<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/higher-education/tag-1844" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Higher Education - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/1844/rss</link>
                <description>Higher Education RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>Canada top universities: कनाडा की ये 5 यूनिवर्सिटीज़ बन सकती हैं आपका करियर गेमचेंजर, डिग्री मिलते ही नौकरी के शानदार मौके</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा की ये 5 यूनिवर्सिटीज़ बन सकती हैं आपका करियर गेमचेंजर, डिग्री मिलते ही नौकरी के शानदार मौके]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/these-5-universities-of-canada-can-become-your-career-gamechanger/article-84657"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/canada-top-universities.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Canada</span></span> इस समय भारतीय छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा स्टडी डेस्टिनेशन में शामिल है। यहां 4 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। बेहतर शिक्षा व्यवस्था, रिसर्च सुविधाएं और शानदार करियर अवसरों के कारण हर साल बड़ी संख्या में विदेशी छात्र कनाडा का रुख करते हैं। टाइम्स हायर एजुकेशन की ग्लोबल इंप्लॉयबिलिटी रैंकिंग के अनुसार, कनाडा की कुछ यूनिवर्सिटीज़ ऐसी हैं जहां से डिग्री लेने के बाद नौकरी मिलने की संभावना काफी ज्यादा होती है। आइए जानते हैं उन टॉप 5 यूनिवर्सिटीज़ के बारे में।</p>
<h3 style="text-align:justify;">1. <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">University of Toronto</span></span></h3>
<p style="text-align:justify;">1827 में स्थापित यह कनाडा की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी मानी जाती है। ग्लोबल इंप्लॉयबिलिटी रैंकिंग में इसे दुनिया में 14वां और कनाडा में पहला स्थान मिला है। यहां मेडिसिन, इंजीनियरिंग, बिजनेस और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई बेहद लोकप्रिय है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां के करीब 90% छात्रों को डिग्री मिलने के एक साल के भीतर नौकरी मिल जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2. <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">McGill University</span></span></h3>
<p style="text-align:justify;">1821 में स्थापित मैक्गिल यूनिवर्सिटी रिसर्च और इनोवेशन के लिए जानी जाती है। यहां लगभग 30% छात्र विदेशी होते हैं। ग्लोबल इंप्लॉयबिलिटी रैंकिंग में इसका स्थान दुनिया में 31वां और कनाडा में दूसरा है। यहां से पढ़ाई करने वाले अधिकांश छात्रों को ग्रेजुएशन के तुरंत बाद रोजगार मिल जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">3. <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">University of British Columbia</span></span></h3>
<p style="text-align:justify;">1915 में स्थापित यह यूनिवर्सिटी 140 से अधिक देशों के छात्रों को आकर्षित करती है। बिजनेस, इंजीनियरिंग, हेल्थ साइंस और पर्यावरण विज्ञान के लिए यह संस्थान काफी प्रसिद्ध है। इंडस्ट्री कनेक्शन मजबूत होने के कारण यहां के छात्रों को जॉब के अच्छे अवसर मिलते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">4. <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Université de Montréal</span></span></h3>
<p style="text-align:justify;">1878 में स्थापित मॉन्ट्रियाल यूनिवर्सिटी फ्रेंच भाषी छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय है। मेडिसिन, लॉ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन जैसे कोर्स यहां काफी चर्चित हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के लगभग 90% छात्रों को ग्रेजुएशन के छह महीने के भीतर नौकरी मिल जाती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">5. <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">McMaster University</span></span></h3>
