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                <title>Guru Gobind Singh - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>प्रधानमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह को किया नमन</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर उनका स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/prime-minister-pays-homage-to-guru-gobind-singh/article-21197"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/modi-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर उनका नमन किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को ट्वीट किया, ‘मैं गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के पवित्र अवसर पर उनका नमन करता हूं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन न्यायपूर्ण और समावेशी समाज बनाने के लिए समर्पित किया। वो अपने सिद्धांतो का पालन करने में अटूट थे। हम उनके साहस और बलिदान का भी स्मरण करते है। उन्होंने कहा, ‘श्री गुरु गोविंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के मेरी सरकार के कार्यकाल में स्थान लेने के कारण श्री गुरु साहिब की मुझ पर विशेष कृपा रही है। मैं इस अवसर पर पटना में हुए भव्य समारोह का स्मरण करता हूं,जहां मुझे जाने और सत्कार करने का अवसर प्राप्त हुआ। (PM Modi)</p>
<h4 style="text-align:justify;">शिवराज ने गुरु गोविंद सिंह का स्मरण किया प्रकाश पर्व पर | PM Modi</h4>
<p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर उनका स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया है। चौहान ने ट्वीट के जरिए गोविंद सिंह के वचनों का भी स्मरण करते हुए लिखा है ‘अगर आप केवल भविष्य के बारे में सोचते रहेंगे, तो वर्तमान भी खो देंगे।’ चौहान ने कहा कि धर्म और मानवता के सच्चे सेवक, सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर कोटिश: नमन। दीन-हीन और असमर्थों की सेवा और कल्याण ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। (PM Modi)</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सिखों के दसवें गुरु, खालसा पंथ के सृजनहार गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर सभी को लख-लख बधाई प्रेषित की है। उन्होंने ट्वीट के जरिए लिखा है कि गुरु गोबिंद सिंह ने धर्म व समाज की रक्षा की खातिर अपने पूरे परिवार का बलिदान दिया। उनका एकता, भाईचारे व मानवता का संदेश आज भी हमारे लिये प्रेरणादायी है। राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों और अन्य नेताओं ने भी गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व (जन्मोत्सव) पर उनका स्मरण करते सभी को बधाई दी हैं। (PM Modi)</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Jan 2021 12:20:57 +0530</pubDate>
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                <title>त्याग और वीरता की मूर्ति थे श्री गुुरु गोबिंद सिंह जी</title>
                                    <description><![CDATA[सिख संप्रदाय की स्थापना का उद्देश्य मुख्य रूप से हिन्दुओं की रक्षा करना था। इस संप्रदाय ने भारत को कई अहम मौकों पर मुगलों और अंग्रेजों से बचाया है। सिखों के दस गुरु माने गए हैं, जिनमें से आखिरी गुरु थे गुरु गोबिंद सिंह। खालसा पंथ के संस्थापक दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/shri-guru-gobind-singh-ji-was-the-idol-of-sacrifice-and-valor/article-20738"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-12/guru-gobind-singh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सिख संप्रदाय की स्थापना का उद्देश्य मुख्य रूप से हिन्दुओं की रक्षा करना था। इस संप्रदाय ने भारत को कई अहम मौकों पर मुगलों और अंग्रेजों से बचाया है। सिखों के दस गुरु माने गए हैं, जिनमें से आखिरी गुरु थे गुरु गोबिंद सिंह। खालसा पंथ के संस्थापक दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को एक महान स्वतंत्रता सेनानी और कवि माना जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी को त्याग और वीरता की मूर्ति भी माना जाता है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहादुरी थी। उनके लिए यह शब्द इस्तेमाल किए जाते हैं ‘सवा लाख से एक लड़ाऊँ, तभै गांबिद सिंह नाम कहांऊ’ उनके अनुसार शक्ति और वीरता के संदर्भ में उनका एक सिख सवा लाख लोगों के बराबर है।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें गुरू हैं। इनका जन्म पौष सुदी 7वीं सन् 1666 को पटना में माता गुजरी जी तथा पिता श्री गुरु तेगबहादुर जी के घर हुआ। उस समय गुरु तेगबहादुर जी बंगाल में थे। उन्हीं के वचनानुसार बालक का नाम गोविंद राय रखा गया और सन 1699 को बैसाखी वाले दिन गुरुजी पंज प्यारों से अमृत छक कर गोविंद राय से गुरु गोविंद सिंह जी बन गए। इनका बचपन बिहार के पटना में ही बीताद्ध जब 1675 में श्री गुरु तेगबहादुर जी दिल्ली में हिंन्दु धर्म की रक्षा के लिए शहीद हुए तब गुरु गोबिंद सिंह जी गुरु गद्दी पर विराजमान हुए। गुरु गोबिंद सिंह जी ने ही 1699 ई. में खालसा पंथ की स्थापना की।</p>
<p style="text-align:justify;">खालसा यानि खालिस (शुद्ध) जो मन, वचन एवं कर्म से शुद्ध हो और समाज के प्रति समर्पण का भाव रखता हो। पांच प्यारे बनाकर उन्हें गुरु का दर्जा देकर स्वयं उनके शिष्य बन जाते हैं और कहते हैं-जहां पाँच सिख इकट्ठे होंगे, वहीं मैं निवास करूंगा। उन्होंने सभी जातियों के भेद-भाव को समाप्त करके समानता स्थापित की और उनमें आत्म-सम्मान की भावना भी पैदा की। गोबिंद सिंह जी ने एक नया नारा दिया था। वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह। दमदमा साहिब में आपने अपनी याद शक्ति और ब्रह्मबल से श्री गुरुग्रंथ साहिब का उच्चारण किया और लिखारी (लेखक) भाई मनी सिंह जी ने गुरुबाणी को लिखा।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Dec 2020 09:47:38 +0530</pubDate>
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