<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/gst-collection/tag-18397" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>GST Collection - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/18397/rss</link>
                <description>GST Collection RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>GST Collection: जून में GST कलेक्शन ने भरी रफ्तार, 13.9% बढ़कर ₹1.95 लाख करोड़ पहुंचा सरकारी खजाना</title>
                                    <description><![CDATA[ देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर सामने आई है। जून 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/gst-collection-increased-by-139-in-june-government-treasury-reached/article-87447"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-07/gst-collection.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">GST Collection: देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर सामने आई है। जून 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9 फीसदी बढ़कर 1,94,812 करोड़ रुपये (करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया। पिछले साल जून 2025 में यह आंकड़ा 1.71 लाख करोड़ रुपये था।</p>
<p style="text-align:justify;">खास बात यह है कि जून 2026 में दर्ज की गई यह वृद्धि पिछले 13 महीनों की सबसे तेज सालाना बढ़ोतरी मानी जा रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां और कारोबार मजबूत हो रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आयातित वस्तुओं से हुई सबसे ज्यादा कमाई</h4>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्रालय के अनुसार, जीएसटी संग्रह में सबसे बड़ा योगदान आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स का रहा। जून 2026 में आयातित सामान पर टैक्स से सरकार को 60,038 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो पिछले साल जून के 44,608 करोड़ रुपये की तुलना में 34.6 फीसदी अधिक है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">घरेलू कारोबार से भी बढ़ी वसूली</h4>
<p style="text-align:justify;">घरेलू व्यापार से होने वाला जीएसटी संग्रह भी बढ़ा है। जून 2026 में घरेलू लेनदेन से सरकार को 1,34,774 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा 1,26,505 करोड़ रुपये था। यानी इसमें 6.5 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।</p>
<h4 style="text-align:justify;">नेट GST रेवेन्यू भी बढ़ा</h4>
<p style="text-align:justify;">रिफंड जारी करने के बाद सरकार का नेट GST रेवेन्यू भी मजबूत रहा। जून 2026 में यह 11.2 फीसदी बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 1,45,984 करोड़ रुपये था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रिफंड में भी हुआ इजाफा</h4>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने कारोबारियों को अधिक रिफंड भी जारी किया है। जून 2026 में कुल GST रिफंड 29.1 फीसदी बढ़कर 32,436 करोड़ रुपये हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि निर्यातकों और कारोबारियों को समय पर रिफंड उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को गति मिल रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत</h4>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी संग्रह में लगातार हो रही बढ़ोतरी देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, बेहतर टैक्स अनुपालन और मजबूत उपभोग का संकेत है। आने वाले महीनों में भी यदि यही रुझान जारी रहता है तो सरकार के राजस्व में और मजबूती देखने को मिल सकती है।<img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/gst-collection.jpeg" alt="GST Collection" width="774" height="441"></img></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/business/gst-collection-increased-by-139-in-june-government-treasury-reached/article-87447</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/business/gst-collection-increased-by-139-in-june-government-treasury-reached/article-87447</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 16:13:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-07/gst-collection.jpeg"                         length="65059"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>GST Collection: बढ़ता जीएसटी संग्रह और सुशासन</title>
