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                <title>violence - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Violence: महिला जेल में हिंसा, 41 कैदियों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[टेगुसिगलपा (एजेंसी)। Violence: अमेरिकी देश होंडुरास की एक महिला जेल में दंगा और आगजनी की घटना होने से कम से कम 41 कैदियों की मौत हो गई। लोक मंत्रालय के फोरेंसिक मेडिसिन निदेशालय ने पुष्टि की। मंत्रालय की प्रवक्ता यूरी मोरा ने संवाददताओं से कहा कि ‘मारा’ गैंग की वजह से यह हिंसा हुई है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/violence-in-womens-jail-41-inmates-died/article-49077"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/violence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>टेगुसिगलपा (एजेंसी)। </strong>Violence: अमेरिकी देश होंडुरास की एक महिला जेल में दंगा और आगजनी की घटना होने से कम से कम 41 कैदियों की मौत हो गई। लोक मंत्रालय के फोरेंसिक मेडिसिन निदेशालय ने पुष्टि की। मंत्रालय की प्रवक्ता यूरी मोरा ने संवाददताओं से कहा कि ‘मारा’ गैंग की वजह से यह हिंसा हुई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने पता लगाया है कि राजधानी शहर टेगुसिगलपा से लगभग 35 किमी दूर फ्रांसिस्को मोरजान में 25 महिलाओं की आग में झुलसकर मौत हो गयी और अन्य 16 को गोली लगने से मौत हो गयी है। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला | Violence</h3>
<p style="text-align:justify;">कैदियों के रिश्तेदारों के एक प्रतिनिधि डेल्मा आॅडोर्नेज ने कहा कि अधिकारियों द्वारा जेल के लिए नए नियमों की घोषणा करने के बाद दंगा भड़क गया, जिसमें टीवी और अन्य उपकरणों पर प्रतिबंध लगाना और उन्हें जब्त करना शामिल था। स्थानीय मीडिया के अनुसार घायल कैदियों को टेगुसिगलपा के एक अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। राष्ट्रपति शाओमारा कास्त्रो ने कहा, मारा गैंग ने ही यह दंगा प्लान किया था। Violence</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी जानकारी प्रशासन को भी थी। उप सुरक्षा मंत्री जुलिसा विलानुएवा ने दंगा शुरू होने पर ट्विटर के माध्यम से कहा, ‘हम इस जेल में बर्बरता की हरकतों और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने आपातकाल घोषित किया और राष्ट्रीय पुलिस और सेना के साथ-साथ अग्निशामकों के ‘तत्काल हस्तक्षेप’ करने को कहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jun 2023 12:56:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, उत्तर प्रदेश सरकार ने कानपुर-प्रयागराज में तोड़फोड़ को उचित ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उत्तर प्रदेश सरकार ने पैगंबर मुहम्मद पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ हिंसक विरोध के बाद प्रयागराज और कानपुर में स्थानीय प्राधिकरणों की ओर से कथित अवैध भवनों में तोड़फोड़ की कार्रवाई को बुधवार को उचित करार दिया। उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दायर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/affidavit-in-supreme-court-uttar-pradesh-government-justified-the-sabotage-in-kanpur-prayagraj/article-34752"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/supreme-court-of-india1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उत्तर प्रदेश सरकार ने पैगंबर मुहम्मद पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ हिंसक विरोध के बाद प्रयागराज और कानपुर में स्थानीय प्राधिकरणों की ओर से कथित अवैध भवनों में तोड़फोड़ की कार्रवाई को बुधवार को उचित करार दिया। उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दायर कर राज्य सरकार ने दावा किया कि याचिका में लगाए आरोप ‘एकतरफा मीडिया रिपोर्टिंग’ पर आधारित हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर इस याचिका में लगाए गए आरोप ‘पूरी तरह से झूठे और भ्रामक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हलफनामे में कहा गया,‘वास्तव में, किसी भी वास्तविक प्रभावित पक्ष ने (यदि कोई हो) कानूनी तोड़फोड़ की कार्रवाई के संबंध में इस शीर्ष अदालत में गुहार नहीं लगायी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष शीर्ष अदालत के समक्ष कहा है कि जमीयत उलमा-ए-हिंद के आरोप अनुचित हैं। सरकार ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से अपने जवाब में कहा है कि हाल ही में कुछ लोगों के घरों को तोड़े जाने के खिलाफ दायर एक याचिका में ‘स्थानीय विकास प्राधिकरणों द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया को दुर्भावनापूर्ण रंग