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                <title>School Psychologist - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>तनावपूर्ण जीवन में बढ़ी स्कूल साइकोलॉजिस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ /करियर डेस्क । आज के तनावपूर्ण जीवन में सिर्फ बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे भी कई तरह की परेशानियों जैसे माता-पिता व अन्य लोगों से रिश्ते, एग्जाम प्रेशर से दो-चार होते हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वह अपनी परेशानी किसी से शेयर नहीं करते और कई बार तो अपनी परेशानियों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/school-psychologist-increased-in-stressful-life/article-19746"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/school-psychologist-increased-in-stressful-life.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ /करियर डेस्क</strong> । आज के तनावपूर्ण जीवन में सिर्फ बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे भी कई तरह की परेशानियों जैसे माता-पिता व अन्य लोगों से रिश्ते, एग्जाम प्रेशर से दो-चार होते हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वह अपनी परेशानी किसी से शेयर नहीं करते और कई बार तो अपनी परेशानियों को मन में ही रखने के कारण वह अवसादग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में उनकी परेशानियों को समझकर उन्हें अंधेरे से निकालकर उजाले में लाने का काम करते हैं चाइल्ड काउंसलर।</p>
<p style="text-align:justify;">यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां पर व्यक्ति को दूसरों की सहायता करके एक अजीब सी संतुष्टि का अनुभव होता है। कुछ स्कूलों में भी मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता की नियमित व्यवस्था की जाती है। यह व्यवस्था विद्यार्थियों और अध्यापकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है। मनोविज्ञान अपनी पूर्णता में एक ऐसा क्षेत्र है, जहां करियर से जुड़े अनेक विकल्प हैं। स्कूल साइकोलॉजी इसकी महत्वपूर्ण शाखाओं में एक है। स्कूलों में बढ़ते अपराधों को देखते हुए अब स्कूल साइकोलॉजिस्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल साइकोलॉजिस्ट किसी भी स्कूल की टीम के मुख्य सदस्य होते हैं, जो शैक्षिक मनोविज्ञान, बाल मनोविज्ञान, नैदानिक मनोविज्ञान और सामुदायिक मनोविज्ञान के सिद्धांतों का पालन कर छात्रों में सीखने की क्षमता और अध्यापकों में सिखाने की क्षमता का विकास करते हैं। स्कूल मनोवैज्ञानिक बच्चों के भावनात्मक, व्यवहारिक और शैक्षिक जरूरतों का अध्ययन कर उनकी समस्याओं का हल करने का हरसंभव प्रयास करते हैं। अगर आपकी रुचि बच्चों के मनोभाव को जानने और उनके डिप्रेशन को दूर करने की दिशा में है तो आप स्कूल साइकोलॉजिस्ट का करियर चुन सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ये हैं स्कूल साइकोलॉजिस्ट के कार्य</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">स्कूल मनोवैज्ञानिक बच्चों के विकास की विशेषताओं को समझने में शिक्षक की सहायता करता है। प्रत्येक छात्र विकास की कुछ निश्चित अवस्थाओं से गुजरता है जैसे बाल्यावस्था, किशोरावस्था और प्रौढ़ावस्था। विकास की दृष्टि से इन अवस्थाओं की विशिष्ट विशेषताएं होती हैं। यदि शिक्षक इन विभिन्न अवस्थाओं की विशेषताओं से परिचित होता है तो वह अपने छात्रों को भली प्रकार समझ सकता है और छात्रों को उसी प्रकार निर्देशन देकर उनको लक्ष्य प्राप्ति में सहायता कर सकता है। इस बारे में पूर्ण जानकारी भी स्कूल साइकोलॉजिस्ट ही टीचर को देता है। बच्चों के नेचर को जानने की कोशिश करना और शिक्षा की प्रकृति एवं उद्देश्यों को समझने में सहायता प्रदान करवाना स्कूल मनोवैज्ञानिक का कार्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही बच्चों की वृद्धि और विकास के बारे में शिक्षकों को ज्ञान देता है। स्कूल मनोवैज्ञानिक कुछ खास बच्चों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी शिक्षक को देता है, जिससे शिक्षक उन बच्चों को अपनी क्लास में पहचान सकें और उनकी आवश्यकतानुसार मद्द कर सकें। उनके लिए विशेष कक्षाओं का आयोजन कर सकें और फिर उन्हें परामर्श दे सकें। मानसिक रूप से स्वस्थ बच्चों के लक्षणों को पहचानना और ऐसा प्रयास करना कि उनकी इस स्वस्थता को बनाए रखा जा सके, यह कार्य भी स्कूल साइकोलॉजिस्ट का ही होता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कहां काम करते हैं स्कूल साइकोलॉजिस्ट</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पब्लिक और प्राइवेट स्कूल</li>
