<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/children/tag-185" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>children - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/185/rss</link>
                <description>children RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बच्चों की टीवी या मोबाइल देख कर खाना खाने की आदत को कैसे छुड़ाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जैसे आप हर रोज राम नाम की चर्चा सुनते हैं आज वो ही चर्चा करेंगे। लेकिन आज हमारे पास बहुत सारे बच्चे आए हुए हैं जो बात करना चाहते हैं। अपनी समस्या बताने चाहते हैं। उनकी बाते सुनेगे और उस परम पिता परमात्मा ने जैसा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/home-and-family/how-to-get-rid-of-the-habit-of-eating-food-by-watching-tv-or-mobile-of-children-ram-rahim/article-79527"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-12/baba-ram-rahim.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बरनावा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जैसे आप हर रोज राम नाम की चर्चा सुनते हैं आज वो ही चर्चा करेंगे। लेकिन आज हमारे पास बहुत सारे बच्चे आए हुए हैं जो बात करना चाहते हैं। अपनी समस्या बताने चाहते हैं। उनकी बाते सुनेगे और उस परम पिता परमात्मा ने जैसा ख्याल दिया आपकी सेवा में अर्ज करेंगे।<br />
<strong>सवाल:</strong> पेरेंटस के विचार अलग-अलग होते हैं पापा कहते हैं लेट उठना चाहिए, मां कहती है जल्दी उठना चाहिए। मेरे को दोनो ही गलत लगते हैं पिता जी इस पर बताओ।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जवाब:</strong> पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इस पर हम ये ही कहना चाहते हैं कि 6 घंटे आप नींद पूरी कर लो और हो सके तो जल्दी पढ़ने वाले बच्चे को जल्दी सोना चाहिए। 6 से 8 घंटे काफी है आप नींद ले ले और उसके बाद उठना चाहिए। बाकी बहुत लेट सोते हैं वो लेट उठते हैं और जल्दी सोते हैं जल्दी जाग जाते हैं। कम से कम 6-8 घंटे नींद लेना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सवाल:</strong> गुरु जी मैं इटली से हूं। हम बच्चे को लेकर एक problem फेस कर रहे हैं। बच्चा जब स्कूल से आता है या छूट्टी वाले दिन इसको जब खाने के लिए बुलाते हैं तो यह किचन में नहीं आता। इसको बैड या सोफे पर ही खाना चाहिए और लेट के खाता है उसको ये पता नहीं चलता कि मैं कितना खा गया। इसके बारे में गुुरु जी बताओ।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जवाब:</strong> पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अगर बच्चा लेट के ही खाता है और आप सोचते हैं कि उसको टीवी देखते हुए या टैब देखते हुए खाता है तो ये आपने शुरूआत से ही इस आदत को रोकना चाहिए था ये जरूरी है कि आप इस आदत को रोक देते क्योंकि जब बच्चा बड़ा होता है तो अभी भी आप ये कोशिश करे ये आदत हटाए। क्योंकि वो खाता है तो उसका टेस्ट का पता चलता है। ना ही वो उस तरह बॉडी में स्वाद की तरह जाता है। तो काफी परेशानी भी आ सकती है सेहत की वजह से तो कोशिश करें प्यार से, मोहब्बत से एक साथ बैठा के उस टाइम आप इसका टीवी बंद करवाके ही खाना खिलवाये।</p>
<h3>आइयें सुनते हैं पूज्य गुरु जी के वचन</h3>
<p><iframe title="How to Overcome the Generation Gap Between Parents and Children? Parenting Tips by Saint Dr. MSG" width="500" height="281" src="https://www.youtube.com/embed/HH67wjeyDwE?feature=oembed" frameborder="0" allowfullscreen=""></iframe></p>
<p> </p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>घर परिवार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/how-to-get-rid-of-the-habit-of-eating-food-by-watching-tv-or-mobile-of-children-ram-rahim/article-79527</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/home-and-family/how-to-get-rid-of-the-habit-of-eating-food-by-watching-tv-or-mobile-of-children-ram-rahim/article-79527</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:07:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2025-12/baba-ram-rahim.jpg"                         length="44008"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Human Trafficking : मानव तस्करी के जाल में मासूम</title>
                                    <description><![CDATA[– Human Trafficking – हाल ही में सीमांचल एक्सप्रेस (12487) से 93 बच्चों को मानव तस्करी (Human Trafficking) के लिए राजस्थान और उत्तराखंड ले जाया जा रहा था। शुक्र है कि सभी बच्चों को प्रयागराज जंक्शन पर मानव तस्करों के चंगुल से सुरक्षित बचा लिया गया। इस मामले में नौ एजेंटों ने सीमांचल एक्सप्रेस के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/human-trafficking/article-57519"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/human-trafficking-1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Human Trafficking –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में सीमांचल एक्सप्रेस (12487) से 93 बच्चों को मानव तस्करी (Human Trafficking) के लिए राजस्थान और उत्तराखंड ले जाया जा रहा था। शुक्र है कि सभी बच्चों को प्रयागराज जंक्शन पर मानव तस्करों के चंगुल से सुरक्षित बचा लिया गया। इस मामले में नौ एजेंटों ने सीमांचल एक्सप्रेस के विभिन्न डिब्बों में छह समूहों में बाल तस्करी को अंजाम दिया, जो अपराध की परिष्कृत और संगठित प्रकृति को रेखांकित करता है। यह स्पष्ट है कि मानव तस्कर किस प्रकार बेखौफ होकर काम करते हैं, खुलेआम कानूनों का उल्लंघन करते हैं और हाशिए पर मौजूद लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे अनगिनत उदाहरणों के बारे में सोचना चिंताजनक है जब ऐसे मामलों का पता ही नहीं चल पाता और निर्दोष जिंदगियां शोषण और दुर्व्यवहार के चक्र में फंस जाती हैं। हालांकि, मानव तस्करी (Human Trafficking) अंतरराष्ट्रीय अपराध के सबसे तेजी से बढ़ते रूपों में से एक है। विश्व स्तर पर अनुमानित 25 मिलियन वयस्क और बच्चे आधुनिक दासता या मानव तस्करी के अधीन हैं। भारत में 2021 तक मानव तस्करी के करीब 7 हजार मामले सामने आ चुके हैं। मौजूदा मामले में बच्चों की उम्र सीमा 9 से 16 साल के बीच है। जीवन के जिस प्रारंभिक चरण में बच्चों का पालन-पोषण किया जाना चाहिए, उन्हें शिक्षित किया जाना चाहिए और आगे बढ़ने के अवसर दिए जाने चाहिए। इसके बजाय वे तस्करी की अंधेरी खाई में अपने अधिकारों, गरिमा और स्वतंत्रता से वंचित हो जाते हैं। मानव तस्करी सिर्फ एक अपराध नहीं है, यह बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह व्यक्तियों से उनकी स्वायत्तता, गरिमा और स्वतंत्रता छीन लेता है, उन्हें जबरन श्रम और यौन शोषण से लेकर अंग तस्करी और जबरन विवाह तक अकथनीय भयावहता का शिकार बनाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानव तस्करी से निपटने के प्रयास बहुआयामी और सहयोगात्मक होने चाहिए। कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और समुदायों को तस्करी नेटवर्क को खत्म करने, अपराधियों पर मुकदमा चलाने और बचे लोगों को व्यापक सहायता प्रदान करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। इस जटिल मुद्दे को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए रोकथाम, सुरक्षा और अभियोजन साथ-साथ चलना चाहिए। निवारक उपायों को गरीबी, शिक्षा की कमी और सामाजिक असमानता जैसे असुरक्षा के मूल कारणों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जोखिम वाले व्यक्तियों को शिक्षा, आर्थिक अवसर और सामाजिक सहायता नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करने से शोषण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त समुदायों के भीतर जागरूकता बढ़ाने और सतर्कता को बढ़ावा देने से व्यक्तियों को तस्करी के मामलों को पहचानने और रिपोर्ट करने के लिए सशक्त बनाया जा सकता है। लिहाजा हम सभी को इस आधुनिक गुलामी को खत्म करने के अपने संकल्प में एकजुट होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर बच्चे को उनकी परिस्थितियों के बावजूद सम्मान और स्वतंत्रता का जीवन जीने का अवसर मिले।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/human-trafficking/article-57519</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/human-trafficking/article-57519</guid>
                <pubDate>Wed, 15 May 2024 10:17:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-05/human-trafficking-1.jpg"                         length="11616"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NGO Junoon : शिक्षा की रोशनी फैलाकर जिंदगी बदलने का &amp;#8216;जुनून&amp;#8217;</title>
                                    <description><![CDATA[देवेन्द्रराज सुथार। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-ए में कहा गया है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। हालांकि भारत की साक्षरता दर लगभग 74 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि एक चौथाई आबादी बुनियादी पढ़ने और लिखने के कौशल से वंचित है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/ngo-junoon-hemanti-sen/article-55829"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/hemanti-sen.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>देवेन्द्रराज सुथार।</strong> भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-ए में कहा गया है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। हालांकि भारत की साक्षरता दर लगभग 74 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि एक चौथाई आबादी बुनियादी पढ़ने और लिखने के कौशल से वंचित है। भारत की गरीबी और अशिक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी होने के बावजूद भारत एक तिहाई गरीबी का घर है। इस निराशाजनक स्थिति से लड़ने के लिए देश के नेताओं ने कुल सरकारी खर्च का लगभग 10.5 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया है। लेकिन लोगों को उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी ही नहीं है। 22 साल की हेमंती सेन (Hemanti Sen) को इस समस्या का एहसास तब हुआ जब एक दिन उन्होंने मुंबई के फुटपाथों पर छोटे-छोटे बच्चों को पैसे मांगते और पेन और गुब्बारे बेचते हुए देखा।</div>
<div style="text-align:justify;">हालात के बारे में जानने की उनकी जिज्ञासा ने उनके प्रयासों को ‘जुनून’ में बदल दिया। हेमंती शुरूआत में ‘जुनून’ में 20 बच्चों का नामांकन कराने में सफल रही। शुरूआती दौर में उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण काम इन बच्चों के माता-पिता को समझाना था। बच्चों के स्कूल जाने के कारण उनसे होने वाली आय खत्म हो गई, जिसके कारण उनके परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं थे। काफी प्रयास के बाद हेमंती बच्चों के परिजनों का विश्वास जीतने में सफल रही। अब बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य हेमंती (Hemanti Sen) के एनजीओ ‘जुनून’ में देखते हैं। हेमंती अब उन बच्चों को अच्छे से समझती हैं और यही उनकी सफलता का राज है। ‘जुनून’ उन बच्चों में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाकर उन्हें शिक्षित करता है जो सरकारी स्कूल होने के बावजूद स्कूल नहीं जाते। लेकिन ये काम उतना आसान नहीं है जितना लगता है।</div>
