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                <title>सोच को बदलें देश बदल जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[अभी जुम्मा-जुम्मा वंदे भारत रेल का शुभमुहुर्त हुआ है, लेकिन देश के कुछ लोगों ने उस पर भी पत्थर मारने शुरु कर दिए हैं पिछले दशकों में भारतीय रेलवे में बहुत विकास हुआ है। हर सरकार ने अपने वक्त में रेलवे में नया जोड़ा है। अभी ‘वंदे भारत’ रेल की शुरूआत से देश में तेज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">अभी जुम्मा-जुम्मा वंदे भारत रेल का शुभमुहुर्त हुआ है, लेकिन देश के कुछ लोगों ने उस पर भी पत्थर मारने शुरु कर दिए हैं पिछले दशकों में भारतीय रेलवे में बहुत विकास हुआ है। हर सरकार ने अपने वक्त में रेलवे में नया जोड़ा है। अभी ‘वंदे भारत’ रेल की शुरूआत से देश में तेज गति एवं अत्याधुनिक कोच व सेवाएं रेलवे में शुरू हो गई, जो कि देशवासियों की बहुत समय से मांग थी। देश का रेलवे ढांचा काफी चुस्त-दुरुस्त व सुरक्षित हुआ है। भारतीय रेलवे दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे तंत्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन रेलवे के साथ एक त्रासदी भी जुड़ी है वह यह कि भारतीय लोग इसके साथ बहुत बुरा सुलूक करते हैं। सरकार के साथ लोगों का छोटा-बड़ा जो भी झगड़ा हो सबसे पहले रेलवे को शिकार बनाया जाता है। तोड़-फोड़ यातायात में बाधा लोगों के लिए आम बात है परंतु रेलवे को इसका बहुत नुक्सान उठाना पड़ता है। जो कि किसी न किसी रूप में देशवासियों का अपना ही नुक्सान है। हर देशवासी भले वह ग्रामीण है या शहरी, पढ़ा है या अनपढ़ वह टिकट खरीदकर रेलवे से विश्वस्तरीय सुविधाओं की मांग करता है, लेकिन यात्रा के बाद रेलवे के तौलिए, टायलेट के मग, चदरें, आईने, बल्ब चोरी कर ले जाता है, ऐसा क्यों? लोग पहले रेलवे को नुक्सान पहुंचाते हैं फिर मजाक उड़ाते है, आखिर यह मजाक है किसका स्वयं देशवासियों का ही तो मजाक बनता है। यहां ‘वंदे भारत’ को बनाया, चलाया देश ने हैं, अत: देश इसको सुरक्षित भी रखे अच्छा भी रखे।</p>
<p style="text-align:justify;">पढ़ने वालों को मेरी बात भले रेलवे की अपील लगे लेकिन यह एक देशवासी का देश की सम्पति को लेकर फिक्र है, जो कि सबके हिस्से आना चाहिए। देशवासियों की गैर जिम्मेदाराना हरकतों का भ्रष्ट लोग भरपूर लाभ उठाते हैं, वह अपने कामों की गलतियों को भी देशवासियों पर थोप देते हैं, वहीं वह वास्तविक नुक्सान को बढ़ा-चढ़ा कर देश व रेलवे दोनों का धन भी ऐठते हैं। कितना अच्छा हो यदि देशवासी सरकारी सेवाओं का अपनी निजी सम्पति की तरह फिक्र करें और उनका भरपूर सद्पयोग करें।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अस्पताल, बस सेवा, सड़कें, फुटपाथ, पार्क, स्ट्रीट लाईटें, ऐसी अनेकों सेवाएं हैं, जिन्हें पब्लिक बेमतलब तोड़ती रहती है, जबकि यह सारी सेवाएं व सम्पति देश की पीढ़ियों को संवार सकती हैं। यह कितना दुखद है कि देश का शिक्षित, समझदार युवा, प्रौढ़, महिला-पुरुष विदेशों में काम करके उन्हें अच्छा बताता है जबकि खुद के घर को कूड़ा-कबाड़ा रखता है, तोड़-फोड़ करता है फिर बुरा बताता है। फर्क सिर्फ सोच का है देश वही हैं लोग वही है जो विदेशों को स्वर्ग बना रहे है और अपना घर वह बेहाल करके खुश होते हैं।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Feb 2019 11:38:20 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>इमरान के साथ कितना बदल पाएगा पाकिस्तान!</title>
                                    <description><![CDATA[क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले चुके हैं। मीडिया के मार्फत आ रही खबरों के अनुसार पाकिस्तान भारत से मधुर व बेहतर रिशते चाहता है। लेकिन आजादी के बाद अब तक जिस तरह पाकिस्तान ने शरारती पड़ोसी की भूमिका निभाई है उससे यह नहीं कहा जा सकता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/pakistan-will-be-able-to-change-with-imran/article-5494"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/artical-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले चुके हैं। मीडिया के मार्फत आ रही खबरों के अनुसार पाकिस्तान भारत से मधुर व बेहतर रिशते चाहता है। लेकिन आजादी के बाद अब तक जिस तरह पाकिस्तान ने शरारती पड़ोसी की भूमिका निभाई है उससे यह नहीं कहा जा सकता कि इमरान खान के नेतृत्व के बाद पाकिस्तान की नीति और नीयत में कोई फर्क आएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं पाकिस्तान की लगातार तीसरी लोकतांत्रिक सरकार सेना की दखल के बीच सुशासन स्थापित कर पाएगी, यह एक बहुत बड़ा सवाल है। पिछली दो सरकारें सेना के दखल के कारण तलवार की धार पर चलते हुए अपना शासन किसी तरह कायम रख पाई थीं और अंत में सेना की बलि चढ़ गईं। वहीं इमरान के सेना से सहज संबंधों के मद्देनजर लगता है कि इनकी सरकार को सेना से तारतम्य बिठाने के लिये जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी। इमरान सरकार के आगाज से लगता है कि नई सरकार के एजेंडे में भारत से रिश्ता चौथी वरीयता पर रहेगा। पहली वरीयता पर अंतर्कलह निपटाकर सुशासन