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                <title>Syl Canal - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>SYL Canal: हरियाणा को मिलेगा अब पानी, जल्द ही हरियाणा-पंजाब में बन सकती है सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[SYL Canal:  नई दिल्ली, सच कहूँ/अश्वनी चावला। सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर को लेकर बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा सीएम की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अगुआई में मीटिंग हुई। बैठक में भगवंत मान ने कहा कि उन्हें पानी देने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन शर्त ये है कि पहले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/haryana-will-now-get-water-soon-haryana-punjab-may-reach-an-agreement/article-73215"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/syl-canal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>SYL Canal:  नई दिल्ली, सच कहूँ/अश्वनी चावला।</strong> सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर को लेकर बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा सीएम की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अगुआई में मीटिंग हुई। बैठक में भगवंत मान ने कहा कि उन्हें पानी देने में कोई दिक्कत नहीं, लेकिन शर्त ये है कि पहले पंजाब को रावी का पानी मिले।<br />
मान ने कहा कि एसवाईएल पर पंजाब का स्पष्ट रूख है कि ये नहीं बनेगी। हरियाणा हमारा भाई है, हमें पानी मिलने पर आगे पानी सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है। मीटिंग से पहले सीएम मान और सीएम सैनी ने गले मिलकर एक-दूसरे का<br />
स्वागत किया। मान ने मीटिंग के बाद मीडिया से कहा कि बातचीत बहुत अच्छे माहौल में हुई है। हरियाणा सीएम ने भी कहा कि मीटिंग सार्थक रही। पंजाब-हरियाणा दोनों भाई हैं। दोनों का एक ही बेहड़ा (आंगन) है। इस मुद्दे का रास्ता निकालने का काम किया जा रहा है। पंजाब के सीएम ने कहा कि मीटिंग से एक उम्मीद बनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहलगाम अटैक के बाद पाकिस्तान से रद्द हुआ इंडस वाटर समझौते का पानी पंजाब लाया जाए। झेलम का पानी पंजाब नहीं आ सकता है, लेकिन चिनाब और रावी का पानी आ सकता है। पौंग, रंजीत सागर डैम और भाखड़ा डैम में होते हुए ये पानी आ सकता है। हमें उस पानी को आगे हरियाणा को देने से क्या दिक्कत है? हरियाणा तो हमारा भाई है। हम भाई कन्हैया के वारिस हैं, जिन्होंने दुश्मनों को पानी पिलाया था। मैंने मंत्री साहब से कहा कि 23 मिलियन लीटर फीट (एमएएफ) पानी वहां से जाएगा। हम तो दो-तीन एमएएफ के लिए लड़ रहे हैं, तो हमें क्या दिक्कत रह जाएगी? दो-चार नहरें पंजाब में बन जाएंगी। इससे पंजाब फिर से रिपेरियन बन जाएगा। उनकी बात पर मंत्री पाटिल ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। SYL Canal</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले की बैठकें बिना नतीजे रही थीं। 212 किलोमीटर लंबी इस नहर में हरियाणा का 92 किलोमीटर हिस्सा बन चुका है, जबकि पंजाब के 122 किलोमीटर हिस्से का निर्माण अब तक अधूरा है। यह मीटिंग 13 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाने की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2002 में हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाया था और पंजाब को नहर निर्माण का आदेश दिया था, लेकिन 2004 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में कानून पास कर 1981 के समझौते को रद्द कर दिया था।</p>
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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 12:57:16 +0530</pubDate>
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                <title>हरियाणा तथा पंजाब के बीच एसवाईएल बैठक रही बेनतीजा</title>