<div style="text-align:justify;">नगर पालिका स्कूल इन बच्चों को अपने स्कूलों में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। क्योंकि ये बच्चे हर दिन स्कूल नहीं जाते हैं, वे केवल स्कूल से मिलने वाली मुफ्त चीजें लेने आते हैं और दूसरों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। और अगर 8 साल के बच्चे को अक्षर ज्ञान भी न हो, तो भी स्कूल उन्हें दाखिला देने के लिए तैयार नहीं होते। इसलिए हेमंती उन्हें स्कूल के लिए तैयार करने के लिए प्राथमिक शिक्षा और अच्छे शिष्टाचार सिखाती हैं। उन्होंने रेलवे स्टेशनों के स्काईवॉक पर इन छात्रों के लिए ट्यूशन लेना शुरू कर दिया, जहां ये बच्चे भीख मांगते थे या कुछ नौकरियां करते थे। टीम ‘जुनून’ उन्हें रोज स्कूल छोड़ने और स्कूल से वापस लाने के लिए तैयार करती है और सावधानी बरतती है, ताकि बच्चे किसी भी कारण से स्कूल से न चूकें। ‘जुनून’ के चार केंद्रों में 80 छात्र हैं, जिन्हें हेमंती और कई स्वयंसेवक चलाते हैं। इसके अलावा ‘जुनून’ बच्चों को दोपहर का भोजन भी उपलब्ध कराता है।</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/ngo-junoon-hemanti-sen/article-55829</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/ngo-junoon-hemanti-sen/article-55829</guid>
                <pubDate>Sun, 31 Mar 2024 10:35:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2024-03/hemanti-sen.jpg"                         length="44971"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Amazon Forest: जाको राखे साइयां मार सके ना कोई! दुनिया के सबसे बड़े जंगल में 40 दिन बच्चे कैसे रहे जिंदा</title>
                                    <description><![CDATA[बोगोटा: 4 Children Survived 40 Days in Amazon Forest:कोलम्बियाई अमेजन में 40 दिनों तक गुम रहे 4 स्वदेशी बच्चे उन बीजों, जड़ों और पौधों को खाने से जिंदा रहे। जिन्हें वे जानते थे कि इनको खाया जा सकता है। और इसके साथ ही कोलंबियाई सैनिकों के साथ खोज में शामिल स्थानीय लोगों ने बड़ी भूमिका […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/amazon-forest/article-48727"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/amazon-forest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बोगोटा:</strong> 4 Children Survived 40 Days in Amazon Forest:कोलम्बियाई अमेजन में 40 दिनों तक गुम रहे 4 स्वदेशी बच्चे उन बीजों, जड़ों और पौधों को खाने से जिंदा रहे। जिन्हें वे जानते थे कि इनको खाया जा सकता है। और इसके साथ ही कोलंबियाई सैनिकों के साथ खोज में शामिल स्थानीय लोगों ने बड़ी भूमिका निभाई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोलम्बिया के देशज लोगों के राष्टÑीय संगठन ने कहा कि “बच्चों को जीवित रहना प्राकृतिक पर्यावरण के साथ ज्ञान और संबंध का संकेत है, जिसे मां के गर्भ में शुरू करना सिखाया जाता है।” Amazon Forest</p>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि 4 भाई बहन एक मई को एक छोटे विमान दुर्घटना में बाल-बाल बच गए थे। जिसने पायलट, उनकी मां और एक तीसरे शख्स की जान चली गई थी। बच्चों के परिजनों को उम्मीद थी कि जंगलों से परिचत बच्चे जिंदा रहेंगे और इनका भरोसा ही आज बच्चे जिंदा बच गए है। ये बच्चे युक्का आटा खाने से जिंदा बचे जो कि क्रैश हुए प्लेन में था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बच्चों में ‘आध्यात्मिक शक्ति’ भरी हुई थी | Amazon Forest</h3>
<p style="text-align:justify;">तलाशी अभियान में हिस्सा लेने वाले अकोस्टा ने कहा कि बच्चों में ‘आध्यात्मिक शक्ति’ भरी हुई थी। स्वदेशी नेताओं के बीच यह एक साझा धारणा है, और एकोस्टा ने कहा कि एक अभिभावक को सैन्य अस्पताल के बाहर तैनात किया जाना था, जहां डॉक्टर “आध्यात्मिक रूप से” बच्चों की मदद करने के लिए बच्चों की देखभाल कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">ओएनआईसी के एक अन्य नेता जेवियर बेटनकोर्ट ने एएफपी को बताया, “प्रकृति से हमारा विशेष संबंध है।” “दुनिया को प्रकृति के साथ इस तरह के विशेष संबंध की जरूरत है, जो उन स्वदेशी लोगों की तरह हैं जो जंगल में रहते हैं और इसकी देखभाल करते हैं।” खोज के दौरान, सैनिकों ने 20 दिनों तक स्वदेशी ट्रैकर्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।</p>
<h3 style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ने की प्रशंसा | Amazon Forest</h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने प्रशंसा की जिसे उन्होंने “स्वदेशी और सैन्य ज्ञान की बैठक” कहा, जो उन्होंने कहा कि जंगल के प्रति सम्मान दशार्ता है। सेना के हेलीकॉप्टरों ने बच्चों की दादी की रिकॉर्डिंग प्रसारित की, जिसमें उन्हें स्वदेशी हुइतोटो भाषा में बचाव दल के पहुंचने तक एक स्थान पर रहने के लिए कहा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अकोस्टा ने स्थानीय मीडिया से सैनिकों और स्वदेशी विशेषज्ञों का जिक्र करते हुए कहा, “यह राष्ट्रपति पेट्रो थे जो हमें एक साथ लाए थे।” उन्होंने कहा, “खोज शुरू होने से आठ दिन पहले एक प्रारंभिक बैठक में, राष्ट्रपति ने हमसे कहा कि हमें सेना के साथ जाने की जरूरत है क्योंकि सेना इसे अकेले नहीं कर सकती।”</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/international/amazon-forest/article-48727</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/international/amazon-forest/article-48727</guid>