स्थापित करना, दूसरी वरीयता अफगानिस्तान से रिश्ते, तीसरी वरीयता चीन और रूस से संबंधों की प्रगाढ़ता और चौथी वरीयता पर भारत से संबंध इस्लामाबाद की कूटनीति का रुख दिखा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे तो इमरान खान ने भारत से फिर से वातार्लाप से समस्याएं सुलझाने में रुचि जाहिर की है। परंतु मोदी सरकार चुनावी वर्ष में कश्मीर और आतंकवाद से अलग हटकर किसी वार्ता के लिए तैयार होगी, कहना मुश्किल है। इन सब विवादों के बीच भारतीय पंजाब अपने अलग हुए हिस्से से पारंपरिक व्यापार को, जो कि 1965 के युद्ध के बाद बंद हो गया था, पुनर्जीवित करने में ज्यादा उत्सुक है। वैसे तो मोदी सरकार ने व्यापारी वर्ग के लिए नई-नई योजनाएं और नए-नए क्षेत्र खोले हैं, लेकिन पंजाब के अपने उस सीमा पार हिस्से से संबंधों को पुनर्जीवित करने का स्वप्न अभी साकार होता नहीं दिख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की उपस्थिति रिश्तों को सुधारने की तरफ संकेत हो सकती थी, लेकिन उनकी यात्रा पंजाब में सत्तारूढ़ कैप्टन अमरेंद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के बीच ही राजनीतिक बवंडर उठा गई। पिछली बार इस तरह की उम्मीद तब जगी थी जब बादल और शहबाज शरीफ ने इस व्यापार के मुद्दे पर एक संयुक्त वक्तव्य दिया था। वैसे इस्लामाबाद और नई दिल्ली, दोनों को अपने कूटनीतिक रिश्तों में एक नई समझ और विवादों से परे क्षेत्रीय व्यापार की उन्नति पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर नई पारी खेलने उतरे पूर्व क्रिकेटर इमरान खान आॅक्सफोर्ड विवि से शिक्षित हैं। आधुनिक सोच उनकी पहिचान रही है तथा एक कट्टर इस्लामी देश में रहने के बाद भी वे उन मूलभूत मुद्दों पर बात करते रहे हैं जो विकास एवं जनहित से जुड़े हों। बीते दो दशक से वे बतौर राजनीतिक नेता सत्ता में आने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। उन्होंने नेशनल असेम्बली में संख्याबल जुटाकर दिखाने के बाद बाकायदा पदभार ग्रहण भी कर लिया। उसके बाद प्रसारित अपने संदेश में इमरान ने पाकिस्तान को आर्थिक बदहाली से उबारने तथा आतंकवाद पर लगाम लगाने जैसी बातें कहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">बलूचिस्तान में मचे विद्रोह की चर्चा भी उन्होंने की। देश में फैली बेरोजगारी को लेकर भी इमरान ने अपनी चिंता व्यक्त की लेकिन सबसे बड़ी बात उन्होंने ये कही कि यदि मुल्क ने अपनी दिशा और तौर-तरीके नहीं बदले तो उसकी बरबादी तय है। चुनाव प्रचार के दौरान भी इमरान ने विकास को प्रमुख मुद्दा बनाकर देश की राजनीति को नया रूप देने की कोशिश की थी। उल्लेखनीय है इमरान ने क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद अपनी मां की स्मृति में एक अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल बनवाकर सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश किया तथा अपनी छवि एक जनसेवक के तौर पर स्थापित भी की। हालांकि अपनी शादियों तथा रोमांस के किस्सों के चलते वे प्लेबॉय के तौर पर भी प्रसिद्ध हुए। कठमुल्लों की जमात ने तो उन्हें तवज्जो नहीं दी लेकिन आखिरकार इमरान सत्ता तक पहुंच ही गए जिसमें पाकिस्तान के उन युवा मतदाताओं की बड़ी भूमिका मानी जा रही है जो देश की बदहाली से ऊबकर बदलाव चाहते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">कहने को तो नवाज शरीफ और भुट्टो परिवार के लोग भी इमरान की तरह से ही विदेशों में पढ़े तथा आधुनिक खयालों के हैं किन्तु लंबे समय से मुल्क की सत्ता इन्हीं दो परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही। इसलिए लोगों में ये धारणा मजबूत हो गई कि पाकिस्तान की दुरावस्था के लिए शरीफ और भुट्टो परिवार ही जिम्मेदार हैं। लेकिन एक बात पूरे चुनाव और उसके बाद स्पष्ट रूप से देखने मिली कि सेना ने इमरान की ताजपोशी के लिए पूरा इन्तजाम किया। नवाज शरीफ की गिरफ्तारी से उनकी पार्टी कमजोर पड़ चुकी थी वहीं बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल को पाकिस्तानी अवाम ने अपरिपक्व मानकर किनारे कर दिया। ले-देकर इमरान ही बतौर विकल्प बच रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">सेना को भी ये लगा कि राजनीति के घाघ खिलाडियों की बजाय इमरान पर हाथ रखना उसके लिए कहीं ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। जहां तक बात भारत के साथ रिश्तों की है तो इमरान ने पहले वक्तव्य में बातचीत से मसला सुलझाने की इच्छा तो जाहिर की लेकिन उनकी शपथ विधि में गये पंजाब के मंत्री तथा पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्दू को पाक अधिकृत कश्मीर के राष्ट्रपति के बगल में बिठाकर उसी धूर्तता और कुटिलता का परिचय दे दिया जो पाकिस्तान की नीति और नीयत का पर्याय है। जिस इस्लामी कट्टरपन की दुहाई पाकिस्तान के हुक्मरान तथा आतंकवादी नेता देते आए हैं उसकी वजह से पूरा अरब जगत आग के मुहाने पर खड़ा हुआ है। सीरिया तबाह हो चुका है वहीं ईराक अब तक उबर नहीं सका है।</p>
