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                <title>US Supreme Court - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>US Supreme Court RSS Feed</description>
                
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                <title>US High Court: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका! इलिनोइस में नेशनल गार्ड भेजने से रोका</title>
                                    <description><![CDATA[US High Court: वॉशिंगटन। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इलिनोइस राज्य में नेशनल गार्ड की तैनाती से रोकते हुए प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर सेना की तैनाती के लिए केंद्र सरकार के पास पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। US Court News समाचार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-supreme-court-delivers-major-blow-to-trump-administration-blocks-deployment-of-national-guard-to-illinois/article-79564"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/us-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">US High Court: वॉशिंगटन। अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इलिनोइस राज्य में नेशनल गार्ड की तैनाती से रोकते हुए प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर सेना की तैनाती के लिए केंद्र सरकार के पास पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। US Court News</p>
<p style="text-align:justify;">समाचार एजेंसी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन की याचिका खारिज कर दी। न्यायालय की वेबसाइट पर जारी आदेश में कहा गया कि प्रारंभिक चरण में सरकार ऐसा कोई ठोस अधिकार-स्रोत प्रस्तुत नहीं कर सकी, जो इलिनोइस में सेना को कानून-व्यवस्था लागू करने की अनुमति देता हो।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 4 अक्टूबर से जुड़ा है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने इलिनोइस नेशनल गार्ड के करीब 300 जवानों को विशेष रूप से शिकागो और उसके आसपास के क्षेत्रों में संघीय सेवा के तहत बुलाने का आदेश दिया था। अदालत के अनुसार, इसके अगले ही दिन टेक्सास नेशनल गार्ड के कुछ सदस्यों को भी संघीय सेवा में शामिल कर शिकागो भेजा गया।</p>
<h3>16 अक्टूबर को अमेरिकी अपीलीय अदालत ने आदेश रखा बरकरार</h3>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद 9 अक्टूबर को इलिनोइस के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी जिला अदालत ने अंतरिम आदेश जारी कर नेशनल गार्ड को संघीय सेवा में शामिल करने और उनकी तैनाती पर रोक लगा दी थी। 16 अक्टूबर को सेवेंथ सर्किट की अमेरिकी अपीलीय अदालत ने इस आदेश को बरकरार रखते हुए प्रशासन को केवल गार्ड को संघीय सेवा में लेने की अनुमति दी, लेकिन उनकी तैनाती की इजाजत नहीं दी गई। इसके विरुद्ध ट्रंप प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। US Court News</p>
<p style="text-align:justify;">व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने नेशनल गार्ड को संघीय कानून लागू करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा के उद्देश्य से सक्रिय किया था, ताकि दंगाई तत्व संघीय इमारतों और संपत्तियों को नुकसान न पहुंचा सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, इलिनोइस के डेमोक्रेटिक गवर्नर जे.बी. प्रित्जकर ने शिकागो के डेमोक्रेटिक मेयर के साथ इस तैनाती का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे इलिनोइस राज्य और अमेरिकी लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण जीत बताया। US Court News</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 10:33:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Trump Tariff: डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ की वैधता को लेकर आया बड़ा बयान, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से की ये अपील</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूयॉर्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि वह निचली अदालत के उस निर्णय को पलट दे, जिसमें उनके द्वारा लगाए गए कई टैरिफ को अवैध करार दिया गया था। यह याचिका संघीय अपील अदालत के हालिया फैसले के बाद दायर की गई, जिसमें 7-4 के बहुमत से कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/donald-trumps-big-statement-on-the-validity-of-tariff-appeals-to-the-us-supreme-court/article-75431"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-09/trump-tariffs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">न्यूयॉर्क। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उच्चतम न्यायालय से आग्रह किया है कि वह निचली अदालत के उस निर्णय को पलट दे, जिसमें उनके द्वारा लगाए गए कई टैरिफ को अवैध करार दिया गया था। यह याचिका संघीय अपील अदालत के हालिया फैसले के बाद दायर की गई, जिसमें 7-4 के बहुमत से कहा गया था कि ट्रंप ने आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम का उपयोग करते हुए अधिकांश व्यापारिक साझेदारों पर शुल्क लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कदम उठाया। अदालत के अनुसार, इस प्रकार के टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि कांग्रेस के पास है। Trump Tariff News</p>