                                    <description><![CDATA[GST Collection: वित्त बगैर ऊर्जा नहीं और ऊर्जा बगैर कुछ नहीं यह स्लोगन दशकों पहले कहीं पढ़ने को मिला था जो आज के दौर में कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। सुशासन तभी संभव कहा जाएगा, जब जनहित की समस्याएं निर्मूल हों। समावेशी विकास की राह हो और एवंऔर खुशहाली का बड़ा वातावरण हो तथा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rising-gst-collection-and-good-governance/article-50322"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/gst-collection.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">GST Collection: वित्त बगैर ऊर्जा नहीं और ऊर्जा बगैर कुछ नहीं यह स्लोगन दशकों पहले कहीं पढ़ने को मिला था जो आज के दौर में कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है। सुशासन तभी संभव कहा जाएगा, जब जनहित की समस्याएं निर्मूल हों। समावेशी विकास की राह हो और एवंऔर खुशहाली का बड़ा वातावरण हो तथा यह तब हो सकता है जब सुशासन हो व सुशासन तभी होगा जब समुचित वित्त होगा। इसी धारा में एक व्यवस्था अप्रत्यक्ष कर जीएसटी है जो आर्थिक इंजन के तौर पर देश में 1 जुलाई, 2017 को परोसी गई, जिसकी छ: साल की यात्रा हो चुकी है। सुशासन की दृष्टि से जीएसटी को देखा जाए तो यह बल इकट्ठा करने का एक आर्थिक परिवर्तन था मगर सफलता कितनी मिली यह पड़ताल से जरूर पता चलेगा। GST Collection</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि 24 जुलाई 1991 को जब उदारीकरण एक बड़ा आर्थिक नीति और परिवर्तन का स्वरूप लेकर प्रकट हुआ था तब उम्मीदें भी बहुत थी और कहना गलत न होगा कि 3 दशक पुरानी इस व्यवस्था ने निराश नहीं किया बल्कि इसी दौर के बीच में सुशासन को 1992 में सांस लेने का अवसर मिला जिसकी धड़कन की आवाज कमोबेश आज सुनी और समझी जा सकती है। देश में कई सारे अप्रत्यक्ष करों को समाहित कर आज से ठीक 6 साल पहले 1 जुलाई 2017 को एक नया आर्थिक कानून वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हुआ था। इस एकल कर व्यवस्था से राज्यों को होने वाले राजस्व कर की भरपाई हेतु पांच साल तक मुआवजा देने का प्रावधान भी इसमें शामिल था जो जून 2022 में पूरा भी हो गया। इस हेतु एक कोष बनाया गया जिसका संग्रह 15 फीसद तक के सेस से होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नियमसंगतता की दृष्टि से जीएसटी के उक्त संदर्भ सुशासन के समग्रता को परिभाषित करते हैं मगर वक्त के साथ व्याप्त कठिनाईयों ने इस पर सवाल भी खड़ा किये। गौरतलब है कि जीएसटी लागू होने से पहले ही केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच आपस में इस बात पर सहमति का प्रयास किया गया था कि इसके माध्यम से प्राप्त राजस्व में केन्द्र और राज्यों के बीच राजस्व का बंटवारा किस तरह किया जाएगा। ध्यानतव्य हो कि पहले इस तरह के राजस्व का वितरण वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया जाता था। GST Collection</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी का एक महत्वपूर्ण संदर्भ यह रहा है कि इस प्रणाली के लागू होने से कई राज्य इस आशंका में शामिल रहे हैं कि इनकी आमदनी इससे कम हो सकती है और यह आशंका सही भी है। हालांकि ऐसी स्थिति से निपटने के लिए केन्द्र ने राज्यों को यह भरोसा दिलाया था कि साल 2022 तक उनके नुकसान की भरपाई की जाएगी। मगर पड़ताल यह बताती है कि बकाया निपटाने के मामले में केन्द्र सरकार समय के साथ पूरी तरह खरी नहीं उतरी और अब मुआवजे का मामला भी एक साल से खत्म है। इसमें कोई शक नहीं कि राज्य वित्तीय संकट से कमोबेश जूझ तो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पड़ताल यह बताती है कि वित्तीय सम्बंध के मामले में संघ और राज्य के बीच समय-समय पर कठिनाइयां आती रही हैं। सहकारी संघवाद के अनुकूल ढ़ांचे