<p style="text-align:justify;">यद्यपि फौज उन्हें विकास और आधुनिकता के सपने साकार करने से रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी तथा चीन भी पाकिस्तान की मजबूरियों का लाभ उठाने से बाज नहीं आयेगा किंतु यही वक्त है जब इमरान इस उपमहाद्वीप में एक नई सोच वाले नेता के रूप में उभरकर पाकिस्तान की छवि और भविष्य दोनों सुधार सकते हैं। एक बात और भी महत्वपूर्ण है कि जो जनता आतंकवादी संगठनों के उम्मीदवारों को थोक के भाव हरा सकती है वह जरूरत पड़ने पर सेना के दबाव से भी सत्ता को मुक्त करने आगे आ सकती है। चुनाव के दौरान पाकिस्तानी समाचार माध्यमों में भारत में चल रहे विकास के एजेंडे की खूब चर्चा हुई। आतंकवाद के कारण देश की छवि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खराब होना भी मुद्दा बना।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां तक कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से तुलना करते हुए वहां के नेताओं को निकम्मा तक ठहराया गया लेकिन इमरान के पास पूर्ण बहुमत नहीं होने के कारण वे मजबूत की बजाय मजबूर प्रधानमंत्री हो सकते हैं। भारत के साथ सीमा पर तनाव बनाए रखते हुए पाकिस्तानी सत्ताधीश अपनी जनता का भावनात्मक शोषण करते आए हैं। कश्मीर में आतंकवाद को प्रश्रय देकर आतंकवादी संगठनों को खुश करने की कोशिश भी होती रही है लेकिन इसके कारण मुल्क के अंदरूनी हालात बुरी तरह से खराब होते गए। बलूचिस्तान के लोग विद्रोह पर उतारू हैं। देर सबेर पृथक सिंध की दबी हुई चिंगारी भी भड़क सकती है। सबसे बड़ी बात अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को पहले सरीखी खैरात न दिया जाना है। जिसकी वजह से उसकी माली हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये सब देखते हुए इमरान खान के सामने चुनौतियों के पहाड़ खड़े हुए हैं। पूर्ण बहुमत मिलने पर वे शायद बहुत कुछ कर सकते थे किन्तु एक लंगड़ी सरकार का नेतृत्व तथा सत्ता संचालन में अनुभवहीनता के चलते उनमें वह पैनापन नहीं रहेगा जो क्रिकेट खेलते समय बतौर तेज गेंदबाज उनकी गेंदों में रहा करता था। बहरहाल भारत को इमरान की इस नई भूमिका पर सतत निगाह रखनी पड़ेगी क्योंकि अपनी निजी जिंदगी में चलते रहे अस्थायित्व की तरह सत्ता-सुंदरी के साथ उनका गठबंधन कितना स्थायी रहेगा ये कहना मुश्किल है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजेश माहेश्वरी</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Aug 2018 09:43:30 +0530</pubDate>
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                <title>25 से हरियाणा में बदलेगा मौसम का मिजाज</title>
                                    <description><![CDATA[दो से तीन दिन में बिहार पहुंच जाएगा मानसून हरियाणा/चंडीगढ़। करीब 10 दिन से मानसून पर लगा हुआ ब्रेक अब दो से तीन दिन में हट सकता है। क्योंकि अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं आना शुरू हो रही हैं जिसके चलते मानसून का आगमन हो सकता है। अरब सागर में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/weather-will-change-to-haryana-25/article-4425"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/mansoon-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1>दो से तीन दिन में बिहार पहुंच जाएगा मानसून</h1>
<p><strong>हरियाणा/चंडीगढ़।</strong></p>
<p>करीब 10 दिन से मानसून पर लगा हुआ ब्रेक अब दो से तीन दिन में हट सकता है। क्योंकि अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं आना शुरू हो रही हैं जिसके चलते मानसून का आगमन हो सकता है। अरब सागर में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है, ठीक ऐसे ही बंगाल की खाड़ी में भी साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है। इससे नमी वाली हवाएं मैदानों की ओर आएंगी।</p>
<p>ऐसे में बादल बनेंगे और बरसात हो सकती है। 25 जून के बाद हरियाणा में मौसम अचानक बदल सकता है। इससे प्रदेश के कुछ इलाकों में बरसात हो सकती है। यह प्री मानसून की बरसात होगी। जबकि मानसून को हरियाणा तक पहुंचने में अभी देरी है। यह जुलाई के प्रथम सप्ताह में ही हरियाणा में दस्तक दे सकता है।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 12:24:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>हार्दिक पटेल का दावा, अगले दस दिन में गुजरात में बदल जाएगा मुख्यमंत्री</title>
                                    <description><![CDATA[राजकोट/गांधीनगर (एजेंसी)। पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल ने वीरवार को दावा किया कि गुजरात में अगले दस दिन में मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा। सोशल मीडिया में पिछले कुछ दिनों से वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को हटाये जाने की अटकलों के बीच हार्दिक ने यहां पत्रकारों बातचीत में दावा किया कि भाजपा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/chief-minister-will-change-gujarat/article-4168"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/hardik.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजकोट/गांधीनगर (एजेंसी)।