                <pubDate>Sun, 11 Jun 2023 17:09:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2023-06/amazon-forest.jpg"                         length="51226"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>130 बिछड़े बच्चों को उनके परिवार से मिलाया</title>
                                    <description><![CDATA[सौंपकर उत्तरदायित्व निभाया कोटा (सच कहूँ न्यूज)। पश्चिमी-मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने अपने घर से भागे या अपने परिवारजनों से बिछड़े 130 बच्चों को उनके परिवारजनों या अधिकृत सरकारी एजेंसी के हवाले कर अपने दायित्व का निर्वहन किया। पश्चिमी-मध्य रेलवे के कोटा मंडल के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रेल सुरक्षा बल कर्मियों ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/130-missing-children-reunited-to-their-families/article-41482"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/missing-woman-meet-with-family.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>सौंपकर उत्तरदायित्व निभाया</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>कोटा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पश्चिमी-मध्य रेलवे के कोटा मंडल ने अपने घर से भागे या अपने परिवारजनों से बिछड़े 130 बच्चों को उनके परिवारजनों या अधिकृत सरकारी एजेंसी के हवाले कर अपने दायित्व का निर्वहन किया। पश्चिमी-मध्य रेलवे के कोटा मंडल के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रेल सुरक्षा बल कर्मियों ने अपनी ड्यूटी पूरी तत्परता और सतर्कता के साथ निभाते हुए ‘आॅपरेशन नन्हे फरिश्ते’ अभियान के तहत घर से भागे हुए,अपहृत हुए या बिछुड़े हुए बालक एवं बालिकाओं को सुरक्षित उनके परिजनों अथवा चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों ने बताया कि इन्ही जिम्मेदारियों का कुशलपूर्वक निर्वहन करते हुए इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अब तक रेल सुरक्षा बल द्वारा ‘आॅपरेशन नन्हें फरिश्ते’ के तहत घर से भागे हुये,अपहृत हुये, बिछड़े हुये 80 बालक एवं 50 बालिकाओं सहित कुल 130 बालक. बालिकाओं को सुरक्षित उनके परिजनों.चाइल्ड लाईन को सुपुर्द किया गया। सूत्रों ने बताया कि राष्ट्र और उसके नागरिकों की सेवा में कोटा मंडल के रेल सुरक्षा बल ने समपर्ण भावना के साथ कार्य करते हुये जरूरतमंद यात्रियों को सहायता प्रदान करने के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान भी रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों का दावा है कि मंडल के आरपीएफ जवान सतर्कता, सुरक्षा और सेवा के तिहरे उद्देश्य के साथ पूरे देश में चौबीस घंटे लगन से काम करते हैं, रेल सुरक्षा बल द्वारा शुरू किए गए। इन कार्यों को जनता से बहुत सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया भी मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/130-missing-children-reunited-to-their-families/article-41482</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/130-missing-children-reunited-to-their-families/article-41482</guid>
                <pubDate>Mon, 26 Dec 2022 16:52:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-12/missing-woman-meet-with-family.jpg"                         length="12966"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान : एक महिला ने दिया पांच बच्चों को जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[भरतपुर (सच कहूँ न्यूज)। राजस्थान के करौली में एक महिला की कोख से एक साथ जन्मे पांच बच्चो में से तीन बच्चो की मौत हो जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। करौली के भारत हॉस्पिटल में एक महिला ने तीन लड़यिां एवं दो लड़कों को एक साथ जन्म दिया था जिसे देखकर अस्पताल में प्रसव […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-a-woman-gave-birth-to-five-children/article-35929"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/woman-birth-five-children.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भरतपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजस्थान के करौली में एक महिला की कोख से एक साथ जन्मे पांच बच्चो में से तीन बच्चो की मौत हो जाने की जानकारी प्राप्त हुई है। करौली के भारत हॉस्पिटल में एक महिला ने तीन लड़यिां एवं दो लड़कों को एक साथ जन्म दिया था जिसे देखकर अस्पताल में प्रसव कराने वाले डाक्टर भी हैरत में पड़ गए। बिना आॅपरेशन के महिला का प्रसव कराने वाले डॉ बी एल मीना से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रसव के कुछ समय बाद इन नवजात बच्चों की तबियत बिगड़ी जिसके चलते बच्चों को राजकीय बच्चा वार्ड में भर्ती करा दिया गया। जच्चा को भारत हॉस्पिटल में भर्ती रखा लेकिन राजकीय बच्चा वार्ड में तीन बच्चों की उपचार के दौरान मौत हो गयी जबकि दो बच्चों को जयपुर जेके लॉन के लिये रैफर किया गया है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-a-woman-gave-birth-to-five-children/article-35929</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rajasthan-a-woman-gave-birth-to-five-children/article-35929</guid>