देने का प्रयास किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार ने जावेद मोहम्मद के कब्जे वाले भवन को गिराने के बारे में कहा कि स्थानीय निवासियों की ओर से अवैध निर्माण और ह्यवेलफेयर पार्टी आॅफ इंडियाह्ण के कार्यालय के लिए उसी भवन को व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल करने की शिकायतें मिली थीं। सरकार ने कहा कि यह निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन के दायरे में था, लोग दिन-रात हर समय यहां आते-जाते रहे और अपने गाड़ियों को सड़क पर खड़ी करते थे। इस वजह से राहगीरों को आने-जाने में लगातार समस्या पैदा हो रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इन शिकायतों के के मद्देनजर तोड़फोड़ से पूर्व 12 जून को नोटिस जारी की गई थी। हलफनामे में तर्क दिया गया है कि स्थानीय विकास प्राधिकरणों द्वारा अवैध निर्माण तोड़े गए हैं। यह प्राधिकरण राज्य प्रशासन से स्वतंत्र वैधानिक स्वायत्त निकाय हैं। सरकार ने कहा,‘याचिकाकर्ता, जमीयत उलमा-ए-हिंद हलफनामों में उठाए गये तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने में विफल रहा है। उसने केवल कुछ मीडिया रिपोर्टिंग के आधार पर याचिका दायर कर दी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 13:41:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्रयागराज सहित अन्य जिलों में उपद्रव से जुड़े मामलों में 227 संदिग्ध गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज, सहारनपुर, मुरादाबाद और फिरोजाबाद सहित कुछ अन्य शहरों में उपद्रवी तत्वों द्वारा नारेबाजी और पथराव की घटनाओं के मामले में बीती रात गिरफ्तारियों का दौर चलता रहा। उपद्रव एवं हिंसा से जुड़े इन मामलों में पुलिस ने शनिवार को सुबह तक 227 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/227-suspects-arrested-in-cases-related-to-nuisance-in-prayagraj-and-other-districts/article-34411"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/prayagraj-violence-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज, सहारनपुर, मुरादाबाद और फिरोजाबाद सहित कुछ अन्य शहरों में उपद्रवी तत्वों द्वारा नारेबाजी और पथराव की घटनाओं के मामले में बीती रात गिरफ्तारियों का दौर चलता रहा। उपद्रव एवं हिंसा से जुड़े इन मामलों में पुलिस ने शनिवार को सुबह तक 227 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार की ओर से शनिवार को यह जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया कि इन घटनाओं के बाद पुलिस ने उपद्रवग्रस्त इलाकों से अब तक 227 संदिग्ध लोगों को हिंसा फैलाने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमार ने बताया कि रात भर चली धरपकड़ की कार्रवाई के दौरान सहारनपुर जिले में तीन अन्य को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही जिले में अब तक गिरफ्तार हुए लोगों की संख्या 48 हो गये हैं। इसके अलावा प्रयागराज में 68, हाथरस में 50, मुरादाबाद में 25, फिरोजाबाद में 08 और अंबेडकरनगर में 28 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रयागराज हिंसा मामले के मास्टरमांइड की पहचान किये जाने का पुलिस ने दावा किया है। सूत्रों ने बताया कि मोहम्मद जावेद नामक शख्स को प्रयागराज हिंसा का मास्टरमाइंड है। फिलहाल वह पुलिस की गिरफ्त से दूर है। पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश के विभिन्न इलाकों में हुयी हिंसा के मामले में पुलिस एवं प्रशासनिक कार्रवाई पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद नजर रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने दो उच्च स्तरीय बैठकों में हिंसा से जुड़े आरोपियों की पहचान कर इनके सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिये। इस बीच राज्य सरकार के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को उपद्रव की घटनाओं का सामने करने वाले राज्य के विभिन्न शहरों में फिलहाल शांति है। पुलिस और सुरक्षा बल के जवान इन शहरों में स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि बीते दिनों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं द्वारा पैगंबर मुहम्मद के बारे में की गयी विवादित टिप्पणी के विरोध में इन स्थानों पर उपद्रव हुए हैं। गत सप्ताह शुक्रवार 03 जून को कानपुर के बेकनगंज इलाके में जुमे की नमाज के बाद भाजपा नेताओं के खिलाफ नारेबाजी कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर हिंसा फैलाने की कोशिश की थी। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने सभी जिलों में इस सप्ताह जुमे की नमाज के बाद कानपुर जैसी वारदात ना हो, इसके लिये पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किये थे।