</strong> पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल ने वीरवार को दावा किया कि गुजरात में अगले दस दिन में मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा। सोशल मीडिया में पिछले कुछ दिनों से वर्तमान मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को हटाये जाने की अटकलों के बीच हार्दिक ने यहां पत्रकारों बातचीत में दावा किया कि भाजपा श्री रूपाणी को हटा कर किसी पटेल अथवा क्षत्रिय नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। उन्होंने तो यह भी दावा किया कि रूपाणी ने कल हुई कैबिनेट की बैठक में अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसे पार्टी आलाकमान जल्द ही मंजूर कर लेगा। कांग्रेस पार्टी के समर्थक हार्दिक ने कहा कि भाजपा में पिछले काफी समय से नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट जारी थी। उधर, आज उत्तर गुजरात के साबरकांठा जिले में एक कार्यक्रम में भाग लेने गये श्री रूपाणी ने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर इन मामलों से अपनी अनभिज्ञता जताई। वीरवार को ही नई दिल्ली रवाना हुए उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल, जिन्हे सोशल मीडिया की अटकलों में श्री रूपाणी का एक मजबूत संभावित उत्तराधिकारी बताया गया है, ने भी इन बातों को अफवाह बता कर खारिज कर दिया। हालांकि ऐसी अटकलों के बीच अचानक श्री पटेल की दिल्ली यात्रा को लेकर भी यहां राजनीतिक हलकों में चर्चा का बाजार गर्म है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 20:16:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>नाजिया ने 10 साल के संघर्ष से बदला 100 साल का इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[रांची (एजेंसी)। 32 साल की नाजिया इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल हाल ही में उन्होंने रांची में अंजुमन इस्लामिया के चुनाव में महिला सदस्य के तौर पर वोट दिया है। अंजुमन के सौ सालों के इतिहास में यह पहली दफा हुआ है। दरअसल अब तक किसी भी महिला को अंजुमन का सदस्य नहीं बनाया गया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nazia-fight-change-one-century-record/article-3731"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/nazia-change-100-year-records.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>रांची (एजेंसी)। </strong>32 साल की नाजिया इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल हाल ही में उन्होंने रांची में अंजुमन इस्लामिया के चुनाव में महिला सदस्य के तौर पर वोट दिया है। अंजुमन के सौ सालों के इतिहास में यह पहली दफा हुआ है। दरअसल अब तक किसी भी महिला को अंजुमन का सदस्य नहीं बनाया गया था। इस अधिकार को पाने के लिए नाजिÞया ने पूरे दस सालों की लड़ाई लड़ी। मुसलमानों के बीच सामाजिक, शैक्षणिक तरक्की, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के साथ गरीबों-मजलूमों की मदद के लिए अंजुमन काम करता रहा है। झारखंड में सुन्नी वक़्फ बोर्ड अंजुमन इस्लामिया के कामकाज पर नजर रखता है। वैसे ये कोई पहली बार नहीं है जब नाजिया ने जुझारूपन दिखाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉलेज के दिनों में छात्र नेता के तौर पर रांची विश्वविद्यालय में किसी मुस्लिम छात्रा के पहली बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। नाजिया कहती हैं कि मुस्लिम महिलाओं में भी हुनर और प्रतिभाएं हैं। घर-परिवार और समाज का थोड़ा साथ मिल जाए, तो वे भी तेजी के साथ अगली कतार में शामिल होती दिखेंगी। “साल 2008 में मैंने अंजुमन की सदस्यता के लिए आवेदन दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया। मुझे बताया गया कि अंजुमन में कोई महिला सदस्य नहीं बन सकती।” इसके बाद महिला आयोग में उन्होंने दरख्वास्त डाला। आयोग ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बाद भी बात नहीं बनी। तब वो राज्य अल्पसंख्यक आयोग पहुंचीं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 May 2018 12:29:25 +0530</pubDate>
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                <title>बदलाव की मांग कर रहा कृषि संकट</title>
                                    <description><![CDATA[आज देश में अनाज का भंडार इतना बढ़ गया कि संभल ही नहीं रहा है। कैग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2016 तक 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का अनाज बर्बाद हो गया। हर साल लगभग 100 करोड़ से ज्यादा का अनाज खराब हुआ। अनाज की बहुतायत उपलब्धि बनने की बजाए समस्या बनती […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/seeking-of-agricultural-crisis-change/article-2933"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/farmers-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज देश में अनाज का भंडार इतना बढ़ गया कि संभल ही नहीं रहा है। कैग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2016 तक 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का अनाज बर्बाद हो गया। हर साल लगभग 100 करोड़ से ज्यादा का अनाज खराब हुआ। अनाज की बहुतायत उपलब्धि बनने की बजाए