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                <title>शत-प्रतिशत भारतीयों को नसीब नहीं स्वच्छ हवा</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छ आबोहवा के लिए तय मौजूदा न्यूनतम मानदंडों का विश्व समुदाय संजीदगी से पालन करता, उससे पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के सुरक्षा-मानक कड़े कर दिए हैं। गत दिवस जारी अपने नए वायु गुणवत्ता दिशा-निदेर्शों में संगठन ने सुरक्षित हवा के पैमानों को फिर से निर्धारित किया है। इससे पहले सन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/100-indians-do-not-have-clean-air/article-27489"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/horror-is-the-data-of-deaths-due-to-air-pollution.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वच्छ आबोहवा के लिए तय मौजूदा न्यूनतम मानदंडों का विश्व समुदाय संजीदगी से पालन करता, उससे पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के सुरक्षा-मानक कड़े कर दिए हैं। गत दिवस जारी अपने नए वायु गुणवत्ता दिशा-निदेर्शों में संगठन ने सुरक्षित हवा के पैमानों को फिर से निर्धारित किया है। इससे पहले सन 2005 में इनमें संशोधन किया गया था। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अभी वैश्विक आबादी का 90 फीसदी हिस्सा और भारत में करीब-करीब शत-प्रतिशत लोग ऐसी हवा में सांस ले रहे हैं, जो डब्ल्यूएचओ के मानक पर खरी नहीं उतरती है। बहरहाल, इन दिशा-निर्देशों में सबसे अधिक तवज्जो पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), यानी सूक्ष्म कणों को दी गई है। यह दुनिया भर में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार है। 70 लाख के करीब मौतें अकेले इसी वजह से होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां की मौसम व जलवायु संबंधी परिस्थितियां जटिल हैं, जिनमें धुंध, गगनचुंबी इमारतों व बुनियादी ढांचे की वजह से क्षेत्र-विशेष में बढ़ते तापमान और अत्यधिक प्रदूषण से चुनौतियां बढ़ जाती हैं। आलम यह है कि प्रदूषणकारी गतिविधियों को रोक भी दें, तब भी केवल प्राकृतिक प्रक्रियाओं से हवा में काफी ज्यादा प्राकृतिक कार्बोनिक एरोसोल, यानी सूक्ष्म तरल बूंदों का निर्माण होता है। इन सबके अलावा, विभिन्न स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन और चूल्हे पर खाना पकाने जैसी जीविकोपार्जन प्रक्रियाओं से पैदा होने वाले प्रदूषण को भी थामने की जरूरत है। सवाल यह है कि प्रदूषण को हम किस हद तक कम कर सकते हैं? वायु प्रदूषण कम करने को लेकर सरकारों की सतर्कता अधिकतर पराली जलाने और वाहनों का प्रदूषण स्तर जांच कर उन पर जुर्माना लगाने तक ही नजर आती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाने वाले कल-कारखानों पर उनकी कृपादृष्टि ही बनी रहती है। भारत दुनिया के चुनिंदा देशों में है, जहां शायद सबसे अधिक कानून होंगे, लेकिन हम कितना कानून-पालन करने वाले समाज हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। दिल्ली एवं अन्य प्रांतों की सरकारें एवं केन्द्र सरकार हर प्रदूषण खतरों से मुकाबला करने के लिए तैयार है, का नारा देकर अपनी नेकनीयत का बखान करते रहते हैं। पर उनकी नेकनीयती की वास्तविकता किसी से भी छिपी नहीं है, देश की राजधानी और उसके आसपास प्रदूषण नियंत्रण की छीछालेदर होती रहती है। इस जटिल एवं जानलेवा समस्या का कोई ठोस उपाय सामने नहीं आता। लिहाजा, यह भी आसान नहीं है कि दक्षिण एशिया और विशेष रूप से भारत पीएम-2.5 के पांच और 15 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के कठिन लक्ष्य को किस तरह से पा सकेगा?</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Oct 2021 09:51:20 +0530</pubDate>
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                <title>वायु एवं जल प्रदूषण के लिये हो मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली इन दिनों जिस जानलेवा वायु प्रदूषण की शिकार है, लोग अपने घरों तक में सुरक्षित नहीं है। जल निकासी की माकूल व्यवस्था न होना शहर में जल भराव का स्थायी कारण बनता रहा है, वह भी जानलेवा होकर। शहर के लिए सड़क चाहिए, बिजली चाहिए, जल चाहिए, मकान चाहिए और दफ्तर चाहिए। इन सबके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/poll-for-air-and-water-pollution/article-12932"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/air-and-water-pollution.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">दिल्ली इन दिनों जिस जानलेवा वायु प्रदूषण की शिकार है, लोग अपने घरों तक में सुरक्षित नहीं है। जल निकासी की माकूल व्यवस्था न होना शहर में जल भराव का स्थायी कारण बनता रहा है, वह भी जानलेवा होकर। शहर के लिए सड़क चाहिए, बिजली चाहिए, जल चाहिए, मकान चाहिए और दफ्तर चाहिए। इन सबके लिए या तो खेत होम हो रहे हैं या फिर जंगल। जंगल को हजम करने की चाल में पेड़, जंगली जानवर, पारंपरिक जल स्रोत सभी कुछ नष्ट हो रहा है। यह वह नुकसान है जिसका हर्जाना संभव नहीं है और यही वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है।</h3>
<h2 style="text-align:justify;">ललित गर्ग</h2>
<h4 style="text-align:justify;">राजधानी दिल्ली में अक्सर वायु एवं जल प्रदूषण एक गंभीर समस्या के रूप में खड़ा रहता है, लेकिन इस गंभीर समस्या का दिल्ली विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा न बनना, विडम्बनापूर्ण है। असल में देखें तो संकट वायु प्रदूषण का हो या फिर स्वच्छ जल का, इनके मूल में विकास की अवधारणा के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भ्रांत नीतियां एवं सोच है, यही कारण है इन चुनावों में तीनों ही प्रमुख दल चाहे भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस एवं आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर मौन धारण किये हुए है। हर समय वायु प्रदूषण की चपेट में रहने वाली दिल्ली इस विकराल होती समस्या का समाधान चाहती है। क्योंकि वायु प्रदूषण दिल्ली के लोगों के स्वास्थ्य के लिये गंभीर खतरा बन चुकी है, मनुष्य की सांसें उलझती जा रही है, जीवन पर संकट मंडरा रहा है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि एकदम अनियंत्रित होती स्थिति के बावजूद सत्ता के आकांक्षी तीनों ही दल कोई समाधानमूलक वायदा नहीं करते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं।<br />