                                    <description><![CDATA[एसवाईएल बनाने को लेकर नहीं बनी सहमति चंडीगढ़। पंजाब तथा हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद के समाधान के लिये आज हुयी बैठक बेनतीजा रही। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि एसवाईएल के निर्माण तथा पानी को लेकर कोई सहमति नहीं हो सकी। उन्होंने कहा,“ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/punjab-haryana-cm-meeting-begins-on-syl-canal-issue/article-38966"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/cm-manohar-lal-khattar1.jpg" alt=""></a><br /><h4><strong>एसवाईएल बनाने को लेकर नहीं बनी सहमति</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़।</strong> पंजाब तथा हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के बीच सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद के समाधान के लिये आज हुयी बैठक बेनतीजा रही। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि एसवाईएल के निर्माण तथा पानी को लेकर कोई सहमति नहीं हो सकी। उन्होंने कहा,“ हम पानी को लेकर नहीं नहर बनाने पर अपनी बात कर रहे थे जो पंजाब को मान्य नहीं। अब हम अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री गजेन्द्र शेखावत को देंगे और उच्चतम न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे।<br />
दूसरी तरफ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पत्रकारों से कहा,“ हमने अपना पक्ष मजबूती से रखा लेकिन हरियाणा एसवाईएल को बनाने पर अपनी बात पर अड़ा रहा। हम साफ कह चुके हैं कि जब पानी ही नहीं तो नहर निर्माण की जरूरत कहां। सालों पहले जब पानी को लेकर समझौता हुआ था, तब पंजाब के पास 18 एमएफ पानी था, जो अब 12 क्यूसिक रह गया है। अब सतलुज और ब्यास दरिया नदियां बनकर रह गयीं हैं, उनमें जल स्तर काफी कम हो गया है जिसमें से किसी अन्य राज्य को देना असंभव है। पंजाब के पास सरप्लस पानी नहीं। पानी का भूजल स्तर काफी नीचे चला गया जिससे ज्यादातर जिले डार्क जोन घोषित किये जा चुके हैं। पंजाब के पास कुल 27 प्रतिशत पानी है तथा 73 फीसदी जमीन से निकाला जा रहा। ”<br />
मान ने कहा कि हम अपनी बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष रखेंगे। इससे पहले बैठक करीब दो घंटा चली। श्री मान ने कहा कि उन्होंने कई दिनों से बैठक को लेकर होमवर्क किया था और मजबूती से तथ्यों पर आधारित अपनी पक्ष रखा। इससे पहले किसी ने भी ऐसा नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जल संबंधी सारे समझौते रद्द कर दिये थे। केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी। हरियाणा में चुनाव आने से पहले केन्द्र ने राष्ट्रपति से सुझाव मांग लिया। पानी के समझौते 25 साल बाद रिव्यू किये जाते हैैं, लेेकिन इसे नहीं किया गया। ज्ञातव्य है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर एसवाईएल विवाद के समाधान के लिये आज दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई लेकिन दोनों ने साफ कर दिया कि वह अपने राज्याें के हिताें से कोई समझौता नहीं करेंगे ।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Oct 2022 12:44:12 +0530</pubDate>
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                <title>वैज्ञानिक नजरिया ही समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[सतलुज-यमुना लिंक नहर ( SYL Canal ) का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पंजाब व हरियाणा दोनों राज्यों की सरकारों ने 14 अक्टूबर को बैठक करने का निर्णय लिया है। भले ही पहले भी कई बैठकें हुई, जिनमें कोई समाधान नहीं निकल सका लेकिन बातचीत का सिलसिला शुरू होना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/syl-canal-issue/article-38930"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/syl-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सतलुज-यमुना लिंक नहर ( SYL Canal ) का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पंजाब व हरियाणा दोनों राज्यों की सरकारों ने 14 अक्टूबर को बैठक करने का निर्णय लिया है। भले ही पहले भी कई बैठकें हुई, जिनमें कोई समाधान नहीं निकल सका लेकिन बातचीत का सिलसिला शुरू होना एक शुभ संकेत है। यह प्रक्रिया न्यायालय के बाहर बातचीत से समस्या के समाधान की है। मामला भले ही पानी का है, लेकिन इससे पहले भी बात नहर के निर्माण की है। नहर का हरियाणा वाला हिस्सा बन चुका है, दूसरी तरफ पंजाब में नहर का निर्माण अभी अधूरा है। तकनीकी तौर पर नहर का निर्माण व पानी अलग-अलग मुद्दे बने हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लंबे समय तक यह नहर विवाद व राजनीतिक फायदे-नुक्सान का कारण बन रही है। विवाद ना सुलझने का कारण यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। निर्माण मामले में पंजाब अपना केस हार गया था लेकिन पंजाब में पिछले तीन दशकों में कोई भी सरकार पानी देने को तैयार नहीं थी इसीलिए पंजाब सरकार नहर के निर्माण के लिए तैयार ही नहीं हुई। दूसरी तरफ हरियाणा नहर के पानी पर अपने हक जता रहा है। हरियाणा के लिए यह संतुष्टिजनक बात है कि नहर के निर्माण संबंधी फैसला उसके समर्थन में आ चुका है। दरअसल, इस मामले में राजनीति ही इतनी हो चुकी है कि कोई भी सरकारें या राजनीतिक पार्टी अपने पुराने रूख को बदलने के लिए तैयार नहीं थी। वास्तव में इस पेचीदे मामले का वैज्ञानिक नजरिये से समाधान निकाला जाना चाहिए। दोनों राज्य पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। भू-जल स्तर लगातार गिरता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों राज्यों में कृषि में ऐसे कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं आए, जिससे कम पानी से बड़े स्तर पर फसलों की बिजाई शुरू हुई हो या पानी की बचत के लिए किसी तकनीक को इजाद किया हो। घरेलू पानी का भारी स्तर पर दुप्रयोग हो रहा है। जहां तक संवैधानिक व्यवस्था व कानून क्षेत्र का जिक्र है जल स्त्रोतों के प्रयोग संबंधी कोई ठोस कानून न होने के कारण यह मामला इतना पेचीदा हो गया है। पंजाब जहां रायपेरियन सिद्धांतों का तर्क देता है वहीं हरियाणा पंजाब का अंग रहा होने के कारण पंजाब के प्राकृतिक स्त्रोतों में अपने हिस्से का दावा करता है। फिर भी दोनों सरकारों को राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर वैज्ञानिक व देश हित की भावना से मामले के समाधान के लिए पहल करनी चाहिए। वैज्ञानिक विचारधारा से ही हर समस्या का समाधान संभव है। यदि दोनों पक्ष सकारात्मक रवैये से आगे बढ़ें, तब समस्या की कठोरता काफी हद तक घट सकती है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>विचार</category>
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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 09:04:06 +0530</pubDate>
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                <title>एसवाईएल पर पंजाब नहीं कर रहा अगली कार्रवाई, बिना चैनल वाला पानी जा रहा पाकिस्तान: खट्टर</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से हरियाणा छोटा राज्य लेकिन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उत्तर क्षेत्रीय परिषद् की 30वीं बैठक में सतलुज-यमुना लिंक नहर, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति, पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के हिस्से को बहाल करने और हरियाणा विधानसभा के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/punjab-is-not-taking-any-further-action-on-syl-khattar/article-35315"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/manohar-lal-khattar.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;"><strong>क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से हरियाणा छोटा राज्य लेकिन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ/अनिल कक्कड़ चंडीगढ़।</strong> हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उत्तर क्षेत्रीय परिषद् की 30वीं बैठक में सतलुज-यमुना लिंक नहर, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति, पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के हिस्से को बहाल करने और हरियाणा विधानसभा के लिए नए अतिरिक्त भवन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर क्षेत्रीय परिषद की 30वीं बैठक सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतर्राज्यीय तथा केन्द्र व राज्यों के बीच विभिन्न मुद्दों को समयबद्ध ढंग से सुलझाने में सहायक सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से हरियाणा देश का एक छोटा-सा राज्य है। परन्तु देश की अर्थव्यवस्था में इसका उल्लेखनीय योगदान है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य की प्रति व्यक्ति आय 2 लाख 74 हजार 635 रुपये है, जो देश के बड़े राज्यों में सर्वाधिक है। आर्थिक विकास दर के मानदंडों पर भी हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में है। उद्योगों को लॉजिस्टिक सुविधा देने में देश में दूसरे तथा उत्तर भारत में पहले स्थान पर है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एसवाईएल