समस्या बनती जा रही है। किसान अनाज के अंबार लगाकर भी खुदकुशियां कर रहा है। अनाज के अधिक उत्पादन के बावजूद किसान की जेब खाली की खाली और कर्जदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में सरकार, विशेषज्ञ और किसान तीनों को विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है। बहुतयात की कभी भी पूछ नहीं होती। अपने पेशे को बदल पाना मुश्किल व जोखिम भरा निर्णय है, लेकिन इसके बिना गुजारा भी नहीं। जब अनाज की पूछ नहीं तो किसान की इज्जत कैसे होगी? किसान को ऐसी परिस्थितियां बनानी होंगी कि सरकार व निजी कंपनियां उनके साथ फसलों की बिजाई संबंधी लिखित करार करें। फिलहाल किसान को अच्छी कीमत के लिए खरीददार को ताकना पड़ता है। कपड़े की दुकान पर मूल्य दुकानदार ही बताता है और ग्राहक को खरीदना होता है। ग्राहक अपनी मर्जी का मूल्य नहीं देता। किसान के लिए ऐसा नहीं। यह तभी संभव होगा यदि उत्पादन सीमित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर लाखों टन अनाज खराब हो जाने के बावजूद कभी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। कारण यही है कि देश में अनाज की कमी नहीं। यदि अनाज खराब होने से भुखमरी का संकट पैदा होगा तो कार्रवाई का स्तर भी बदल जाएगा।किसान नई फसलों की तरफ ध्यान दें और अपनी फसल का पूरा मूल्य प्राप्त करें। किसानों को आत्म चिंतन करने की भी जरूरत है। जब उत्पादन कम था, तब किसान खुशहाल था। उत्पादन बढ़ा तो किसान परेशान हो गया। किसान का संकट पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का नहीं, बल्कि उपभोक्ता संस्कृति की भी देन है। पश्चिम से चली दिखावे की रुचि ने सभी बड़े-छोटों को सोच के राजा-महाराजा बना दिया। यह तो पैसों की कमी है, अन्यथा सोच यही बन गई है कि हर कोई लड़के-लड़की का विवाह करने के लिए करोड़ों खर्चने के लिए तैयार है। इससे किसान भी नहीं बच सका।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के एक ही राज्य में यदि हर साल 100 करोड़ से ज्यादा का अनाज मिट्टी में मिल जाए तो किसान खुशहाल कैसे होंगे? आखिर इतने बड़े स्तर पर फसल खेतों में पैदा होकर मंडी में पहुंचती है उसकी अदायगी भी होती है फिर भी किसान कर्ज में डूबा है। कर्ज केवल कृषि में घाटे का नहीं बल्कि अन्य कारणों का भी है। सरकारें हर बार यह कह देती हैं कि सारा कर्ज नहीं केवल कृषि के लिए लिया कर्ज माफ करेंगे। यह मामला किसी एक पक्ष की बयानबाजी से हल होने वाला नहीं बल्कि सभी पक्षों द्वारा किसान पूरी ईमानदारी, सच्चाई और वचनबद्धता से हल करने की जरूरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/seeking-of-agricultural-crisis-change/article-2933</link>
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                <pubDate>Sun, 06 Aug 2017 05:05:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत उतनी प्रगति नहीं कर पाया जितनी उसे करनी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने यहां 2015 बैच के आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिन देशों ने भारत के बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/need-of-adventure-for-pursue-the-change-modi/article-1910"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/modi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत उतनी प्रगति नहीं कर पाया जितनी उसे करनी चाहिए थी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने यहां 2015 बैच के आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिन देशों ने भारत के बाद आजादी प्राप्त की तथा जिनके सामने संसाधनों की कमी थी, उन्होंने विकास के मामले में नई उंचाइयों को छुआ है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">परिवर्तन के लिए गतिशील बदलाव की आवश्यकता</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने दावा किया कि बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए साहस की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने युवा प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि उन्हें उस सोच से बचना चाहिए जो बदलाव का विरोध करती है। उन्हें भारत की प्रशासनिक प्रणाली को नए भारत की उर्जा से भर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में परिवर्तन के लिए गतिशील बदलाव की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे सहायक सचिवों के रूप में अपने कार्यकाल की अगले तीन माह की अवधि के दौरान केन्द्र सरकार के वरिष्ठतम अधिकारियों के साथ निस्संकोच होकर बातचीत करें ताकि व्यवस्था को उनकी उर्जा एवं नए विचारों तथा सचिव स्तर के अधिकारियों के प्रशासनिक अनुभव के मेल का लाभ मिल सके। प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे यूपीएससी परिणामों के दिन तक अपने जीवन, उनके द्वारा झेली गई चुनौतियों और अब उनके समक्ष पेश अवसरों पर विचार करें ताकि वे व्यवस्था और आम आदमी के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jul 2017 07:21:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>16 जून से हर दिन बदलेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम</title>
