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                <title>Narendra Singh Tomar - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>नयी शिक्षा नीति भारत को फिर से विश्व गुरु के पद पर अधिष्ठित करेगी : तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज कहा कि नयी शिक्षा नीति आने वाले कल में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देगी और जब देश की आजादी 100 वर्ष की होगी तब यही शिक्षा नीति पुन: भारत को विश्वगुरु के पद पर अधिष्ठित करने में भी सफल होगी। शिक्षा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-new-education-policy-will-restore-india-to-the-post-of-vishwa-guru/article-39956"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/tomar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज कहा कि नयी शिक्षा नीति आने वाले कल में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देगी और जब देश की आजादी 100 वर्ष की होगी तब यही शिक्षा नीति पुन: भारत को विश्वगुरु के पद पर अधिष्ठित करने में भी सफल होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित ज्ञानोत्सव एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ आज पूसा में तोमर की अध्यक्षता तथा नोबल पुरस्कार विजेता-बाल अधिकार क्षेत्र के समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह अरूण कुमार, विनय सहस्त्रबुद्धे, डॉ. अतुल कोठारी, डॉ. पंकज मित्तल, ओमप्रकाश शर्मा, श्रीमती उपासना अग्रवाल एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।</p>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने कहा कि शिक्षा का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा प्रगति का उपकरण है, लेकिन अगर शिक्षा की दिशा ठीक न हो तो उसका नुकसान भी देश और समाज को उठाना पड़ता है। देश की आजादी के तत्काल बाद जो दिशा निश्चित करनी चाहिए थी, उसमें दुर्लक्ष्य हुआ। इस कारण हमारे निज गौरव, देशज पद्धतियां व परंपराएं प्रभावित हुईं। जिन लोगों को शिक्षित कहा जा सकता है, उनका भी बड़ा वर्ग इस पूरी दिशा को उपेक्षित करने में लगा हुआ था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>धार्मिक होने के लिए शिक्षित होना जरूरी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि हमारा अपना संस्कार हमें दूसरों की मदद करने के लिए पे्ररित करता है। हमारा संस्कार सबको साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। पुरातन भारत में भी गांव में कोई पढ़ा लिखा नहीं होता था लेकिन गांव का संस्कार ऐसा था कि कोई परेशान भी नहीं था। उन्होंने कहा कि शिक्षा रोजगारोन्मुखी के साथ-साथ राष्ट्रोन्मुखी और संस्कारोन्मुखी भी होनी चाहिए। इस दिशा में मनीषियों ने समय-समय पर मंथन किया और जरूरी सुझाव दिए हैं। जब शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नहीं था तब शिक्षा बचाओ आंदोलन था। इसके माध्यम से निरंतर देश में काम हो रहा था। उस काल खंड में सरकारों की प्रतिकूलता थी, उसके बाद भी शिक्षा में संस्कार का दीप जलाया गया। बीच-बीच में अनेक सफलताएं भी मिलीं।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि यह ज्ञानोत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान यज्ञ है। यहां मौजूद लोग नई शिक्षा नीति को लोगों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। ये नए भारत के निमार्ता है। आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी, समावेशी, उद्यमी और जगतगुरु भारत के निमार्ता हैं। यह शिक्षा पद्धति बड़े बदलाव वाली शिक्षा पद्धति है। हमारी शिक्षा सिर्फ जानकारी, सूचना, डेटा तक सीमित नहीं। हमारा शिक्षक गुरु है और गुरु का अर्थ अंधरे से उजाले की ओर ले जाने वाला। हमारी शिक्षा के साथ संस्कार जुड़े हैं। संस्कृति जुड़ी है, सांस्कृतिक मूल्य जुड़े हैं और धर्म जुड़ा है। यह किसी धर्म या मजहब की बात नहीं है। शिक्षा हमारे धर्म का हिस्सा है। धार्मिक होने के लिए शिक्षित होना जरूरी है।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Nov 2022 09:48:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टेक्नालाजी व इंफ्रास्ट्रक्चर से खेती में बढ़ेंगे रोजगार, किसानों को होगा लाभ: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में टेक्नालाजी का उपयोग बढ़ाने और गांव-गांव इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए सरकार काम कर रही है, जिससे खेती में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पढ़े-लिखे युवा गांवों में ही रहकर कृषि की ओर आकर्षित होंगे। तोमर ने कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/technology-and-infrastructure-will-increase-employment-in-agriculture-farmers-will-benefit-tomar/article-36676"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/narendra-singh-tomar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह ने कहा है कि कृषि क्षेत्र में टेक्नालाजी का उपयोग बढ़ाने और गांव-गांव इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए सरकार काम कर रही है, जिससे खेती में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पढ़े-लिखे युवा गांवों में ही रहकर कृषि की ओर आकर्षित होंगे। तोमर ने कहा कि अमृतकाल में हिंदुस्तान की कृषि की विश्व प्रशंसा करें, यहां ज्ञान लेने आएं, ऐसा हमारा गौरव हों, विश्व कल्याण की भूमिका निर्वहन करने में भारत समर्थ हों। तोमर ने यह बात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा आयोजित व्याख्यान श्रंखला की समापन कड़ी में कही। यह श्रंखला 17 मार्च 2021 को शुरू हुई थी और विभिन्न विषयों पर 75 व्याख्यान विशेषज्ञों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, नीति-निमार्ताओं, आध्यात्मिक नेताओं, प्रेरक वक्ताओं और सफल उद्यमियों द्वारा दिए गए। समापन अवसर पर तोमर ने ‘आत्मनिर्भर कृषि’ पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार इस बात की कोशिश करते रहे हैं कि कृषि क्षेत्र को सरकार का पूरा सहयोग-समर्थन मिलें, इसलिए अनेक योजनाओं का सृजन भी किया गया है, जिन पर राज्य सरकारों के सहयोग से काम चल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से उद्बोधन में भी कृषि क्षेत्र को पुन: महत्व दिया है, जो इस क्षेत्र में तब्दीली लाने की उनकी मंशा प्रदर्शित करता है। प्रधानमंत्री ने आह्वान किया था कि किसानों की आय दोगुनी होना चाहिए, कृषि में टेक्नालाजी का उपयोग व छोटे किसानों की ताकत बढ़ना चाहिए, हमारी खेती आत्मनिर्भर कृषि में तब्दील होना चाहिए, पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए, कृषि की योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता होना चाहिए, अनुसंधान बढ़ना चाहिए, किसानों को महंगी फसलों की ओर जाना चाहिए, उत्पादन व उत्पादकता बढ़ने के साथ ही किसानों को उनकी उपज के वाजिब दाम मिलना चाहिए। इस आह्वान पर राज्य सरकारें, किसान भाई-बहन, वैज्ञानिक पूरी ताकत के साथ जुटे हैं और इसमें आईसीएआर की भी प्रमुख भूमिका हो रही है। पिछले दिनों में किसानों में एक अलग प्रकार की प्रतिस्पर्धा रही है कि आमदनी कैसे बढ़ाई जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आईसीएआर व कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि के विकास में बहुत अच्छा काम किया</h3>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने भारतीय कृषि की विकास यात्रा और आईसीएआर के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि कृषि उत्पादन में आज हम विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हैं और खाद्यान्न की अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ अन्य देशों को भी उपलब्ध करा रहे हैं। यह यात्रा और बढ़े, इसके लिए भारत सरकार प्रयत्नशील है। खेती व किसानों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। आईसीएआर व कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि के विकास में बहुत अच्छा काम किया है। उनकी कोशिश रही है कि नए बीजों का आविष्कार करें, उन्हें खेतों तक पहुंचाएं, उत्पादकता बढ़े, नई तकनीक विकसित की जाएं और उन्हें किसानों तक पहुंचाया जाएं। जलवायु अनुकूल बीजों की किस्में, फोर्टिफाइड किस्में जारी करना इसमें शामिल हैं। सभी क्षेत्रों में वैज्ञानिकों ने कम समय में अच्छा काम किया, जिसका लाभ देश को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईसीएआर बहुत ही महत्वपूर्ण संस्थान हैं, जिसकी भुजाएं देशभर में फैली हुई हैं। कृषि की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संस्थान लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आईसीएआर परिवार व समस्त संबद्ध संस्थान, वैज्ञानिक और कृषि विश्वविद्यालयों को संकल्प करना चाहिए कि एक निर्धारित अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो सकें, देश की प्रतिष्ठा दुनिया के मानचित्र में प्रतिष्ठापित हो सकें, दुनिया को हम कृषि क्षेत्र में योगदान दे सकें।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Aug 2022 17:14:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>देश में कृषि की प्रधानता आगे भी रहेगी व विस्तार होगा: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि कृषि भारत की ताकत है और इसकी प्रधानता है जो आगे भी रहने वाली है, बल्कि इसका विस्तार भी होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने स्कूली शिक्षा में कृषि पाठ्यक्रम को मुख्यधारा में लाने के संबंध में आज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/the-primacy-of-agriculture-in-the-country-will-continue-and-expand-tomar/article-34509"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/tomar.