<p style="text-align:justify;">1887 में स्थापित मैक्मास्टर यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग और बिजनेस शिक्षा के लिए खास पहचान रखती है। यहां 120 से ज्यादा देशों के छात्र पढ़ते हैं। इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कोर्स और रिसर्च आधारित पढ़ाई के कारण यहां से पास आउट होने वाले छात्रों की रोजगार दर काफी अच्छी मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/news-brief/these-5-universities-of-canada-can-become-your-career-gamechanger/article-84657</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/news-brief/these-5-universities-of-canada-can-become-your-career-gamechanger/article-84657</guid>
                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:40:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/canada-top-universities.jpg"                         length="25694"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्च शिक्षा की सुधरती सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[यह शुभ संकेत है कि देश के उच्च शैक्षणिक संस्थान देश के छात्रों के अलावा विदेशी छात्रों को भी आकर्षित करने में सफल हो रहे हैं। हालिया मानव संसाधन मंत्रालय की उच्च शिक्षा सर्वे रिपोर्ट पर गौर करें तो इस वर्ष 164 देशों से 47,427 छात्र पढ़ाई के लिए भारत के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/improved-health-of-higher-education/article-10649"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/improved-health-of-higher-education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह शुभ संकेत है कि देश के उच्च शैक्षणिक संस्थान देश के छात्रों के अलावा विदेशी छात्रों को भी आकर्षित करने में सफल हो रहे हैं। हालिया मानव संसाधन मंत्रालय की उच्च शिक्षा सर्वे रिपोर्ट पर गौर करें तो इस वर्ष 164 देशों से 47,427 छात्र पढ़ाई के लिए भारत के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन लिया है। विदेशी छात्रों का नामांकन 63.7 प्रतिशत है जिसमें सबसे अधिक नेपाल के 26.88 प्रतिशत छात्रों ने दाखिला लिया है। इनके अलावा अफगानिस्तान, भूटान, नाइजीरिया और सूडान के छात्र भी भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों का हिस्सा बने हैं। रिपोर्ट पर गौर करें तो 18 से 23 की उम्र में उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वालों में लड़कियां लड़कों से आगे निकल गयी हैं। इस आयु वर्ग में लड़कों का प्रतिशत 26.3 तो लड़कियों का प्रतिशत 26.4 है।</p>
<p style="text-align:justify;">यानी उच्च शिक्षा में एक साल के दरम्यान छात्राओं के दाखिले में 7,52,097 की बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो वर्ष 2017-18 में जहां 1,74,37,703 छात्राओं ने उच्च शिक्षा में दाखिला लिया था वहीं इस वर्ष 1,81,89,800 छात्राओं ने दाखिला लिया। इसके अलावा सकल नामांकन अनुपात 25.8 प्रतिशत से बढ़कर 26.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। याद होगा कि गत वर्ष मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वार्षिक प्रकाशन ‘उच्च एवं तकनीकी शिक्षा आंकड़े’ के मुताबिक उच्च शिक्षा में छात्रों का सकल दाखिला अनुपात 18 से 23 वर्ष की आयु में महज 20 प्रतिशत के आसपास था। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2009-10 में उच्च शिक्षा में छात्रों का सकल दाखिला अनुपात 18 से 23 वर्ष की आबादी में 15 प्रतिशत था और 2010-11 में बढ़कर 18.8 प्रतिशत हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इन आधे दशक में नामांकन के मामले में भारत की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। लेकिन अन्य देशों की तुलना में यह अभी भी कम है। उदाहरण के लिए चीन में यह आंकड़ा 26 प्रतिशत, थाईलैंड में 48 प्रतिशत और मलेशिया में 40 प्रतिशत है। अच्छी बात है कि भारत सरकार सकारात्मक नीतियों के जरिए इस दिशा में ठोस पहल कर रही है और उसके अपेक्षित परिणाम भी परिलक्षित हो रहे हैं। उसी प्रयास का नतीजा है कि वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा में भारत के उच्च शैक्षणिक संस्थानों की रैंकिंग सुधरने लगी है। अभी गत माह पहले लंदन स्थित वैश्विक संगठन टाइम्स हायर एजुकेशन द्वारा जारी इमर्जिंग इकोनॉर्मिज यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2019 के मुताबिक भारत के 49 संस्थानों ने जगह बनायी। पिछले साल यह 42 थी।</p>