तीनों ही दल किसी तरह दिल्ली की सत्ता हासिल करना चाहता है। चुनाव जीतने के लिए जहां राजनीतिक दल हिन्दू-मुसलमान की राष्ट्र तोड़ने की बहसों में जनता को उलझाए रखना चाहते हैं, लेकिन वे वायु-जल प्रदूषण जैसी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, समाधान की कोई रोशनी नहीं दिखा रहे हैं। अब आम जनता भी इन बहसों से ऊब चुकी है और इस चुनाव में अपने असली जीवन रक्षक मुद्दों पर बात करना चाहती है। दिल्ली के हजारों नागरिकों ने आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों से स्वच्छ वायु के लिए ठोस समाधान की मांग की है। शुद्ध सांसें मेरा अधिकार है की भावना के साथ एक नागरिक आांदोलन ‘दिल्ली धड़कने दो’ पिछले दिनों शुरू हुआ है, जो मतदाताओं को मुखर होकर वायु प्रदूषण के समाधानों के प्रति अपने जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाने के लिये प्रतिबद्ध है। निश्चित ही यह आन्दोलन सही समय पर शुरू हुआ है, लेकिन चुनाव में खड़े उम्मीदवार एवं उनके राजनीतिक दल फिर भी इस बड़ी समस्या के लिये कोई ठोस आश्वासन देने एवं इसे चुनावी मुद्दों बनाने को तत्पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। दिल्ली के विधानसभा चुनाव में वायु एवं जल प्रदूषण ही जीत-हार का माध्यम बनना चाहिए। क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है। हालांकि वायु प्रदूषण पूरी दुनिया, खासकर तीसरी दुनिया के देशों के लिए एक बड़ी समस्या बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण और बच्चों के स्वास्थ्य पर पिछले दिनों जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 93 प्रतिशत बच्चे प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं। पांच साल से कम उम्र के 10 बच्चों की मौत में से एक बच्चे की मौत प्रदूषित हवा की वजह से हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण और बच्चों के स्वास्थ्य पर जारी इस रिपोर्ट के अनुसार 2016 में, वायु प्रदूषण से होने वाले श्वसन संबंधी बीमारियों की वजह से दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के 5.4 लाख बच्चों की मौत हुई है। भारतीय शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में बीमारियों को बढ़ावा देने और असमय मौतों के लिए वायु प्रदूषण को तंबाकू उपभोग से भी अधिक जिम्मेदार पाया गया है। विश्व की 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है, जिसमें से 26 प्रतिशत लोग वायु प्रदूषण के कारण विभिन्न बीमारियों और मौत का असमय शिकार बन रहे हैं।<br />
दिल्ली इन दिनों जिस जानलेवा वायु प्रदूषण की शिकार है, लोग अपने घरों तक में सुरक्षित नहीं है। जल निकासी की माकूल व्यवस्था न होना शहर में जल भराव का स्थायी कारण बनता रहा है, वह भी जानलेवा होकर। शहर के लिए सड़क चाहिए, बिजली चाहिए, जल चाहिए, मकान चाहिए और दफ्तर चाहिए। इन सबके लिए या तो खेत होम हो रहे हैं या फिर जंगल। जंगल को हजम करने की चाल में पेड़, जंगली जानवर, पारंपरिक जल स्रोत सभी कुछ नष्ट हो रहा है। यह वह नुकसान है जिसका हर्जाना संभव नहीं है और यही वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है। इन चुनावों में वायु प्रदूषण की रोकथाम से संबंधित दिल्ली की मांग पर अमल करने वाले दल को ही मतदाता विजयी बनाए और इस विकराल समस्या से निजात दिलाने के लिए इलेक्ट्रिक रिक्शा के बड़े पैमाने पर चलन, चार्जिंग इंफ्रास्टक्चर को बढ़ाने और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने की योजना को लागू करने वाले दल को ही एक मौका दिया जाना चाहिए।<br />
वायु प्रदूषण की हर वर्ष विकराल होती समस्या के समाधान की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करना है। स्वच्छ वायु पाने के लिए हमें ईंधन खपत के अपने तरीके में व्यापक बदलाव करने होंगे। कोयले के इस्तेमाल को पूरी तरह से बंद करना होगा। हमें इलेक्ट्रिक रिक्शा-बसों, मेट्रो, साइकिल ट्रैक और पैदल पथ में निवेश करके सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या में कमी करना होगा। प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को उपयोग से हटाना होगा, लेकिन इन उपायों का तब तक ज्यादा लाभ नहीं होगा, जब तक कि हम प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों पर लगाम नहीं लगाते। हमें कचरा-कूड़ा जलाने, धूल फैलाने और खाना बनाते समय अनावश्यक धुआं पैदा करने की आदत छोड़नी पड़ेगी।<br />
दीपावली जैसे अवसरों पर आतिशबाजी पर कठोरता से अंकुश लगाना होगा। कचरा कहीं फेंक देना या जला देना समाधान नहीं है। पॉलीथीन, घर-कारखानों से निकलने वाले रसायन और नष्ट न होने वाले कचरे की बढ़ती मात्रा, कुछ ऐसे कारण है जो कि शुद्ध वायु के दुश्मन है। दिल्ली में सीवर और नालों की सफाई भ्रष्टाचार का बड़ा माध्यम है। यह कार्य किसी जिम्मेदार एजेंसी को सौंपना आवश्यक है वरना आने वाले दिनों में दिल्ली में कई-कई दिनों तक पानी भरने की समस्या उपजेगी जो यातायात के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा होगा। केवल पर्यावरण प्रदूषण ही नहीं, दिल्ली सामाजिक और सांस्कृतिक प्रदूषण की भी गंभीर समस्या उपजा रहे हैं। लोग अपनों से, मानवीय संवेदनाओं से, अपनी लोक परंपराओं व मान्यताओं से कट रहे हैं। जिसके कारण परम्परा एवं संस्कृति में व्याप्त पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण के जीवन सूत्रों से हम दूर होते जा रहे हैं, ऐसे कारणों का लगातार बढ़ना ही दिल्ली जैसे महानगरों की वायु प्रदूषण और ऐसे ही पर्यावरण प्रदूषण के नये-नये खतरों को इजाद कर रहा है।