की जब भी बात होती है तो यह भरोसा बढ़ाने का प्रयास होता है कि समरसता का विकास हो। आरबीआई के पूर्व गर्वनर डी0 सुब्बाराव ने कहा था कि जिस प्रकार देश का आर्थिक केन्द्र राज्यों की ओर स्थानांतरित हो रहा है उसे देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वर्तमान में भारत का आर्थिक विकास सहकारी संघवाद पर टिका देखा जा सकता है। Good Governance</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि संघवाद अंग्रेजी शब्द फेडरेलिज्म का हिन्दी अनुवाद है और इस शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है जिसका अर्थ समझौता या अनुबंध है। जीएसटी संघ और राज्य के बीच एक ऐसा अनुबंध है जिसे आर्थिक रूप से सहकारी संघवाद कहा जा सकता है मगर जब अनुबंध पूरे न पड़े तो विवाद का होना लाजिमी है और सुशासन को यहीं पर ठेस पहुंचना भी तय है। जुलाई 2017 में पहली बार जब जीएसटी आया तब उस माह का राजस्व संग्रह 95 हजार करोड़ के आसपास था। धीरे-धीरे गिरावट के साथ यह 80 हजार करोड़ पर भी पहुंचा था और यह उतार-चढ़ाव चलता रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">कोविड-19 महामारी के चलते अप्रैल 2020 में इसका संग्रह 32 हजार करोड़ तक आकर सिमट गया जबकि दूसरी लहर के बीच अप्रैल 2021 में यह आंकड़ा एक लाख 41 हजार करोड़ का था जो उस कालखण्ड में जीएसटी लागू होने से और संग्रह में सर्वाधिक था। अब तो हाल यह है कि जीएसटी हर महीने डेढ़ लाख करोड़ के आंकड़े को तो पार करती है और यह लगभग 2 लाख करोड़ के आसपास छलांग लगाने की ओर है। जाहिर है अप्रत्यक्ष कर के साथ कई तकनीकी समस्याएं हो सकती है पर जीएसटी संग्रह का लगातार बढ़ना और करदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि इसके सुशासनिक पक्ष को मजबूती की ओर ही इंगित करता है। Good Governance</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी के इन 6 साल से अधिक के कालखण्ड में जीएसटी काउंसिल की अब तक 50 बैठकें और हजार से अधिक संशोधन हो चुके हैं। कुछ पुराने संदर्भ को पीछे छोड़ा जाता है तो कुछ नये को आगे जोड़ने की परम्परा अभी भी जारी है। गौरतलब है कि संविधान स्वयं में एक सुशासन की कुंजी है जहां सभी के अधिकार और स्वायतता को पहचान मिलती है और यहीं से सभी का कद-काठी भी बड़ा होता है। संघ और राज्य के वित्तीय मामलों में संवैधानिक प्रावधान को भी संविधान में देखा जा सकता है। अनुच्छेद 275 संसद को इस बात का अधिकार प्रदान करता है कि वह ऐसे राज्यों को उपयुक्त अनुदान देने का अनुबंध कर सकती है जिन्हें संसद की दृष्टि में सहायता की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुच्छेद 286, 287, 288 और 289 में केन्द्र तथा राज्य सरकारों को एक दूसरे द्वारा कुछ वस्तुओं पर कर लगाने से मना किया गया है। अनुच्छेद 292 व 293 क्रमश: संघ और राज्य सरकारों से ऋण लेने का प्रावधान भी करते हैं। गौरतलब है कि संघ और राज्य के बीच शक्तियों का बंटवारा है संविधान की 7वीं अनुसूची में संघ, राज्य और समवर्ती सूची के अंतर्गत इसे बाकायदा देखा जा सकता है। जीएसटी वन नेशन, वन टैक्स की थ्योरी पर आधारित है जो एकल अप्रत्यक्ष कर संग्रह व्यवस्था है। जिसमें संघ और राज्य आधी-आधी हिस्सेदारी रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">80वें संविधान संशोधन अधिनियम 2000 और 88वें संविधान संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा केन्द्र-राज्य के बीच कर राजस्व बंटवारे की योजना पर व्यापक परिवर्तन दशकों पहले किया गया था जिसमें अनुच्छेद 268डी जोड़ा गया जो सेवा कर से सम्बंधित था। बाद में 101वें संविधान संशोधन द्वारा नये अनुच्छेद 246ए, 269ए और 279ए को शामिल किया गया तथा अनुच्छेद 268 को समाप्त कर दिया गया। गौरतलब है राज्य व्यापार के मामले में कर की वसूली अनुच्छेद 269ए के तहत केन्द्र सरकार द्वारा की जाती है जबकि बाद में इसे राज्यों को बांट दिया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीएसटी केन्द्र और राज्य के बीच झगड़े की एक बड़ी वजह उसका एकाधिकार होना भी रहा है। क्षतिपूर्ति न होने के मामले में तो राज्य केन्द्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कह चुके हैं। काफी हद तक इस जीएसटी को महंगाई का कारण