<p style="text-align:justify;">याद होगा गत वर्ष पहले टाइम्स हायर एजुकेशन (टीएचई) की वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैकिंग में दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों की नई सूची में भी भारत के 31 शिक्षण संस्थानों ने जगह बनायी। लेकिन गौर करें तो अभी भी भारत की स्थिति बहुत कमजोर है। इसमें बेहतर सुधार के लिए उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार आवश्यक है। इसके लिए सर्वप्रथम सकल दाखिला अनुपात बढ़ाने के साथ रिक्त पड़े पदों को अति शीध्र भरा जाना चाहिए। साथ ही उच्च शिक्षा का बजट भी बढ़ाया जाना चाहिए। आज की तारीख में शिक्षा पर होने वाला व्यय सकल घरेलू उत्पाद का महज 3.98 प्रतिशत है जो कि वैश्विक अनुपात में बहुत कम है। मौजूदा समय में देश में तकरीबन 600 के आसपास विश्वविद्यालय और 25000 कालेज हैं। लेकिन इनसे उच्च शिक्षा की सुलभता साकार नहीं हो पा रही है। नामांकन दर के अलावा शोध कार्यों की बात करें तो इस क्षेत्र में भारत की स्थिति बेहद कमजोर है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों के मुताबिक दुनिया के विकसित देशों में प्रति 10 लाख में 5000 छात्र शोध कार्य में संलग्न हैं। स्कैंडिनेवियाई देशों में यह संख्या 7000 के आसपास है। जबकि भारत में 250 के आसपास है। यह स्थिति उच्च शिक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। यह स्वाभाविक है कि जब उच्च शिक्षा में नामांकन का दर कम होगा तो शोध कार्य करने वाले कम होंगे। मौजुदा समय में उच्च शिक्षण संस्थानों के समक्ष जो सबसे बड़ी समस्या है, वह अध्यापकों की कमी और जरुरी संसाधनों का अभाव है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में 45 प्रतिशत से 52 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इनमें 42 प्रतिशत प्रोफेसरों के पद और 48 प्रतिशत रीडरों के पद रिक्त हैं। इसी तरह 49 प्रतिशत पद लेक्चरर के पद रिक्त हैं। एक आंकड़े के मुताबिक 51 से 70 प्रतिशत शिक्षकों के सहारे पठन-पाठन का काम चलाया जा रहा है। जबकि प्रत्येक वर्ष विश्वविद्यालयों और कालेजों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है। शिक्षकों के अलावा भारी पैमाने पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भी कमी है। उचित होगा कि सरकार इन रिक्त पड़े पदों को अति शीघ्र भरे ताकि उच्च शिक्षा की सेहत में तेजी से सुधार हो।<br />
<strong><em>अरविंद जयतिलक</em> </strong></p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/improved-health-of-higher-education/article-10649</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/improved-health-of-higher-education/article-10649</guid>
                <pubDate>Mon, 07 Oct 2019 21:15:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2019-10/improved-health-of-higher-education.jpg"                         length="58410"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या उच्च शिक्षा में होगा सुधार?</title>
                                    <description><![CDATA[देश में उच्च शिक्षा में सुधार के बारे में व्यापक बहस चल रही है। शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी और अन्य विशेषज्ञों ने शिक्षा के स्तर के बारे में चिंता व्यक्त की है और उसमें बदलाव की मांग की है। हमारे देश में शिक्षा प्रणाली में निश्चित रूप से बदलाव की आवश्यकता है और यह बदलाव केवल आईआईटी, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/what-will-improve-in-higher-education/article-4903"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/study.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में उच्च शिक्षा में सुधार के बारे में व्यापक बहस चल रही है। शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी और अन्य विशेषज्ञों ने शिक्षा के स्तर के बारे में चिंता व्यक्त की है और उसमें बदलाव की मांग की है। हमारे देश में शिक्षा प्रणाली में निश्चित रूप से बदलाव की आवश्यकता है और यह बदलाव केवल आईआईटी, आईआईएम या विश्वविद्यालयों में ही नहंी अपितु ग्रामीण और पिछडे़ जिलों में स्थित उच्च शिक्षा संस्थानों में भी किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव के बारे में भी चर्चा चल रही है और उसे अधिक व्यावहारिक और प्रासंगिक बनाने की मांग की जा रही है। विभिन्न संस्थानों ने इस बारे में प्रक्रिया शुरू कर दी है और कुछ संस्थानों ने अपने यहां गुणवत्ता में सुधार के लिए व्यापक बदलाव किए हैं। विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एक बड़ी मांग है और इस संबंध