</h4>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Feb 2020 20:45:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली में जहरीली हवा से मिलेगी मुक्ति: 50 करोड़ रुपए खर्च कर लगाने पड़ेंगे 150 एयर प्यूरीफायर टावर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में प्रदूषण की बढ़ती समस्या से स्थाई रूप से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एयर प्यूरीफायर टावर लगाने का निर्देश दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/air-poisonous/article-11151"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/air-poisonous-.jpg" alt=""></a><br /><h3>सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एयर प्यूरीफायर टावर लगाने का निर्देश |Air Poisonous</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>दिल्ली को जहरीली हवा <strong>(Air Poisonous)</strong> से राहत दिलाने के लिए आने वाले समय में चीन की तरह बड़े एयर प्यूरीफायर टावर लगाए जा सकते हैं। दरअसल दिल्ली में प्रदूषण की बढ़ती समस्या से स्थाई रूप से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एयर प्यूरीफायर टावर लगाने का निर्देश दिया है। एयर प्यूरीफायर टावर के मामले में चीन ने महारत हासिल कर रखी है। दुनिया का सबसे ऊंचा एयर प्यूरीफायर टावर चीन में लगाया गया है। इसकी लंबाई 328 फीट है, जो दस वर्ग किलोमीटर एरिया में समॉग को घटाने में कारगर है। इसे उत्तरी चीन के शांग्सी प्रांत में बनाया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">150 टॉवर लगाने पर करीब 50 करोड़ रुपए का खर्च</h2>
<p style="text-align:justify;">अगर भारत में एयर प्यूरीफायर टावर लगाए जाएं, तो दिल्ली के 1484 स्कवायर किमी दायरे में करीब 150 एयर प्यूरीफायर लगाने पड़ेंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में 60 मीटर (198 फीट) ऊंचा एक एयर प्यूरीफायर टावर लगाने में करीब 19 लाख रुपए का खर्च आया। ऐसे में 328 फीट लंबा एक टावर लगाने में करीब 30 से 35 लाख रुपए खर्च आएगा। अगर भारत की बात करें, तो यहां ऐसे 150 टॉवर लगाने में करीब 50 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कैसे काम करता है एयर प्यूरीफायर टावर</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>दुनिया का ये सबसे बड़ा प्यूरिफायर चार भागों में काम करता है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>पहले हिस्से में यह प्रदूषित हवा को कलस्टर के जरिए खींचता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> फिर इसमें मौजूद ग्रीन हाउस, सोलर एनर्जी से प्रदूषित वायु को गर्म करता है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>टावर के ऊपरी हिस्से पर पहुंचने तक प्रदूषित हवा को कई स्तरों पर फिल्टर किया जाता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> इसके बाद प्रदूषित हवा स्वच्छ होकर दोबारा पर्यावरण में मिल जाती है।</strong></li>
</ul>
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<p style="text-align:right;"><strong>Edited By Vijay Sharma</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/air-poisonous/article-11151</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Nov 2019 12:03:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर, थम रही सांसें</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत दर्जनभर शहरों में प्रदूषण बेहद खराब श्रेणी में है। दिल्ली के पूसा रोड में 777 और अशोक विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 757 है, तो ओखला 722 है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/delhi-air-pollution/article-11134"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/air-pollution1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">दिल्ली के साथ नोएडा गाजियाबाद गुरुग्राम फरीदाबाद में प्रदूषण बेहद खराब श्रेणी में| Air Pollution</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, एजेंसी।</strong> दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण <strong>(Air Pollution)</strong> का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी दिल्ली के साथ नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत दर्जनभर शहरों में प्रदूषण बेहद खराब श्रेणी में है। दिल्ली के पूसा रोड में 777 और अशोक विहार में एयर क्वालिटी इंडेक्स 757 है, तो ओखला 722 है। इसके अलावा, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम के पास 733 और आरकेपुरम में 628 है। इस बीच खबर आ रही है कि दिल्ली सरकार बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर odd-Even Scheme को अगले कुछ दिनों तक बढ़ाने का एलान कर सकती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) के मुताबिक, दिल्ली के लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर 500 बना हुआ है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। वहीं, दिल्ली के कुछ इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 700 के पार चला गया है।</p>
<ol>
<li style="text-align:justify;"><strong>नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी हालात बदतर हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> यहां पर भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) 400-500 के बीच है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रदूषण के मद्देनजर odd-Even Scheme को आगे बढ़ा सकती है </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दिल्ली सरकार बृहस्पतिवार को दिल्ली-एनसीआर पूरा दिन स्मॉग की चादर में लिपटा रहा। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसे इस मौसम का सबसे घना स्मॉग भी कह सकते हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसका असर दृश्यता पर भी पड़ा जो सुबह आठ बजे 500 मीटर थी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>दिन में भी यह 800 मीटर से अधिक नहीं बढ़ी। सामान्य तौर पर दृश्यता का स्तर ढाई से तीन हजार मीटर रहता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>एनसीआर के शहर का एयर इंडेक्स 400 से ज्यादा ही बना हुआ है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>आसमान के ऊपरी स्तर में छाए बादलों के कारण प्रदूषण से राहत नहीं मिल पा रही। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इससे पहले गुरुवार को दिल्ली का एयर इंडेक्स 461 रहा। इस स्तर को आपात श्रेणी में रखा जाता है।</strong></li>