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि कृषि भारत की ताकत है और इसकी प्रधानता है जो आगे भी रहने वाली है, बल्कि इसका विस्तार भी होगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने स्कूली शिक्षा में कृषि पाठ्यक्रम को मुख्यधारा में लाने के संबंध में आज विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया। इसका शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने किया। इस अवसर पर तोमर ने कहा कि देश में कृषि क्षेत्र का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है और बड़ी आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है। कृषि भारत की ताकत है और इसकी प्रधानता है जो आगे भी रहने वाली है, बल्कि इसका विस्तार भी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके मद्देनजर नई शिक्षा नीति के साथ कृषि जगत को जोड़ने का प्रयत्न आईसीएआर ने किया है। इस आयोजन का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत, बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए कृषि विज्ञान सहित व्यावसायिक पाठ्यक्रम विकसित करने की दिशा में कृषि शिक्षा प्रणाली को डिजाइन करने पर केंद्रित है। इसलिए, प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालय स्तर पर एक नया प्रतिमान पेश किया जाएगा, जिसमें कृषि और संबद्ध विज्ञान में छात्रों और युवाओं के विकास के लिए उच्च स्तर पर व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। परिणामस्वरूप, यह विचार-मंथन सत्र कृषि को पाठ्यक्रम में, एक विषय के रूप में शामिल करने के लिए नीति एवं विकास में योगदान देगा और विद्यार्थियों को कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में करियर तलाशने का विकल्प प्रदान करेगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कृषि में निरंतरता रहे एवं प्रत्येक भारतवासी का इससे जुड़ाव रहें</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मेरूदंड की तरह देश का साथ दिया है। हाल ही में कोविड के संकट काल में भी हमारे कृषि क्षेत्र ने सकारात्मक प्रदर्शन किया है। इस क्षेत्र में निरंतर सुधार, निवेश बढ़ाने व तकनीक का समर्थन करने की आवश्यकता रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहीं चाहते हैं कि इन माध्यमों से किसान समृद्धता की ओर बढ़े और इसी अनुरूप सरकार ने अनेक ठोस कदम उठाए हैं। खेती में अनेक आयाम हैं, जिन पर एक साथ काम करना आवश्यक है, वहीं चुनौतियों का भी रफ्तार से समाधान किया जाता रहा है। इसी कड़ी में स्कूली शिक्षा में कृषि पाठ्यक्रम भी स्थान पाएं तथा कृषि में निरंतरता रहे एवं प्रत्येक भारतवासी का इससे जुड़ाव रहें, यह जरूरी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कृषि का क्षेत्र रोजगार के बहुत सारे अवसर</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने कहा कि बच्चों में कृषि के प्रति रूझान स्कूलों से ही रहेगा तो वे आगे चलकर कालेज की पढ़ाई के बाद खेती की ओर उन्मुख हो सकेंगे। हमारे किसान स्वाभाविक रूप से स्किल्ड वर्कर है। वर्तमान परिस्थितियों में, आने वाले कल में कृषि का क्षेत्र रोजगार के बहुत सारे अवसर सृजित करने वाला है। उन्होंने इस संबंध में,केंद्र सरकार द्वारा कृषि को टेक्नालाजी से जोड़ने एवं एक लाख करोड़ रुपये का कृषि अवसंरचना कोष स्थापित करने का उल्लेख किया। एसोसिएशन आफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की महासचिव डा. पंकज मित्तल एवं एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम विकास प्रमुख अनिता नूना ने भी संबोधित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">डेयर के सचिव व आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र भी मौजूद थे। आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) डॉ. आर.सी. अग्रवाल ने देश में कृषि शिक्षा की वर्तमान स्थिति व कृषि शिक्षा को स्कूल स्तर पर लाने की आवश्यकता के बारे में प्रेजेन्टेशन के माध्यम से जानकारी दी। निदेशक डा. राजेंद्र प्रसाद ने आभार माना। विभिन्न सत्रों में आईसीएआर, एनसीईआरटी, सीबीएसई के अधिकारियों सहित स्कूलों के प्राचार्य, वरिष्ठ शिक्षक व अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए ।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिनिधियों ने राज्य-केंद्र स्तर पर आवश्यक नीति स्तर के हस्तक्षेप, मौजूदा पाठ्यक्रम पर पुनर्विचार के लिए शिक्षकों के संयुक्त कार्य समूह के विकास व स्कूल स्तर पर कृषि में विषय ज्ञान,शिक्षण कौशल बढ़ाने के लिए आवश्यक परिवर्तनों पर विचार किया। स्कूली शिक्षा विशेषज्ञ, पैनलिस्ट, पेशेवरों व आईसीएआर के विशेषज्ञों के विमर्श के आधार पर उम्मीद है कि अपनी तरह की यह अनूठी पहल छात्रों व युवाओं को बेहतर कृषि विकास के लिए तैयार करने हेतु स्कूली पाठ्यक्रम में बहुत आवश्यक बदलाव की भावना पैदा करेगी।