<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/kisan-movement/tag-18712" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>Kisan Movement - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/18712/rss</link>
                <description>Kisan Movement RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>किसान आंदोलन बनाम जन आंदोलन</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों का भारत बंद बड़े स्तर पर सफल रहा, जिसका व्यापक असर देखने को मिला। पिछले दो माह से संघर्षरत किसानों के आंदोलन में कृषि से नहीं जुड़े होने के बावजूद आम लोगों व विभिन्न संगठनों के समर्थन ने आंदोलन में जान फूंक दी। वकील, पत्रकार, आढ़ितयों, कर्मचारी संगठनों, गायक व धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/kisan-movement-vs-mass-movement/article-20430"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/nsui-and-bjp1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसानों का भारत बंद बड़े स्तर पर सफल रहा, जिसका व्यापक असर देखने को मिला। पिछले दो माह से संघर्षरत किसानों के आंदोलन में कृषि से नहीं जुड़े होने के बावजूद आम लोगों व विभिन्न संगठनों के समर्थन ने आंदोलन में जान फूंक दी। वकील, पत्रकार, आढ़ितयों, कर्मचारी संगठनों, गायक व धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं भी किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही। इस सफल बंद ने यह संदेश दिया कि कृषि को लेकर चिंता केवल किसान वर्ग को ही नहीं बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी है, जिनका रोजगार कृषि से जुड़ा हुआ है। 20 के करीब राजनीतिक पार्टियों ने भी किसान आंदोलन का समर्थन किया। अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी किसान तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भले ही कानूनों को लेकर सरकार के अपने तर्क हैं, लेकिन कृषि कानूनों के खिलाफ इतने बड़े स्तर पर विरोध होना उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाता है। कोई भी कानून जनता के हित में होना चाहिए। जब किसानों के तर्कों को खुद सरकार ने स्वीकार किया और कहा कि कानूनों में संशोधन संभव है, फिर सहमति से किसानों की चिंता का निवारण होना चाहिए। किसान नेताओं का दावा यह प्रमाणित करता है कि मीटिंग दौरान कई बिंदुओं पर मंत्रियों और अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। भले ही इस आंदोलन में राजनीतिक पार्टियों ने अपना-अपना बचाव व राजनीति चमकाने की कोशिश की, फिर भी आंदोलन में किसान और राजनीति अलग-अलग ही रहे हैं। अक्सर यही होता है कि विरोधी पार्टियां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करती हैं लेकिन वह भी इतने बड़े स्तर पर संघर्ष करने में कभी सफल नहीं हो सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी तक किसी भी राजनीतिक दल को स्टेज पर चढ़कर बोलने नहीं दिया गया और कई राजनीतिक नेताओं को विरोध का भी सामना करना पड़ा। किसान नेताओं ने संयम रखते हुए आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं चढ़ने दिया। किसान आंदोलन की यह भी एक उपलब्धि है कि उनका संघर्ष शांतिपूर्वक व सैद्धांतिक रहा है। किसानों ने सरकार के बातचीत के मुद्दे को स्वीकार कर पांच बैठकें की। अब सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर उनकी शंकाओं को दूर कर समाधान निकालना चाहिए। मौसम व अन्य समस्याओं से जूझ रहे किसानों के संघर्ष का कोई सकारात्मक समाधान होना चाहिए। बैठकों में मुद्दे को लटकाया ना जाए। मुद्दे लटकाना राष्टÑ की हानि करता है।</p>
<p> </p>
<p><strong>अन्य <a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a> हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/kisan-movement-vs-mass-movement/article-20430</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/kisan-movement-vs-mass-movement/article-20430</guid>
                <pubDate>Wed, 09 Dec 2020 09:45:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2020-12/nsui-and-bjp1.jpg"                         length="35967"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        