</p>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद सबसे पहले उपद्रव फैलाने की कोशिश करने की रिपोर्ट दोपहर बाद प्रयागराज से मिली। प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रयागराज के खुल्दाबाद इलाके में अटाला बाग स्थित एक मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद कुछ लोगों के समूह ने पैगम्बर मुहम्मद के बारे में की गयी विवादित टिप्पणी के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। इस बीच कुछ लोगों ने पथराव भी किया। इसके बाद सहारनपुर शहर और देवबंद, फिरोजाबाद और मुरादाबाद, अंबेडकरनगर और हाथरस में भी इसी तरह की घटनायें होने की जानकारी स्थानीय प्रशासन ने दी।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 13:42:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान में अल्पसंख्यक असुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर में मानवीय अधिकारों के हनन की दोहाई देने वाले पाकिस्तान में दिनदहाड़े हिंसक घटनाएं हो रही हैं। पेशावर में दो सिखों की हत्या की घटना ने पाकिस्तान की ड्रामेबाजी को एक बार फिर उजागर किया है। दरअसल, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक कभी भी सुरक्षित नहीं रहे। लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन और आए दिन धार्मिक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/minorities-vulnerable-in-pakistan/article-33502"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/pakistan-bypoll.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर में मानवीय अधिकारों के हनन की दोहाई देने वाले पाकिस्तान में दिनदहाड़े हिंसक घटनाएं हो रही हैं। पेशावर में दो सिखों की हत्या की घटना ने पाकिस्तान की ड्रामेबाजी को एक बार फिर उजागर किया है। दरअसल, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक कभी भी सुरक्षित नहीं रहे। लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन और आए दिन धार्मिक स्थानों पर हमले हो रहे हैं। इस्लामाबाद प्रशासन मामले की जांच करने और दोषियों को सजा देने की रटी-रटाई भाषा बोलकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है। जब भी कोई मामला मीडिया में आ जाता है तब सरकार केवल औपचारिकता के तौर पर कार्रवाई करती है अन्यथा अधिकतर मामलों में सुनवाई ही नहीं होती। पुलिस फरियादी की बात ही नहीं सुनती। इसी तरह ईसाई भाईचारे के लोग भी दहशत में जीवन जी रहे हैं। भारत सरकार ने पेशावर की घटना पर सख्त रवैया अपनाया है लेकिन पाक का रवैये में कोई बदलाव नजर नहीं दिख रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले भी अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमला करने की घटनाएं चर्चा का विषय बनती रही हैं लेकिन धीरे-धीरे वहां से सिख लोग पलायन कर गए। पिछले साल कुछ सिख परिवार स्थायी तौर पर भारत आए। वास्तव में पाकिस्तान की नीतियों में अल्पसंख्यकों के लिए कोई चिंता नजर नहीं दिखती। कागजों में सुरक्षा के दावे जरूर किए जाते हैं लेकिन अमली रूप में कुछ भी नहीं होता। वास्तव में अल्पसंख्यकों की हालत पाकिस्तान के राजनीतिक, सामाजिक और सांप्रदायिक हालातों पर ही निर्भर करती है। राजनीति में कट्टरपंथियों का दबदबा होने के कारण गैर-मुस्लिम लोगों की सुरक्षा को अनदेखा किया जाता है। भले ही एकआध व्यक्ति न्यायपालिका और सेना के उच्च पदों पर पहुंच गए हैं लेकिन आम जनता का जीवन स्तर और सुरक्षा बदहाल है। पाकिस्तान में राजनीति अनिश्चितता भी अल्पसंख्यकों की दुर्दशा के लिए जिम्मेवार है। प्रधानमंत्री तो केवल अपनी कुर्सी बचाने के लिए जोर-अजमाईश करते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">अल्पसंख्यकों की छोड़ों, वो तो मुस्लिम लोगों को भी सुरक्षित माहौल नहीं दे सके। भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन एक्ट पास कर दिया, जिसके अंतर्गत पाकिस्तान, अफगानिस्तान से उजड़ कर आए हिंदू, सिखों और ईसाईयों को भारत सरकार नागरिकता देगी। उजड़े लोगों के पुर्नवास का रास्ता भारत ने खोल दिया है। नए नागरिकता कानून के तहत पाकिस्तान में बदहाल जीवन व्यत्तीत कर रहे लोगों को सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए भारत सरकार को और कदम उठाने चाहिए। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा ने यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद किसी भी धर्म का सगा नहीं होता। आतंकवादियों को किसी धर्म विशेष के समर्थन में होने का प्रचार करने वालों के पास अब कोई बहाना नहीं रह गया।