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 16:40:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>इजरायल के सहयोग से बागवानी के उत्कृष्टता केंद्रों का बेहतर संचालन: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) और इजरायल के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ओडेड फोरर के बीच आज गोलमेज बैठक का संसद भवन,यरुशलम में आयोजन किया गया। इस दौरान दोनों देशों में कृषि विकास की क्षमता के मद्देनजर कृषि, जल प्रबंधन, पर्यावरण एवं ग्रामीण विकास के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/better-operation-of-horticulture-centers-in-collaboration-with-israel-narendra-singh-tomar/article-33269"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/narendra-singh-tomar1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) और इजरायल के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ओडेड फोरर के बीच आज गोलमेज बैठक का संसद भवन,यरुशलम में आयोजन किया गया। इस दौरान दोनों देशों में कृषि विकास की क्षमता के मद्देनजर कृषि, जल प्रबंधन, पर्यावरण एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीकों, क्षमता निर्माण, ज्ञान हस्तांतरण और समर्थन के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान तोमर ने उम्मीद जताई कि इजराइल के सहयोग से भारत में उत्कृष्टता केंद्रों का बेहतर संचालन हो रहा है, जो आगे सभी राज्यों में स्थापित किए जा सकेंगे। बातचीत के दौरान, माशाव के कृषि सहयोग कार्यक्रमों और भारत में अन्य हितधारकों के पेशेवर प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना की गई। तोमर ने कहा कि भारत सरकार को क्षमता निर्माण और ज्ञान के हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत में माशाव की गतिविधियों को अपनाने की संभावनाओं का पता लगाना है, जिसके लिए प्रत्येक राज्य में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">देश में बागवानी से हो रहा फायदा</h4>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले दो दिनों में उन्होंने प्रतिनिधिमंडल सहित, कृषि में इजराइल की मजबूती और नवाचार को देखा है। उन्होंने इजराइल के रेगिस्तानी क्षेत्रों को वेजिटेबल बास्केट में बदलने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रौद्योगिकी, मशीनीकरण, स्मार्ट एवं टिकाऊ पद्धतियों और कृषि व्यवसाय मॉडल के साथ किसानों को सशक्त बनाकर कृषि क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन ला रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">तोमर (Narendra Singh Tomar) ने खुशी जताते हुए कहा कि बागवानी में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के मॉडल ने गति पकड़ी है और अब 12 भारतीय राज्यों में 29 इजरायली उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) पूरी तरह से कार्य कर रहे हैं। इजरायल के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री फोरर के साथ भारतीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक के दौरान विचार-विमर्श, देश में कृषि विकास की दिशा में बेहद फायदेमंद रहा।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 May 2022 21:09:33 +0530</pubDate>
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                <title>कपास की खेती बहुत महत्वपूर्ण, भारत सबसे बड़ा उत्पादक: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि कपास की खेती देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है और लाखों किसान इस खेती में जुटे हुए हैं। तोमर ने कहा, ‘हमारा कृषि क्षेत्र, अर्थव्यवस्था की रीढ़ के समान है। कृषि क्षेत्र में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/cotton-cultivation-is-very-important-india-is-the-largest-producer/article-32364"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/tomar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि कपास की खेती देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है और लाखों किसान इस खेती में जुटे हुए हैं। तोमर ने कहा, ‘हमारा कृषि क्षेत्र, अर्थव्यवस्था की रीढ़ के समान है। कृषि क्षेत्र में कपास की भूमिका महत्वपूर्ण है। खाद्यान्न और कपड़े के बिना काम नहीं चल सकता है, खाद्यान्न का तो हमारे देश में बंपर उत्पादन हो रहा है, वहीं कपास की खेती भी और उन्नत होनी चाहिए, जिसके लिए सरकार तत्परता से प्रयत्नशील है। कपास सेक्टर में करोड़ों लोगों को रोजगार मिला हुआ है, वहीं व्यावसायिक फसल की दृष्टि से किसानों के लिए कपास की खेती का महत्व है। कपास के क्षेत्र में किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों का अनुसंधान तथा उद्योगों का योगदान है, वहीं उत्पादकता बढ़ाने को सरकार बहुत गंभीरता से ले रही है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कपास के विभिन्न पहलुओं पर काफी गंभीर विचार-मंथन हुआ</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सीटी) के अनुसंधान संघ- कॉटन डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएशन के स्वर्ण जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए तोमर ने कहा कि कोविड के प्रतिकूल समय में भी खेती से जुड़े लोगों ने बेहतर भूमिका का निर्वहन किया है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। इस समारोह के विभिन्न सत्रों के दौरान पैनलिस्टों के बीच कपास के विभिन्न पहलुओं पर काफी गंभीर विचार-मंथन हुआ, जिसके आधार पर कपास के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार करके आगे काम किया जा सकता है, जो परिवर्तन लाने में मदद करेगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार कपास क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी ।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कपास भारत में सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसलों में से एक</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">राज्य मंत्र दर्शना विक्रम जरदोश ने कहा कि कपास भारत में सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसलों में से एक है और लाखों कपास किसानों सहित संबद्ध क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार पैदा करके भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए रीढ़ के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा, कपड़ा और परिधान के अधिकांश निर्यात उत्पाद भी कपास आधारित हैं। अब भारत का कृषि निर्यात तेजी से बढ़ रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
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                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 14:28:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अपने बयान से पलटे कृषि मंत्री तोमर, कहा-कृषि सुधार कानून पुन: लाने का कोई प्रस्ताव नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया है कि कृषि सुधार कानून पुन: लाने का सरकार का कोई प्रस्ताव या विचार नहीं है। तोमर ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों का मान रखने के लिए कृषि सुधार कानून वापस लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/agriculture-minister-tomar-said-there-is-no-proposal-to-bring-agriculture-reform-law-again/article-29451"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/tomar-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया है कि कृषि सुधार कानून पुन: लाने का सरकार का कोई प्रस्ताव या विचार नहीं है। तोमर ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों का मान रखने के लिए कृषि सुधार कानून वापस लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने विगत साढ़े सात वर्षों में किसानों के कल्याण एवं कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषकों की आय सशक्तिकरण के लिए छह हजार रूपए वार्षिक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रदान की जा रही है। प्राकृतिक आपदा से फसल को क्षति की स्थिति में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बड़ा संबल बनकर उभरी है। एक लाख करोड़ रूपए के कृषि अवसंरचना कोष एवं 10 हजार कृषक उत्पादक संगठनों की स्थापना से कृषि क्षेत्र में बड़े नवाचार किए जा रहे है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कांग्रेस भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट 2006 में आई थी लेकिन कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने इसे लागू करने की जगह दबाए रखा, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्वामीनाथन कमेटी की अनुशंसाओं को किसानों के हित में लागू करने का कार्य किया गया है। तोमर ने कहा कि कांग्रेस अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए व्यर्थ के भ्रम फैलाने का लगातार प्रयास कर रही है, किसानों को इससे सावधान रहना चाहिए।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Dec 2021 15:37:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>क्या केन्द्र सरकार फिर से लाएगी कृषि कानून, जानें कृषि मंत्री तोमर ने क्या कहा&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम में कहा कि तीनों विवादित कृषि कानूनों को जिसे पिछले महीने केंद्र सरकार की ओर से लाखों किसानों द्वारा उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद वापस ले लिया गया, बाद में फिर से पेश किया जा सकता है। इस कानून के खिलाफ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/will-the-central-government-bring-agricultural-law-again-know-what-agriculture-minister-tomar-said/article-29430"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/narendra-singh-tomar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम में कहा कि तीनों विवादित कृषि कानूनों को जिसे पिछले महीने केंद्र सरकार की ओर से लाखों किसानों द्वारा उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद वापस ले लिया गया, बाद में फिर से पेश किया जा सकता है। इस कानून के खिलाफ सालभर किसानों ने प्रदर्शन किया था। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर विवादास्पद कृषि कानूनों को खत्म किए जाने को लेकर ‘कुछ लोगों’ को दोषी ठहराते रहे हैं तो वहीं इन विवादित कानूनों को निरस्त किए जाने के बाद विपक्ष सरकार पर लगातार आरोप लगा रही है कि उसकी ओर से यह फैसला कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए लिया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">सरकार निराश नहीं</h4>