</ol>
<h2 style="text-align:justify;">देश में सबसे प्रदूषित शहर गाजियाबाद व नोएडा</h2>
<p style="text-align:justify;">जिला प्रशासन व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने प्रदूषण फैला रहे रेलवे, एनएचएआइ व एक बिल्डर पर 2.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। शहर स्मॉग का चैंबर बना हुआ है। इसलिए निर्माण कार्य पर रोक है। इसके बावजूद सरकारी व निजी कार्यदायी संस्थाएं निर्माण कार्य जारी रखकर प्रदूषण फैला रही हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़े देखे जाएं तो गाजियाबाद और नोएडा में प्रदूषण का स्तर मानक से पांच से छह गुना अधिक है। प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए प्रशासन व यूपीपीसीबी लगातार कार्रवाई कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा के मुताबिक, बृहस्पतिवार को प्रदूषण फैलाने पर रेलवे पर 11 लाख रुपये, सिद्धार्थ विहार में बिल्डर एपेक्स दा क्रेमलिन पर एक करोड़ एक लाख रुपये रुपये, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का निर्माण कर रहे एनएचएआइ के ठेकेदार एपको कंपनी पर एक करोड़ एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ साइट पर काम कर रहे नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। वहीं, एनएचएआइ पर भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/delhi-air-pollution/article-11134</link>
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                <pubDate>Fri, 15 Nov 2019 12:24:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हवाई यात्रियों की मदद के लिए एयर इंडिया ने बढ़ाया मदद का हाथ</title>
                                    <description><![CDATA[विमानों का परिचालन बंद होने के बीच यात्रियों की बढ़ती मुश्किलें नई दिल्ली (एजेंसी)। निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज के विमानों का परिचालन बंद होने के बीच यात्रियों की बढ़ती मुश्किलें कम करने के लिए एयर इंडिया सामने आई है। सरकारी विमानन कंपनी ने कहा है कि जिस भी रूट पर दोनों कंपनियों की सीधी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/air-india-will-help-passengers/article-8607"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/air-india.jpg" alt=""></a><br /><h2>विमानों का परिचालन बंद होने के बीच यात्रियों की बढ़ती मुश्किलें</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज के विमानों का परिचालन बंद होने के बीच यात्रियों की बढ़ती मुश्किलें कम करने के लिए एयर इंडिया सामने आई है। सरकारी विमानन कंपनी ने कहा है कि जिस भी रूट पर दोनों कंपनियों की सीधी उड़ान सेवा थी, उस पर जेट एयरवेज के इकॉनमी क्लास के यात्रियों को एयर इंडिया सस्ते टिकट मुहैया कराएगी। हालांकि जेट एयरवेज के यात्रियों की मुश्किलों में इजाफा होता नजर आ रहा है। इसकी वजह यह है कि इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन यानी आइएटीए ने जेट एयरवेज को क्लियरिंग हाउस सिस्टम की सदस्यता से निलंबित कर दिया है। इससे यात्रियों को रिफंड मिलने में बड़ी दिक्कत हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">नागरिक विमानन मंत्री सुरेश प्रभु के निर्देश पर विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने  पहले एयरपोर्ट ऑपरेटरों और फिर एयरलाइंस कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने यात्रियों और उद्योग की भलाई के लिए कंपनियों को आपस में सहयोग करने का अनुरोध किया।सरकार ने एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइंस से कहा है कि वे जेट एयरवेज की उड़ाने रद होने से परेशान यात्रियों को अन्य उड़ानों में भेजने के लिए आवश्यक इंतजाम करें और उनसे अनाप-शनाप किराया वसूल न करें। जेट की रद उड़ानों से प्रभावित यात्रियों से कोई अतिरिक्त किराया नहीं वसूलने को कहा गया है। साथ ही परेशान यात्रियों की मानवीय आधार पर मदद करने की सलाह भी दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एयरलाइंस की बैठक में एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट, विस्तारा, गो एयर और जेट एयरवेज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अधिकारी भी मौजूद थे। इस बीच, जेट एयरवेज के प्रबंधन ने यात्रियों को आने वाले दिनों के लिए भी अच्छे संकेत नहीं दिए हैं। कंपनी ने प्रबंधन स्तर के कर्मचारियों को घर बैठने को कहा है। वहीं, निचले स्तर के कर्मचारियों के शिफ्ट में कई बदलाव किए गए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जेट संकट के पीछे कॉरपोरेट वार</h2>
<p style="text-align:justify;">जेट एयरवेज स्टाफ एसोसिएशन के सैकड़ों सदस्यों ने शुक्रवार को जंतर-मंतर पर एकत्र होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। इनका कहना था कि जेट का संकट कॉरपोरेट वार की उपज है, जिसमें स्पर्धी एयरलाइंस कंपनियों की भूमिका है। सरकार को चाहिए कि वह जेट संकट के समाधान के लिए बैंकों पर 1,500 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने का दबाव डाले, जिसका उन्होंने वादा किया था।</p>