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 09:41:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटियाला हिंसा : अफवाह फैलाने वालों पर प्रशासन की कड़ी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया मॉनीटरिंग सैल बनाया चंडीगढ़। पटियाला में हिंसा की वारदात के बाद अफवाहों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में है। इसी के चलते प्रशासन ने सोशल मीडिया मॉनीटरिंग सैल बनाया है। जो लगातार सोशल मीडिया पर चल रहे कंटेट पर नजर बनाए रखेगा। इसमें पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट, जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी और पुलिस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/patiala-violence-administration-closely-monitoring-those-spreading-rumors/article-32904"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/patiala-violence-case1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>सोशल मीडिया मॉनीटरिंग सैल बनाया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> पटियाला में हिंसा की वारदात के बाद अफवाहों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में है। इसी के चलते प्रशासन ने सोशल मीडिया मॉनीटरिंग सैल बनाया है। जो लगातार सोशल मीडिया पर चल रहे कंटेट पर नजर बनाए रखेगा। इसमें पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट, जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी और पुलिस साइबर सैल को भी शामिल किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा भड़काऊ पोस्ट के बारे में लोग ट्विटर, ई-मेल या वॉट्सऐप के द्वारा भी सूचना दे सकते हैं। पटियाला की जिला मजिस्ट्रेट साक्षी साहनी ने कहा कि लोग सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयानबाजी न करें। गलत पोस्ट और सनसनीखेज खबरों को आगे शेयर न करें। इसके बारे में सूचना हमें दें। जिले में अमन-कानून की स्थिति बनाए रखने के लिए इन पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म की निगरानी की जा रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>यहां दे सकते हैं सूचना</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">वॉट्सऐप के जरिए 9592912900 पर सूचना दे सकते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ई-मेल से smmcpta@gmail.com पर सूचना दे सकते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">ट्विटर के जरिए @DCPatialaPb या @DPROPatiala पर ट्वीट या सीधे मैसेज (DM) कर सकते हैं।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>अफवाह के कारण फैली थी हिंसा</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पटियाला पुलिस का दावा है कि हिंसा फैलने के पीछे एक अफवाह ही मुख्य वजह बनी है। पुलिस ने शिवसेना और सिख संगठनों को विरोध प्रदर्शन न करने के लिए कहा था। तब किसी ने सिक्ख संगठनों को जाकर कह दिया कि शिवसेना वाले प्रदर्शन कर रहे हैं। यह देखने वह बाहर निकले तो उनकी फोटो-वीडियो शिवसेना वालों को दिखाया गया। जिसके बाद वे भी प्रदर्शन करने बाहर आ गए। इसी के चलते बाद में माहौल बिगड़ गया और जिसकी परिणाम हिंसा के रूप में सामने आया।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 11:21:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटियाला हिंसा का मास्टरमाइंड बरजिंदर सिंह परवाना गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (अश्वनी चावला)। पटियाला हिंसा मामले में आज पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड बरजिंद सिंह परवाना को पुलिस ने रविवार सुबह मोहाली से गिरफ्तार किया। बरजिंदर सिंह परवाना विस्तारा की फ्लाइट से सुबह 7:20 बजे मुम्बई से मोहाली पहुंचा था। इंस्पेक्टर शर्मिंदर सिंह के नेतृत्व में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/patiala-violence-mastermind-barjinder-singh-parwana-arrested/article-32870"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/barjinder-singh-parwana.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अश्वनी चावला)।</strong> पटियाला हिंसा मामले में आज पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड बरजिंद सिंह परवाना को पुलिस ने रविवार सुबह मोहाली से गिरफ्तार किया। बरजिंदर सिंह परवाना विस्तारा की फ्लाइट से सुबह 7:20 बजे मुम्बई से मोहाली पहुंचा था। इंस्पेक्टर शर्मिंदर सिंह के नेतृत्व में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की पटियाला टीम ने उन्हें एयरपोर्ट पर ही दबोचा। जानकारी के अनुसार, इस मामले में अब तक 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें 25 लोगों को नामजद किया गया है। इनमें से हरीश सिंगला, कुलदीप सिंह और दलजीत सिंह को पहले से ही गिरफ्तार किया जा चुका है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">29 अप्रैल को स्थानीय शिवसेना नेताओं द्वारा निकाली गई खालिस्तान विरोधी रैली के दौरान दो समूह आपस में भिड़ गए। पटियाला में काली माता मंदिर के पास हुई झड़पों में पथराव किया गया और तलवारें भांजी गईं। घटना उस वक्त हुई जब शिवसेना (बाल ठाकरे) पटियाला में काली माता मंदिर के पास खालिस्तानी गुटों के खिलाफ मार्च कर रही थी। रैली का नेतृत्व पंजाब शिवसेना (बाल ठाकरे) के कार्यकारी अध्यक्ष हरीश सिंगला ने किया।