<p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कृषि मंत्री तोमर ने कहा, ‘हम कृषि संशोधन कानून लेकर आए। लेकिन कुछ लोगों को ये कानून पसंद नहीं आए, जो आजादी के 70 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक बड़ा सुधार था। उन्होंने कहा, ‘लेकिन सरकार निराश नहीं है। हम एक कदम पीछे हटे हैं और हम फिर आगे बढ़ेंगे क्योंकि किसान भारत की रीढ़ हैं। और जब रीढ़ मजबूत होगी तो देश भी मजबूत होगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Dec 2021 18:31:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>किसान अपनी आपत्ति तर्क के साथ रखें, सरकार समाधान करेगी: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि किसान संगठन कृषि सुधार कानूनों के संबंध में अपनी आपत्ति तर्क के साथ रखें, सरकार उसका समाधान करेगी। तोमर ने संवाददाता सम्मेलन में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि आंदोलनकारी किसान संगठन सरकार के साथ जब चर्चा करना चाहेंगे, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/farmers-should-put-their-objection-with-logic-government-will-solve-it-tomar/article-24310"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/tomar.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि किसान संगठन कृषि सुधार कानूनों के संबंध में अपनी आपत्ति तर्क के साथ रखें, सरकार उसका समाधान करेगी। तोमर ने संवाददाता सम्मेलन में एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि आंदोलनकारी किसान संगठन सरकार के साथ जब चर्चा करना चाहेंगे, तब बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान संगठन के साथ 11 दौर की बातचीत हुई, उनकी आपत्ति क्या है, उसका जबाव न तो संसद में दिया गया और न ही किसान संगठनों ने दिया। कानूनों की खामियों का सरकार निराकरण करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि किसानों को सरकार की ओर से चर्चा के दौरान ठोस प्रस्ताव दिया गया। कृषि सुधार कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित रखा गया है। सरकार किसानों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है और उनका आदर एवं सम्मान करती है। कृषि कानून किसानों के हित में हैं। पिछले सात साल के दौरान किसानों की आय बढ़ाने के लिए अभूतपूर्व निर्णय किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि किसान पिछले छह माह से राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर तीन कृषि सुधार कानूनों को समाप्त करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jun 2021 18:59:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>3 लाख परिवारों को मिल चुका है अधिकार अभिलेख: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को कहा है कि अब तक देश के 2,500 गांवों के तीन लाख परिवारों को स्वामित्व योजना के तहत उनकी संपत्ति के अधिकार अभिलेख प्रदान किए जा चुके हैं। तोमर ने आज ‘स्वामित्व योजना’ के क्रियान्यवन को लेकर राज्यों के पंचायती […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/3-lakh-families-have-got-rights-records-tomar/article-22974"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/3-lakh-families-have-got-rights-records-tomar.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को कहा है कि अब तक देश के 2,500 गांवों के तीन लाख परिवारों को स्वामित्व योजना के तहत उनकी संपत्ति के अधिकार अभिलेख प्रदान किए जा चुके हैं। तोमर ने आज ‘स्वामित्व योजना’ के क्रियान्यवन को लेकर राज्यों के पंचायती राज एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इसके साथ ही 40,514 गांवों में ड्रोन से सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस साल के बजट में सरकार ने स्वामित्व योजना को पूरे देश में लागू करने की घोषणा की है और इसके लिए वित्तीय प्रावधान भी किया गया हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;">देश के सभी गांवों में लागू किया जा रहा है</h4>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से यह आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वालों को उनके मकान का मालिकाना हक प्रदान करने वाला अभिलेख प्राप्त हो सके। सामान्यत: लोगों को विश्वास नहीं हो पाता था कि यह योजना जमीन पर उतर भी सकती है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने गत वर्ष 24 अप्रैल को छह राज्यों में पायलट चरण के रूप में स्वामित्व योजना प्रारंभ की है और अब इसे देश के सभी गांवों में लागू किया जा रहा है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इस योजना से जुड़ने की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण होगी</h4>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने कहा कि पायलट चरण के अधिकांश राज्यों ने स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में