                                    <description><![CDATA[ पेट्रोलियम मंत्री ने दिए कंपनियों को आदेश नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सरकारी तेल कंपनियां 16 जून से हर दिन बदलाव करेंगी। इससे पहले कंपनियों ने इस योजना को 1 मई से देश के पांच शहरों में पायलट प्रॉजेक्ट के रूप में शुरू किया था। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक सरकारी तेल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;"> पेट्रोलियम मंत्री ने दिए कंपनियों को आदेश</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सरकारी तेल कंपनियां 16 जून से हर दिन बदलाव करेंगी। इससे पहले कंपनियों ने इस योजना को 1 मई से देश के पांच शहरों में पायलट प्रॉजेक्ट के रूप में शुरू किया था। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियां अब अपने पेट्रोल पंपों पर कीमतें हर 15 दिन की जगह रोजाना बदलने की तैयारी कर रही हैं। पेट्रोलिय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ बैठक के बाद तेल कंपनियों ने यह फैसला लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में उन्होंने इन कंपनियों से जल्द से जल्द पूरे देश में कीमतों की नई व्यवस्था लागू करने के लिए कहा था। इससे पूर्व इस योजना को बीते माह पांच शहरों पुडुचेरी, विशाखापत्तनम, उदयपुर, जमशेदपुर और चंडीगढ़ में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर लागू किया गया था। सामान्यत: पूरे देश में मौजूदा समय में तेल कंपनियां डीजल और पेट्रोल की कीमतों की समीक्षा हर 15 दिन में करती हैं। इन कीमतों की समीक्षा अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड आॅइल की कीमतों के आधार पर की जाती है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/petrol-and-diesel-prices-will-change-every-day-from-june-16/article-1011</link>
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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2017 05:42:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान में बदलाव की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष राहील शरीफ ने अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद सेवामुक्ति ले ली है। दरअसल पाकिस्तान में लोकतंत्रीय राजनैतिक प्रणाली के बावजूद सेना सरकार पर हावी रहती आई है और बार-बार सैनिक हुकूमत बनती रही। पाकिस्तान के इतिहास में ऐसी कुछेक घटनाएं ही हैं जब किसी जनरल ने अपने पद के साथ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/requires-a-change-in-pakistan/article-360"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/genral-bawa.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष राहील शरीफ ने अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद सेवामुक्ति ले ली है। दरअसल पाकिस्तान में लोकतंत्रीय राजनैतिक प्रणाली के बावजूद सेना सरकार पर हावी रहती आई है और बार-बार सैनिक हुकूमत बनती रही। पाकिस्तान के इतिहास में ऐसी कुछेक घटनाएं ही हैं जब किसी जनरल ने अपने पद के साथ अनावश्यक लगाव न रखा हो। जनरल जिया-उल हक और परवेज मुशर्रफ जैसे जनरलों ने तो सेना की कमान क्या संभाली कि सरकार का तख्ता ही पलट दिया। जनरल अयूब खान पाकिस्तान के पहले सैन्य कमांडर थे, जिन्होंने सत्ता पे कब्जा किया। इसी तरह याहिया खान भी सैन्य हुकूमत का एक और बदनुमा दाग थे। जनरल से शासक बने तानाशाहों ने संविधान को बुरी तरह से तोड़ा-मरोड़ा। ये तानाशाह अपनी मर्जी से अपना कार्यकाल बढ़ाते रहे। दरअसल भारत के साथ पाकिस्तान के तनाव व टकराव की वजह पाकिस्तान की राजनैतिक व्यवस्था की कमजोरियां हैं। लोकतंत्र के बावजूद इस देश में सेना जिस तरह अपना दबदबा बनाती रही है, उससे स्पष्ट है कि सरकार सेना की रहमदिली पर ही निर्भर करती है। पाकिस्तान की आजादी के बाद 70 सालों के समय में लगभग 35 सालों का समय सैनिक राज में ही गुजर गया। पाकिस्तान में लोकतंत्रीय सरकारों के तख्तापलट की शुरूआत सन् 1958 में मेजर जनरल सिकन्दर-मिर्जा ने प्रधानमंत्री फिरोजखान की सरकार का तख्तापलट कर की थी, जब सेना के कमांडर-इन-चीफ ने अपने-आपको शासक बना दिया। इसके बाद आर्मी स्टाफ जनरल जिया-उल-हक और सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट की कार्रवाई को अंजाम दिया। इसके अलावा भी तख्तापलट की कोशिशें हुई। पाकिस्तान के राजनैतिक इतिहास से यह बात स्पष्ट है कि सेना लोकतंत्रीय सरकार पर हावी रही है, जबकि सरकारों ने उचित तरीके से लोकतंत्र व संविधान के अनुसार देश को चलाने की कोशिशें की। बार-बार के तनाव के बाद इस्लामाबाद प्रशासन ने भले ही अंतरराष्ट्रीय दबाव में हर बार भारत से बेहतर संबंध बनाने शुरू किए, लेकिन सेना को यह बात कभी रास नहीं आई। नवाज शरीफ व राहील शरीफ के संबंध भी सुखदायी नहीं रहे। परवेज से लेकर राहील शरीफ तक ये जनरल प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को धमकाते रहे। जब तक पाक सेना का सरकार पर दबदबा रहेगा, तब तक पाक सरकार से किसी समझौते व अमन की उम्मीद कम ही है। पाकिस्तान के शासन-प्रशासन में बुनियादी परिवर्तन आवश्यक हैं, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं हो सका कि राजनीतिज्ञों ने भारत विरोधी नीति त्याग दी हो, बल्कि पाकिस्तानी राजनैतिक पार्टियां सत्ता में बनी रहने के लिए कश्मीर का राग अलाप कर कट्टरपंथी लोगों व सेना को संतुष्ट करने का हर संभव प्रयास करती रही हैं। फिर भी यदि राहील शरीफ द्वारा चुपचाप अपना पद त्याग देने से पाक में सेना का दबाव घटा है, तो भारत-पाक संबंधों में माहौल बदलने के आसार बन सकते हैं। फिलहाल सरहद पर सख्ती से जवाब दिया जाना ही अमन पसंद भारत के पास एकमात्र रास्ता है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Dec 2016 01:28:26 +0530</pubDate>