<li style="text-align:justify;">यूनिवर्सिटीज</li>
<li style="text-align:justify;">स्कूल आधारित स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र</li>
<li style="text-align:justify;">कम्यूनिटी आधारित डे ट्रीटमेंट या आवासीय क्लीनिक और अस्पताल</li>
<li style="text-align:justify;">बाल न्याय केंद्र</li>
<li style="text-align:justify;">प्राइवेट प्रैक्टिस</li>
</ul>
<h4><strong>ये है शैक्षणिक योग्यता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए 12वीं के बाद साइकोलॉजी में बैचलर डिग्री कर सकते हैं। साइकोलॉजी में ग्रेज्यूऐशन करने के बाद आप साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री या पीजी डिप्लोमा इन गाइंडेस व काउंसिलिंग कर सकते है। आम तौर पर इसमें बैचलर ऑफ़ आर्ट्स यानी बीए की डिग्री दी जाती है लेकिन अगर आपने साइंस से इंटर पास किया है तो साइकोलॉजी में बीएससी ऑनर्स भी कर सकते हैं। फिर पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद पीएचडी या एमफिल किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पर्सनल स्किल</strong></h4>
<ol>
<li style="text-align:justify;">बेहतर कम्युनिकेशन स्किल</li>
<li style="text-align:justify;">धैर्य और सहजता</li>
<li style="text-align:justify;">सभी उम्र के लोगों के साथ काम करने की कला</li>
<li style="text-align:justify;">आत्मविश्वास</li>
<li style="text-align:justify;">क्लाइंट को संतुष्ट करने की योग्यता</li>
<li style="text-align:justify;">लोगों की मदद करने का पैशन</li>
<li style="text-align:justify;">काम के प्रति लगाव</li>
<li style="text-align:justify;">संवेदनशीलता</li>
<li style="text-align:justify;">सहानुभूति की भावना</li>
</ol>
<h4><strong>फ्रेशर्स के लिए काम के हैं ये करियर टिप्स</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">अधिकतर कंपनियां ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहती हैं जो टीम में बेहद अच्छी तरह काम करना जानते हों। ऐसे में अगर आप फ्रेशर हैं और अपने कॅरियर को तेजी से आगे बढ़ाना चाहते हैं तो आपको टीम में काम करना आना चाहिए। शिक्षा पूरी करने के बाद जब छात्र अपनी प्रोफेशनल लाइफ में कदम रखते हैं तो उनकी जिन्दगी काफी बदल जाती है। कॉलेज की मौज-मस्ती के बाद उन्हें अपने कॅरियर को लेकर काफी सजग होना पड़ता है, ताकि वह अपना बेहतर भविष्य बना सके। कॅरियर में ग्रोथ के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप बार-बार अपनी जॉब या कंपनी बदलें, बल्कि आपकी पहली जॉब ही आपको नई ऊचांइयों पर ले जा सकती है, बस जरूरत है कि आप कुछ बातों का खास ध्यान दें। तो चलिये आज सच कहूँ करियर डेस्क आपको इस लेख के माध्यम से फ्रेशर्स के लिए कुछ बेहतरीन टिप्स से अवगत करवाएगा।</p>
<h4><strong>टीम में काम करना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कॅरियर एक्सपर्ट बताते हैं कि अधिकतर कंपनियां ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहती हैं जो टीम में बेहद अच्छी तरह काम करना जानते हों। ऐसे में अगर आप फ्रेशर हैं और अपने करियर को तेजी से आगे बढ़ाना चाहते हैं तो आपको टीम में काम करना आना चाहिए। आपको ऑफिस में कई पर्सनैलिटीज के लोग मिलेंगे, जिनके साथ आपको सहज रूप से काम करना चाहिए। साथ ही किसी भी जिम्मेदारी को उठाना आना चाहिए।</p>
<h4><strong>दबाव में काम करना</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह एक ऐसा स्किल है, जो फ्रेशर्स के अंदर कम ही देखने में मिलता है। हालांकि कॅरियर एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर आप प्रेशर के बीच बेहतर तरीके से परफॉर्म कर सकते हैं तो यकीनन अपने कॅरियर में तेजी से ग्रोथ कर सकते हैं। अत्यधिक काम के दबाव में खुद को शांत रखते हुए सही तरीके से काम करने की कला किसी भी कंपनी में उच्चाधिकारियों को इंप्रेस कर सकती हैं।</p>
<h4><strong>बेहतर कम्युनिकेशन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">यह एक ऐसा कॅरियर टिप्स है, जो सिर्फ फ्रेशर्स के लिए ही नहीं, बल्कि हर युवा के लिए जरूरी है। आप अपने काम में चाहें कितना भी माहिर हों, लेकिन अगर आपके कम्युनिकेशन स्किल बेहतर नहीं है तो आप उसे सबके साथ पेश नहीं कर सकते, जिससे आपको अपने कॅरियर में ग्रोथ नहीं मिलती। इसलिए अपने वर्क स्किल्स के साथ-साथ आपको मौखिक व लिखित कम्युनिकेशन स्किल्स को शॉर्प करने पर भी फोकस करना चाहिए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Nov 2020 17:57:53 +0530</pubDate>
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