में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों ने कुछ प्रगति की है जबकि राज्य विश्वविद्यालय अभी भी राज्यों के पूर्ण नियंत्रण में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व में भारत की स्थिति के मद्देनजर शिक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है। वर्तमान में न केवल विश्व स्तर पर अपितु एशियाई देशों में भी शिक्षा के मामले में भारत की स्थिति अच्छी नहंी है। इसलिए इस बारे में चर्चा चल रही है कि हमें शिक्षा में सुधार करना चाहिए अन्यथा हमारा देश चीन और सिंगापुर जैसे देशों से पिछड़ जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बात को ध्यान में रखते हुए केन्द्र ने भरतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक लाने का प्रस्ताव किया है। जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 का निरस्तन किया जाएगा। सरकार की अनेक समितियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के स्थान पर नए विनियामक की स्थापना की सिफारिश की है। किंतु सरकार द्वारा यकायक उठाए गए इस कदम पर कुछ अध्यापकों ने आशंकाएं व्यक्त की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्रीय विश्वविद्यालय अध्यापक एसोसिएशन ने इस विधेयक के द्वारा विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम होने की आशंका व्यक्त की है। ऐसा समझा जाता है कि भारतीय उच्च शिक्षा आयोग को उच्च शिक्षा के गुणवत्ता नियंत्रण और बेहतर मानदंड सुनिश्चित करने हेतु निगरानी की शक्तियां प्राप्त होंगी। किंतु उसके पास अनुदान देने की शक्ति नहीं होगी। अनुदान मानव विकास संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा दिए जाएंगे और आयोग केवल शैक्षिक विनियामक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को नया पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए आयोग से अनुमति लेनी होगी। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार किसी नए पाठ्यक्रम को शुरू करने से पहले विश्वविद्यालयों को अनुमति लेनी होगी। आयोग को यदि प्रतिकूल रिपोर्ट प्राप्त होती है तो वह नए पाठ्यक्रम को शुरू करने की अनुमति वापस ले सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्च शिक्षा संस्थानों के वार्षिक मूल्यांकन से शिक्षा क्षेत्र में सुधार आएगा और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। इस विधेयक की आलोचनाएं की जा रही हैं किंतु किसी नई बात को करने पर ऐसी आलोचना होती रहती हैं। आयोग को पाठ्यक्रम विनियमित करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने, खराब प्रदर्शन कर रहे उच्च शिक्षा संस्थानों को बंद करने और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक और शीर्ष पदों की पात्रता शर्तें निर्धारित करने की शक्ति होगी। इसके चलते आगामी वर्षों में उच्च शिक्षा में सुधार होगा और यह उच्च शिक्षा के वर्तमान विनियामक ढ़ांचे से अलग होगा और वैश्विक मानदंडों के अनुरूप होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही भारतीय उच्च शिक्षा आयोग राजनीतिक नियंत्रण से मुक्त होगा। यह एक 14 सदस्यीय निकाय होगा जो पूर्णत: पेशेवर निकाय के रूप में कार्य करेगा। हाल ही में एआईसीटीई के अध्यक्ष ने उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता में गिरावट के लिए उपकुलपतियों के गलत चयन को दोषी बताया है। जिसके चलते कोलकाता, मंबई और मद्रास जैसे सुस्थापित विश्वविद्यालयों का कार्यकरण प्रभावित हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय उच्च शिक्षा आयोग को धीरे-धीरे और अधिक शक्तियं दी जानी चाहिए और नए संस्थानों को मान्यता देने के मामले में उसे विशेष शक्तियां दी जानी चाहिए क्योंकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संस्थानों की अत्यधिक संख्या अच्छा नहंी है। आयोग को अनुदान देने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सिफारिश करने की जिम्मेदारी भी दी जानी चाहिए। किसी अन्य निकाय को ऐसी शक्ति देने से मामले उलझ सकते हैं और भारतीय उच्च शिक्षा आयोग का महत्व कम होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अन्य महतवपूर्ण पहलू आयोग को उन्हें अंतर संकाय अध्ययन की अनुमति भी देनी चाहिए जैसे बायो इन्फोर्मेटिक्स, मैरीन इंजीनियरिंग, जलचर, नैनो टेक्नोलोजी, पर्यावरण विज्ञान और प्रबंधन आदि। हाल ही में कुछ विश्वविद्यालयों को शैक्षिक स्वायत्तता देने का निर्णय स्वागत योग्य है और गत वर्षों में जिन विश्वविद्यालयों के कार्य निष्पादन में सुधार आया है उन्हें भी स्वात्तता दी जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक में अनुसंधान के पहलू पर बल नहीं दिया गया है। क्या आयोग इस पहलू की भी जांच करेगा या इसके लिए किसी अन्य राष्ट्रीय निकाया का गठन किया जाएगा? किंतु अधिक संस्थाओं का गठन अच्छा नहंी है और उच्च शिक्षा के लिए एक स्वतंत्र और सक्षम निकाय बनाया जाना चाहिए। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">गत कुछ वर्षों में वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में भारत का योगदान केवल 3.5 से 3.7 प्रतिशत तक रहा है और वह चीन से बहुत पीछे है जिसका योगदान 21 प्रतिशत है। भारतीय संस्थानों में शिक्षण और अनुसंधान की गुणवत्ता अच्छी नहंी है। जिसके चलते अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां भारतीय संस्थानों को अच्छी रैकिंग नहंी देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस नए विधेयक से आशा की जाती है कि भारतीय संस्थान विश्व के 150 से 200 शीर्ष संस्थानों में आ पाएंगे। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पूणे विश्वविद्यालय रैकिंग के मामले में बहुत पीछे है और उनकी रैकिंग लगभग 800 के आसपास है। जबकि चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, और दक्षिण अफ्रीका के दर्जनों विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन भारत से कहीं अच्छा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा सरकार को उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए अधिक धन राशि आवंटित करनी चाहिए ताकि हमारा देश तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करा सके और अंतर्राष्ट्रीय जगत में अपनी पहचान बना सके। इस संबंध में प्रोफेसर यशपाल समिति द्वारा 2009 में की गयी सिफारिशें प्रासंगिक हैं जिसमें उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अधिक धन राशि आवंटित करने और निजी निकायों पर कड़ा विनियमन और निगरानी रखने की सिफारिश की थी। समय आ गया है कि इन सिफारिशों को जल्दी से जल्दी लागू किया जाए<strong>। </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>धुर्जति मुखर्जी (इंफा)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/what-will-improve-in-higher-education/article-4903</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/what-will-improve-in-higher-education/article-4903</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Jul 2018 06:32:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-07/study.jpg"                         length="88012"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्च शिक्षा के लिए अधिक धनराशि की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही है। उच्च शिक्षा को न केवल प्रासंगिक अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर की भी बनाए जाने की आवश्यकता है। उक्त संस्थान किस तरह कार्य करेगा इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। इस दिशा में सरकर ने पहला महत्वपूर्ण कदम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/need-more-funding-for-higher-education/article-2787"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/education.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही है। उच्च शिक्षा को न केवल प्रासंगिक अपितु अंतर्राष्ट्रीय स्तर की भी बनाए जाने की आवश्यकता है। उक्त संस्थान किस तरह कार्य करेगा इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। इस दिशा में सरकर ने पहला महत्वपूर्ण कदम आईआईटी सहित सभी केन्द्र द्वारा वित्त पोषित संस्थानों को अंतर्राष्ट्रीय रैकिंग में भाग लेने के लिए कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में 600 विश्वविद्यालयों और 32 हजार कालेजों में से केवल कुछ को ही राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रमाणन परिषद से प्रमाण पत्र मिला है। एक अन्य महत्वपूर्ण कदम में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की सरकार पर निर्भरता कम करने के लिए सभी पाठ्यक्रमों का शुल्क बढ़ाने की अनुमति दी गयी है तथा अवसंरचना विकास, वेतन, आदि में वृद्धि को देखते हुए यह उचित है। मानद विश्वविद्यालयों की तलना में सरकारी विश्वविद्यालय बहुत कम शुल्क लेते है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान की परिषद और भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की परिषद ने अगले तीन वषों तक प्रति वर्ष दस प्रतिशत शुल्क वृद्धि की अनुमति दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के अनुरूप उच्च शिक्षा में भी सुधार आना चाहिए किंतु दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो रहा है और इसके कारण सत्यनिष्ठा का अभाव, शिक्षकों के कौशल, शिक्षण विधि, अधितकर संस्थानों को पूर्ण स्वयात्तता, शिक्षा का राजनीतिकरण, शिक्षण संस्थानों में बढ़ती हिंसा, प्रयोगशाला सुविधाओं का अभाव, बुनियादी विज्ञान में अनुसंधान को प्रोत्साहन का अभाव आदि है। साथ ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक प्रकाशनों में भारत का योगदान केवल 3.5 प्रतिशत रहा है जबकि चीन का 21 प्रतिशत रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षण और अनुसंधान की गुणवत्ता के कारण अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने भारतीय विश्वविद्यालयों को अच्छी रैकिंग नहीं दी है। दु:खद तथ्य यह है कि भारत का कोई भी विश्वविद्यालय शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में नहीं है। आईआईटी भी 200 से 350 के बीच में है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पूणे विश्वविद्यालयों की रैंकिंग 800 से अधिक है। जबकि चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों के विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन अच्छा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईआईएम और एम्स तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थान हमारे देश के लिए प्रभावी मॉडल नहीं है। ये संस्थान केवल विज्ञान और इंजीनियंरिग पर ध्यान देते हैं और उनमें केवल 0.5 प्रतिशत छात्र जाते हंै। कुछ आईआईटी में गैर-इंजीनियरिंग संकाय भी शामिल कर दिए गए है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए आईआईटी की स्थापना एक स्वागत योग्य कदम है। विद्यमान आईआईटी की स्थिति में सुधार भी आवश्यक है। शिक्षा में अवसंचना सुधार और व्यय में वृद्धि की आवश्यकता है। भारत मेें प्रति व्यक्ति के हिसाब से शिक्षा में उच्च शिक्षा पर 2419 डालर खर्च होते हैं जबकि अमरीका में 10888 और चीन में 17851 डालर खर्च किए जाते हैं। साथ ही इन संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त किया जान चाहिए और उन्हें अधिक स्वयत्तता दी जानी चाहिए। विद्यमान शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है और इसमें प्रस्तावित संस्थान सहायक होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समाज के निम्न वर्ग के छात्रों को शिक्षा पूर्ण करने के बाद रोजगार की आवश्यकता होती है और इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत में प्रति वर्ष एक करोड से सवा करोड़ लोग रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। इसलिए रोजगार के अवसर सृजित होने चाहिए तथा इस संबंध मे स्टार्ट अप इंजन में गति लाई जानी चाहिए। हमारे स्टार्ट अप्स को जल, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और अवंसनचना जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए और इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा में बदलाव से सहायता मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली में आए संकट को दूर किया जाना चाहिए तथा इसके हर पहलू में बदलाव लाया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा के उच्च मानक स्थापित किए जाने चाहिए। छात्रों के लिए विभिन्न अवसर दिए जाने चाहिए। अनावश्यक विनियमों को समाप्त किया जाना चाहिए तथा इन संस्थानों में होनहार प्रतिभाआें को आकर्षित करने के लिए उन्हें अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>समाज के निम्न वर्ग के छात्रों को शिक्षा पूर्ण करने के बाद रोजगार की आवश्यकता होती है और इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत में प्रति वर्ष एक करोड से सवा करोड़ लोग रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। इसलिए रोजगार के अवसर सृजित होने चाहिए तथा इस संबंध मे स्टार्ट अप इंजन में गति लाई जानी चाहिए।</em></p>
<p style="text-align:justify;">
