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                <title>Lung Cancer - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>क्या फेफड़ों का कैंसर वायु प्रदूषण से भी हो सकता है? जानें, विशेषज्ञों की जुबानी</title>
                                    <description><![CDATA[वायु प्रदूषण से फेंफड़ों के कैंसर के मामलों में तेजी वृद्धि नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। देश में ‘ध्रूमपान नहीं करने वाले लोगों’ में ‘तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों’ की तुलना में वायु प्रदूषण के कारण फेंफड़ों (लंग्स) के कैंसर की मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है और इनमें 30 प्रतिशत महिलायें […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/can-lung-cancer-also-be-caused-by-air-pollution/article-40079"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/lung-cancer.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण से फेंफड़ों के कैंसर के मामलों में तेजी वृद्धि</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश में ‘ध्रूमपान नहीं करने वाले लोगों’ में ‘तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों’ की तुलना में वायु प्रदूषण के कारण फेंफड़ों (लंग्स) के कैंसर की मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है और इनमें 30 प्रतिशत महिलायें हैं। निजी क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवा प्रदाता मेदांता के अध्ययन के अनुसार देश में पुरुषों और महिलाओं दोनों में फेफड़ों के कैंसर में वृद्धि हो रही है। पुरुषों में प्रसार और मृत्युदर के मामले में यह पहले से ही प्रथम स्थान पर कैंसर है, जबकि महिलाओं में यह पिछले आठ सालों में सातवें स्थान से उछलकर तीसरे स्थान पर पहुँच गया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="हरियाणा में शराब पीने से 4 लोगों की मौत" href="http://10.0.0.122:1245/4-people-died-due-to-drinking-alcohol-in-haryana/">हरियाणा में शराब पीने से 4 लोगों की मौत</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं आंकड़े</h3>
<p style="text-align:justify;">अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 50 प्रतिशत मरीज धूम्रपान नहीं करते थे। इनमें 70 प्रतिशत मरीज 50 साल से कम उम्र के थे और 30 साल से कम उम्र के 100 प्रतिशत मरीज धूम्रपान नहीं करते थे। फेफड़ों के कैंसर के मामले महिलाओं में बढ़ते हुए पाए गए, जो मरीजों के कुल संख्या के 30 प्रतिशत थीं और ये सभी धूम्रपान नहीं करती थीं।अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 20 प्रतिशत मरीजों की उम्र 50 साल से कम पाई गई है। भारतीयों में फेफड़ों का कैंसर पश्चिमी देशों के मुकाबले लगभग एक दशक पहले विकसित हो गया। लगभग 10 प्रतिशत मरीज 40 साल से कम उम्र के थे, जिनमें 2.6 प्रतिशत की उम्र 20 वर्ष के आस-पास है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ रही है</h3>
<p style="text-align:justify;">मेदांता में इंस्टीट्यूट आॅफ चेस्ट सर्जरी, चेस्ट ऑन्को सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने और उनके दल ने एक दशक में इलाज कराने वाले 300 से ज्यादा फेफड़ों के कैंसर वाले मरीजों का विश्लेषण साझा किया और इसे मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में जारी किया। डा कुमार ने कहा कि लगभग 30 प्रतिशत मामलों में मरीज की स्थिति को प्रारंभ में भ्रमित होकर ट्यूबरकुलोसिस – टीबी मान लिया गया और महीनों तक उसका इलाज किया गया, जिससे सही निदान और इलाज में विलंब हो गया। इस अध्ययन में 304 मरीजों का विश्लेषण किया गया। क्लिनिक में पहुँचने पर उम्र, लिंग, धूम्रपान की स्थिति, निदान के समय बीमारी के चरण और फेफड़ों के कैंसर का प्रकार दर्ज किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. कुमार ने कहा कि अध्ययन में सामने आया कि आगामी दशक में महिलाओं में धूम्रपान नहीं करने वाले कम उम्र के फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना है। देश में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ रही है। वायु प्रदूषण के कारण शरीर के भीतर वहीं खतरनाक कण पहुंचते है जो ध्रूमपान करने के दौरान आते हैं। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में फेफड़ों का कैंसर एक महामारी के रूप में दिखाई दे रहा है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Nov 2022 16:15:48 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने बढ़ाया फेफड़े के कैंसर का खतरा: आरजीसीआइआरसी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) का कहना है कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ा दिया है। नवंबर को फेफड़े के कैंसर के लिए जागरूकता माह के तौर पर भी मनाया जाता है। इस मौके पर आरजीसीआईआरसी में थोरेसिक सर्जिकल ओंकोलॉजी के प्रमुख एवं सीनियर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/rising-levels-of-pollution-increase-lung-cancer-ri-rgcirc/article-19783"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/rising-levels-of-pollution-increase-lung-cancer-risk-rgcirc.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) का कहना है कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ा दिया है। नवंबर को फेफड़े के कैंसर के लिए जागरूकता माह के तौर पर भी मनाया जाता है। इस मौके पर आरजीसीआईआरसी में थोरेसिक सर्जिकल ओंकोलॉजी के प्रमुख एवं सीनियर कंसल्टेंट डॉ. एलएम डारलॉन्ग ने कहा, ‘प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ा दिया है और अब यह केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रह गई है। यहां तक कि युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से ज्यादातर मरीजों का पता एडवांस स्टेज में चलता है। यही कारण है कि भारत में कैंसर के कारण होने वाली मौतों में फेफड़े के कैंसर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। इससे जान गंवाने वालों की संख्या स्तन, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर से जान गंवाने वालों की कुल संख्या से भी ज्यादा है।जल्दी जांच की जरूरत पर डॉ. डारलॉन्ग ने कहा, ‘फेफड़े के कैंसर की समय पर जांच बहुत जरूरी है। जल्दी जांच से मरीज की जान बचाना संभव हो सकता है। खांसी की समस्या अगर 3-4 हफ्ते तक ठीक नहीं हो तो जांच करा लेनी चाहिए।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि शुरूआती स्टेज में फेफड़े के कैंसर के लक्षणों को आमतौर पर टीबी (क्षयरोग) का लक्षण मान लिया जाता है। इस कारण से गलत इलाज में बहुत वक्त बर्बाद हो जाता है और मरीज का कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है। खासकर धूम्रपान करने वाले लोगों को जांच जरूर करा लेनी चाहिए, क्योंकि उन्हें खतरा ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से फेफड़े के कैंसर के मात्र 10 प्रतिशत मरीज ही जल्दी इलाज के लिए आ पाते हैं। वहीं 60 से 70 प्रतिशत मरीजों को इलाज मिलने में देरी हो जाती है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस के मौके पर संस्थान के मेडिकल ओंकोलॉजी के निदेशक डॉ़ विनीत तलवार ने कहा किह कैंसर की जल्दी जांच हो जाने से इलाज आसान हो जाता है और मरीज के बचने की संभावना भी बहुत ज्यादा रहती है। पर्यावरण प्रदूषण और खराब लाइफस्टाइल कुछ ऐसे कारण हैं, जिनके चलते देश में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पर्यावरण को संरक्षित करते हुए और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से कैंसर से बचाव किया जा सकता है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि धूम्रपान, वायु प्रदूषण, डीजल का धुआं फेफड़े के कैंसर के प्रमुख कारण हैं। कैंसर की जल्दी जांच पर जोर देते हुए डॉ. तलवार ने कहा, ‘अगर आप किसी भी परेशानी का 3-4 हफ्ते से इलाज करा रहे हैं और स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो तत्काल जांच करानी चाहिए। गले में खराश हो, बुखार हो, कहीं गांठ बन रही हो, रक्तस्राव होने लगे या पेट में कोई समस्या लग रही हो, जिसका इलाज नहीं हो पा रहा हो, तो पर्याप्त जांच बहुत जरूरी है। अगर हम शुरूआती स्टेज में कैंसर का पता लगा लेते हैं तो बचने की उम्मीद बहुत ज्यादा हो जाती है।</h6>
<p> </p>
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                <pubDate>Sun, 08 Nov 2020 15:25:54 +0530</pubDate>
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