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                <title>विश्व स्तर पर विज्ञान के ज्ञान का प्रकाश फैला रही डॉ. प्रियंका</title>
                                    <description><![CDATA[अनेक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित (Dr. Priyanka ) हिसार के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से किया है स्नातक सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। हरियाणा की बेटी (Dr. Priyanka) डॉ. प्रियंका जूड ने हरियाणा से स्नातक, स्नातकोत्तर की शिक्षा लेकर विदेशी धरती पर धूम मचाई है। अब तक उन्हें अनेकों अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sach-kahoon-special-story/dr-priyanka-spreading-light-of-science-knowledge-globally/article-20243"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/dr.-priyanka-spreading-light-of-science-knowledge-globally-2.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>अनेक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित (Dr. Priyanka )</strong></h3>
<ul>
<li>
<h4>हिसार के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से किया है स्नातक</h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम</strong>। हरियाणा की बेटी (Dr. Priyanka) डॉ. प्रियंका जूड ने हरियाणा से स्नातक, स्नातकोत्तर की शिक्षा लेकर विदेशी धरती पर धूम मचाई है। अब तक उन्हें अनेकों अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। एआईएसटी जापान में टेन्योर-ट्रैक रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में भी उन्हें चुना गया, जहां उन्होंने वर्ष 2016 से 2020 तक अनुसंधान कार्य किया है। आज हरियाणा अपनी बेटी की इस सफलता पर जश्न मना रहा है। बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के नारे को यहां डॉ. प्रियंका के परिवार ने साकार किया है।</p>
<h4>बेटी पर गर्व</h4>
<p style="text-align:justify;">अपनी बेटी पर गर्व करते हुए उनके पिता हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में मानव संसाधन प्रबंधन के निदेशक रहे चुके प्रोफेसर राम सिंह कहते हैं कि जिस उम्र में हमारे देश में युवाओं को जॉब मिलने की भी गारंटी नहीं होती, उस उम्र में उनकी बेटी प्रियंका ने इतने सारे शोध और पेटेंट किए हैं। वर्ष 2012 में एआईएसटी त्सुकुबा, जापान में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर का पद ग्रहण किया और 2015-2016 में इसी संस्थान में जेएसपीएस फेलोशिप प्राप्त की। इस अवधि के दौरान उनके उत्कृष्ट अनुसंधान को विशेष पहचान मिली। 2016-2020 तक अनुसंधान के बाद उन्होंने अपना नाम 3 तकनीकी पेटेंट अर्जित किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. प्रियंका जूड को पीएचडी करने के लिए 2008 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ वोलोंगॉन्ग, ऑस्ट्रेलिया में पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च स्कॉलरशिप प्रदान किया गया। उनके पीएचडी शोध कार्य को 2012 में एक उत्कृष्ट थीसिस का श्रेय मिला। उनकी 2012 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जापान में पोस्ट-डॉक्टरल पद पर नियुक्ति हुई। जहां उन्होंने ऊर्जा मैटेरियलज के शोध पर काम करना जारी रखा। उन्होंने 2015 में जापान सोसायटी ऑफ़ द् प्रमोशन ऑफ़ साइंस (जेएसपीएस) की पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप प्राप्त की। उन्हें अनेकों अंतरराष्ट्रीय सम्मान, सर्वश्रेष्ठ शोधपत्रों और पोस्टर अवार्ड के रूप में 2011 में आईएसईएम, वोलोंगॉन्ग, ऑस्ट्रेलिया, 2013 में कोबे, जापान, 2014 में नैशविले, संयुक्त राज्य अमेरिका और 2018 में त्सुकुबा जापान में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन व संस्थानों से दिए गए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सीनियर रिसर्चर के पद पर हुई हैं नियुक्त</h4>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में डॉ. प्रियंका को जापान के एआईएसटी त्सुकुबा (विज्ञान नगर) में नव स्थापित ग्लोबल जीरो एमिशन रिसर्च सेंटर में सीनियर रिसर्चर (प्रोफेसर) के पद पर नियुक्त किया गया। प्रियंका जूड एचएयू हिसार में पूर्व सीसीएस प्रोफेसर फूड्स एंड न्यूट्रिशन डॉ. सुदेश जूड की पुत्री हैं। डॉ. सुदेश जूड को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली ने 1993 में युवा वैज्ञानिक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था और इस पुरस्कार के लिए भारत के राष्ट्रपति ने उनको सम्मानित किया। वह इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली एचएयू से अब तक की एकमात्र वैज्ञानिक हैं।</p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Nov 2020 19:57:20 +0530</pubDate>
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