प्रशंसनीय कार्य किया है, अन्य राज्यों को भी इसका अनुकरण करना है। तोमर ने कहा कि पंचायती राज मंत्रालय अन्य सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय कर इस योजना को मूर्त रूप दे रहा है। सरकार के सभी संबंधित मंत्रालय एवं संस्थान पूर्ण तत्परता से कार्य कर रहे हैं एवं इसके सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर हो रहे हैं। बचे हुए राज्यों से भी इस योजना से जुड़ने की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने को कहा गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की संपत्ति का भी बाजार मूल्य तय हो पाएगा, इसका प्रावधान किया गया हैं। राज्य सरकारों को, स्वामित्व योजना को और अधिक लोकप्रिय एवं आकर्षक बनाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करना चाहिए। राज्यों में यदि स्वामित्व योजना के अंतर्गत अधिकार अभिलेख वितरण का माह में कोई एक दिन निश्चित कर लिया जाए तो इससे लोगों को उस दिन की प्रतीक्षा भी रहेगी और आसानी भी होगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ग्रामीणों के जीवन में एक क्रांतिकारी परिवर्तन</h4>
<p style="text-align:justify;">कृषि मंत्री ने कहा- अपने मकान का मालिकाना हक मिलना ग्रामीणों के जीवन में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है, भविष्य में इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम दृष्टिगोचर होंगे, इसलिए इस अवसर को एक उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए। सम्मेलन में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव सुनील कुमार, भू-संसाधन विभाग के सचिव अजय तिर्की के साथ ही सर्वे ऑफ़ इंडिया, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, नीति आयोग एवं राज्य सरकारों के पंचायती राज एवं राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Apr 2021 21:05:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद में कृषि मंत्री ने कहा-कृषि सुधार कानून क्रांतिकारी कदम</title>
                                    <description><![CDATA[ किसानों की आय बढ़ेगी विपक्ष बताए कानून में क्या काला है नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने सरकार के कृषि सुधार कानूनों को क्रांतिकारी कदम बताते हुए राज्यसभा में शुक्रवार को कहा कि इससे किसानों की आय बढेÞगी और उनके जीवन में खुशहाली आएगी। तोमर ने सदन में राष्ट्रपति के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/agricultural-reform-law-a-revolutionary-step-farmers-income-will-increase-tomar/article-21519"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/tomar.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong> किसानों की आय बढ़ेगी</strong></h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h4><strong>विपक्ष बताए कानून में क्या काला है</strong></h4>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने सरकार के कृषि सुधार कानूनों को क्रांतिकारी कदम बताते हुए राज्यसभा में शुक्रवार को कहा कि इससे किसानों की आय बढेÞगी और उनके जीवन में खुशहाली आएगी। तोमर ने सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद के प्रस्ताव पर जारी चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार गांव, गरीब और किसानों के आर्थिक उत्थान के लिए समर्पित है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस सदस्यों के शोरगुल के बीच उन्होंने कहा कि किसानों से फसलों की खरीद पारदर्शी तरीके से हो और उनके उत्पाद का वाजिब कीमत मिल सके इसके लिए एक हजार मंडियों को ई- नाम योजना से जोड़ा गया है तथा एक हजार और मंडियों को इससे जोड़ने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि केन्द्रीय ठेका कृषि कानून को राज्यों से बेहतर बनाया गया है और इससे किसान को किसी भी समय निकलने का प्रावधान किया गया है जबकि व्यापारियों को किसानों के भुगतान के बाद ही इससे अलग होने की व्यवस्था की गयी है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>विपक्ष ने किसानों को बरगलाया</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने कहा कि कृषि सुधार कानूनों को लेकर एक राज्य के किसानों को बरगलाया गया है और वे गलतफहमी के शिकार हुए हैं। किसानों की जमीन पर व्यापारियों के कब्जे को लेकर बरगलाया गया है। उन्होंने कहा कि ठेका कृषि में कोई यह प्रावधान बताये जिसमें जमीन लेने की बात हो। उन्होंने कहा कि विपक्ष कृषि सुधार कानूनों को काला कानून बता रहा है और ऐसा कहने का अधिकार भी उसे है। उन्होंने किसान यूनियनों से कानून में काला क्या है, इसे बताने को कहा था ताकि सरकार उसे ठीक कर सके लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला। किसानों के खिलाफ प्रावधानों की भी जानकारी नहीं दी गई।</p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Feb 2021 14:45:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि सुधार कानूनों का विकल्प दें किसान: तोमर</title>
