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                <title>Cow dung lamp - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>गाय के गोबर से बना दीया करेगा घर रोशन</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। गोबर के दीए से इस बार घर-आंगन रोशन करने की तैयारी है। पर्यावरण संरक्षण और महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में गोबर से बने दीए को अहम माना जा रहा है। रंग-बिरंगे गोबर के ये दीए पहली बार बाजार में आए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित बीकानेर, भीलवाड़ा, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/a-lamp-made-from-cow-dung-will-illuminate-the-house/article-19505"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/cow-dung-lamp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर</strong>। गोबर के दीए से इस बार घर-आंगन रोशन करने की तैयारी है। पर्यावरण संरक्षण और महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मुहैया कराने की दिशा में गोबर से बने दीए को अहम माना जा रहा है। रंग-बिरंगे गोबर के ये दीए पहली बार बाजार में आए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित बीकानेर, भीलवाड़ा, श्रीडूंगरगढ़ शहरों की विभिन्न गोशालाओं में गाय के गोबर से दीपक बनाने का कार्य तेजी से हो रही है। जयपुर में श्री पिंजरापोल गौशाला स्थित सनराइज आॅर्गेनिक पार्क में गाय के गोबर से दीपक बनाने के लिए हैनिमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी से जुड़ी महिलाओं ने इस दिशा में अभिनव पहल की है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ समय पहले तक यहां पर दर्जनों महिलाएं आॅर्गेनिक पार्क की औषधीय खेती करती थीं। इन्हीं महिलाओं ने गाय के गोबर को अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत करने का जरिया बना लिया है। ये महिलाएं आकर्षक दीए बनाने के साथ-साथ लक्ष्मी जी व गणेश जी की मूर्ति सहित कई तरह की कलात्मक चीजें भी बना रही हैं। इको फ्रेंडली होने के चलते राज्य के अन्य शहरों और अन्य राज्यों से भी इसकी मांग आ रही है। इसके अलावा यहां महिलाएं बचे हुए गोबर चूर्ण और पत्तियों से आॅर्गेनिक खाद (वर्मी कम्पोस्ट) भी बना रही हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे बनाये जा रहे हैं दीपक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">दीपक बनाने के लिए पहले गाय के गोबर को इक_ा किया जाता है। उसके बाद करीब ढाई किलो गोबर के पाउडर में एक किलो प्रीमिक्स व गोंद मिलाते हैं। गीली मिट्टी की तरह छानने के बाद इसे हाथ से उसको गूंथा जाता है। शुद्धि के लिए इनमें जटा मासी, पीली सरसों, विशेष वृक्ष की छाल, एलोवेरा, मेथी के बीज, इमली के बीज आदि को मिलाया जाता है। इसमें 40 प्रतिशत ताजा गोबर और 60 प्रतिशत सूखा गोबर इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद गाय के गोबर के दीपक का खूबसूरत आकार दिया जाता है। एक मिनट में चार दीये तैयार हो जाते हैं। इसे दो दिनों तक धूप में सुखाने के बाद अलग-अलग रंगों से सजाया जाता है। प्रतिदिन 20 महिलाएं 5000 हजार दीपक बना रही हैं। इन प्रत्येक महिला को प्रतिदिन 350 रुपए मिल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
हैनिमैन चैरिटेबल मिशन सोसाइटी अध्यक्ष मोनिका गुप्ता ने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक गौमाता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास है। इसलिए हमारा लक्ष्य 250000 दीये बनाने का है ताकि लोग गाय के गोबर के महत्व को जानें। उन्होंने बताया कि अब तक जयपुर सहित तेलंगाना, गुजरात, दिल्ली व हरियाणा से गाय के गोबर से निर्मित दीयों की डिमांड लगातार बढ़ रही है। होलसेल में 250 रुपए प्रति सैंकड़ा के हिसाब से दीपक बिक रहे हैं। डिमांड के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इतना नहीं इसके साथ-साथ गणेश और लक्ष्मी माता की मूर्ति भी इको फ्रेंडली बनाई जा रही है।गुरजंट</p>
<p style="text-align:right;"><strong><em>-धालीवाल</em></strong></p>
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                                            <category>घर परिवार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Oct 2020 16:13:05 +0530</pubDate>
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