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                <title>Jobs in Geography - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Jobs in Geography RSS Feed</description>
                
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                <title>भूगोल में नौकरियों के बेशुमार अवसर</title>
                                    <description><![CDATA[सच कहूँ /करियर डेस्क। भूगोल बतौर एक विषय जितना व्यापक है (Jobs in Geography) उसमें रोजगार की संभावनाएं भी उतनी ही अधिक हैं। नए दौर में इसका सही तरीके से अध्ययन करके आप जोश और रोमांच से भरा ऐसा करियर बना सकते हैं, जिसमें नाम और दाम दोनों हैं। बता रही हैं। भूगोल यानी ज्योग्राफी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/education-employement/number-of-jobs-in-geography/article-19849"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/number-of-jobs-in-geography.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ /करियर डेस्क</strong>। भूगोल बतौर एक विषय जितना व्यापक है (Jobs in Geography) उसमें रोजगार की संभावनाएं भी उतनी ही अधिक हैं। नए दौर में इसका सही तरीके से अध्ययन करके आप जोश और रोमांच से भरा ऐसा करियर बना सकते हैं, जिसमें नाम और दाम दोनों हैं। बता रही हैं। भूगोल यानी ज्योग्राफी में पृथ्वी और उसके वातावरण की भौतिक विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। इसमें मानव आबादी व संसाधनों का वितरण और राजनीतिक व आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन भी शामिल है, क्योंकि ये चीजें जहां पृथ्वी और उसके वातावरण की भौतिक विशेषताओं को प्रभावित करती हैं, वहीं उनसे प्रभावित भी होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकृति से संबंधित विषय होने के कारण यह रोचक तो है ही, काफी रोमांचक भी है क्योंकि भूगोल के उच्च अध्ययन में पृथ्वी की विविधतापूर्ण भौतिक बनावट से और मानव समाज की बनावट और संस्कृतियों से रूबरू होने का मौका मिलता है। आज मनुष्य सभ्यता के जिस मुकाम पर है, वहां प्राकृतिक आपदा, जलवायु परिवर्तन, आबादी में अत्यधिक वृद्धि, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, प्राकृतिक संसाधनों की अपर्याप्तता और बहुसांस्कृतिक एकीकरण जैसे मुद्दों को भूगोल के पेशेवर ज्ञान से ही हल किया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">व्यापक दायरा</h4>
<p style="text-align:justify;">भूगोल काफी व्यापक विषय है। इसलिए इसमें करियर की संभावनाएं भी काफी अधिक हैं। भूगोल की भौतिक, मानव और पर्यावरण जैसी अलग-अलग शाखाएं हैं। भौतिक भूगोल के तहत पृथ्वी और उसके वातावरण की भौतिक विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। जबकि मानव भूगोल में मनुष्य की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में जाना-समझा जाता है। पर्यावरण भूगोल में व्यावसायिक पर्यावरण और उसका मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के साथ-साथ मौसम, जलवायु आदि के बारे में विस्तार से अध्ययन किया जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बारहवीं के बाद खुलते हैं रास्ते</h4>
<p style="text-align:justify;">भूगोल की पढ़ाई स्कूलों में छठी क्लास से ही शुरू हो जाती है, लेकिन इसमें करियर बनाने के रास्ते बारहवीं क्लास के बाद ही खुलते हैं। इसमें बैचलर से लेकर पीएचडी तक के कोर्स उपलब्ध हैं। स्नातक में दाखिला बारहवीं के बाद ही मिलता है। इसके बाद एमए और एमए के बाद पीएचडी की सकती है। स्नातक के बाद विशेष सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी होते हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए बारहवीं में भूगोल में अच्छे अंक लाना जरूरी है। विषय पर पकड़ भी मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि कुछ संस्थानों में भूगोल में दिाखले मेरिट के आधार पर होते हैं तो कई प्रवेश परीक्षा के जरिये दाखिला देते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ये है जरूरी कौशल</h4>
<p style="text-align:justify;">भूगोल में बेहतरीन करियर बनाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आपके अंदर विषय के प्रति गहरी रुचि और ज्ञान के साथ-साथ दूसरे लोगों के साथ तालमेल बिठाकर चलने की क्षमता भी हो। दरअसल एक ज्योग्राफर को अपना कार्य अच्छी तरह से करने के लिए अलग-अलग विभागों से तालमेल बनाकर चलने की जरूरत होती है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> कंप्यूटर का ज्ञान</li>
<li style="text-align:justify;"> आंकड़ों के संयोजन और विश्लेषण का हुनर</li>
<li style="text-align:justify;"> तर्कसंगत और विश्लेषणात्मक सोच</li>
<li style="text-align:justify;"> इस क्षेत्र में काम करने वालों को काफी भागदौड़ करनी पड़ती है, इसलिए शारीरिक तौर पर स्वस्थ रहना भी जरूरी है</li>
<li style="text-align:justify;"> मैथमैटिक्स पर अच्छी पकड़ के साथ मैप बनाना आना आवश्यक योग्यता है</li>
</ul>
<h4>प्रमुख कोर्स</h4>
<ul>
<li> स्नातक-स्नातकोत्तर</li>
<li> स्नातक (बीए)। इसकी अवधि तीन साल है</li>
<li> स्नातकोत्तर (एमए)। इसकी अवधि दो वर्ष है</li>
<li> पीएचडी। इसकी अवधि दो साल है</li>
</ul>
<h4> पीजी डिप्लोमा कोर्स</h4>
<ul>
<li> रिमोट सेंसिंग एंड ज्योग्राफिकल इन्फॉर्मेशन सिस्टम। इसकी अवधि एक वर्ष है</li>
<li> ज्योग्राफिकल कार्टोग्राफी। इस कोर्स की अवधि एक साल है</li>
<li> पीजी सर्टिफिकेट कोर्स</li>
<li> जियोइन्फॉर्मेटिक्स एंड रिमोट सेंसिंग। इस कोर्स की अवधि छह महीने है</li>
</ul>
<h4 style="text-align:center;">इन क्षेत्रों में आजमा सकते हैं किस्मत</h4>
<h4>कार्टोग्राफर</h4>
<p style="text-align:justify;">इनका मुख्य काम नक्शा और उससे संबंधित डायग्राम, चार्ट, ट्रैवल गाइड आदि का निर्माण और विकास करना तथा पुराने नक्शों व दस्तावेजों का जीर्णोद्धार करना है। इन पेशेवरों को सरकारी, सर्वेक्षण, संरक्षण और प्रकाशन क्षेत्र में जॉब मिलता है।</p>
<h4>पर्यावरण सलाहकार</h4>
<p style="text-align:justify;">इनका मुख्य काम अपने वाणिज्यिक या सरकारी ग्राहकों से पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन कराना और विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर काम कराना होता है। इन्हें सरकारी और जल से संबंधित संगठनों में जॉब मिलती है।</p>
<h4>टाउन प्लानर</h4>
<p style="text-align:justify;">इनका काम शहरों, कस्बों, गांवों व ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और प्रबंधन की योजना बनाना; उसमें विकास के स्थायित्व और प्राकृतिक वातावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करना; मौजूदा बुनियादी ढांचे में सुधार करना और पर्यावरण संबंधी मुद्दों का हल निकालना है। इन्हें सार्वजनिक व निजी दोनों क्षेत्रों में काम मिलता है।</p>
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                                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Nov 2020 13:22:30 +0530</pubDate>
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