भी राज्य मानते रहे हैं। सवाल यह भी है कि वन नेशन, वन टैक्स वाला जीएसटी जब मुआवजे के बावजूद राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं कर पाया तो अब क्या हाल होगा यह समझने का विषय है। दो टूक यह भी है कि सुशासन, शान्ति का पर्याय है तो जीएसटी वित्त का। यदि वित्त का संदर्भ उचित होगा तो शान्ति समुचित होगी साथ ही संघ और राज्य संतुलित भी रहेंगे तथा सुशासन का कद तुलनात्मक बढ़ा रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>                                                 डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार एवं प्रशासनिक चिंतक<br />
(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="टूटा बांध फिर बांधा डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने, दर्जनों गांवों से खतरा टला" href="http://10.0.0.122:1245/dera-sacha-sauda-sewadar-rebuilt-the-broken-dam-averted-danger-from-dozens-of-villages/">टूटा बांध फिर बांधा डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों ने, दर्जनों गांवों से खतरा टला</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/rising-gst-collection-and-good-governance/article-50322</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/rising-gst-collection-and-good-governance/article-50322</guid>
                <pubDate>Sun, 23 Jul 2023 10:48:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-07/gst-collection.jpg"                         length="14729"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केन्द्र सरकार ने जारी किए जीएसटी कलैक्शन के आंकड़े</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा ने पंजाब को पीछे छोड़ा (GST Collection) 6 गुणा ज्यादा रकम की हासिल चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। जीएसटी कलैक्शन (GST Collection) के मामले में हरियाणा लगातार पंजाब को मात दे रहा है। हरियाणा ने दिसंबर महीने में रिकॉर्ड जीएसटी कलैक्शन करते हुए पंजाब को काफी ज्यादा पीछे छोड़ दिया है। पंजाब के मुकाबले हरियाणा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2 style="text-align:left;">हरियाणा ने पंजाब को पीछे छोड़ा (GST Collection)</h2>
<ul>
<li>6 गुणा ज्यादा रकम की हासिल</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)।</strong> जीएसटी कलैक्शन (GST Collection) के मामले में हरियाणा लगातार पंजाब को मात दे रहा है। हरियाणा ने दिसंबर महीने में रिकॉर्ड जीएसटी कलैक्शन करते हुए पंजाब को काफी ज्यादा पीछे छोड़ दिया है। पंजाब के मुकाबले हरियाणा ने दिसंबर महीने में 6 गुणा ज्यादा जीएसटी कलैक्शन की है। हर साल ही नहीं बल्कि हर महीने पंजाब और हरियाणा की जीएसटी कलेक्शन में गैप काफी ज्यादा बढ़ता जा रहा है, जोकि सालों तक पूरा होना असंभव नजर आ रहा है।</p>
<h4>जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े</h4>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार की ओर से जीएसटी कलैक्शन के जारी ताजा आंकड़ों में दिसंबर 2019 के मुकाबले में दिसंबर 2020 में जीएसटी की कलैक्शन काफी ज्यादा बढ़ती नजर आ रही है। वहीं उत्तर भारत में हरियाणा काफी ज्यादा कमाई करने वाला राज्य बन गया है। इस मामले में हरियाणा ने पंजाब को काफी पीछे छोड़ दिया। दिसंबर 2019 में हरियाणा ने जीएसटी कलैक्शन के द्वारा 5365 करोड़ रुपए की कमाई की थी, जबकि दिसंबर 2020 में 5747 करोड़ रुपए की जीएसटी कलैक्शन की है, जो कि पिछले साल दिसंबर के मुकाबले 382 करोड़ रुपए ज्यादा है। वहीं पंजाब ने दिसंबर 2019 में 1290 करोड़ रुपए की जीएसटी कलैक्शन की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जब कि साल 2020 दिसंबर में 1353 करोड़ रुपए की कलैक्शन की है और पंजाब को सिर्फ 63 करोड़ रुपए का ही विस्तार मिला है, जबकि हरियाणा ने पंजाब के मुकाबले 6 गुणा ज्यादा कमाई करते हुए 382 करोड़ रुपए का विस्तार दर्ज किया है। हरियाणा और पंजाब की मासिक जीएसटी कलैक्शन में भी जमीन-आसमान का अंतर सामने आया है। दिसंबर 2020 में पंजाब ने 1353 करोड़ रुपए की कुल कमाई की तो हरियाणा ने 5747 