    <description><![CDATA[पुरातव की दृष्टि से सिक्के कीमती इटावा (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के सैफई इलाके में एक प्लाट की नींव खोदते समय करीब सवा सौ साल पुराने ब्रिटिश कालीन चांदी व तांबे के 44 सिक्के मिले हैं। सैफई के उपजिलाधिकारी एन.राम ने आज यहां बताया कि सैफई इलाके के भिडरुआ निवासी विनय कुमार कल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/british-era-44-coins-found-in-excavation/article-25764"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/excavation.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">पुरातव की दृष्टि से सिक्के कीमती</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>इटावा (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के सैफई इलाके में एक प्लाट की नींव खोदते समय करीब सवा सौ साल पुराने ब्रिटिश कालीन चांदी व तांबे के 44 सिक्के मिले हैं। सैफई के उपजिलाधिकारी एन.राम ने आज यहां बताया कि सैफई इलाके के भिडरुआ निवासी विनय कुमार कल अपने प्लाट की नींव की खुदाई करवा रहा था। करीब दो फुट गहरा गड्ढा खोदते समय एक मिट्टी का मटका निकला। उसमें तीन तांबे और 41 चांदी के सिक्के मिले, जिसकी जानकारी गांव के लोगों ने दी। उन्होंने बताया कि सूचना पर नायब तहसीलदार सूरज प्रताप,उपनिरीक्षक के.के.यादव पुलिस टीम के साथ मौके पर भेजे गये ।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सिक्के थाने के मालखाने में जमा</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि पुलिस प्रशासन की टीम ने खुदाई में निकले मटके को कब्जे में लिया जिसमें कुल 44 सिक्के बरामद किए गए है । सिक्के फिलहाल थाने के मालखाने में जमा कर दिए गए हैं। इस बीच सैफई थाना प्रभारी हामिद सिददीकी ने बताया कि चूकि जमीन से निकलने धन पर किसी को अधिकार नहीं होता है यह धन शासनादेश के अनुसार सरकार का है ,इसलिए बरामद सिक्को को एसडीएम के निर्देश पर सील करके माल खाने मे जमा करा दिया गया। पुरातव की दृष्टि से सिक्के कीमती हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Aug 2021 11:22:34 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी ने राजमाता सिंधिया की जन्मशती पर जारी किया 100 रुपये का स्मारक सिक्का</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जन्मशती के अवसर पर आज 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। प्रधानमंत्री ने स्मारक सिक्का जारी करते हुए राजमाता के साथ रथयात्रा और एकता यात्रा के दौरान के अपने अनुभवों के बारे में बताया। उन्होंने कहा,“ ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे राजमाता की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/modi-issues-100-rupees-commemorative-coin-on-the-birth-centenary-of-rajmata-scindia/article-19165"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/modi-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जन्मशती के अवसर पर आज 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। प्रधानमंत्री ने स्मारक सिक्का जारी करते हुए राजमाता के साथ रथयात्रा और एकता यात्रा के दौरान के अपने अनुभवों के बारे में बताया। उन्होंने कहा,“ ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे राजमाता की स्मृति में यह विशेष स्मारक सिक्का जारी करने का अवसर मिला है। कोरोना के कारण भले ही यह कार्यक्रम भव्य नहीं है लेकिन यह दिव्य जरूर है। पिछली शताब्दी में देश को दिशा देने वाले चंद लोगों में राजमाता भी शामिल थीं। वह सिर्फ वात्सल्य की मूर्ति नहीं थीं, बल्कि वह एक निर्णायक नेता थीं और कुशल प्रशासक थीं। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आजादी के इतने दशकों तक भारतीय राजनीति के हर अहम पड़ाव की वह साक्षी रहीं।”</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा,“ आजादी से पहले विदेशी वस्त्रों की होली जलाने से लेकर आपातकाल और राममंदिर आंदोलन तक राजमाता के अनुभवों का व्यापक विस्तार रहा है। राजमाता की जीवनयात्रा और उनके जीवन संदेश को देश की मौजूदा पीढ़ी भी जाने और उनसे प्रेरणा ले इसीलिए उनके बारे में और उनके अनुभवों के बारे में बार -बार बात करना आवश्यक है। ” मोदी ने कहा,“ विवाह से पहले वह किसी राजपरिवार से संबंधित नहीं थी लेकिन विवाह के बाद उन्होंने सबको अपनाया और पाठ भी पढ़ाया कि कोई भी साधारण से साधारण से व्यक्ति इस लोकतंत्र में सत्ता को सेवा का माध्यम बना सकता है। उनके पस सत्ता थी, संपत्ति थी और सामर्थ्य भी था लेकिन इनसे बढ़कर उनके पास जो अमानत थी, वह थी संस्कार, सेवा और स्नेह की सरिता। ये सोच और ये आदर्श, उनके जीवन के हर कदम पर देखे जा सकते हैं।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 12 Oct 2020 13:54:52 +0530</pubDate>
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