<p style="text-align:justify;">मई 2025 में न्यूयॉर्क स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने भी इन शुल्कों को गैरकानूनी घोषित किया था। ट्रंप प्रशासन की ओर से दायर दस्तावेजों में चेतावनी दी गई है कि यदि जून 2026 तक इस पर रोक नहीं लगी, तो पहले से वसूले गए 750 अरब से 1 ट्रिलियन डॉलर तक की राशि लौटानी पड़ सकती है, जिससे आर्थिक अव्यवस्था खड़ी हो सकती है।</p>
<h3>”वित्त मंत्रालय को यह राशि लौटानी पड़ सकती है”</h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल जॉन सॉयर ने अपने बयान में कहा कि इस मामले का महत्व अत्यधिक है। उनके अनुसार, अमेरिकी कंपनियाँ 24 अगस्त तक ऐसे टैरिफ पर 210 अरब डॉलर से अधिक चुका चुकी हैं, जिन्हें अदालत ने अवैध घोषित किया है। यदि उच्चतम न्यायालय भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखता है, तो वित्त मंत्रालय को यह राशि लौटानी पड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि ट्रंप ने अप्रैल 2025 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए इस अधिनियम का उपयोग किया था। उनका कहना था कि बढ़ता हुआ व्यापार असंतुलन घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुँचा रहा है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है। हालांकि, अपील अदालत ने अपने आदेश को 14 अक्टूबर तक स्थगित रखा है, जिससे ट्रंप को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अवसर मिल सके। Trump Tariff News</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 13:46:23 +0530</pubDate>
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                <title>US Supreme Court: ट्रंप प्रशासन को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का आया बड़ा फैसला!</title>
                                    <description><![CDATA[US Supreme Court’s big decision: वाशिंगटन। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिला न्यायालयों के पास देशव्यापी स्थगन (Nationwide Injunction) जारी करने का अधिकार नहीं है, जिससे ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगाने की प्रक्रिया सीमित हो गई है, जिसका उद्देश्य जन्म आधारित […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/us-supreme-courts-big-decision-on-trump-administration/article-72693"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-06/us-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">US Supreme Court’s big decision: वाशिंगटन। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिला न्यायालयों के पास देशव्यापी स्थगन (Nationwide Injunction) जारी करने का अधिकार नहीं है, जिससे ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश पर रोक लगाने की प्रक्रिया सीमित हो गई है, जिसका उद्देश्य जन्म आधारित नागरिकता को समाप्त करना था। इस निर्णय को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “बड़ी जीत” बताया है। कोर्ट का यह फैसला 6-3 के मत विभाजन से आया, जिसमें विचारधारात्मक रेखाएं स्पष्ट दिखाई दीं। US Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति एमी कोनी बैरेट ने बहुमत की ओर से लिखते हुए कहा- “संघीय न्यायालयों का कार्य कार्यकारी शाखा की नियमित निगरानी करना नहीं है। यदि कोई कार्यकारी निर्णय अवैध हो, तो न्यायालय को स्वयं अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।”</p>
<h3>“अमेरिका में जन्मे और इसके कानूनों के अधीन रहने वाले बच्चे नागरिक होते हैं”</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने इस फैसले पर असहमति जताई। न्यायमूर्ति सोनिया सोटोमायोर ने अपनी असहमति में लिखा- “अमेरिका में जन्मे और इसके कानूनों के अधीन रहने वाले बच्चे नागरिक होते हैं — यह सिद्धांत आरंभ से ही लागू है। लेकिन बहुमत ने यह देखना ही उचित नहीं समझा कि राष्ट्रपति का आदेश संवैधानिक है या नहीं। न्यायालय का ध्यान केवल उस प्रश्न पर केंद्रित रहा कि जिला न्यायालयों को सार्वजनिक स्थगन जारी करने का अधिकार है या नहीं।” राष्ट्रपति ट्रंप ने इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह संविधान और विधिक प्रणाली की जीत है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा- “यह निर्णय देशव्यापी स्थगनों की अनुचित प्रक्रिया को समाप्त करता है। अमेरिका में सभी को, न्यायाधीशों सहित, कानून का पालन करना होता है।” अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय ट्रंप के खिलाफ दायर लगातार स्थगनों को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है। US Supreme Court News</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, नागरिक अधिकार संगठनों ने इस निर्णय के विरुद्ध नए कदम उठाए हैं। उन्होंने एक वर्ग-कार्रवाई (Class Action) मुकदमा तथा अस्थायी निषेधाज्ञा (Temporary Restraining Order) की याचिका दायर की है, ताकि ट्रंप का विवादित कार्यकारी आदेश अवरुद्ध किया जा सके।</p>