                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 12:42:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-07/woman-birth-five-children.jpg"                         length="44883"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों पर इंटरनेट के साइड इफेक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[मनोचिकित्सक (Psychiatrist) डॉ. सागर मूंदड़ा कहते हैं, बच्चों को आउटडोर ऐक्टिविटी में शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, माता-पिता को खुद बच्चों के सामने मोबाइल से दूरी बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि बच्चे आखिरकार माता-पिता से ही सीखते हैं। वर्तमान में इंटरनेट (Internet) हर किसी की जरूरत बन गई है। चाहे बड़े हो या बच्चे, किसी को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/internet-side-effects-on-children/article-28204"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/internet-addiction.gif" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><span style="color:#0000ff;"><strong>मनोचिकित्सक (Psychiatrist) डॉ. सागर मूंदड़ा कहते हैं, बच्चों को आउटडोर ऐक्टिविटी में शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, माता-पिता को खुद बच्चों के सामने मोबाइल से दूरी बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि बच्चे आखिरकार माता-पिता से ही सीखते हैं।</strong></span></h4>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में इंटरनेट (Internet) हर किसी की जरूरत बन गई है। चाहे बड़े हो या बच्चे, किसी को भी इंटरनेट से दूर रख पाना संभव नहीं है। स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों यहां तक कि घरों में भी इंटरनेट का प्रयोग आम हो गया है। सस्ते स्मार्टफोन के आने से इंटरनेट आज सबके लिए सर्वसुलभ हो गई है, लेकिन इंटरनेट का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है। युवाओं के साथ-साथ बच्चे (Children) इसका सदुपयोग कम, दुरूपयोग ज्यादा कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट की खास बात यह है कि यह सबके लिए खुला रहता है। इंटरनेट यूजर्स में टीनएजर्स की संख्या बड़े-बूढ़ों से कहीं ज्यादा है, लेकिन इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव (Side effects) बच्चों पर पड़ रहा है। अधिकांश बच्चे चैटिंग करते समय अश्लील और हिंसक दृश्य देख लेते हैं, जो उन पर अत्यंत बुरा प्रभाव डालता है। अक्सर बच्चे वही करने को तैयार रहते हैं, जिसे करने से मना किया जाता है। दूसरों के सामने उन्हें जो नहीं देखने दिया जाता है, उसे अकेले में देखकर वे अपने मन की संतुष्टि करते हैं और यहीं से शुरूआत होती है भटकाव की।</p>
<p style="text-align:justify;">इंटरनेट के अलावा बच्चे घर में भी टीवी, फिल्म द्वारा ऐसे अश्लील दृश्यों को देख लेते हैं, जो उनके बालमन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। भले ही ऐसे दृश्य, चैनलों की टीआरपी बढ़ाते हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य बिगाड़ने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते। इधर व्यस्त दिनचर्या में अभिभावक के पास इतना वक्त नहीं कि वह बच्चों की गतिविधि पर नजर रख सके। अक्सर टीवी पर चल रहे कुछ आपत्तिजनक (Offensive) दृश्यों को देखकर हर बच्चे के मन में यह सवाल उठता है कि यह क्या हो रहा है। कुछ बच्चे तो हिम्मत करके पेरेंट्स से पूछ ही लेते हैं कि ये क्या हो रहा है। बच्चों के ऐसे प्रश्न से माँ-बाप या तो चुप्पी साध लेते हैं या बच्चे की पिटाई करने लगते हैं। ऐसे में बच्चे की जिज्ञासा (Curiosity) शांत नहीं होती और वह ऐसी जगह तलाशना शुरू कर देता है, जहां उसके सवालों का जवाब मिल सके।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ऐसे बनेगी बात</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>किशोरावस्था में पहुंचे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि इस उम्र में अपने अंदर हो रहे शारीरिक बदलाव को लेकर वे परेशान होते हैं और पैरेंट्स उसे डांट दे तो वे उसका जवाब जानने के लिए गलत रास्ता चुनते हैं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जहां तक हो सके, बच्चों की जिज्ञासा शांत करें, उन्हें विज्ञान से जोड़ते हुए बातों को समझाएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यदि आपको संदेह है कि आपके बच्चे जोखिमपूर्ण आॅनलाइन व्यवहार कर रहे हैं तो उनके द्वारा देखे जा रहे साइटस की जानकारी एकत्र करें, उन्हें इस बारे में प्यार से समझाएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बच्चों को प्रोत्साहित करें कि यदि वे किसी प्रकार की जिज्ञासा शांत करना चाहते हैं तो आपको बताएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बच्चों को इंटरनेट की शिक्षा दें, उन्हें अजनबियों से चैट करने या आनलाइन मित्र बनाने के खतरे बताएं।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कम्प्यूटर को खुले स्थान पर रखें, जहां पर आप उनके द्वारा सर्च की जाने वाली साइटस पर नजर रख सके।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बच्चों के साथ ज्ञानवर्धक (Informative) नेट सर्च करें। बच्चों को उपयोगी साइटस की सूची बनाकर दें ताकि वे अपना समय इसमें लगाएं।</strong></li>
</ul>
<p><strong>-उमेश कुमार साहू</strong></p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
<div class="td-g-rec td-g-rec-id-content_bottom tdi_2_f6c td_block_template_1"></div>
<div class="td-g-rec td-g-rec-id-content_bottom tdi_2_0c6 td_block_template_1"></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/health/internet-side-effects-on-children/article-28204</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/health/internet-side-effects-on-children/article-28204</guid>