                                    <description><![CDATA[तोमर ने कहा कि सरकार ने किसान संगठनों के साथ एक बार नहीं, नौ बार घंटों बातचीत की है। किसानों से आग्रह किया गया है कि वे कानूनों पर बिंदुवार चर्चा करें ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/give-farmers-the-option-of-agricultural-reform-laws-tomar/article-21134"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/tomar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को किसान संगठन से तीन कृषि सुधार कानूनों को वापस लेने की हठधर्मिता को छोड़ कर इनका विकल्प प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है। तोमर ने अपने बयान में कहा कि सरकार खुले मन से किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि 19 जनवरी की वार्ता में किसान संगठन तीन कृषि सुधार कानूनों के संबंध में बिंदुवार बातचीत करें और इन कानूनों का विकल्प सुझाए। उच्चतम न्यायालय ने इन कानूनों का क्रियान्वयन रोक दिया है। ऐसे में किसान संगठन को ठोस विकल्प देना चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार पूरे देश के हित में कोई कानून बनती है। देश के अधिकांश किसान, वैज्ञानिक, कृषि से जुड़े लोग इसके साथ हैं लेकिन किसान संगठन टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे हैं और अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तोमर ने कहा कि सरकार ने किसान संगठनों के साथ एक बार नहीं, नौ बार घंटों बातचीत की है। किसानों से आग्रह किया गया है कि वे कानूनों पर बिंदुवार चर्चा करें । उनका कोई सुझाव है तो सरकार उस पर संशोधन करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान संगठनों को पहले ही बिंदुवार चर्चा का अनुरोध किया था लेकिन उस पर ठोस जवाब नहीं आया ।फिर सरकार ने ही कुछ बिंदुओं की पहचान की और मंडी , व्यापारियों के निबंधन तथा अनुबंध कृषि को लेकर कई रास्ते सुझाए । किसानों और व्यापारियों में विवाद की स्थिति में एसडीएम कोर्ट की जगह न्यायालय का विकल्प भी दिया गया। कृषि मंत्री ने कहा कि पराली जलाने संबधी और बिजली कानून भविष्य की बात है लेकिन सरकार ने उस पर भी बात की है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Jan 2021 16:28:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेघालय की “लकडोंग हल्दी” की अमेरिका में लाॅन्चिंग</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मेघालय के मुख्यमंत्री काॅनराड के. संगमा ने आज सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मेघालय की प्रसिद्ध “लकडोंग हल्दी” अमेरिका के बाजार में विक्रय के लिए पेश की। इस वर्चुअल समारोह में तोमर ने मेघालय […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/launching-of-meghalayas-lucknow-turmeric-in-america/article-20620"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/narendra-singh-tomar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायत राज तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मेघालय के मुख्यमंत्री काॅनराड के. संगमा ने आज सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मेघालय की प्रसिद्ध “लकडोंग हल्दी” अमेरिका के बाजार में विक्रय के लिए पेश की। इस वर्चुअल समारोह में तोमर ने मेघालय के किसानों की अथक मेहनत की तारीफ करते हुए कहा कि अन्नदाताओं की प्रगति के लिए केंद्र सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई है। मेघालय सहित पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सरकार हरसंभव मदद करेगी।तोमर ने कृषि प्रधान राज्य मेघालय के मुख्यमंत्री, सभी किसानों एवं अन्य निवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आज पूर्वोत्तर के इस राज्य की लकडोंग हल्दी की प्रसिद्धि सात समुंदर पार पहुंच गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मेघालय के जयन्तिया हिल्स जिले में एक कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) ने लकडोंग की हल्दी से न्यूट्रास्यूटिकल्स बनाने के लिए अमेरिका की एक कंपनी के साथ सहयोग किया है। ऐसे और भी प्रयासों की जरूरत है तथा राज्य में नए एफपीओ भी बनाए जाएं ताकि छोटे एवं गरीब किसानों को सहायता मिल सकें। तोमर ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मेघालय में कृषि एवं औषधियों के क्षेत्र में प्रचुर संभावनाएं है। मेघालय की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। किसान अलग जलवायु में भी श्रेष्ठ किस्म की हल्दी सहित अन्य फसलें उगा रहे रहे हैं। तोमर ने कहा कि भारत, हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है जो वैश्विक उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। वर्ष 2019-20 के अनुमान के मुताबिक, भारत ने 2.50 लाख हेक्टेयर केअनुमानित क्षेत्र से 9.40 लाख टन हल्दी का उत्पादन किया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Dec 2020 12:40:24 +0530</pubDate>
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