<h2 style="text-align:justify;">10 मई के बाद ही वेतन संभव</h2>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ जेट स्टाफ एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुंबई में सिरोया सेंटर स्थित जेट के मुख्यालय में प्रबंधन से कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान को लेकर बात की। उनका कहना था कि जब कर्मचारियों की कोई छटनी नहीं हुई है, तो उन्हें उनका वेतन मिलना चाहिए। इस पर प्रबंधन की ओर से उन्हें बताया गया कि फिलहाल कंपनी के पास वेतन देने के लिए रकम नहीं है। कर्मचारियों को 15-20 दिन और धैर्य रखना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">यात्रियों को सलाह</h2>
<p style="text-align:justify;">कंपनी ने रद उड़ानों और एडवांस बुकिंग से प्रभावित यात्रियों को उनकी पूरी रकम रिफंड करने का वादा किया है। लेकिन उसने जेट पोर्टल से बुकिंग करने वाले यात्रियों से कम से कम 10 दिन इंतजार करने को कहा है। हालांकि जिन यात्रियों ने ट्रैवेल एजेंसियों के माध्यम से टिकट बुक कराए हैं उन्हें रिफंड के लिए 20 से 40 दिनों तक सब्र करना पड़ सकता है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/air-india-will-help-passengers/article-8607</link>
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                <pubDate>Fri, 19 Apr 2019 09:46:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीनगर में भारी हिमपात होने पर हवाई सेवा बंद</title>
                                    <description><![CDATA[रनवे से बर्फ हटाने और दृश्यता में सुधार होने के बाद ही हवाई यातायात को शुरू किया जायेगा श्रीनगर (वार्ता)। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में भारी हिमपात और खराब दृश्यता के कारण शनिवार को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हवाई सेवा स्थगित कर दी गयी। हवाई अड्डा अधिकारी ने यूनीवार्ता से कहा “हवाई पट्टी में बर्फ पड़ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>रनवे से बर्फ हटाने और दृश्यता में सुधार होने के बाद ही हवाई यातायात को शुरू किया जायेगा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीनगर (वार्ता)।</strong> जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में भारी हिमपात और खराब दृश्यता के कारण शनिवार को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हवाई सेवा स्थगित कर दी गयी।<br />
हवाई अड्डा अधिकारी ने यूनीवार्ता से कहा “हवाई पट्टी में बर्फ पड़ने और खराब दृश्यता के कारण सेवा स्थगित की गयी है।” उन्होंने कहा रनवे से बर्फ हटाने का अभियान शुरू किया गया है, हालांकि अभी भी हिमपात जारी है। हिमपात और खराब दृश्यता को ध्यान में रखते हुए अभी विमानों के उडान की अनुमति नहीं दी गयी है। रनवे से बर्फ हटाने और दृश्यता में सुधार होने के बाद ही हवाई यातायात को शुरू किया जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने बताया शुक्रवार से सभी विमानों के उड़ान को रद्द कर दिया गया है , हालांकि शुक्रवार को सुबह विमानों का परिचालन सामान्य रहा। विमानों के परिचालन को स्थगित करने की सूचना के बाद यात्री बहुत निराश दिखे। कुछ यात्रियों ने बताया कि नयी दिल्ली में साक्षात्कार के लिए उन्हें जाना था जबकि कुछ ने बताया कि उनको डॉक्टरों से मिलना था। कई व्यापारियों ने कहा कि श्रीनगर हवाई अड्डे से जाने वाले यात्रियों को हर सर्दियों में इसी तरह की स्थिति कासामना करना पड़ता है और सरकार इस मुद्दे को हल करने में विफल रही है।मौसम विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कश्मीर घाटी में अगले 24 घंटों के दौरान हल्की बारिश या हिमपात होने की संभावना है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/air-services-stop-after-heavy-snowfall-in-srinagar/article-7225</link>
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                <pubDate>Sat, 05 Jan 2019 11:57:37 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीरिया में हवाई हमले में आईएस नेता मारा गया</title>
                                    <description><![CDATA[आईएस का शीर्ष नेता अबू अल उमरयान मारा गया वाशिंगटन(एजेंसी)। सीरिया में अमेरिका नीत गठबंधन सेनाओं के हवाई हमलों में आईएस का एक वांछित नेता मारा गया है (air strikes in Syria) । वह एक अमेरिकी नागरिक और कईं अन्य लोगों की मौत के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार माना जा रहा था। सीएनएन टेलीविजन ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/air-strikes-in-syria/article-6780"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/syria.jpg" alt=""></a><br /><h2>आईएस का शीर्ष नेता अबू अल उमरयान मारा गया</h2>
<p><strong>वाशिंगटन(एजेंसी)। </strong>सीरिया में अमेरिका नीत गठबंधन सेनाओं के हवाई हमलों में आईएस का एक वांछित नेता मारा गया है<strong> (air strikes in Syria)</strong> । वह एक अमेरिकी नागरिक और कईं अन्य लोगों की मौत के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार माना जा रहा था। सीएनएन टेलीविजन ने गठबंधन सेनाओ के प्रवक्ता कर्नल सीन रयान के हवाले से आज बताया कि ये हवाई हमले रविवार को किए गए और इनमें आईएस का शीर्ष नेता अबू अल उमरयान मारा गया है । उसके साथ आईएस के कईं आतंकवादी भी इस हमले में ढेर हुए हैं।</p>
<h2>गठबंधन सेनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था</h2>
<p>उन्होंने बताया कि अल उमरयान गठबंधन सेनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था और वह अमेरिकी नागरिक तथा पूर्व सैन्य रेंजर पीटर कासिग की हत्या में शामिल था। उसने अनेक लोगों को बंधक बनाकर उनकी बर्बरता से हत्या की थी।अमेरिका ने इस क्षेत्र में आईएस का नामोनिशान मिटाने के लिए सैंकड़ो हवाई हमले किए हैं और गोलाबारी का सहारा भी लिया है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो।</p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/air-strikes-in-syria/article-6780</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Dec 2018 10:16:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों की सेहत के लिए जानलेवा है वायु प्रदूषण</title>