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                <title>बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत-जापान संबंध</title>
                                    <description><![CDATA[याद होगा दिसंबर, 2015 में जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे भारत की यात्रा पर आए थे तो कहा था कि दोनों देशों के रिश्तों की कलियां फूलों में बदल गयी हैं। अब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की यात्रा कर संबंधों को सुगंधियों से भर दिया है। दोनों देशों के बीच नौ द्विपक्षीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-japan-relations-in-the-changing-global-landscape/article-341"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/abu-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">याद होगा दिसंबर, 2015 में जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे भारत की यात्रा पर आए थे तो कहा था कि दोनों देशों के रिश्तों की कलियां फूलों में बदल गयी हैं। अब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की यात्रा कर संबंधों को सुगंधियों से भर दिया है। दोनों देशों के बीच नौ द्विपक्षीय सहयोग संधियों समेत उस असैन्य परमाणु समझौते पर भी मुहर लगी है, जिसका भारत को वर्षों से इंतजार था। असैन्य परमाणु समझौता इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है कि भारत ऐसा पहला देश है जिसने अभी तक एनपीटी (परमाणु हथियार अप्रसार संधि) पर हस्ताक्षर नहीं किया है, के बावजूद भी जापान ने उससे एटमी करार को आकार दिया है। गौरतलब है कि जापान अभी तक इस निर्णय पर कायम था कि जब तक भारत परमाणु हथियार अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करेगा तब तक उसके साथ एटमी करार नहीं होगा। इधर, भारत भी इस संधि पर हस्ताक्षर के लिए तैयार नहीं था। कारण, भारत की नजर में यह संधि भेदभावपूर्ण है। यहां जानना आवश्यक है कि जब 1998 में भारत ने पोखरण परमाणु परीक्षण को अंजाम दिया तब भारत पर आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंध थोपने वाले देशों में जापान भी शामिल था। लेकिन मोदी की कूटनीतिक करामात का नतीजा है कि जापान अपने रुख में परिवर्तन लाया। जापान के समर्थन के बाद अब भारत का पक्ष मजबूत होगा और उम्मीद है कि चीन भी विरोध के केंचुल से बाहर निकलने को मजबूर होगा। गौरतलब है कि चीन एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध कर रहा है। जापान से असैन्य परमाणु संधि होने के बाद अब भारत को भी परमाणु परीक्षणों पर एकतरफा रोक का वादा, जो उसने 2008 में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से किया है उसे निभाना होगा। असैन्य परमाणु संधि के अलावा दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष, पर्यावरण एवं कृषि क्षेत्र में भी सहयोग के कई अहम समझौते हुए हैं जिससे भारत में जापानी निवेश बढ़ेगा और रेलवे एवं परिवहन क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा। दो समझौते अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी हुए हैं जिनमें एक समझौता इसरो और जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा के बीच हुआ है जिससे आउटर स्पेस में सैटलाइट नेविगेशन एवं खगोलीय खोज में मदद मिलेगी। मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया को धार देने के लिए भी दोनों देशों ने हाथ मिलाए हैं। याद होगा जापानी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान मारुति सुजुकी द्वारा विनिर्मित कारों के आयात के एलान के साथ ही 83 हजार करोड़ रुपए का मेक इन इंडिया कोष स्थापित करने का फैसला किया जा चुका है। अब भारत-जापान के बीच असैन्य परमाणु करार होने से दक्षिणी चीन सागर में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप पर लगाम लगेगा और संभवत: इसी बौखलाहट में वह भारत को चेतावनी दे रहा है। लेकिन सच तो यह है कि चीन हतोत्साहित है और अब उस पर अपनी हद में रहने का दबाव बढ़ गया है। कहना गलत नहीं होगा कि भारत और जापान के साथ आने से भारत की पूर्वोंन्मुख नीति को नई धार मिली है। यह सच्चाई भी है कि भारत और जापान दोनों हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और चीन सागर में चीन की बढ़ती दादागिरी से परेशान हैं। एक कहावत है कि शत्रु का शत्रु मित्र होता है। अगर ऐसे में भारत और जापान के बीच निकटता