पर पंजाब आगे की कार्रवाई नहीं कर रहा</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि सतलुज-यमुना लिंक नहर के निर्माण कार्य को पूरा करना हरियाणा और पंजाब राज्यों के बीच अत्यंत पुराना और गंभीर मसला है। यह नहर न बनने के कारण रावी, सतलुज और ब्यास का अधिशेष, बिना चैनल वाला पानी पाकिस्तान में चला जाता है। हरियाणा को भारत सरकार के 24 मार्च, 1976 के आदेशानुसार रावी-ब्यास के सरप्लस पानी में भी 3.50 मिलियन एकड़ फुट हिस्सा आबंटित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि एसवाईएल मुद्दे को हल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ 18 अगस्त, 2020 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, पंजाब आगे कार्रवाई नहीं कर रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भाखड़ा मेन लाइन नहर से मिल रहा कम पानी</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा को भाखड़ा मेन लाइन नहर से भी लगभग 700-1000 क्यूसेक पानी कम मिल रहा है। इस संबंध में भागीदार राज्यों के प्रमुख अभियंताओं और बीबीएमबी के अधिकारियों की एक कमेटी ने भी यह पाया है कि बीएमएल के संपर्क बिंदु आरडी 390000 पर हरियाणा को पानी का कम वितरण किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में, सदस्य (सिंचाई) हरियाणा से नियुक्त हो</h3>
<p style="text-align:justify;">भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा राज्य से सदस्य (सिंचाई) का नामांकन पंजाब के सदस्य (विद्युत) की तर्ज पर पिछली परंपरा अनुसार ही जारी रखा जाए। यदि पिछले लगभग 56 वर्षों से चली आ रही प्रक्रियाओं में दखलअंदाजी होती है तो इससे विशेष रूप से सतलुज-ब्यास नदी जल बंटवारे के संदर्भ में हरियाणा के हित प्रभावित होंगे। यदि बीबीएमबी के पूर्णकालिक सदस्य सहभागी राज्यों से बाहर के होंगे, तो वे स्थानीय मुद्दों और समस्याओं को समझने में सक्षम नहीं होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अत:</strong> बोर्ड में सदस्य (सिंचाई) हरियाणा से और सदस्य (बिजली) पंजाब से नियुक्त करने के अतिरिक्त एक तीसरा सदस्य (कार्मिक) भी नियुक्त किया जा सकता है। यह तीसरा सदस्य राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से बारी-बारी से नियुक्त किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के हिस्से को बहाल करने की मांग</h3>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के हिस्से को बहाल किया जाए और चण्डीगढ़ के साथ लगते हरियाणा के कॉलेजों की सम्बद्धता भी इस विश्वविद्यालय से की जाए। पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा का हिस्सा पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत प्रदान किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 1 नवम्बर, 1973 को एक अधिसूचना जारी कर इसे समाप्त कर दिया गया था। इससे पहले हरियाणा के तत्कालीन अम्बाला जिले के कॉलेज इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध थे। अत: गृह मंत्री से अनुरोध है कि पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा राज्य के हिस्से को बहाल करने के लिए नियमों में संशोधन किया जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा में फसल अवशेष जलाने के मामलों में 73 प्रतिशत की कमी</h3>
<p style="text-align:justify;">मनोहर लाल ने कहा कि फसल अवशेष जलाने के मामले न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति के लिए भी हानिकारक हैं। इसलिए हमने ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के साथ-साथ किसानों को जागरुक भी किया है। इस सम्बन्ध में हमारे प्रयासों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने भी सराहा है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 से अब तक फसल अवशेष जलाने के मामलों में 73 प्रतिशत की कमी आई है। पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए हमने किसानों को डीकंपोजर कैप्सूल नि:शुल्क प्रदान किए हैं। अब तक 3 लाख 19 हजार 350 एकड़ को डीकंपोजर तकनीक से कवर किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हरियाणा राष्ट्रीय राजमार्ग-105 के शीघ्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध</h3>