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 12:22:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वीडन: स्कूल में हिंसा, दो महिलाओं की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[स्टॉकहोम। स्वीडन के दक्षिणी शहर माल्मो के एक माध्यमिक विद्यालय में 50 वर्ष की आयु की दो अधेड़ उम्र की महिलाओं की एक हिंसा में मौत हो गई। बीबीसी ने कहा कि हत्या के संदेह में पुलिस ने 18 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो स्कूल में एक छात्र है। हालांकि अभी तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/kills-two-women-in-violence-in-sweden-school/article-31673"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/violence-in-sweden-school.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>स्टॉकहोम।</strong> स्वीडन के दक्षिणी शहर माल्मो के एक माध्यमिक विद्यालय में 50 वर्ष की आयु की दो अधेड़ उम्र की महिलाओं की एक हिंसा में मौत हो गई। बीबीसी ने कहा कि हत्या के संदेह में पुलिस ने 18 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो स्कूल में एक छात्र है। हालांकि अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वहां वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस ने कहा कि उसे गोलीबारी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। स्कूल में काम करने वाली दो महिलाओं को एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने कहा कि घटना के समय स्कूल में छात्रों और शिक्षकों सहित लगभग 50 लोग मौजूद थे। पुलिस ने कहा कि जब वे स्कूल पहुंचे तो आपातकालीन सेवाओं ने स्वीडन के तीसरे सबसे बड़े शहर के एक बड़े माध्यमिक विद्यालय माल्मो लैटिन स्कूल में दो लोगों को घायल पाया। कथित हमलावर चाकू और कुल्हाड़ी से लैस था और कहा जाता है कि उसने आपातकालीन नंबर पर कॉल किया और दो लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने कहा कि उसने स्कूल को खाली करा लिया और वहां की तलाशी ली, लेकिन इस घटना में और लोगों के शामिल होने का कोई संकेत नहीं मिला।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Mar 2022 09:57:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखीमपुर हिंसा के पीड़ितों को भी न्याय दिलायें मोदी: प्रियंका</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लखीमपुर हिंसा मामले के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिये केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को पद से हटाने की मांग की है। प्रियंका ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान मोदी को संबोधित पत्र को साझा करते हुये कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/modi-should-also-provide-justice-to-the-victims-of-lakhimpur-violence-priyanka/article-28494"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/priyanka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लखीमपुर हिंसा मामले के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिये केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को पद से हटाने की मांग की है। प्रियंका ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान मोदी को संबोधित पत्र को साझा करते हुये कहा “ लखीमपुर किसान नरसंहार में अन्नदाताओं के साथ हुयी क्रूरता को पूरे देश ने देखा। आपको यह जानकारी भी है कि किसानो को अपनी गाड़ी से कुचलने का मुख्य आरोपी आपकी सरकार के केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री का बेटा है। राजनीतिक दवाब के चलते इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरूआत से ही न्याय की आवाज को दबाने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय ने इस संदर्भ में कहा कि सरकार की मंशा देखकर लगता है कि सरकार किसी विशेष आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है।” उन्होने कहा कि लखीमपुर में मारे गये किसानों के परिवारों से वह मिली है। वह असहनीय पीड़ा में है। परिवार न्याय चाहते है मगर केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री के पद में बने रहते यह संभव नहीं है। किसान नरसंहार मामले में जांच की हालिया स्थिति उन परिवारों की आशंका को सही साबित करती है। देश की कानून व्यवस्था के जिम्मेदार गृृहमंत्री अमित शाह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ आपके उसी मंत्री के साथ मंच साझा कर रहे हैं।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/modi-should-also-provide-justice-to-the-victims-of-lakhimpur-violence-priyanka/article-28494</link>