                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 15:34:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2021-11/internet-addiction.gif"                         length="197236"                         type="image/gif"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा में डूबने से दो बच्चों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा। राजस्थान के कोटा में एक खाली प्लॉट में बने गड्ढे में भरे बरसाती पानी में डूबने से दो बच्चों मौत हो गई। पुलिस ने बुधवार को बताया कि आरकेपुरम थाना क्षेत्र के टैगोर नगर निवासी श्रमिक कलीम के पुत्र अफरोज (08) और अफजल (06) मंगलवार शाम को पास में स्थित चाणक्यपुरी में खेलने चले […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/two-children-died-due-to-drowning-in-kota/article-18051"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/drown.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोटा।</strong> राजस्थान के कोटा में एक खाली प्लॉट में बने गड्ढे में भरे बरसाती पानी में डूबने से दो बच्चों मौत हो गई। पुलिस ने बुधवार को बताया कि आरकेपुरम थाना क्षेत्र के टैगोर नगर निवासी श्रमिक कलीम के पुत्र अफरोज (08) और अफजल (06) मंगलवार शाम को पास में स्थित चाणक्यपुरी में खेलने चले गए। कलीम शाम को जब घर लौटा तो उसे दोनों बच्चे घर पर नहीं मिले। अंधेरा हो जाने के उपरांत भी जब वह नहीं लौटे तो कलीम अपने कुछ पड़ोसियों के साथ बच्चों को ढूंढने निकला और पास में स्थित चाणक्यपुरी भी पहुंचे। रात करीब दस बजे उन्हें एक प्लॉट के खड्डे में भरे पानी में एक बालक का शव तैरता दिखा तो लोगों ने उसे बाहर निकाला और उसी गड्ढे में तलाश शुरू की तो दूसरे बालक का शव भी मिल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलने पर आरकेपुरम थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और एंबुलेंस से शवों को एमबीएस अस्पताल पहुंचाया। दोनों मासूमों की मौत का समाचार मिलने के बाद पूरी बस्ती में कोहराम मच गया। पुलिस ने बताया कि पानी से भरे खाली प्लॉट के पास दोनों बच्चों के कपड़े मिले हैं जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि वह नहाने के इरादे से पानी में उतरे होंगे और पानी गहरा होने के कारण वे उसमें डूब गए। दोनों के शव आज पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/two-children-died-due-to-drowning-in-kota/article-18051</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/two-children-died-due-to-drowning-in-kota/article-18051</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Sep 2020 15:26:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-09/drown.jpg"                         length="87726"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूथ वीरांगनाओं ने जरूरतमंद बच्चों को बांटी जुराबें व टोपियां</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल की वाईस प्रिंसीपल मीरा देवी ने कहा कि यूथ वीरांगनाओं की ओर से बच्चों को जुराबें व टोपियां बांटकर बहुत ही प्रशंसनीय कार्य किया है और हमें इनसे शिक्षा लेने की जरूरत है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/distributed-socks-and-caps-to-needy-children/article-12877"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/humanity.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> यूथ वीरांगनांओं द्वारा किया गया प्रयास बेहद प्रशंसनीय : वाईस प्रिंसीपल (Humanity )</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर पटियाला।</strong> यूथ वीरांगनाएं इकाई पटियाला की ओर से मस्ती की पाठसाला स्कूल के बच्चों के साथ बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया गया। इस मौके यूथ वीरांगनाओं की ओर से स्कूल के 50 बच्चों को जुराबें व 50 बच्चों को टोपियां बांटी गई। इस मौके सपना ने बताया कि यूथ वीरांगनाआें की ओर से मस्ती की पाठशाला स्कूल के बच्चों के साथ (Humanity ) बसंत पंचमी का त्योहार मनाया। इस मौके बच्चे बहुत ही अधिक खुश दिखाई दे रहे थे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा यूथ वीरांगनाओं की ओर से सर्दी के मौसम को ध्यान में रखते बच्चों को 50 जुराबें व 50 टोपियाँ बांटी गई। इसके अलावा बच्चों को खाने पीने का सामान भी बांटा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हमें जरूरतमंद बच्चों की अधिक से अधिक मदद करनी चाहिए। इस मौके स्कूल की वाईस प्रिंसीपल मीरा देवी ने कहा कि यूथ वीरांगनाओं की ओर से बच्चों को जुराबें व टोपियां बांटकर बहुत ही प्रशंसनीय कार्य किया है और हमें इनसे शिक्षा लेने की जरूरत है। इस मौके यूथ वीरांगनाएं जोगिन्द्र कौर, आशा, मनीसा, अनुराधा, मोनिका, ममता, पायल, रसपिन्दर कौर, दुगावंती, कलावंती, चाहत, प्रवीण आदि मौजूद थे।</p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मानवता भलाई कार्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/distributed-socks-and-caps-to-needy-children/article-12877</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/distributed-socks-and-caps-to-needy-children/article-12877</guid>