<p style="text-align:justify;">मनोहर लाल ने कहा कि हम हरियाणा को हिमाचल प्रदेश से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-105 के शीघ्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस परियोजना की लंबाई 31.71 किलोमीटर है, जिसमें से 13.30 किलोमीटर हरियाणा में पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हम इस परियोजना को पूरा करने में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का पूरा सहयोग कर रहे हैं। इस परियोजना के लिए 18.6399 हैक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण जिला राजस्व अधिकारी, पंचकूला द्वारा किया जा चुका है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">हरियाणा को विधानसभा बनाने के लिए चंडीगढ़ में मिलेगी अतिरिक्त जमीन: शाह गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर क्षेत्रीय परिषद् की बैठक में हरियाणा को बड़ा तोहफा दिया है। शाह ने हरियाणा विधानसभा के लिए अतिरिक्त भवन बनाने को चंडीगढ़ में जमीन दिलाने की बात कही। उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा से जुड़े कई मुद्दे उठाए।</li>
</ul>
<p>मनोहर लाल ने उन मुद्दों को भी उठाया जिन पर पड़ोसी पंजाब के साथ विवाद चल रहा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गृह मंत्री से सतलुज यमुना लिंक नहर के मुद्दे को हल करने में भी भूमिका निभाने की मांग की। इस पर गृह मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों राज्यों की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने जब चंडीगढ़ में विधानसभा के लिए अतिरिक्त जमीन की मांग की। कहा कि जमीन की पहचान हरियाणा ने कर दी है। इस पर शाह ने कहा कि हरियाणा विधानसभा के लिए नया अतिरिक्त भवन बनाने के लिए चंडीगढ़ में जगह दी जाए।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Jul 2022 17:14:25 +0530</pubDate>
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                <title>हरियाणा के सीएम खट्टर ने एसवाईएल नहर के मुद्दे पर क्या कहा</title>
                                    <description><![CDATA[एसवाईएल नहर मुद्दे में केंद्र हस्तक्षेप करे चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्र सरकार से एसवाईएल, हांसी-बुटाना लिंक नहर के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि राज्य को अपने हिस्से का पानी मिल सके। खट्टर ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/what-did-haryana-cm-khattar-say-on-the-syl-canal-issue/article-21904"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/what-did-haryana-cm-khattar-say-on-the-syl-canal-issue.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>एसवाईएल नहर मुद्दे में केंद्र हस्तक्षेप करे</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)</strong>। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्र सरकार से एसवाईएल, हांसी-बुटाना लिंक नहर के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है ताकि राज्य को अपने हिस्से का पानी मिल सके। खट्टर ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की छठी संचालन परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुये यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पानी की उपलब्धगता हेतु किशाऊ बांध के लिए जल्द ही एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके अलावा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ लखवार और रेणूका बांधों के लिए समझौता किये जा चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जल संरक्षण एवं जल का उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कईं कदम उठाए हैं। प्रदेश का अधिकांश हिस्सा डार्क जोन में तबदील होता जा रहा है इसलिए केंद्र सरकार एसवाईएल, हांसी- बुटाना लिंक नहर के मुद्दे पर हस्तक्षेप कर इसे जल्द सुलझाए ताकि राज्य को अपने हिस्से का पानी मिल सके। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश में बड़े राज्यों में सर्वाधिक जीएसटी संग्रहण कर रहा है लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट के कारण उसे इसका मात्र 20 प्रतिशत ही मिल पाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अधिक जीएसटी संग्रहण करने वाले राज्यों के लिए प्रोत्साहन योजना बनाने का आग्रह किया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि प्रदेश में गरीब परिवारों के कल्याणार्थ महत्वकांक्षी ‘परिवार पहचान पत्र’ योजना शुरू की गई है जिसके तहत गरीब परिवारों को चिह्नित कर उनके विकास के लिए उन्हें सरकार की ओर से हरसम्भव मदद दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य अंत्योदय को आगे बढ़ाना है, ताकि पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंच सके।