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                <pubDate>Sat, 20 Nov 2021 10:40:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेएनयू में एबीवीपी और वाम गठबंधन के बीच क्यों हुई झड़प?</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों और वाम गठबंधन आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा) एवं स्टूडेंट्स फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई) के बीच झड़प हो गई जिसमें करीब 12 छात्र घायल हो गए और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। छात्रसंघ के सदस्यों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/clashes-broke-out-between-abvp-and-left-alliance-in-jnu/article-28379"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/jnu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों और वाम गठबंधन आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आईसा) एवं स्टूडेंट्स फेडरेशन आॅफ इंडिया (एसएफआई) के बीच झड़प हो गई जिसमें करीब 12 छात्र घायल हो गए और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। छात्रसंघ के सदस्यों ने बताया कि झड़प में गंभीर रूप से घायल लोगों का नयी दिल्ली स्थित एम्स में इलाज चल रहा है। घटना से संबंधित औपचारिक शिकायत दिल्ली पुलिस में की गई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना रविवार रात करीब 10 बजे विश्वविद्यालय के छात्र संघ कार्यालय में हुई। दोनों पक्षों के सदस्य एक दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">एबीवीपी-जेएनयू के अध्यक्ष शिवम चौरसिया ने कहा कि जब वे छात्रसंघ कार्यालय के छात्र गतिविधि केंद्र में बैठक कर रहे थे तब आईसा और एसएफआई के सदस्यों ने अंदर आकर एबीवीपी के छात्रों को बाहर जाने के लिए कहा। उन्होंने यूनीवार्ता से कहा, ‘हमसे कहा गया कि इस स्थान का इस्तेमाल सिर्फ छात्रसंघ ही कर सकता है, जो कि गलत है। यह गतिविधि केंद्र सभी छात्रों के लिए खुला है। जब हमने उनकी इस बात का विरोध किया तो उन्होंने हम पर कुर्सियों से हमला करना शुरू कर दिया।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>औपचारिक शिकायत दिल्ली पुलिस में की गई</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष आइशी घोष ने एबीवीपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एबीवीपी ने हिंसा शुरू की थी। उन्होंने कहा, ‘वह स्थान पहले से ही एक अन्य संगठन के एक कार्यक्रम के लिए बुक किया गया था। इस बीच एबीवीपी ने वहां पहुंचकर अपनी बैठक शुरू कर दी। मैं और जेएनयूएसयू के अन्य सदस्य उनसे बात करने के लिए मौके पर पहुंचे। जब हमने एबीवीपी के सदस्यों से अपनी बैठक को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कहा तब वे हिंसक हो गए और अंत में हम पर हमला कर दिया। इस दौरान हमारे एक सदस्य को गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि झड़प में घायल हुए वाम गठबंधन के छात्रों ने एबीवीपी के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 10:17:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाराष्ट्र के अमरावती में फिर भड़की हिंसा, पुलिस ने किया लाठीचार्ज</title>
                                    <description><![CDATA[भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल किए तैनात अमरावती (एजेंसी)। महाराष्ट्र के अमरावती में शुक्रवार को हुई हिंसा और पथराव के विरोध में दूसरे पक्ष की ओर से शनिवार को शहर बंद का आह्वान किया गया। सुबह 10 बजे शहर के राजकमल चौक और गांधी चौक पर हजारों लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर ही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/violence-erupts-again-in-maharashtra-amravati-police-lathi-charged/article-28333"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/amravati-violence.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल किए तैनात</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>अमरावती (एजेंसी)।