                                    <description><![CDATA[वायु प्रदूषण पर वैश्विक संगठनों की चेतावनियों का भारत पर कोई असर नहीं पड़ा है। वायु प्रदूषण का खतरा बच्चे से बुजुर्गों तक सामान रूप से मंडरा रहा है। भारत सहित विश्व के अनेक देश इसकी चपेट में है। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंच रहा है। जहरीली हवा ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/air-pollution-is-deadly-for-childrens-health/article-6530"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/untitled-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण पर वैश्विक संगठनों की चेतावनियों का भारत पर कोई असर नहीं पड़ा है। वायु प्रदूषण का खतरा बच्चे से बुजुर्गों तक सामान रूप से मंडरा रहा है। भारत सहित विश्व के अनेक देश इसकी चपेट में है। वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंच रहा है। जहरीली हवा ने नौनिहालों को अपना शिकार बनाकर मौत के मुँह में धकेला है जो बेहद चिंताजनक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण और बच्चों पर जारी नई रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 15 साल से कम उम्र के 93 प्रतिशत बच्चे प्रदूषित हवा में साँस लेने को मजबूर है जिससे उनके स्वास्थ्य और विकास पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यूनिसेफ की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण बच्चों के दिमाग को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अधिकांश शहर गंभीर रूप से प्रदूषण से जूझ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2016 में वायु प्रदूषण से होने वाली श्वसन संबंधी बीमारियों की वजह से दुनियाभर में 5 साल से कम उम्र के 5.4 लाख बच्चों की मौत हुई है। 5 साल से कम उम्र के 10 बच्चों की मौत में से 1 बच्चे की मौत का कारण प्रदूषित हवा है। वायु प्रदूषण फेफड़ों और श्वसन प्रणाली और दिल की सेहत को बहुत अधिक प्रभावित कर रहा है । बच्चों को वायु प्रदूषण का खतरा सबसे ज्यादा है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम और फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं होते। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में 2016 में पांच साल से कम उम्र के 60,987 बच्चों को जहरीली हवा की वजह से जान गंवानी पड़ी है। यह दुनिया में सबसे ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक इस आयु वर्ग में मारे गए बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक है. भारत में 2016 में 32,889 लड़कियों की मौत इसी कारण से हुई है। वहीं, पांच से 14 साल के 4,360 बच्चों को वायु प्रदूषण के कारण जान गंवानी पड़ी है। सभी उम्र के बच्चों को मिलाकर देखें तो वायु प्रदूषण से करीब एक लाख दस हजार बच्चों की मौत हो गई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब करीब 20 लाख लोगों की मौत प्रदूषण की वजह से हुई है जो पूरी दुनिया में इस कारण से हुई मौतों का 25 प्रतिशत है। वयस्कों की तुलना में बच्चे वायु प्रदूषण के आसानी से शिकार बन रहे हैं। वे अपने विकासशील फेफड़ों और इम्यून सिस्टम के चलते हवा में मौजूद विषैले तत्वों को सांस से अपने अंदर ले रहे हैं और अधिक जोखिम का शिकार बन रहे हैं। कुछ बच्चे दूसरों की तुलना में अधिक संवेदनशील होते हैं और ऐसे में वे अधिक जोखिम में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वीडन की ऊमेआ यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च कहती है कि वायु प्रदूषण से इंसानी जीवन का बहुत बड़ा खतरा है क्योंकि इसका सीधा घातक असर दिमाग पर होता है, इसकी चपेट में बच्चे और किशोर सीधे आते हैं जो कि बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डालता है और इस कारण कभी-कभी बच्चे मानसिक रोगों के शिकार भी हो जाते हैं। ग्रीनपीस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत के 4.70 करोड़ बच्चे ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां हवा में पीएम10 का स्तर मानक से अधिक है । इसमें अधिकतर बच्चे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली के हैं। इस 4.70 करोड़ के आंकड़ें में, 1.70 करोड़ वे बच्चे हैं जो कि मानक से दोगुने पीएम10 स्तर वाले क्षेत्र में निवास करते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली राज्यों में लगभग 1.29 करोड़ बच्चे रह रहे हैं जो पांच साल से कम उम्र के हैं और प्रदूषित हवा की चपेट में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अनुमान है कि हर साल अकेले पंजाब-हरियाणा के खेतों में कुल तीन करोड़ 50 लाख टन पराली जलाई जाती है। एक टन पराली जलाने पर दो किलो सल्फर डाईआॅक्साइड, तीन किलो ठोस कण, 60 किलो कार्बन मोनोआॅक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाईआॅक्साइड और करीब 200 किलो राख निकलती हैैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब कई करोड़ टन फसल अवशेष जलते हैैं तो वायुमंडल की कितनी दुर्गति होती होगी। हानिकारक गैसों एवं सूक्ष्म कणों से परेशान दिल्ली वालों के फेफड़ों को कुछ महीने हरियाली से उपजे प्रदूषण से भी जूझना पड़ता है। विडंबना है कि परागण से सांस की बीमारी पर चर्चा कम ही होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार पराग कणों की ताकत उनके प्रोटीन और ग्लाइकॉल प्रोटीन में निहित होती है, जो मनुष्य के बलगम के साथ मिलकर अधिक जहरीले हो जाते हैं। ये प्रोटीन जैसे ही हमारे खून में मिलते हैैं, एक तरह की एलर्जी को जन्म देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह एलर्जी इंसान को गंभीर सांस की बीमारी की तरफ ले जाती है। चूंकि गर्मी में ओजोन परत और मध्यम आकार के धूल कणों का प्रकोप ज्यादा होता है इसलिए पराग कणों के शिकार लोगों के फेफड़े क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। लिहाजा ठंड शुरू होते ही दमा के मरीजों का दम फूलने लगता है।हवा जहरीली और प्रदूषित होने का मतलब है वायु में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) के स्तर में वृद्धि होना । हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 और पीएम10 की मात्रा 100 होने की मात्रा पर इसे सुरक्षित माना जाता है । लेकिन इससे ज्यादा हो तो वह बेहद ही नुकसान दायक माना जाता है ।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Nov 2018 09:45:54 +0530</pubDate>