                <pubDate>Sat, 01 Feb 2020 20:53:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-02/humanity.jpg"                         length="41935"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन्मदिन के बहाने बंधक बनाए 24 मासूम कराए मुक्त, बदमाश और पत्नी की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[देर रात तोड़ा गया घर का दरवाजा | Children free फर्रुखाबाद (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र में बेटी के जन्मदिन पर बुलाकर 24 बच्चों को बंधक बनाने वाले बदमाश को पुलिस ने मार गिराया। जबकि उसकी पत्नी को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार दिया। पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार मिश्रा से शुक्रवार को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/24-hostage-children-free-killed-by-crook-and-wife/article-12843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/children-free.jpg" alt=""></a><br /><h2>देर रात तोड़ा गया घर का दरवाजा | Children free</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>फर्रुखाबाद (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र में बेटी के जन्मदिन पर बुलाकर 24 बच्चों को बंधक बनाने वाले बदमाश को पुलिस ने मार गिराया। जबकि उसकी पत्नी को ग्रामीणों ने पीट-पीटकर मार दिया। पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार मिश्रा से शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 11 घंटे बंधक रहे 24 बच्चों को देर रात सुरक्षित मुक्त  करा लिया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस की प्राथमिकता सभी बंधक बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था। इसी क्रम में पुलिस ने देर रात सुभाष के घर का दरवाजा तोड़कर दिया। इस पर वहां मौजूद भीड़ ने बदमाश सुभाष बाथम को दौड़ा लिया। वह घर में भागा तो पीछे से पुलिस भी घुस गई।</p>
<h2>गोली चलाकर भाग रहा था बदमाश</h2>
<p style="text-align:justify;">इस पर वह फिर गोली चलाने लगा और जवाबी फायरिंग में पुलिस की गोली लगने से सुभाष की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने घर में बने बेसमेंट में बंधक बनाकर रखे सभी बच्चों को सकुशल निकाल लिया। गुस्साई भीड़ ने सुभाष बाथम की पत्नी रुबी को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी भी मृत्यु हो गई। बच्चों को बंधक बनाये जाने की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। और बच्चों को सकुशल मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने इस आपरेशन मासूम का नाम दिया था।</p>
<ul>
<li><strong>बेटी के जन्मदिन के बहाने बुलाकर बंधक बना लिए थे 24 मासूम बच्चे</strong></li>
<li><strong>सुभाष बाथम और उसकी पत्नी ने दिया था वारदात को अंजाम</strong></li>
<li><strong>सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों की बैठक बुलाई</strong></li>
<li><strong>बैठक में बच्चों को सुरक्षित निकालने के सख्त निर्देश दिए गए</strong></li>
<li><strong>सीएम के आदेश पर पुलिस ने देर रात बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया</strong></li>
<li><strong>मुठभेड़ में बदमाश सुभाष बाथम मारा गया जबकि उसकी पत्नी को भीड़ ने पीटकर मार डाला</strong></li>
</ul>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/24-hostage-children-free-killed-by-crook-and-wife/article-12843</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/national/24-hostage-children-free-killed-by-crook-and-wife/article-12843</guid>
                <pubDate>Fri, 31 Jan 2020 11:57:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-01/children-free.jpg"                         length="26399"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अबोहर : धुंध और कीचड़ में स्कूल पहुंचे बच्चे, धूप से मिली थोड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[आज मौसम साफ रहने ओर धूप निकलने से ठंड से कंपकंपा रहे लोगों को भारी राहत मिली।
पिछले एक सप्ताह में चार दिन तक बरसात हो चुकी है।
पिछले रविवार से लेकर मंगलवार तक तीन दिन बरसात के बाद बुधवार को धूप निकली थी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/children-reach-school-in-mist-and-mud/article-12492"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/rain-3.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">दोपहर  तक चलता रहा बारिश का दौर | Rain</h1>
<p><strong>अबोहर (सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा)।</strong> लोहड़ी पर्व पर तेज <strong>(Rain)</strong> बारिश का दौर चला और शाम को बर्फीली हवाएं भी चलीं किंतु आज मंगलवार को दिन के उजाले की शुरुआत सूर्य देवता के विराट दर्शन के साथ हुई। हालांकि धुंध के बीच सूर्य जब निकल रहे थे तो उस समय का दृश्य अलौकिक था। सोमवार और मंगलवार को मौसम के बीच में भारी अंतर दिखाई दे रहा था।सोमवार दिन की शुरुआत तेज बारिश के साथ हुई थी। बारिश का दौर दोपहर तक चलता रहा। कभी बूंदाबांदी हुई तो कभी बौछार बंद भी हुर्इं।सड़कों पर बने गड्ढे लोगों के लिए परेशानी की वजह बन गये हैं। मंगलवार को मौसम में परिवर्तन हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह शुरुआत तो धुंध के साथ हुई थी किंतुजैसे ही सूर्य देवता ने अपने विराट रूप में दर्शन दिये तो धूप निकल आयी। यह धूप तो कुछ देर की थी क्योंकि बादलों ने एक बार फिर से सूर्य देवता की किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने से पहले रोक दिया था। प्रकृति के बार-बार बदल रहे व्यवहार का आनंद इलाके के लोग भी ले रहे हैं। हालांकि शीतलहर ने इस बार दशकों पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। सुबह धुंध के बीच में सूर्य उदय हो रहा था तो उस समय का दृश्य दिल को ऐसी खुशी देने वाला था, जिसकी तलाश सदैव रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज मौसम साफ रहने ओर धूप निकलने से ठंड से कंपकंपा रहे लोगों को भारी राहत मिली। पिछले एक सप्ताह में चार दिन तक बरसात हो चुकी है। पिछले रविवार