</strong> महाराष्ट्र के अमरावती में शुक्रवार को हुई हिंसा और पथराव के विरोध में दूसरे पक्ष की ओर से शनिवार को शहर बंद का आह्वान किया गया। सुबह 10 बजे शहर के राजकमल चौक और गांधी चौक पर हजारों लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर ही रहे थे। तभी उनमें से कुछ लोगों ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया। इसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आ रही है। भीड़ को देखते हुए ग्रामीण इलाकों से भी फोर्स को शहर में बुलाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि त्रिपुरा में हुए साम्प्रदायिक दंगों के विरोध में महाराष्ट्र के कई शहरों में शुक्रवार को मुस्लिम संगठनों ने बंद का ऐलान किया था। रजा अकादमी नाम की एक संस्था इसमें सक्रिय रूप से शामिल हुई थी। इस दौरान नांदेड, मालेगांव और अमरावती में हिंसा देखने को मिली थी। इस हिंसा में कई गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई थी। साथ ही एक दर्जन पुलिसकर्मी घायल हुए थे, इसमें दो पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। हिंसक भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 11:56:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सोशल मीडिया मंच बढ़ा रहे हिंसा, अंकुश जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[आजकल फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब जैसे सोशल मंचों पर ऐसी सामग्री परोसी जा रही है, जो अशिष्ट, अभद्र, हिंसक, भ्रामक एवं राष्ट्र-विरोधी होती है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र को जोड़ना नहीं, तोड़ना है। इन सोशल मंचों पर ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो तोड़-फोड़ की नीति में विश्वास करते हैं, वे चरित्र-हनन और गाली-गलौच जैसी ओछी हरकतें करने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/violence-is-increasing-on-social-media-platforms/article-28054"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/601-cases-of-fake-news-spread-on-social-media-during-lockdown-in-maharashtra.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजकल फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब जैसे सोशल मंचों पर ऐसी सामग्री परोसी जा रही है, जो अशिष्ट, अभद्र, हिंसक, भ्रामक एवं राष्ट्र-विरोधी होती है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र को जोड़ना नहीं, तोड़ना है। इन सोशल मंचों पर ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो तोड़-फोड़ की नीति में विश्वास करते हैं, वे चरित्र-हनन और गाली-गलौच जैसी ओछी हरकतें करने के लिये तत्पर रहते हैं तथा उच्छृंखल एवं विध्वंसात्मक नीति अपनाते हुए अराजक माहौल बनाते हैं। एक प्रगतिशील, सभ्य एवं शालीन समाज में इस तरह की हिंसा, नफरत और भ्रामक सूचनाओं की कोई जगह नहीं होनी चाहिए, लेकिन विडम्बना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कानून के चलते सरकार इन अराजक स्थितियों पर काबू नहीं कर पा रही है। कहने को ट्विटर, यू-ट्यूब, फेसबुक सामाजिक मेल-जोल के मंच कहे जाते हैं, लेकिन इन मंचों पर जितनी राजनीतिक, धार्मिक एवं सामाजिक नफरत एवं द्वेष फैलाया जा रहा है, वह चिन्ताजनक है।</p>
<p style="text-align:justify;">फेसबुक के आंतरिक दस्तावेजों के मुताबिक फेसबुक भारत में भ्रामक सूचना, नफरत वाले भाषण और हिंसा को लेकर जश्न मनाने वाले कंटेंट को रोक नहीं पा रहा है, पर बड़ा सवाल है कि वह क्यों नहीं रोक पा रहा है? क्या यह भारत के खिलाफ एक षड्यंत्र का संकेत है? जाहिर है, इससे उपद्रवी और संकीर्ण मानसिकता के लोगों को एक खुला मैदान मिल गया है, जो देश की शांति एवं सौहार्द की स्थितियों को खंड-खंड करना चाहते हैं या अपने संकीर्ण स्वार्थों को आकार देना चाहते हैं। इन भ्रामक सूचनाओं के माध्यम से चुनाव को प्रभावित करने की साजिश भी होती रही है।आम-जनता को गुमराह करने और उसका मनोबल कमजोर करने के लिये जो लोग उजालों पर कालिख पोत रहे हैं, इससे उन्हीं के हाथ काले होने की संभावना है। राष्ट्र की एकता और अखण्डता, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं प्रगति के नये अध्याय रचती सरकारें- इस देश की संस्कृति है, विरासत है, उसे इस तरह के ओछे हथकंडों से पस्त नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">फेसबुक जैसे मंच निर्बाध हैं, वहां बिना कोई शुल्क अदा किए किसी को भी अपना खाता खोलने की आजादी है। आजकल हर हाथ में स्मार्टफोन आ गया है, उससे बहुत सारे लोगों को इस मंच का बेलगाम इस्तेमाल करने की लत-सी लग गई है। लेकिन इस लत से नुकसान राष्ट्र का होता है। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों इन सामाजिक मंचों को अनुशासित बनाने का प्रयास किया था, पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक व्यवस्था इसमें बड़ी बाधा है। हालांकि सोशल मीडिया के ये मंच स्वस्थ लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक भूमिका भी निभाते देखे जाते रहे हैं। उन पर कड़ाई से बहुत सारे ऐसे लोगों के अधिकार भी बाधित होने का खतरा है, जो स्वस्थ तरीके से अपने विचार रखते और कई विचारणीय मुद्दों की तरफ ध्यान दिलाते हैं। मगर जिस तरह बड़ी संख्या में वहां उपद्रवी, हिंसक, राष्ट्रीय और सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न करने वाले तत्त्व सक्रिय हो गए हैं, उससे चिंता होना स्वाभाविक है। उन पर अंकुश लगाने एवं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान करना जरूरी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Nov 2021 10:05:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चिंताजनक हैं बांग्लादेश की घटनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार दुर्गा पूजा के दौरान बांग्लादेश में हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। हिंदू मंदिरों पर हमले के दो दिन बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दोषियों को कड़ी सजा देने और हिंदुओं को सुरक्षा प्रदान करने की बात दोहरायी है। पिछले साल पूजा के दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि दुर्गा पूजा हमारी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/the-incidents-in-bangladesh-are-worrying/article-27721"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/supreme-court-bangladesh1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इस बार दुर्गा पूजा के दौरान बांग्लादेश में हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। हिंदू मंदिरों पर हमले के दो दिन बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दोषियों को कड़ी सजा देने और हिंदुओं को सुरक्षा प्रदान करने की बात दोहरायी है। पिछले साल पूजा के दौरान उन्होंने घोषणा की थी कि दुर्गा पूजा हमारी सरकार की धर्मनिरपेक्षता की पहचान है। उल्लेखनीय है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई चुनौतियां हैं, लेकिन एक दर्द अब भी अह्म है- हिंदुओं के विरुद्ध हो रहे निरंतर अत्याचार। दुर्गा पूजा की हिंसा वहां की अंदरूनी मानसिकता की कहानी है। यह दर्द बहुत पुराना है, नोआखाली की हिंसा का इतिहास दुनिया के सामने है। तब गांधी का सत्याग्रह भी बहुत कारगर नहीं हो पाया था। उसके बाद बंटवारे के दौरान भी हिंदुओं का नरसंहार बड़े पैमाने पर हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट में दर्ज है कि बंटवारे से पहले बांग्लादेश में हिंदुओं की तादाद करीब 27 फीसदी थी, जो 2011 में महज आठ प्रतिशत रह गयी। पुन: हिंदुओं का पलायन 1971 में हुआ, जब पाकिस्तानी सेना सुनियोजित ढंग से हिंदुओं की हत्या कर रही थी। हिंदुओं पर एक बार फिर अत्याचार बेगम खालिदा जिया के शासनकाल में हुआ था, जब 2001 में उनकी सरकार बनी थी। उसके बाद कई ऐसे नियम भी बनाये गये, जो हिंदू समुदाय के विरुद्ध थे। उनकी जमीन और संपत्ति हड़पने का निष्कंटक दौर शुरू हुआ, जो आज भी बरकरार है। जयशंकर का यह भी कहना था कि केवल दक्षिण एशिया नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बांग्लादेश भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी बन गया है। भारत के लिए चिंता का सबसे बड़ा मुद्दा दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया में आतंकवादी और कट्टरपंथी संगठनों का पैर पसारना है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत नहीं चाहता है कि बांग्लादेश में ऐसे समूहों की गतिविधियां बढ़ें, जिससे भारत को किसी प्रकार का खतरा पैदा हो। खास तौर पर दोनों देशों की सीमा से लगे इलाकों में इसके संकेत मिले हैं। लेकिन शेख हसीना सरकार ने काफी हद तक इन पर अंकुश लगाने के प्रयास भी किये हैं। भारत की चिंता दक्षिण एशिया में बढ़ती हुई आतंकी गतिविधियों से भी है। अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने और पाकिस्तान की घुसपैठ का असर बांग्लादेश की अंदरूनी राजनीति पर भी पड़ सकता है। अतिवादी गिरोह वहां पर भी सक्रिय हैं, जो हिंदुओं को निशाना बना रहे है। बांग्लादेश में हिंदू आबादी का कम होना गंभीर चिंता का विषय है। इस तथ्य और सच्चाई को नागरिकता संशोधन कानून से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। दोनों की पृष्ठभूमि अलग है। भारत की पहचान केवल संविधान में ही नहीं, बल्कि लोगों के मानस में धर्मनिरपेक्षता की रही है। उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। बांग्लादेश में भी वही सोच विकसित करनी पड़ेगी। पाकिस्तान की तर्ज पर चलना ठीक नहीं है। शेख हसीना से उम्मीद है कि वे इस दिशा में ठोस पहल करेंगी।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 10:01:19 +0530</pubDate>
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