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। दोनों राज्यों के बीच टैक्स के द्वारा कमाई में ही 4 गुणा से अधिक अंतर आ रहा है, जिसको काफी ज्यादा मेहनत करने के बावजूद भी कई सालों दौरान पंजाब दूर नहीं कर सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ज्यादा कमाई, ज्यादा विकास</h4>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ कमाई में ही नहीं बल्कि विकास के मामले में भी हरियाणा काफी ज्यादा आगे निकलता नजर आ रहा है। पंजाब में कमाई कम होने के चलते विकास भी कम हो रहा है। हालांकि पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल की ओर से पंजाब को कर्ज मुक्त करने के साथ ही विकास की रास्ते पर लेकर आने का ऐलान किया हुआ था, परन्तु मनप्रीत बादल भी इन 4 सालों में कुछ नहीं कर पाए और पंजाब कमाई के मामले में नीचे की ओर ही जा रहा है, जबकि हरियाणा लगातार तरक्की कर रहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/central-government-released-gst-collection-figures/article-20964</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/central-government-released-gst-collection-figures/article-20964</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Jan 2021 21:25:26 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लॉकडाउन के बाद पहली बार जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली l लॉकडालन के बाद अब धीरे धीरे अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के साथ ही राजस्व संग्रह भी बढ़ने लगा है। इस वर्ष अक्टूबर में जीएसटी संग्रह 105155 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो पिछले वर्ष के इसी महीने में संग्रहित राजस्व की तुलना में 10 फीसदी अधिक है। वित्त मंत्रालय द्वारा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/gst-collection-crosses-rs-1-lakh-crore-for-the-first-time-after-lockdown/article-19636"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/gst-collection-crosses-rs-1-lakh-crore-for-the-first-time-after-lockdown.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली</strong> l लॉकडालन के बाद अब धीरे धीरे अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने के साथ ही राजस्व संग्रह भी बढ़ने लगा है। इस वर्ष अक्टूबर में जीएसटी संग्रह 105155 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो पिछले वर्ष के इसी महीने में संग्रहित राजस्व की तुलना में 10 फीसदी अधिक है।</p>
<p style="text-align:justify;">वित्त मंत्रालय द्वारा आज यहां जारी जीएसटी संग्रह के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2020 में जीएसटी राजस्व संग्रह 105155 करोड़ रुपये रहा जिसमें सीजीएसटी 19193 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 25411 करोड़ रुपये, आईजीएसटी 52540 करोड़ रुपये और 8011 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति उपकर शामिल है। आईजीएसटी में 23375 करोड़ रुपये और क्षतिपूर्ति उपकर में 932 करोड़ रुपये आयातित वस्तुओं पर संग्रहित कर शामिल है। वित्त मंत्रालय के अनुसार 31 अक्टूबर तक 80 लाख करदाताओं ने जीएसटीआर 3 बी रिटर्न दाखिल किया है। सरकार ने आईजीएसटी राजस्व में से 25091 करोड़ रुपये सीजीएसटी में और 19427 करोड़ रुपये एसजीएसटी में हस्तातंरित किये हैं। नियमित हस्तातंरण के बाद अक्टूबर में केन्द्र सरकार को 44285 करोड़ रुपये और राज्यों को 44839 करोड़ रुपये मिले हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/business/gst-collection-crosses-rs-1-lakh-crore-for-the-first-time-after-lockdown/article-19636</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/business/gst-collection-crosses-rs-1-lakh-crore-for-the-first-time-after-lockdown/article-19636</guid>
                <pubDate>Sun, 01 Nov 2020 13:10:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-11/gst-collection-crosses-rs-1-lakh-crore-for-the-first-time-after-lockdown.gif"                         length="182490"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        