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार के उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने राज्य स्तर पर अनुपालन बोझ कम करने और ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस के लिए हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति 2020 शुरू की है। जिला स्तरीय कार्य योजना का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन और विभिन्न अधिनियमों के तहत लाइसेंसों के नवीनीकरण की आवश्यकता समाप्त कर अनुपालन बोझ कम किया गया है।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Feb 2021 18:41:48 +0530</pubDate>
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                <title>एसवाईएल को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रखा उपवास</title>
                                    <description><![CDATA[हिसार (एजेंसी)। सतलुज यमुला सम्पर्क(एसवाईएल) नहर के निर्माण को लेकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) नेताओं और कार्यकतार्ओं ने आज यहां रेड स्कवेयर मार्किट में एकत्रित होकर उपवास रखा। उपवास कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के हिसार जिलाध्यक्ष कैप्टन भूपेंद्र ने की। वहीं मंच संचालन जिला महामंत्री प्रवीण पोपली और धर्मवीर रतेरिया ने किया। इस अवसर पर विधायक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bjp-leaders-and-activists-fast-for-syl/article-20680"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/syl.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (एजेंसी)।</strong> सतलुज यमुला सम्पर्क(एसवाईएल) नहर के निर्माण को लेकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) नेताओं और कार्यकतार्ओं ने आज यहां रेड स्कवेयर मार्किट में एकत्रित होकर उपवास रखा। उपवास कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के हिसार जिलाध्यक्ष कैप्टन भूपेंद्र ने की। वहीं मंच संचालन जिला महामंत्री प्रवीण पोपली और धर्मवीर रतेरिया ने किया। इस अवसर पर विधायक डा. कमल गुप्ता, राज्यसभा सांसद डा. डीपी वत्स, हांसी के विधायक विनोद भ्याणा, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पूनिया, वरिष्ठ नेता श्रीनिवास गोयल, पूर्व विधायक वेद नारंग और कर्ण सिंह रानौलिया विशेष रूप से उपस्थित रहे।</p>
<h4><strong>पंजाब टर्मिनेशन आॅफ एग्रीमेंट एक्ट 2004 को असंवैधानिक करार देते हुए कर दिया है खारिज </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">उपवास को सम्बोधित करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एसवाईएल पर हरियाणा के पक्ष में फैसला दिया हुआ है और पंजाब सरकार को हरियाणा के हिस्से का पानी देने का आदेश दिया है। उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2004 में पंजाब विधानसभा में पारित पंजाब टर्मिनेशन आॅफ एग्रीमेंट एक्ट 2004 को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया है। इसके अलावा अदालत ने पंजाब सरकार द्वारा एसवाईएल के लिए अधिग्रहित की गई जमीन किसानों को वापिस लौटाने के फैसले को भी अमान्य घोषित कर दिया। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि 31 दिसम्बर 1981 के जल समझौते से पंजाब खुद का अलग नहीं कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जल बंटवारे पर अदालत ने वर्ष 2002 और 2004 में दिए गए फैसले को तत्काल लागू करने के भी आदेश दिये हैं। शीर्ष अदालत ने पंजाब को अपने हिस्से में एसवाईएल नहर का निर्माण जल्द से जल्द करने का आदेश दिया है। इसके बावजूद पंजाब हरियाणा को एसवाईएल नहर के माध्यम से उसके हिस्से का पानी नहीं दे रहा है जिससे राज्य को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यदि हरियाणा को एसवाईएल नहर का उसके हिस्से का पानी मिल जाए तो प्रदेश में पानी का संकट लगभग खत्म हो जाएगा।</p>
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                <pubDate>Sat, 19 Dec 2020 16:45:43 +0530</pubDate>
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