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                <title>काले धन पर हवाई वायदे हो रहे फुस्स</title>
                                    <description><![CDATA[स्विटजरलैंड के बैंकों में काले धन में 50 फीसदी वृद्धि हो जाना हमारे देश के सरकारी तंत्र की नाकामी के साथ सत्ताधारी पार्टी के वादों और दावों पर सवालिया निशान लगाता है। पहले आम नागरिक की यह आशा थी कि मोदी सरकार काला धन भले ही वापस नहीं ला सकती परंतु इसके अलावा धन बाहर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/air-futures-fusible-on-black-money/article-4567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/black-money1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्विटजरलैंड के बैंकों में काले धन में 50 फीसदी वृद्धि हो जाना हमारे देश के सरकारी तंत्र की नाकामी के साथ सत्ताधारी पार्टी के वादों और दावों पर सवालिया निशान लगाता है। पहले आम नागरिक की यह आशा थी कि मोदी सरकार काला धन भले ही वापस नहीं ला सकती परंतु इसके अलावा धन बाहर भी नहीं जाने देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ताजा रिपोर्ट ने इस आशा पर भी पानी फेर दिया तथा काला धन छलांग लगाता हुआ स्विटजरलैंड पहुंच रहा है। 2014 के लोक सभा चुनावों से पहले आम भारतीयो को लग रहा था कि ‘कालाधन’ वापस आया कि आया, ‘अच्छे दिन आए कि आए।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के हर मंच पर जनता को आकर्षित करने के लिए यह नारा बड़े जोरदार तरीके से लगाया था कि ‘अच्छे दिन आएंगे’ पर सरकार बनने के बाद सरकार या पार्टी के किसी प्रोग्राम में यह नारा नहीं दोहराया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जिन तेल कीमतों में वृद्धि व मँहगाई को मुद्दा बनाकर भाजपा सत्ता में आई वह मँहगाई व तेल कीमतों ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। काला धन ना तो देश में पैदा होना बंद हुआ तथा ना ही बाहर जाने से रुका। काले धन के खिलाफ सात वर्षों की सजा का कानून बनाने के बावजूद जिनकी पहुंच है उन व्यापारियों का काला धंधा अभी भी चालू है। आम आदमी के दिल में यह धारणा बन चुकी है कि सरकार बदली लेकिन व्यवस्था नहीं बदली।</p>
<p style="text-align:justify;">और तो और कुछ ठग हमारे देश के बैंकों को ही दिन दिहाड़े लूटकर ले गए, सरकार चुपचाप इस तमाशे को देखती रही। होना तो यह चाहिए था कि विजय माल्या लूटकर भागा उसके बाद ना कोई भागता लेकिन नीरव मोदी भाग गया। कानून पटरी पर नहीं आया जबकि इनसे दूर दोनों के भागने के बीच में काफी समय अंतराल है। ठग्गों को इस बात का पता है कि भारतीय शासन तंत्र में भागना बड़ा आसान है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्षों से चल रही जांचों में कुछ भी हाथ नहीं आया। शासन प्रबंध में ऐसा चल रहा है लेकिन आम जन दुखी है राजनेताओं के भाषणों व सच्चाई में अंतर बहुत चौड़ा है। वैसे आम आदमी को यह समझना चाहिए कि चुनावी वायदे किसी नीति का हिस्सा नहीं, यह सब चुनावों की रणनीति है। राजनीति में ईमानदारी की चर्चा लोगों को भरमाने का काम करती है। आम आदमी को मिलने वाली सब्सिडी में कटौती करने वाली सरकार के लिए टैक्स चोरी रोकने के लिए जागने का वक्त है।</p>
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                <pubDate>Sat, 30 Jun 2018 08:02:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>ATF के दाम बढ़ने से महंगा हो सकता है हवाई सफर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद तक का इजाफा हो चुका है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू परिचालन की लागत को पूरा करने के लिए विमानन कंपनियों को हवाई किराए में संशोधन को मजबूर होना पड़ सकता है। एयरलाइन्स की कॉस्ट (लागत) में 45 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/air-travel-can-be-costly-by-increasing-atf-costs/article-3763"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/air.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद तक का इजाफा हो चुका है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू परिचालन की लागत को पूरा करने के लिए विमानन कंपनियों को हवाई किराए में संशोधन को मजबूर होना पड़ सकता है। एयरलाइन्स की कॉस्ट (लागत) में 45 फीसद हिस्सा जेट फ्यूल का होता है, ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन कंपनियां हवाई किराए में 15 फीसद के इजाफे का विचार कर सकती हैं। हालांकि इस पर सीधी प्रतिक्रिया देने से एयरलाइन कंपनियों ने किनारा किया लेकिन कुछ निजी विमानन कंपनियों ने कहा है कि एटीएफ में वृद्धि के बाद बढ़ने वाली लागत को कैसे पूरा किया जाए इस पर अभी फैसला लिया जाना बाकी है जबकि परिस्थितियां किराए में बढ़ोतरी पर जोर दे रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीते एक साल के दौरान एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में 30 फीसद का इजाफा हो चुका है जिसमें से 25 फीसद इजाफा बीते 6 महीनों में ही हुआ है। इस अनिश्चितता पर एक निजी विमानन कंपनी के कार्यकारी ने बताया, ह्लबीते साल नवंबर महीने से अब तक जेट फ्यूल की कीमत में 25 फीसद का इजाफा हो चुका है, ऐसे में यह हवाई किराए में बढ़ोतरी पर जोर देता है ताकि लागत को पूरा किया जा सके। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) कर व्यवस्था के दायरे में लाने को लेकर विमानन कंपनियों की बढ़ती मांग के बीच नागर विमानन सचिव आर एन चौबे ने कहा है कि वो इस मामले को वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाएंगे, क्योंकि जेट फ्यूल की कीमतें जनवरी 2017 के बाद से अब तक 40 फीसद तक बढ़ चुकी हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 May 2018 07:50:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तरी भारत में आज फिर आ सकती है धूल भरी आंधी, तेज हवाओं के कारण पारा 45 होने के आसार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उत्तरी भारत में अगले 4-5 दिन हवाओं का रुख गर्म हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में गर्म हवाओं के होने की संभावना है। उधर दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कल धूल भरी आंधी आ सकती है। गर्मी का आलम ये है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/coming-on-hot-air-in-north-india/article-3754"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/hot-air.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>उत्तरी भारत में अगले 4-5 दिन हवाओं का रुख गर्म हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में गर्म हवाओं के होने की संभावना है। उधर दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कल धूल भरी आंधी आ सकती है। गर्मी का आलम ये है कि कल राजस्थान का बूंदी दुनिया का दूसरा सबसे गर्म शहर रहा। यहां 48 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बूंदी ने दुनिया के सबसे गर्म शहर मिस्र के बहरिया की भी बराबरी कर ली। वैश्विक वेबसाइट एंडो कंट्री वैदर के मुताबिक, बहरिया में भी बूंदी के बराबर 48 डिग्री तापमान रहा। मौसम विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. देवेंद्र प्रधान ने बताया कि सेंट्रल पाकिस्तान और राजस्थान में पिछले दो दिनों से हीट वेव चल रही है। राजस्थान से 30 से 35 किमी की रफ्तार से गर्म हवाएं दिल्ली पहुंच रही हैं। उत्तरी भारत में अगले 4-5 दिन हवाओं का रुख गर्म हो सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में गर्म हवाओं के होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में कल धूल भरी आंधी आ सकती है। गर्मी का आलम ये है कि कल राजस्थान का बूंदी दुनिया का दूसरा सबसे गर्म शहर रहा। यहां 48 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बूंदी ने दुनिया के सबसे गर्म शहर मिस्र के बहरिया की भी बराबरी कर ली। वैश्विक वेबसाइट एंडो कंट्री वैदर के मुताबिक, बहरिया में भी बूंदी के बराबर 48 डिग्री तापमान रहा। मौसम विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. देवेंद्र प्रधान ने बताया कि सेंट्रल पाकिस्तान और राजस्थान में पिछले दो दिनों से हीट वेव चल रही है। राजस्थान से 30 से 35 किमी की रफ्तार से गर्म हवाएं दिल्ली पहुंच रही हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 15:35:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी की राजधानी में जरीली हुई हवा, लोगों का घुटने लगा दम</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ। जहरीली हवा से होने वाली बीमारियां राजधानी लखनऊ में रोजाना 11 लोगों की जान ले रही हैं। सालाना कानपुर में सर्वाधिक 4173 मौतें होती हैं, जबकि लखनऊ में 4127 लोगों की मृत्यु हो जाती है। स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश में बीते दो दशकों में असमय मौतों की संख्या बढ़ गई है। ये तस्वीर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/air-in-the-capital-of-up/article-3751"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/duhaa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> जहरीली हवा से होने वाली बीमारियां राजधानी लखनऊ में रोजाना 11 लोगों की जान ले रही हैं। सालाना कानपुर में सर्वाधिक 4173 मौतें होती हैं, जबकि लखनऊ में 4127 लोगों की मृत्यु हो जाती है। स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश में बीते दो दशकों में असमय मौतों की संख्या बढ़ गई है। ये तस्वीर सेंटर फॉर एनवॉयरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) और आइआइटी-दिल्ली द्वारा तैयार रिपोर्ट ‘जानिए आप कैसी हवा में सांस ले रहे हैं’ में सामने आई है। रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीड की सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति ने कहा कि वायु प्रदूषण का दुष्प्रभाव दिनोंदिन बढ़ रहा है। लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने वालों में बीमारियां बढ़ रही हैं, जिससे वह असमय मौत के शिकार हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थिति यह है कि असमय मृत्यु-दर (प्रीमैच्योर मोर्टेलिटी) चिंताजनक ढंग से बढ़कर प्रति लाख आबादी पर 150-300 व्यक्ति के करीब पहुंच गई है। आइआइटी दिल्ली और मुंबई द्वारा इस संदर्भ में प्रदेश के जिला अस्पतालों से एकत्र किया गया यह आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है। कारण यह है कि बहुत सी मौतें रजिस्टर ही नहीं होती हैं। यही नहीं, कई बार बीमारी की पहचान ही नहीं हो पाती है। रिपोर्ट के अनुसार, सभी शहरों में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) का स्तर राष्ट्रीय मानक (40 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर) से दो गुना ज्यादा और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वार्षिक औसत सीमा तीन से आठ गुना ज्यादा है। सीड द्वारा देश के जिन 11 शहरों में अध्ययन किया गया है उनमें उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर शामिल हैं। अंकिता ने बताया कि रिपोर्ट बीते 17 सालों में पीएम 2.5 के औसत पर आधारित है, जिसे सेटेलाइट डाटा की मदद से तैयार किया गया है।</p>
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                <pubDate>Wed, 23 May 2018 11:12:53 +0530</pubDate>
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