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                <title>Maulana Abul Kalam Azad - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>National Education Day 2023: अबुल कलाम ने शिक्षा को बेहतर और सुलभ बनाया</title>
                                    <description><![CDATA[National Education Day 2023: शिक्षा सभी मनुष्यों का मूल अधिकार है। यह एक मजबूत और सूचित समाज की रीढ़ है। शिक्षा हमें अपने परिवेश, अपने जीवन और अपने समाज के बारे में जागरूक होने में मदद करती है। यह हमें ज्ञान प्राप्त करने, सबक सीखने और सबक को कार्यों में बदलने में मदद करता है, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/abul-kalam-made-education-better-and-accessible/article-54762"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/abul-kalam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">National Education Day 2023: शिक्षा सभी मनुष्यों का मूल अधिकार है। यह एक मजबूत और सूचित समाज की रीढ़ है। शिक्षा हमें अपने परिवेश, अपने जीवन और अपने समाज के बारे में जागरूक होने में मदद करती है। यह हमें ज्ञान प्राप्त करने, सबक सीखने और सबक को कार्यों में बदलने में मदद करता है, जो बदले में हमें सफलता की राह पर चलने में मदद कर सकता है। किसी देश का एक शिक्षित और सूचित नागरिक एक आदर्श नागरिक होता है क्योंकि वह बेहतर भविष्य के लिए सोचेगा और काम करेगा, अपने लिए और दुनिया के लिए भी। शिक्षा के महत्व को समझने और हम शिक्षा को सभी के लिए प्राथमिकता और आसानी से सुलभ बनाने की दिशा में कैसे काम कर सकते हैं, यह समझने के लिए हर साल राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर साल, राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 11 नवंबर को मनाया जाता है। इस वर्ष, राष्ट्रीय शिक्षा दिवस शनिवार को पड़ता है। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर मनाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मौलाना अबुल कलाम आजाद (Maulana Abul Kalam Azad) स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे। उन्होंने 1947 से 1958 तक इस पद पर कार्य किया। शिक्षा को बेहतर और सुलभ बनाने की दिशा में उनके काम की सराहना और उनका सम्मान किया जाता है। शिक्षा और शैक्षणिक संस्थानों के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया जाता है। उसी को मनाने के लिए, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। 2008 से राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय शिक्षा दिवस स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में मनाया जाता है। सेमिनार, सम्मेलन और गतिविधियों सहित विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करके लोग शिक्षा के महत्व, साहित्यिक महत्व और देश के प्रत्येक व्यक्ति के लिए शिक्षा को सुलभ बनाने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता फैलाते हैं। National Education Day</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Nov 2023 12:56:37 +0530</pubDate>
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                <title>मौलाना आजाद : जिन्होंने जगाई शिक्षा की अलख</title>
                                    <description><![CDATA[11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में शिक्षा के विकास में जबरदस्त भूमिका निभाने वाले पहले शिक्षा मंत्री (Maulana Abul Kalam Azad) मौलाना अबुल कलाम आजाद आज ही के दिन पैदा हुए थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/maulana-azad-who-raised-education/article-19820"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/maulana-azad-who-raised-education.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">11 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में शिक्षा के विकास में जबरदस्त भूमिका निभाने वाले पहले शिक्षा मंत्री (Maulana Abul Kalam Azad) मौलाना अबुल कलाम आजाद आज ही के दिन पैदा हुए थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने वाले मौलाना आजाद भारत के बंटवारे के घोर विरोधी और हिन्दू मुस्लिम एकता के सबसे बड़े पैरोकारों में थे।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">हालांकि वह उर्दू के बेहद काबिल साहित्यकार और पत्रकार थे लेकिन शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने उर्दू की जगह इंग्लिश को तरजीह दी, ताकि भारत पश्चिम से कदमताल कर चल सके। 11 नवंबर, 1888 को मक्का में पैदा हुए मौलाना आजाद का मानना था कि अंग्रेजों के जमाने में भारत की पढ़ाई में संस्कृति को अच्छे ढंग से शामिल नहीं किया गया, लिहाजा 1947 में आजादी के बाद शिक्षा मंत्री बनने पर उन्होंने पढ़ाई लिखाई और संस्कृति के मेल पर खास ध्यान दिया। वह भारत के केंद्रीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन थे, जिसका काम केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर शिक्षा का प्रसार था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">उन्होंने सख्ती से वकालत की कि भारत में धर्म, जाति और लिंग से ऊपर उठ कर 14 साल तक सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए। वह महिला शिक्षा के खास हिमायती थे। उनकी पहल पर भारत में 1956 में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की स्थापना हुई। मौलाना आजाद को एक दूरदर्शी विद्वान माना जाता है, जिन्होंने 1950 के दशक में ही सूचना और तकनीक के क्षेत्र में शिक्षा पर ध्यान देना शुरू कर दिया था।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">शिक्षा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में ही भारत में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी का गठन किया गया। मौलाना आजाद पाकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्ना के घोर विरोधी थे और उन्होंने अपनी किताब इंडिया विन्स फ्रीडम में आजादी के बारे में कुछ विवादित हिस्सों को भी छुआ है। 1958 में आखिरी सांस लेने तक वह भारत के शिक्षा मंत्री बने रहे। मौलाना आजाद को 1992 में मरणोपरांत भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।</h6>
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                <pubDate>Tue, 10 Nov 2020 21:13:34 +0530</pubDate>
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