<h3>आदेश को रोकने के लिए हमें विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेना होगा</h3>
<p style="text-align:justify;">संविधानिक संरक्षण संस्थान (Institute for Constitutional Advocacy and Protection) के वरिष्ठ वकील विलियम पॉवेल ने कहा- “अब इस आदेश को रोकने के लिए हमें विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेना होगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी स्थगनों को सीमित कर दिया है।”</p>
<p style="text-align:justify;">एजाइलम सीकर एडवोकेसी प्रोजेक्ट की सह-संस्थापक कोंचिता क्रूज़ ने ‘एनबीसी न्यूज’ से कहा-“यह अप्रवासी परिवारों के लिए भ्रम का समय है। उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पा रही कि यह निर्णय उनके जीवन को कैसे प्रभावित कर सकता है।”</p>
<p style="text-align:justify;">लैटिना समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला नेशनल लैटिना इंस्टीट्यूट फॉर रिप्रोडक्टिव जस्टिस ने बयान जारी करते हुए कहा- “हम नाराज हैं, लेकिन चुप नहीं बैठेंगे। अप्रवासी समुदाय भी सम्मान, सुरक्षा और न्याय का हकदार है। हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।”</p>
<p style="text-align:justify;">यह उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी को कार्यभार संभालने के कुछ ही घंटे बाद इस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 19 फरवरी के बाद जन्म लेने वाले उन बच्चों को नागरिकता न देने का प्रावधान था जिनके माता-पिता में से कोई भी अमेरिकी नागरिक या वैध निवासी नहीं है। इस आदेश के खिलाफ 20 से अधिक राज्यों और संगठनों ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए मुकदमे दायर किए हैं। US Supreme Court News</p>
<p><a title="India rejects Hague Court’s ‘illegal’ decision: ‘पाकिस्तान के इशारे पर नाटक’ को भारत ने किया अस्वीकार!" href="http://10.0.0.122:1245/india-rejects-hague-courts-illegal-decision-on-jammu-and-kashmir-hydropower-projects/">India rejects Hague Court’s ‘illegal’ decision: ‘पाकिस्तान के इशारे पर नाटक&amp;…</a></p>
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                                                            <category>विदेश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 10:31:21 +0530</pubDate>
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                <title>एमी कोनी बैरेट ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश के रूप में शपथ ली</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन। अमेरिका में आम चुनावों से एक सप्ताह मंगलवार को जज एमी कोनी बैरेट ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। न्यायाधीश बैरेट ने राष्ट्रपति ट्रम्प की मौजूदगी में व्हाइट हाउस में शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने उन्हें शपथ दिलाई। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी जीत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/amy-connie-barrett-sworn-in-as-us-supreme-court-judge/article-19521"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/us-supreme-court-judge.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका में आम चुनावों से एक सप्ताह मंगलवार को जज एमी कोनी बैरेट ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। न्यायाधीश बैरेट ने राष्ट्रपति ट्रम्प की मौजूदगी में व्हाइट हाउस में शपथ ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने उन्हें शपथ दिलाई। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी जीत माना जा रहा है। सीनेटरों ने बड़े पैमाने पर पार्टी लाईन के साथ सख्ती से न्यायाधीश बैरेट के पक्ष में मतदान किया। केवल एक रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कोलिन्स राष्ट्रपति के उम्मीदवार के विरोध में मतदान किया। उनकी नियुक्ति से अमेरिकी न्यायिक निकाय पर रूढ़िवादी बहुमत पर मुहर लग गई है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Oct 2020 10:12:50 +0530</pubDate>
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