से लेकर मंगलवार तक तीन दिन बरसात के बाद बुधवार को धूप निकली थी और इसके बाद कल सोमवार पुन: बरसात हुई। वहीं धुंध कोहरे ओर सड़कों पर बरसात से फैले कीचड़ से बच्चे मजबूर होकर स्कूल पहुंचने को पहुंचते दिखाई दिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">धुंध की चादर में लिपटा चंडीगढ़, ठंडी हवाओं से बढ़ी ठिठुरन | Rain</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> बारिश के बाद मंगलवार सुबह पूरे शहर में धुंध की चादर बिछ गई। बारिश के बाद पड़ी धुंध ने ठिठुरन और बढ़ा दी है। इस बीच सड़क पर सुरक्षित सफर के लिए ट्रैफिक पुलिस ने सड़क पर मेनुअली ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमान संभाली। ट्रैफिक पुलिस शहरवासियों के मोबाइल पर पर्सनल मैसेज भेजने के साथ सोशल मीडिया पर फोटो और जागरुकता से जुड़ी लाइनें लिख पोस्ट कर रही है। वहीं कोहरे से विजिबिलिटी कम होने के कारण पीक आॅवर्स में सुबह फॉग की वजह से गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई है। मौसम विभाग के निदेर्शानुसान कोहरा बढ़ने की संभावना पर ट्रैफिक पुलिस ने दिसंबर से तैयारी कर ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ब्लैक की विजिबिलिटी बिल्कुल नहीं:</strong> डीएसपी ट्रैफिक एसपीएस सोंधी ने बताया कि रात से समय धुंध के दौरान साइकिल, बाइक सवार और पैदल चलने वालों के कपड़ों का रंग काफी मायने रखता है। सबसे विजिबिलिटी वाले कलर में पहले ब्राइट ग्रीन आता है। इसके बाद क्रम में व्हाइट फिर येलो आता है। इनसे कम रेड और अंत में ब्लू कलर आता है। ब्लैक की विजिबिलिटी बिल्कुल भी नहीं है।</p>
<p><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/children-reach-school-in-mist-and-mud/article-12492</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/children-reach-school-in-mist-and-mud/article-12492</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 21:11:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-01/rain-3.jpg"                         length="43621"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भीख मांगने वाले बच्चों का सहारा बना पुलिसवाला</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों को शिक्षा देना भी जरूरी है, ताकि उन बच्चों को यह समझ आ सके कि पढ़ने के बाद वे अच्छे पदों पर भी कार्यरत हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/policeman-becomes-a-support-for-begging-children/article-12488"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/rescue.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">जीवन में भर रहा शिक्षा का उजियारा (Police Rescue)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>स्वयं के खर्चे पर पार्क में पाठ्य सामग्री का प्रबंध</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>राजेंद्र दहिया/सच कहूँ  फरीदाबाद।</strong> कहते हैं कि अगर मन में कुछ अच्छा करने दृढ़ इच्छा है तो इस कार्य को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही उदाहरण पेश कर रहे हैं हरियाणा पुलिस में एएसआई अमर सिंह। हरियाणा (Police Rescue) पुलिस के इस जवान की ड्यूटी ऐसे बच्चों का रेस्क्यू करने में लगी हुई है, जो छोटी उम्र में कूड़ा और भीख मांगते नजर आते हैं। लेकिन इस जवान ने उन बच्चों को न केवल रेस्क्यू किया बल्कि मुख्यधारा में जोड़ने के लिए उन्हें स्वयं खर्च वहन कर पढ़ा भी रहा है।  कूड़ा बीनते और भीख मांगते वक्त रेस्क्यू किए गए बच्चों को सेक्टर 25 के पार्क में दोपहर 2:00 से सायं 5:00 बजे तक स्टेट क्राइम ब्रांच में एएसआई अमर सिंह स्वयं भी पढ़ाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमर सिंह का कहना है कि कई बार उन्होंने इन बच्चों के माता-पिता के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया है, लेकिन उसके बावजूद भी बच्चे दोबारा से उसी काम पर जुड़ जाते हैं। इसके बाद इन बच्चों को प्रोत्साहित किया गया और इनके लिए अलग से पढ़ाई के लिए पाठ्य और लेखन सामग्री का बंदोबस्त करते हुए बच्चों के लिए पार्क में क्लास लगाई है। ताकि इन बच्चों को शिक्षा मिले और यह मुख्यधारा में जुड़ जाएं और इन्हें अच्छे-बुरे की पहचान हो सके।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अमर सिंह कहते हैं कि रेस्क्यू करना ही समस्या का समाधान नहीं है</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">बच्चों को शिक्षा देना भी जरूरी है ।</li>
<li style="text-align:justify;">उन बच्चों को यह समझ आ सके कि पढ़ने के बाद वे अच्छे पदों पर भी कार्यरत हो सकते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद समय निकालकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">वहीं बच्चों को पढ़ाने वाले एक अन्य अध्यापक पवन शर्मा का कहना है ।</li>
<li style="text-align:justify;">उनको भी अमर सिंह को देखकर ही बहुत अच्छा लगा और वह भी इस काम में जुटे हुए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">करीब 40 से 50 बच्चे हैं, जिन्हें वे पढ़ा रहे हैं।</li>
</ul>
<p><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/policeman-becomes-a-support-for-begging-children/article-12488</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/policeman-becomes-a-support-for-begging-children/article-12488</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 20:32:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-01/rescue.jpg"                         length="30441"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        