बढ़ती है तो यह स्वाभाविक ही है। वैसे भी गौर करें तो भारत और जापान का 1400 साल पुराना संबंध है। कारोबारी लिहाज से संपूर्ण दक्षिण एशिया में जापान सबसे बड़ा दाता और भारत सर्वाधिक जापानी आधिकारिक विकास सहायता यानी ओडीए प्रा΄त करने वाला देश है। वह भारत को 1986 से ही अनुदान देता आ रहा है। जापानी ओडीए भारत के त्वरित आर्थिक विकास प्रयत्नों विशेषकर उर्जा, पारगमन, पर्यावरण और मानवीय जरुरतों से जुड़ी परियोजनाओं को सहायता प्रदान करता है। भारत की सभी मेट्रो रेल परियोजनाएं भी जापानी आधिकारिक विकास सहायता की ही घटक हैं। जापान भारत के दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा में भी भागीदार है। यह गलियारा 90 अरब डॉलर की एक वृहत आधिकारिक संरचना परियोजना है जो जापान के वित्तीय और तकनीकी सहयोग से फलीभूत हो रहा है। गौरतलब है कि दिसंबर 2006 में इस परियोजना के एमओयू पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किया। 2011 में इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु मंत्रिमंडल ने दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा विकास निगम ने 18500 करोड़ रुपए की मंजूरी प्रदान की। इस पर काम तेजी से हो रहा है। गौरतलब है कि समर्पित मालभाड़ा गलियारा यानी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी जापान द्वारा वित्तपोषित है। यह गलियारा भारतीय रेलवे की एक महत्वकांक्षी परियोजना है जो देश के दो सबसे व्यस्त मार्गों पश्चिमी गलियारा व पूर्वी गलियारा की परिवहन आवश्यकताओं को अगले 20 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। दिसंबर 2009 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस गलियारे के निर्माण पर अपनी प्रतिबद्घता जताई है।<br />
इस परियोजना में पश्चिमी गलियारा के निर्माण हेतु जापान ने ‘आर्थिक भागीदारी की विशेष शर्तांे’ के तहत ओडीए कर्ज के द्वारा इनके वित्त पोषण को स्वीकार किया। आज की तारीख में भारत में दाइची सांक्यों, हिताची, सुजुकी, पैनासोनिक, यामाहा मोटर, मात्सुशिता जैसी सैकड़ों कंपनियां हैं जो भारत के विकास में सहायक बनी हुई हैं। गौर करना होगा कि जापान अपनी विदेशनीति का पुनर्निरुपण कर रहा है। वह भारत के साथ अपने हित मूल्य और रणनीति का साम्य देख रहा है ताकि वह एशिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। भारत के साथ असैन्य परमाणु करार को इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। <em>अरविंद जयतिलक</em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Nov 2016 22:44:47 +0530</pubDate>
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                <title>धूम्रपान का एक आैर हानिकारक परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[– नहीं छोड़ेंगे स्मोकिंग तो बदल सकता है आपका डीएनए नई दिल्ली: धूम्रपान सेहत के लिए खतरनाक है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन हाल ही में प्रकाशित किए गए अध्ययन में इसको लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वो बेहद चौंकाने वाली है। दरअसल, धूम्रपान से कैंसर होता है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/health/smoking-cigarettes-may-change-your-dna-permanently/article-276"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/smoking.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>– नहीं छोड़ेंगे स्मोकिंग तो बदल सकता है आपका डीएनए</strong></p>
<p><span class="city"><b>नई दिल्ली: </b></span>धूम्रपान सेहत के लिए खतरनाक है, यह तो सभी जानते हैं लेकिन हाल ही में प्रकाशित किए गए अध्ययन में इसको लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वो बेहद चौंकाने वाली है।<br />
दरअसल, धूम्रपान से कैंसर होता है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन अब शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि धूम्रपान का असर शरीर के उन हिस्सों में भी होता है, जहां धुंआ सीधा नहीं पहुंचता। यानि शोधकर्ताओं को संकेत मिले हैं कि बीड़ी-सिगरेट का धुंआ मानव के डीएनए पर हमला बोलता है। एक छपे लेख के मुताबिक, ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट सांगर इंस्टीट्यूट और अमेरिका के लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेट्री के शोधकर्ताओं ने पांच हजार ट्यूमर्स का अध्ययन किया। अध्ययन में धूम्रपान करने वाले लोगों के ट्यूमर की तुलना उन लोगों के ट्यूमर से की गई, जिन्होंने कभी भी धूम्रपान नहीं किया था।</p>
<div style="text-align:justify;"> शोधकर्ताओं ने पाया कि धूम्रपान करने वालों के डीएनए में कुछ ऐसे निशान थे, जो दूसरों में नहीं थे। वैसे इस अध्ययन से पहले यह पता चला चुका था कि धुंआ शरीर के अंदर की कोशिकाओं से छेड़छाड़ करता है, लेकिन अब पता चला है कि इसका असर अप्रत्यक्ष तौर पर भी होता है और यह डीएनए में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। एजेंसी</div>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2016 12:49:52 +0530</pubDate>
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