<em><strong>-डॉ. ओइशी मुखर्जी</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/need-more-funding-for-higher-education/article-2787</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/need-more-funding-for-higher-education/article-2787</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Aug 2017 04:12:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/education.jpg"                         length="14234"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रारम्भिक व उच्च शिक्षा नीतियों में सुधार की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश व हरियाणा में नकल की समस्या, बिहार में शिक्षा परीक्षा परिणामों में भ्रष्टाचार की बदौलत हेर-फेर, उस पर पिछली केन्द्र सरकार द्वारा आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की लागू की गई नीति ने देश में शिक्षा का बंटाधार कर रखा है। पिछले वर्ष भी बिहार में दसवीं, बाहरवीं के परिणामों में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/need-for-improvement-in-early-and-higher-education-policies/article-856"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश व हरियाणा में नकल की समस्या, बिहार में शिक्षा परीक्षा परिणामों में भ्रष्टाचार की बदौलत हेर-फेर, उस पर पिछली केन्द्र सरकार द्वारा आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की लागू की गई नीति ने देश में शिक्षा का बंटाधार कर रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले वर्ष भी बिहार में दसवीं, बाहरवीं के परिणामों में टॉप रहे विद्यार्थी मीडिया को अपने पूरे विषय तक नहीं बता सके थे। यहां तक कि लड़कियों में अव्वल रही रुबी ने पॉलिटीकल साइंस को खाना बनाने का विज्ञान बताया था। इस वर्ष 12वीं परीक्षा में अव्वल रहे विद्यार्थी गणेश, जिन्हें संगीत विषय में 70 में से 65 अंक दिए गए हैं, संगीत का क-ख भी नहीं बता पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां तक कि उसके खिलाफ परीक्षा में धोखाधड़ी का केस दर्ज हो गया और उनकी गिरफ्तारी हो गई। स्कूली शिक्षा के अतिरिक्त पत्राचार से हो रही उच्च शिक्षा भी सवालों के घेरे में है, यहां विद्यार्थियों को स्नातक परा- स्नातक की डिग्री दी जा रही है, जबकि उनका विषय ज्ञान सैकेंडरी स्तर तक भी नहीं होता। पत्राचार प्रणाली विश्वविद्यालयों के लिए कामधेनू गाय की तरह हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां न आधारभूत ढांचे की जरूरत है और ना ही विषयों के अध्यापकों की आवश्यकता है और प्रतिवर्ष करोड़ों रूपए फीस के इक्ट्ठे हो जाते हैं। प्रति वर्ष हजारों-लाखों विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट बना दिया जाता है। हालांकि पत्राचार शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ उन विद्यार्थियों को परिपूर्ण बनाना था, जो अपनी उम्र या नौकरी की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन अब अधिकतर विद्यार्थी इसी प्रणाली पर निर्भर हो गए हैं। शिक्षा क्षेत्र में निम्न स्तर की शिक्षा नीतियां एवं कार्यशैली ने भारत की एक पूरी पीढ़ी को बेवकूफ बना दिया है, जिनके पास प्रमाणपत्र तो ऊंची से ऊंची शिक्षा के हैं, लेकिन ज्ञान के नाम पर उनके दिमाग खाली ही हैं। केन्द्रीय व राज्य स्तर पर शिक्षा के गिर रहे स्तर को सुधारने में शीघ्र ही प्रभावी निर्णय लागू करने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वप्रथम आठवीं तक फेल न करने की नीति को तत्काल हटाया जाए, इससे शिक्षकों पर जहां पढ़ाने का उत्तरदायित्व होगा, वहीं विद्यार्थी भी ढंग से पढ़ेंगे। नकल व परीक्षा परिणामों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जानी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्राचार शिक्षा हालांकि उपयोगी है, लेकिन इसमें प्रवेश, शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली में सुधार करने होंगे, ताकि पत्राचार माध्यम से की जा रही शिक्षा भी अच्छे नागरिक व पेशेवर तैयार कर सके। देश की समस्त शिक्षा नीति एक समान हो एवं दुनिया के विकसित राष्ट्रों की प्रतिस्पर्धा कर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/need-for-improvement-in-early-and-higher-education-policies/article-856</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/need-for-improvement-in-early-and-higher-education-policies/article-856</guid>
                <pubDate>Sat, 03 Jun 2017 22:04:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-06/copy.jpg"                         length="56802"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        